क्या यह संभव है कि कुछ मानसिक विकारों को अनजाने में छोड़ दिया जाए?...


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Pratishtha Trivedi

Clinical Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जैसे मैंने कहा कि डिप्रेशन है अभी डिप्रेशन का एक लक्षण होता है उदास रहना लेकिन अक्सर जब लोगों को सूचना पर ज्यादा बढ़ जाता है या बढ़ जाता है कि लोग उसको बीमारी की तरह नहीं लेते उदासीन की तरह नहीं लेते हैं लेकिन डिप्रेशन में अक्सर उदास ना होकर चिड़चिड़ापन भी बढ़ जाता है कि लोगों को लगता है कि यह इंसान जो है बच्चे जुड़े हो गए हमसे बात करने का कोई फायदा नहीं है तो वह अंडा एक दोस्त है जाता है जो इनको डिप्रेशन है या इनवाइटी है या फिर कुछ लोग बात मतलब अकेले में रहने लगते हैं और कोई उनसे बात करें तो वह मना कर देते तो भी ठीक है अगर कुछ परेशानी होगी तो मैं खुद आकर बता देंगे तो इस तरह

jaise maine kaha ki depression hai abhi depression ka ek lakshan hota hai udaas rehna lekin aksar jab logo ko soochna par zyada badh jata hai ya badh jata hai ki log usko bimari ki tarah nahi lete udasin ki tarah nahi lete hain lekin depression mein aksar udaas na hokar chidchidapan bhi badh jata hai ki logo ko lagta hai ki yah insaan jo hai bacche jude ho gaye humse baat karne ka koi fayda nahi hai toh vaah anda ek dost hai jata hai jo inko depression hai ya inavaiti hai ya phir kuch log baat matlab akele mein rehne lagte hain aur koi unse baat kare toh vaah mana kar dete toh bhi theek hai agar kuch pareshani hogi toh main khud aakar bata denge toh is tarah

जैसे मैंने कहा कि डिप्रेशन है अभी डिप्रेशन का एक लक्षण होता है उदास रहना लेकिन अक्सर जब लो

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Loveleena Singh

Rehabilitation Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अब टाइम चीजें बदलने लग जाती है अभी मैं आपको रिटर्न एग्जाम प्रिडिक्शन का ही देती हूं पहले लोग एडिक्शन को अभी इंडिया बहुत दूर है हम लोग अभी बहुत ग्रास रूट लेवल पर ही हैं एडिक्शन के मामले में अभी भी आप कहीं बाहर गांव में या अर्बन एरियाज नहीं आ जाओ हम पढ़े लिखे लोग हैं हम कुमारी लक्ष्मी के रूप में देखने की एक पिटाई की कुटी में चालू करके गिरधारी नहीं खाना चाहता कोई एडिट पूछो कि क्या बोलेगा मैं उसका शरीर का साथ वीडियो

ab time cheezen badalne lag jaati hai abhi main aapko return exam prediction ka hi deti hoon pehle log addiction ko abhi india bahut dur hai hum log abhi bahut grass root level par hi hain addiction ke mamle mein abhi bhi aap kahin bahar gaon mein ya urban areas nahi aa jao hum padhe likhe log hain hum kumari laxmi ke roop mein dekhne ki ek pitai ki kuti mein chaalu karke girdhari nahi khana chahta koi edit pucho ki kya bolega main uska sharir ka saath video

अब टाइम चीजें बदलने लग जाती है अभी मैं आपको रिटर्न एग्जाम प्रिडिक्शन का ही देती हूं पहले ल

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Dr. Mrignayani Agarwal

Clinical Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए अगर वह किसी मेंटल चलती स्टेशन के पास जाएगा तो उसका टाइम ऑफिस गोगा ही होगा वही है कि अगर परिवार वालों में आसपास के लोगों में जागरूकता हेतु मानसिक विकार जो है वो टाइम आउट हो गई होगा मगर नहीं है तो वह हटाया जाता है और काफी समय बाद बाद में पता चलता है कि मारी थी और इसका इलाज पूरी तरह संभव था जागरूकता के ऊपर टीवी चलती है आजकल तो शारीरिक बीमारियों का ही देखा जाता है किया जाता है साथिया वीडियो जानकारी नहीं मिल पाती घर वालों की कभी कभी

dekhiye agar vaah kisi mental chalti station ke paas jaega toh uska time office goga hi hoga wahi hai ki agar parivar walon mein aaspass ke logo mein jagrukta hetu mansik vikar jo hai vo time out ho gayi hoga magar nahi hai toh vaah hataya jata hai aur kaafi samay baad baad mein pata chalta hai ki mari thi aur iska ilaj puri tarah sambhav tha jagrukta ke upar TV chalti hai aajkal toh sharirik bimariyon ka hi dekha jata hai kiya jata hai sathiya video jaankari nahi mil pati ghar walon ki kabhi kabhi

देखिए अगर वह किसी मेंटल चलती स्टेशन के पास जाएगा तो उसका टाइम ऑफिस गोगा ही होगा वही है कि

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Ms. Sonu Pandey

Rehabilitation Personnel

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह जो जितनी भी एक मानसिक बीमारियां होती है इनका जो मेन कारण होता है हमारे बॉडी के हार्मोन इंबैलेंसस की वजह से होता है अगर हम किसी भी बीमारी को किसी भी तरह की मानसिक बीमारी कोई बैलेंस है और वह बैलेंस नहीं हो रहा है तो बैलेंस ना होने की वजह से और बिगड़ सकता है तो इसलिए हमें बिल्कुल ऐसे ही नहीं छोड़ देना चाहिए उसके काम करते रहना चाहिए कोशिश करते रहना चाहिए कभी-कभी तो एक ट्रीटमेंट का इलाज तो लंबा हो तो दूर हो सकता है पर एक बैलेंस की पोजीशन में एक समय के बाद पूरे चांस होते क्यों आएगा मतलब कंट्रोल हो सकता है वह

yah jo jitni bhi ek mansik bimariyan hoti hai inka jo main karan hota hai hamare body ke hormone imbailensas ki wajah se hota hai agar hum kisi bhi bimari ko kisi bhi tarah ki mansik bimari koi balance hai aur vaah balance nahi ho raha hai toh balance na hone ki wajah se aur bigad sakta hai toh isliye hamein bilkul aise hi nahi chod dena chahiye uske kaam karte rehna chahiye koshish karte rehna chahiye kabhi kabhi toh ek treatment ka ilaj toh lamba ho toh dur ho sakta hai par ek balance ki position mein ek samay ke baad poore chance hote kyon aayega matlab control ho sakta hai vaah

यह जो जितनी भी एक मानसिक बीमारियां होती है इनका जो मेन कारण होता है हमारे बॉडी के हार्मोन

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Shovana Ray

Project Scientist, Wildlife Institute of India

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Dr. Sanjeev Tripathi

Clinical Psychologist

0:46
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आज आतंकी बीमारी अनजाने में छोड़ दी जाती लोगों को मानसिक बीमारी के रूप में कैसे करते हैं लोगों को कभी भी नहीं आता बापू तनाव के बीच में या तो मुंह संस्कृत में 8वीं के रिजल्ट के रूप में ईयर के रूप में उदय शंकर

aaj aatanki bimari anjane mein chhod di jati logo ko mansik bimari ke roop mein kaise karte hain logo ko kabhi bhi nahi aata bapu tanaav ke beech mein ya toh mooh sanskrit mein vi ke result ke roop mein year ke roop mein uday shankar

आज आतंकी बीमारी अनजाने में छोड़ दी जाती लोगों को मानसिक बीमारी के रूप में कैसे करते हैं लो

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Ayushi Madaan

Clinical Psychologist

2:42
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कई बार होता है लोग सोचते हैं कि जैसे छोटे बच्चों में और एबीएसटी से मैंने बताया attention-deficit हाइपरदेस्मो यह कई बार लक्षण होते हैं वह बहुत ज्यादा टीवी जैसे कोई मोटर लगी है किसी के अंदर और विश्वास होना बहुत जल्दी ध्यान भटक जाना बैठने में दिक्कत होना एग्जाम कैंसिल चेक करना समान छोड़ देना गुस्सा आने पर समाप्त होना और और चिल्लाना अपने साथ कि हम उनके बच्चों के साथ लड़ाइयां करना जल्दी और अपने मां-बाप को उल्टा जवाब देना झूठ बोल रहा हूं गुस्सा करना है कि सब ठीक है बहुत आजकल ज्यादा ए डी एच डी में होती हो लेकिन लोग सोचते हैं बहुत समय तक कई बार यह सोचते रहते बच्चा शैतान है हम कई बार सोचते हैं वह बोलते हैं आता कि हमें तो लगा था बच्चा नॉटी है बच्चा शैतान हैं यह शैतानियां तो सब करते हैं सब बच्चों में होता बुटीक के नहीं देख पाते सब बच्चों में होता है कि वह सामान तोड़ते हैं लेकिन वह यह भूल जाते हैं कि नॉर्मल और एडमिन में एक तितली की रेखा का फरक है जो चीज जरूरत दादा को वह गलत है अगर तुम शैतान हैं तो अगर वह जरूरत से ज्यादा शैतान है तब चिंता का विषय है लेकिन लोग अक्सर उसको भी नॉर्मल शैतानी समझकर अन डायग्नोस्टिक छोड़ देते हैं क्योंकि वह ट्रीटमेंट के लिए कि नहीं आते हो हमारे पास बहुत ऐसे बच्चे आते हैं जो तब आते हैं जब उनकी पढ़ाई बहुत ज्यादा डिस्टर्ब हो जाएगा वह सेवंथ क्लास में आ गए हैं फिर भी पेन हो रहे हैं क्योंकि उनको यही लगता रहता है कि बसपा तो उसे शैतान है उसको हमको जरूरत नहीं है तो पेरेंट्स लापरवाही करते हैं तो अंडा इग्नोर कैसे रह जाते हो डिप्रेशन में भी कई बार और अंडा इग्नोर करते रहते हैं क्योंकि लोग सोचते हैं कि बस थोड़ा अकेलापन है या मेरे को काम पर भी नहीं जा रहे थे पैसे में आकर तब भी लोग कई बार अंडर-19 छोड़ देते हैं कि अगर हम डॉक्टर के पास जाएंगे तो लोग क्या कहेंगे तो यह जो एक डोर एंड लोगों में एक चीज को लेकर अपने मानसिक रोग को लेकर इस दर्द से कि कहीं वह थप्पा ना पड़ जाए कि मैं पागल हूं या फिर इस वजह से कि वह कई बार सोचते हैं कि यह कॉमेंट है याद कर हर किसी में मन उदास है तो वह डिप्रेशन से उसको कंप्लीट करना शुरू कर देते हैं कि डिप्रेशन का मतलब खाली मन उदास होना होता है कि डिप्रेशन में ऐसे बहुत सारे लक्षण है जो हमारे पास कर दिया होता है जिसके अकॉर्डिंग भीगी टाइम यूज़ किया जाता है कि मैं डिप्रेशन है या नहीं है

kai baar hota hai log sochte hain ki jaise chote baccho mein aur ABST se maine bataya attention deficit haiparadesmo yah kai baar lakshan hote hain vaah bahut zyada TV jaise koi motor lagi hai kisi ke andar aur vishwas hona bahut jaldi dhyan bhatak jana baithne mein dikkat hona exam cancel check karna saman chod dena gussa aane par samapt hona aur aur chillana apne saath ki hum unke baccho ke saath ladaiyan karna jaldi aur apne maa baap ko ulta jawab dena jhuth bol raha hoon gussa karna hai ki sab theek hai bahut aajkal zyada a d h d mein hoti ho lekin log sochte hain bahut samay tak kai baar yah sochte rehte baccha shaitaan hai hum kai baar sochte hain vaah bolte hain aata ki hamein toh laga tha baccha naughty hai baccha shaitaan hain yah shaitaniyan toh sab karte hain sab baccho mein hota Boutique ke nahi dekh paate sab baccho mein hota hai ki vaah saamaan todte hain lekin vaah yah bhool jaate hain ki normal aur admin mein ek titli ki rekha ka farak hai jo cheez zarurat dada ko vaah galat hai agar tum shaitaan hain toh agar vaah zarurat se zyada shaitaan hai tab chinta ka vishay hai lekin log aksar usko bhi normal shaitani samajhkar an dayagnostik chod dete hain kyonki vaah treatment ke liye ki nahi aate ho hamare paas bahut aise bacche aate hain jo tab aate hain jab unki padhai bahut zyada disturb ho jaega vaah sevanth class mein aa gaye hain phir bhi pen ho rahe hain kyonki unko yahi lagta rehta hai ki BSP toh use shaitaan hai usko hamko zarurat nahi hai toh parents laparwahi karte hain toh anda ignore kaise reh jaate ho depression mein bhi kai baar aur anda ignore karte rehte hain kyonki log sochte hain ki bus thoda akelapan hai ya mere ko kaam par bhi nahi ja rahe the paise mein aakar tab bhi log kai baar under 19 chod dete hain ki agar hum doctor ke paas jaenge toh log kya kahenge toh yah jo ek door and logo mein ek cheez ko lekar apne mansik rog ko lekar is dard se ki kahin vaah thappa na pad jaaye ki main Pagal hoon ya phir is wajah se ki vaah kai baar sochte hain ki yah comment hai yaad kar har kisi mein man udaas hai toh vaah depression se usko complete karna shuru kar dete hain ki depression ka matlab khaali man udaas hona hota hai ki depression mein aise bahut saare lakshan hai jo hamare paas kar diya hota hai jiske according bheegi time use kiya jata hai ki main depression hai ya nahi hai

कई बार होता है लोग सोचते हैं कि जैसे छोटे बच्चों में और एबीएसटी से मैंने बताया attention-d

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है क्या यह संभव है कि कुछ मानसिक विकारों को अनजाने में छोड़ दिया जाए छोड़ सकते हैं कोई दिक्कत नहीं लेकिन जो मानसिक विकार है आपको भी पता होता है कि आपने यह मानसिक विकार आया है आप एक्सेप्ट नहीं करते हो जब आप खुद एक्सेप्ट करोगे और उसके बाद छोड़ने का प्रयत्न करोगे तो जरूर छोड़ेगा और जब छोड़ने का प्रयत्न आप नहीं कर रहे हो तो वह मानसिक विकास और भी ज्यादा बढ़ता है मतलब जब भी आपके मन में लगता है कि आपको यह मानसिक विकार छोड़ना है कैसे छोड़ो सब किसी साइकोलॉजिस्ट के पास जाए वह जरूर आपकी मदद करेगी और स्टेप बाय स्टेप जैसे वह बोलते हैं वैसे उनसे मिलिए और मानसिक विद्यालय मानसिक विकार जो थे वह सुनाइए और जरूर छोटे लेकिन साथ ही साथ में आपका सहयोग होना भी जरूरी है तब जाकर मानसिक विकार छूटेगा आपका दिन शुभ हो धन्यवाद गुड नाइट टेक केयर बाय

aapka prashna hai kya yah sambhav hai ki kuch mansik vikaron ko anjaane mein chod diya jaaye chod sakte hain koi dikkat nahi lekin jo mansik vikar hai aapko bhi pata hota hai ki aapne yah mansik vikar aaya hai aap except nahi karte ho jab aap khud except karoge aur uske baad chodne ka prayatn karoge toh zaroor chodega aur jab chodne ka prayatn aap nahi kar rahe ho toh vaah mansik vikas aur bhi zyada badhta hai matlab jab bhi aapke man mein lagta hai ki aapko yah mansik vikar chhodna hai kaise chodo sab kisi psychologist ke paas jaaye vaah zaroor aapki madad karegi aur step bye step jaise vaah bolte hain waise unse miliye aur mansik vidyalaya mansik vikar jo the vaah sunaiye aur zaroor chote lekin saath hi saath mein aapka sahyog hona bhi zaroori hai tab jaakar mansik vikar chhootega aapka din shubha ho dhanyavad good night take care bye

आपका प्रश्न है क्या यह संभव है कि कुछ मानसिक विकारों को अनजाने में छोड़ दिया जाए छोड़ सकते

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Deepinder Sekhon

Mental Health Care

1:02
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अवेयरनेस नहीं होती तो जिसे हम देख लो सी जाती है ना आप उसको कोई भी चीज का ब्लेम कर सकते हो और एग्जाम फिर ना पूछो तो सही बताती हूं आप जैसे मैं स्कूल में चाहती हूं हमारी बीवी रिशु थे एफर्ट कल स्कूल में बच्चे नर्सरी नहीं प्रकृति के पोस्ट किए थे इतना ज्यादा बच्चा ऑप्शन 58 ईयर का कहना नहीं मान रहा था ऑफिस कलेक्शन के लिए नहीं दे रही थी तो उसको एक दैवीय मतलब उस बच्चे को एक टांग दे दिया कि यह बच्चा तो यह भी ठीक नहीं है पेरेंट्स पर ध्यान नहीं रखते और इस को स्कूल से निकालो तो वह जब हमें बुलाया गया तो फिर डायग्नोसिस होकर निकला कि इसको ऑटिज्म है फिर हमने स्कूल की काउंसलिंग की टीचर की काउंसलिंग की सबसे पहले तो हमने पेरेंट्स को किया कि आप इतने करवा कर रहा है क्या आप उर्दू प्रॉब्लम आएगी आएगी

awareness nahi hoti toh jise hum dekh lo si jaati hai na aap usko koi bhi cheez ka blame kar sakte ho aur exam phir na pucho toh sahi batati hoon aap jaise main school mein chahti hoon hamari biwi rishu the effort kal school mein bacche nursery nahi prakriti ke post kiye the itna zyada baccha option 58 year ka kehna nahi maan raha tha office collection ke liye nahi de rahi thi toh usko ek daiviye matlab us bacche ko ek taang de diya ki yah baccha toh yah bhi theek nahi hai parents par dhyan nahi rakhte aur is ko school se nikalo toh vaah jab hamein bulaya gaya toh phir diagnosis hokar nikala ki isko autism hai phir humne school ki kaunsaling ki teacher ki kaunsaling ki sabse pehle toh humne parents ko kiya ki aap itne karva kar raha hai kya aap urdu problem aayegi aaegi

अवेयरनेस नहीं होती तो जिसे हम देख लो सी जाती है ना आप उसको कोई भी चीज का ब्लेम कर सकते हो

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