अधिकांश लोगों के लिए अपने मानसिक विकार को स्वीकार करना कठिन क्यों है?...


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Aditya Dubey

Motivation Speaker/ Physiologist Expert

1:21
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मैं मोटिवेशन स्पीकर आदित्य दुबे का आप सभी को नमस्कार आपका कृष्ण है अधिकांश लोगों के लिए अपने मानसिक विकार को स्वीकारना कठिन क्यों है तो मैं आपको बताना चाहूंगा यह था इसलिए है क्योंकि लोग खुद को बदलना नहीं चाहते हैं वह व्यक्ति अपनी अंतरात्मा की बात चाह कर भी सुनना नहीं चाहता है यदि आप जानते हैं कि मैं जो काम कर रहा हूं वह गलत है लेकिन उसके बावजूद भी आप उस काम को करे जा रहे हैं यदि आप जानते हैं कि मेरी यह आदत नहीं नहीं है गलत है लेकिन फिर भी आप अपनी इस आदत को बदलना नहीं चाह रहा है तो इसका मतलब है आप खुद से भाग रहे हैं आप एक नकारात्मक सोच वाले व्यक्ति है जीवन की हर परिस्थिति का सामना सिर्फ वही व्यक्ति कर सकता है जो हर हाल में जलने का हुनर रखता है जो हर हाल में खुद की सोच को बदलने का हुनर रखता है एक बात ध्यान रखिए यदि आप खुद को बदल नहीं पा रहे हैं तो यह आपकी बहुत बड़ी कमजोरी है अपने मानसिक विकारों पर काबू रखना उन्हें बदलना एक योद्धा का काम होता है किसी आम इंसान का नहीं यदि आप अपने मानसिक विकारों को बदलने में सक्षम हो गए हैं तो आप कोई साधारण टर्न नहीं है

main motivation speaker aditya dubey ka aap sabhi ko namaskar aapka krishna hai adhikaansh logo ke liye apne mansik vikar ko swikarana kathin kyon hai toh main aapko batana chahunga yah tha isliye hai kyonki log khud ko badalna nahi chahte hain vaah vyakti apni antaraatma ki baat chah kar bhi sunana nahi chahta hai yadi aap jante hain ki main jo kaam kar raha hoon vaah galat hai lekin uske bawajud bhi aap us kaam ko kare ja rahe hain yadi aap jante hain ki meri yah aadat nahi nahi hai galat hai lekin phir bhi aap apni is aadat ko badalna nahi chah raha hai toh iska matlab hai aap khud se bhag rahe hain aap ek nakaratmak soch waale vyakti hai jeevan ki har paristhiti ka samana sirf wahi vyakti kar sakta hai jo har haal me jalne ka hunar rakhta hai jo har haal me khud ki soch ko badalne ka hunar rakhta hai ek baat dhyan rakhiye yadi aap khud ko badal nahi paa rahe hain toh yah aapki bahut badi kamzori hai apne mansik vikaron par kabu rakhna unhe badalna ek yodha ka kaam hota hai kisi aam insaan ka nahi yadi aap apne mansik vikaron ko badalne me saksham ho gaye hain toh aap koi sadhaaran turn nahi hai

मैं मोटिवेशन स्पीकर आदित्य दुबे का आप सभी को नमस्कार आपका कृष्ण है अधिकांश लोगों के लिए अप

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Dr.Sonia Kapur Psychologist

Clinical Psychologist

1:07
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अधिकांश लोगों के लिए अपने मानसिक विकार को स्वीकार करना इसलिए कठिन है क्योंकि वह इसको एक कमजोरी समझते हैं मानसिकता कोई कमजोरी समझ ना ही यह उनकी फूल है कोई कमजोरी नहीं है यह कई बार हमारे जैसे शरीर में कोई विकार आ जाता है इसी तरह दिमाग में भी कई बार कोई भी काम आ जाता है वजह कोई भी हो सकती हैं और यह परेशानी किसी को भी आ सकती हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता कि वह मानसिक तौर पर कमजोर है उसकी कमजोरी को उसको कमजोरी समझ ना ही सबसे बड़ा कारण है कि वह इस चीज को मानते नहीं है और अपना इलाज नहीं कराते अगर वह यह सोच कर कि यह सिर्फ एक छोटा सा विकार है कमजोरी नहीं तो वह अपने मानसिकता में आए हुए दुविधा को छत से स्वीकार कर लेंगे

adhikaansh logo ke liye apne mansik vikar ko sweekar karna isliye kathin hai kyonki vaah isko ek kamzori samajhte hain mansikta koi kamzori samajh na hi yah unki fool hai koi kamzori nahi hai yah kai baar hamare jaise sharir me koi vikar aa jata hai isi tarah dimag me bhi kai baar koi bhi kaam aa jata hai wajah koi bhi ho sakti hain aur yah pareshani kisi ko bhi aa sakti hain lekin iska matlab yah nahi hota ki vaah mansik taur par kamjor hai uski kamzori ko usko kamzori samajh na hi sabse bada karan hai ki vaah is cheez ko maante nahi hai aur apna ilaj nahi karate agar vaah yah soch kar ki yah sirf ek chota sa vikar hai kamzori nahi toh vaah apne mansikta me aaye hue duvidha ko chhat se sweekar kar lenge

अधिकांश लोगों के लिए अपने मानसिक विकार को स्वीकार करना इसलिए कठिन है क्योंकि वह इसको एक कम

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2:16
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अधिकांश लोगों के लिए अपने मानसिक विकार को स्वीकार करना कठिन है मानसिक विकार एक ऐसी चीज है कि इसे स्वीकार करना कठिन ही नहीं बहुत बहुत कठिन है क्योंकि हम अपने आपको बहुत ज्यादा ईगो में पालते हैं वो ज्यादा अहंकार में पालते हैं और हमारा वह अहंकार हमारी वही गो हमें कहीं थोड़ा नीचे नहीं आना देना चाहती हम यह स्वीकार्य नहीं करते कि हम बीमार खासतौर पर मन से बीमार हो तो हम जनरल भाषा में कह देते हैं ऐसे ही जैसे किसी को देखते हैं व्यवहार करते हो तुम पागल है वह पागल शब्द गुण के अंदर चोट करता है उनके अहंकार को चोट करता है तो वह होते हुए भी उसको स्वीकार नहीं कर पाते तो वह मेरा ही विचार है कि अगर कुछ को कोई रोग है उसको यह स्वीकार करना चाहिए स्वीकार करने से ही उसका इलाज होता है फिर भी जो चीज हेल्प करती है मैं कोशिश कर सकता हूं थोड़ी सी बताने की जो बहुत हेल्प करेगा ध्यान बहुत हेल्प करेगा वही मत देगा चीजों को एजइटइज जैसी है वैसी स्वीकार करने की अगर मुझे कोई रोग है जो काम है तो उसकी दवाई लेने डॉक्टर के पास जाता हूं इसी तरह से मुझे का कोई टांग में दर्द है तो उसकी पट्टी करवाने जाता हूं कोई जख्म है तो उसके लिए कुछ दवाइयों पर बम लगाने जाता हूं तो ऐसे ही मन का कोई भी कार्बन का भी कोई रोग होता है तो उसको अगर हम ठीक से हैंडल लॉक करें उसका ठीक से उपचार ना करें कि साइको साइकैटरिस्ट के पास जाकर या किसी योग वाले साधना केंद्र पर जाकर लेकिन ध्यान रखें किसी चक्कर में ना पड़े इसी भ्रम भ्रम में ना पड़े और ठीक हो जाता है थोड़ी प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास करें उसको ठीक होता है उसके लिए गर्म करना चाहे तो मेरा युटुब चैनल है रोशन योगा करके यूट्यूब मैं तो उस पर आप जाकर देखें ध्यान किसी भी है आसन प्राणायाम की है कुछ ब्रशिंग टेक्निक उस मास की कराई है जिससे कि किसी भी विकार में मानसिक विकार में आराम मिलता ही मिलता है धन्यवाद

adhikaansh logo ke liye apne mansik vikar ko sweekar karna kathin hai mansik vikar ek aisi cheez hai ki ise sweekar karna kathin hi nahi bahut bahut kathin hai kyonki hum apne aapko bahut zyada ego me palate hain vo zyada ahankar me palate hain aur hamara vaah ahankar hamari wahi go hamein kahin thoda niche nahi aana dena chahti hum yah svikarya nahi karte ki hum bimar khaasataur par man se bimar ho toh hum general bhasha me keh dete hain aise hi jaise kisi ko dekhte hain vyavhar karte ho tum Pagal hai vaah Pagal shabd gun ke andar chot karta hai unke ahankar ko chot karta hai toh vaah hote hue bhi usko sweekar nahi kar paate toh vaah mera hi vichar hai ki agar kuch ko koi rog hai usko yah sweekar karna chahiye sweekar karne se hi uska ilaj hota hai phir bhi jo cheez help karti hai main koshish kar sakta hoon thodi si batane ki jo bahut help karega dhyan bahut help karega wahi mat dega chijon ko ejaitaij jaisi hai vaisi sweekar karne ki agar mujhe koi rog hai jo kaam hai toh uski dawai lene doctor ke paas jata hoon isi tarah se mujhe ka koi taang me dard hai toh uski patti karwane jata hoon koi jakhm hai toh uske liye kuch dawaiyo par bomb lagane jata hoon toh aise hi man ka koi bhi carbon ka bhi koi rog hota hai toh usko agar hum theek se handle lock kare uska theek se upchaar na kare ki psycho saikaitrist ke paas jaakar ya kisi yog waale sadhna kendra par jaakar lekin dhyan rakhen kisi chakkar me na pade isi bharam bharam me na pade aur theek ho jata hai thodi pranayaam aur dhyan ka abhyas kare usko theek hota hai uske liye garam karna chahen toh mera yutub channel hai roshan yoga karke youtube main toh us par aap jaakar dekhen dhyan kisi bhi hai aasan pranayaam ki hai kuch brushing technique us mass ki karai hai jisse ki kisi bhi vikar me mansik vikar me aaram milta hi milta hai dhanyavad

अधिकांश लोगों के लिए अपने मानसिक विकार को स्वीकार करना कठिन है मानसिक विकार एक ऐसी चीज है

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B.K. Dr. Rohit Ahuja

Homeopathy Doctor

2:35
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बिग फ्री संगम विहार टो अंडरस्टैंड हम लोग करते हैं स्टेशन से बात करेंगे तुम्हें समझ में आएगा तो कहते हैं कि प्रॉब्लम हो तो मानते नहीं मानेंगे विक सोलफुल नहीं मानेगी तो उसको थोड़ा वह हमारे वाइब्रेशन पेशेंट को भी ध्यान रखना पड़ेगा क्योंकि वह पेशेंट के साथ सबसे ज्यादा यकीन करेगा डॉक्टर तो बाद में ही करेगा पेशेंट अटेंडेंट पेशेंट को हिट कर सकता है वह ट्रिक उसको बता देंगे तो वह पेशेंट को देना ही होगा कि हमें मेरे अंदर गलती है चित्र कंप्लीशन कोविलाइल नहीं करेंगे पेशेंट मारने वाले गेम पेशंट पेशंट पेशंट मानते ही नहीं कर रहा हूं ठीक है उड़ जाए जब मैं तो यह सोच रहा हूं गलत सोच रहा हूं वह करो ठीक है आप पेशेंट अटेंडेंट को थोड़ा सा वह उसको उसकी काउंसलिंग करेंगे भैया तुमको ऐसा भी ऐड करना है सुरेश रैना टुडे ओर टुमारो किस्से सुनाए देना पड़ेगा तुम इस तरीके से उसको भी ऐड करो तुम्हें इस तरीके से उसको इंट्रेंस करो और सोने का तो काम तो वही सकता तो फिर फिर वह मेरी दवा काम करेगी बहुत अच्छा और वैसे भी हमारे दवाई हैं बहुत सारे कि वह लाइक नहीं कर रहा है तो उसको रिलेशन के लिए कहना बहुत सारी दवाईयां इंटर लेवल पर बहुत सारी दवा किस काम देते हैं और काम करते हैं चाचा एंबेट्रॉनिक्सएक्स वाइब्रॉनिक उसने क्या बहुत सारी दवाईयां से आती जो पेशेंट को और लेवल पर काम करती सटल काम करती हम खुद रूपेश एंड्रे लाइव नहीं कर रहा है तो उसके लिए हमारे पास जो है 4 अपडेट है इसमें रेंस है जो दवा में काम करती है और लेट ब्यूटीफुल नेट है नेट चल है श्री प्लान है

big free sangam vihar toe understand hum log karte hain station se baat karenge tumhe samajh me aayega toh kehte hain ki problem ho toh maante nahi manenge weak soulful nahi manegi toh usko thoda vaah hamare vibration patient ko bhi dhyan rakhna padega kyonki vaah patient ke saath sabse zyada yakin karega doctor toh baad me hi karega patient attendant patient ko hit kar sakta hai vaah trick usko bata denge toh vaah patient ko dena hi hoga ki hamein mere andar galti hai chitra completion kovilail nahi karenge patient maarne waale game patient patient patient maante hi nahi kar raha hoon theek hai ud jaaye jab main toh yah soch raha hoon galat soch raha hoon vaah karo theek hai aap patient attendant ko thoda sa vaah usko uski kaunsaling karenge bhaiya tumko aisa bhi aid karna hai suresh raina today aur tomorrow kisse sunaye dena padega tum is tarike se usko bhi aid karo tumhe is tarike se usko interest karo aur sone ka toh kaam toh wahi sakta toh phir phir vaah meri dawa kaam karegi bahut accha aur waise bhi hamare dawai hain bahut saare ki vaah like nahi kar raha hai toh usko relation ke liye kehna bahut saari davaiyan inter level par bahut saari dawa kis kaam dete hain aur kaam karte hain chacha embetraniksaeks vaibranik usne kya bahut saari davaiyan se aati jo patient ko aur level par kaam karti sutele kaam karti hum khud rupesh endre live nahi kar raha hai toh uske liye hamare paas jo hai 4 update hai isme reigns hai jo dawa me kaam karti hai aur late beautiful net hai net chal hai shri plan hai

बिग फ्री संगम विहार टो अंडरस्टैंड हम लोग करते हैं स्टेशन से बात करेंगे तुम्हें समझ में आएग

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार मैं डॉक्टर राहुल कंसल एक मनोरोग विशेषज्ञ अपनी बैठक में कई बार ऐसे पेशेंट्स को देता हूं कि मैं अपनी मानसिक विकार क्या मेंटल प्रॉब्लम या डिफिकल्टी उसको असद करने से कार्य करने में मुश्किल होती है अधिकांश लोगों का भी खुश होना लाजमी है क्योंकि हमारी सोसाइटी में मेंटल प्रॉब्लम के प्रति बहुत बड़ी बुरी धारणाएं हैं और उसका एक्सेप्टेंस हमारी सोसाइटी में नहीं है किसी भी व्यक्ति को अपनी मेंटल प्रॉब्लम आ सर्च करने में परेशानी होती है कि यदि उसने यह चीज हासिल कर ली तो शायद उसे बेवकूफ या उसे पागल ही समझा जाएगा इस प्रकार की हमारी सोशल स्ट्रक्चर यह मानसिकता के कारण कोई भी व्यक्ति जल्दी से अपनी मानसिक विकार को स्वीकार नहीं कर पाते दूसरा कारण यह होता है कि जब कोई दूसरा व्यक्ति किसी व्यक्ति की मानसिक विकार को उसके सामने उजागर करता है तो उससे ऐसा लगता है कि यह उसके ऊपर एक प्रहार है कि वह दूसरा जो व्यक्ति है वह उसे नीचा दिखाना चाह रहा है लेकिन यदि हम किसी फ्रेंड को बहुत प्यार से बहुत सपोर्ट के साथ में उसके मानसिक विकार के बारे में शायद अगर अवगत कराएं और उसको छोटा दिखाने की कोशिश ना करें तो हो सकता है अगर वह आपका अच्छा फ्रेंड है अच्छा दोस्त है आपका अच्छा एक रिलेटिव है आपका ब्रदर है सिस्टर है तो वह आपको आपकी बात मान हो सकता है आपने मानसिक विकास पर को शिकार भी करें और उस पर उसको उसमें बदलाव लाने के लिए उसमें प्रयास करें तीसरा कारण लिखिए मेन यह है कि ज्यादातर लोग शिकार करना इसलिए भी नहीं चाहते क्योंकि उन्हें ऐसा लगता है कि यह जो मानसिक विकार है यह कभी बदल नहीं सकता यह उनकी पर्सनालिटी है लेकिन आज मैं उन सभी को यह बताना भी चाहता हूं कि मनुष्य की जो पर्सनैलिटी है वह भी समय के साथ वॉल पुट्टी है यह जरूर है कि कुछ टेंपरामेंटल परेड जो है मनुष्य के साथ आजीवन रहते हैं लेकिन कुछ कुछ पर्सनालिटी में बदलाव होता है कम होता है लेकिन होता जरूर है इसीलिए किसी भी मानसिक विकार को अपनी एक पर्सनैलिटी ही समझ कर के ना देखें आप हमेशा यह देखें कि यदि आपको कोई मानसिक विकार अपनी थिंकिंग में खुद ऑब्जर्व होता है या किसी अच्छे फ्रेंड अच्छे मित्र अच्छे परिवार को परिवार जन द्वारा आपके लिए आप को ध्यान में लाया जाता है तो उस पर आप सेंड पहली बार करें और आपको उसमें जरूर कुछ ना कुछ मदद मिलेगी और आपकी पर्सनैलिटी और निकलेगी मतलब आप उसको बदलकर के उस मानसिक विकार को बदल कर के अपनी पर्सनैलिटी को बदल सकते हैं और अच्छा महसूस भी कर सकते हैं और पर्सनालिटी में ऐसे 3 दिन आने पर आपकी साइकोलॉजिकल डिजीज इन राइटिंग डिप्रेशन रिलेशनशिप प्रॉब्लम जॉब प्रॉब्लम्स यह सभी प्रॉब्लम जो उस मानसिक विकार के कारण कई बार आपको फेस करनी पड़ती है वह भी बहुत कम हो जाती है इसीलिए इसके ऊपर यह जो भ्रांति हमारे समाज में हैं और जो खुद मनुष्य में भी बैठ जाती है कि किसी व्यक्ति ने अगर मुझे मेरे मानसिक विकार के बारे में उजागर किया तो वह निश्चय ही मेरी पर्सनालिटी पर प्रहार करना चाहता है मुझे नीचा दिखाना चाहता है और उसको उसका उद्देश्य मुझे मदद करना बिल्कुल भी नहीं है यह सोचना ही उस मनुष्य की गलती उसे हर व्यक्ति को अपने मानसिक विकास उजागर होने पर उस पर सोचना चाहिए और उसे विर्य भी लगता है कि वास्तव में ऐसा बेकार है और वह बार-बार कई परिस्थितियों में उसे विकार के कारण उसको परेशानी उठानी पड़ती है तो उसे निश्चय लेना चाहिए कि इसे चेंज करना है इसे कैसे चेंज करना है इसके लिए साइकोलॉजिक काउंसलिंग सोती है ऐश्वर्या चोर करो उसको आप फॉलो कर सकते हो आप कई जो अच्छी पर्सनालिटी हुई है उनकी जीवनी और पढ़ सकते हो उनके संघर्षों को पढ़ करके समझ सकते हो लेकिन जो पर्सनालिटी डेवलपमेंट है और जो अपनी पर्सनालिटी में फ्रॉड है मानसिकता में अपने विकार है खामियां हैं इसे बदलने का प्रयास हमें हमेशा करना चाहिए और पर्टिकुलर जाओ जब हमें लगता है कि वह ऐसा भी कहा है जो हमें बार-बार किसी ना किसी चीज में पीछे कर रहा है और हमें किसी का अपने गोल में सफल नहीं होने देना हमारी रिलेशनशिप्स को खराब कर रहा है धन्यवाद

namaskar main doctor rahul kansal ek manorog visheshagya apni baithak me kai baar aise patients ko deta hoon ki main apni mansik vikar kya mental problem ya difficulty usko asad karne se karya karne me mushkil hoti hai adhikaansh logo ka bhi khush hona lajmi hai kyonki hamari society me mental problem ke prati bahut badi buri dharnae hain aur uska acceptance hamari society me nahi hai kisi bhi vyakti ko apni mental problem aa search karne me pareshani hoti hai ki yadi usne yah cheez hasil kar li toh shayad use bewakoof ya use Pagal hi samjha jaega is prakar ki hamari social structure yah mansikta ke karan koi bhi vyakti jaldi se apni mansik vikar ko sweekar nahi kar paate doosra karan yah hota hai ki jab koi doosra vyakti kisi vyakti ki mansik vikar ko uske saamne ujagar karta hai toh usse aisa lagta hai ki yah uske upar ek prahaar hai ki vaah doosra jo vyakti hai vaah use nicha dikhana chah raha hai lekin yadi hum kisi friend ko bahut pyar se bahut support ke saath me uske mansik vikar ke bare me shayad agar avgat karaye aur usko chota dikhane ki koshish na kare toh ho sakta hai agar vaah aapka accha friend hai accha dost hai aapka accha ek relative hai aapka brother hai sister hai toh vaah aapko aapki baat maan ho sakta hai aapne mansik vikas par ko shikaar bhi kare aur us par usko usme badlav lane ke liye usme prayas kare teesra karan likhiye main yah hai ki jyadatar log shikaar karna isliye bhi nahi chahte kyonki unhe aisa lagta hai ki yah jo mansik vikar hai yah kabhi badal nahi sakta yah unki personality hai lekin aaj main un sabhi ko yah batana bhi chahta hoon ki manushya ki jo personality hai vaah bhi samay ke saath wall PUTTY hai yah zaroor hai ki kuch temparamental parade jo hai manushya ke saath aajivan rehte hain lekin kuch kuch personality me badlav hota hai kam hota hai lekin hota zaroor hai isliye kisi bhi mansik vikar ko apni ek personality hi samajh kar ke na dekhen aap hamesha yah dekhen ki yadi aapko koi mansik vikar apni thinking me khud abjarv hota hai ya kisi acche friend acche mitra acche parivar ko parivar jan dwara aapke liye aap ko dhyan me laya jata hai toh us par aap send pehli baar kare aur aapko usme zaroor kuch na kuch madad milegi aur aapki personality aur nikalegi matlab aap usko badalkar ke us mansik vikar ko badal kar ke apni personality ko badal sakte hain aur accha mehsus bhi kar sakte hain aur personality me aise 3 din aane par aapki saikolajikal disease in writing depression Relationship problem job problems yah sabhi problem jo us mansik vikar ke karan kai baar aapko face karni padti hai vaah bhi bahut kam ho jaati hai isliye iske upar yah jo bhranti hamare samaj me hain aur jo khud manushya me bhi baith jaati hai ki kisi vyakti ne agar mujhe mere mansik vikar ke bare me ujagar kiya toh vaah nishchay hi meri personality par prahaar karna chahta hai mujhe nicha dikhana chahta hai aur usko uska uddeshya mujhe madad karna bilkul bhi nahi hai yah sochna hi us manushya ki galti use har vyakti ko apne mansik vikas ujagar hone par us par sochna chahiye aur use virya bhi lagta hai ki vaastav me aisa bekar hai aur vaah baar baar kai paristhitiyon me use vikar ke karan usko pareshani uthani padti hai toh use nishchay lena chahiye ki ise change karna hai ise kaise change karna hai iske liye saikolajik kaunsaling soti hai aishwarya chor karo usko aap follow kar sakte ho aap kai jo achi personality hui hai unki jeevni aur padh sakte ho unke sangharshon ko padh karke samajh sakte ho lekin jo personality development hai aur jo apni personality me fraud hai mansikta me apne vikar hai khamiyan hain ise badalne ka prayas hamein hamesha karna chahiye aur particular jao jab hamein lagta hai ki vaah aisa bhi kaha hai jo hamein baar baar kisi na kisi cheez me peeche kar raha hai aur hamein kisi ka apne gol me safal nahi hone dena hamari relationships ko kharab kar raha hai dhanyavad

नमस्कार मैं डॉक्टर राहुल कंसल एक मनोरोग विशेषज्ञ अपनी बैठक में कई बार ऐसे पेशेंट्स को देता

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आसाम का सवाल है अधिकांश लोगों के लिए अपने मानसिक विकार को स्वीकार करना कठिन हो जाता है तू तू तू मानसिक विकार मानसिक विकार का अर्थ होता है कि मनो का एक जितने भी बुला लो हमारे अंदर जो बीमारियां हैं जो बीमार या मरो का एक होते हैं वह मानसिक विकास के अंतर्गत आती है ठीक है तो मानसिक समझने की कोशिश करेंगे कि जैसे कि आपने लिखा हुआ कि हम किसी दूसरे को गलत ठहराते हैं दूसरा व्यक्ति किसी को गलत ठहरा था हम एक दूसरे को गलत ठहराते हैं ठहराने का बोला हम बोलते कि वह गलत बोल रहा है अब अब देखे हमारा नजरिया है कि वह गलत बुरा लेकिन उसका नजरिया होता कि नहीं नहीं वह तो सही बोल रहा है लेकिन वह हमें गलत ठहरा है कि आप गलत बोल रहे हैं अब यहां पर सवाल आता है कि कौन सी है कौन गलत है तो मैं तो बोलूंगा कि यहां पर गलत कोई नहीं है दोनों सही है अब कैसे दोनों सही है आपका सवाल हो सकता कि दोनों कैसे सही हो सकते 12 गलत हो भी सकता है नहीं तो दोस्तों मानसिक विकार में आपका स्वास्थ्य जैसे कि जिसके अंदर मानसिक विकार होगा कैसे यह मानते कि नहीं उसके अंदर इस तरह से कोई है ही नहीं उसका बिल्कुल उसी करना करना चाहिए क्योंकि मानसिक विकार होता है जिस तरह से हम मानते हैं कि यह चीज मैं सही हूं तो मेरे अंदर मेरे अंदर मेरी मनाई स्थिति के अनुसार ही में एक किसी रिजल्ट में पहुंचता हूं तभी मैं यह बोलता हूं कि इस तरह से मेरे अंदर जो इंटर मेरे अंदर जो डाटा स्पीड है उसके उसके कोडिंग मैं रिजल्ट के पूछ लूंगा और मैं उसी के अकॉर्डिंग उस रिजल्ट को देख पाऊंगा तो मैं अपने डेटा के अकॉर्डिंग जिस रिजल्ट पर पहुंचा उचित परिणाम पर पहुंचा उसे ही सही मानता उसे गलत मानता ही नहीं किसी तरह से एक दूसरे को गलत समझते दूसरे गलत इसलिए समझता है कि अपने अनुसार अपने डेटा के अकॉर्डिंग तो उसके अंदर इन टाटा एंट्री करके उसके अकॉर्डिंग कैलकुलेशन करता अपने परिणाम में पहुंचकर तब उसे दूसरे व्यक्ति को गलत साबित करता है और जो दूसरा व्यक्ति पहले बेटे को गलत साबित कर रहा है वह अपने अंदर तो उसके अंदर डाटा स्पीड है उसके उसके कैलकुलेशन के अंदर परिणाम घोषित करता अपने डेट अस्वीकार पर गलत गलत घोषित करता है सोचना यहां पर क्या होगा कि हम खुद कोई भी मानसिक विकार वाला व्यक्ति अपने को कभी या मानसिक विकार को कभी कभी स्वीकार करेगा ही नहीं जब तक कि वह अपने से किसी सुपीरियर पर विश्वास न करें रिपेयर की बातों को ना माने कितनी सुपीरियर की बातों को नहीं मानेगा तो कभी यह मानेगा ही नहीं स्वीकारी ने कहा कि उसे विश्व मानसिक विकार है

assam ka sawaal hai adhikaansh logo ke liye apne mansik vikar ko sweekar karna kathin ho jata hai tu tu tu mansik vikar mansik vikar ka arth hota hai ki mano ka ek jitne bhi bula lo hamare andar jo bimariyan hain jo bimar ya maro ka ek hote hain vaah mansik vikas ke antargat aati hai theek hai toh mansik samjhne ki koshish karenge ki jaise ki aapne likha hua ki hum kisi dusre ko galat thahrate hain doosra vyakti kisi ko galat thahara tha hum ek dusre ko galat thahrate hain thaharane ka bola hum bolte ki vaah galat bol raha hai ab ab dekhe hamara najariya hai ki vaah galat bura lekin uska najariya hota ki nahi nahi vaah toh sahi bol raha hai lekin vaah hamein galat thahara hai ki aap galat bol rahe hain ab yahan par sawaal aata hai ki kaun si hai kaun galat hai toh main toh boloonga ki yahan par galat koi nahi hai dono sahi hai ab kaise dono sahi hai aapka sawaal ho sakta ki dono kaise sahi ho sakte 12 galat ho bhi sakta hai nahi toh doston mansik vikar me aapka swasthya jaise ki jiske andar mansik vikar hoga kaise yah maante ki nahi uske andar is tarah se koi hai hi nahi uska bilkul usi karna karna chahiye kyonki mansik vikar hota hai jis tarah se hum maante hain ki yah cheez main sahi hoon toh mere andar mere andar meri manai sthiti ke anusaar hi me ek kisi result me pahuchta hoon tabhi main yah bolta hoon ki is tarah se mere andar jo inter mere andar jo data speed hai uske uske coding main result ke puch lunga aur main usi ke according us result ko dekh paunga toh main apne data ke according jis result par pohcha uchit parinam par pohcha use hi sahi maanta use galat maanta hi nahi kisi tarah se ek dusre ko galat samajhte dusre galat isliye samajhata hai ki apne anusaar apne data ke according toh uske andar in tata entry karke uske according calculation karta apne parinam me pahuchkar tab use dusre vyakti ko galat saabit karta hai aur jo doosra vyakti pehle bete ko galat saabit kar raha hai vaah apne andar toh uske andar data speed hai uske uske calculation ke andar parinam ghoshit karta apne date aswikar par galat galat ghoshit karta hai sochna yahan par kya hoga ki hum khud koi bhi mansik vikar vala vyakti apne ko kabhi ya mansik vikar ko kabhi kabhi sweekar karega hi nahi jab tak ki vaah apne se kisi Superior par vishwas na kare repair ki baaton ko na maane kitni Superior ki baaton ko nahi manega toh kabhi yah manega hi nahi swikari ne kaha ki use vishwa mansik vikar hai

आसाम का सवाल है अधिकांश लोगों के लिए अपने मानसिक विकार को स्वीकार करना कठिन हो जाता है तू

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह मनुष्य का 110 अभाव है कहा जाता है जब अपनी कमियां ढूंढ ही हो या पता लगे तो आदमी सबसे अच्छा वकील होता है पर जब दूसरों की कमियां दिखानी है बतानी हो तो वह सबसे बढ़िया है जज बन जाता है क्योंकि हर इंसान को यह लगता है कि जो वह कर रहा है वह सही है अगर उसे लगे कि यह गलत है तो शायद से वह काम वह करेगा ही क्यों हर आदमी अगर कभी कुछ गलत काम करते हुए भी पकड़ा जाए तो उसका एक ही ना जवाब होता है कि मुझे लगा कि यह सही है तो ही मैंने किया हम दूसरी भाषा में कह सकते हैं कि उसकी कोशिश केवल ने वह काम जो है लागू किया तो यह सीधी सी बात है तो अगर हर आदमी को अपनी गलती का एहसास हो जाएगा उसको पहले से ही पता लग जाए कि उसने गलत किया है तो शायद से वह कभी कोई गलती करेगी ना तो यह सब जो प्रश्न होते हैं इनका कोई भी एक को पिंपॉइंटेड आंसर दे ही नहीं सकते क्योंकि आप जब प्रश्न अपने पर आता है खुद के इंटरमीडी पर आता है तो बड़े-बड़े जो बुद्धिजीवी या जो साइकोलॉजिस जैसे लोग हैं जिनका काम ही है कि मानसिक विकृतियों को पढ़ना जाना उनके बारे में शोध करना वह लोग भी उसका उत्तर देने में सक्षम नहीं होते हैं धन्यवाद

yah manushya ka 110 abhaav hai kaha jata hai jab apni kamiyan dhundh hi ho ya pata lage toh aadmi sabse accha vakil hota hai par jab dusro ki kamiyan dikhaani hai batani ho toh vaah sabse badhiya hai judge ban jata hai kyonki har insaan ko yah lagta hai ki jo vaah kar raha hai vaah sahi hai agar use lage ki yah galat hai toh shayad se vaah kaam vaah karega hi kyon har aadmi agar kabhi kuch galat kaam karte hue bhi pakada jaaye toh uska ek hi na jawab hota hai ki mujhe laga ki yah sahi hai toh hi maine kiya hum dusri bhasha me keh sakte hain ki uski koshish keval ne vaah kaam jo hai laagu kiya toh yah seedhi si baat hai toh agar har aadmi ko apni galti ka ehsaas ho jaega usko pehle se hi pata lag jaaye ki usne galat kiya hai toh shayad se vaah kabhi koi galti karegi na toh yah sab jo prashna hote hain inka koi bhi ek ko pimpainted answer de hi nahi sakte kyonki aap jab prashna apne par aata hai khud ke intaramidi par aata hai toh bade bade jo buddhijeevi ya jo saikolajis jaise log hain jinka kaam hi hai ki mansik vikritiyon ko padhna jana unke bare me shodh karna vaah log bhi uska uttar dene me saksham nahi hote hain dhanyavad

यह मनुष्य का 110 अभाव है कहा जाता है जब अपनी कमियां ढूंढ ही हो या पता लगे तो आदमी सबसे अच्

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DR. MANISH

MULTI TASKER & DR.M.D (A.M.), B-PHARMA, PGDM-M

4:48
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखो तुमने जो सवाल पूछा है एक अच्छा सवाल है यह काफी लोगों का काम आएगा कि अपने मानसिक विकार को स्वीकार करना कठिन मानसिक विकार एक बहुत बड़ी चीज है बहुत बड़ी चीज है यह सिर्फ ऐसा नहीं कि इसे दिमाग खराब हो गया तो ही मानसिक विकार है मानसिक प्रकार कई मायनों में अलग अलग तरीके से होता है जैसे नॉर्मल आदमी क्या कहता है अच्छा कर दिया तो मैंने कर दिया बुरा कर दिया तूने कर दिया अच्छा मैं करता हूं बुरा तू करता है जो मैं कहता हूं वह ठीक है जो तू कहता वह गलत है मेरी बात मान लेगा तो सब ठीक है तेरी बात कोई मानेगा तो यह गलत है यह भी एक तरह से मानसिक विकार और बेसिक जो है उसकी रूट पाई गई है इको प्रॉब्लम और इसके अलावा कुछ ऐसे बांधी बेकार है जैसे कोई सी भी फ्रेंड है कोई मून चैनल है कुछ क्रेजी है लुनेटिक है पैसे बहुत सारे इज मेंटल भी क्या कहते हैं किसी को मून साइन पर भी कह देते हैं तो अलग-अलग के अनुसार पागलपन के मानसिक विकार बहुत तरह के हो सकते हैं लेकिन अगर हम ज्यादा ग्यारहवीं के आदमी दूसरे को पागल ही समझता है हर आदमी दूसरे को यही समझता है कि इससे दिमाग में कुछ कमी ही मेरी बात नहीं समझ रहा है जो मैं समझाना चाह रहा हूं जैसे मामलों में जवाब दे रहा हूं तुम्हें लगेगा यह तो क्या जवाब दे रहे हो मुझे भी आता है कि यह जो चीज है यह सबसे बड़ी प्रॉब्लम वाली चीज है अभी इस के संदर्भ में एक कथा सुनाता हूं जिससे कि इस बात को समझने में आसानी रहेगी एक गुरुजी से बड़े अच्छे गुरु जी टाइम पहुंचेगी गुरु जी के दरबार में उसके स्कूल में एक आदमी चला गया वह गुरु जी राम राम राम राम राम बताओ बैठी दाखिला लेना है आपके स्कूल में मल्हारी मिल जाए और बढ़ेगी तो दे दो पहले पढ़ाई करता था उस मास्टर जी के पढ़ाई करता था उस जगह को छीन लेता था उस जगह में ऑनलाइन क्लासेज लेता था और उसने सारी बातें बता दी तो ग्रुप में ठीक है आप पास हो गया आपकी से ₹500000 की रोशनी सबसे पैसे वाला आदमी था ₹500000 सर जी राम-राम सा राम-राम याद रखना चाहता हूं पर बैठा हुआ करता था पढ़ाई लिखाई ऑनलाइन क्लास ट्यूशन बुरा कुछ नहीं कर पहली बार आपके पास आया हूं ₹5000 का साध्वी ने ₹500000 की पढ़ाई किस लड़के से ₹5000 ले रही है क्या चक्कर है गुरुजी बस ऐसे ही यह चीज है कि मानसिक विकार अगर क्वालिटी के हैं हम जैसे एक और कहानी सुनाता सुंदर में मानसिक विकार की एक औरत थी बुढ़िया औरत थी अब उसको गया धर्म का होगा कि उसकी खाट के नीचे भूत है यही लेटेस्ट परेशान हो तुम्हारा कर पाए तो ₹400000 दूंगा तो क्या होता है जी मैंने कहा ठीक है सब रात को तुम जाना और तुम्हारे कॉल शगुन दिखाई नहीं देगा अब वह घर गई तो मैंने क्या करा उससे पहले ही काट के चारों पाओं काट दिए अब वह लेट खा के नीचे जहां से रहता है उसके नीचे जगह को खत्म कर दिया

dekho tumne jo sawaal poocha hai ek accha sawaal hai yah kaafi logo ka kaam aayega ki apne mansik vikar ko sweekar karna kathin mansik vikar ek bahut badi cheez hai bahut badi cheez hai yah sirf aisa nahi ki ise dimag kharab ho gaya toh hi mansik vikar hai mansik prakar kai maayano me alag alag tarike se hota hai jaise normal aadmi kya kahata hai accha kar diya toh maine kar diya bura kar diya tune kar diya accha main karta hoon bura tu karta hai jo main kahata hoon vaah theek hai jo tu kahata vaah galat hai meri baat maan lega toh sab theek hai teri baat koi manega toh yah galat hai yah bhi ek tarah se mansik vikar aur basic jo hai uski root payi gayi hai iko problem aur iske alava kuch aise bandhi bekar hai jaise koi si bhi friend hai koi moon channel hai kuch crazzy hai lunatic hai paise bahut saare is mental bhi kya kehte hain kisi ko moon sign par bhi keh dete hain toh alag alag ke anusaar pagalpan ke mansik vikar bahut tarah ke ho sakte hain lekin agar hum zyada gyarahavin ke aadmi dusre ko Pagal hi samajhata hai har aadmi dusre ko yahi samajhata hai ki isse dimag me kuch kami hi meri baat nahi samajh raha hai jo main samajhana chah raha hoon jaise mamlon me jawab de raha hoon tumhe lagega yah toh kya jawab de rahe ho mujhe bhi aata hai ki yah jo cheez hai yah sabse badi problem wali cheez hai abhi is ke sandarbh me ek katha sunata hoon jisse ki is baat ko samjhne me aasani rahegi ek guruji se bade acche guru ji time pahunchegi guru ji ke darbaar me uske school me ek aadmi chala gaya vaah guru ji ram ram ram ram ram batao baithi dakhila lena hai aapke school me malhari mil jaaye aur badhegi toh de do pehle padhai karta tha us master ji ke padhai karta tha us jagah ko cheen leta tha us jagah me online classes leta tha aur usne saari batein bata di toh group me theek hai aap paas ho gaya aapki se Rs ki roshni sabse paise vala aadmi tha Rs sir ji ram ram sa ram ram yaad rakhna chahta hoon par baitha hua karta tha padhai likhai online class tuition bura kuch nahi kar pehli baar aapke paas aaya hoon Rs ka sadhvi ne Rs ki padhai kis ladke se Rs le rahi hai kya chakkar hai guruji bus aise hi yah cheez hai ki mansik vikar agar quality ke hain hum jaise ek aur kahani sunata sundar me mansik vikar ki ek aurat thi budhiya aurat thi ab usko gaya dharm ka hoga ki uski khat ke niche bhoot hai yahi latest pareshan ho tumhara kar paye toh Rs dunga toh kya hota hai ji maine kaha theek hai sab raat ko tum jana aur tumhare call shagun dikhai nahi dega ab vaah ghar gayi toh maine kya kara usse pehle hi kaat ke charo paon kaat diye ab vaah late kha ke niche jaha se rehta hai uske niche jagah ko khatam kar diya

देखो तुमने जो सवाल पूछा है एक अच्छा सवाल है यह काफी लोगों का काम आएगा कि अपने मानसिक विकार

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Subhasini

Counsellor

1:24
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आज भी समाज में मानसिक विकार को स्वीकार करना बहुत कठिन है क्योंकि समाज में आज भी अगर किसी को पेट दर्द होता है दांत दर्द होता है किसी भी तरीके से शादी अगर पीड़ा है तो उसे दिखाने में मुझे लगता नहीं है परंतु अगर मानसी कोई विकार है तो जाने से डरता है कि जगता है समाज में एक शिकवा है कि लोग क्या कहेंगे क्योंकि अक्सर मानसिक विकार को लोग पागलपन से जोड़ लेते हैं पागलपन एक अवस्था है और मानसिक विकार कई अवस्थाओं में हो सकते हैं प्रारंभिक भी हो सकते हैं मानसिक विकार सोच भी हो सकता है इन सबों को प्रारंभिक अवस्था में बहुत अच्छे से दूर किया जा सकता है कभी-कभी तो मात्र काउंसलिंग से ही कई उतार को दूर किया जाता है तो यह सोच है समाज का जो कि आज के दिन में धीरे-धीरे थोड़ी कमी आ रही है परंतु इतनी भी नहीं कितनी होनी चाहिए लोगों को यह स्वीकार करना चाहिए जैसे शारीरिक विकार होता है मानसिक में विकार उत्पन्न हो सकते हैं तो उनको उचित सलाह लेकर सही भी किया जा सकता है तो सलाह लेनी चाहिए जाने चाहिए डॉक्टर के पास चाहे वह किसी भी तरीके का भी धन्यवाद

aaj bhi samaj mein mansik vikar ko sweekar karna bahut kathin hai kyonki samaj mein aaj bhi agar kisi ko pet dard hota hai dant dard hota hai kisi bhi tarike se shadi agar peeda hai toh use dikhane mein mujhe lagta nahi hai parantu agar mansi koi vikar hai toh jaane se darta hai ki jagta hai samaj mein ek shikwa hai ki log kya kahenge kyonki aksar mansik vikar ko log pagalpan se jod lete hain pagalpan ek avastha hai aur mansik vikar kai avasthaon mein ho sakte hain prarambhik bhi ho sakte hain mansik vikar soch bhi ho sakta hai in sabon ko prarambhik avastha mein bahut acche se dur kiya ja sakta hai kabhi kabhi toh matra kaunsaling se hi kai utar ko dur kiya jata hai toh yah soch hai samaj ka jo ki aaj ke din mein dhire dhire thodi kami aa rahi hai parantu itni bhi nahi kitni honi chahiye logo ko yah sweekar karna chahiye jaise sharirik vikar hota hai mansik mein vikar utpann ho sakte hain toh unko uchit salah lekar sahi bhi kiya ja sakta hai toh salah leni chahiye jaane chahiye doctor ke paas chahen vaah kisi bhi tarike ka bhi dhanyavad

आज भी समाज में मानसिक विकार को स्वीकार करना बहुत कठिन है क्योंकि समाज में आज भी अगर किसी क

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

0:32
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

रही थी लेकिन पहले से ही जैसे पागल है मानसिक दिमाग नार्मल चीजें इसको दबा कर सकते हैं

rahi thi lekin pehle se hi jaise Pagal hai mansik dimag normal cheezen isko daba kar sakte hain

रही थी लेकिन पहले से ही जैसे पागल है मानसिक दिमाग नार्मल चीजें इसको दबा कर सकते हैं

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Karishma

Psychologist

1:14
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हमें इफेक्ट नहीं होता है क्या सोचने लगी है क्या सोचेंगे हम लोग उस पर फोकस करो अपने आप से व्हाट्सएप पर बंद हो जाएगा क्योंकि आप एक्सेप्टेबल इसलिए नहीं कर पा रहे हो अपने आप ही आप जीवन करते हो जहां पर रहते हो उसके फल दोस्तों के बारे में

humein effect nahi hota hai kya sochne lagi hai kya sochenge hum log us par focus karo apne aap se whatsapp par band ho jayega kyonki aap ekseptebal isliye nahi kar pa rahe ho apne aap hi aap jeevan karte ho jaha par rehte ho uske fal doston ke bare mein

हमें इफेक्ट नहीं होता है क्या सोचने लगी है क्या सोचेंगे हम लोग उस पर फोकस करो अपने आप से व

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Veer Bhupinder Singh Ji

The Visionary, www.thelivingtreasure.org

1:33
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखें अपने नेगेटिव जो इमोशन सही है नेगेटिव एटीट्यूड है उसको एक्सेप्ट लोग इसे नहीं करते कि उनके दिमाग में यह कि आई एम ऑलवेज राइट आई एम स्टिल आईटी एमवाई ब्राइड अपने आपको हमेशा ठीक समझ ना दूसरों को गलत समझ ना अपने आप को और न समझना दूसरों को देशों ने समझना और शिशु के हमेशा अपने आप को प्रेरित ही देने की मेरे काम सारे पहले कर दिए गए बाद में सारी दुनिया भाड़ में जाए जो लोग ऐसी सोचने लग जाते हैं ना पहले मेरे काम की नहीं जो लोग खुदगर्ज होते हैं सनफिश होते हैं वह इंटरसेक्शन करी नहीं पाते हैं कि मैं कहां पर गलत वह हमेशा ही करते रहते थे और दूसरा गलत है और दूसरे को गलत ठहराते हैं उनका अपना एटीट्यूड अपना भी सीरियल लेटी हो जाता है अपने बारे में पॉजिटिव सोच ही नहीं पाते हैं अगर अपनी गलती को सुधार लो तुम मेरा पीरियड कितना अच्छा मेरा ब्लड प्रेशर का लेबल ठीक हो जाएगा मेरी चिंता फिकर खत्म हो जाता है और अपने बारे में

dekhen apne Negative jo emotion sahi hai Negative attitude hai usko except log ise nahi karte ki unke dimag mein yah ki I M always right I M steel it MY bride apne aapko hamesha theek samajh na dusro ko galat samajh na apne aap ko aur na samajhna dusro ko deshon ne samajhna aur shishu ke hamesha apne aap ko prerit hi dene ki mere kaam saare pehle kar diye gaye baad mein saree duniya bhad mein jaaye jo log aisi sochne lag jaate hain na pehle mere kaam ki nahi jo log khudagarj hote hain sanfish hote hain vaah intersection kari nahi paate hain ki main kahaan par galat vaah hamesha hi karte rehte the aur doosra galat hai aur dusre ko galat thahrate hain unka apna attitude apna bhi serial leti ho jata hai apne bare mein positive soch hi nahi paate hain agar apni galti ko sudhaar lo tum mera period kitna accha mera blood pressure ka lebal theek ho jaega meri chinta fikar khatam ho jata hai aur apne bare mein

देखें अपने नेगेटिव जो इमोशन सही है नेगेटिव एटीट्यूड है उसको एक्सेप्ट लोग इसे नहीं करते कि

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Ms. Kamna Yadav

Clinical Psychologist

1:04
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

क्योंकि मुझे ऐसा लगता है कि जो हमारी सोसाइटी है जो मरा कल्चर उसमें एक इस्तेमा एक्सटी रोटी भी है कि यह मानसिक तौर पर बीमार है मतलब वह एक वर्ड यूज़ करते हैं पागल है उनको यह बचपन से लोग सोसाइटी में जो हमारी कल्चर है उसमें सब देखते हैं और जॉब करते हैं समझते हैं और उसमें ऐसे लगता है कई लोग छुआछूत की तरह उनको भी ऐड करते हैं कि उनके पास में जाना चाहते हैं उनसे दूर रहते हैं क्योंकि लोगों को इंफॉर्मेशन ही नहीं है उस तरीके की एजुकेशन ही नहीं दी गई कि यह जो मानती प्रॉब्लम है शिमला में जो एक फिजिकल प्रॉब्लम होती है से क्या बीमारी होती है या फिर किसी और को थायराइड है डायबिटीज जिंदगी भर रहती है वैसे ही लोगों को जिंदगी भर लाइफटाइम की मेडिकल खानी पड़ती है बट लोगों में जो बेसिक इनफार्मेशन एंड वे टेक एजुकेशन है वह मीटिंग है जिसकी वजह से उसको एक चुनौती की तरह देखकर मां बना दूर रहने की कोशिश करते हैं

kyonki mujhe aisa lagta hai ki jo hamari society hai jo mara culture usme ek istema XT roti bhi hai ki yah mansik taur par bimar hai matlab vaah ek word use karte hai Pagal hai unko yah bachpan se log society mein jo hamari culture hai usme sab dekhte hai aur job karte hai samajhte hai aur usme aise lagta hai kai log chuachut ki tarah unko bhi aid karte hai ki unke paas mein jana chahte hai unse dur rehte hai kyonki logo ko information hi nahi hai us tarike ki education hi nahi di gayi ki yah jo maanati problem hai shimla mein jo ek physical problem hoti hai se kya bimari hoti hai ya phir kisi aur ko thyroid hai diabetes zindagi bhar rehti hai waise hi logo ko zindagi bhar lifetime ki medical khaani padti hai but logo mein jo basic information and ve take education hai vaah meeting hai jiski wajah se usko ek chunauti ki tarah dekhkar maa bana dur rehne ki koshish karte hain

क्योंकि मुझे ऐसा लगता है कि जो हमारी सोसाइटी है जो मरा कल्चर उसमें एक इस्तेमा एक्सटी रोटी

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Dr. Sarwat Jabeen

Career Counselor

0:55

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मिसकनसेप्शन डिस्टेंस अंताक्षरी बीमार होता है जैसे हमारी बीमार हो सकता है इस बात को लूट ली देदे सोशल स्टिग्मा मानसिक बीमारी है लोग समझते हैं कि लोग घबराते हैं और इसलिए किसी के साथ शेयर नहीं करना चाहते हैं और उसे एक्सेप्ट नहीं करना चाहती है बिजली देखा जाता है या तो फिर भी फ्री है या किसी कारण से होता है

misakanasepshan distance antakshari bimar hota hai jaise hamari bimar ho sakta hai is baat ko loot li dede social stigma mansik bimari hai log samajhte hain ki log ghabarate hain aur isliye kisi ke saath share nahi karna chahte hain aur use except nahi karna chahti hai bijli dekha jata hai ya toh phir bhi free hai ya kisi karan se hota hai

मिसकनसेप्शन डिस्टेंस अंताक्षरी बीमार होता है जैसे हमारी बीमार हो सकता है इस बात को लूट ली

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Shailja Dubey

Yoga Instructor/Teacher

2:44
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार मेरा नाम सरिता दुबे है अधिकांश लोगों के लिए अपने मानसिक विकार को स्वीकार ना चिंता है यह क्वेश्चन पूछा है देखिए आज के समय में तो फिर भी कुछ लोग आए हुए हैं इन सब अपनी मानसिक विकार को लेकर कि अगर किसी को कोई भी समस्या है वह जाती है काउंसलर के पास और कंसल्टेशन लेते हैं और वह ठीक हो जाते हैं लेकिन अभी भी यह स्थिति बनी हुई है कि अगर किसी को कोई भी तकलीफ है कोई भी मानसिक विकार है तो वह किसी से बात करना नहीं चाहते हैं उनको लगता है अगर हमने कोई डिस्टर्ब किया तो लोग सोचेंगे अरे यह तो पागल है दिमाग खराब है लोग अलग तरीके से लेना शुरू कर देंगे या देखना शुरू कर देंगे समाज में या फिर घर में या परिवार में या फिर जिस को भी पता चलता है वह क्या सोचेगा मेरे बारे में दोस्तों में आपको बताना चाहूंगी आप जिस समस्या से गुजर रहे हैं अब जिस समस्या से गुजर रहे हैं जिस मानसिक विकार से गुजर रहे हैं वह समस्या आप से बेहतर कोई नहीं समझ सकता तकलीफ है वह आपको ही हो रही है जिस तरीके से आप को जब फीवर आता है या जुखाम होता है या किसी भी शारीरिक व्याधि से होते विकार से ग्रसित होते हैं आप तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट थे मेडिकेशन लेते हैं और आप ठीक हो जाते हैं अच्छा फील करते हैं बैटर फील करते हैं फिर से आप नंबर लाइफ में आ जाते हैं मैं दोस्तों सलाह दूंगी इसी प्रकार इसी प्रकार हमारी दुआ है कि ट्रस्ट है जो हमारे काउसेस हैं जो हमारे दिमाग के डॉक्टर हैं जो बैठे हुए हैं वह इसीलिए बैठे हुए हैं अगर आपको कोई भी तकलीफ है आप उनके पास जाइए उनको अपनी समस्या बताएं वह आपको आपका सुचारू रूप से निदान करेंगे प्रॉपर आपका मेडिकेशन होगा या जो भी रिलेटेड आपकी समस्या रिलेटेड जो भी आप का निदान होगा वह करेंगे और आप फिर से नार्मल लाइफ में वापस आ जाएंगे तो दोस्तों यह इजी है ना कि आप इसके कि आप उसमें रहे कि अरे मैं कैसे बताऊं मैं कैसे किसी को ए दोस्तों इसे आपकी जो समस्या है वह बढ़ेगी ही कम तो नहीं होने वाली कम करने के लिए कोई भी भरोसेमंद इंसान आप उसके साथ चल सकता सकते हैं और आप डॉक्टर से कंसल्ट कर सकते हैं और अब ऐसा नहीं है कि यह कोई अछूता इस तरीके की कोई बीमारी है जो समाज में एक्सेप्ट नहीं है बस पूरा को जागरूक होने की जरूरत है और खासकर अपने लिए यह आपके लिए है आज की दैनिक जीवन के लिए है आपके इंडिविजुअल इंसान के लिए है तो मैं तो यही सलाह दूंगी आप चाहिए कंसल कीजिए अपना निदान करवाइए और आप अपने नॉर्मल लाइफ को वापस से जीना शुरू कीजिए धन्यवाद

namaskar mera naam sarita dubey hai adhikaansh logo ke liye apne mansik vikar ko sweekar na chinta hai yah question poocha hai dekhiye aaj ke samay mein toh phir bhi kuch log aaye hue hain in sab apni mansik vikar ko lekar ki agar kisi ko koi bhi samasya hai vaah jaati hai counselor ke paas aur kansalteshan lete hain aur vaah theek ho jaate hain lekin abhi bhi yah sthiti bani hui hai ki agar kisi ko koi bhi takleef hai koi bhi mansik vikar hai toh vaah kisi se baat karna nahi chahte hain unko lagta hai agar humne koi disturb kiya toh log sochenge are yah toh Pagal hai dimag kharab hai log alag tarike se lena shuru kar denge ya dekhna shuru kar denge samaj mein ya phir ghar mein ya parivar mein ya phir jis ko bhi pata chalta hai vaah kya sochega mere bare mein doston mein aapko bataana chahungi aap jis samasya se gujar rahe hain ab jis samasya se gujar rahe hain jis mansik vikar se gujar rahe hain vaah samasya aap se behtar koi nahi samajh sakta takleef hai vaah aapko hi ho rahi hai jis tarike se aap ko jab fever aata hai ya jukham hota hai ya kisi bhi sharirik vyadhi se hote vikar se grasit hote hain aap turant doctor se Consult the medication lete hain aur aap theek ho jaate hain accha feel karte hain better feel karte hain phir se aap number life mein aa jaate hain main doston salah dungi isi prakar isi prakar hamari dua hai ki trust hai jo hamare kauses hain jo hamare dimag ke doctor hain jo baithe hue hain vaah isliye baithe hue hain agar aapko koi bhi takleef hai aap unke paas jaiye unko apni samasya bataye vaah aapko aapka sucharu roop se nidan karenge proper aapka medication hoga ya jo bhi related aapki samasya related jo bhi aap ka nidan hoga vaah karenge aur aap phir se normal life mein wapas aa jaenge toh doston yah easy hai na ki aap iske ki aap usme rahe ki are main kaise bataun main kaise kisi ko a doston ise aapki jo samasya hai vaah badhegi hi kam toh nahi hone wali kam karne ke liye koi bhi bharosemand insaan aap uske saath chal sakta sakte hain aur aap doctor se Consult kar sakte hain aur ab aisa nahi hai ki yah koi achuta is tarike ki koi bimari hai jo samaj mein except nahi hai bus pura ko jagruk hone ki zarurat hai aur khaskar apne liye yah aapke liye hai aaj ki dainik jeevan ke liye hai aapke individual insaan ke liye hai toh main toh yahi salah dungi aap chahiye kansal kijiye apna nidan karavaiye aur aap apne normal life ko wapas se jeena shuru kijiye dhanyavad

नमस्कार मेरा नाम सरिता दुबे है अधिकांश लोगों के लिए अपने मानसिक विकार को स्वीकार ना चिंता

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Loveleena Singh

Rehabilitation Psychologist

0:55
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

क्योंकि सबसे पहला तो मानसिक बीमारी है और जो दिमाग किसी से नहीं पा रहा है वह आप को कैसे बताएगा कि दिमाग की क्षमता ही खत्म हो चुकी है सोचने समझने की तो अगर मानसिक विकार को एक सर्जिकल शॉप मतलब इतना भी ना करें कि हमें अपनी पत्नी के शारीरिक कष्ट अनजाने में पता होता है क्योंकि हमारा दिमाग में गाइड कर दो ताकि तुम्हें कुछ हो रहा है हमारे दिमाग में कोई मानसिक परेशानी चल रही है तुम्हारा दिमाग चारकोप आपको बताता है क्या तो दूसरा कारण यह भी है कि हम चेक करने लगते हैं

kyonki sabse pehla toh mansik bimari hai aur jo dimag kisi se nahi paa raha hai vaah aap ko kaise batayega ki dimag ki kshamta hi khatam ho chuki hai sochne samjhne ki toh agar mansik vikar ko ek surgical shop matlab itna bhi na kare ki hamein apni patni ke sharirik kasht anjaane mein pata hota hai kyonki hamara dimag mein guide kar do taki tumhe kuch ho raha hai hamare dimag mein koi mansik pareshani chal rahi hai tumhara dimag charkop aapko batata hai kya toh doosra karan yah bhi hai ki hum check karne lagte hain

क्योंकि सबसे पहला तो मानसिक बीमारी है और जो दिमाग किसी से नहीं पा रहा है वह आप को कैसे बता

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Shovana Ray

Project Scientist, Wildlife Institute of India

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Dr. Mrignayani Agarwal

Clinical Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मानसिक रोगों के प्रति जो हमें डिप्रेशन हो गया हम यह हो गया मुझे एक बार कोड आता है पागल पागल कहीं का भी हो सकती है और हर कोई व्यक्ति पागल नहीं हो जाता था याद जरूरी है

mansik rogo ke prati jo hamein depression ho gaya hum yah ho gaya mujhe ek baar code aata hai Pagal Pagal kahin ka bhi ho sakti hai aur har koi vyakti Pagal nahi ho jata tha yaad zaroori hai

मानसिक रोगों के प्रति जो हमें डिप्रेशन हो गया हम यह हो गया मुझे एक बार कोड आता है पागल पाग

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DR SURI

Rehabilitation Psychologist

0:31
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इसलिए होता है कि उनका सेंटर ज्योतियां तक 59 महीना कौन से टाइम में क्वालिटी करते हैं उन्हें पता ही नहीं होता है कि नुकसान करता है तो दूसरा आदमी रोता भी सकता है क्यों होता है क्यों होते हैं मॉनिटरिंग बैलेंस हो जाते हैं

isliye hota hai ki unka center jyotiyan tak 59 mahina kaun se time mein quality karte hain unhein pata hi nahi hota hai ki nuksan karta hai toh doosra aadmi rota bhi sakta hai kyon hota hai kyon hote hain monitoring balance ho jaate hain

इसलिए होता है कि उनका सेंटर ज्योतियां तक 59 महीना कौन से टाइम में क्वालिटी करते हैं उन्हें

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Dr. PRAVINA MISHRA

REHABILITATION PSYCHOLOGIST

1:23
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

एक तू बहुत बड़ा सोसाइटी में अवेयरनेस मीनिंग ऑफ डिस्क्रिमिनेशन है कि हम खुद भी के पास होते हैं तो हम दूसरों के जो मेंटल कंडीशन होते हैं स्टेटस होते हैं उसको हम चॉकलेट डील नहीं करते उनके लिए भी हम खुद भी हाथ होते हैं तो इस तरीके के चलते हम इस चीज को शेयर नहीं करते हैं और अवशोषण होता ही है क्योंकि जो छोटे गमले में वह बड़े हो जाते हैं और जब टीवी के रूप में दिखने लगते हैं दिखने लगते हैं लोगों को लगता है कि आप आ गया है तब जाकर उनकी फैमिली मेंबर जाकर लंदन प्रोग्राम चल रहा है यहां यह सिचुएटेड होते हैं यहां से कहां तक नहीं होती है और

ek tu bahut bada society mein awareness meaning of discrimination hai ki hum khud bhi ke paas hote hain toh hum dusro ke jo mental condition hote hain status hote hain usko hum chocolate deal nahi karte unke liye bhi hum khud bhi hath hote hain toh is tarike ke chalte hum is cheez ko share nahi karte hain aur avshoshan hota hi hai kyonki jo chote gamale mein wah bade ho jaate hain aur jab TV ke roop mein dikhne lagte hain dikhne lagte hain logo ko lagta hai ki aap aa gaya hai tab jaakar unki family member jaakar london program chal raha hai yahan yeh situated hote hain yahan se kahaan tak nahi hoti hai aur

एक तू बहुत बड़ा सोसाइटी में अवेयरनेस मीनिंग ऑफ डिस्क्रिमिनेशन है कि हम खुद भी के पास होते

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Deepinder Sekhon

Mental Health Care

0:23
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

क्योंकि किसी के लिए भी एक्सेप्ट करना मुश्किल है ना कि उसको कोई बीमारी है तो सबसे पहले वोट दो डिनायल का आता है कि नहीं मेरे साथ यह हो ही नहीं सकता कि जो लोग बोल रहे हैं वह बिल्कुल गलत बोल रहा है और वह 19 में ट्रक कंस इसलिए आता है क्योंकि आप यह सोच नहीं सकते कि आपके साथ कभी ऐसे कोई प्रॉब्लम हो सकती है

kyonki kisi ke liye bhi except karna mushkil hai na ki usko koi bimari hai toh sabse pehle vote do denial ka aata hai ki nahi mere saath yah ho hi nahi sakta ki jo log bol rahe hain vaah bilkul galat bol raha hai aur vaah 19 mein truck kans isliye aata hai kyonki aap yah soch nahi sakte ki aapke saath kabhi aise koi problem ho sakti hai

क्योंकि किसी के लिए भी एक्सेप्ट करना मुश्किल है ना कि उसको कोई बीमारी है तो सबसे पहले वोट

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Dr. Pallavee Trivedi

REHABILITATION PSYCHOLOGIST

1:32
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

क्योंकि हर एक इंसान की अलग अलग अलग अलग बीमारी अलग है और हर इंसान की दवाई अलग है और जो ट्रीटमेंट की जो चीज है जो बहुत सारे लोगों ने दी होती है तो उसके लिए हमें कोई एक थेरेपी को भी फॉलो नहीं कर सकते भी हाउ टू मेक लैंड ईज़ी हमें वो दिखाओ के लिए पर वह भी कभी ना कभी अगर देखे तो कहीं ना कहीं अलग पड़ जाते हैं हम जिसको ऐसा कहते किसको एंजाइटी डिसऑर्डर है और उसको पैनिक अटैक भी आता है क्या नहीं समझ में नहीं आता तो उसने भी बहुत तरह के

kyonki har ek insaan ki alag alag alag alag bimari alag hai aur har insaan ki dawai alag hai aur jo treatment ki jo cheez hai jo bahut saare logo ne di hoti hai toh uske liye humein koi ek therepy ko bhi follow nahi kar sakte bhi how to make land Easy humein vo dikhaao ke liye par wah bhi kabhi na kabhi agar dekhe toh kahin na kahin alag pad jaate hain hum jisko aisa kehte kisko Anjaiti disorder hai aur usko panic attack bhi aata hai kya nahi samajh mein nahi aata toh usne bhi bahut tarah ke

क्योंकि हर एक इंसान की अलग अलग अलग अलग बीमारी अलग है और हर इंसान की दवाई अलग है और जो ट्री

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Pratishtha Trivedi

Clinical Psychologist

1:28
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नशे ने बताया कि मानसिक बीमारी होती है लोगों को अक्सर लगता है कि जो मानसिक बीमारी है इसका मतलब है कि मुझ में कुछ कमजोरी है ठीक है क्योंकि हमें लगता है कि मन को हम कंट्रोल कर सकते हैं अब मुझे कल को डायबिटीज हो गया तो मुझे लगेगा कि हां यार लोगों को हो जाता है या मेरे परिवार में था इसलिए मुझे हो गया मैं अपने आपको उसमें ब्लेम नहीं करूंगी कि मैंने कुछ गलत करा हूं इसलिए मुझे डायबिटीज हो क्या हमें परेशानी ज्यादा पीता हूं या मेरी आदत अच्छी नहीं है यहां तला हुआ खाना खाता हूं तो भी मैं अपने आप को ब्लेम नहीं करता हूं उसके लिए देखिए मैंने कुछ गलत कहा था इसके कारण से मुझे हार्ट प्रॉब्लम हो गई लेकिन अक्सर मानसिक बीमारी के साथ क्या होता है कि लोग समझते हैं कि उन्हें कुछ कमजोरी है या उन्होंने कुछ गलत किया है या मानसिक बीमारी बुरी बात है जबकि बुरी बात है ही नहीं देते तुम्हारी आंखों की यह बीमारी बीमारी किसी को भी हो सकती है यह बीमारी नहीं पर यह मतलब नहीं है कि आप दूसरों से कम है या आपने कोई कमजोरी है या कुछ गलत कर दो इन कारणों से क्योंकि आप लोगों को ऐसे डिलीट नहीं करना चाहते कि उनकी आंखों में होने की उम्मीद कम है

nashe ne bataya ki mansik bimari hoti hai logo ko aksar lagta hai ki jo mansik bimari hai iska matlab hai ki mujhse mein kuch kamzori hai theek hai kyonki hamein lagta hai ki man ko hum control kar sakte hain ab mujhe kal ko diabetes ho gaya toh mujhe lagega ki haan yaar logo ko ho jata hai ya mere parivar mein tha isliye mujhe ho gaya main apne aapko usme blame nahi karungi ki maine kuch galat kara hoon isliye mujhe diabetes ho kya hamein pareshani zyada pita hoon ya meri aadat achi nahi hai yahan tala hua khana khaata hoon toh bhi main apne aap ko blame nahi karta hoon uske liye dekhiye maine kuch galat kaha tha iske karan se mujhe heart problem ho gayi lekin aksar mansik bimari ke saath kya hota hai ki log samajhte hain ki unhe kuch kamzori hai ya unhone kuch galat kiya hai ya mansik bimari buri baat hai jabki buri baat hai hi nahi dete tumhari aankho ki yah bimari bimari kisi ko bhi ho sakti hai yah bimari nahi par yah matlab nahi hai ki aap dusro se kam hai ya aapne koi kamzori hai ya kuch galat kar do in karanon se kyonki aap logo ko aise delete nahi karna chahte ki unki aankho mein hone ki ummid kam hai

नशे ने बताया कि मानसिक बीमारी होती है लोगों को अक्सर लगता है कि जो मानसिक बीमारी है इसका म

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Dr. Sanjeev Tripathi

Clinical Psychologist

1:37
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सोशल स्टिग्मा है मतलब सोसायटी में बहुत बड़ा भ्रम है कि मानसिक बीमारियां जो है इस बारे में नहीं करते क्योंकि इसको जादू टोने के वीडियो डायलॉग मानसिक बीमारियों को जड़ से हटाना चाहते हैं बताना नहीं चाहते हो सारी बीमारी होती है सी मानसिक बीमारी है तेरे तारीख बीमारी का इलाज होता है ऐसी मानसिक बीमारी का इलाज होता है और कई बार बहुत सारे लोगों की धड़कन है एंजॉय करें उन्होंने भी से खास तौर पर कौन डिप्रेशन डिप्रेशन में बातचीत करें बहुत जरूरी है और पुलिस पर भी मेंटल हेल्थ से जुड़ी हुई बातें इस तरह की समस्याओं पर बोलने में लिखें

social stigma hai matlab sociaty mein bahut bada bharam hai ki mansik bimariyan jo hai is bare mein nahi karte kyonki isko jadu tone ke video dialogue mansik bimariyon ko jad se hatana chahte hain batana nahi chahte ho saree bimari hoti hai si mansik bimari hai tere tarikh bimari ka ilaj hota hai aisi mansik bimari ka ilaj hota hai aur kai baar bahut saare logo ki dhadkan hai enjoy karein unhone bhi se khaas taur par kaun depression depression mein batchit karein bahut zaroori hai aur police par bhi mental health se judi hui batein is tarah ki samasyaon par bolne mein likhen

सोशल स्टिग्मा है मतलब सोसायटी में बहुत बड़ा भ्रम है कि मानसिक बीमारियां जो है इस बारे में

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Niharika Ghosh

Clinical Psychologist

0:36
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए होता है क्या कहना इंडिया में भारत में अभी भी अगर हम दिल्ली में तो कोई मानसिक या नहीं लिखेंगे हमारा कोई सलूशन नहीं हो जो चीज बहुत ही बहुत ज्यादा

dekhie hota hai kya kehna india mein bharat mein abhi bhi agar hum delhi mein toh koi mansik ya nahi likhenge hamara koi salution nahi ho jo cheez bahut hi bahut zyada

देखिए होता है क्या कहना इंडिया में भारत में अभी भी अगर हम दिल्ली में तो कोई मानसिक या नहीं

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SANJAY PRAJAPATI

REHABILITATION PSYCHOLOGIST

0:18
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

वीडियो सड़क में जाने जाते हैं लोग को मानसिक में प्रॉब्लम है तो हम करेंगे

video sadak mein jaane jaate hain log ko mansik mein problem hai toh hum karenge

वीडियो सड़क में जाने जाते हैं लोग को मानसिक में प्रॉब्लम है तो हम करेंगे

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Dr HITESH KUMAR PATEL

Consultant Psychologist

1:33
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आवंटन स्थिति क्या है कि आज बहुत काम है बात कर लूं तो डब्ल्यूएचओ के हिसाब से हेल्प नो टेंशन मतलब हमारे शरीर में कोई बीमारी ना हो ना तो हम जल्दी नहीं मान सकते लेकिन हम को सबसे अधिक होना बहुत जरूरी है तुझे पति बीमार हम सर्दी जुखाम हो गए फीवर आ गया यह सब कुछ होता रहता है उसी तरह से लोगों को है कि हमारे समाज में कि जो लोग वीक है या फिर काफी डिलीट सिस्टम भी है कि जिन लोगों ने पाप किए हुए हैं यह सारे लोग मन करता है हमारे कर्मों की सजा है वगैरह तो इंडिया के ऐसा कल्चर है कि जहां पर नॉट यू टेल मी अबाउट एजुकेशन नोट्स ओं के लिए बहुत दिलीप सिस्टम एजुकेशन में दोनों के बीच में कहीं ना कहीं की चल रहा है इसी वजह से हमारी सोसाइटी ज्यादातर एक्सेप्ट नहीं करती है कि कोई भी हो सकता है मन बीमार हो सकता है हो सकता है तो मैं मान लूंगा कि लोगों में

aawantan sthiti kya hai ki aaj bahut kaam hai baat kar loo toh WHO ke hisab se help no tension matlab hamare sharir mein koi bimari na ho na toh hum jaldi nahi maan sakte lekin hum ko sabse adhik hona bahut zaroori hai tujhe pati bimar hum sardi jukham ho gaye fever aa gaya yeh sab kuch hota rehta hai usi tarah se logo ko hai ki hamare samaj mein ki jo log weak hai ya phir kaafi delete system bhi hai ki jin logo ne paap kiye hue hai yeh saare log man karta hai hamare karmon ki saza hai vagera toh india ke aisa culture hai ki jaha par not you tell me about education notes yuvaon ke liye bahut dilip system education mein dono ke beech mein kahin na kahin ki chal raha hai isi wajah se hamari society jyadatar except nahi karti hai ki koi bhi ho sakta hai man bimar ho sakta hai ho sakta hai toh main maan lunga ki logo mein

आवंटन स्थिति क्या है कि आज बहुत काम है बात कर लूं तो डब्ल्यूएचओ के हिसाब से हेल्प नो टेंशन

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Ms. Sonu Pandey

Rehabilitation Personnel

0:51
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बैटरी सेवर को एक्सेप्ट करना मुश्किल होता है क्योंकि इस समाज में हम रहते हैं उस समाज में लोगों की मन में जो बातें बैठी थी कि अगर ईश्वर की परेशानी है तो यह परेशानी वाली बात है क्योंकि पूरा जो इंसान है वह सारा काम है क्योंकि उसका मन है कंट्रोल कर रहा होता है और अगर मन में कुछ दिक्कत है या वह आजकल तो ऐसा भी है कि कोई अगर साइकोलॉजिस्ट के पास गया है तो उसको कुछ दिक्कत होगी इस तरह का भी लोगों के मन में पहले से ही बातें बैठी हुई क्योंकि समाज में उचित को एक्सेप्ट नहीं कर रही तो यह हमारी समाज में जो क्रांतियों के चलते यह मन में बातें आती है और हम एक्सेप्ट नहीं करते

battery sevar ko except karna mushkil hota hai kyonki is samaj mein hum rehte hain us samaj mein logo ki man mein jo batein baithi thi ki agar ishwar ki pareshani hai toh yah pareshani wali baat hai kyonki pura jo insaan hai vaah saara kaam hai kyonki uska man hai control kar raha hota hai aur agar man mein kuch dikkat hai ya vaah aajkal toh aisa bhi hai ki koi agar psychologist ke paas gaya hai toh usko kuch dikkat hogi is tarah ka bhi logo ke man mein pehle se hi batein baithi hui kyonki samaj mein uchit ko except nahi kar rahi toh yah hamari samaj mein jo krantiyon ke chalte yah man mein batein aati hai aur hum except nahi karte

बैटरी सेवर को एक्सेप्ट करना मुश्किल होता है क्योंकि इस समाज में हम रहते हैं उस समाज में लो

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Archana Chaudhary

Rehabilitation Psychologist

0:59
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मुश्किल होता है क्योंकि आपने कभी कोई भी चीज देख रहे हमारे एरिया में देखता ना उसके अंदर जो भी चल रहा होता है या जो भी हम देख कर रहे हो तो समझ आता है तुझे इतना देरी है तू खुद को प्रॉब्लम को अपने अंदर से बाहर निकाल कर बाहर के गुस्से दृष्टि से देखते हैं तो हमें काफी हद तक सिचुएशन वाला क्लियर नजर आती है

mushkil hota hai kyonki aapne kabhi koi bhi cheez dekh rahe hamare area mein dekhta na uske andar jo bhi chal raha hota hai ya jo bhi hum dekh kar rahe ho toh samajh aata hai tujhe itna deri hai tu khud ko problem ko apne andar se bahar nikaal kar bahar ke gusse drishti se dekhte hain toh hamein kaafi had tak situation vala clear nazar aati hai

मुश्किल होता है क्योंकि आपने कभी कोई भी चीज देख रहे हमारे एरिया में देखता ना उसके अंदर जो

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Ayushi Madaan

Clinical Psychologist

2:13
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आजकल बनाई तो पार्टी है कि हो चुकी है इंडिया में यह बहुत ज्यादा है बाकी करके उसमें क्वेश्चन कैसे उस नहीं है अगर हम इंडिया से बाहर बोले तो फिर भी उन्होंने यह मेंटेनेंस को एक्सेप्ट करना शुरू कर दिया इंडिया में हमारे भारत में प्रतिदिन एक मां की तरह दिया जाता है यहां पर लोग लेबल करना शुरू कर देते हैं थप्पड़ लगा देते के लिए तो पागल है या यह डिप्रेशन यादव जी के तो मानसिक रोगी है और उसे उसी कलर से देखा जाता है जबकि हमें उनसे और भी ज्यादा प्यार से विनम्रता से बात करनी चाहिए ताकि हम उनके साथ एक पिक भेज दो केले पके लेकिन हम हमेशा आप पर हमारी सोसाइटी है गलत करती हैं कि उनको नॉर्मल मौके पर अलग पिक नहीं देना शुरु कर देती है और कल भी प्यार करती है उनको अलग क्लिप करा जाता है इसकी वजह से हमारी सोसाइटी के लोगों में डर बैठ चुका है कि अगर हम किसी मनोविज्ञान के पास जाएंगे तो हम पागल हमें सौंप दिया जाएगा क्योंकि आजकल की मूवीस लिए कई बार दिखा दिया जाता है कि जो साइकॉलजिस्ट छोटा है यह सरकार के उस छोटा है वह शॉप देता है वह दिमाग को गलत तरीके से डायरेक्शन दे देता है जिसके बारे में यह बिल्कुल गलत धारणाएं लोगों में बनाने हैं कि शिकायत साइकॉलजी उसको कंसल्ट करना गलत है जबकि आजकल छोटी-छोटी निशु को लेकर हमारे पास कई बार जो समझदार लोग हैं जो कि जानते हैं कि सब गलत धारणाएं हैं वह अपने छोटे छोटी सोच को लेकर भी आते हैं और ऐसा नहीं है कि सिर्फ लो तो सिर्फ नाम के लोग आते हैं नेपाल की कई ऐसी डॉक्टर भी आए हैं कई बार कोई पुलिस ऑफिसर दीवाने हैं इनकम टैक्स ऑफिस के लोग आते हैं और जिनको लगता है कि उनको कहीं पर भी जरूरत है तो वह भी बेवकूफी अपनी बातों को बात करते हैं और मदद करते हैं तो मेरे साथ पर यह जो सबसे पहले लेबल करना लोगों में शुरू करें थप्पड़ लगाना सर राखी पागल है या मन मानसिक रोग है उसको वह गलत है उनको उतनी ही हूं प्यार की जरूरत है या उतनी ही इज्जत की सोचने से बाकी लोगों को है और उनको वैसे ही प्रेरित करना चाहिए

aajkal banai toh party hai ki ho chuki hai india mein yah bahut zyada hai baki karke usme question kaise us nahi hai agar hum india se bahar bole toh phir bhi unhone yah Maintenance ko except karna shuru kar diya india mein hamare bharat mein pratidin ek maa ki tarah diya jata hai yahan par log lebal karna shuru kar dete hain thappad laga dete ke liye toh Pagal hai ya yah depression yadav ji ke toh mansik rogi hai aur use usi color se dekha jata hai jabki hamein unse aur bhi zyada pyar se vinamrata se baat karni chahiye taki hum unke saath ek pic bhej do kele pke lekin hum hamesha aap par hamari society hai galat karti hain ki unko normal mauke par alag pic nahi dena shuru kar deti hai aur kal bhi pyar karti hai unko alag clip kara jata hai iski wajah se hamari society ke logo mein dar baith chuka hai ki agar hum kisi manovigyan ke paas jaenge toh hum Pagal hamein saunp diya jaega kyonki aajkal ki Movies liye kai baar dikha diya jata hai ki jo psychologist chota hai yah sarkar ke us chota hai vaah shop deta hai vaah dimag ko galat tarike se direction de deta hai jiske bare mein yah bilkul galat dharnae logo mein banane hain ki shikayat psychology usko Consult karna galat hai jabki aajkal choti choti nishu ko lekar hamare paas kai baar jo samajhdar log hain jo ki jante hain ki sab galat dharnae hain vaah apne chote choti soch ko lekar bhi aate hain aur aisa nahi hai ki sirf lo toh sirf naam ke log aate hain nepal ki kai aisi doctor bhi aaye hain kai baar koi police officer deewane hain income tax office ke log aate hain aur jinako lagta hai ki unko kahin par bhi zarurat hai toh vaah bhi bewakoofi apni baaton ko baat karte hain aur madad karte hain toh mere saath par yah jo sabse pehle lebal karna logo mein shuru kare thappad lagana sir rakhi Pagal hai ya man mansik rog hai usko vaah galat hai unko utani hi hoon pyar ki zarurat hai ya utani hi izzat ki sochne se baki logo ko hai aur unko waise hi prerit karna chahiye

आजकल बनाई तो पार्टी है कि हो चुकी है इंडिया में यह बहुत ज्यादा है बाकी करके उसमें क्वेश्चन

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