अपहरण की कोशिश करने पर IPC सेक्शन कौन सी लगती है?...


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भारतीय दंड विधान में अपहरण एवं व्याकरण के अपराध के संबंध में विवरण धारा तीन सौ उनसठ से धारा 370 के अंतर्गत विभिन्न धाराओं में विवरण दिया गया है इसमें व्यापार अपहरण के प्रयोजन और उसके तरीके के आधार पर विभिन्न रंगों की व्यवस्था की गई है कि हत्या के लिए व्यापार करना वेश्यावृत्ति के लिए पर्यावरण कराना कि सीधा बालिका भीख मांगने कराने के लिए व्याकरण कराना अपहरण करना तीसरा 359 से लेकर 369 तक इसके लिए दंड की व्यवस्था है और भाषा भी दी गई तो जहां अपराध की कोशिश होती है अपराध पूर्ण नहीं हुआ अपराध की कोशिश हुई जो धारा में उसकी कोशिश हुई या नहीं अपराध का प्रयत्न हुआ और जहां भारतीय दंड विधान में उस प्रयत्न के लिए कोई व्यवस्था अपराध दंड की नहीं है तो वहां सब उसको धारा 511 से कनेक्ट कर देते हैं धारा 511 उसके साथ रणबीर धारा 511 लगाते हैं कि जैसे कि विवाह धारा 366 विवाद करने के लिए विवश करने के लिए किसी स्त्री को वितरित करना है उस पेज करना तो यहां पर अगर केवल प्रयत्न आता है तो वहां देश के साथ धारा 511 भी जोड़ी जा सकती है और यदि जो अपराध हैं वह इसी धारा के अंतर्गत डिफाइन हो जाते हैं परिभाषित हो जाते हैं या गठित होते हैं और यह धाराओं में ही जो इसके लिए इंग्रेडिएंट्स दिए गए हैं वह लागू हो जाते हैं तो फिर 5 से 11 की आवश्यकता नहीं होती तो यूं समझिए कि जो मुख्य अपराध है अगर वह उसमें उसके प्रयत्न करने की प्रयास करने की कोशिश करने का दंड की व्यवस्था नहीं तो उसमें धारा 511 छोड़ देते हैं और धारा 511 के आईपीसी के प्रावधान के साथ में सजा होती है

bharatiya dand vidhan me apahran evam vyakaran ke apradh ke sambandh me vivran dhara teen sau unasath se dhara 370 ke antargat vibhinn dharaon me vivran diya gaya hai isme vyapar apahran ke prayojan aur uske tarike ke aadhar par vibhinn rangon ki vyavastha ki gayi hai ki hatya ke liye vyapar karna vaishyavriti ke liye paryavaran krana ki seedha balika bhik mangne karane ke liye vyakaran krana apahran karna teesra 359 se lekar 369 tak iske liye dand ki vyavastha hai aur bhasha bhi di gayi toh jaha apradh ki koshish hoti hai apradh purn nahi hua apradh ki koshish hui jo dhara me uski koshish hui ya nahi apradh ka prayatn hua aur jaha bharatiya dand vidhan me us prayatn ke liye koi vyavastha apradh dand ki nahi hai toh wahan sab usko dhara 511 se connect kar dete hain dhara 511 uske saath ranbir dhara 511 lagate hain ki jaise ki vivah dhara 366 vivaad karne ke liye vivash karne ke liye kisi stree ko vitrit karna hai us page karna toh yahan par agar keval prayatn aata hai toh wahan desh ke saath dhara 511 bhi jodi ja sakti hai aur yadi jo apradh hain vaah isi dhara ke antargat define ho jaate hain paribhashit ho jaate hain ya gathit hote hain aur yah dharaon me hi jo iske liye ingredients diye gaye hain vaah laagu ho jaate hain toh phir 5 se 11 ki avashyakta nahi hoti toh yun samjhiye ki jo mukhya apradh hai agar vaah usme uske prayatn karne ki prayas karne ki koshish karne ka dand ki vyavastha nahi toh usme dhara 511 chhod dete hain aur dhara 511 ke ipc ke pravadhan ke saath me saza hoti hai

भारतीय दंड विधान में अपहरण एवं व्याकरण के अपराध के संबंध में विवरण धारा तीन सौ उनसठ से धार

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