धार्मिक संगठन अयोध्या के मुद्दे में श्री श्री की सहभागिता को अस्वीकार करते हैं। क्या यह उचित है? क्यों?...


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Sachin Bharadwaj

Faculty - Mathematics

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विकी शायद आपको पता होगा 2012 में इस मैटर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देखा था जिसमें यह फैसला दिया दो तिहाई जमीन का हिस्सा हिंदुओं के लिए एक तिहाई हिस्सा मुसलमानों के लिए और इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया गया और उसकी हियरिंग आजकल चल रही है रिसेंटली कुछ दिन पहले श्री श्री रविशंकर जो मौलाना सैयद सलमान हुसैन से मिले थे जो ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के मेंबर हैं उनको इस बात पर कमेंट किया किचन टिप्स ब्यूटी ब्लेंडर उसको हिंदुओं को दी जाए ताकि एक मंदिर का निर्माण किया जा सके तो मुझे ऐसा लगता है कि मुस्लिम पर्सनल बोर्ड ने उनके फैसले को इसलिए स्वीकार कर दिया क्योंकि ऑल इंडिया लो बस में बोलने अपनी बात रखी उन्होंने कहा कि अगर वह जगह जो मस्जिद है इस मस्जिद का यह रूल है किन मस्जिद की जो जमीन होती है कि किसी को दान नहीं की जा सकती और ना ही इस को भेजा जा सकता है तो यही वह तर्क है जिसकी वजह से मुस्लिम पर्सनल बोर्ड ने कहां है कि वह केवल सुप्रीम कोर्ट की बात को मानेंगे अब वह किसी भी फैसले को मानना स्वीकार नहीं करेंगे क्योंकि हां वह समय था जब दोनों पक्ष आपस में बैठकर इस मैटर को सॉल्व कर सकते थे लेकिन अब शायद बात उससे ऊपर हो गई इसी वजह से केवल जो मुस्लिम पर्सनल बोर्ड है उसका यही कहना है कि अब वह किसी की हर बात मानेंगे तो उस सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला जो भी बर्थडे है उनके फेवर में आई या उनके अगेंस्ट टाइम

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विकी शायद आपको पता होगा 2012 में इस मैटर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देखा था जिसमें यह फैसला द

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