क्या ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना ज़रूरी है?...


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लेकिन मंदिर जाना आप इसी रूप से समझ सकते हैं जैसे आप जिम जाते हैं तो जिम में आप जो तमाम उपकरण वहां पर है वह आपकी एक्सरसाइज करने में सहायक होते हैं ऐसे ही जो मंदिर है मंदिर की जो मूर्तियां हैं वहां का जो जो मंत्रोच्चारण है पूजा अर्चना है उससे आपकी आत्मिक एक्सरसाइज होती है भीतर की एक्सरसाइज होती है विचारों की एक्सरसाइज होती है और मेडिटेशन भी होता है तो मंदिर जाने की बहुत लाभ है और दूसरी दृष्टि से देखें तो जब मंदिर से घर तक के बीच अगर आप पैदल जाते हैं तो कहीं ना कहीं आप आपका वह भी हो रहे ब्राह्मण भी आप करें तो कई उसके लाभ है

lekin mandir jana aap isi roop se samajh sakte hain jaise aap gym jaate hain toh gym me aap jo tamaam upkaran wahan par hai vaah aapki exercise karne me sahayak hote hain aise hi jo mandir hai mandir ki jo murtiya hain wahan ka jo jo mantrochcharan hai puja archna hai usse aapki atmik exercise hoti hai bheetar ki exercise hoti hai vicharon ki exercise hoti hai aur meditation bhi hota hai toh mandir jaane ki bahut labh hai aur dusri drishti se dekhen toh jab mandir se ghar tak ke beech agar aap paidal jaate hain toh kahin na kahin aap aapka vaah bhi ho rahe brahman bhi aap kare toh kai uske labh hai

लेकिन मंदिर जाना आप इसी रूप से समझ सकते हैं जैसे आप जिम जाते हैं तो जिम में आप जो तमाम उपक

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RAHUL BHADOTIYA

Yog Expert /Motivater/Life Coach

1:55
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जी नमस्कार ने अपने प्रश्न यह पूछा है कि क्या ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना जरूरी है ऐसा जरूरी नहीं है कि आप ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाने से होता है इसमें आप अपना आई श्रम शक्ति के रूप में रखते हैं भक्ति आंतों का कहीं भी बैठे कहीं भी कभी भी कुछ भी कर सकते हैं और वक्त तो ऑल टाइम आपका कर विश्वास ऑल टाइम है भक्ति करें अपने एग्जांपल द सुना होगा कि मीराबाई का मीराबाई का गुणगान करते थे उनके बारे में भजन करके तुम करते थे शबरी शबरी भगवान राम की भक्ति और वह एक निश्चित भक्ति करते उनको उनको यह नहीं था कि क्या मिलेगा या नहीं मिलेगा अलग यही भक्ति होती है भक्ति योग हे भगवान एवं लाभ जो हमारे ग्रंथ है भक्ति के दो प्रकार की बधाई की अपरा और परा अपरा भक्ति में यही है कि आप ईश्वर के प्रति दिन हो चुके हैं अपना वक्त वक्त यही है कि आप मतलब कि आज भी आपको हर जीव और जंतु में आप अपने इश्वर को देखते हैं बाकी और ग्रंथों में भक्ति को नौ प्रकार से बताया गया जिसमें कुछ ऐसे प्रकार हैं सत्संग करना ईश्वर के गुणगान करना और सत्संग करना इसमें गुणगान में भजन कीर्तन करना भगवान का और मंत्र जप करना है संतों का आदर करना संतोष में रहना या नहीं खुश रहना बस जो भी हमारे पास है और अपने आप को विश्व के प्रति अनुषा पर करना मतलब की कृपा निधान जो भी आप हमें मिला हुआ ईश्वर का ही उस ईश्वर में सर्व हर चीज छोड़ देना उसके भरोसे छोड़ देना है कि आपने आपको बस डिपॉट कर देना भगवान के प्रतिशत में अपने आपकी श्रद्धा है जबकि भक्ति धन्यवाद मैं इतना कहना चाहूंगा

ji namaskar ne apne prashna yah poocha hai ki kya ishwar me vishwas rakhne ke liye mandir jana zaroori hai aisa zaroori nahi hai ki aap ishwar me vishwas rakhne ke liye mandir jaane se hota hai isme aap apna I shram shakti ke roop me rakhte hain bhakti anton ka kahin bhi baithe kahin bhi kabhi bhi kuch bhi kar sakte hain aur waqt toh all time aapka kar vishwas all time hai bhakti kare apne example the suna hoga ki mirabai ka mirabai ka gunagan karte the unke bare me bhajan karke tum karte the shabri shabri bhagwan ram ki bhakti aur vaah ek nishchit bhakti karte unko unko yah nahi tha ki kya milega ya nahi milega alag yahi bhakti hoti hai bhakti yog hai bhagwan evam labh jo hamare granth hai bhakti ke do prakar ki badhai ki apara aur para apara bhakti me yahi hai ki aap ishwar ke prati din ho chuke hain apna waqt waqt yahi hai ki aap matlab ki aaj bhi aapko har jeev aur jantu me aap apne ishvar ko dekhte hain baki aur granthon me bhakti ko nau prakar se bataya gaya jisme kuch aise prakar hain satsang karna ishwar ke gunagan karna aur satsang karna isme gunagan me bhajan kirtan karna bhagwan ka aur mantra jap karna hai santo ka aadar karna santosh me rehna ya nahi khush rehna bus jo bhi hamare paas hai aur apne aap ko vishwa ke prati anusha par karna matlab ki kripa nidhaan jo bhi aap hamein mila hua ishwar ka hi us ishwar me surv har cheez chhod dena uske bharose chhod dena hai ki aapne aapko bus dipat kar dena bhagwan ke pratishat me apne aapki shraddha hai jabki bhakti dhanyavad main itna kehna chahunga

जी नमस्कार ने अपने प्रश्न यह पूछा है कि क्या ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना जरूर

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Ghanshyam Vyas

Cultural Guide & Speaker

1:44
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ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना आवश्यक है यदि वह ईश्वर के संदर्भ में अधिक ना जानता हो मंदिर एक साधन है लेकिन व्हाट्सएप भी नहीं है हमारी संस्कृति में दवाई तस्ते अद्वैत की ओर जाना बड़ा कठिन होता है इसलिए जिस प्रकार से हम सबसे पहले वर्ण अक्षर और उनकी पहचान तथा उसके पश्चात शब्द और फिर लिखना सीखते हैं उसी प्रकार से मंदिर यहां एक माध्यम है और इस माध्यम से हम ईश्वर को सुगमता से प्राप्त कर सकते हैं मंदिर एक ऐसा स्थान होता है जहां पर धनात्मक शक्तियां अधिक होती है और इन धनात्मक वातावरण के कारण हमारी जो साधना होती है वह सुगमता से संपन्न होती है इसीलिए ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना यह साधन है लेकिन वह साध्य नहीं है इस के संदर्भ में आप उचित संज्ञान ले सकते हो

ishwar me vishwas rakhne ke liye mandir jana aavashyak hai yadi vaah ishwar ke sandarbh me adhik na jaanta ho mandir ek sadhan hai lekin whatsapp bhi nahi hai hamari sanskriti me dawai taste advait ki aur jana bada kathin hota hai isliye jis prakar se hum sabse pehle varn akshar aur unki pehchaan tatha uske pashchat shabd aur phir likhna sikhate hain usi prakar se mandir yahan ek madhyam hai aur is madhyam se hum ishwar ko sugamata se prapt kar sakte hain mandir ek aisa sthan hota hai jaha par dhanatmak shaktiyan adhik hoti hai aur in dhanatmak vatavaran ke karan hamari jo sadhna hoti hai vaah sugamata se sampann hoti hai isliye ishwar me vishwas rakhne ke liye mandir jana yah sadhan hai lekin vaah saadhy nahi hai is ke sandarbh me aap uchit sangyaan le sakte ho

ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना आवश्यक है यदि वह ईश्वर के संदर्भ में अधिक ना जानत

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Yogi ki Yogshala

Yoga Teacher & Motivational Speaker

3:19
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नमस्कार मित्रों मैं आपके साथ आपका योगी क्या ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना जरूरी है जी बिल्कुल नहीं है मेरे हिसाब से तो बिल्कुल नहीं है आप मंदिर जाएंगे और माथा टेक कर आएंगे तो कोई इसमें कोई विश्वास वाली बात नहीं है विश्वास का मतलब यह है कि भगवान आपको जिस हाल में भी रखें तो आप को उस हाल में खुश रहना है भाई जो भी यही कहना है कि आप जो भगवान ने दिया है उसी में मैं खुश हूं मन की संतुष्टि आत्मा की संतुष्टि किसी प्रकार की जो है विचारों में नहीं पड़ना है किसी भी धर्म अर्थ काम मोक्ष किसी व्यवसाय को विचारों में नहीं पड़ना है आपका मन निर्मल कोमल शुद्ध होना चाहिए और उसके ऊपर हमेशा विश्वास रखना चाहिए कि हां परमात्मा है और जैसा वह कर रहे हो अच्छा कर रहे इस तरह के विचार जब आपके मन में चल रहे होंगे तो आपका यह भी स्वास्थ्य आपको उस परमात्मा तक ले कर जाएगा आप मंदिर में जाकर यदि यह सारी चीजें भी नहीं अप्लाई करते हैं यह फॉलो नहीं करते हैं तो फिर आप का मंदिर जाना भी बेकार है अब घर से ही बैठकर आपका मन शुद्ध होना चाहिए आपके विचार शुद्ध होना चाहिए और किसी भी प्रकार की उसमें जो है समावेश नहीं होना चाहिए क्योंकि कुछ मांगना है उससे कुछ लेना नहीं आपको निश्चित होकर जाना है स्थलों पर जाना है या नहीं आपके अंदर कोई ऐसी फल की इच्छा ही नहीं है तो इस तरह से आपको जाना है कि आपको कुछ मांगना नहीं है बस परमात्मा से मुलाकात हो जाए आपका जीवन सफल हो जाएं और आप तो जो है ना अपना जय भगवान के बैकुंठ वास की ओर प्रस्थान कर सके इस तरह के विचार आपके मन में होना चाहिए और इस तरह के विचार जब आपके मन में होंगे तो आप फिर हर किसी को प्राप्त कर सकते हर भगवान के दर्शन कर सकते हैं लेकिन विश्वास तभी पैदा होगा जब आपके विचार शब्द होंगे और जब विचारों में जो सोचता हो कि तो फिर विश्वास उत्पन्न होने में कोई देरी नहीं है महलों में राखे चाहे झोंपड़ी में जवाब दें धन्यवाद निर्विवाद राम राम कहिए या कहीं भी रहना खुश रहना नहीं करना है कभी किसी का मजाक नहीं उड़ाना है कि बहुत सारी बातों का यदि आप अनुसरण करके इन सब चीजों को छोड़कर सिर्फ आप हर किसी को प्रेम की भावना से देखते हुए काम करेंगे और तो उसमें प्रगाढ़ता आएगी मधुरता आएगी आपका मन शुद्ध होगा और उस परमात्मा को हर्ट रूप में आप खुश देख पाएंगे और वह परमात्मा भी आपको हर ग्रुप में खुशी देगा इस तरह के विचार आपके मन में होनी चाहिए और तभी वह विश्वास से और विश्वास से ही जो है उस भगवान की प्राप्ति की जा सकती है पहले के युग में भी साबित सारे लोग सारे लोग जो है बड़े-बड़े राक्षस लोग सिर्फ विश्वास करके ही बड़े हजारों सालों तक तपस्या करते थे और उन तपस्या में शुद्धता होती थी और शुद्धता होने के बाद ही फिर भगवान दर्शन देकर उनको वर देते थे यानी उस समय के राक्षसों के पास इतनी शक्ति होती थी कि वह भगवान के बाद डायरेक्ट जाकर उनसे मिल सकें लेकिन नहीं जाते थे वहां पर उनको आने के लिए विवश करते थे यानी कि वह राक्षस है लेकिन उन्होंने भगवान को प्राप्त करने के लिए उनको हजारों साल तक करके चलता को जो है अपने आपको इतना मतलब प्रगाढ़ता अंदर से लाएगी भगवान को अपने पास लाने के लिए विवश कर दिया इस तरह के हमें काम करते हुए काम करना होगा विश्वास रखना होगा हर चीज में अभी भगवान प्राप्त होंगे और भगवान को प्राप्त करना आपके और हमारे हाथ में है और इतनी सरलता से हो तो वह प्राप्त नहीं हो सकते क्योंकि हमने कुछ ऐसा काम नहीं किया कि वह हमें तरलता सिद्ध

namaskar mitron main aapke saath aapka yogi kya ishwar me vishwas rakhne ke liye mandir jana zaroori hai ji bilkul nahi hai mere hisab se toh bilkul nahi hai aap mandir jaenge aur matha take kar aayenge toh koi isme koi vishwas wali baat nahi hai vishwas ka matlab yah hai ki bhagwan aapko jis haal me bhi rakhen toh aap ko us haal me khush rehna hai bhai jo bhi yahi kehna hai ki aap jo bhagwan ne diya hai usi me main khush hoon man ki santushti aatma ki santushti kisi prakar ki jo hai vicharon me nahi padhna hai kisi bhi dharm arth kaam moksha kisi vyavasaya ko vicharon me nahi padhna hai aapka man nirmal komal shudh hona chahiye aur uske upar hamesha vishwas rakhna chahiye ki haan paramatma hai aur jaisa vaah kar rahe ho accha kar rahe is tarah ke vichar jab aapke man me chal rahe honge toh aapka yah bhi swasthya aapko us paramatma tak le kar jaega aap mandir me jaakar yadi yah saari cheezen bhi nahi apply karte hain yah follow nahi karte hain toh phir aap ka mandir jana bhi bekar hai ab ghar se hi baithkar aapka man shudh hona chahiye aapke vichar shudh hona chahiye aur kisi bhi prakar ki usme jo hai samavesh nahi hona chahiye kyonki kuch maangna hai usse kuch lena nahi aapko nishchit hokar jana hai sthalon par jana hai ya nahi aapke andar koi aisi fal ki iccha hi nahi hai toh is tarah se aapko jana hai ki aapko kuch maangna nahi hai bus paramatma se mulakat ho jaaye aapka jeevan safal ho jayen aur aap toh jo hai na apna jai bhagwan ke baikunth was ki aur prasthan kar sake is tarah ke vichar aapke man me hona chahiye aur is tarah ke vichar jab aapke man me honge toh aap phir har kisi ko prapt kar sakte har bhagwan ke darshan kar sakte hain lekin vishwas tabhi paida hoga jab aapke vichar shabd honge aur jab vicharon me jo sochta ho ki toh phir vishwas utpann hone me koi deri nahi hai mahalon me rakhe chahen jhompadi me jawab de dhanyavad nirvivaad ram ram kahiye ya kahin bhi rehna khush rehna nahi karna hai kabhi kisi ka mazak nahi udana hai ki bahut saari baaton ka yadi aap anusaran karke in sab chijon ko chhodkar sirf aap har kisi ko prem ki bhavna se dekhte hue kaam karenge aur toh usme pragadhata aayegi madhurata aayegi aapka man shudh hoga aur us paramatma ko heart roop me aap khush dekh payenge aur vaah paramatma bhi aapko har group me khushi dega is tarah ke vichar aapke man me honi chahiye aur tabhi vaah vishwas se aur vishwas se hi jo hai us bhagwan ki prapti ki ja sakti hai pehle ke yug me bhi saabit saare log saare log jo hai bade bade rakshas log sirf vishwas karke hi bade hazaro salon tak tapasya karte the aur un tapasya me shuddhta hoti thi aur shuddhta hone ke baad hi phir bhagwan darshan dekar unko var dete the yani us samay ke rakshason ke paas itni shakti hoti thi ki vaah bhagwan ke baad direct jaakar unse mil sake lekin nahi jaate the wahan par unko aane ke liye vivash karte the yani ki vaah rakshas hai lekin unhone bhagwan ko prapt karne ke liye unko hazaro saal tak karke chalta ko jo hai apne aapko itna matlab pragadhata andar se layegi bhagwan ko apne paas lane ke liye vivash kar diya is tarah ke hamein kaam karte hue kaam karna hoga vishwas rakhna hoga har cheez me abhi bhagwan prapt honge aur bhagwan ko prapt karna aapke aur hamare hath me hai aur itni saralata se ho toh vaah prapt nahi ho sakte kyonki humne kuch aisa kaam nahi kiya ki vaah hamein tarlataa siddh

नमस्कार मित्रों मैं आपके साथ आपका योगी क्या ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना जरूरी

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Satpal Dahiya

Soldier in Indian Army | Spiritual Guide | Social Worker

1:47

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Raseshwari Sharan Ji Maharaj

Shrimad Bhagwat Katha

0:51
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क्या ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना जरूर यदि सर आपके हृदय में है यदि आदमी मंदिर जाता है तो अपनी मनोकामना ओं को लेकर जाता है ऐसा नहीं कि मंदिर ना जाओ तो विश्वास नहीं है जी आप के विश्वास में वही पर होता है जहां पर चारों और भगवान का नाम लिया जाए यदि आप घर में कहो क्या मुझे काम कर रहे हैं पूजा-पाठ कर रहे हैं चारों तरफ से अल्लाह सुनाई देना आप का मन ही नहीं लगे लेकिन मंदिर एक स्थान ऐसा है जहां पर हम जान को भगवान का पूजन कर सकते हैं भगवान के प्रति प्रेम बढ़ा सकते हैं ध्यान लगा सकते हैं कि तुम कर सकते हैं भगवान के ऊपर विश्वास कहीं से बेवकूफ उनके ऊपर भाव ही देना चाहिए उनके ऊपर निर्भर रहना चाहिए क्योंकि जा पर कृपा राम की होई ता पर कृपा करे

kya ishwar me vishwas rakhne ke liye mandir jana zaroor yadi sir aapke hriday me hai yadi aadmi mandir jata hai toh apni manokamana on ko lekar jata hai aisa nahi ki mandir na jao toh vishwas nahi hai ji aap ke vishwas me wahi par hota hai jaha par charo aur bhagwan ka naam liya jaaye yadi aap ghar me kaho kya mujhe kaam kar rahe hain puja path kar rahe hain charo taraf se allah sunayi dena aap ka man hi nahi lage lekin mandir ek sthan aisa hai jaha par hum jaan ko bhagwan ka pujan kar sakte hain bhagwan ke prati prem badha sakte hain dhyan laga sakte hain ki tum kar sakte hain bhagwan ke upar vishwas kahin se bewakoof unke upar bhav hi dena chahiye unke upar nirbhar rehna chahiye kyonki ja par kripa ram ki hoi ta par kripa kare

क्या ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना जरूर यदि सर आपके हृदय में है यदि आदमी मंदिर

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Sri Dhiru G

Spiritual Guru, Engineer

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आपका प्रश्न है क्या ईश्वर में विश्वास करने और रखने के लिए मंदिर जाना जरूरी है मैं आपको जानकारी देना चाहूंगा ईश्वर में विश्वास रखने के लिए यह जरूरी नहीं है कि आप मंदिर ही जाएं मंदिर जाना उतनी आवश्यकता नहीं है जितनी जितनी आवश्यकता है अपने विचारों को ईश्वरीय तत्व से जोड़ना और खुद के शरीर को ईश्वर का मंदिर मानकर का ख्याल रखना और इश्वर की सतह ह्रदय से इबादत करना कोई जरूरी नहीं है कि आप मंदिरी जाएं आप अपने आपको ईश्वर का ही प्रतिनिधि मानकर समय का ख्याल रखें और उनकी इबादत करें जहां है वहीं से एक बात और है कि आप मंदिर जाते हैं तो ठीक उसी प्रकार है जैसे कि आप अपने किसी रिश्तेदार यहां जाते हैं जब तो उनसे एक तालमेल बढ़िया बन जाता है बार बार आना जाना से उनके और आपके बीच का जो संवाद होता है अपनापन आ जाता है तो आप मंदिर जाकर यह चीज को भी बैठा सकते हैं जो कि सामाजिक स्तर से एक भावनात्मक लगाव आपको देना और खिंचाव भी अपने तरफ देगा एक या दो बार मंदिर जाते भी हैं तो आपको फायदा ही होगा इससे कोई नुकसान नहीं है अन्यथा अगर आपके आसपास मंदिर ना है अपना जाना चाहे तो भी कोई दिक्कत नहीं है बस ईश्वर के नियमों का पालन करें कर्तव्यों का पालन करें इस पर स्वतंत्र सन रहेंगे आपसे

aapka prashna hai kya ishwar me vishwas karne aur rakhne ke liye mandir jana zaroori hai main aapko jaankari dena chahunga ishwar me vishwas rakhne ke liye yah zaroori nahi hai ki aap mandir hi jayen mandir jana utani avashyakta nahi hai jitni jitni avashyakta hai apne vicharon ko ishwariya tatva se jodna aur khud ke sharir ko ishwar ka mandir maankar ka khayal rakhna aur ishvar ki satah hriday se ibadat karna koi zaroori nahi hai ki aap mandiri jayen aap apne aapko ishwar ka hi pratinidhi maankar samay ka khayal rakhen aur unki ibadat kare jaha hai wahi se ek baat aur hai ki aap mandir jaate hain toh theek usi prakar hai jaise ki aap apne kisi rishtedar yahan jaate hain jab toh unse ek talmel badhiya ban jata hai baar baar aana jana se unke aur aapke beech ka jo samvaad hota hai apnapan aa jata hai toh aap mandir jaakar yah cheez ko bhi baitha sakte hain jo ki samajik sthar se ek bhavnatmak lagav aapko dena aur khinchav bhi apne taraf dega ek ya do baar mandir jaate bhi hain toh aapko fayda hi hoga isse koi nuksan nahi hai anyatha agar aapke aaspass mandir na hai apna jana chahen toh bhi koi dikkat nahi hai bus ishwar ke niyamon ka palan kare kartavyon ka palan kare is par swatantra san rahenge aapse

आपका प्रश्न है क्या ईश्वर में विश्वास करने और रखने के लिए मंदिर जाना जरूरी है मैं आपको जान

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Vishal Gupta

Astrologer (मार्गदर्शक)

9:31
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका सवाल है क्या ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना जरूरी है देखिए मंदिर पहले तो यह समझ लीजिए कि मंदिर कोई स्थान नहीं होता है जहां मूर्ति बैठाई गई हो स्थापित की गई हो या घंटे लगे हो बजाने के लिए या अगरबत्ती धूप जलाई जा रही हो वहां पर लोग चालीसा पढ़ रहे हैं या मंत्र जाप कर रहे हैं क्या बहुत से लोग वहां पर मत्था टेक रहे तो वह मंदिर हो गया मंदिर बनाने के लिए भले ही इसके लिए की व्यवस्थाएं की जाती हो लेकिन मंदिर वह स्थान होता है जहां पर हम में जाने के बाद में या तो बेहतर अनुभूति होती है या फिर अगर हम इस बात को इस रुप से कहें कि अगर हमारे अंदर वास्तव में ईश्वर के प्रति सच्ची निष्ठा है ईश्वर तो हमारे भीतर पहले हैं मंदिर में बाद में हमने जमा करो नल चल रहा है अभी अभी चल रहा है तो किसी ने पोस्ट किया था बहुत अच्छी डाली थी कि लोगों ने शायद ईश्वर को मंदिर में देखने का प्रयास किया इसलिए भगवान ने मंदिर बंद करवा दिए और मस्जिद बंद करवा दी है यह अहसास कराने के लिए स्वयं के अंदर मुझे ढूंढो तू जीवन में इस बात को सबसे पहले समझ लीजिए कि ईश्वर भले ही मंदिर में हो या ना हो लेकिन ईश्वर आपके अंदर अवश्य है यह सकते हैं लेकिन यहां पर एक बात और समझना जरूरी है कि आपके भीतर जो ईश्वर है आप उस ईश्वर को ढूंढता आपके अंदर जो ईश्वर है उसको ढूंढ भी पाओगे आप स्वयं के ईश्वर को जान पाते हो कि मैं स्वयं के अंदर की मां दिल को देखो क्योंकि जाहिर सी बात है कि जवाब मंदिर में प्रवेश करते हो तो इसका अर्थ यह नहीं कि आपके अंदर सारी सारी बुराइयां खत्म हो जाती है अत्यंत सारी कुटिलता है सारे संसार आए मोह माया सब खत्म हो जाती है ऐसा कुछ नहीं होता है आपकी मने सती मंदिर में जाने के बाद भी वैसे ही रहती है कुछ समय के लिए भले ही थोड़ा सा दिमाग डायवर्ट हो जाता है लेकिन थोड़ी होता है कि मंदिर में जाने के बाद आप एकदम आप एकदम ईश्वर जैसी भावना अपना लगती है आपके मैडम प्रसन्न हो जाता है कुछ हो जाता है कुछ समय के लिए होता है लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि आप मंदिर में जाने के बाद कि मैं सती पूजा किस से बदल गई हो बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो भले ही राम का नाम जपते हैं लेकिन राम उनके अंदर नहीं होते विचारों में राम होते हैं व्यक्ति के भीतर राम प्रवेश नहीं कर पाते क्योंकि प्रवेश करने की योग्यता ही नहीं अपने कोशिश करते हैं वह करते ही नहीं कोशिश विचारों में राम को रखते हैं उनके अंदर अपने अंदर राम नहीं रखते विचारों में नाम रखना और शरीर में राम होना दोनों में जमीन आसमान का अंतर है तो इस पर पर ईश्वर में जिस व्यक्ति को विश्वास होता है वहां उपस्थित जहां खड़ा हो जाता है वही मंदिर बन जाता है हम तो यह बात मानते समझते हैं कि जो व्यक्ति वास्तव में ऐसा में विश्वास रखता है जो सच्चा विश्वास विश्वास बहुत लोग रहते हैं दुनिया में लेकिन जो व्यक्ति वास्तव में इसे में सच्ची निष्ठा रखते हैं वह जहां खड़े होते हैं वही मंदिर होता है नहीं तो बहुत से लोग ऐसे हैं कि मंदिर जाने के बाद भी कोटा लताओं से भरे होते हैं इधर की बात करेंगे मंदिर जाएंगे तो गुजर की बात करेंगे शांति रखेंगी नहीं मंदिर में जाने के बाद भी शांति रखेंगे आज यह देश में हो गया कल कैसा हो रहा था उनके ऐसा होता तो यह तो सबसे बड़ी चीज है कि मंदिर में हो तो मंदिर तो समझो ना परेशान को और सबसे बड़ा मंदिर तो व्यक्ति के भीतर होता है जो सजा खुलता ही नहीं अब बंद ढूंढता बाहर रहता है अब मंदिर बनाया क्यों गया यह एक अलग टॉपर चाहिए अलग अलग विषय है लेकिन मंदिर ईश्वर में आस्था रखने के लिए मंदिर जाना भी जरूरी है यदि हम आपको बता दें क्योंकि कभी-कभी हमें अपना चेहरा देखने के लिए किस की आवश्यकता होती है हमें स्वयं को देखने के लिए शीशे की आवश्यकता होती है उसी प्रकार स्वयं के अंदर ईश्वर को जगाने के लिए मंदिर के ईश्वर को के पास भी जाना आवश्यक होता है अब यहां पर एक बात और कर लेते हमने एक तरफ इसको बताएं बताते हैं कि होता कहना हम जैसे दिल्ली स्नान करते हैं नहाते हैं तो अपने सभी को शुद्ध करते हैं उसी प्रकार से जब हम ईश्वर के समक्ष होते हैं ना कि से होता क्या है कि भगवान की फोटो सामने रखे रहो और आप गलत काम नहीं कर पाओगे अगर आपको भी सच्ची निष्ठा तो हम सच्ची निष्ठा की बात कर रहे हैं ऐसे होता क्या की जब्ती मंदिर में जाता है मैं तो वहां पर रोमांटिक बात थोड़ी करेगा तेरे यहां पर कोई सही है कोई अच्छा नहीं ऐसा बात करने का नहीं करेगा क्योंकि वह स्थान उस इंसान के मन में एक स्थान एक उसके स्थान को जन्म देता है उसके अंदर की शक्ति को बदलता है मंदिर जाने से भी ईश्वर में आस्था बढ़ती है और जिस व्यक्ति को प्रतिदिन साईं सर को नहीं देख पाते हैं उन्हें कभी-कभी मूर्ति में ईश्वर को देखने की आवश्यकता पड़ती है यह भी सही है ऐसा नहीं कि जो हमने पहले बताया उसी बात को माने मंदिर बनाए गए हैं की बत्ती कभी-कभी जब परेशान हो जाए तो ईश्वर के पास जाए यह समझे कि हां ईश्वर ही सब कुछ है हमें बहुत आवश्यक है हम दोनों चीजों को मानते हैं कि भीतर के ईश्वर को देखना और ईश्वर के पास जाना या मंदिर में ईश्वर के पास जाना भी यह भी एक अच्छी चीज है बनाए हैं इसीलिए गया कि हर व्यक्ति ईश्वर को नहीं देख पाते ना इतना आसान नहीं है देखना बड़ा बड़ा ही लिख देते हैं कि ईद ईश्वर अपने अंदर ढूंढो दूसरों में ईश्वर ढूंढो बड़ा अच्छा लगता है लेकिन यह आसान नहीं होता हमारे ऋषि-मुनियों ने यह भी देखा है कि हर व्यक्ति योगी और सन्यासी हर व्यक्ति को नहीं बनाना है हर व्यक्ति को उसके हिसाब से होना चाहिए तो मंदिर में जाना इसलिए जरूरी है कि जवाब मंदिर में जाते हो ना तो आपकी मर्जी थोड़ी सी बदलती है आप जब मंदिर में जाते हो तो वहां पर जो आप ईश्वर को देखते उनकी प्रतिभा को देखते हो तो आपके भीतर एक सकारात्मकता का उदय होता है और अगर एक अच्छा पंडित या ब्राम्हण होगा तो आपको सही रास्ता दिखा सकता है अच्छा अम्मा को शब्द बता देना इसमें लगा तेरे एक्स्ट्रा अच्छा पंडित या अच्छा ब्राह्मण आपको अच्छा रास्ता दिखा सकता है कि ईश्वर तक ईश्वर क्यों 10 मिनट के ऑडियो बताओ आपको सब कुछ नहीं बता देंगे लेकिन हां जितना प्रयास कर रहे हैं उतना बता रहे हैं कि ईश्वर से 1 शब्दों में कहें तो जहां सकते हैं भाई सारे जहां वाकई में सत्य होगा सत्य भी एक बहुत बड़ा सत्य है अगर हम कहे तो सत्य भी एक बहुत बड़ा सत्य है और उस सत्य को समझ पाना वाकई में बहुत बड़ा काम है हर व्यक्ति के बस का नहीं है बड़े-बड़े महा ऋषि यों महात्माओं ने अपना समग्र जीवन लगा दिया सकते को जानने में और यह कोई शक थोड़ी है कि हम तुरंत कह दे वाला तुरंत पता लग जाए तो जीवन में ईश्वर के पास जाना जरूरी है अगर आप मंदिर जा सकते हैं तो जाइए और बल्कि जाना चाहिए और सकने की बात आपको ईश्वर के लिए समय ईश्वर ईश्वर अपने समय नहीं निकालते आपको अपने लिए ईश्वर के पास जाना होता है क्योंकि ईश्वर तो है लेकिन कभी-कभी हमें प्रतिमा की आवश्यकता कभी-कभी हमें स्वयं को देखने के लिए शीशे की आवश्यकता होती इसलिए कभी-कभी स्वयं के भीतर जो मंदिर है उसका दरवाजा खोलने के लिए मंदिर में जाने की आवश्यकता होती ऋषि-मुनियों ने गलत तरीके से नहीं बनाया जैसे आपको एक बात बताते हैं जो व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी होती है जो खत्म हो चुके होते हैं ऐसे कोई महान व्यक्ति हैं उनकी फोटो देखते हैं ना तो हमारे मन में कुछ उनके विचार आते हैं उनके मन में हमारे अंदर कोई विचार पैदा होते हैं कि उन्होंने ऐसा कहा था उनकी फोटो देखकर विचार पैदा हो जाते हैं उसी प्रकार हम जब रामायण भगवत गीता को पढ़ते हैं महाभारत को पढ़ते तो भगवान ने बहुत बड़े-बड़े कार्य किए बहुत बड़े बहुत ही निस्वार्थ प्रेम किया बहुत बड़े-बड़े कार्य किया तो जामुन की फोटो देखते हैं तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि मंदिर भी जाना जरूरी है और स्वयं के भीतर भी युवकों देखना जरूरी है अपने-अपने स्थान पर आवश्यक है दोनों करी तब आप ईश्वर को वास्ते और जिस व्यक्ति को विश्व में विश्वास होता है वह मंदिर जाए ना जाए तो बन जाएगा जरूर जाते हैं और मंदिर जाने से जरूरी है कि जवाब मंदिर जाएं तो वहां भी आपके मन में ईश्वर हो आप सभी सही आप वहां पर ना हो मन से भी आप ईश्वर के समक्ष ही हो समय भी बहुत जरूरी है

aapka sawaal hai kya ishwar me vishwas rakhne ke liye mandir jana zaroori hai dekhiye mandir pehle toh yah samajh lijiye ki mandir koi sthan nahi hota hai jaha murti baithaai gayi ho sthapit ki gayi ho ya ghante lage ho bajane ke liye ya agarbatti dhoop jalai ja rahi ho wahan par log chalisa padh rahe hain ya mantra jaap kar rahe hain kya bahut se log wahan par mattha take rahe toh vaah mandir ho gaya mandir banane ke liye bhale hi iske liye ki vyavasthaen ki jaati ho lekin mandir vaah sthan hota hai jaha par hum me jaane ke baad me ya toh behtar anubhuti hoti hai ya phir agar hum is baat ko is roop se kahein ki agar hamare andar vaastav me ishwar ke prati sachi nishtha hai ishwar toh hamare bheetar pehle hain mandir me baad me humne jama karo nal chal raha hai abhi abhi chal raha hai toh kisi ne post kiya tha bahut achi dali thi ki logo ne shayad ishwar ko mandir me dekhne ka prayas kiya isliye bhagwan ne mandir band karva diye aur masjid band karva di hai yah ehsaas karane ke liye 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आपका सवाल है क्या ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना जरूरी है देखिए मंदिर पहले तो यह

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Jeevan Gururani

Nutraceutical Consultant

7:09

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डा आचार्य महेंद्र

Astroloser,Vastusastro,pravchankarta

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क्या ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना जरूरी है ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना जरूरी नहीं है स्वर्ण मंदिर जाना मनाने आप मंदिर जा सकते बार-बार ईश्वर के स्वरूप को आप ध्यान करते हैं तो मन के विकारों में दूर करने में सहायता की थी इसलिए मंदिर में बार-बार जाने का उल्लेख है किंतु यदि मन एकदम पवित्र है और आप ईश्वर का सतत ध्यान करते हैं तो मंदिर में जा कर के भी ईश्वर में विश्वास रखते हुए इस पद को प्राप्त कर सकते हैं

kya ishwar me vishwas rakhne ke liye mandir jana zaroori hai ishwar me vishwas rakhne ke liye mandir jana zaroori nahi hai swarn mandir jana manane aap mandir ja sakte baar baar ishwar ke swaroop ko aap dhyan karte hain toh man ke vikaron me dur karne me sahayta ki thi isliye mandir me baar baar jaane ka ullekh hai kintu yadi man ekdam pavitra hai aur aap ishwar ka satat dhyan karte hain toh mandir me ja kar ke bhi ishwar me vishwas rakhte hue is pad ko prapt kar sakte hain

क्या ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना जरूरी है ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदि

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Kiran

career Counselling ,Meditation Expert

1:29
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नहीं ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना बिल्कुल भी जरूरी नहीं है ईश्वर हर जगह है हवा में ईश्वर है पानी में ईश्वर है आग में ईश्वर है आप बताइए कहां नहीं है आपकी जो सांसे चल रही है आउट इन कर रहे हैं उसमें ईश्वर है जो आप आंखों से देख रहे हैं उसमें स्वर है हर जगह ईश्वर है जो आप भोजन खा रहे हैं उसमें ईश्वर ईश्वर को हम मंदिर जाते हैं क्योंकि वहां पर पॉजिटिव वाइब्रेशन होती है जब हम वहां जाते हैं तो हमें मानसिक शांति मिलती है वहां सारी चीजें हम जहां जाते हैं हैप्पी रहेंगे तो मर जाते हैं क्योंकि वहां मिलता है रखने के लिए आप मां के रूप में आपके पास इस पर है आपके पास जो पेड़ पौधे है उसने इस बारे में आपके मन में ईश्वर है आपकी आत्मा में ईश्वर हैं आप खुद इस बारे सबसे बड़ी बात आपको भी भगवान है

nahi ishwar me vishwas rakhne ke liye mandir jana bilkul bhi zaroori nahi hai ishwar har jagah hai hawa me ishwar hai paani me ishwar hai aag me ishwar hai aap bataiye kaha nahi hai aapki jo sanse chal rahi hai out in kar rahe hain usme ishwar hai jo aap aakhon se dekh rahe hain usme swar hai har jagah ishwar hai jo aap bhojan kha rahe hain usme ishwar ishwar ko hum mandir jaate hain kyonki wahan par positive vibration hoti hai jab hum wahan jaate hain toh hamein mansik shanti milti hai wahan saari cheezen hum jaha jaate hain happy rahenge toh mar jaate hain kyonki wahan milta hai rakhne ke liye aap maa ke roop me aapke paas is par hai aapke paas jo ped paudhe hai usne is bare me aapke man me ishwar hai aapki aatma me ishwar hain aap khud is bare sabse badi baat aapko bhi bhagwan hai

नहीं ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना बिल्कुल भी जरूरी नहीं है ईश्वर हर जगह है हवा

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J.P. Y👌g i

Psychologist

7:40
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह बसंती उपरोक्त आया हुआ है क्या ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना जरूरी है यानी क्वेश्चन आता है प्रसन्ना रहा है क्या जरूरी है तो यह बात को अगर हम थोड़ा सा विस्तृत रूप ढंग से कहें क्या जरूरी है तो आप के मतलब से जो यह प्रश्न आ रहा है कि इसमें जरूरी नहीं हो सकता है और है तो क्यों है जरूरी है तो आपने जहां तक एहसास अपने मन भावनाओं में कर लिया है कि यह इतनी दूर जाना और दुनिया भर की चीजों से समय से बेहतर टाइम और भी चीजें खर्चा पड़ता है तो फिर से बेहतर यह है कि हम अपने अंदर ही अपने आप को कहीं पर भी शांत भाव से रखे प्रार्थना कर सकते हैं यह मान सकते कि घर में भी हम ईश्वर के विश्वास को जगा सकते हैं लेकिन अगर सोचे कि अगर भावनात्मक रूप से अगर मन भगवान पर विश्वास रखने के बाद जहां रही है तो यह भी सोचा शायद जा सकता है कि सगुण ब्रह्म में हम ईश्वर का दर्शन करने की चेष्टा करते हैं और वह सर्वगुण संपन्न और दिव्या व संयुक्त है जिसकी व्यवस्था और सबसे चरम प्रकाश तक का एक मंच है और वह बहुत ही दिव्य अलौकिक है तो ऐसी चीज अगर कोई चीज नितेश ब्रह्मेश्वर में रहने वाली सत्ता है और वह सर्वशक्तिमान है तो सो किस बात के लिए कि अगर वह कहीं से भी कार्यक्रम संचालित करता है या स्वयं अपने को भी अगर कहीं स्टेट रखता है तो वह अपने अगल-बगल कि शनिवार मेंट को बना रखेगा तो यही चीज अंत कर मन के अंदर आत्मा के केंद्रों के अंदर ऐसी ज्योमैट्रिया उपलब्ध हुई है जिसके आधार पर हम उनके मंदिर के उनकी जो लॉजिकल भावनाएं होती हैं और उसकी दिव्य को इंडिकेट करते हैं जैसे पंचमहाभूते 1010 दिशाएं हैं और इत्यादि और दूसरी बात जो उस कथित रूप से यानी ऊपर से सूक्ष्म होता है और बाहर से बड़ा होता चला जाता है और यह कि वह पूछते किस रूप में निश्चित किया जाता है कि यह जो भी चीज पूर्ण ब्रह्म के लिए अगर कोई शक गुणात्मक सजावट होती है तो वह वास्तव में उतनी दिव्या और महा मनोरम महा कृष्ण बिंदु का आधार बनता है और उसी की ही सब भवनों का वह कारण आधार है तो वह कितने दिव्या और कितने सुंदर युक्त होगा इत्यादि भी भावनाओं के स्तर में भी और अध्यात्मिक जाएं अंदर रूप से साक्षात्कार करते हैं तो उसे आनंद होता है क्योंकि परमेश्वर है तो वहां इश्क उस उचाई में आस्वादन के लिए मनुष्य प्रश्न निर्माण पद की कोशिश में ऐसी अनुभूति प्राप्त करता है जो महा दिव्य मंडल से ओतप्रोत क्षेत्र होता है वही परिषद के भावनात्मक संयुक्त आनंद के प्रकाश का संयुक्त होकर हम बाहरी आवरण में को प्रदर्शित करते हैं और अभ्यास करते हैं कि अगर इसमें अगर ऐसा होता है तो हमें कितनी सावधानी और श्रद्धा और किस परिशुद्धता के साथ महा उपस्थित होना चाहिए इत्यादि हम अपने अंतर्गत में बहुत चीजों का निर्माण करते हैं जो एक आदर्श की परम प्रकाश कान में दर्द होता है क्यों इतना जगत का सबसे श्रेष्ठ और सियार गेस्ट कहे तो उससे बड़ा कोई चीज नहीं है तो इतनी महानता चीज के लिए अगर तो मंदिर के लिए यही है कि जरूरी नहीं है और जरूरी है अभी जिनको अंतर्गत की गहराई में अगर एकाग्रता बन गई और वहां उस अनुभूति के स्तर में अपने आप को लोलिन किए हुए हैं और कुछ न कुछ प्रति फरीद अनुभूति को ले रखे हैं तो उनका विश्वास अपने स्वतंत्र करण में हो जाता है लेकिन भाई रूप से हमारे को बिना अभ्यास किए हुए हमें अंतर जगत की व्यवस्था है उसके प्रति सावधानियां नहीं आ पाती है तो यह सब आचरण और आदर्श की शैली होती है उसी के उसमें एक इंप्रेशन होता है जिस तरह कि अगर हम किसी परिषद में जाए तो वह चीजों का असर एक अलग होता है अगर इंसान कहीं श्मशान में जा रहा है या डॉक्टर क्षेत्र परिसर अस्पताल के सर मैं जा रहा है या कचहरी में जा रहा है मंडी में जा रहा है तुझे हर एक वातावरण का एक अपना प्रभाव होता लेकिन मंदिर का जो स्पेस होता है वह एक स्पेशल दिमाग केविन मार मेंट को पहले से ही सजग कर देता है कि यहां हमें किस बर्ताव में आ गया ना चाहिए तो देवताओं का दर्शन और उसकी उपलब्धि के लिए अपने आप को प्रस्तुत करना एक बहुत बड़ी शिष्टाचार की शैली उपस्थित जगत में सबसे बड़ा आस्थावान का जो एक सर्वश्रेष्ठ दर्शन की प्रति जो भावनात्मक होती है वही मंदिर का एक प्रयोजन बना हुआ है हमें अपने विश्वास का जहाज थे तो यह दूसरी चीज की विधि होती है विश्वास हो चुका होता है तो हम मंदिर ही जाना अपनाते हैं वहां पर उस के दर्शन के लिए अगर विश्वास नहीं है तो होता है तो हम उसको क्वेश्चन और तरक्की और तथ्यों के आधार पर कुछ न कुछ भी उम्र लेते हैं तो यही है क्या पित्त किसी न किसी भावना पर करके फिर हम वापस कैसे बना सकते हैं तो यह जरूरी भी नहीं है और जरूरी भी है जो लोग ईश्वर के नेतृत्व में अपने आप को सब क्षमता में आ चुके हैं उनको कोई जरूरत नहीं है वह अपने हमेशा अपने चिंतन ध्यान से ही हर जगह उसके आदेश का अनुकरण कर सकता है और जो दूसरे आलंबन कर रहे हैं क्योंकि कामनाओं के वशीभूत भी अधिकांश लोग मंदिर की ओर आकर्षित होते हैं तो यह अच्छा इन्वायरमेंट की पर बात है इसमें कोई बुराई की बात ही नहीं है कि मैं मंदिर जा रहा हूं और तो जरूरी है कि नहीं है तो या बाबा वैसे भी बहुत जगह से मन भर आने के लिए घूमते हैं लेकिन एक दार्शनिक तो तुम्हें अगर हम जाते हैं किसी आध्यात्मिक परिसर के अंदर तो उसका एक हमारे पर अच्छा प्रभाव उत्पन्न होता है यह कहना चाहता हूं जीपी योगी धन्यवाद आपको शुभकामनाएं

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darshnik toh tumhe agar hum jaate hain kisi aadhyatmik parisar ke andar toh uska ek hamare par accha prabhav utpann hota hai yah kehna chahta hoon gp yogi dhanyavad aapko subhkamnaayain

यह बसंती उपरोक्त आया हुआ है क्या ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना जरूरी है यानी क

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प्रकार आपका प्रश्न है क्या ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना जरूरी है नहीं ऐसा कोई जरूरी नहीं है कि आप मंदिर जाए तभी आप ईश्वर पर विश्वास कर सकते हैं विश्वास एक आपका अंदरूनी विषय है आपका विश्वास अलग तरीके से हो सकता है कुछ लोगों को मंदिर में जा कर पूजा करने से पाठ करने से अच्छा लगता है और कुछ लोगों को अपने घर में ध्यान करने से अच्छा लगता है इसलिए ऐसा जरूरी नहीं है कि आप मंदिर जाकर ही पूजा करें परंतु हां कुछ जागृत मंदिर होते हैं जहां पर जाने से आपका ध्यान बहुत आसानी से प्रभु भक्ति में लग जाता है वहां पर कुछ ऐसा प्रभाव रहता है कि आप बहुत ही जल्दी भगवान की भक्ति की तरफ बढ़ जाते हैं इसलिए मंदिरों का अपना बेहतर है परंतु आपका विश्वास केवल इस बात पर नहीं है कि आप रोज मंदिर जा रहे हैं तो आपका ईश्वर में विश्वास है और यदि आप नहीं जा रहे नहीं विश्वास धन्यवाद

prakar aapka prashna hai kya ishwar me vishwas rakhne ke liye mandir jana zaroori hai nahi aisa koi zaroori nahi hai ki aap mandir jaaye tabhi aap ishwar par vishwas kar sakte hain vishwas ek aapka andaruni vishay hai aapka vishwas alag tarike se ho sakta hai kuch logo ko mandir me ja kar puja karne se path karne se accha lagta hai aur kuch logo ko apne ghar me dhyan karne se accha lagta hai isliye aisa zaroori nahi hai ki aap mandir jaakar hi puja kare parantu haan kuch jagrit mandir hote hain jaha par jaane se aapka dhyan bahut aasani se prabhu bhakti me lag jata hai wahan par kuch aisa prabhav rehta hai ki aap bahut hi jaldi bhagwan ki bhakti ki taraf badh jaate hain isliye mandiro ka apna behtar hai parantu aapka vishwas keval is baat par nahi hai ki aap roj mandir ja rahe hain toh aapka ishwar me vishwas hai aur yadi aap nahi ja rahe nahi vishwas dhanyavad

प्रकार आपका प्रश्न है क्या ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना जरूरी है नहीं ऐसा कोई

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Dr. Suman Aggarwal

Personal Development Coach

0:55
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ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि दोनों अलग-अलग चीजें हैं विश्वास हमेशा हमारे मन के अंदर होता है वह मंदिर में नहीं मिलेगा ना मंदिर जाने से यह प्रूफ होगा कि हमें विश्वास है इसको चेक करने के लिए आप स्वयं से प्रश्न कर सकते हैं जब आप परेशान हो आपको कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा इसका मतलब और आप परेशान हो रहे हो कि अब मैं क्या करूं कैसे सही करूं इसका मतलब आप के अंदर विश्वास नहीं है विश्वास है तो हर स्थिति में आप अपने आपको एक कव्वाली रख सकूं क्योंकि आपको विश्वास है ना कि हां भगवान है ईश्वर है जो मेरी जो मुझे सही दिशा दिखाएगा जो मेरे लिए सही चीज चने का और मंदिर जाना ना जाना इस बात से इसका कोई कनेक्शन नहीं है

ishwar mein vishwas rakhne ke liye mandir jaane ki koi avashyakta nahi hai kyonki dono alag alag cheezen hain vishwas hamesha hamare man ke andar hota hai vaah mandir mein nahi milega na mandir jaane se yah proof hoga ki hamein vishwas hai isko check karne ke liye aap swayam se prashna kar sakte hain jab aap pareshan ho aapko koi rasta nazar nahi aa raha iska matlab aur aap pareshan ho rahe ho ki ab main kya karu kaise sahi karu iska matlab aap ke andar vishwas nahi hai vishwas hai toh har sthiti mein aap apne aapko ek qawwali rakh sakun kyonki aapko vishwas hai na ki haan bhagwan hai ishwar hai jo meri jo mujhe sahi disha dikhaega jo mere liye sahi cheez chane ka aur mandir jana na jana is baat se iska koi connection nahi hai

ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि दोनों अलग-अलग चीज

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Rasbihari Pandey

लेखन / कविता पाठ

0:23
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ईश्वर में विश्वास की दो धाराएं हैं कुछ लोग सिर्फ सगुण ब्रह्म को मानते हैं कुछ लोग निर्गुण ब्रह्म को मानते हैं कुछ लोग मूर्ति पूजा करते हैं कुछ लोग नहीं करते तो आप की आस्था किस प्रकार की है अब तय करें मंदिर जाना कोई जरूरी नहीं अब घर में भी मंदिर बना सकते हैं

ishwar mein vishwas ki do dharayen hain kuch log sirf shagun Brahma ko maante hain kuch log nirgun Brahma ko maante hain kuch log murti puja karte hain kuch log nahi karte toh aap ki astha kis prakar ki hai ab tay kare mandir jana koi zaroori nahi ab ghar mein bhi mandir bana sakte hain

ईश्वर में विश्वास की दो धाराएं हैं कुछ लोग सिर्फ सगुण ब्रह्म को मानते हैं कुछ लोग निर्गुण

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Kavita Panyam

Certified Award Winning Counseling Psychologist

1:56
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क्या पढ़ने के लिए स्कूल कॉलेज जाना जरूरी है आजकल होम स्कूलिंग भी हो रहा है जहां पर बच्चे जो है वह घर पर बढ़ रहे हैं और ओपन यूनिवर्सिटी के एग्जाम्स लिख रहे हैं अगर आपको लगता है कि ऐसे भी पढ़ सकते हैं तो आपको स्कूल कॉलेज जाने की जरूरत नहीं है ना कोई डिग्री न कुछ एडवोकेट की जरूरत है आप अपना और चाय की दुकान खोल सकते हैं फिर कोई एक बिजनेस खोल सकते हैं जहां पर आप को इन सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं पड़ेगी तो यह आप पर डिपेंड करता है कि आप स्कूल कॉलेज जाना चाहते हैं या फिर घर में पढ़ कर अपना कुछ छोटा मोटा खोलना चाहते हैं मैं ठीक है मैं चाहती हूं कि देखिए पूजा करना ईश्वर पर विश्वास रखना यह सब दिल से अगर होए तो अच्छा है इस पर किसी का बस नहीं चलता किसी का जोर नहीं चलता यहां तक मंदिर जाने के बाद से देखिए मंदिर लोग इसलिए जाते हैं क्योंकि वहां पर जो पोजिटिव वाइब्रेशंस होते हैं वहां पर जो इस तरह का एक पावन वजू एटमॉस्फेयर है उससे लोगों को काफी अच्छा महसूस होता है काफी मन में शांति आती है और काफी हद तक इंसान कहां खो खो जाता है इसलिए लोग मंदिर जाते हैं बात है कि अगर आप मंदिर उन दिनों जाएंगे जहां पर कोई पर्व हो या फिर कोई कोई विशेष दिन हो तो वहां पर वह लाइन में खड़े होकर शायद वह फीलिंग आपको ना आ सके रकम और भागम भाग में शायद आपको इतना अच्छा फील ना हो अगर आपको ऐसा लगता है तो फिर आप उन दिनों में मत जाइए जहां पर कोई स्पेशल पूजा हो आप उन दिनों में चाहिए जहां पर खाली रहता मंदिर और फिर इस बात को जो मैं कह रही हूं उसको महसूस करके देखिए मंदिर जाते हैं सिर्फ मन्नतें मांगने के लिए नहीं लेकिन वहां की चप्पल से जो वाइब्रेशंस है उसको अपने अंदर लेने के लोग मंदिर जाते हैं तो आशा करती हूं आप को समर्थन चुके होंगे कि घर में पूजा कर सकते हैं हम लेकिन मंदिर जाने का बस यही रीजन है कि वहां की पॉजिटिविटी हम अपने अंदर लेना चाहते हैं

kya padhne ke liye school college jana zaroori hai aajkal home schooling bhi ho raha hai jaha par bacche jo hai vaah ghar par badh rahe hain aur open university ke exams likh rahe hain agar aapko lagta hai ki aise bhi padh sakte hain toh aapko school college jaane ki zarurat nahi hai na koi degree na kuch advocate ki zarurat hai aap apna aur chai ki dukaan khol sakte hain phir koi ek business khol sakte hain jaha par aap ko in certificate ki zarurat nahi padegi toh yah aap par depend karta hai ki aap school college jana chahte hain ya phir ghar mein padh kar apna kuch chota mota kholna chahte hain main theek hai chahti hoon ki dekhiye puja karna ishwar par vishwas rakhna yah sab dil se agar hoe toh accha hai is par kisi ka bus nahi chalta kisi ka jor nahi chalta yahan tak mandir jaane ke baad se dekhiye mandir log isliye jaate hain kyonki wahan par jo pojitiv vaibreshans hote hain wahan par jo is tarah ka ek paavan vaju etamasfeyar hai usse logo ko kaafi accha mehsus hota hai kaafi man mein shanti aati hai aur kaafi had tak insaan kahaan kho kho jata hai isliye log mandir jaate hain baat hai ki agar aap mandir un dino jaenge jaha par koi parv ho ya phir koi koi vishesh din ho toh wahan par vaah line mein khade hokar shayad vaah feeling aapko na aa sake rakam aur bhagam bhag mein shayad aapko itna accha feel na ho agar aapko aisa lagta hai toh phir aap un dino mein mat jaiye jaha par koi special puja ho aap un dino mein chahiye jaha par khaali rehta mandir aur phir is baat ko jo main keh rahi hoon usko mehsus karke dekhiye mandir jaate hain sirf mannaten mangne ke liye nahi lekin wahan ki chappal se jo vaibreshans hai usko apne andar lene ke log mandir jaate hain toh asha karti hoon aap ko samarthan chuke honge ki ghar mein puja kar sakte hain hum lekin mandir jaane ka bus yahi reason hai ki wahan ki positivity hum apne andar lena chahte hain

क्या पढ़ने के लिए स्कूल कॉलेज जाना जरूरी है आजकल होम स्कूलिंग भी हो रहा है जहां पर बच्चे ज

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Dr Kanahaiya

Dr Kanahaiya Reki Grand Masstr Apt .Sujok .Homyopathy .

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ईश्वर पर विश्वास करने के लिए किसी मंदिर में जाने की जरूरत नहीं है किसी पर भी विश्वास करके तो विश्वास विश्वास है किसी भी धर्म से संबंध नहीं है जिस पर विश्वास करती हो तो विश्वास कीजिए इसे मंदिर में जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता कि मंदिर में विश्वास है जहां पर विश्वास है आपको वही आपको ईश्वर की प्राप्ति होगी क्या वह आप कहीं भी विश्वास कीजिए जहां पर भी सर को मानोगे भाई आपको सर मिलेगा

ishwar par vishwas karne ke liye kisi mandir mein jaane ki zarurat nahi hai kisi par bhi vishwas karke toh vishwas vishwas hai kisi bhi dharm se sambandh nahi hai jis par vishwas karti ho toh vishwas kijiye ise mandir mein jaane se koi fark nahi padta ki mandir mein vishwas hai jaha par vishwas hai aapko wahi aapko ishwar ki prapti hogi kya vaah aap kahin bhi vishwas kijiye jaha par bhi sir ko manoge bhai aapko sir milega

ईश्वर पर विश्वास करने के लिए किसी मंदिर में जाने की जरूरत नहीं है किसी पर भी विश्वास करके

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Dr Asha B Jain

Dip in Naturopathy, Yoga therapist Pranic healer, Counselor

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जी नहीं ईश्वर में विश्वास करने के लिए मंदिर में जाना कोई भी जरूरी नहीं है क्योंकि कंकड़ में हर जगह ईश्वर विद्यमान है अगर आप एक खाली कमरा में शांत होकर बैठ जाते हैं और अपने ईश्वर में ईश्वर को जिसको भी आप पसंद करते हैं उनको याद करते हैं उनके आराधना करते हैं तो वहीं परमेश्वर है कोई मंदिरों में जाकर चढ़ावा देने की या मंदिरों में रेगुलेटर के साथ जाने की जरूरत नहीं है जाते हैं तो भी कोई प्रॉब्लम नहीं है और नहीं जाकर अपने घर में बैठकर उनके आराधना करते हैं तो भी कोई प्रॉब्लम नहीं है ईश्वर की कोई डिमांड नहीं है आप ही बिल्कुल दिमाग से निकाल दीजिए ईश्वर की कोई डिमांड होती है कि उनको कुछ प्रसाद चढ़ाया जाए कि उनकी कोई पूजा-अर्चना करें कि उनके लिए कोई दीपक जलाया है उनके लिए को भोग लगाएं यह सब मनुष्य नहीं शुरुआत करिए ईश्वर तो ईश्वर है वह सबसे ऊपर हैं उनको किसी भी तरह की कोई डिमांड नहीं उन्हें प्यार की जरूरत है उन्हें आप श्रद्धा रखी है उनसे प्रेम रखी है इसके अलावा और कुछ भी उनको नहीं चाहिए धन्यवाद

ji nahi ishwar mein vishwas karne ke liye mandir mein jana koi bhi zaroori nahi hai kyonki kankad mein har jagah ishwar vidyaman hai agar aap ek khaali kamra mein shaant hokar baith jaate hai aur apne ishwar mein ishwar ko jisko bhi aap pasand karte hai unko yaad karte hai unke aradhana karte hai toh wahi parmeshwar hai koi mandiro mein jaakar chadhava dene ki ya mandiro mein regulator ke saath jaane ki zarurat nahi hai jaate hai toh bhi koi problem nahi hai aur nahi jaakar apne ghar mein baithkar unke aradhana karte hai toh bhi koi problem nahi hai ishwar ki koi demand nahi hai aap hi bilkul dimag se nikaal dijiye ishwar ki koi demand hoti hai ki unko kuch prasad chadaya jaaye ki unki koi puja archna kare ki unke liye koi deepak jalaya hai unke liye ko bhog lagaye yah sab manushya nahi shuruat kariye ishwar toh ishwar hai vaah sabse upar hai unko kisi bhi tarah ki koi demand nahi unhe pyar ki zarurat hai unhe aap shraddha rakhi hai unse prem rakhi hai iske alava aur kuch bhi unko nahi chahiye dhanyavad

जी नहीं ईश्वर में विश्वास करने के लिए मंदिर में जाना कोई भी जरूरी नहीं है क्योंकि कंकड़ मे

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Umesh Upaadyay

Life Coach | Motivational Speaker

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कि दुनिया में इतने सारे लोग हैं अलग अलग व्यक्तित्व अलग अलग पर्सनालिटी क्या सोचने का तरीका अलग है उनका दृष्टिकोण अलग है वह क्या करते हैं कैसे करते हैं क्या सोचते हैं समझते हैं जानते हैं क्या इच्छा रखते हैं क्या उनके विश्वास है कि स्पर्श आधा है सब कुछ अलग उनके जीने का तरीका लगे सोच अलग है और लोग जहां पर यह बात आती है कि क्या हमें ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना जरूरी है तो देखिए ऐसा बिल्कुल जरूरी नहीं है ना यह सही होगा नहीं है गलत होगा ऐसे क्योंकि देखी है अगर किसी को विश्वास है तो कई बार ऐसा भी होता है कि उसे मंदिर या मस्जिद कहीं पर जाने की जरूरत नहीं है वह तो जहां पर भी है वहीं पर परमात्मा में विश्वास रखते हैं आस्था रखता है श्रद्धा उसकी बनी रहती है कोई इंसान चाहते हैं कि वह एक त्रिशूल बना लिया और हर इस दिन हफ्ते में वहां पर मंदिर पर चाय ऐसे तरीके के पूजा पाठ करें तो यह उसकी शब्द है उसके भाव में वह ऐसा कंफर्टेबल महसूस करता है और भी बहुत सारी चीज है जो इंसान अपने कन्वीनियंस और अपनी सोच के हिसाब से बनाता है चाहे वह श्रद्धा हो विश्वास हो यह कोई भी चीज है उसका बिलिंग सिस्टम होता है तो यह बोलना या किसी को कुछ और बोलो करवाना सही नहीं होगा वह तो यह है कि वह कैसा महसूस करते हैं और किस रास्ते पर चलना चाहता है उसको जो सही लगता है वह उसे कल करना चाहिए अंदर से यहां पर कोई मार्गदर्शक बनने की कोई जरूरत नहीं है किसी को भी एक और एक छोटे से भगवान ने ध्यान नहीं लगता तो कोई मूर्ति सामने हो भगवान की आज स्वरूप ऑफ तो वहां ध्यान रखते हैं और मैं उस तरीके से ज्यादा कहां पर भी महसूस करता हूं पूजा पाठ करने में अपनी श्रद्धा दिखाने में यह जो भी कुछ और करता है तो अगर वह ऐसी का पट भी महसूस करते तो उसके लिए वह सही है वह कर सकता है कोई इंसान ऐसे भी उसी तेजी से कुछ नहीं चाहिए बस आंखें बंद कर ले और वह भगवान के समीप है तो दोनों ही बातें ठीक-ठाक है

ki duniya mein itne saare log hai alag alag vyaktitva alag alag personality kya sochne ka tarika alag hai unka drishtikon alag hai vaah kya karte hai kaise karte hai kya sochte hai samajhte hai jante hai kya iccha rakhte hai kya unke vishwas hai ki sparsh aadha hai sab kuch alag unke jeene ka tarika lage soch alag hai aur log jaha par yah baat aati hai ki kya hamein ishwar mein vishwas rakhne ke liye mandir jana zaroori hai toh dekhiye aisa bilkul zaroori nahi hai na yah sahi hoga nahi hai galat hoga aise kyonki dekhi hai agar kisi ko vishwas hai toh kai baar aisa bhi hota hai ki use mandir ya masjid kahin par jaane ki zarurat nahi hai vaah toh jaha par bhi hai wahi par paramatma mein vishwas rakhte hai astha rakhta hai shraddha uski bani rehti hai koi insaan chahte hai ki vaah ek trishool bana liya aur har is din hafte mein wahan par mandir par chai aise tarike ke puja path kare toh yah uski shabd hai uske bhav mein vaah aisa Comfortable mehsus karta hai aur bhi bahut saree cheez hai jo insaan apne convenience aur apni soch ke hisab se banata hai chahen vaah shraddha ho vishwas ho yah koi bhi cheez hai uska billing system hota hai toh yah bolna ya kisi ko kuch aur bolo karwana sahi nahi hoga vaah toh yah hai ki vaah kaisa mehsus karte hai aur kis raste par chalna chahta hai usko jo sahi lagta hai vaah use kal karna chahiye andar se yahan par koi margadarshak banne ki koi zarurat nahi hai kisi ko bhi ek aur ek chote se bhagwan ne dhyan nahi lagta toh koi murti saamne ho bhagwan ki aaj swaroop of toh wahan dhyan rakhte hai aur main us tarike se zyada kahaan par bhi mehsus karta hoon puja path karne mein apni shraddha dikhane mein yah jo bhi kuch aur karta hai toh agar vaah aisi ka pat bhi mehsus karte toh uske liye vaah sahi hai vaah kar sakta hai koi insaan aise bhi usi teji se kuch nahi chahiye bus aankhen band kar le aur vaah bhagwan ke sameep hai toh dono hi batein theek thak hai

कि दुनिया में इतने सारे लोग हैं अलग अलग व्यक्तित्व अलग अलग पर्सनालिटी क्या सोचने का तरीका

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सबकी अपनी मान्यता है और सब का अपना तरीका है ईश्वर को मानने का कुछ लोगों को मंदिर जाकर ही तसल्ली होती है और कुछ लोगों को लगता है कि उनके मन में ही मंदिर है तो ऐसा कहीं रूल नहीं है कोई रिलेशन नहीं है कहीं बंदिश नहीं है कि आपको ईश्वर को मानने के लिए मंदिर जाना ही जरूरी है आप ईश्वर को अपने मन में भी मान सकते हैं आपके नजरिए पर डिपेंड करता है अगर कोई जाता है तो बहुत अच्छी बात है अगर कोई नहीं जाता तो उनका अपना नजरिया इसमें आस्था आती है जहां आस्था होती है वहां कुछ भी सही या गलत नहीं होता आस्था हमें हमारे नजरिए से मिलती है हमारे अपने एक्सपीरियंस से मिलती हैं हम रीवा परवरिश कहां से हुई है हमें हमारे संस्कार क्या है हमें उससे मिलती है तो यह बिल्कुल आपके ऊपर है आपका निर्णय है आपकी आस्था है कि आपको ईश्वर को किस तरह से मानना है

sabki apni manyata hai aur sab ka apna tarika hai ishwar ko manne ka kuch logo ko mandir jaakar hi tasalli hoti hai aur kuch logo ko lagta hai ki unke man mein hi mandir hai toh aisa kahin rule nahi hai koi relation nahi hai kahin bandish nahi hai ki aapko ishwar ko manne ke liye mandir jana hi zaroori hai aap ishwar ko apne man mein bhi maan sakte hain aapke nazariye par depend karta hai agar koi jata hai toh bahut achi baat hai agar koi nahi jata toh unka apna najariya isme astha aati hai jaha astha hoti hai wahan kuch bhi sahi ya galat nahi hota astha hamein hamare nazariye se milti hai hamare apne experience se milti hain hum reeva parvarish kahaan se hui hai hamein hamare sanskar kya hai hamein usse milti hai toh yah bilkul aapke upar hai aapka nirnay hai aapki astha hai ki aapko ishwar ko kis tarah se manana hai

सबकी अपनी मान्यता है और सब का अपना तरीका है ईश्वर को मानने का कुछ लोगों को मंदिर जाकर ही त

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Subarna Chatterjee Adhikary

Head of drpaul's Institute

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हिंदुत्व कोई रिलीजन नहीं है यह कल्चर है इसमें मंदिर जाने में भी कोई पाबंदी नहीं है और मंदिर अगर आप नहीं जाती है वह भी उसने भी कोई प्रॉब्लम नहीं है कोई दिक्कत नहीं है अगर आप फ्री बौद्धिक रूप देखें मतलब वैदिक युग में भी मंदिर का कोई कांटेक्ट नहीं था और हरप्पन सिविलाइजेशन में भी मंदिर का कोई कौन से अपने ही था तो मंदिर जाना और नहीं जाना यह संपूर्ण तो आप पर डिपेंड करता है अगर आपको लगता है जाना चाहिए जरूर जाइए अगर नहीं जाना चाहिए चाहते हैं तो उसमें भी कोई दिक्कत नहीं है किसी भी शास्त्र में यह नहीं कहा गया है कि आप को मंदिर जाना ही है धन्यवाद

hindutv koi religion nahi hai yah culture hai isme mandir jaane mein bhi koi pabandi nahi hai aur mandir agar aap nahi jaati hai vaah bhi usne bhi koi problem nahi hai koi dikkat nahi hai agar aap free baudhik roop dekhen matlab vaidik yug mein bhi mandir ka koi Contact nahi tha aur harappan civilisation mein bhi mandir ka koi kaunsi apne hi tha toh mandir jana aur nahi jana yah sampurna toh aap par depend karta hai agar aapko lagta hai jana chahiye zaroor jaiye agar nahi jana chahiye chahte hain toh usme bhi koi dikkat nahi hai kisi bhi shastra mein yah nahi kaha gaya hai ki aap ko mandir jana hi hai dhanyavad

हिंदुत्व कोई रिलीजन नहीं है यह कल्चर है इसमें मंदिर जाने में भी कोई पाबंदी नहीं है और मंदि

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ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि भगवान ईश्वर में विश्वास रखेंगे मंदिर जाना ही आवश्यक है यदि आप श्रद्धा विश्वास और प्रकृति को मानते हैं अपने मन में ईश्वर का आराधन नाम कीर्तन भजन करते रहेंगे तो मन ही मंदिर है इसलिए अगर आप ईश्वर को मानते तो आप मंदिर जाना आवश्यक नहीं है यह आपके श्रद्धा के ऊपर निर्भर करता है कि आप क्या करना चाहते हैं जय श्री राम

aisa bilkul bhi nahi hai ki bhagwan ishwar mein vishwas rakhenge mandir jana hi aavashyak hai yadi aap shraddha vishwas aur prakriti ko maante hain apne man mein ishwar ka aradhan naam kirtan bhajan karte rahenge toh man hi mandir hai isliye agar aap ishwar ko maante toh aap mandir jana aavashyak nahi hai yah aapke shraddha ke upar nirbhar karta hai ki aap kya karna chahte hain jai shri ram

ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि भगवान ईश्वर में विश्वास रखेंगे मंदिर जाना ही आवश्यक है यदि आप श्

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यह प्रश्न तो आध्यात्मिक प्रश्न है यह निर्भर करता है कि आप की आत्म चेतना कितनी जागृत है अगर आप की आत्म चेतना आत्मिक ऊर्जा को समझने का उसके साथ साक्षात करने की क्षमता आपके अंदर विकसित है यानी कि आप अपनी इंद्रियों को अपने नियंत्रण में रख सकते हैं अपने विचारों को अपने नियंत्रण में रख सकते हैं तो निश्चित रूप से आप अपने खुद के भीतर ईश्वर का भगवान का बहुत कर सकते हैं परंतु यदि आपकी मन स्थिति उसे पर कि नहीं है तो निश्चित रूप से आप को मंदिर जाने का प्रयोग करना चाहिए मंदिर में विक्रम होते हैं मूर्तियां होती है मूर्तियों के प्रति हम अपनी भावनाओं को समर्पित करते हैं हम क्या लाखों लोग वहां पर जाते हैं और अपनी भावनाओं को एक रूप में समर्पित करते हैं जिसके कारण हमारे विचारों में एक अनुशासन आता है हमारी दृष्टि जो है वह आत्म केंद्रित होती है एक समय ऐसा भी आता है जब आप उस सीमा से ऊपर उठ जाते हैं तो फिर आप अपने घर में साधना करें या चलते हुए साधना करें या सोचते हुए साधना करें उसी अवस्था में आप जा सकते हैं मंदिर बड़े-बड़े संतों महापुरुषों के द्वारा भी अपने आत्म चेतना के लिए अपनी साधना के लिए प्रयोग में लिया गया है और हम जैसे सामान्य पुरुष कि उसको अपने प्रयोग में ले सकते हैं यह हमारी सुविधा के लिए है परंतु इस को आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो अपने अंदर की छोरी तत्व को पहचानने के लिए उसको जागृत करने के लिए मंदिर का प्रथम प्रयोग ठीक है अच्छा है अनुशासित रखने के लिए अपने आप को यह सही मार्ग है

yah prashna toh aadhyatmik prashna hai yah nirbhar karta hai ki aap ki aatm chetna kitni jagrit hai agar aap ki aatm chetna atmik urja ko samjhne ka uske saath sakshat karne ki kshamta aapke andar viksit hai yani ki aap apni indriyon ko apne niyantran mein rakh sakte hain apne vicharon ko apne niyantran mein rakh sakte hain toh nishchit roop se aap apne khud ke bheetar ishwar ka bhagwan ka bahut kar sakte hain parantu yadi aapki man sthiti use par ki nahi hai toh nishchit roop se aap ko mandir jaane ka prayog karna chahiye mandir mein vikram hote hain murtiya hoti hai murtiyon ke prati hum apni bhavnao ko samarpit karte hain hum kya laakhon log wahan par jaate hain aur apni bhavnao ko ek roop mein samarpit karte hain jiske karan hamare vicharon mein ek anushasan aata hai hamari drishti jo hai vaah aatm kendrit hoti hai ek samay aisa bhi aata hai jab aap us seema se upar uth jaate hain toh phir aap apne ghar mein sadhna kare ya chalte hue sadhna kare ya sochte hue sadhna kare usi avastha mein aap ja sakte hain mandir bade bade santo mahapurushon ke dwara bhi apne aatm chetna ke liye apni sadhna ke liye prayog mein liya gaya hai aur hum jaise samanya purush ki usko apne prayog mein le sakte hain yah hamari suvidha ke liye hai parantu is ko aadhyatmik drishti se dekha jaaye toh apne andar ki chhori tatva ko pahachanne ke liye usko jagrit karne ke liye mandir ka pratham prayog theek hai accha hai anushasit rakhne ke liye apne aap ko yah sahi marg hai

यह प्रश्न तो आध्यात्मिक प्रश्न है यह निर्भर करता है कि आप की आत्म चेतना कितनी जागृत है अगर

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Vikas Singh

Political Analyst

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देखिए इस और सर्वव्यापी होता है इस पर बात ना कहीं से भी की जा सकती है लेकिन मंदिर वह जगह होता है जहां पर शांत वातावरण होता है और हमारे दिमाग में पहले से ही यह होता है कि नहीं मंदिर में मंदिर में जाने से मुझे पूजा करना है जब इंसान मंदिर में सोच कर जाता है तो उसका कंसंट्रेशन भगवान पर होता है वह घर पर नहीं हो पाता है तो मंदिर में जाना जरूरी है आप मंदिर में अगर जाने योग्य नहीं है जा नहीं पाते तो अब घर से भी भगवान की प्रार्थना कर सकते हैं और आप मन से ही आप सब प्रार्थना कर सकते हैं लेकिन मंदिर देखिए बनाया गया है मंदिर में भगवान का वास होता है वह मंदिर आपके घर में भी हो सकता है और आपके गांव में भी हो सकता है और कहीं भी मंदिर हो सकता है तो मंदिर में जाने से क्या होता है कि दिमाग शांत रहता है वहां पर भगवान की प्रार्थना करते हो वहां पर भगवान का वास भी होता है और वहां जाने से ज्यादा कंसंट्रेशन अच्छा रहता है पूजा-पाठ में ध्यान हाउ दो कि घर पर नहीं रहता है तो मंदिर जाना बहुत जरूरी है आप मंदिर पर जाते हो तो अच्छे से 1 मिनट आधा मिनट आप अच्छे से भगवान की प्रार्थना करते हो जो भगवान की आप अच्छे से प्रार्थना करते हो तो आपको संतुष्टि मिलती है सकारात्मक पोस्ट प्राप्त होता है आपको और जब कुछ कार्य करते हो तो उसमें सफलता हासिल होती है धन्यवाद

dekhiye is aur sarvavyapi hota hai is par baat na kahin se bhi ki ja sakti hai lekin mandir vaah jagah hota hai jaha par shaant vatavaran hota hai aur hamare dimag mein pehle se hi yah hota hai ki nahi mandir mein mandir mein jaane se mujhe puja karna hai jab insaan mandir mein soch kar jata hai toh uska kansantreshan bhagwan par hota hai vaah ghar par nahi ho pata hai toh mandir mein jana zaroori hai aap mandir mein agar jaane yogya nahi hai ja nahi paate toh ab ghar se bhi bhagwan ki prarthna kar sakte hain aur aap man se hi aap sab prarthna kar sakte hain lekin mandir dekhiye banaya gaya hai mandir mein bhagwan ka was hota hai vaah mandir aapke ghar mein bhi ho sakta hai aur aapke gaon mein bhi ho sakta hai aur kahin bhi mandir ho sakta hai toh mandir mein jaane se kya hota hai ki dimag shaant rehta hai wahan par bhagwan ki prarthna karte ho wahan par bhagwan ka was bhi hota hai aur wahan jaane se zyada kansantreshan accha rehta hai puja path mein dhyan how do ki ghar par nahi rehta hai toh mandir jana bahut zaroori hai aap mandir par jaate ho toh acche se 1 minute aadha minute aap acche se bhagwan ki prarthna karte ho jo bhagwan ki aap acche se prarthna karte ho toh aapko santushti milti hai sakaratmak post prapt hota hai aapko aur jab kuch karya karte ho toh usme safalta hasil hoti hai dhanyavad

देखिए इस और सर्वव्यापी होता है इस पर बात ना कहीं से भी की जा सकती है लेकिन मंदिर वह जगह हो

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मुरारी स्वामी, छपरा बिहार

सन्त समाजसेवी सह Journalist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बड़ा ही सुंदर प्रश्न है कि ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना जरूरी है इसका उत्तर है सियाराम मय सब जग जानी करहु प्रणाम जोरि जुबानी अर्थात इस जगत में जितने भी जीव जंतु हैं उसमें भगवान का निवासी है भगवान श्रीकृष्ण भी कहते हैं कि संसार में जितने भी प्राणी हैं सभी में मैं आत्मा रूप में निवास करता हूं इससे स्पष्ट होता है कि मंजिल जाना कोई जरूरी नहीं है जहां भी गरीब लोग देखें आवश्यक आवश्यकता मंद लोग देखें उनकी हेल्प करनी चाहिए यही ईश्वर की सच्ची पूजा श्रद्धा और घना है जय श्री कृष्णा धन्यवाद

bada hi sundar prashna hai ki ishwar mein vishwas rakhne ke liye mandir jana zaroori hai iska uttar hai siyaram may sab jag jani karahu pranam jori jubani arthat is jagat mein jitne bhi jeev jantu hain usme bhagwan ka niwasi hai bhagwan shrikrishna bhi kehte hain ki sansar mein jitne bhi prani hain sabhi mein main aatma roop mein niwas karta hoon isse spasht hota hai ki manjil jana koi zaroori nahi hai jaha bhi garib log dekhen aavashyak avashyakta mand log dekhen unki help karni chahiye yahi ishwar ki sachi puja shraddha aur ghana hai jai shri krishna dhanyavad

बड़ा ही सुंदर प्रश्न है कि ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना जरूरी है इसका उत्तर है

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Dr. Alpana Rastogi

Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बिल्कुल नहीं ईश्वर पर विश्वास करने के लिए टेंपल मंदिर मस्जिद इन सब जगह पर जाने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि उसे सिर्फ यह होता है कि आप अपने आपको स्ट्रक्चर करते मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे बनाए इसलिए कहते कि आप अपने आप को स्ट्रक्चर कर सके क्योंकि जैसे अगर स्कूल ना होते तो क्या पढ़ाई नहीं होती होती लेकिन उतना स्ट्रक्चर इतने अच्छे ढंग से बिल्कुल नहीं होती स्कूल इसी तरह मंदिर और गुरुद्वारे में जाने के लिए जाने विश्वर का ध्यान कर रही हो सकता है तो नहीं है लेकिन वहां है कि स्ट्रक्चर तरीका है वह जगह उसी काम के लिए सबसे आसान हो जाता है लेकिन इसकी बिल्कुल जरूरत नहीं है क्या वही जाएंगे तभी आपको इस चीज का कोई लाभ होगा

bilkul nahi ishwar par vishwas karne ke liye temple mandir masjid in sab jagah par jaane ki koi zarurat nahi hai kyonki use sirf yah hota hai ki aap apne aapko structure karte mandir masjid gurudware banaye isliye kehte ki aap apne aap ko structure kar sake kyonki jaise agar school na hote toh kya padhai nahi hoti hoti lekin utana structure itne acche dhang se bilkul nahi hoti school isi tarah mandir aur gurudware mein jaane ke liye jaane vishwar ka dhyan kar rahi ho sakta hai toh nahi hai lekin wahan hai ki structure tarika hai vaah jagah usi kaam ke liye sabse aasaan ho jata hai lekin iski bilkul zarurat nahi hai kya wahi jaenge tabhi aapko is cheez ka koi labh hoga

बिल्कुल नहीं ईश्वर पर विश्वास करने के लिए टेंपल मंदिर मस्जिद इन सब जगह पर जाने की कोई जरूर

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

0:39
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है क्या ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना जरूरी है जी नहीं ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना जरूरी है मंदिर के पाकिस्तान को प्रार्थना मंदिर के खड़े बाहर नहीं रहना हर कोई याद कर सकते हो ठीक है

aapka prashna hai kya ishwar mein vishwas rakhne ke liye mandir jana zaroori hai ji nahi ishwar mein vishwas rakhne ke liye mandir jana zaroori hai mandir ke pakistan ko prarthna mandir ke khade bahar nahi rehna har koi yaad kar sakte ho theek hai

आपका प्रश्न है क्या ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना जरूरी है जी नहीं ईश्वर में वि

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नई शक्ति प्राप्त करने के लिए मंदिर जाना कोई शर्त नहीं है यदि आप मानते हैं कि सब अंदर जाते हैं बहुत अच्छी बात नहीं जाते हैं तो घर पर भी आपका जन्म कीर्तन मनन चिंतन स्मरण बंधन आदि कुछ भी मैं थोड़ा सकते हैं और यह कोई आवश्यकता के लिए पक्की पहचान नहीं है कि मंदिर जो नहीं जाते हो आज तक नहीं है कि नाश्ते के यह गलतफहमी है जो मंदिर नहीं जाते हैं यह उनका अपना विचार हैं और जो मंदिर जाते हैं कि उनका अपना विचार हर व्यक्ति को अपने अपने अपने थोड़ी सी सब को नमन वंदन स्मरण भजन करने का अपना अधिकार है जो जिसमें पढ़ते ही सब कुछ आता है ईश्वर इसी में पसंद है इसलिए नहीं कहता है कि आपको मंदिर जाकर के यह फास्ट ना करें ठीक है ब्लॉक साकार बाजी पास का मंदिर में करते हैं लेकिन आपको आबू चुनाव प्रचार में भी नहीं पढ़ना चाहिए जो जिस महत्व ध्यान करें यह साइड में दर्द होना चाहिए सभी ने उनसे मिलने के लिए जरूरी नहीं था कि मंदिर गई थी और जाने उनसे जो मिली थी उसके लिए जरूरी नहीं था क्यों मंदिर जाती थी ऐसा कुछ नहीं है इस वक्त भाव का भूखा है और भावनाओं से ही सब को नमन होता है यह तो एक माध्यम है मंदिर ज्यादा करजा करजा माया गुरुद्वारे जामिया मस्जिद और भावनाओं में ज्यादा डिपेंड होता है उसको भावनाओं से जाना चाहिए उसके प्रति समर्पित काम होना चाहिए उसमें विश्वास होना चाहिए यह परम आवश्यक है ना कि कोई मंदिर मस्जिद गिरजाघर या यह तो उसको ध्यान करने के साधन मात्र हैं सभी अच्छे कपड़े आपको जो मेथड अच्छा लगे उसी से आप भगवान का ध्यान भजन कीर्तन मनन चिंतन करें

nayi shakti prapt karne ke liye mandir jana koi sart nahi hai yadi aap maante hain ki sab andar jaate hain bahut achi baat nahi jaate hain toh ghar par bhi aapka janam kirtan manan chintan smaran bandhan aadi kuch bhi main thoda sakte hain aur yah koi avashyakta ke liye pakki pehchaan nahi hai ki mandir jo nahi jaate ho aaj tak nahi hai ki naste ke yah galatfahamee hai jo mandir nahi jaate hain yah unka apna vichar hain aur jo mandir jaate hain ki unka apna vichar har vyakti ko apne apne apne thodi si sab ko naman vandan smaran bhajan karne ka apna adhikaar hai jo jisme padhte hi sab kuch aata hai ishwar isi mein pasand hai isliye nahi kahata hai ki aapko mandir jaakar ke yah fast na kare theek hai block saakar baazi paas ka mandir mein karte hain lekin aapko aabu chunav prachar mein bhi nahi padhna chahiye jo jis mahatva dhyan kare yah side mein dard hona chahiye sabhi ne unse milne ke liye zaroori nahi tha ki mandir gayi thi aur jaane unse jo mili thi uske liye zaroori nahi tha kyon mandir jaati thi aisa kuch nahi hai is waqt bhav ka bhukha hai aur bhavnao se hi sab ko naman hota hai yah toh ek madhyam hai mandir zyada kurja kurja maya gurudware jamia masjid aur bhavnao mein zyada depend hota hai usko bhavnao se jana chahiye uske prati samarpit kaam hona chahiye usme vishwas hona chahiye yah param aavashyak hai na ki koi mandir masjid girjaghar ya yah toh usko dhyan karne ke sadhan matra hain sabhi acche kapde aapko jo method accha lage usi se aap bhagwan ka dhyan bhajan kirtan manan chintan karen

नई शक्ति प्राप्त करने के लिए मंदिर जाना कोई शर्त नहीं है यदि आप मानते हैं कि सब अंदर जाते

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Ved Prakash Arya

Health and Fitness Expert

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना बिलकुल भी जरूरी नहीं है अगर स्वर जब ईश्वर सर्वव्यापक है अभी मैं सर्वांतर्यामी है तभी वह सर्वशक्तिमान हो सकता है तो जो ईश्वर कण कण में बसा हुआ है उसको मंदिर में मानना पहली बात बिल्कुल गलत है और जब व्यक्ति को अपने शरीर इन पेड़ पौधा सूर्य नदी नाले पहाड़ पर्वत इन फूल विभिन्न प्रकार के जानवरों पतंगों को देख कर के अगर ईश्वर पर विश्वास नहीं होता तब को मंदिर जाने पर कभी भी विश्वास नहीं हो सकता सिर्फ आप मंदिर में दूसरे को जाना देख करके या अपने पंडितों पुजारियों के कहने पर सिर्फ आप मंदिर जा सकते हैं श्रद्धा व विश्वास से कभी नहीं जा सकते

ishwar mein vishwas rakhne ke liye mandir jana bilkul bhi zaroori nahi hai agar swar jab ishwar sarvavyapak hai abhi main sarvantaryami hai tabhi vaah sarvshaktimaan ho sakta hai toh jo ishwar kan kan mein basa hua hai usko mandir mein manana pehli baat bilkul galat hai aur jab vyakti ko apne sharir in ped paudha surya nadi naale pahad parvat in fool vibhinn prakar ke jaanvaro patangon ko dekh kar ke agar ishwar par vishwas nahi hota tab ko mandir jaane par kabhi bhi vishwas nahi ho sakta sirf aap mandir mein dusre ko jana dekh karke ya apne pandito pujariyon ke kehne par sirf aap mandir ja sakte hain shraddha va vishwas se kabhi nahi ja sakte

ईश्वर में विश्वास रखने के लिए मंदिर जाना बिलकुल भी जरूरी नहीं है अगर स्वर जब ईश्वर सर्वव्य

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