भारत में महिलाओं की संख्या इतनी कम क्या है।?...


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Amber Rai

सुनो ..सुनाओ..सीखो!

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हां देखे हैं आज के जमाने में जो है वह दोनों आदमियों को और महिलाओं दोनों को समान रुप से जो है वह अपना अपना अधिकार दिया हुआ है और आजकल दोनों में डिफरेंस नहीं होता अगर कोई भी काम होता है तो आजकल दोनों को ज्यादा पर मिले बल्कि लेडीस को कभी-कभी ज्यादा पर मिल जाती है मर्दों से तो बात है कि आजकल गांव में भी कभी-कभी तो है फीमेल बॉडी साइड होता है या नहीं अगर बच्चा लोग को पता चल जाता है कि आप एक औरत के पेट में अगर बच्चा जो है वह लड़की है लड़की को नहीं चाहता शहरों में तो नहीं हो रहा है यह सब चीजें बंद हुए पुरानी गांव में आजकल बहुत हो रहा जो पुरानी सोच के लोग होते हैं अगर लड़की हो तो बच्चा जो है वह लोग गिरा देते हैं और उनकी पांच लड़के की होती है इसलिए ऐसा मसीह सोसाइटी में जो है अभी थोड़ा ही टाइम बैलेंस है अगर वह नहीं होता मेल फीमेल इशू जो है वह मेल का या ज्यादा है और फीमेल का थोड़ा काम है

haan dekhe hain aaj ke jamane mein jo hai vaah dono adamiyo ko aur mahilaon dono ko saman roop se jo hai vaah apna apna adhikaar diya hua hai aur aajkal dono mein difference nahi hota agar koi bhi kaam hota hai toh aajkal dono ko zyada par mile balki ladies ko kabhi kabhi zyada par mil jaati hai mardon se toh baat hai ki aajkal gaon mein bhi kabhi kabhi toh hai female body side hota hai ya nahi agar baccha log ko pata chal jata hai ki aap ek aurat ke pet mein agar baccha jo hai vaah ladki hai ladki ko nahi chahta shaharon mein toh nahi ho raha hai yah sab cheezen band hue purani gaon mein aajkal bahut ho raha jo purani soch ke log hote hain agar ladki ho toh baccha jo hai vaah log gira dete hain aur unki paanch ladke ki hoti hai isliye aisa masih society mein jo hai abhi thoda hi time balance hai agar vaah nahi hota male female issue jo hai vaah male ka ya zyada hai aur female ka thoda kaam hai

हां देखे हैं आज के जमाने में जो है वह दोनों आदमियों को और महिलाओं दोनों को समान रुप से जो

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amitkul

CA student,pursuing bcom too

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत में जहां महिलाओं की संख्या में लोग काम है क्योंकि हिंदू हिंदू हिंदुस्तान में महिला बेटी अगर पैदा होती है तो वह वह हर चीज होती है ना बहुत ज्यादा और अपना मन झाले नहीं पढ़ाती है पहली बार दूसरी बात है उसके उसे जो है काफी खर्च करना पड़ा उसके लिए क्या-क्या करना पड़ता है तो छोटे-छोटे बच्चे जो है वीडियो बच्चों को मार दिया करते थे यह प्रतिष्ठान इंडिया में जो काफी हद तक गोरा है और दूसरा 110037 जाने कि उसका घर एक महिला का पति मर गया तो उससे महिला को भी मार देना चाहिए उसके पति के चेता में चंदा चमके जो एक बहुत बुरी शक्ति अस्तित्व एहसास कहीं करें कारण है तो फिर उसके बाद सोनोग्राफी मशीन आने हेलो कैसे खिलाकर डॉक्टर को चेक करा ले जिसे की बेटी है अगर बेटी होती थी तो उसे पैदा ही नहीं हो रही थी उसका पोषण करने का क्या किया जाता कारण के वजह से महिलाओं की संख्या भारत में कब है

bharat mein jaha mahilaon ki sankhya mein log kaam hai kyonki hindu hindu Hindustan mein mahila beti agar paida hoti hai toh vaah vaah har cheez hoti hai na bahut zyada aur apna man jhale nahi padhati hai pehli baar dusri baat hai uske use jo hai kaafi kharch karna pada uske liye kya kya karna padta hai toh chote chhote bacche jo hai video baccho ko maar diya karte the yah pratisthan india mein jo kaafi had tak gora hai aur doosra 110037 jaane ki uska ghar ek mahila ka pati mar gaya toh usse mahila ko bhi maar dena chahiye uske pati ke cheta mein chanda chamke jo ek bahut buri shakti astitva ehsaas kahin kare karan hai toh phir uske baad sonography machine aane hello kaise khilakar doctor ko check kara le jise ki beti hai agar beti hoti thi toh use paida hi nahi ho rahi thi uska poshan karne ka kya kiya jata karan ke wajah se mahilaon ki sankhya bharat mein kab hai

भारत में जहां महिलाओं की संख्या में लोग काम है क्योंकि हिंदू हिंदू हिंदुस्तान में महिला बे

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Bhaskar Saurabh

Politics Follower | Engineer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

समाज में जीने का अधिकार सभी को है इसके लिए संविधान में अनेक मौलिक अधिकार सुनिश्चित किए गए हैं जिसके तहत देश के कोई भी नागरिक को बिना लिंग जाति धर्म भेद के आधार पर देश के किसी भी कोने में रहने का अधिकार प्राप्त है लेकिन आज के समय में इन मौलिक अधिकारों पर प्रश्नचिन्ह लगते जा रहा है क्योंकि भारतीय समाज में लिंग के आधार पर महिलाओं से जीने का अधिकार लगभग ही नहीं जा रहा है और कई विकासशील देश जैसे कि भारत एक ऐसी जगह बन गई है महिलाओं के लिए जहां पर उनकी संख्या लगातार घटती जा रही है और इसकी वजह यही है कि लड़कियों को पैदा होने से पहले ही गर्भ में ही मार दिया जाता है जाहिर है कि आज का जो सभ्य समाज है वह सभी कहलाने के लायक नहीं है समूचे विश्व में पुरुषों के अनुपात में महिलाओं की जो संख्या होनी चाहिए उसमें करीब 10 करोड़ की कमी आ गई है और यह बिल्कुल स्वाभाविक भी है क्योंकि आप महिलाओं के प्रति जो अत्याचार हो रहे हैं जैसे कि भ्रूण हत्या बालिका वधू दहेज हत्या यह सारी चीजें शोषण एवं जिला महिलाओं के प्रति बढ़ते ही जा रहे हैं और इसी के वजह से उनकी संख्या भी घट रही है तो ऐसा भी हो सकता है कि 21वीं सदी के तीसरे दशक तक पुरुषों के अनुपात में महिलाओं की जनसंख्या है वो आधी रह जाए तो यह सारी अगर समस्याएं दूर नहीं की गई तो फिर जो ह्यूमन है वह उसके एक डिस्टेंस पर भी सवालिया निशान खड़े हो सकते हैं तो वह सभी लोगों को इस विषय में गंभीर होने की जरूरत है कि महिलाओं को गर्भ में ना मारा जाए और उन्हें भी समानता का अधिकार मिलना ही चाहिए

samaaj mein jeene ka adhikaar sabhi ko hai iske liye samvidhan mein anek maulik adhikaar sunishchit kiye gaye hain jiske tahat desh ke koi bhi nagarik ko bina ling jati dharm bhed ke aadhaar par desh ke kisi bhi kone mein rehne ka adhikaar prapt hai lekin aaj ke samay mein in maulik adhikaaro par prashnachinh lagte ja raha hai kyonki bharatiya samaj mein ling ke aadhaar par mahilaon se jeene ka adhikaar lagbhag hi nahi ja raha hai aur kai vikasshil desh jaise ki bharat ek aisi jagah ban gayi hai mahilaon ke liye jaha par unki sankhya lagatar ghatati ja rahi hai aur iski wajah yahi hai ki ladkiyon ko paida hone se pehle hi garbh mein hi maar diya jata hai jaahir hai ki aaj ka jo sabhya samaj hai vaah sabhi kahlane ke layak nahi hai samuche vishwa mein purushon ke anupat mein mahilaon ki jo sankhya honi chahiye usme kareeb 10 crore ki kami aa gayi hai aur yah bilkul swabhavik bhi hai kyonki aap mahilaon ke prati jo atyachar ho rahe hain jaise ki bharun hatya balika vadhu dahej hatya yah saree cheezen shoshan evam jila mahilaon ke prati badhte hi ja rahe hain aur isi ke wajah se unki sankhya bhi ghat rahi hai toh aisa bhi ho sakta hai ki vi sadi ke teesre dashak tak purushon ke anupat mein mahilaon ki jansankhya hai vo aadhi reh jaaye toh yah saree agar samasyaen dur nahi ki gayi toh phir jo human hai vaah uske ek distance par bhi savaliya nishaan khade ho sakte hain toh vaah sabhi logo ko is vishay mein gambhir hone ki zarurat hai ki mahilaon ko garbh mein na mara jaaye aur unhe bhi samanata ka adhikaar milna hi chahiye

समाज में जीने का अधिकार सभी को है इसके लिए संविधान में अनेक मौलिक अधिकार सुनिश्चित किए गए

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