क्या नास्तिक लोगों के अपराध करने की संभावना ज़्यादा है? क्यूं?...


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Ishita Seth

Obstinate Programmer

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हां मेरे हिसाब से तो नास्तिक लोगों की अपराध करने की संभावना बहुत ज्यादा है क्योंकि नाश्ते के लोग होते हैं जो भगवान में नहीं मानते हैं जो हमारे इंडियन कल्चर में जो अवैध लिखे गए हैं जो ग्रंथ लिखे गए हैं वह इन सब चीजों को बिल्कुल भी नहीं मानते हैं ना ही उन्होंने यह सब चीजें कभी पड़ी है ना ही कभी समझने की कोशिश की है जैसे कि जो रिलीजियस बुक्स है जो होली बुक्स है हमारे हिंदू की है गीता और कृष्ण की बाइबिल तो नास्तिक होते हैं उन्होंने कभी ऐसी कोई बुक पढ़ी नहीं है और इनबॉक्स में हमें अपनी जिंदगी को जीने के सही तरीके बताए गए हैं कि हमारी जिंदगी का क्या नाम है और हम इसे वो कैसे पा सकते हैं हमें बिल्कुल सही तरीका अमूल क्या है और उसका मूल्य क्या है और हम उसको कैसे अच्छी कर सकते हैं तो मेरे हिसाब से ही तो नास्तिक लोग होते हैं वह इन सब चीजो को बिल्कुल मानती नहीं है उन्होंने कभी समझने की कोशिश मैं नहीं गई है तूने कोई भी आईडिया नहीं है कि इन ग्रंथों में क्या लिखा गया है और जिंदगी को सही तरह से जीने के तरीके क्या है तुम बहुत ज्यादा उनकी बहुत ज्यादा संभावना है कि मैं गलत ना पड़ जाए और गलत हमें पढ़कर अपराध घर है

haan mere hisab se toh nastik logo ki apradh karne ki sambhavna bahut zyada hai kyonki naste ke log hote hai jo bhagwan mein nahi maante hai jo hamare indian culture mein jo awaidh likhe gaye hai jo granth likhe gaye hai vaah in sab chijon ko bilkul bhi nahi maante hai na hi unhone yah sab cheezen kabhi padi hai na hi kabhi samjhne ki koshish ki hai jaise ki jo rilijiyas books hai jo holi books hai hamare hindu ki hai geeta aur krishna ki bible toh nastik hote hai unhone kabhi aisi koi book padhi nahi hai aur inbox mein hamein apni zindagi ko jeene ke sahi tarike bataye gaye hai ki hamari zindagi ka kya naam hai aur hum ise vo kaise paa sakte hai hamein bilkul sahi tarika amul kya hai aur uska mulya kya hai aur hum usko kaise achi kar sakte hai toh mere hisab se hi toh nastik log hote hai vaah in sab cheejo ko bilkul maanati nahi hai unhone kabhi samjhne ki koshish main nahi gayi hai tune koi bhi idea nahi hai ki in granthon mein kya likha gaya hai aur zindagi ko sahi tarah se jeene ke tarike kya hai tum bahut zyada unki bahut zyada sambhavna hai ki main galat na pad jaaye aur galat hamein padhakar apradh ghar hai

हां मेरे हिसाब से तो नास्तिक लोगों की अपराध करने की संभावना बहुत ज्यादा है क्योंकि नाश्ते

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Swati

सुनो ..सुनाओ..सीखो!

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वसुदेव जी आधी कि मुझे ऐसा नहीं लगता कि जो जुर्म करने का जो फीलिंग होती है वह आस्तिक या नास्तिक होने से होते क्योंकि देखिए रीसेंट कि हमने बहुत सारे एग्जांपल देकर चुप भगवान के जो भक्त जाते हैं जो बड़े-बड़े एक गुरु है आश्रम को ले लीजिए रामपाल को ले लीजिए या फिर यह जो अभी रिसेंटली जो हुआ था यह जो गुरु अंदर गया था यह जो सिरसा में डेरा सच्चा सौदा के जो गुरु है वह उन को ले लीजिए वह सब भगवान का नाम ही लेते हैं वह सब भगवान में मानने वाले लोगों ने इतने बड़े-बड़े क्राइम की आएगी कभी कभी फील होता है कि इससे अच्छा तो हम नास्तिक हो जाए भगवान में बिलीव करना ही छोड़ दें क्योंकि यह भगवान में बिलीव कर के ऐसे सेन उन्हें क्राइम कर दिया अगर भगवान में बिलीव नहीं करते तो शायद इटली दवा का नाम तो खराब नहीं करते हैं लोग तू जो क्राइम करना होता है वह नास्तिक आस्तिक लोगों में से नहीं होता क्योंकि मैंने कई बार देखा है कि ऐसे क्राइम सिर्फ यह नहीं होता ना कि आप ने चोरी कर दिया मर्डर कर दिया करप्शन पत्रिका क्राइम है तो बहुत सारे लोग ऐसे करो सुबह-सुबह तो भगवान की बहुत पूजा कर लेते हैं और फिर ऑफिस में जाकर फिर वह ब्राइब लेते हैं करप्शन करते हैं तू क्राइम रेट का आस्तिक या नास्तिक होने से मेरे हिसाब से कोई ताल्लुक नहीं है जिसको क्राइम करना है वह भगवान बिलीव करते वह भी क्राइम करेगा और उनको नहीं करना है वह नास्तिक लेते हुए भी क्राइम नहीं करेंगे

vasudev ji aadhi ki mujhe aisa nahi lagta ki jo jurm karne ka jo feeling hoti hai vaah astik ya nastik hone se hote kyonki dekhiye recent ki humne bahut saare example dekar chup bhagwan ke jo bhakt jaate hai jo bade bade ek guru hai ashram ko le lijiye rampal ko le lijiye ya phir yah jo abhi recently jo hua tha yah jo guru andar gaya tha yah jo sirsa mein dera saccha sauda ke jo guru hai vaah un ko le lijiye vaah sab bhagwan ka naam hi lete hai vaah sab bhagwan mein manne waale logo ne itne bade bade crime ki aayegi kabhi kabhi feel hota hai ki isse accha toh hum nastik ho jaaye bhagwan mein believe karna hi chod de kyonki yah bhagwan mein believe kar ke aise sen unhe crime kar diya agar bhagwan mein believe nahi karte toh shayad italy dawa ka naam toh kharab nahi karte hai log tu jo crime karna hota hai vaah nastik astik logo mein se nahi hota kyonki maine kai baar dekha hai ki aise crime sirf yah nahi hota na ki aap ne chori kar diya murder kar diya corruption patrika crime hai toh bahut saare log aise karo subah subah toh bhagwan ki bahut puja kar lete hai aur phir office mein jaakar phir vaah bribe lete hai corruption karte hai tu crime rate ka astik ya nastik hone se mere hisab se koi talluk nahi hai jisko crime karna hai vaah bhagwan believe karte vaah bhi crime karega aur unko nahi karna hai vaah nastik lete hue bhi crime nahi karenge

वसुदेव जी आधी कि मुझे ऐसा नहीं लगता कि जो जुर्म करने का जो फीलिंग होती है वह आस्तिक या नास

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Kunjansinh Rajput

Aspiring Journalist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए यह कहना गलत है कि नास्तिक लोग जुड़े उनका प्राप्त करने की संभावना ज्यादा है किसी और को नाश्ते खेतों में यह नहीं है कि उनको अपराध करने की संभावना जीवन में ज्यादा होगी क्योंकि अगर अब इसने कई साल की रिपोर्ट देखता है तो नास्तिक लोग जो है उन्होंने कम अपराध किए हैं हर वक़्त रात के शिकार हैं वह ज्यादा हुए हो चाहे रात हो या सीमेंट ट्रैफिकिंग हो या फिर कॉन्स्टिट्यूशन हो तो का मेकअप नास्तिक लोग के खिलाफ अपराध जो है वह ज्यादा हुआ या उन पर अपराध ज्यादा हुआ किंतु ऐसे कई काम के साथ देखने को मिले मेरे हिसाब से एक जादू प्रतिशत तक की सही है जहां पर नास्तिक लोगों में अपराध किया हो तो यह कहना बिल्कुल गलत है कि नास्तिक लोग क्या प्राप्त करने की संभावना ज्यादा है क्योंकि वह नाश्ते किसका है यह नहीं है कि वह अपना ज्यादा करेंगे और नास्तिक लोग जो है वह भी हमारे जैसे लोग ही है आशिकी फोन में थोड़ी बहुत बदलाव है कि वह जो नास्तिक लोग होते हैं वह खुद से तीन सेक्सी प्यार करते हो मुझसे प्यार नहीं करते सिर्फ यही पर के उनके और हमारे बीच में इसका मतलब यह नहीं है कि उनके अपराध करने की संभावना ज्यादा हे का नाका पर हो और हम भी जो है असामान्य हम हमारी समानता और उनकी समानता एक है हमें जो है उन को सम्मान देना चाहिए कि किस प्रकार से गुजरना पड़ता जिस प्रकार के दौरे से वजन कैसे किस प्रकार की मूर्ति गौर से नहीं करना पड़ता है तो खाना खा पर ह में उनका सम्मान करना चाहिए और उंहें सपोर्ट करना चाहिए और इसके लिए मुझे लगता है कि नास्तिक लोग क्या पता करने की संभावना ज्यादा नहीं है और यह कारण होगा कि नास्तिक लोग भी हमारे जैसे लोग ही है आशीर्वाद इन का रहने का तरीका जंगलों को 10 महीने के वक्त रात करेंगे

dekhiye yah kehna galat hai ki nastik log jude unka prapt karne ki sambhavna zyada hai kisi aur ko naste kheton mein yah nahi hai ki unko apradh karne ki sambhavna jeevan mein zyada hogi kyonki agar ab isne kai saal ki report dekhta hai toh nastik log jo hai unhone kam apradh kiye hai har waqt raat ke shikaar hai vaah zyada hue ho chahen raat ho ya cement trafficking ho ya phir Constitution ho toh ka makeup nastik log ke khilaf apradh jo hai vaah zyada hua ya un par apradh zyada hua kintu aise kai kaam ke saath dekhne ko mile mere hisab se ek jadu pratishat tak ki sahi hai jaha par nastik logo mein apradh kiya ho toh yah kehna bilkul galat hai ki nastik log kya prapt karne ki sambhavna zyada hai kyonki vaah naste kiska hai yah nahi hai ki vaah apna zyada karenge aur nastik log jo hai vaah bhi hamare jaise log hi hai aashiqui phone mein thodi bahut badlav hai ki vaah jo nastik log hote hai vaah khud se teen sexy pyar karte ho mujhse pyar nahi karte sirf yahi par ke unke aur hamare beech mein iska matlab yah nahi hai ki unke apradh karne ki sambhavna zyada hai ka naka par ho aur hum bhi jo hai asamanya hum hamari samanata aur unki samanata ek hai hamein jo hai un ko sammaan dena chahiye ki kis prakar se gujarana padta jis prakar ke daure se wajan kaise kis prakar ki murti gaur se nahi karna padta hai toh khana kha par h mein unka sammaan karna chahiye aur unhen support karna chahiye aur iske liye mujhe lagta hai ki nastik log kya pata karne ki sambhavna zyada nahi hai aur yah karan hoga ki nastik log bhi hamare jaise log hi hai ashirvaad in ka rehne ka tarika jungalon ko 10 mahine ke waqt raat karenge

देखिए यह कहना गलत है कि नास्तिक लोग जुड़े उनका प्राप्त करने की संभावना ज्यादा है किसी और क

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Sameer Tripathy

Political Critic

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Hhhgnbhh

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नहीं नास्तिक लोग जो है उनके अपराध करने की संभावना ज्यादा नहीं है क्योंकि देखे अगर कोई भी इंसान कुछ गलत करना चाहता है तो उसके लिए उसको नास्तिक बनने की जरूरत नहीं है पर किसी भी रुप के अंदर में काम कर सकता है नास्तिक जैसा कि हम जानते हैं वह लोग होते हैं तो भगवान पर भरोसा नहीं करते चलोगी या नहीं मानते कि किसी मूर्ति यह किसी ग्रंथ के अंदर कोई भगवान होते हैं तो उन लोगों को नाश्ते कहते हैं तो नास्तिक होना मेरे साथ से कोई बुरी बात नहीं है कुछ उसमे बुरा नहीं है क्योंकि नास्तिक होना आपकी अपनी पोस्टर बॉयज होते हो जैसे कि अभी तक भी कोई प्रूफ नहीं कर पाए कि भगवान असली में होती तो नाचती को ना उसी समय पर इसलिए बिल्कुल भी बुरी बात नहीं है आपके अपनी पोस्टर चॉइस से बोलो गुस्सा थोड़ी प्रैक्टिकल होंगे पर इसका मतलब यह नहीं है कि वह बुरे काम कर क्योंकि उन लोग बोलो काफी ज्यादा प्रैक्टिकल होता है और क्या होता से 12 से लेकर गए उनके अंदर बालवीर और सोचने की शक्ति होती है हम लोगों से थोड़ी ज्यादा होती क्योंकि मैं एक एक चीज को बहुत अच्छे से समझते हैं और खुद पर हो सकता है कि वह वह काम खुद करेंगे तो नास्तिक लोग जो होते हैं उनके अपराध करने की संभावना ज्यादा नहीं है क्योंकि वह भी इंसान और हम लोग भी इंसान ही है अपराध करने की संभावना उन लोगों की ज्यादा होती है जो अपने दिमाग पर सही तरीके से नियंत्रण नहीं कर पाते

nahi nastik log jo hai unke apradh karne ki sambhavna zyada nahi hai kyonki dekhe agar koi bhi insaan kuch galat karna chahta hai toh uske liye usko nastik banne ki zarurat nahi hai par kisi bhi roop ke andar mein kaam kar sakta hai nastik jaisa ki hum jante hai vaah log hote hai toh bhagwan par bharosa nahi karte chalogi ya nahi maante ki kisi murti yah kisi granth ke andar koi bhagwan hote hai toh un logo ko naste kehte hai toh nastik hona mere saath se koi buri baat nahi hai kuch usme bura nahi hai kyonki nastik hona aapki apni poster boys hote ho jaise ki abhi tak bhi koi proof nahi kar paye ki bhagwan asli mein hoti toh nachati ko na usi samay par isliye bilkul bhi buri baat nahi hai aapke apni poster choice se bolo gussa thodi practical honge par iska matlab yah nahi hai ki vaah bure kaam kar kyonki un log bolo kaafi zyada practical hota hai aur kya hota se 12 se lekar gaye unke andar balavir aur sochne ki shakti hoti hai hum logo se thodi zyada hoti kyonki main ek ek cheez ko bahut acche se samajhte hai aur khud par ho sakta hai ki vaah vaah kaam khud karenge toh nastik log jo hote hai unke apradh karne ki sambhavna zyada nahi hai kyonki vaah bhi insaan aur hum log bhi insaan hi hai apradh karne ki sambhavna un logo ki zyada hoti hai jo apne dimag par sahi tarike se niyantran nahi kar paate

नहीं नास्तिक लोग जो है उनके अपराध करने की संभावना ज्यादा नहीं है क्योंकि देखे अगर कोई भी इ

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Jyoti Mehta

Ex-History Teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मुझे लगता है कि नास्तिक व्यक्ति और आस्तिक व्यक्तियों दोनों में से अपराधी होने का कोई फर्क नहीं पड़ता है दोनों ही तरह के व्यक्ति अपराधी हो सकते हैं लेकिन हां फिर भी हम एक समाज में रहते हैं एक परिवार में पलते बढ़ते हैं इस समाज के उस परिवार के कुछ नियम कुछ कायदे कुछ कानून होते हैं जिन्हें हम बचपन से ही मानते और सुनते हैं हमारे मन में बचपन से ही उनके प्रति सम्मान और डर रहता है जो हमें कुछ भी गलत करने से रोकता है उसी तरह आस्तिक व्यक्ति अपने स्वर को चाहता है उसे सम्मान देता है उसकी पूजा पाठ करता है और कुछ भी गलत करने से पहले उसके मन में यह सवाल आता है ईश्वर उसे इसका दंड देगा ईश्वरीय शक्ति में आस्था विश्वास उसको गलत करने से रोकते हैं लेकिन कई बार हम देखते हैं कि अपराधी ईश्वर को भी अपना साझीदार बना लेते हैं ईश्वर को भी अपने अपने आदमी शामिल कर लेते हैं तो समझ नहीं आता कि ईश्वर में आस्था रखने वाले अपराध करते हैं या ईश्वर में आस्था नहीं रखने वाले अपराध करते हैं मुझे लगता है अपराधिक प्रवृत्ति है जो इंसान को अपराध करने के लिए मजबूर करती है हां अगर उसमें थोड़ी बातें आस्तिकता होती है तो शायद वह उस अपराध को करने से रुक सकता है

mujhe lagta hai ki nastik vyakti aur astik vyaktiyon dono mein se apradhi hone ka koi fark nahi padta hai dono hi tarah ke vyakti apradhi ho sakte hai lekin haan phir bhi hum ek samaj mein rehte hai ek parivar mein palate badhte hai is samaj ke us parivar ke kuch niyam kuch kayade kuch kanoon hote hai jinhen hum bachpan se hi maante aur sunte hai hamare man mein bachpan se hi unke prati sammaan aur dar rehta hai jo hamein kuch bhi galat karne se rokta hai usi tarah astik vyakti apne swar ko chahta hai use sammaan deta hai uski puja path karta hai aur kuch bhi galat karne se pehle uske man mein yah sawaal aata hai ishwar use iska dand dega ishwariya shakti mein astha vishwas usko galat karne se rokte hai lekin kai baar hum dekhte hai ki apradhi ishwar ko bhi apna sajhidar bana lete hai ishwar ko bhi apne apne aadmi shaamil kar lete hai toh samajh nahi aata ki ishwar mein astha rakhne waale apradh karte hai ya ishwar mein astha nahi rakhne waale apradh karte hai mujhe lagta hai apradhik pravritti hai jo insaan ko apradh karne ke liye majboor karti hai haan agar usme thodi batein astikata hoti hai toh shayad vaah us apradh ko karne se ruk sakta hai

मुझे लगता है कि नास्तिक व्यक्ति और आस्तिक व्यक्तियों दोनों में से अपराधी होने का कोई फर्क

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