किस उम्र तक आपको पता होना चाहिए कि आप अपने जीवन के साथ क्या करना चाहते हैं?...


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Dr. KRISHNA CHANDRA

Rehabilitation Psychologist

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Dr. Priya Shatanjib Jha

Psychologist|Counselor|Dentist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्ते दोस्तों मेरी आणि डॉक्टर प्रिया झा के तरफ से आप सबको दिन की बहुत सारी शुभकामनाएं ऐसा एक कोई उम्र नहीं होता है जिसमें हम सभी को यह पता लग जाना चाहिए कि हमें जिंदगी के साथ क्या करना चाहिए कई बच्चे होते हैं जो 9 साल की उम्र में ही समझ जाते हैं कि उनको आगे जाकर एक साइंटिस्ट बनना है या उनको मतलब ठिकाना कोई लाइन है जिसमें उनको इंटरेस्ट है और वह उसी में आगे बढ़ना चाहिए फिर कई लोग होते हैं जो 35 साल के हो जाते हैं तब तक सिर्फ दुनिया को अब जॉब कर रहे होते मतलब देख रहे होते हैं कि कौन क्या कर रहा है पूरा ज्ञान इकट्ठा कर रहे होते हैं अपने दिमाग में पढ़कर न्यूज़ पेपर से आप फ्री इंटरनेट से या जो भी जो चीजों से आपने एक्सपीरियंस से तो और उसके बाद एक दिन में कोई इलाज होता है कि यहां मुझे यह करना है और वह एकदम मेहनत से उस में जुट जाते हैं और वह एकदम काम करने लगते हैं 35 साल के बाद तो मैंने ऐसे लो देखा है और अंश और आपने भी देखा होगा तो यह बात तो पक्की है कि जिस दिन आपको यह लगता है कि हां मुझे अपने लाइफ के साथ अब यह करना चाहिए उसी दिन से आप उसके और काम करना शुरु कर लेते हो तो ऐसा कुछ सबके लिए यह चीज जो है वह स्पेसिफिक नहीं है और मैं अगर 20 साल में यह समझ गई थी मान लो अगर एग्जांपल में अगर 20 साल में समझ गई थी तो आप 15 साल में समझ गए होंगे आपके जो फादर हैं वह 25 साल में समझे होंगे या फिर कोई और है अगर वह 29 साल में समझे होंगे तो सबका जो एक है कि सब का उम्र जो है समझने का कि वह निकाला इसमें क्या उनको करना है किस चीज में इंटरेस्ट आई है यह सब एकदम अलग है तो इसका कोई स्पेसिफिक आंसर नहीं है थैंक यू

namaste doston meri aani doctor priya jha ke taraf se aap sabko din ki bahut saree subhkamnaayain aisa ek koi umr nahi hota hai jisme hum sabhi ko yah pata lag jana chahiye ki hamein zindagi ke saath kya karna chahiye kai bacche hote hain jo 9 saal ki umr mein hi samajh jaate hain ki unko aage jaakar ek scientist banna hai ya unko matlab thikana koi line hai jisme unko interest hai aur vaah usi mein aage badhana chahiye phir kai log hote hain jo 35 saal ke ho jaate hain tab tak sirf duniya ko ab job kar rahe hote matlab dekh rahe hote hain ki kaun kya kar raha hai pura gyaan ikattha kar rahe hote hain apne dimag mein padhakar news paper se aap free internet se ya jo bhi jo chijon se aapne experience se toh aur uske baad ek din mein koi ilaj hota hai ki yahan mujhe yah karna hai aur vaah ekdam mehnat se us mein jut jaate hain aur vaah ekdam kaam karne lagte hain 35 saal ke baad toh maine aise lo dekha hai aur ansh aur aapne bhi dekha hoga toh yah baat toh pakki hai ki jis din aapko yah lagta hai ki haan mujhe apne life ke saath ab yah karna chahiye usi din se aap uske aur kaam karna shuru kar lete ho toh aisa kuch sabke liye yah cheez jo hai vaah specific nahi hai aur main agar 20 saal mein yah samajh gayi thi maan lo agar example mein agar 20 saal mein samajh gayi thi toh aap 15 saal mein samajh gaye honge aapke jo father hain vaah 25 saal mein samjhe honge ya phir koi aur hai agar vaah 29 saal mein samjhe honge toh sabka jo ek hai ki sab ka umr jo hai samjhne ka ki vaah nikaala isme kya unko karna hai kis cheez mein interest I hai yah sab ekdam alag hai toh iska koi specific answer nahi hai thank you

नमस्ते दोस्तों मेरी आणि डॉक्टर प्रिया झा के तरफ से आप सबको दिन की बहुत सारी शुभकामनाएं ऐसा

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Bhavin J. Shah

Life Coach

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लाइफ इज इक्वल टू लर्निंग ऐसी कोई भी बात नहीं है जिस उम्र को पता चल जाना चाहिए के जीवन से साथ मुझे क्या करना है लाइफ इजियर कंटिन्यूज जर्नी हो सकता है किसी को 80 साल की उम्र में दौड़ने की इच्छा हो और हो सकता है किसी को 20 साल की उम्र में ऐसा लगे कि मुझे पढ़ना नहीं है और आगे भी के नोट में जगन्नाथ नहीं सकते कि कौन सी उम्र में किसको जीवन के साथ क्या करना चाहिए हां मैं इतना जरूर कहूंगा जीवन में प्रयत्न नहीं छोड़नी चाहिए बस लगे रहना चाहिए जो कर रहे हो उसमें अपना बेच देते रहना चाहिए एक समय ऐसा आएगा जब कोई ना कोई एक चीज जो आपको अंदर से इस बार करती है उसे अब झूठी जाओगे और जीवन को सार्थक करके रहोगे थैंक यू

life is equal to learning aisi koi bhi baat nahi hai jis umr ko pata chal jana chahiye ke jeevan se saath mujhe kya karna hai life ijiyar continues journey ho sakta hai kisi ko 80 saal ki umr mein daudne ki iccha ho aur ho sakta hai kisi ko 20 saal ki umr mein aisa lage ki mujhe padhna nahi hai aur aage bhi ke note mein jagannath nahi sakte ki kaun si umr mein kisko jeevan ke saath kya karna chahiye haan main itna zaroor kahunga jeevan mein prayatn nahi chhodni chahiye bus lage rehna chahiye jo kar rahe ho usmein apna bech dete rehna chahiye ek samay aisa aayega jab koi na koi ek cheez jo aapko andar se is baar karti hai use ab jhuthi jaoge aur jeevan ko sarthak karke rahoge thank you

लाइफ इज इक्वल टू लर्निंग ऐसी कोई भी बात नहीं है जिस उम्र को पता चल जाना चाहिए के जीवन से स

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ganesh pazi

Motivator

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

रूसी का पता और क्या करना चाहिए आप क्या कर सकते हैं का पता तो बचपन से ही चल जाता है मैं खुद को एहसास हुआ 14 साल की 15 साल की बाली और उसमें होता है जब वह सोचता है कि नवीन की छोरी मेरा मन को ऐसा करना चाहिए या मेरे को मानना चाहिए सोलह 17 साल की उम्र में उसको फाइनली कंफर्म हो जाता है क्यों क्या करना चाहता है और वह किस काम के लायक है और यही समय है कि वह अपने आप को सेट कर ले क्यों सर क्या कर रहे हो क्या वह कर सकता है और उसके लिए उसे क्या कर रहा होगा

rusi ka pata aur kya karna chahiye aap kya kar sakte hain ka pata toh bachpan se hi chal jata hai main khud ko ehsaas hua 14 saal ki 15 saal ki baali aur usmein hota hai jab vaah sochta hai ki naveen ki chhori mera man ko aisa karna chahiye ya mere ko manana chahiye solah 17 saal ki umr mein usko finally confirm ho jata hai kyon kya karna chahta hai aur vaah kis kaam ke layak hai aur yahi samay hai ki vaah apne aap ko set kar le kyon sir kya kar rahe ho kya vaah kar sakta hai aur uske liye use kya kar raha hoga

रूसी का पता और क्या करना चाहिए आप क्या कर सकते हैं का पता तो बचपन से ही चल जाता है मैं खुद

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Kavita Panyam

Certified Award Winning Counseling Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखी दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं एक जिनको हम बोलते हैं सेल्फ ड्रिवन यानी कि यह लोग जो हैं इन को प्रोत्साहित करने की जरूरत नहीं होती उनको बोलने की जरूरत है ताकि ऐसा करो वैसा करो इतना करो यह लोग जो है अपने आप से चलते हैं अपने आप से अंदर से प्रेरित होते हैं उनकी अंतरात्मा है जागृत है वह जानते हैं उन्हें क्या करना है और कैसे करना है जो सेकंड टाइप के लोग होते हैं उनको प्रोत्साहित करना पड़ता है बार बार बताना पड़ता है उनका मार्गदर्शन करते रहना चाहिए बार-बार उनको इनकरेज करना चाहिए यह लोग अपने अंतरात्मा से वाकिफ नहीं है और एक बाहरी प्रोत्साहन के लिए देखते रहते हैं तरह के लोग हैं वह बचपन से ही ऐसे होते हैं आप देखेंगे कि वह खुद पढ़ाई करते हैं खुद अपनी चीजों को संभाल कर रखते हैं सब कुछ टाइम पर करते हैं और वह जानते हैं कि उन्हें क्या चाहिए को जानते हैं कि उन्हें क्या चाहिए और इसी तरह से वह अपनी सारी चीजें देखभाल करते हैं परसों का लेकिन जो लोग हैं जो उनको बाहर ही प्रोत्साहन की जरूरत पड़ती है इन लोगों उनको काफी लेट हो पता चलता है काफी लेट सैनिक स्कूल कॉलेज होने के बाद जब पहले नौकरी करते हैं शायद तब लगता है कि काश मैंने पहले उनकी बात सुनी होती है अपने माता-पिता की है दोस्त कि अगर किसी ग्रुप जो भी इन को देखते थे उनके बात तो नहीं होती तो अच्छा होता तो जो पहले तरीके होते हैं 200 वर्ष सेल्फ ड्रिवन उनको तो बचपन से यह हैबिट होती है और दूसरे टक्के लोग होते हैं उनको आगे जाके जीवन में जो सफलता मिलती है जो फैलियर्स मिलते हैं उसके बाद उनको समझ में आता है कि उन्हें क्या करना चाहिए ऐसा उम्र तो कोई है नहीं लेकिन जब यह तो पता चलता जाता है ना इसमें अनुभव होता रहता है वैसे वैसे पता चलता जाता है जो सेकंड टाइप के लोग हैं उनका तो आजकल तो बहुत ही कोऑपरेटिव दुनिया है तो बचपन से ही ऑपरेशन शुरू हो जाती है तो ऐसा कोई फिक्सचर्स तो है नहीं जो टोल टैक्स और आपको अनुभव है तजुर्बा है उस पर डिपेंड करता है एंड आल्सो कि आप कितने कॉन्पिटिशन में है और कितने अपनी अंतरात्मा से आपका कनेक्शन है और अब क्या चाहते हैं अपनी लाइफ में

dekhi duniya mein do tarah ke log hote hain ek jinako hum bolte hain self driven yani ki yah log jo hain in ko protsahit karne ki zaroorat nahi hoti unko bolne ki zaroorat hai taki aisa karo waisa karo itna karo yah log jo hai apne aap se chalte hain apne aap se andar se prerit hote hain unki antaraatma hai jaagarrett hai vaah jante hain unhe kya karna hai aur kaise karna hai jo second type ke log hote hain unko protsahit karna padta hai baar baar bataana padta hai unka margdarshan karte rehna chahiye baar baar unko inakarej karna chahiye yah log apne antaraatma se wakif nahi hai aur ek baahri protsahan ke liye dekhte rehte hain tarah ke log hain vaah bachpan se hi aise hote hain aap dekhenge ki vaah khud padhai karte hain khud apni chijon ko sambhaal kar rakhte hain sab kuch time par karte hain aur vaah jante hain ki unhe kya chahiye ko jante hain ki unhe kya chahiye aur isi tarah se vaah apni saree cheezen dekhbhal karte hain parso ka lekin jo log hain jo unko bahar hi protsahan ki zaroorat padti hai in logon unko kafi let ho pata chalta hai kafi let sainik school college hone ke baad jab pehle naukri karte hain shayad tab lagta hai ki kash maine pehle unki baat suni hoti hai apne mata pita ki hai dost ki agar kisi group jo bhi in ko dekhte the unke baat toh nahi hoti toh accha hota toh jo pehle tarike hote hain 200 varsh self driven unko toh bachpan se yah habit hoti hai aur dusre takke log hote hain unko aage jake jeevan mein jo safalta milti hai jo failiyars milte hain uske baad unko samajh mein aata hai ki unhe kya karna chahiye aisa umr toh koi hai nahi lekin jab yah toh pata chalta jata hai na isme anubhav hota rehta hai waise waise pata chalta jata hai jo second type ke log hain unka toh aajkal toh bahut hi cooperative duniya hai toh bachpan se hi operation shuru ho jaati hai toh aisa koi fiksachars toh hai nahi jo toll tax aur aapko anubhav hai tajurba hai us par depend karta hai and aalso ki aap kitne competition mein hai aur kitne apni antaraatma se aapka connection hai aur ab kya chahte hain apni life mein

देखी दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं एक जिनको हम बोलते हैं सेल्फ ड्रिवन यानी कि यह लोग ज

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Rinku Kumar Meena

managing director (MD)life expert hindi writer tourist guides writing self employed मैं चाहता हूं हर व्यक्ति को अपने जीवन में खुश रहने का पूरा अधिकार है चाहे वह लड़का या लड़की और वह जो चाहे कर सकती अपनी लाइफ से उसका भी अधिकार होना चाहिए और मैं चाहता हूं लड़कियां भी अपना जीवन पूरी तरीके से खुश हो कर दिया चाहे वह अपने परिवार में हो या ससुराल में विश्वास करता हूं

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

रितिक रोशन की बात की जाए तो हमें किस उम्र में पता होना चाहिए एक अपनी लाइफ बनाने की चीज होती है जैसे ही हम ग्रेजुएशन वगैरह पूरी करते हैं या वैसे तू अगर एक तरीके से देखा जाए तो हमें ज्यादा नहीं तो 14 15 क्यों ऐसे धीरे-धीरे एहसास होने लग जाता है कि हमें क्या करना चाहिए और किस फील्ड में हमारा हम अपना करियर बना सकते हैं 1920 के अंत में उसे अनुभव हो जाना चाहिए क्योंकि जीवन साथ क्या करना चाहिए और किस क्षेत्र में अपना चुनाव करना चाहिए ताकि वह अपनी लाइफ आ गई सही तरीके से अपना भविष्य अपने सुझाव भी फिल्में बना सके क्या कहूं सोचने समझने की क्षमता से पता था कि उन्हें क्या करना है और कैसे करना है तो वह तो आज के टाइम पर बहुत ज्यादा सफल है मैं यह कहूंगा कि व्यक्ति जो भी करना चाहिए जो भी अपने जीवन करना चाहिए उसको पता होना चाहिए से लेकर रखना चाहिए ताकि और उसके थ्रू काम करना चाहिए कभी वह सफल हो सकता है और को पता होने का तभी फायदा है जब व्यक्ति क्षेत्र में कार्य करें

hrithik roshan ki baat ki jaaye toh hamein kis umr mein pata hona chahiye ek apni life banaane ki cheez hoti hai jaise hi hum graduation vagairah puri karte hain ya waise tu agar ek tarike se dekha jaaye toh hamein zyada nahi toh 14 15 kyon aise dhire dhire ehsaas hone lag jata hai ki hamein kya karna chahiye aur kis field mein hamara hum apna career bana sakte hain 1920 ke ant mein use anubhav ho jana chahiye kyonki jeevan saath kya karna chahiye aur kis kshetra mein apna chunav karna chahiye taki vaah apni life aa gayi sahi tarike se apna bhavishya apne sujhaav bhi filme bana sake kya kahun sochne samjhne ki kshamta se pata tha ki unhe kya karna hai aur kaise karna hai toh vaah toh aaj ke time par bahut zyada safal hai main yah kahunga ki vyakti jo bhi karna chahiye jo bhi apne jeevan karna chahiye usko pata hona chahiye se lekar rakhna chahiye taki aur uske through kaam karna chahiye kabhi vaah safal ho sakta hai aur ko pata hone ka tabhi fayda hai jab vyakti kshetra mein karya karen

रितिक रोशन की बात की जाए तो हमें किस उम्र में पता होना चाहिए एक अपनी लाइफ बनाने की चीज होत

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