किस उम्र तक आपको पता होना चाहिए कि आप अपने जीवन के साथ क्या करना चाहते हैं?...


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Kavita Panyam

Certified Award Winning Counseling Psychologist

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देखी दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं एक जिनको हम बोलते हैं सेल्फ ड्रिवन यानी कि यह लोग जो हैं इन को प्रोत्साहित करने की जरूरत नहीं होती उनको बोलने की जरूरत है ताकि ऐसा करो वैसा करो इतना करो यह लोग जो है अपने आप से चलते हैं अपने आप से अंदर से प्रेरित होते हैं उनकी अंतरात्मा है जागृत है वह जानते हैं उन्हें क्या करना है और कैसे करना है जो सेकंड टाइप के लोग होते हैं उनको प्रोत्साहित करना पड़ता है बार बार बताना पड़ता है उनका मार्गदर्शन करते रहना चाहिए बार-बार उनको इनकरेज करना चाहिए यह लोग अपने अंतरात्मा से वाकिफ नहीं है और एक बाहरी प्रोत्साहन के लिए देखते रहते हैं तरह के लोग हैं वह बचपन से ही ऐसे होते हैं आप देखेंगे कि वह खुद पढ़ाई करते हैं खुद अपनी चीजों को संभाल कर रखते हैं सब कुछ टाइम पर करते हैं और वह जानते हैं कि उन्हें क्या चाहिए को जानते हैं कि उन्हें क्या चाहिए और इसी तरह से वह अपनी सारी चीजें देखभाल करते हैं परसों का लेकिन जो लोग हैं जो उनको बाहर ही प्रोत्साहन की जरूरत पड़ती है इन लोगों उनको काफी लेट हो पता चलता है काफी लेट सैनिक स्कूल कॉलेज होने के बाद जब पहले नौकरी करते हैं शायद तब लगता है कि काश मैंने पहले उनकी बात सुनी होती है अपने माता-पिता की है दोस्त कि अगर किसी ग्रुप जो भी इन को देखते थे उनके बात तो नहीं होती तो अच्छा होता तो जो पहले तरीके होते हैं 200 वर्ष सेल्फ ड्रिवन उनको तो बचपन से यह हैबिट होती है और दूसरे टक्के लोग होते हैं उनको आगे जाके जीवन में जो सफलता मिलती है जो फैलियर्स मिलते हैं उसके बाद उनको समझ में आता है कि उन्हें क्या करना चाहिए ऐसा उम्र तो कोई है नहीं लेकिन जब यह तो पता चलता जाता है ना इसमें अनुभव होता रहता है वैसे वैसे पता चलता जाता है जो सेकंड टाइप के लोग हैं उनका तो आजकल तो बहुत ही कोऑपरेटिव दुनिया है तो बचपन से ही ऑपरेशन शुरू हो जाती है तो ऐसा कोई फिक्सचर्स तो है नहीं जो टोल टैक्स और आपको अनुभव है तजुर्बा है उस पर डिपेंड करता है एंड आल्सो कि आप कितने कॉन्पिटिशन में है और कितने अपनी अंतरात्मा से आपका कनेक्शन है और अब क्या चाहते हैं अपनी लाइफ में

dekhi duniya mein do tarah ke log hote hain ek jinako hum bolte hain self driven yani ki yah log jo hain in ko protsahit karne ki zaroorat nahi hoti unko bolne ki zaroorat hai taki aisa karo waisa karo itna karo yah log jo hai apne aap se chalte hain apne aap se andar se prerit hote hain unki antaraatma hai jaagarrett hai vaah jante hain unhe kya karna hai aur kaise karna hai jo second type ke log hote hain unko protsahit karna padta hai baar baar bataana padta hai unka margdarshan karte rehna chahiye baar baar unko inakarej karna chahiye yah log apne antaraatma se wakif nahi hai aur ek baahri protsahan ke liye dekhte rehte hain tarah ke log hain vaah bachpan se hi aise hote hain aap dekhenge ki vaah khud padhai karte hain khud apni chijon ko sambhaal kar rakhte hain sab kuch time par karte hain aur vaah jante hain ki unhe kya chahiye ko jante hain ki unhe kya chahiye aur isi tarah se vaah apni saree cheezen dekhbhal karte hain parso ka lekin jo log hain jo unko bahar hi protsahan ki zaroorat padti hai in logon unko kafi let ho pata chalta hai kafi let sainik school college hone ke baad jab pehle naukri karte hain shayad tab lagta hai ki kash maine pehle unki baat suni hoti hai apne mata pita ki hai dost ki agar kisi group jo bhi in ko dekhte the unke baat toh nahi hoti toh accha hota toh jo pehle tarike hote hain 200 varsh self driven unko toh bachpan se yah habit hoti hai aur dusre takke log hote hain unko aage jake jeevan mein jo safalta milti hai jo failiyars milte hain uske baad unko samajh mein aata hai ki unhe kya karna chahiye aisa umr toh koi hai nahi lekin jab yah toh pata chalta jata hai na isme anubhav hota rehta hai waise waise pata chalta jata hai jo second type ke log hain unka toh aajkal toh bahut hi cooperative duniya hai toh bachpan se hi operation shuru ho jaati hai toh aisa koi fiksachars toh hai nahi jo toll tax aur aapko anubhav hai tajurba hai us par depend karta hai and aalso ki aap kitne competition mein hai aur kitne apni antaraatma se aapka connection hai aur ab kya chahte hain apni life mein

देखी दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं एक जिनको हम बोलते हैं सेल्फ ड्रिवन यानी कि यह लोग ज

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