हड़प्पा संस्कृति के लोगों का जीवन कैसे होता था?...


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हेलो फ्रेंड्स तो आज हम आपके प्रश्न का उत्तर लेकर आ गए हैं तो आज यह आंसर थोड़ा बड़ा हो जाएगा क्योंकि मैंने हड़प्पा के बारे में थोड़ी विस्तार में जानकारी दी है तो चलिए शुरू करते हैं हड़प्पा एक पूर्वोत्तर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का एक पुरातत्व स्थल है यानी स्टोरीकल प्लेस है यह साहिवाल शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर पश्चिम में स्थित है जी आप सिंधु घाटी सभ्यता के बहुत से अवशेष यहां मिले हैं 1921 यानी 1921 में जॉन मार्शल जो कि भारत के पुरातत्व विभाग के निर्देशक थे यानी वह इंस्ट्रक्टर थे जॉन मार्शल इंडिया के स्टोरिकल डिपार्टमेंट के तो उनके अंडर में दयाराम साहनी ने इस जगह सबसे पहले खुदाई करवाई थी और इस खुदाई में उनका सहयोग करने वाले थे माधव स्वरूप मां माटी मर व्हीलर जो इन के सहयोगी थे हड़प्पा काल की लिपि को अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है हड़प्पा संस्कृति का से युगीन यानी ब्रोंज एज की है क्योंकि यहां के निवासी लोहे का प्रयोग नहीं करते थे क्योंकि लोहे का प्रयोग सबसे पहले आर्य ने किया हिंदू वासी लोग तांबा और एनी कॉपर और जिंक को मिलाकर जो धातु बनाते थे उसको उसको कहते थे कार से यानी कैसे बनाते तो और उसी का प्रयोग करते थे इस संस्कृति के प्रधान नगरों की आबादी मिश्रित थी यहां पर व्यापार यानी ट्रेड नौकरी जॉब यहां पर व्यापार नौकरी करने और अनेक शिल्प कलाओं को सीखने के उद्देश्य से और व्यवसायों की नस्लें और जातियों के लोग इन नगरों में आकर रहने लगे माना जाता है कि यहां निवासी चार नस्लों के दयानी हड़प्पा में जो रहने वाले थे वह चार अलग-अलग मशीनों के नस्लों के लोग पाए गए उनमें ऑस्ट्रेलॉर्प भूमध्यसागरीय मंगोलियन और अल्पाइन जिनमें मंगोलियन और अल्पाइन सबसे बाद में आए और सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले लोग थे वह थे भूमध्यसागरीय जो हड़प्पा में निवास करते थे हड़प्पा नगरों में जो मकान मिले हैं उनके दरवाजों की लंबाई कम है तथा हड़प्पा के लोगों के जीवन में घोड़े एवं गाय का बहुत महत्व था और सबसे इंपोर्टेंट बात आपको बता दें कि हड़प्पा संस्कृति के लोग सांड यानी बुल को पवित्र समझकर उसकी पूजा करते थे हड़प्पा के नगर हड़प्पा नगर के चारों तरफ की विशाल दीवार है थे यह लोग पक्की ईंटों के मकान में रहते थे और यहां की सड़कें व गलियां इस तरह बनाई गई थी कि हवा चलने पर वह अपने आप साफ हो जाए तो यह हड़प्पा संस्कृति के लोगों का कुछ जीवन मुझे उम्मीद है कि आपको समझ में आया होगा धन्यवाद

hello friends toh aaj hum aapke prashna ka uttar lekar aa gaye hain toh aaj yah answer thoda bada ho jaega kyonki maine hadappa ke bare me thodi vistaar me jaankari di hai toh chaliye shuru karte hain hadappa ek purvottar pakistan ke punjab prant ka ek puratatva sthal hai yani storikal place hai yah sahival shehar se lagbhag 20 kilometre dur paschim me sthit hai ji aap sindhu ghati sabhyata ke bahut se avshesh yahan mile hain 1921 yani 1921 me john marshall jo ki bharat ke puratatva vibhag ke nirdeshak the yani vaah instructor the john marshall india ke storikal department ke toh unke under me dayaram sahani ne is jagah sabse pehle khudai karwai thi aur is khudai me unka sahyog karne waale the madhav swaroop maa mati mar wheeler jo in ke sahyogi the hadappa kaal ki lipi ko abhi tak padha nahi ja saka hai hadappa sanskriti ka se yugin yani bronze age ki hai kyonki yahan ke niwasi lohe ka prayog nahi karte the kyonki lohe ka prayog sabse pehle arya ne kiya hindu waasi log tamba aur any copper aur zinc ko milakar jo dhatu banate the usko usko kehte the car se yani kaise banate toh aur usi ka prayog karte the is sanskriti ke pradhan nagaron ki aabadi mishrit thi yahan par vyapar yani trade naukri job yahan par vyapar naukri karne aur anek shilp kalaon ko sikhne ke uddeshya se aur vyavasayon ki naslen aur jaatiyo ke log in nagaron me aakar rehne lage mana jata hai ki yahan niwasi char naslon ke dayani hadappa me jo rehne waale the vaah char alag alag machino ke naslon ke log paye gaye unmen astrelarp bhumadhyasagriya mongolian aur Alpine jinmein mongolian aur Alpine sabse baad me aaye aur sabse zyada jansankhya waale log the vaah the bhumadhyasagriya jo hadappa me niwas karte the hadappa nagaron me jo makan mile hain unke darvajon ki lambai kam hai tatha hadappa ke logo ke jeevan me ghode evam gaay ka bahut mahatva tha aur sabse important baat aapko bata de ki hadappa sanskriti ke log saand yani bull ko pavitra samajhkar uski puja karte the hadappa ke nagar hadappa nagar ke charo taraf ki vishal deewaar hai the yah log pakki eenton ke makan me rehte the aur yahan ki sadaken va galiya is tarah banai gayi thi ki hawa chalne par vaah apne aap saaf ho jaaye toh yah hadappa sanskriti ke logo ka kuch jeevan mujhe ummid hai ki aapko samajh me aaya hoga dhanyavad

हेलो फ्रेंड्स तो आज हम आपके प्रश्न का उत्तर लेकर आ गए हैं तो आज यह आंसर थोड़ा बड़ा हो जाएग

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