क्या भारतीय संस्कृति के आधार पर एक महिला को उसके आधुनिक ड्रेसिंग पर राय बनाना सही है? क्यूं?...


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Awdhesh Singh

Former IRS, Top Quora Writer, IAS Educator

0:58

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए हर देश की संस्कृति होती है और हर संस्कृति की अपनी एक मर्यादाएं होती हैं भारत के अंदर जो है वह बड़ी विविधता रहती है एक जो गांव के अंदर जो आदमी की जो ड्रेसिंग होती है वाला होती है शहर के अंदर ड्रेसिंग अलग होती है पार्टी के लिए ड्रेसिंग अलग होती है ऑफिस की रेटिंग अलग होती है और यह बहुत जरूरी है कि हम हर चीज को समय के हिसाब से उसको अपने को ट्रेस करें अगर मान लिया जो ड्रेसेस जो हैं मान लिया दिल्ली में या मुंबई में चलती हैं अगर वही ड्रेसेस अगर कोई राजस्थान यूपी के गांव में पहने तो वह बहुत ही अनुचित लगेगी बहुत ही ऑफ लगेगी और उस तरीके की जो आधुनिक ड्रेस्सेस है वह दिल्ली में बढ़ी कॉमन है और दिल्ली और मुंबई में उचित भी लगेगी लेकिन वहां पर आओ ना पहने तो ही बेहतर है इसलिए मेरे ख्याल से जैसा देश वैसा भेष होना चाहिए जिस सोसाइटी में आप रहे हैं अगर आप उसके हिसाब से अपने को डाल सके उसके हिसाब से प्रिंट रेसिंग कर सके तो इस से बेहतर कुछ नहीं है

dekhie chahiye har desh ki sanskriti hoti hai aur har sanskriti ki apni ek maryadaen hoti hai bharat ke andar jo hai wah baadi vividhata rehti hai ek jo gav ke andar jo aadmi ki jo dressing hoti hai wala hoti hai sheher ke andar dressing alag hoti hai party ke liye dressing alag hoti hai office ki rating alag hoti hai aur yeh bahut zaroori hai ki hum har cheez ko samay ke hisab se usko apne ko trays kare chahiye agar maan liya jo dresses jo hai maan liya delhi mein ya mumbai mein chalti hai agar wahi dresses agar koi rajasthan up ke gav mein pahane to wah bahut hi anuchit lagegi bahut hi of lagegi aur us tarike ki jo aadhunik dresses hai wah delhi mein badhi common hai aur delhi aur mumbai mein uchit bhi lagegi lekin wahan par aao na pahane to hi behtar hai isliye mere khayal se jaisa desh waisa bhesh hona chahiye jis society mein aap rahe hai agar aap uske hisab se apne ko dal sake uske hisab se print racing kar sake to is se behtar kuch nahi hai

देखिए हर देश की संस्कृति होती है और हर संस्कृति की अपनी एक मर्यादाएं होती हैं भारत के अंदर

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Abhishek Sharma

Forest Range Officer, MP

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारतीय संस्कृति में चाहे कितनी भी चीज हो खाना-पीना, भाषाएं इन सब पर हमेशा कुछ ना कुछ मतभेद रहा है l लेकिन सबसे ज्यादा मतभेद हो रहा है हो रहा है ड्रेस पर यानि की परिधान पर l परिधान के बारे में लोगों की अलग अलग राइ रही है कि भारतीय महिलाएं विदेशी परिधान को क्यों ग्रहण करती हैं ? मुझे लगता है कि यह वही लोग बोलते हैं जो लोग खुद यूरोपियन कपड़े पहनते हैं l अच्छा बताइए जब भारतीय महिलाओं के परिधान की बात चल रही है तो क्यों ना पुरुषों की बारे में बात कर ली जाए l भारतीय पुरुष खुद शर्ट्स, जंपरस, पेंट यह सारे कपड़े पहनते हैं l इनमें से किसी का इन्वेंशन भारत के हुआ है क्या ? नहीं हुआ है l भारतीय पुरुष खुद यूरोपइन कपड़े पहनते हैं और महिलाओं को बोलते हैं कि आप यूरोपियन कपड़े ना पहने, आप विदेशी कपड़े ना पहने l यह कहां का न्याय है ?आप पुरुष सत्तात्मक समाज तो नहीं चला रहे हैं l लोकतांत्रिक देश में रहकर आप किसी व्यक्ति को ऐसे बात नहीं कर सकते ना ही किसी को जज कर सकते हैं क्योंकि इस को क्या पहनना चाहिए क्या नहीं ना चाहिए l सबसे पहले आप अपने आप को सुधारिए, खुद विदेशी कपड़े पहनकर आप दूसरों को राय दे रहे हैं और अगर आप खुद देसी पहनते हैं तो आप की चॉइस ऑफ इंटरेस्ट है, सामने वाला का नहीं है l सामने वाला जो पहनना चाहता है वह पहन सकते चाहे कोई भी महिलाओं हो l और मेरा यह मानना है शाहरुख खान ने एक बार कहा था कि एक जो सबसे बड़ी चीज है जो महिलाएं चाहती है किसी पुरुष से वह है सम्मान l इस से कम आप कुछ भी देते रहिए, आप कुछ भी दीजिए कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन एक चीज जो महिलाओं को एक डिग्निटी होती, सम्मान होता है वह देंगे तो शायद आपको सबसे ज्यादा प्यार उन्हीं से मिलेगा l यह चीज बिल्कुल सत्य है सत्य है l कुछ लड़के जिनकी फीमेल फ्रेंड ज्यादा हमसे पूछिए कि उनकी फीमेल फ्रेंड से ज्यादा क्यों क्यों क्यों को सम्मान से बात करते हैं l आपके उनके ड्रेसिंग पर बात करेंगे तो आप याद रखिए कि आप की ही सोच खराब है उस महिला कि नहीं क्योंकि आप भी शर्ट और पैंट पहन के घूमते हैं, आप भी टीशर्ट पहन के घूम तो उसने कभी नहीं पूछा बोला कि यूरोपियन कपडे मत पहनो l अपनी सोच बदलिए भारत भी तो बदल जाएगा ,धन्यवाद l

bhartiya sanskriti mein chahe kitni bhi cheez ho khana peena bhashayen in sab par hamesha kuch na kuch matbhed raha hai l lekin sabse jyada matbhed ho raha hai ho raha hai dress par yani ki paridhan par l paridhan ke baare mein logo chahiye ki alag alag rai rahi hai ki bhartiya mahilaye videshi paridhan ko kyu grahan karti hai ? mujhe lagta hai ki yeh wahi log bolte hai jo log khud european kapde pehente hai chahiye l accha bataye jab bhartiya mahilaon ke paridhan ki baat chal rahi hai to kyu na purushon ki baare mein baat kar lee jaye l bhartiya purush khud shirts jamparas paint yeh chahiye sare kapde pehente hai l inme se kisi ka invention bharat ke hua hai kya ? nahi hua hai l bhartiya purush khud yuropain kapde pehente hai aur mahilaon ko bolte hai ki aap european kapde na pahane aap videshi kapde na pahane l yeh Kahan chahiye ka nyay hai aap purush sattatmak samaj to nahi chala rahe hai l loktantrik desh mein rahkar aap kisi vyakti ko aise baat nahi kar sakte na hi kisi ko judge kar sakte hai kyonki is ko kya pahanna chahiye kya nahi na chahiye l sabse pehle aap apne aap ko sudhariye khud videshi kapde pehankar aap dusro ko rai de rahe hai aur agar aap khud desi pehente hai to aap ki choice of interest hai samane wala ka nahi hai l samane wala jo pahanna chahta hai wah pahan sakte chahe koi bhi mahilaon ho l aur mera yeh manana hai shahrukh khan ne ek baar kaha tha ki ek jo sabse baadi cheez hai jo mahilaye chahti hai kisi purush se wah hai samman l is se kum aap kuch bhi dete rahiye aap kuch bhi dijiye koi fark nahi padata lekin ek cheez jo mahilaon ko ek dignity hoti samman hota hai wah denge to shayad aapko sabse jyada pyar unhi se milega l yeh cheez bilkul satya hai satya hai l kuch ladke jinaki female friend jyada humse puchiye ki unki female friend se jyada kyu kyun kyu ko samman se baat karte hai l aapke unke dressing par baat karenge to aap yaad rakhiye ki aap ki hi soch kharab hai us mahila ki nahi kyonki aap bhi shirt aur paint pahan ke ghumte hai aap bhi tshirt pahan ke ghum to usne kabhi nahi poocha bola ki european kapde mat pahano l apni soch badaliye bharat bhi to badal jayega chahiye dhanyavad l

भारतीय संस्कृति में चाहे कितनी भी चीज हो खाना-पीना, भाषाएं इन सब पर हमेशा कुछ ना कुछ मतभेद

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Swati

सुनो ..सुनाओ..सीखो!

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिये मुझे ऐसा लगता है कि कपड़े कभी भी किसी की पर्सनालिटी को डिफाइन नहीं करते, मतलब ऐसे नहीं कि वह किस तरह का इंसान है अच्छा या बुरा| बहुत बुरे बुरे लोग बहुत अच्छे कपड़े पहन लेते हैं और देखने में वह ठीक-ठाक लगते भी है बट अगर उनका दिल गंदा है और उनकी सोच खराब है तो उसमें महंगे अच्छे कपड़े कुछ नहीं कर सकते| उसी तरह से महिलाओं को उनके कपड़ों के बेसिस पर जज करना, ये सोचना कि इसने छोटे कपड़े पहने हैं तो यह गलत लड़की होगी या इसने सलवार सूट पहने है तो ये बहन जी टाइप लड़की होगी, ये चीज एकदम गलत होती है| देखिये कपड़े कोई भी अपने कल्चर के हिसाब से, अपनी पसंद के हिसाब से, या अपनी जरूरत के हिसाब से पहनते हैं| अगर कोई कॉरपोरेट ऑफिस में जॉब करती है लड़की तो मुझे नहीं लगता कि वह सूट सलवार या साड़ी पहनकर जाएंगी| क्यूंकि उनकी जॉब ऐसी ही होती है और उन्हें वैसा ही दिखना जरूरी भी होता है| उसी तरह से किसी लड़की ने आज तक तो मेरे हिसाब से सबसे अच्छी फ्रेंड की शादी नहीं की क्योंकि उसके लिए पर्टिकुलर ड्रेस होती है लहंगा चुन्नी, जो भी तो कोई कपड़े कैसे पहने हो इस बेसिस पे किसी का केरेक्टर जज करना बहुत ही गलत बात है| और बाल्य संस्कृति तो महिलाओं की इज्जत करना भी सिखाती है फिर भी 8 महीने की बच्ची के साथ रेप हो जाता है| तो जब ऐसी चीज हो सकती तो कपड़े पहनने से तो लोगों को प्रॉब्लम होनी ही नहीं चाहिए मेरे हिसाब से|

dekhiye mujhe aisa lagta hai ki kapde kabhi bhi kisi ki personality ko define nahi karte matlab aise nahi ki wah kis tarah ka insaan hai accha ya bura bahut bure bure log bahut acche kapde pahan lete hai aur dekhne mein wah theek thak lagte bhi hai but agar unka dil ganda hai aur unki soch kharab hai to usamen chahiye mehnge acche kapde kuch nahi kar sakte ussi tarah se mahilaon ko unke kapadon ke basis par judge karna ye sochna ki isane chote kapde pahane hai to yeh galat ladki hogi ya isane salwar suit pahane hai to ye behen ji type ladki hogi ye cheez ekdam galat hoti hai dekhiye kapde koi bhi apne culture ke hisab se apni pasand ke hisab se ya apni zarurat ke hisab se pehente hai agar koi corporate office mein job karti hai ladki to mujhe nahi lagta ki wah suit salwar ya sadi pehankar jaengi kyunki unki job aisi hi hoti hai aur unhen chahiye waisa hi dikhana zaroori bhi hota hai ussi tarah se kisi ladki ne aaj tak to mere hisab se sabse acchi friend ki shadi nahi ki kyonki uske liye particular dress hoti hai lehenga chunni jo bhi to koi kapde kaise pahane ho is basis pe kisi ka kerektar judge karna bahut hi galat baat hai aur balya sanskriti to mahilaon ki izzat karna bhi sikhati hai phir bhi 8 mahine ki bacchi ke saath rape ho jata hai to jab aisi cheez ho sakti to kapde pahanne se to logo chahiye ko problem honi hi nahi chahiye mere hisab se

देखिये मुझे ऐसा लगता है कि कपड़े कभी भी किसी की पर्सनालिटी को डिफाइन नहीं करते, मतलब ऐसे न

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Ekta

Researcher and Writer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जी कुछ हद तक हमारी जो कपड़े पहनने का तरीका है हमारा जो स्टाइल है रहने का मुझे फाइन करता है कि हम कैसे लेकिन कभी-कभी आपको अपने काम प्रोफेशनल के हिसाब से ड्रेस अप करना पड़ता है जो अब चाहे या ना चाहे वह आपको करना पड़ेगा तो अगर अपने आप राह बनाते हैं कि आजकल की युवा जो महिला है वह आधुनिक ट्रेंडिंग के हिसाब से कपड़े पहन रही है और उसके हिसाब से अगर अब पूरी उसका कल्चर को डिफाइन करें तो यह गलत है किसी भी इंसान के बिना नहीं जी जीवन को जानने से पहले अगर आप उस तक किसी भी प्रकार का कमेंट करते हैं या अपनी राय बनाते हैं जजमेंट देते हैं तो यह गलत है आपके पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है कि आप किसी को क्या किसी के बारे में ऐसी राय बने अब बना भी रहे हैं तो उसे अपने तक सीमित रखिए इससे पहला आई एम अ और अगर एक कपड़े से इंसान का बिहेवियर कल्चर सब पता चल जाता तो इंसान बस कपड़े पहन कर रह जाता है उसे बोलने यह समझाने की जरूरत नहीं पड़ती है अब बाकी क्या कुछ समझदार है

ji kuch had tak hamari jo kapde pahanne ka tarika hai hamara jo style hai rehne ka mujhe fine karta hai ki hum kaise lekin kabhi kabhi aapko apne kaam professional ke hisab se dress up karna padata hai jo ab chahe ya na chahe wah aapko karna padega to agar apne aap raah banate hain ki aajkal ki yuva jo mahila hai wah aadhunik trading chahiye ke hisab se kapde pahan rahi hai aur uske hisab se agar ab puri uska culture ko define kare chahiye to yeh galat hai kisi bhi insaan ke bina nahi ji jeevan ko jaanne se pehle agar aap us tak kisi bhi prakar ka comment karte hain ya apni rai banate hain judgement dete hain to yeh galat hai aapke paas aisa koi adhikaar nahi hai ki aap kisi ko kya kisi ke baare mein aisi rai bane ab bana bhi rahe hain to use apne tak simith rakhiye isse pehla eye em a aur agar ek kapde se insaan ka behaviour culture sab pata chal jata to insaan bus kapde pahan kar rah jata hai use bolne yeh samjhane ki zarurat nahi padhti hai ab baki kya kuch samajhdar hai

जी कुछ हद तक हमारी जो कपड़े पहनने का तरीका है हमारा जो स्टाइल है रहने का मुझे फाइन करता है

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Pragati

Aspiring Lawyer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लिखे भारतीय संस्कृति में जो कपड़े आते हैं और जो ड्रेसेस हम लोग महिलाओं के लिए हैं वह सब ठीक है हम लोग वह भी अगर कोई महिला उसे पसंद करती है और तूने पहन सकती है और उसका पूरा पूरा हक है क्या उसे जो पसंद आ रहा है वह पहने लेकिन अगर कोई महिला आधुनिक कपड़े पहन रही है वेस्टर्न कपड़े पहन रही है तू भी हमें इस बात को समझना चाहिए कि वह भी उसकी मर्जी है पर जिस चीज से कंफर्टेबल है जो चीज मुझे पसंद आ रहे हैं यह जूस की पौड़ी पर उसे अच्छे लग रहे हैं वह वह वह वह कपड़े पहन सकती है उसको पूरा पूरा हक है उन कपड़ों को पहनने का और हमको किसी भी तरह की कोई भी राय नहीं बनानी चाहिए क्योंकि हमारे देश में कई सारे ऐसे लोग हैं कैसा कहीं जगह पर ऐसा समाज है जो कि महिलाओं के कपड़ों को देखकर उनके बारे में उनकी पर्सनालिटी उनके कैरेक्टर और उनकी बीवी और उनकी फैमिली अब रिंगिंग सब के बारे में एक राय बना लेती है और वह काफी हद तक जो वेस्टर्न कल्चर पहने हुए वेस्टर्न कल्चर के कपड़े पहने हुए महिलाएं होती हैं उनके बारे में हमेशा गलत राई ही बनाती है हमारा समाज तो हम लोग इन सब चीजों से ऊपर उठना चाहिए थोड़ा ब्रॉड माइंडेड हो गए सोचना चाहिए कि एक महिला भी एक पुरुष के समान है अगर एक पुरे जो मर्जी मैं चाहे वह पहन सकते हैं जैसे चाहे वो रह सकते हैं तो एक महिला क्यों नहीं उसको भी पूरा पूरा अधिकार है कि वह जो चाहे उसको जो पसंद आ रहा है वह जैसे में कंफर्टेबल है वह पहन सके और बाकी लोगों को इस बारे में समझना चाहिए और उसके बारे में कोई राय नहीं बनानी चाहिए

likhe bhartiya sanskriti mein jo kapde aate hai aur jo dresses hum log mahilaon ke liye hai wah sab theek hai hum log wah bhi agar koi mahila use pasand karti hai aur tune pahan sakti hai aur uska pura pura haq hai kya use jo pasand aa raha hai wah pahane lekin agar koi mahila aadhunik kapde pahan rahi hai western kapde pahan rahi hai tu bhi hume is baat ko samajhna chahiye ki wah bhi uski marji hai par jis cheez se kamfartebal hai jo cheez mujhe pasand aa rahe hai yeh juice ki podi par use acche lag rahe hai wah wah wah wah kapde pahan sakti hai usko pura pura haq hai un kapadon ko pahanne ka aur hamko kisi bhi tarah ki koi bhi rai nahi banani chahiye kyonki hamare desh mein kai sare aise log hai kaisa kahin jagah par aisa samaj hai jo ki mahilaon ke kapadon ko dekhkar unke baare mein unki personality unke character aur unki biwi chahiye aur unki family ab wring sab ke baare mein ek rai bana leti hai aur wah kaafi had tak jo western culture pahane hue western culture ke kapde pahane hue mahilaye hoti hai unke baare mein hamesha galat rai hi banati hai hamara samaj to hum log in sab chijon se upar uthna chahiye thoda broad minded ho gaye sochna chahiye ki ek mahila bhi ek purush ke saman hai agar ek poore jo marji main chahe wah pahan sakte hai jaise chahe vo rah sakte hai to ek mahila kyu nahi usko bhi pura pura adhikaar hai ki wah jo chahe usko jo pasand aa raha hai wah jaise mein kamfartebal hai wah pahan sake aur baki logo chahiye ko is baare mein samajhna chahiye aur uske baare mein koi rai nahi banani chahiye

लिखे भारतीय संस्कृति में जो कपड़े आते हैं और जो ड्रेसेस हम लोग महिलाओं के लिए हैं वह सब ठी

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Sefali

Media-Ad Sales

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भारतीय संस्कृति के आधार पर एक महिला को उसके आधुनिक ड्रेसिंग सेंस पर राय बना लेना गलत है क्योंकि भारत एक इंडिपेंडेंस देश है| फ्रीडम सबको है, क्या पहनना चाहता है? क्या नहीं पहनना जाता है एक इंसान? किस तरह से वह रहना चाहता है? उसकी चॉइस ऑफ कपड़े क्या है? उनके ऊपर डिपेंड करता है|

bhartiya sanskriti ke aadhar par ek mahila ko uske aadhunik dressing sense par rai bana lena galat hai kyonki bharat ek Independence desh hai freedom sabko hai kya pahanna chahta hai kya nahi pahanna jata hai ek insaan kis tarah se wah rehna chahta hai uski choice of kapde kya hai unke upar depend karta hai

भारतीय संस्कृति के आधार पर एक महिला को उसके आधुनिक ड्रेसिंग सेंस पर राय बना लेना गलत है क्

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कल्चरल काउंटरी तो मुझे लगता है कि हर महिला को एक हमारे इंडिया का कल से फॉलो करना चाहिए क्योंकि हम जैसे रहते हैं हमारा जो जनरेशन था वह जैसे हम गुजर चुके हैं तो उसको हम फॉलो करना बहुत जरूरी होता है और महिला से यही अनुरोध है कि हमें बिल्कुल भारत का जो संस्कृति देश है उसको फॉलो करना चाहिए थैंक यू सो मच

cultural kauntari toh mujhe lagta hai ki har mahila ko ek hamare india ka kal se follow karna chahiye kyonki hum jaise rehte hain hamara jo generation tha vaah jaise hum gujar chuke hain toh usko hum follow karna bahut zaroori hota hai aur mahila se yahi anurodh hai ki hamein bilkul bharat ka jo sanskriti desh hai usko follow karna chahiye thank you so match

कल्चरल काउंटरी तो मुझे लगता है कि हर महिला को एक हमारे इंडिया का कल से फॉलो करना चाहिए क्य

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Ishita Seth

Obstinate Programmer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जी मुझे ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि हमारी भारतीय संस्कृति के आधार पर एक महिला को उसके आधुनिक ड्रेसिंग पर राय बनाना सही है l क्योंकि यह अपनी एक अपनी पर्सनल चोइसस होती है कि आपको क्या पहनना है और क्या नहीं पहना , आपको किस तरह ड्रेसअप होना है, आपको कौन सा अत्तैर कब पहना है l यह महिलाओं की अपनी मर्जी है इस पर इतना को इतना बड़ा इशू बनाने वाली इस्पे को इतना बड़ा बवाल मचाने वाली कोई बात नहीं है l भारतीय संस्कृति हमे बिल्कुल नहीं सिखाती कि हम दूसरों के कपड़ों पर उन पर कमेंट करें, उनको जज करें और उनकी उन पर राय बनाए उनके बारे में l आपको क्या किसी भी इंसान से मिलते हो आपको उसका ड्रेसिंग देखकर नहीं बल्कि उसका नेचर उसकी पर्सनालिटी अपना को कैसे कैर्री करते हैं यह सब चीजें देखकर उनके बारे में कुछ जज करना चाहिए, राय बनाना चाहिए l सिर्फ एक ड्रेसिंग को देखकर कि वह छोटे कपडे पहनती है या फिर वह भारतीय संस्कृति अक्कोर्डिंग ड्रेस अप नहीं करती हैं, वह वेस्टर्न क्लोठेस पहनती है इस बात पर किसी भी इंसान के बारे में राय बनाना बिल्कुल गलत है l

ji mujhe aisa bilkul nahi lagta ki hamari bhartiya sanskriti ke aadhar par ek mahila ko uske aadhunik dressing par rai banana sahi hai l kyonki yeh apni ek apni personal choisas hoti hai ki aapko kya pahanna hai aur kya nahi pehna , aapko kis tarah dresap hona hai aapko kaun sa attair kab pehna hai l yeh mahilaon ki apni marji hai is par itna ko itna bada issue banane wali ispe chahiye ko itna bada bawaal machaane wali koi baat nahi hai l bhartiya sanskriti hume bilkul nahi sikhati ki hum dusro ke kapadon par un par comment kare chahiye unko judge kare chahiye aur unki un par rai banaye unke baare mein l aapko kya kisi bhi insaan se milte ho aapko uska dressing dekhkar nahi balki uska nature uski personality apna ko kaise kairri chahiye karte hai yeh sab cheezen dekhkar unke baare mein kuch judge karna chahiye rai banana chahiye l sirf ek dressing ko dekhkar ki wah chote kapde pahanti hai ya phir wah bhartiya sanskriti akkording dress up nahi karti hai wah western klothes pahanti hai is baat par kisi bhi insaan ke baare mein rai banana bilkul galat hai l

जी मुझे ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि हमारी भारतीय संस्कृति के आधार पर एक महिला को उसके आधुनिक

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