क्या भारतीय संस्कृति के आधार पर एक महिला को उसके आधुनिक ड्रेसिंग पर राय बनाना सही है? क्यूं?...


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Awdhesh Singh

Former IRS, Top Quora Writer, IAS Educator

0:58

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए हर देश की संस्कृति होती है और हर संस्कृति की अपनी एक मर्यादाएं होती हैं भारत के अंदर जो है वह बड़ी विविधता रहती है एक जो गांव के अंदर जो आदमी की जो ड्रेसिंग होती है वाला होती है शहर के अंदर ड्रेसिंग अलग होती है पार्टी के लिए ड्रेसिंग अलग होती है ऑफिस की रेटिंग अलग होती है और यह बहुत जरूरी है कि हम हर चीज को समय के हिसाब से उसको अपने को ट्रेस करें अगर मान लिया जो ड्रेसेस जो हैं मान लिया दिल्ली में या मुंबई में चलती हैं अगर वही ड्रेसेस अगर कोई राजस्थान यूपी के गांव में पहने तो वह बहुत ही अनुचित लगेगी बहुत ही ऑफ लगेगी और उस तरीके की जो आधुनिक ड्रेस्सेस है वह दिल्ली में बढ़ी कॉमन है और दिल्ली और मुंबई में उचित भी लगेगी लेकिन वहां पर आओ ना पहने तो ही बेहतर है इसलिए मेरे ख्याल से जैसा देश वैसा भेष होना चाहिए जिस सोसाइटी में आप रहे हैं अगर आप उसके हिसाब से अपने को डाल सके उसके हिसाब से प्रिंट रेसिंग कर सके तो इस से बेहतर कुछ नहीं है

dekhie chahiye har desh ki sanskriti hoti hai aur har sanskriti ki apni ek maryadaen hoti hai bharat ke andar jo hai wah baadi vividhata rehti hai ek jo gav ke andar jo aadmi ki jo dressing hoti hai wala hoti hai sheher ke andar dressing alag hoti hai party ke liye dressing alag hoti hai office ki rating alag hoti hai aur yeh bahut zaroori hai ki hum har cheez ko samay ke hisab se usko apne ko trays kare chahiye agar maan liya jo dresses jo hai maan liya delhi mein ya mumbai mein chalti hai agar wahi dresses agar koi rajasthan up ke gav mein pahane to wah bahut hi anuchit lagegi bahut hi of lagegi aur us tarike ki jo aadhunik dresses hai wah delhi mein badhi common hai aur delhi aur mumbai mein uchit bhi lagegi lekin wahan par aao na pahane to hi behtar hai isliye mere khayal se jaisa desh waisa bhesh hona chahiye jis society mein aap rahe hai agar aap uske hisab se apne ko dal sake uske hisab se print racing kar sake to is se behtar kuch nahi hai

देखिए हर देश की संस्कृति होती है और हर संस्कृति की अपनी एक मर्यादाएं होती हैं भारत के अंदर

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