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हेलो गाइस सेक्शन 228 इंडियन पैनल कोर्ट का यह कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट से न्यायालय का अनुमान सेक्शन 228 नए कार्रवाई में बैठे हुए लोक सेवक का साथ सलमान या उसके कार्य में विघ्न है लोक सेवक जो सरकारी कर्मचारी होते हैं जो जो कोई किसी लोक सेवक का उस समय जिसमें आप कमा सकते हैं मुझे कहा गया है जो कोई किसी लोक सेवक का उस समय जबकि ऐसा लोकसेवक न्याय कारवां की किसी प्रक्रम में बैठा हुआ हो न्याय कार्रवाई के प्रक्रम में और बैठो चाहे कोई अपमान करेगा जैसे कार में कोई बिक्री डालेगा मैं सादा कारवां से इसकी अवधि 6 मार्च तक की हो सकेगी या जुर्माने से एक है और पदक हो सकेगा या दोनों से दंडित किया जाएगा इस पर जो टिप्पणी है वह आवश्यकता तो है आह्वान करना या विघ्न उत्पन्न करना मान मतलब एक न्यायालय का अपमान होती है उसकी बात जो उसके रूल से उसकी कार्रवाई या नहीं मानना विद्युत बंद करना कार्रवाई में दखलअंदाजी करना सेकंड है सामान जबरन किसी लोक सेवक के विरूद्ध होना चाहिए किसी लोक सेवक के जो लोक सेवक है लोक सेवक अब तो जो है साजन के स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए सार्वजनिक स्थल सरकारी कर्मचारियों से है और इसमें ठाट जो ऐसा अपमान या विकसित होना चाहिए ऐसा अपमान या बदमसीत होना चाहिए ऐसा अमानवीय उस समय होना चाहिए जबकि वह अन्य कार्रवाई की इसी अवस्था में बैठा केस है जो केस है वह को तारों एक ऐसा अमित वशिष्ठ का नाम सुरेश का के मामले में यह अभी निर्धारित किया है कि भविष्य निधि आयुक्त के समक्ष की न्यायिक निर्णय कार्रवाई हैं नए कार्रवाई हैं और में हस्तक्षेप किया जाना सेक्शन 228 के अंत दंडनीय अपराध को एक अपराध है और ठंड नहीं है सेकंड केसर बैंक कार्ड राव का मामला इसमें अभियुक्त ने एक अपराध कार्रवाई के दौरान न्यायाधीश को पक्षपाती न्यायाधीश कहकर संबोधित किया न्यायाधीश ने अमित को अपने शब्द वापस लेने के लिए कहा परंतु उसने ऐसा करने से मना कर दिया यह धारण किया गया कि अभी इस धारा के अंतर्गत अपराध को दोषी है कोर्ट में कार्रवाई चल रही है और न्याय व्यक्ति मतलब जो न्यायाधीश बैठे होते जो ने कार्रवाई करते हैं और उसमें सी दूरी दूसरी कारण खबर आरोप लगाया जाता है या नए कार्रवाई में दखलअंदाजी कि यदि ऐसी कार्रवाई अपनी कर रहा है उसमें आप बोल रहे हो या आप कुछ आप बोलना चाहिए तब ना बोल कर आप उसमें कुछ ज्यादा बोल रहे हो जब आपका बोलने का समय उसमें आप नहीं बोल रहे हो और जब बोलने का समय नहीं है उसमें आप बोल रहे हो पुणे करवे में दखलअंदाजी होता है और किसी न्यायाधीश को पर पक्षपात का आरोप लगाना तो यह दंड नहीं है इसमें छह माह तक की जो है सजा है साथ में जुर्माना भी ₹1000 का यह दोनों डिनडेड जो है दोनों से किया जा सकता धन्यवाद

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हेलो गाइस सेक्शन 228 इंडियन पैनल कोर्ट का यह कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट से न्यायालय का अनुमान सेक्श

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