अनुच्छेद 356 के तहत राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होता है तो उसके नियम क्या हैं?...


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KRISHNA KUMAR SINGH

Social Activist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

विधानसभा में बहुमत पूरा नहीं हो सकता है ना तो यह है कि राष्ट्रपति अपना शासन लगाते हैं वहां के राजपाल की देखरेख में रहते हैं और जब तक कंप्लीट नहीं कर देता तो पीरियड बढ़ता है

vidhan sabha mein bahumat pura nahi ho sakta hai na toh yah hai ki rashtrapati apna shasan lagate hain wahan ke rajyapal ki dekhrekh mein rehte hain aur jab tak complete nahi kar deta toh period badhta hai

विधानसभा में बहुमत पूरा नहीं हो सकता है ना तो यह है कि राष्ट्रपति अपना शासन लगाते हैं वहां

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Norang sharma

Social Worker

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार दोस्तों बोतल पर सुन रहे मेरे सभी बुद्धिजीवी श्रोताओं को मेरा प्यार भरा नमस्कार आज का सवाल है अनुच्छेद 356 के तहत किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होता है तो उसके नियम क्या है दोस्तों भारतीय संविधान में तीन प्रकार के आपातकाल की व्यवस्था की गई है सबसे पहला राष्ट्रीय आपातकाल जो के अनुच्छेद भाग 352 का हिस्सा है दूसरा राष्ट्रपति शासन अनुच्छेद 356 और तीसरा वित्तीय आपात अनुच्छेद 360 हम बात करने जा रहे हैं अनुच्छेद 356 की दोस्तों क्या है राष्ट्रपति शासन के मायने दोस्तों अनुच्छेद 356 के अधीन राष्ट्रपति किस स्टेट में यह समाधान हो जाने पर कि राज्य में संवैधानिक तंत्र पूरी तरह से विफल हो गया है यकीन हो गया है या राज्य संघ की कार्यपालिका के किन्ही निर्देशों का अनुपालन करने में असमर्थ रहता है तो आपात स्थिति की घोषणा कर सकता है राज्य में आपात की घोषणा के बाद संघ न्यायिक कार्य छोड़कर राज्य प्रशासन के कार्य अपने हाथ में ले लेता है जब राज्य में आपात उद्घोषणा की जो अवधि होती है वह तो महीने की होती है नॉर्मल इससे ज्यादा के लिए संसद से अनुमति लेनी होती है तब यह 6 मंथ तक की होती है और मैक्सिमम 3 साल के लिए किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है इससे ज्यादा के लिए लगाने के लिए संविधान में संशोधन करना पड़ेगा सबसे पहले पंजाब राज्य में अनुच्छेद 356 का प्रयोग किया गया यह जहां कहीं भी राज्य की कोई व्यवस्था चरमरा जाती है तो इस तरह की व्यवस्था है कि राष्ट्रपति शासन के जरिए उस राज्य को थोड़ा संभाला जाता है और जब तक वह सुचारू रूप से व्यवस्थाएं सामान्य नहीं हो जाती तब तक राष्ट्रपति शासन लगा रहता है धन्यवाद

namaskar doston bottle par sun rahe mere sabhi buddhijeevi shrotaon ko mera pyar bhara namaskar aaj ka sawaal hai anuched 356 ke tahat kisi rajya mein rashtrapati shasan laagu hota hai toh uske niyam kya hai doston bharatiya samvidhan mein teen prakar ke aapatkal ki vyavastha ki gayi hai sabse pehla rashtriya aapatkal jo ke anuched bhag 352 ka hissa hai doosra rashtrapati shasan anuched 356 aur teesra vittiy aapaat anuched 360 hum baat karne ja rahe hai anuched 356 ki doston kya hai rashtrapati shasan ke maayne doston anuched 356 ke adheen rashtrapati kis state mein yah samadhan ho jaane par ki rajya mein samvaidhanik tantra puri tarah se vifal ho gaya hai yakin ho gaya hai ya rajya sangh ki karyapalika ke kinhi nirdeshon ka anupaalan karne mein asamarth rehta hai toh aapaat sthiti ki ghoshana kar sakta hai rajya mein aapaat ki ghoshana ke baad sangh nyayik karya chhodkar rajya prashasan ke karya apne hath mein le leta hai jab rajya mein aapaat udghoshna ki jo awadhi hoti hai vaah toh mahine ki hoti hai normal isse zyada ke liye sansad se anumati leni hoti hai tab yah 6 month tak ki hoti hai aur maximum 3 saal ke liye kisi rajya mein rashtrapati shasan lagaya ja sakta hai isse zyada ke liye lagane ke liye samvidhan mein sanshodhan karna padega sabse pehle punjab rajya mein anuched 356 ka prayog kiya gaya yah jaha kahin bhi rajya ki koi vyavastha charmara jaati hai toh is tarah ki vyavastha hai ki rashtrapati shasan ke jariye us rajya ko thoda sambhala jata hai aur jab tak vaah sucharu roop se vyavasthaen samanya nahi ho jaati tab tak rashtrapati shasan laga rehta hai dhanyavad

नमस्कार दोस्तों बोतल पर सुन रहे मेरे सभी बुद्धिजीवी श्रोताओं को मेरा प्यार भरा नमस्कार आज

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Anjali

Student

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखी जब किसी राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल हो जाता है तो वहां अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया जाता है संशोधन के पूर्व राष्ट्रपति शासन की अवधि ठीक हो छे छे महीने करके 3 वर्ष तक प्रभावी रखी जा सकती थी किंतु इस अधिनियम द्वारा 3 वर्ष की अवधि को घटाकर 1 वर्ष कर दिया गया है

dekhi jab kisi rajya mein samvaidhanik tantra vifal ho jata hai toh wahan anuched 356 ke tahat Rashtrapati shasan laagu kar diya jata hai sanshodhan ke purv Rashtrapati shasan ki awadhi theek ho chhe chhe mahine karke 3 varsh tak prabhavi rakhi ja sakti thi kintu is adhiniyam dwara 3 varsh ki awadhi ko ghatakar 1 varsh kar diya gaya hai

देखी जब किसी राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल हो जाता है तो वहां अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्र

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Bhaskar Saurabh

Politics Follower | Engineer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

राष्ट्रपति शासन से जुड़े प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 356 और 365 में दिए गए हैं आर्टिकल 356 के मुताबिक राष्ट्रपति किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा सकते हैं यदि वह इस बात से संतुष्ट हो कि राज्य सरकार संविधान के विभिन्न प्रावधानों के मुताबिक काम नहीं कर रही है ऐसा जरूरी नहीं है की भी राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर ही ऐसा करें अनुच्छेद 365 के मुताबिक यदि राज्य केंद्र सरकार द्वारा दिए गए संवैधानिक निर्देशों का पालन नहीं करती है तो उस हालत में भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है और राष्ट्रपति शासन अन्य परिस्थितियों में भी लगाया जा सकता है जैसे कि यदि चुनाव के बाद किसी पार्टी को बहुमत न मिला हो यदि जिस पार्टी को बहुमत मिला हो वह सरकार बनाने से इनकार कर दे और राज्यपाल को दूसरा कोई ऐसा गठबंधन ना मिले जो सरकार बनाने की हालत में हो या फिर अभी हो सकता है कि यदि राज्य सरकार विधानसभा में हार के बाद इस्तीफा दे दें और दूसरी दल सरकार बनाने के 10 ऐसी हालत में ना हो और भी कुछ रीजन से जैसे कि यदि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के संवैधानिक निर्देशों का पालन नहीं किया हो या फिर यदि कोई राज्य सरकार जानबूझकर आंतरिक अशांति को बढ़ावा या जन्म दे रही हो और यदि कोई राज्य अपने संवैधानिक दायित्वों का अच्छे तरीके से निर्वाह न कर रही हो तो इन सारी परिस्थितियों में राष्ट्रपति अगर चाहे तो वह किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर सकते हैं

rashtrapati shasan se jude pravadhan samvidhan ke anuched 356 aur 365 mein diye gaye hain article 356 ke mutabik rashtrapati kisi bhi rajya mein rashtrapati shasan laga sakte hain yadi vaah is baat se santusht ho ki rajya sarkar samvidhan ke vibhinn pravdhano ke mutabik kaam nahi kar rahi hai aisa zaroori nahi hai ki bhi rajyapal ki report ke aadhaar par hi aisa kare anuched 365 ke mutabik yadi rajya kendra sarkar dwara diye gaye samvaidhanik nirdeshon ka palan nahi karti hai toh us halat mein bhi rajya mein rashtrapati shasan lagaya ja sakta hai aur rashtrapati shasan anya paristhitiyon mein bhi lagaya ja sakta hai jaise ki yadi chunav ke baad kisi party ko bahumat na mila ho yadi jis party ko bahumat mila ho vaah sarkar banane se inkar kar de aur rajyapal ko doosra koi aisa gathbandhan na mile jo sarkar banane ki halat mein ho ya phir abhi ho sakta hai ki yadi rajya sarkar vidhan sabha mein haar ke baad istifa de de aur dusri dal sarkar banane ke 10 aisi halat mein na ho aur bhi kuch reason se jaise ki yadi rajya sarkar ne kendra sarkar ke samvaidhanik nirdeshon ka palan nahi kiya ho ya phir yadi koi rajya sarkar janbujhkar aantarik ashanti ko badhawa ya janam de rahi ho aur yadi koi rajya apne samvaidhanik dayitvo ka acche tarike se nirvah na kar rahi ho toh in saree paristhitiyon mein rashtrapati agar chahen toh vaah kisi bhi rajya mein rashtrapati shasan laagu kar sakte hain

राष्ट्रपति शासन से जुड़े प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 356 और 365 में दिए गए हैं आर्टिकल 35

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Jyoti Mehta

Ex-History Teacher

1:06
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अनुच्छेद 356 के अनुसार राष्ट्रपति किसी भी राज्य में राष्ट्रपति राष्ट्रपति शासन लागू कर सकते हैं अगर वह इस बात से संतुष्ट हो कि राज्य सरकार संविधान के विभिन्न प्रावधानों के अनुसार कार्य नहीं कर रही है और इसके लिए ऐसा जरूरी नहीं है कि वे राज्यपाल की रिपोर्ट के अनुसार ही काम करें राष्ट्रपति शासन लगाने की 2 महीने के अंदर ही संसद के दोनों सदनों द्वारा इसका अनुमोदन होना आवश्यक है अर्थात राष्ट्रपति को पूरा अधिकार है कि यदि किसी भी राज्य में संविधान का स्पष्ट उल्लंघन हो रहा हो तो राज्य सरकार को बर्खास्त करके राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है यह शासन उत्तराखंड में लगाया था इस में शासन की बागडोर राज्यपाल की जगह गवर्नर को चली जाती है गवर्नर को राष्ट्रपति के द्वारा ही चुना जाता है 356 लागू होने के बाद राज्य में मुख्यमंत्री की उसे खाली हो जाती है और मंत्रिमंडल समूह भी कोई कार्य नहीं कर सकता है

anuched 356 ke anusaar rashtrapati kisi bhi rajya mein rashtrapati rashtrapati shasan laagu kar sakte hain agar vaah is baat se santusht ho ki rajya sarkar samvidhan ke vibhinn pravdhano ke anusaar karya nahi kar rahi hai aur iske liye aisa zaroori nahi hai ki ve rajyapal ki report ke anusaar hi kaam kare rashtrapati shasan lagane ki 2 mahine ke andar hi sansad ke dono sadano dwara iska anumodan hona aavashyak hai arthat rashtrapati ko pura adhikaar hai ki yadi kisi bhi rajya mein samvidhan ka spasht ullanghan ho raha ho toh rajya sarkar ko barkhast karke rashtrapati shasan laagu kiya ja sakta hai yah shasan uttarakhand mein lagaya tha is mein shasan ki baghdor rajyapal ki jagah governor ko chali jaati hai governor ko rashtrapati ke dwara hi chuna jata hai 356 laagu hone ke baad rajya mein mukhyamantri ki use khaali ho jaati hai aur mantrimandal samuh bhi koi karya nahi kar sakta hai

अनुच्छेद 356 के अनुसार राष्ट्रपति किसी भी राज्य में राष्ट्रपति राष्ट्रपति शासन लागू कर सकत

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