मेरे हिसाब से विश्वास में जियो अंधविश्वासों में मत जियो कि 2022 तक अच्छे दिन आ जाएंगे?...


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Karan Janwa

Automobile Engineer

0:59

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए अच्छे दिनों का अर्थ होता है कि एक टिकट प्रगति के साथ साथ सामूहिक प्रकृति अगर किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत रूप से प्रगति होती है तो उसके अच्छे दिन आते हैं और अगर ऐसे समाज के किसी देश की सामरिक रूप से प्रगति होती है तो अच्छे दिनों के लिए व्यक्तिगत प्रगति भी आवश्यक है तो हमें इसके लिए सरकार पर निर्भर होने की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि हमारे देश की जनसंख्या अधिक है और सरकार व्यक्तिगत रूप से एक-एक व्यक्ति को भी बारे में नहीं पूछा भी है तो हमें अपने कर्मों पर विश्वास करना चाहिए और सरकार की योजनाओं पर भी तो सरकार के प्रयासों से और हमारे व्यक्तिगत प्रयासों से सामूहिक रूप से देश की प्रगति हो सकती है और सारे देश के अच्छे दिन आ सकते हैं धन्यवाद

dekhiye acche dino ka arth hota hai ki ek ticket pragati ke saath saath samuhik prakriti agar kisi vyakti ki vyaktigat roop se pragati hoti hai toh uske acche din aate hain aur agar aise samaj ke kisi desh ki samarik roop se pragati hoti hai toh acche dino ke liye vyaktigat pragati bhi aavashyak hai toh hamein iske liye sarkar par nirbhar hone ki avashyakta nahi hoti hai kyonki hamare desh ki jansankhya adhik hai aur sarkar vyaktigat roop se ek ek vyakti ko bhi bare mein nahi poocha bhi hai toh hamein apne karmon par vishwas karna chahiye aur sarkar ki yojnao par bhi toh sarkar ke prayaso se aur hamare vyaktigat prayaso se samuhik roop se desh ki pragati ho sakti hai aur saare desh ke acche din aa sakte hain dhanyavad

देखिए अच्छे दिनों का अर्थ होता है कि एक टिकट प्रगति के साथ साथ सामूहिक प्रकृति अगर किसी व्

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Shubham

Software Engineer in IBM

2:00
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

विकी राकेश जी अगर मैं अपना फोटो क्यों दूं तू मेरे को यह लगता है कि 2022 तक तो नहीं लेकिन थोड़ा टाइम और लगेगा अच्छे दिन आने के लिए पहली बात मैं यह बताना चाहता हूं आपको आपको बता भारत में बड़ा देश में कितनी जनसंख्या है और भारत और भी इतना कठिन है इतनी गरीबी ऑलरेडी है कि अगर आप इसको सोचो कि हम एक किया 2 साल से 4 साल की वर्किंग ड्यूरेशन में आप एकदम गरीबी खत्म कर दो पोसिबल है गवर्नमेंट कैप्सूल क्या बिल्कुल नहीं तो मुझे लगता है गवर्नमेंट से प्ले नहीं लिखा उसको अच्छे से मोनिटर नहीं कर पा रही है क्योंकि हमारे स्टेज जितना हमारा सिस्टम इतना खराब है कि अगर मोदी जी या फिर उनका जो सिस्टम है वह अगर स्टेप्स लेती भी है ना तू जो लो लेवल पर जो लोग काम करते हैं वह कहीं ना कहीं गड़बड़ी कर देते तो जिन को मदद मिल नहीं चाहिए वह मिल नहीं पाती कब 300 जैसे मोदी जी ने जीएसटी का सोचा अब आप एक बात बताइए अगर हम सोचेंगे अपनी सरकार में 5 साल के डी रेशन में हम गरीब खत्म कर दे और बहुत सारा पैसा गरीबों को बढ़ावा दें और उनके लिए एकदम कुछ कर दे तो फायदेमंद होगा गरीबों के लिए लेकिन वह कुछ दूर चलते ही होगा मतलब अपनी सरकार के टाइम कर दो 1 साल 2 साल में कुछ डिवीजन के लिए होगा लेकिन वह जो चीज है ना वह दोबारा रिपीट हो जाएगी लेकिन जो अभी बीजेपी स्टेप्स ले रही है उसे यह लगता है कि भाई थोड़ा टाइम लगेगा लेकिन हां आने वाले टाइम में यह चीज टेबल हो जाएगी जो थोड़ी अभी ज्यादा हालत खराब है गरीबों की और जो गरीब में डिफेंस पड़ रही है थोड़ा कम होगा और लोग इस्तेमाल हो जाएंगे मेरा यह मानना है देखते हैं क्या होता है जैसे मोदी ने स्टेप्स लिए जीएसटी वाला आप ज्यादा जब टेक्स्ट कलेक्ट होगा तो ऑफिस से बातें वह पैसा जो कलेक्टर को कहीं ना कहीं सारे रीजन अबू सॉरी सारे वकीलों पर खर्च होगा तो मुझे लगता है कि आएंगे लेकिन थोड़ा टाइम लगेगा उसको एग्रीमेंट करने में और आने में

vicky rakesh ji agar main apna photo kyon doon tu mere ko yah lagta hai ki 2022 tak toh nahi lekin thoda time aur lagega acche din aane ke liye pehli baat main yah bataana chahta hoon aapko aapko bata bharat mein bada desh mein kitni jansankhya hai aur bharat aur bhi itna kathin hai itni garibi already hai ki agar aap isko socho ki hum ek kiya 2 saal se 4 saal ki working duration mein aap ekdam garibi khatam kar do posibal hai government capsule kya bilkul nahi toh mujhe lagta hai government se play nahi likha usko acche se monitar nahi kar paa rahi hai kyonki hamare stage jitna hamara system itna kharab hai ki agar modi ji ya phir unka jo system hai vaah agar steps leti bhi hai na tu jo lo level par jo log kaam karte hain vaah kahin na kahin gadbadi kar dete toh jin ko madad mil nahi chahiye vaah mil nahi pati kab 300 jaise modi ji ne gst ka socha ab aap ek baat bataye agar hum sochenge apni sarkar mein 5 saal ke d ration mein hum garib khatam kar de aur bahut saara paisa garibon ko badhawa de aur unke liye ekdam kuch kar de toh faydemand hoga garibon ke liye lekin vaah kuch dur chalte hi hoga matlab apni sarkar ke time kar do 1 saal 2 saal mein kuch division ke liye hoga lekin vaah jo cheez hai na vaah dobara repeat ho jayegi lekin jo abhi bjp steps le rahi hai use yah lagta hai ki bhai thoda time lagega lekin haan aane waale time mein yah cheez table ho jayegi jo thodi abhi zyada halat kharab hai garibon ki aur jo garib mein defence pad rahi hai thoda kam hoga aur log istemal ho jaenge mera yah manana hai dekhte kya hota hai jaise modi ne steps liye gst vala aap zyada jab text collect hoga toh office se batein vaah paisa jo collector ko kahin na kahin saare reason abu sorry saare vakilon par kharch hoga toh mujhe lagta hai ki aayenge lekin thoda time lagega usko Agreement karne mein aur aane mein

विकी राकेश जी अगर मैं अपना फोटो क्यों दूं तू मेरे को यह लगता है कि 2022 तक तो नहीं लेकिन थ

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Janak

An Enthusiastic Entrepreneur.

1:14
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह सवाल काफी इंटरेस्टिंग है विश्वास में जो या अंधविश्वास में 2022 तक अच्छे दिन आ जाएंगे मैंने आज ही आई आर्टिकल पढ़ा था जहां पर लिखा गया था कि अच्छे दिन आएंगे जैसे कि एजुकेशन में बदलाव आ रहा था एक आर्टिकल पढ़ा था जिसपर एजुकेशन के बारे में लिखा था और शायद वही लोग के लिए भी अच्छे दिन कह सकते हैं जो जिस तरह से हमारी गवर्मेंट काम कर रही है उससे यही तो लगता है कि 2022 तक अच्छे दिन आने के चांसेस ज्यादा है मैं 80% बोल सकता हूं कि अच्छे दिन आएंगे बच्चे मैं जितना डिलीट करेंगे उतना और जो लोगों का जो विश्वास था वह निकलता जाएगा वह कम होता जाएगा और स्टेबलाइजर नहीं रहेगी गवर्मेंट दो अगर जैसे कि मोदी जी जैसे काम कर रहे हैं वह बाहर के देशों के लिए मतलब बाहर के देशों के साथ न्यूज़ बनाकर अपना इंडिया रिलेशंस बढ़ा रहा है बट अगर वह अभी कुछ 2 साल के लिए कम कर दे और 2 साल कंप्लीट लिख कंप्लीट लिए उनकी गवर्नमेंट इंडिया पर कंसंट्रेट करें तो जरुर पड़ी 22 तक अच्छे दिन जरुर आएंगे

yah sawaal kaafi interesting hai vishwas mein jo ya andhavishvas mein 2022 tak acche din aa jaenge maine aaj hi I article padha tha jaha par likha gaya tha ki acche din aayenge jaise ki education mein badlav aa raha tha ek article padha tha jis par education ke bare mein likha tha aur shayad wahi log ke liye bhi acche din keh sakte hain jo jis tarah se hamari government kaam kar rahi hai usse yahi toh lagta hai ki 2022 tak acche din aane ke chances zyada hai 80 bol sakta hoon ki acche din aayenge bacche main jitna delete karenge utana aur jo logo ka jo vishwas tha vaah nikalta jaega vaah kam hota jaega aur Stabilizer nahi rahegi government do agar jaise ki modi ji jaise kaam kar rahe hain vaah bahar ke deshon ke liye matlab bahar ke deshon ke saath news banakar apna india rileshans badha raha hai but agar vaah abhi kuch 2 saal ke liye kam kar de aur 2 saal complete likh complete liye unki government india par concentrate kare toh zaroor padi 22 tak acche din zaroor aayenge

यह सवाल काफी इंटरेस्टिंग है विश्वास में जो या अंधविश्वास में 2022 तक अच्छे दिन आ जाएंगे मै

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Apurva D

Optimistic Coder

1:45
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए आप की कसम से मैं सहमत हूं कि लोगों ने असफल होने वाली अशुद्धियों पर विश्वास रखना चाहिए हम कब से अच्छे दिन आए हैं अच्छे दिन आए ऐसा करते जा रहा है पर क्या वाकई में अच्छे दिन आए हैं क्योंकि हर स्तर के लोगों के ऊपर अगर देखा जाए तो ऐसा बिल्कुल नहीं है गरीब लोग कभी भी भुखमरी से मर रहे हैं और पैसा के लिए वह दर दर भटक रहे हैं हम माना की सरकार ने बहुत सारी योजनाओं के बारे में बोला है पर क्या वाकई इंप्रूवमेंट हो रही है वह यह सरकार ने देखना चाहिए मेरे ख्याल से 2022 तक अच्छे काम जरुर होंगे जैसे टेक्नोलॉजी में हो या एजुकेशन में हूं बाकी तो चित्रपट अच्छे दिन आए हैं हम तभी कह सकते हैं जब हर स्तर के लोगों को उसका कुछ फायदा हो तो मेरे ख्याल से रिच लोक और परलोक मतलब गरीब लोगों के बीच की जो दरी है तो वह बढ़ती ही जा रही है इसके ऊपर सरकार ने वर्क करना और आपका जो यह कहना है कि अंधविश्वासों में मत जियो तो मेरे ख्याल से यह काफी हद तक सही है इसके लिए बाकी सब सरकार ने हम लोगों ने भी इस पर कुछ वर्क करना चाहिए और सरकार ने भी कुछ अच्छे डिसीजंस लेने चाहिए मेरे ख्याल से 2022 तक अच्छे दिन आना हर तरह के लोगों के लिए यह कहना थोड़ा असंभव भी है बट आगे कुछ हो सकता है अगर सब लोगों के लिए हम मतलब उन की उन्नति ही चाय अगर भारत की उन्नति ही चाहे तो ऐसा हो सकता है बट 2022 तक मुश्किल होगा

dekhiye aap ki kasam se main sahmat hoon ki logo ne asafal hone wali ashuddhiyon par vishwas rakhna chahiye hum kab se acche din aaye hain acche din aaye aisa karte ja raha hai par kya vaakai mein acche din aaye hain kyonki har sthar ke logo ke upar agar dekha jaaye toh aisa bilkul nahi hai garib log kabhi bhi bhukhmari se mar rahe hain aur paisa ke liye vaah dar dar bhatak rahe hain hum mana ki sarkar ne bahut saree yojnao ke bare mein bola hai par kya vaakai improvement ho rahi hai vaah yah sarkar ne dekhna chahiye mere khayal se 2022 tak acche kaam zaroor honge jaise technology mein ho ya education mein hoon baki toh chitrapat acche din aaye hain hum tabhi keh sakte hain jab har sthar ke logo ko uska kuch fayda ho toh mere khayal se rich lok aur parlok matlab garib logo ke beech ki jo dari hai toh vaah badhti hi ja rahi hai iske upar sarkar ne work karna aur aapka jo yah kehna hai ki andhvishvaso mein mat jio toh mere khayal se yah kaafi had tak sahi hai iske liye baki sab sarkar ne hum logo ne bhi is par kuch work karna chahiye aur sarkar ne bhi kuch acche disijans lene chahiye mere khayal se 2022 tak acche din aana har tarah ke logo ke liye yah kehna thoda asambhav bhi hai but aage kuch ho sakta hai agar sab logo ke liye hum matlab un ki unnati hi chai agar bharat ki unnati hi chahen toh aisa ho sakta hai but 2022 tak mushkil hoga

देखिए आप की कसम से मैं सहमत हूं कि लोगों ने असफल होने वाली अशुद्धियों पर विश्वास रखना चाहि

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