कैसे मुहम्मद ईश्वर के एक नबी और एक ही समय में एक योद्धा हो सकते थे? क्या यह कि विरोधात्मक नहीं है?...


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Mehmood Alum

Law Student

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मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के नबी थे साथ ही में एक योद्धा भी थे जो मोहम्मद सल्लल्लाहो वाले वसल्लम ने मक्का वासियों को अपना संदेश दिया तो बहुत से लोग इस्लाम को मानने लगे थे और बहुत से लोग विरोध भी हो हो गए थे और विरोधियों ने उन्हें मक्का से निकाल दिया था जिसके कारण उन्हें मदीना में शरण लेनी पड़ी थी लेकिन उन लोगों ने मदीना पर भी आक्रमण कर दिया था जिसके जवाब में मोहम्मद सल्लल्लाहो वाले वसल्लम और मदीना वासियों ने मक्का वालों से युद्ध किया था और मक्का मदीना शहर की रक्षा की थी तो यह दोनों चीजें एक दूसरे की पूरक हैं भगवान राम ने भी लंका जाकर युद्ध किया था तो वह भी एक भगवान थे और उन्होंने भी युद्ध किया था अपने धर्म की रक्षा के लिए और मानवता की रक्षा के लिए तो मानवता की रक्षा के लिए अक्सर तलवारे उठती ही रहती हैं

muhammad sallallahu alauhi vasallam allah ke nabi the saath hi mein ek yoddha bhi the jo muhammad sallallaho waale vasallam ne makka vasiyo ko apna sandesh diya toh bahut se log islam ko manane lage the aur bahut se log virodh bhi ho ho gaye the aur virodhiyon ne unhe makka se nikaal diya tha jiske karan unhe madina mein sharan leni padi thi lekin un logon ne madina par bhi aakraman kar diya tha jiske jawab mein muhammad sallallaho waale vasallam aur madina vasiyo ne makka walon se yudh kiya tha aur makka madina shehar ki raksha ki thi toh yah dono cheezen ek dusre ki purak hain bhagwan ram ne bhi lanka jaakar yudh kiya tha toh vaah bhi ek bhagwan the aur unhone bhi yudh kiya tha apne dharam ki raksha ke liye aur manavta ki raksha ke liye toh manavta ki raksha ke liye aksar talware uthati hi rehti hain

मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के नबी थे साथ ही में एक योद्धा भी थे जो मोहम्मद सल्

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मोहम्मद साहब अपेक्षा में नदी भी थे योद्धा भी थे वो क्या बोलते हैं मुसलमानों के सबसे बड़े आदमी थे और इसी तरीके से अपने घर वालों में भी बच्चों वाले भी थे सब कुछ था क्योंकि इसलिए होता है कि जो पूरी दुनिया के जुगाड़ बनने वाले इस्लाम धर्म का गार्ड बनने वाला है वह कमजोर हो कि उसके साथ खुद की ताकत ना हो वह खुद इस चीज को दूसरा मुकाबला ना कर सकते हो तो कैसा होगा तो उसको दूसरी तारीख जरूरत पड़ेगी हो जबकि मैं भी को ऐसा बना कर भेजा जाता है कि उसको किसी की जरूरत ना पड़े वह खुद अपनी ताकत होता है क्या अपनी पावर लेकर रखता है और जब उसके पास अपनी पावर ना होगी अपनी ताकत ना होगी तो फिर वह दूसरों तक अपना पैगाम कैसे पहुंच जाएगा अगर उसके पास अपनी ताकत होगी अपनी पावर होगी तभी तो दोस्तों पैगाम पहुंचा सकता है लेकिन मोहम्मद साहब एक योद्धा थे लेकिन अपने जीवन में शिवपुर में कभी भी हाथ नहीं उठाया बहुत थी लेकिन सिर्फ इस वजह से लोग नुकसान न पहुंचे इस वजह से उन्होंने किसी को भागना था और लोगों ने उनके प्रस्ताव को मारा-पीटा कुंभाराम के दांत भी थोड़े कितना कुछ नहीं किया लेकिन होना लटके बद्दुआ तक नींद कोई भी आदमी को सिर्फ भी कल मुझे है लेकिन चलो जीवन में कभी भी जीवन है उनका सुझाव था कबूल है उसने तो हमारा इतना सताया उसको भी खोल के विद्वान ईजी

muhammad saheb apeksha me nadi bhi the yodha bhi the vo kya bolte hain musalmanon ke sabse bade aadmi the aur isi tarike se apne ghar walon me bhi baccho waale bhi the sab kuch tha kyonki isliye hota hai ki jo puri duniya ke jugaad banne waale islam dharm ka guard banne vala hai vaah kamjor ho ki uske saath khud ki takat na ho vaah khud is cheez ko doosra muqabla na kar sakte ho toh kaisa hoga toh usko dusri tarikh zarurat padegi ho jabki main bhi ko aisa bana kar bheja jata hai ki usko kisi ki zarurat na pade vaah khud apni takat hota hai kya apni power lekar rakhta hai aur jab uske paas apni power na hogi apni takat na hogi toh phir vaah dusro tak apna paigam kaise pohch jaega agar uske paas apni takat hogi apni power hogi tabhi toh doston paigam pohcha sakta hai lekin muhammad saheb ek yodha the lekin apne jeevan me shivpur me kabhi bhi hath nahi uthaya bahut thi lekin sirf is wajah se log nuksan na pahuche is wajah se unhone kisi ko bhaagna tha aur logo ne unke prastaav ko mara pita kumbharam ke dant bhi thode kitna kuch nahi kiya lekin hona latke baddua tak neend koi bhi aadmi ko sirf bhi kal mujhe hai lekin chalo jeevan me kabhi bhi jeevan hai unka sujhaav tha kabool hai usne toh hamara itna sataaya usko bhi khol ke vidhwaan easy

मोहम्मद साहब अपेक्षा में नदी भी थे योद्धा भी थे वो क्या बोलते हैं मुसलमानों के सबसे बड़े आ

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Dilsh Sheikh

Journalist

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