योगा की अवधारणा भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार कैसे पैदा हुई थी?...


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ऐसे और सवाल
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Dr Chandra Shekhar Jain

MBBS, Yoga Therapist Yoga Psychotherapist

1:53

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देवा दी देव महादेव भगवान शंकर को ही युग का आदि प्रवर्तक माना जाता है उन्हें महायोगी कहा जाता है महायोगी शिव ही यूके आदि प्रवर्तक हैं हमारी जो पौराणिक मान्यता के अनुसार और उन्हीं से यह अभियान धीरे-धीरे ऋषि मुनि परंपरा के द्वारा बढ़ते हुए संपूर्ण विश्व में फैला

deva di dev mahadev bhagwan shankar ko hi yug ka aadi pravartak mana jata hai unhe mahayogi kaha jata hai mahayogi shiv hi UK aadi pravartak hain hamari jo pouranik manyata ke anusaar aur unhi se yah abhiyan dhire dhire rishi muni parampara ke dwara badhte hue sampurna vishwa me faila

देवा दी देव महादेव भगवान शंकर को ही युग का आदि प्रवर्तक माना जाता है उन्हें महायोगी कहा जा

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सूर्य नारायण

योग शिक्षक

2:14
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Swami Umesh Yogi

Peace-Guru (Global Peace Education)

1:04
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योग का ज्योत पत्ते हैं वह ऐसे शास्त्रों में हैं कि भगवान शिव और शक्ति के माध्यम से हुआ इस विषय में हम एक लॉजिस्टिक भी चर्चा कर सकते हैं कि शिव और शक्ति का लॉजिकल कांसेप्ट क्या है एंड हाउ दिस जो गाड़ी गेम इन द ह्यूमन कल्चर इमेजेस शो में डांसर के योग का उत्पत्ति कहां से हुआ तो शास्त्रों के आधार पर तो भगवान शिव और जगदंबा का इनाम लेते हैं क्या करते

yog ka jyot patte hain vaah aise shastron me hain ki bhagwan shiv aur shakti ke madhyam se hua is vishay me hum ek logistic bhi charcha kar sakte hain ki shiv aur shakti ka logical concept kya hai and how this jo gaadi game in the human culture images show me dancer ke yog ka utpatti kaha se hua toh shastron ke aadhar par toh bhagwan shiv aur jagdamba ka inam lete hain kya karte

योग का ज्योत पत्ते हैं वह ऐसे शास्त्रों में हैं कि भगवान शिव और शक्ति के माध्यम से हुआ इस

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Yogi Satendra

Yoga Expert & International Coach | Yoga Therapist | Life Coach | Health & Fitness Consultant

7:30
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बहुत-बहुत नमस्कार मैं हूं योगी सत्येंद्र आपका बहुत-बहुत स्वागत है एक प्रश्न मेरे पास आया हुआ है योगा की अवधारणा भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार कैसे पैदा पैदा हुई थी क्या फिर योग की खोज कैसे हुई थी योग का कांसेप्ट क्या है इसके बारे में आज आपको बहुत ही विस्तार से जानकारी देना चाहता हूं बहुत लोगों के मन में यह प्रश्न हमेशा होता है कि योग की खोज कैसे हुई इनकी किसकी खोज योग की खोज किसने की और किस तरह से योग हमारे भारतवर्ष में आया तो मैं आपको बताना चाहूंगा कि हमारे ऋषि-मुनियों ने इसकी खोज योग की खोज 5000 साल पहले ही कर ली थी 5000 साल पहले हां जी हमारे ऋषि मुनि बहुत ही दिव्य दृष्टि से बहुत ही दिव्य दृष्टि उनके पास में थी और वह देख सकते थे कि आने वाले जनरेशन आने वाले टाइम पर जो हमारी जनरेशन हैं वह कितना कष्ट भोगने वाली है वह इतनी दृष्टि से लोन लिया था कि आने वाले टाइम पर आने वाले हजारों साल बाद या कई वर्षों के बाद में मनुष्य जाति के लिए आ जाओ टाइम होगा वह कितना ही विकेट टाइम होगा तरह-तरह की बीमारियां उनको आएंगी मानसिक बीमारी आएंगी शारीरिक बीमारियां आएंगी और भावनात्मक बीमारियां उनको बा आएंगी तो उन्होंने इस चीज को देख लिया था तो इन सब बातों को ध्यान में रखकर हमारे दिव्य ऋषि मुनियों ने दिव्य दृष्टि से उन्होंने देखने के बाद सारी प्रॉब्लम होने वाली प्रॉब्लम से आने वाले हजारों वर्षों के बाद में उन्होंने इस को बहुत अच्छी तरह से भाग लिया था और उसको दूर करने के लिए वही कैसा माध्यम मनुष्य को देना चाहते थे कि एक ऐसा कौन सा माध्यम बनाया जाए जिससे मनुष्य अपना करके उस माध्यम को स्वस्थ हो पाई सुखी हो पाई और प्रसन्न हो पाए जितनी भी व्याधियों को दूर कर पाए चाहे वह ब्याज ना जो लोग हैं वह शारीरिक या मानसिक हो बहुत ही खर्च किया आपको मैं 5000 साल पहले की बात बता रहा हूं जो हमारे ऋषि-मुनियों ने हमारे पूर्वजों ने हमारे लिए हमारे लिए यह धरोहर छोड़कर गए हुए हैं जो इसकी खोज ने 5000 साल पहले कर ली थी उन्होंने सारी चीजों को ध्यान में रखकर सारी राशियों को जितने भी तरह के रोग हो सकते हैं उनको मालूम था कि आने वाले टाइम में कौन-कौन से रूम होंगे जिसके लिए उनको कुछ ऐसे माध्यम की जरूरत है ताकि लोग स्वस्थ रह सकें तो उन्होंने क्या किया उन्होंने बहुत रिसर्च किया हजारों साल तक होने तक किए सारे अनुसंधान किए और उसके प्रयोग किए उन्होंने अलग-अलग आसन तैयार किए और उसके रिमेंट किए उन आसनों को परखा जांचा और उसके बाद फिर उन्होंने इसको एक आम मनुष्य के लिए प्रस्तुत किया कि यह आसन करने से यह फायदा होगा इस आसन को करने से यह फायदा होगा यह प्राणायाम को करने से यह फायदा होगा यह ध्यान से इस तरह की के फायदे होंगे तो इस रिसर्च करके सारे योगासन ना जो भी है योगा प्राणायाम मेडिटेशन पोस्टर जितने भी आसन है तो उन्होंने इस को तैयार किया आप यह बात तो समझ ही गए होंगे कि योगी की खोज 5000 साल पहले की खोज है आज की खोज नहीं हमारे ऋषि-मुनियों ने इसकी खोज कर ली थी 5000 साल पहले लेकिन एक भाग की बात है कि हमारे ऋषि-मुनियों ने खोज की लेकिन आज के समय पर लोगों ने योग को पूरा तोड़ मरोड़ कर उसकी ओरिजिनल टीको ही पर खत्म कर दिया आप समझ रहे हैं उसका जो भी एक बेसिक जो योग्य हमारे विषय मनु ने तैयार किया था उन लोगों ने उसको अपने ढंग से लोगों ने इस को तैयार कर लिया अपने ढंग से उसको लोगों ने तैयार करके प्रस्तुत किया समाज में जो मैं चाहता हूं मैं मुझे जहां तक लगता है कि यह नहीं होना चाहिए यू जिस तरह से आप पतंजलि ऋषि ने योग को पिरोया है अपने ग्रंथ में आ पतंजलि योग दर्शन में तू उसको ही अपना कर और योग को वहां जो भी जितने भी योगाचार्य हैं उनको वह आयोग को प्रस्तुत करना चाहिए यू को सिखाना चाहिए तो और हमारे आमजन को इसका जो फायदा है इसका जो बेनिफिट है वह अच्छी तरह से एक परसेंट मिल पाए तो क्या है कि हमारे जो ऋषि मुनि न्यू ने जो उसकी खोज की उसके पीछे उनकी जो मनसा आप समझ गए होंगे उनकी जो मनसा रही है कि आने वाले टाइम पर मनुष्य जाति बहुत सारी ब्याज को सीखने वाला है शारीरिक जांच करने वाला है मानसिक व्याधियों से गिरने वाला है तो इस तरह उन्होंने योग की रचना की यूज़ योग के ग्रंथ लिखे बहुत ही अच्छी बात बताना चाहता हूं कि यह जो यू की खोज रही है कि पिछले 5000 साल पहले से होती आ रही है यो की खोज तो योग्य की खोज जो हुई है 5000 साल पहले उसको अलग अलग जगह से हमारे जो पतंजलि ऋषि हुए हैं जिन्होंने योग को पिरोया है एक जगह पर उसमें उन्होंने जो युग की खोज हमारे ऋषि-मुनियों ने हजारों साल से करते आ रहे थे उसको उन्होंने उठाया और उस पर बहुत सारा रिसर्च किया रिसर्च करने के बाद उन्होंने अपने ग्रंथ में योग सूत्र में उसको पिरोया और उसको एक प्रस्तुत किया आम लोगों के लिए आम मनुष्य के लिए और बहुत अच्छे ढंग से उन्होंने इस को प्रस्तुत किया था कि इस को अपनाकर के युवकों अपना करके मनुष्य जाति अपना भला कर पाएं अपना कल्याणसर कब कर पाए तो यह कैसी धरोहर है बहुत ही अमूल्य धरोहर है जो हमारे पूर्वजों ने हमारे विषय मदर निगम को दी है इस को संजो कर रखना है आप देखिए आज भारतवर्ष में योग हमारी भारतवर्ष में योग की खोज हुई लेकिन आज पूरे विश्व में योग फैल चुका है भारतवर्ष में तो इंडिया में तो योग का प्रचार और प्रसार बहुत कम है अगर आप बाहर की कंट्री इसमें आप जाएंगे यूरोप में अमेरिका में दूसरे का कंट्रीज में अगर आप जाएंगे तो देखेंगे कि वहां योग के प्रति लोग पागल है उसको अपनाने के लिए पागल है उसको करने के लिए पागल है और लाखों की संख्या में विदेशी फॉर्नर इंडिया आते हैं सिर्फ युवक को सीखने की क्योंकि उनको मालूम है कि भारतवर्ष में ही भारतवर्ष ही योग की जननी है जो योग का कि की जो खोज हुई है वह भारतवर्ष में यहां के ऋषि मुनियों ने की है तू यहीं पर आकर वह इसकी ट्रेनिंग लेते हैं और यहां पर आधारित ज्वाइन करते हैं यह किस कैसे लेते हैं और यहां से जाकर अपनी कंट्री में लोगों को उसका उसको लोगों को किस करते हैं लोगों को पढ़ाते हैं लोगों को ट्रेन करते हैं योग के प्रति अवेयर करते हैं इस तरह जो योग है पूरे विश्व में फैल चुका है और मुझे आशा है कि आमिर उत्तर से आप संतुष्ट होंगे और अगर आप को और अधिक जानकारी चाहिए योग के प्रति किसी भी तरह की जानकारी आपको चाहिए तो आप मुझे कॉल कर सकते हैं मुझे व्हाट्सएप कर सकते हैं मुझे ईमेल कर सकते हैं बहुत-बहुत धन्यवाद नमस्कार

bahut bahut namaskar main hoon yogi satyendra aapka bahut bahut swaagat hai ek prashna mere paas aaya hua hai yoga ki avdharna bharatiya pouranik kathao ke anusaar kaise paida paida hui thi kya phir yog ki khoj kaise hui thi yog ka concept kya hai iske bare me aaj aapko bahut hi vistaar se jaankari dena chahta hoon bahut logo ke man me yah prashna hamesha hota hai ki yog ki khoj kaise hui inki kiski khoj yog ki khoj kisne ki aur kis tarah se yog hamare bharatvarsh me aaya toh main aapko batana chahunga ki hamare rishi muniyon ne iski khoj yog ki khoj 5000 saal pehle hi kar li thi 5000 saal pehle haan ji hamare rishi muni bahut hi divya drishti se bahut hi divya drishti unke paas me thi aur vaah dekh sakte the ki aane waale generation aane waale time par jo hamari generation hain vaah kitna kasht bhogane wali hai vaah itni drishti se loan liya tha ki aane waale time par aane waale hazaro saal baad ya kai varshon ke baad me manushya jati ke liye aa jao time hoga vaah kitna hi wicket time hoga tarah tarah ki bimariyan unko aayengi mansik bimari aayengi sharirik bimariyan aayengi aur bhavnatmak bimariyan unko ba aayengi toh unhone is cheez ko dekh liya tha toh in sab baaton ko dhyan me rakhakar hamare divya rishi muniyon ne divya drishti se unhone dekhne ke baad saari problem hone wali problem se aane waale hazaro varshon ke baad me unhone is ko bahut achi tarah se bhag liya tha aur usko dur karne ke liye wahi kaisa madhyam manushya ko dena chahte the ki ek aisa kaun sa madhyam banaya jaaye jisse manushya apna karke us madhyam ko swasth ho payi sukhi ho payi aur prasann ho paye jitni bhi vyadhiyon ko dur kar paye chahen vaah byaj na jo log hain vaah sharirik ya mansik ho bahut hi kharch kiya aapko main 5000 saal pehle ki baat bata raha hoon jo hamare rishi muniyon ne hamare purvajon ne hamare liye hamare liye yah dharohar chhodkar gaye hue hain jo iski khoj ne 5000 saal pehle kar li thi unhone saari chijon ko dhyan me rakhakar saari raashiyon ko jitne bhi tarah ke rog ho sakte hain unko maloom tha ki aane waale time me kaun kaun se room honge jiske liye unko kuch aise madhyam ki zarurat hai taki log swasth reh sake toh unhone kya kiya unhone bahut research kiya hazaro saal tak hone tak kiye saare anusandhan kiye aur uske prayog kiye unhone alag alag aasan taiyar kiye aur uske riment kiye un aasanon ko parkha jaancha aur uske baad phir unhone isko ek aam manushya ke liye prastut kiya ki yah aasan karne se yah fayda hoga is aasan ko karne se yah fayda hoga yah pranayaam ko karne se yah fayda hoga yah dhyan se is tarah ki ke fayde honge toh is research karke saare yogasan na jo bhi hai yoga pranayaam meditation poster jitne bhi aasan hai toh unhone is ko taiyar kiya aap yah baat toh samajh hi gaye honge ki yogi ki khoj 5000 saal pehle ki khoj hai aaj ki khoj nahi hamare rishi muniyon ne iski khoj kar li thi 5000 saal pehle lekin ek bhag ki baat hai ki hamare rishi muniyon ne khoj ki lekin aaj ke samay par logo ne yog ko pura tod marod kar uski original tiko hi par khatam kar diya aap samajh rahe hain uska jo bhi ek basic jo yogya hamare vishay manu ne taiyar kiya tha un logo ne usko apne dhang se logo ne is ko taiyar kar liya apne dhang se usko logo ne taiyar karke prastut kiya samaj me jo main chahta hoon main mujhe jaha tak lagta hai ki yah nahi hona chahiye you jis tarah se aap patanjali rishi ne yog ko piroya hai apne granth me aa patanjali yog darshan me tu usko hi apna kar aur yog ko wahan jo bhi jitne bhi yogacharya hain unko vaah aayog ko prastut karna chahiye you ko sikhaana chahiye toh aur hamare aamjan ko iska jo fayda hai iska jo benefit hai vaah achi tarah se ek percent mil paye toh kya hai ki hamare jo rishi muni new ne jo uski khoj ki uske peeche unki jo manasa aap samajh gaye honge unki jo manasa rahi hai ki aane waale time par manushya jati bahut saari byaj ko sikhne vala hai sharirik jaanch karne vala hai mansik vyadhiyon se girne vala hai toh is tarah unhone yog ki rachna ki use yog ke granth likhe bahut hi achi baat batana chahta hoon ki yah jo you ki khoj rahi hai ki pichle 5000 saal pehle se hoti aa rahi hai yo ki khoj toh yogya ki khoj jo hui hai 5000 saal pehle usko alag alag jagah se hamare jo patanjali rishi hue hain jinhone yog ko piroya hai ek jagah par usme unhone jo yug ki khoj hamare rishi muniyon ne hazaro saal se karte aa rahe the usko unhone uthaya aur us par bahut saara research kiya research karne ke baad unhone apne granth me yog sutra me usko piroya aur usko ek prastut kiya aam logo ke liye aam manushya ke liye aur bahut acche dhang se unhone is ko prastut kiya tha ki is ko apnakar ke yuvakon apna karke manushya jati apna bhala kar paen apna kalyanasar kab kar paye toh yah kaisi dharohar hai bahut hi amuly dharohar hai jo hamare purvajon ne hamare vishay mother nigam ko di hai is ko sanjo kar rakhna hai aap dekhiye aaj bharatvarsh me yog hamari bharatvarsh me yog ki khoj hui lekin aaj poore vishwa me yog fail chuka hai bharatvarsh me toh india me toh yog ka prachar aur prasaar bahut kam hai agar aap bahar ki country isme aap jaenge europe me america me dusre ka countries me agar aap jaenge toh dekhenge ki wahan yog ke prati log Pagal hai usko apnane ke liye Pagal hai usko karne ke liye Pagal hai aur laakhon ki sankhya me videshi farnar india aate hain sirf yuvak ko sikhne ki kyonki unko maloom hai ki bharatvarsh me hi bharatvarsh hi yog ki janani hai jo yog ka ki ki jo khoj hui hai vaah bharatvarsh me yahan ke rishi muniyon ne ki hai tu yahin par aakar vaah iski training lete hain aur yahan par aadharit join karte hain yah kis kaise lete hain aur yahan se jaakar apni country me logo ko uska usko logo ko kis karte hain logo ko padhate hain logo ko train karte hain yog ke prati aveyar karte hain is tarah jo yog hai poore vishwa me fail chuka hai aur mujhe asha hai ki aamir uttar se aap santusht honge aur agar aap ko aur adhik jaankari chahiye yog ke prati kisi bhi tarah ki jaankari aapko chahiye toh aap mujhe call kar sakte hain mujhe whatsapp kar sakte hain mujhe email kar sakte hain bahut bahut dhanyavad namaskar

बहुत-बहुत नमस्कार मैं हूं योगी सत्येंद्र आपका बहुत-बहुत स्वागत है एक प्रश्न मेरे पास आया ह

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अशोक गुप्ता

Founder of Vision Commercial Services.

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प्रकृति के जो लीला है उसमें एक से अनेक होने की एक मूल घटना है एक ही शक्ति अनेक अनेक रूप में अभिव्यक्त हुई इसे हमने वियोग बिखराव है तुझे कोई भी बुक होगा तो एक बेचैनी पैदा होगी अब महसूस करते होंगे कि आपका कोई मित्र हो या कोई आपका आ महिला मित्र या कोई आपका घर का माता-पिता जवाब से दूर जाते हैं आप उनसे तो आपके अंदर एक पीड़ा अनुभव होती है यह वियोग है और जवाब लौट कर अपने घर आते हैं फिर उनसे मिलते हैं तो आपके अंदर योग होता है और आप खुश होते हैं वैसे जीवन की मूल यात्रा में हम योग के प्रभाव में अलग-अलग रूपों में अभिव्यक्त हैं इस युवक से मुक्त होने के लिए योग की अवधारणा के आप धीरे-धीरे रुक की अवस्था में अपने को ले जाएंगे तो आपके अंदर जो भी योग से जो आपके अंदर एक तनाव और दबाव एक चिंता परेशानी निर्मित हुआ है धीरे-धीरे विसर्जित हो जाएगा और फिर आपके साहस शांत अवस्था में अपने को पाएंगे भगवान बुद्ध महावीर कृष्ण कबीर क्राइस्ट यह सब लोग वही जिन्होंने अपने भीतर इस जुड़ाव अनुभव कर लिया उनके लिए पूरी वसुधा एक परिवार जैसा अनुभव हो रहा था तो विवो और योग्य दोनों एक दूसरे के

prakriti ke jo leela hai usme ek se anek hone ki ek mul ghatna hai ek hi shakti anek anek roop me abhivyakt hui ise humne viyog bikhraav hai tujhe koi bhi book hoga toh ek bechaini paida hogi ab mehsus karte honge ki aapka koi mitra ho ya koi aapka aa mahila mitra ya koi aapka ghar ka mata pita jawab se dur jaate hain aap unse toh aapke andar ek peeda anubhav hoti hai yah viyog hai aur jawab lot kar apne ghar aate hain phir unse milte hain toh aapke andar yog hota hai aur aap khush hote hain waise jeevan ki mul yatra me hum yog ke prabhav me alag alag roopon me abhivyakt hain is yuvak se mukt hone ke liye yog ki avdharna ke aap dhire dhire ruk ki avastha me apne ko le jaenge toh aapke andar jo bhi yog se jo aapke andar ek tanaav aur dabaav ek chinta pareshani nirmit hua hai dhire dhire visarjit ho jaega aur phir aapke saahas shaant avastha me apne ko payenge bhagwan buddha mahavir krishna kabir Christ yah sab log wahi jinhone apne bheetar is judav anubhav kar liya unke liye puri vasudha ek parivar jaisa anubhav ho raha tha toh vivo aur yogya dono ek dusre ke

प्रकृति के जो लीला है उसमें एक से अनेक होने की एक मूल घटना है एक ही शक्ति अनेक अनेक रूप मे

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Harish Chand

Social Worker

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Jitesh Chowdhury

Yoga Instructor

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नेपाल मेरा नाम है जितेंद्र जी जो आपके सवाल है जो की अवधारणा भारतीय पुरानी कहानियां कथाओं के अनुसार कैसे पैदा जब हम प्राचीन इतिहास देखते हैं तू कुछ जो सब बताती जैसे प्राची सिंधु सभ्यता और उसका मोहनजोदारो शुभ होता इसके मिट्टी के नीचे कुछ भंगिमा वाली मूर्ति मुलायम सिंह के साथ तू बहुत सारे एग्जाम के बाद पता चला है इस टाइम जो चर्चा का प्रचलन था से भी कहा जाता है जो आपने देखा होगा भगवान विष्णु 5000 साल पहले जानकारी उसको दे रहा था जो हम अर्जुन को ज्ञान दे रहा था भागवत गीता में वहां पर क्या बोला था 20 जून को जो दूसरी औरत है जो तू महाभारत का युद्ध हुआ है अगर हम पकड़ लेते हैं तो उससे भी पहले सूरज को कितने साल पहले होगा क्लास में जो चर्चा है यह थोड़ा-सा समझने की बात है और क्या है जो लिखित रूप से योग के बारे में जब हम लोग जानते हैं गायों के बीच में जो जुड़ने के लिए 18 जा सकता है उसको झूठ बोलता है उसको मतलब है दोनों चीज को जब तू करना तू इसका मतलब है तू आत्मा को परस्पर जित्तू कर इससे क्या एक दूसरे को छोड़कर नहीं जा पाता है हमें ज्ञान मसोचिस्ट प्रगति मैदान ई-मेल किया गया है हम निरोध का बात किया गया है देखते हैं अपना लो अपने अंदर ले आना मतलब सारी चीज को उत्तर करना जो देखा कोठा उपनिषद में कौन-कौन से थी क्योंकि पूर्व आपके देखा है धीरे-धीरे 22 साल पहले जो मौसी पतंजलि सारी चीज को योग दर्शन को एक करके लिखा है तू अगर हमने मुद्दीन को देखते हैं तो तो पुरानी कथा पुराणों में योग दर्शन का जो बहुत सारे उपाय पतंजलि जोशी का जो सोच है छोटा छुट्टी करके जोगन थारी इकट्ठा करके पतंजलि योग दर्शन में लिपिबद्ध किया था इसी को सारे दुनिया अभी मानता है जो अगर योग दर्शन के नाम में अगर कोई किताब को जो पतंजलि योग दर्शन को सुधारना भारतीय इतिहास में तू धीरे-धीरे ऐसे चलता है फिर क्या होता है फिर धीरे-धीरे हमारा जो अमित जी हैं हम इसको अमेरिका में जाके इसको इसका थोड़ा बारे में जानकारी सारी दुनिया को दिया है तो ऐसे ही विरोध के बारे में पूछा

nepal mera naam hai jitendra ji jo aapke sawaal hai jo ki avdharna bharatiya purani kahaniya kathao ke anusaar kaise paida jab hum prachin itihas dekhte hain tu kuch jo sab batati jaise PRACHI sindhu sabhyata aur uska mohenjadaro shubha hota iske mitti ke niche kuch bhangima wali murti mulayam Singh ke saath tu bahut saare exam ke baad pata chala hai is time jo charcha ka prachalan tha se bhi kaha jata hai jo aapne dekha hoga bhagwan vishnu 5000 saal pehle jaankari usko de raha tha jo hum arjun ko gyaan de raha tha bhagwat geeta me wahan par kya bola tha 20 june ko jo dusri aurat hai jo tu mahabharat ka yudh hua hai agar hum pakad lete hain toh usse bhi pehle suraj ko kitne saal pehle hoga class me jo charcha hai yah thoda sa samjhne ki baat hai aur kya hai jo likhit roop se yog ke bare me jab hum log jante hain gayon ke beech me jo judne ke liye 18 ja sakta hai usko jhuth bolta hai usko matlab hai dono cheez ko jab tu karna tu iska matlab hai tu aatma ko paraspar jittu kar isse kya ek dusre ko chhodkar nahi ja pata hai hamein gyaan masochist pragati maidan E male kiya gaya hai hum nirodh ka baat kiya gaya hai dekhte hain apna lo apne andar le aana matlab saari cheez ko uttar karna jo dekha kotha upanishad me kaun kaun se thi kyonki purv aapke dekha hai dhire dhire 22 saal pehle jo mausi patanjali saari cheez ko yog darshan ko ek karke likha hai tu agar humne muddin ko dekhte hain toh toh purani katha purano me yog darshan ka jo bahut saare upay patanjali joshi ka jo soch hai chota chhutti karke jogan thari ikattha karke patanjali yog darshan me lipibddh kiya tha isi ko saare duniya abhi maanta hai jo agar yog darshan ke naam me agar koi kitab ko jo patanjali yog darshan ko sudharna bharatiya itihas me tu dhire dhire aise chalta hai phir kya hota hai phir dhire dhire hamara jo amit ji hain hum isko america me jake isko iska thoda bare me jaankari saari duniya ko diya hai toh aise hi virodh ke bare me poocha

नेपाल मेरा नाम है जितेंद्र जी जो आपके सवाल है जो की अवधारणा भारतीय पुरानी कहानियां कथाओं क

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अनमोल मणी

योग शिक्षक

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मेरे प्रिय मित्र हर 5000 वर्ष में वह सर्वशक्तिमान परमात्मा इस धरती पर उतर कर प्रत्येक मनुष्य आत्मा को योगा स्वयं सिखाते हैं और वह समय अभी चल रहा है 5000 वर्ष के बाद वह समय अभी आया हुआ है इसलिए जब परमात्मा इस धरती पर आते हैं तभी लोग योग शब्द को जानते हैं तो यह जो कार्य है विगत 80 सालों से चल रहा है और सभी लोग योग को जान रहे हैं तो आपने जो पूछा है कि योगा की अवधारणा भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी प्रकार से पैदा हुई है परमात्मा धरती पर आते हैं और एक बूढ़े तन का आधार लेते हैं और उसके द्वारा हर एक मनुष्य आत्मा को योग सिखाते हैं इसलिए आप आरती में गाते हैं कि बूढ़ा ब्राम्हण बनकर कंचन में है लेकिन उस योग के द्वारा गाया को कंचन काया बना देते हैं और माया को समाप्त कर देते हैं और आत्मा को सुख धाम की ओर ले जाते हैं तो यह बहुत सुंदर कार्य भी चल रहा है और विगत 80 वर्षों से चल रहा है यदि आप इस में जुड़ना चाहते हैं तो आप हमारे सबसे पहले अनमोल मनी चैनल को सब्सक्राइब करें और उसके यूट्यूब में यूट्यूब में आप वीडियोस देखें और यहां समझ में ना आए आप हमें समझे इसी वोकल पर पुनः प्रश्न कर सकते हैं धन्यवाद

mere priya mitra har 5000 varsh me vaah sarvshaktimaan paramatma is dharti par utar kar pratyek manushya aatma ko yoga swayam sikhaate hain aur vaah samay abhi chal raha hai 5000 varsh ke baad vaah samay abhi aaya hua hai isliye jab paramatma is dharti par aate hain tabhi log yog shabd ko jante hain toh yah jo karya hai vigat 80 salon se chal raha hai aur sabhi log yog ko jaan rahe hain toh aapne jo poocha hai ki yoga ki avdharna bharatiya pouranik kathao ke anusaar isi prakar se paida hui hai paramatma dharti par aate hain aur ek budhe tan ka aadhar lete hain aur uske dwara har ek manushya aatma ko yog sikhaate hain isliye aap aarti me gaate hain ki budha bramhan bankar kanchan me hai lekin us yog ke dwara gaaya ko kanchan kaaya bana dete hain aur maya ko samapt kar dete hain aur aatma ko sukh dhaam ki aur le jaate hain toh yah bahut sundar karya bhi chal raha hai aur vigat 80 varshon se chal raha hai yadi aap is me judna chahte hain toh aap hamare sabse pehle anmol money channel ko subscribe kare aur uske youtube me youtube me aap videos dekhen aur yahan samajh me na aaye aap hamein samjhe isi vocal par punh prashna kar sakte hain dhanyavad

मेरे प्रिय मित्र हर 5000 वर्ष में वह सर्वशक्तिमान परमात्मा इस धरती पर उतर कर प्रत्येक मनु

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नमस्कार मित्रों डॉ नितिन भूमि एन जी पी जी कॉलेज रामनगर नैनीताल योगा अध्यापक डायरेक्टर उज्जवला योग वैलनेस इंस्ट्यूशन रामनगर नैनीताल उत्तराखंड आप का प्रयोग की अवधारणा भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार कैसा पैदा हुई थी ऐसे मित्रों साथियों योग जो है अनादि है इसके बारे में कहा जाता है कि जो हमारी छुट्टी है इस सृष्टि की उत्पत्ति हुई है उससे पूर्व में भी ही युग था उसे उत्पत्ति करता युग के सबसे पुरातन जो नाम आता है वह हिरण्यगर्भा 9:00 पुरातन युग से वक्ता नानपुरा पन्ना के रूप में अभी आता है हिरण्यगर्भा का ही नाम आता है सबसे पहले हिरण्यगर्भ सोने के समान चमकने वाली शक्ति पुरी केवल पृथ्वी की है जिन्होंने उत्पत्ति में की गई है ऐसे कई पृथ्वी आ पूरा का पूरा ब्रह्मांड विश्व ब्रह्मांड की जिनमें कई पृथ्वी और कई सूर्य उनके निर्माता या जिनके उत्पत्ति करता ऐसे कॉस्मिक ऊर्जा वह है आधी और वहां से फिर कहते हैं कि ब्रह्मा जी ने कई वर्ष पति वियोग साधना की अपने आप को इस योग्य बनाया कि नहीं सृष्टि उत्पन्न न कर सके तो सबसे पहले अपने घर से ही होगा या फिर उसकी प्रभा जी द्वारा साधना हुई और फिर इस सृष्टि सृष्टि उत्पन्न होने के बाद में आदि योगी के नाम से भगवान शिव जी को माना जाता है फिर योग की परंपरा को विधिवत शिव संहिता के घर पर आराम से होकर विराट योग घेरंड संहिता इस तरह से हड्डियों की प्रारंभिक जाता है कि शिव पार्वती संवाद हुआ कैलाश पर्वत पर भगवान करते हैं पार्वती माता सुनती है और इसी प्रसंग को वहां पर एक जलाशय में मछली इन बातों को सुनती है मछली के पेट में दर्द होता है उस चंद्रनाथ के रूप में उनका फिर बाद में प्रकट होता है इसी को संजीवनी विद्या भी आ गया है इस विधेयक के बाद में इनका जब जन्म होता है इतना रात का योग विद्या को हट योग विद्या को आगे बढ़ाते हैं भगवान शिव जी की विद्या को फिर नो नाथो का प्राकृतिक होता है अलग-अलग त्रिपुरा खटाना के मुसलमान संहिता गोरखनाथ जी द्वारा स्वागत मारा मुनि द्वारा दीपिका और और आगे जो है राजा चंद्र कपाली और जेंट्स के द्वारा गीता का निर्माण हुआ और परंपरा की और परियों के जो जन्नत है आदि किसको कहा गया है वह आदि योगी भगवान शिव जी और दूसरी शाखा है वह भगवान श्री कृष्ण द्वारा निर्मित हुई जिसमें भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन के माध्यम से जो जीता हम सबके लिए उपलब्ध कराई है उसमें कर्मयोग ज्ञानयोग भक्तियोग की गंगाबाई उसमें संसार में रहते हुए इस प्रकार से हम ईश्वर को प्राप्त करते हैं कर सकते हैं इसका पूरा वर्णन दिया है उसी क्रम को और आगे जो कि कॉल करने में लगभग गीता का कालखंड आवेदन आज से साढे 5000 वर्ष पूर्व किस समय और आदि योगी के कालखंड की कोई घटना नहीं है भगवान शिव जी आदि बताया गया है ईश्वर से पुरवइया सृष्टिकर्ता ब्रह्मा विष्णु महेश की उत्पत्ति के कारण बताया गया है तू ही आधी है इनका कोई कालखंड हम नहीं कर सकते उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए हैं क्योंकि योग के कई प्रकार है हठयोग लायो ज्ञान योग राज्यों के मंत्रियों मंत्रियों एवं परंपराओं को विभिन्न विभिन्न आयोगों ने आगे बढ़ाया ग्रंथ लिखा है इसको योग दर्शन भी कहते हैं उसमें उन्होंने राज्यों का वर्णन किया है उसमें मन को वश में करके कैसे ईश्वर को प्राप्त कर सकते हैं योगश्चित्त वृत्ति निरोधा चित्र वृत्तियों का निरोध करके हम भी शुरू कैसे प्राप्त कर सकते हैं इसका पूरा वर्णन महर्षि पतंजलि ने अपने योग दर्शन में दिया उसमें चार अध्याय समाधि पाद साधन पाद विभूति पाद किस प्रकार से यह विभिन्न ने परंपरा योग राजू आदि है पौराणिक है और वहां से यह जिन्हें जिस प्रकार का कर्मयोग ज्ञानयोग भक्तियोग कोई भी एक आपको चुनना होता है उसी आधार पर उसी ना कि साधना करनी होती है और उस साधना करके आप ईश्वर को प्राप्त हो सकते हैं उद्देश्य है कि हम पूर्ण बने उत्कृष्ट बने योग का उद्देश्य है अपने आपको सारे कुत्ते उत्कृष्ट बनाना मानसिक रूप से आत्मिक रूप से पारिवारिक रूप से आर्थिक रूप से सामाजिक रुप से हरकत से अपने आप को उत्कृष्ट बनाना उत्कृष्ट बनके क्योंकि परमात्मा उत्कृष्टता उसको श्रेष्ठ है वह सब मैं उस प्राण माने दुख ना सके शुरू करें श्रेष्ठ तेजस्वी है उसके संबंध में उनके गुणों को अपने जीवन में धारण करके हमें भी उनके समान बनना है और पूर्णता को प्राप्त करना है योग्य ही कराता है तो इसी प्रकार से गुणों को धारण करना महत्वपूर्ण है जब हम हमारे परमात्मा के सारे गुण हमारे अंदर में आ जाएंगे तो हम स्वयं ही बन जाएंगे जो हुआ है वही हम शिवोहम सच्चिदानंद हम एवं आत्मा ब्रह्म अब जब वह उसी शक्ति हमारे अंदर में आ जाएगी तो हम मुक्त हो जाएंगे परमानंद की प्राप्ति हो जाएगी केवल की प्राप्ति हो जाएगी योग का उद्देश्य नमस्कार साथियों हमारा यदि आपको और अधिक जानकारी चाहिए तो हमारा युटुब चैनल भी है उसमें जिम कॉर्बेट उज्वला योगा मेडिटेशन इंस्टिट्यूट के नाम से इसमें आप उसको लाइक कर सकते सब्सक्राइब कर सकते हैं उसमें काफी नॉलेज हमने दिया हुआ है टॉपिक पर m.a. योगा पीजी डिप्लोमा और हम हंड्रेड 200 500 की कुर्सी चलाते हैं कोई कांटेक्ट करना चाहे संपर्क करना चाहे संपर्क कर सकते हैं हमसे हमारे नंबर से कांटेक्ट कर सकते हैं इन सरस्वती

namaskar mitron Dr. nitin bhoomi N ji p ji college ramnagar nainital yoga adhyapak director ujjavala yog vailnes instyushan ramnagar nainital uttarakhand aap ka prayog ki avdharna bharatiya pouranik kathao ke anusaar kaisa paida hui thi aise mitron sathiyo yog jo hai anadi hai iske bare me kaha jata hai ki jo hamari chhutti hai is shrishti ki utpatti hui hai usse purv me bhi hi yug tha use utpatti karta yug ke sabse puratan jo naam aata hai vaah hiranyagarbha 9 00 puratan yug se vakta nanpura panna ke roop me abhi aata hai hiranyagarbha ka hi naam aata hai sabse pehle hiranyagarbh sone ke saman chamakane wali shakti puri keval prithvi ki hai jinhone utpatti me ki gayi hai aise kai prithvi aa pura ka pura brahmaand vishwa brahmaand ki jinmein kai prithvi aur kai surya unke nirmaata ya jinke utpatti karta aise Cosmic urja vaah hai aadhi aur wahan se phir kehte hain ki brahma ji ne kai varsh pati viyog sadhna ki apne aap ko is yogya banaya ki nahi shrishti utpann na kar sake toh sabse pehle apne ghar se hi hoga ya phir uski prabha ji dwara sadhna hui aur phir is shrishti shrishti utpann hone ke baad me aadi yogi ke naam se bhagwan shiv ji ko mana jata hai phir yog ki parampara ko vidhivat shiv sanhita ke ghar par aaram se hokar virat yog gherand sanhita is tarah se haddiyon ki prarambhik jata hai ki shiv parvati samvaad hua kailash parvat par bhagwan karte hain parvati mata sunti hai aur isi prasang ko wahan par ek jalaashay me machli in baaton ko sunti hai machli ke pet me dard hota hai us chandranath ke roop me unka phir baad me prakat hota hai isi ko sanjeevani vidya bhi aa gaya hai is vidhayak ke baad me inka jab janam hota hai itna raat ka yog vidya ko hut yog vidya ko aage badhate hain bhagwan shiv ji ki vidya ko phir no natho ka prakirtik hota hai alag alag tripura khatana ke musalman sanhita gorakhnath ji dwara swaagat mara muni dwara deepika aur aur aage jo hai raja chandra kapali aur gents ke dwara geeta ka nirmaan hua aur parampara ki aur pariyon ke jo jannat hai aadi kisko kaha gaya hai vaah aadi yogi bhagwan shiv ji aur dusri shakha hai vaah bhagwan shri krishna dwara nirmit hui jisme bhagwan shri krishna ne arjun ke madhyam se jo jita hum sabke liye uplabdh karai hai usme karmayog gyanyog bhaktiyog ki gangabai usme sansar me rehte hue is prakar se hum ishwar ko prapt karte hain kar sakte hain iska pura varnan diya hai usi kram ko aur aage jo ki call karne me lagbhag geeta ka kalakhand avedan aaj se sadhe 5000 varsh purv kis samay aur aadi yogi ke kalakhand ki koi ghatna nahi hai bhagwan shiv ji aadi bataya gaya hai ishwar se puravaiya srishtikarta brahma vishnu mahesh ki utpatti ke karan bataya gaya hai tu hi aadhi hai inka koi kalakhand hum nahi kar sakte usi kram ko aage badhate hue hain kyonki yog ke kai prakar hai hathyog layo gyaan yog rajyo ke mantriyo mantriyo evam paramparaon ko vibhinn vibhinn aayogon ne aage badhaya granth likha hai isko yog darshan bhi kehte hain usme unhone rajyo ka varnan kiya hai usme man ko vash me karke kaise ishwar ko prapt kar sakte hain yogashchitt vriti nirodha chitra vrittiyon ka nirodh karke hum bhi shuru kaise prapt kar sakte hain iska pura varnan maharshi patanjali ne apne yog darshan me diya usme char adhyay samadhi pad sadhan pad vibhuti pad kis prakar se yah vibhinn ne parampara yog raju aadi hai pouranik hai aur wahan se yah jinhen jis prakar ka karmayog gyanyog bhaktiyog koi bhi ek aapko chunana hota hai usi aadhar par usi na ki sadhna karni hoti hai aur us sadhna karke aap ishwar ko prapt ho sakte hain uddeshya hai ki hum purn bane utkrasht bane yog ka uddeshya hai apne aapko saare kutte utkrasht banana mansik roop se atmik roop se parivarik roop se aarthik roop se samajik roop se harkat se apne aap ko utkrasht banana utkrasht banke kyonki paramatma utkrishtata usko shreshtha hai vaah sab main us praan maane dukh na sake shuru kare shreshtha tejaswi hai uske sambandh me unke gunon ko apne jeevan me dharan karke hamein bhi unke saman banna hai aur purnata ko prapt karna hai yogya hi karata hai toh isi prakar se gunon ko dharan karna mahatvapurna hai jab hum hamare paramatma ke saare gun hamare andar me aa jaenge toh hum swayam hi ban jaenge jo hua hai wahi hum shivoham sacchidanand hum evam aatma Brahma ab jab vaah usi shakti hamare andar me aa jayegi toh hum mukt ho jaenge parmanand ki prapti ho jayegi keval ki prapti ho jayegi yog ka uddeshya namaskar sathiyo hamara yadi aapko aur adhik jaankari chahiye toh hamara yutub channel bhi hai usme gym corbett ujwala yoga meditation institute ke naam se isme aap usko like kar sakte subscribe kar sakte hain usme kaafi knowledge humne diya hua hai topic par m a yoga PG diploma aur hum hundred 200 500 ki kursi chalte hain koi Contact karna chahen sampark karna chahen sampark kar sakte hain humse hamare number se Contact kar sakte hain in saraswati

नमस्कार मित्रों डॉ नितिन भूमि एन जी पी जी कॉलेज रामनगर नैनीताल योगा अध्यापक डायरेक्टर उज्

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निकालकर लोगों की अवधारणा भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार कैसे पैदा हुई महर्षि पतंजलि के माध्यम से योग की शुरुआत हुई थी जैसा मुझे ज्ञान है और उसके बाद भी खुशियों में विभिन्न प्रकार के योगदान का निर्धारण किया और उन्होंने पशु पक्षियों को देखकर के आसपास की वस्तुओं के पिक्चर के योगासन की विधि बनाई और उससे जो है विभिन्न प्रकार के लाभ से मिठाई और फिर जनजीवन सामान्य उसका प्रचार किया कहते हैं मनुष्य जब घर में होता है इसकी 8400000 अत्रि आकृतियां बनती ऋषि-मुनियों ने उसके घुसकर की निर्धारित करके लगभग 84 प्रकार के युवकों का निर्माण योगासने का निर्माण किया जिनका मनुष्य जाते हैं जहां तक पश्चिमी उसका लाभ उठाते हैं जैसे कि कुत्ता जब सूखता है दोनों पैर आगे करके अंगड़ाई लेता दिल्लीवरी चित्रकार से अपने शरीर की अकड़न भूपति किस प्रकार से जो है पौराणिक कथाओं के माध्यम से जहां शिव ने जो आसनों को खोजा है उनको जनसामान्य तक पहुंचाने का प्रयास किया है और अगर लोग योगा करते हैं तो निश्चित रूप से उसका लाभ मिलता है धन्यवाद

nikalakar logo ki avdharna bharatiya pouranik kathao ke anusaar kaise paida hui maharshi patanjali ke madhyam se yog ki shuruat hui thi jaisa mujhe gyaan hai aur uske baad bhi khushiyon me vibhinn prakar ke yogdan ka nirdharan kiya aur unhone pashu pakshiyo ko dekhkar ke aaspass ki vastuon ke picture ke yogasan ki vidhi banai aur usse jo hai vibhinn prakar ke labh se mithai aur phir janjivan samanya uska prachar kiya kehte hain manushya jab ghar me hota hai iski 8400000 atri akritiyan banti rishi muniyon ne uske ghuskar ki nirdharit karke lagbhag 84 prakar ke yuvakon ka nirmaan yogasane ka nirmaan kiya jinka manushya jaate hain jaha tak pashchimi uska labh uthate hain jaise ki kutta jab sookhata hai dono pair aage karke angdai leta dillivari chitrakar se apne sharir ki akadan bhoopati kis prakar se jo hai pouranik kathao ke madhyam se jaha shiv ne jo aasanon ko khoja hai unko janasamanya tak pahunchane ka prayas kiya hai aur agar log yoga karte hain toh nishchit roop se uska labh milta hai dhanyavad

निकालकर लोगों की अवधारणा भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार कैसे पैदा हुई महर्षि पतंजलि के माध

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योग की अवधारणा में से अवश्य काफी पक्ष और आणि कथाओं से निकले हैं किंतु वहीं दूसरी तरफ योग्य के कुछ दर्शनशास्त्र से संबंधित ग्रंथ भी योग की अवधारणा के मुख्य कारण रहे हैं जिनमें से जैसे महत्वपूर्ण पातंजल योगदर्शन को मानते हैं उसके अलावा भी शिव स्वर विज्ञान अघोर तंत्र आदि ऐसे बहुत सारे प्राचीन ग्रंथ हैं जो पौराणिक कथाएं जिसमें नहीं है किंतु योग आधार योग की अवधारणाओं की को वह प्रतिपादित करते हैं और इन सबको मिलाकर के वर्तमान समय में योग के नई परंपरा का शुभारंभ हुआ धन्यवाद

yog ki avdharna me se avashya kaafi paksh aur aani kathao se nikle hain kintu wahi dusri taraf yogya ke kuch darshanashastra se sambandhit granth bhi yog ki avdharna ke mukhya karan rahe hain jinmein se jaise mahatvapurna patanjal yogadarshan ko maante hain uske alava bhi shiv swar vigyan aghor tantra aadi aise bahut saare prachin granth hain jo pouranik kathaen jisme nahi hai kintu yog aadhar yog ki avadharanaon ki ko vaah pratipadit karte hain aur in sabko milakar ke vartaman samay me yog ke nayi parampara ka shubharambh hua dhanyavad

योग की अवधारणा में से अवश्य काफी पक्ष और आणि कथाओं से निकले हैं किंतु वहीं दूसरी तरफ योग्

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देखिए यह एक समझने की बात है हमारा हृदय हमारे आंख नाक मारे इंटरनल जितने भी और गंगू हैं इन सब को पहले पुराणों में देवताओं का नाम दिया गया है आज हम उनको अलग-अलग नामों से जानते हैं यह भी हमें पता है कि हृदय के लिए क्या चीज खाना उचित होता है क्या नहीं यही सब चीजें देवताओं के लिए भी बताया गया कि तेरी फला देवता को क्या चीज चढ़ावा चढ़ता है और कौन चीज नहीं चढ़ाना चाहिए तो इसी तरह पूरे शरीर से लेकर हर और गम के बारे में पहले बस यह समझ लीजिए कि आज उसका साइज़ पिक नेम है पहले देवताओं का नाम से जाना जाता था और उन्हें क्या चढ़ता था जो नहीं चढ़ता था वह समझ लीजिए कि उस अंग के लिए उचित नहीं है और जो चढ़ता था या नहीं समझ लिया कि उनके लिए उचित है

dekhiye yah ek samjhne ki baat hai hamara hriday hamare aankh nak maare internal jitne bhi aur gangoo hain in sab ko pehle purano me devatao ka naam diya gaya hai aaj hum unko alag alag namon se jante hain yah bhi hamein pata hai ki hriday ke liye kya cheez khana uchit hota hai kya nahi yahi sab cheezen devatao ke liye bhi bataya gaya ki teri phala devta ko kya cheez chadhava chadhta hai aur kaun cheez nahi chadhana chahiye toh isi tarah poore sharir se lekar har aur gum ke bare me pehle bus yah samajh lijiye ki aaj uska size pic name hai pehle devatao ka naam se jana jata tha aur unhe kya chadhta tha jo nahi chadhta tha vaah samajh lijiye ki us ang ke liye uchit nahi hai aur jo chadhta tha ya nahi samajh liya ki unke liye uchit hai

देखिए यह एक समझने की बात है हमारा हृदय हमारे आंख नाक मारे इंटरनल जितने भी और गंगू हैं इन स

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Pardeep Kumar

Yoga Trainer

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हां योग की जो धारणा है वह भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार कैसे पैदा हुई थी ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव ने सबसे पहले योग मां पार्वती को दिया और उसके बाद बहुत से रिक्तियों के जो है पीढ़ी दर पीढ़ी आगे चलता रहा गुरु शिष्य परंपरा के अनुसार जिस पर बीच में भगवान श्रीकृष्ण जाए मछेंद्रनाथ और महर्षि पतंजलि गोरखनाथ ऐसे बहुत से जैन मुनि ऐसे बहुत से जो है पुरानी कथाओं में ऐसा माना जाता है कि योग धीरे-धीरे आगे बढ़ता रहा चलता रहा और बहुत ही जीता में पूरा योग है जिसमें भगवान श्री कृष्ण ने 18 अध्याय पूरे योग के ऊपर जो है व्यवस्थित किए हैं हर एक अध्याय का नाम योग के अनुसार रखा गया अब किसे पता था कि इतने वर्षों पहले जो गीता कहीं उसने योग के नाम से सारे अध्याय बनाएं तो भगवान श्री कृष्ण ने इतने पुराने समय से योग की महिमा का बखान किया तो योग का जो क्षेत्र है बहुत पुराना है और बहुत सारे उपनिषदों में योग के बारे में बहुत कहा गया है नारद उपनिषद में चाणक्य उपनिषद में चाणक्य ने चंडिका पाली उपनिषद में ऐसे बहुत सारे उपनिषद है जिनमें बहुत ही सुंदर रूप से योग की व्याख्या की गई है

haan yog ki jo dharana hai vaah bharatiya pouranik kathao ke anusaar kaise paida hui thi aisa mana jata hai ki bhagwan shiv ne sabse pehle yog maa parvati ko diya aur uske baad bahut se riktiyon ke jo hai peedhi dar peedhi aage chalta raha guru shishya parampara ke anusaar jis par beech me bhagwan shrikrishna jaaye machendranath aur maharshi patanjali gorakhnath aise bahut se jain muni aise bahut se jo hai purani kathao me aisa mana jata hai ki yog dhire dhire aage badhta raha chalta raha aur bahut hi jita me pura yog hai jisme bhagwan shri krishna ne 18 adhyay poore yog ke upar jo hai vyavasthit kiye hain har ek adhyay ka naam yog ke anusaar rakha gaya ab kise pata tha ki itne varshon pehle jo geeta kahin usne yog ke naam se saare adhyay banaye toh bhagwan shri krishna ne itne purane samay se yog ki mahima ka bakhan kiya toh yog ka jo kshetra hai bahut purana hai aur bahut saare upnishadon me yog ke bare me bahut kaha gaya hai narad upanishad me chanakya upanishad me chanakya ne chandika paali upanishad me aise bahut saare upanishad hai jinmein bahut hi sundar roop se yog ki vyakhya ki gayi hai

हां योग की जो धारणा है वह भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार कैसे पैदा हुई थी ऐसा माना जाता है

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Dhiraj Melkani

Yoga Trainer

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भारतीय जीवन चिंतन एक कल्याणकारी राज्य है या लोक के बारे में सोचता है तो उसी को सोचते चिंतन करते हुए योग की अवधारणा पैदा हुई ऋषि यों ने महंतों ने साधुओं ने उसको करण और लोगों तक पहुंचाएं लोगों तक जोड़ा

bharatiya jeevan chintan ek kalyaankari rajya hai ya lok ke bare me sochta hai toh usi ko sochte chintan karte hue yog ki avdharna paida hui rishi yo ne mahanton ne sadhuon ne usko karan aur logo tak paunchaye logo tak joda

भारतीय जीवन चिंतन एक कल्याणकारी राज्य है या लोक के बारे में सोचता है तो उसी को सोचते चिंतन

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ज्योतिषी झा मेरठ (Pt. K L Shashtri)

खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ,झंझारपुर और मुम्बई

3:30
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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

0:53
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योग्य योजना भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार कैसे पैदा हुई देखिए प्राचीन काल में जो तुम ना राजाओं की शान होती थी अगर कोई राजा चंद जी से कोई चीज विजय प्राप्त करता था तो जो अपनी खुशी नहीं होती थी जितनी से युद्ध करके जितनी है जिसके 9 बच्चे वहां हर युवा को आकाश सैनी को पेट की तैयारी करना होता था और जूजू की तैयारी करने के लिए जिस भी तरह के क्रियाकलाप करते थे वह व्यायाम योगा और मेडिटेशन ध्यान हुआ करता था

yogya yojana bharatiya pouranik kathao ke anusaar kaise paida hui dekhiye prachin kaal me jo tum na rajaon ki shan hoti thi agar koi raja chand ji se koi cheez vijay prapt karta tha toh jo apni khushi nahi hoti thi jitni se yudh karke jitni hai jiske 9 bacche wahan har yuva ko akash saini ko pet ki taiyari karna hota tha aur juju ki taiyari karne ke liye jis bhi tarah ke kriyakalap karte the vaah vyayam yoga aur meditation dhyan hua karta tha

योग्य योजना भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार कैसे पैदा हुई देखिए प्राचीन काल में जो तुम ना

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Dr. Kartik Kumar

Yoga Instructor

0:39

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इसके जो अभी चल रहा है इधर ने गर्व है और हिरन नगर फाइव करते वक्त अनन्य पुराना यजुर्वेद में यह मंत्र आता है हड़प्पा मोहनजोदड़ो की खुदाई से इसके जो ऑफिस मिले उसमें जो कथाएं मिली उसके जो शिलालेख पर जो खुदे हुए योग के संबंधित से जो कथा दे तो उससे स्पष्ट होता है कि योग की अवधारणा वहां से उत्पन्न हुई जिसमें की योग मुद्रा ध्यान मुद्रा ज्ञान मुद्रा चीन मुद्रा चीजें जो हमें मिले इसको लेकर इसकी अवधारणा धीरे-धीरे आगे बढ़

iske jo abhi chal raha hai idhar ne garv hai aur hiran nagar five karte waqt anany purana yajurved mein yah mantra aata hai hadappa mohenjodaro ki khudai se iske jo office mile usme jo kathaen mili uske jo shilalekh par jo khude hue yog ke sambandhit se jo katha de toh usse spasht hota hai ki yog ki avdharna wahan se utpann hui jisme ki yog mudra dhyan mudra gyaan mudra china mudra cheezen jo hamein mile isko lekar iski avdharna dhire dhire aage badh

इसके जो अभी चल रहा है इधर ने गर्व है और हिरन नगर फाइव करते वक्त अनन्य पुराना यजुर्वेद में

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Vikas Kumar

Yog Guru

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Yog Guru Gyan Ranjan Maharaj

Founder & Director - Kashyap Yogpith

1:43
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आपका क्वेश्चन है योगा की अवधारणा भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार कैसे पैदा हुई तो देखिए योग के बारे में शिव पुराण में वर्णन है योग का वर्णन भगवान कृष्ण गीता में लिखी हैं और आपको पता ही है कि योग के जनक प्रतिपादक ब्रह्म ऋषि महर्षि पातंजल को माना गया है तो योग का पौराणिक मान्यता है पुराणों में भी इसका चाचा है ऐसा नहीं है कि नहीं है इसलिए योगी यह कैसा सरल साधन है आम मनुष्य को स्वस्थ रखने की एक के जो प्रणाली है उसमें योग्य है कि उस पर विश्वास किया जा सकता है इसका कोई साइड इफेक्ट है जिसको माना जाए या करने से हानि जिसको हम मानते हैं ओयो करने से हानि नहीं होती है बशर्ते कि जैसे बताया जाए या जैसे आपको उस चीज को अध्ययन करें या पड़े या कोई बताए साफ करते हैं तो हमें जहां तक उम्मीद है कि कोई हानि का सवाल नहीं है तो आप लोग कर सकते हैं आयोग के पौराणिक मान्यता है ऐसा नहीं है मैं पुर में बताया भी कि इसको शिव पुराण में और आपको भागवत गीता में भगवान कृष्ण भी चीज को का चित्र किया धन्यवाद

aapka question hai yoga ki avdharna bharatiya pouranik kathao ke anusaar kaise paida hui toh dekhiye yog ke bare mein shiv puran mein varnan hai yog ka varnan bhagwan krishna geeta mein likhi hain aur aapko pata hi hai ki yog ke janak pratipadak Brahma rishi maharshi patanjal ko mana gaya hai toh yog ka pouranik manyata hai purano mein bhi iska chacha hai aisa nahi hai ki nahi hai isliye yogi yah kaisa saral sadhan hai aam manushya ko swasthya rakhne ki ek ke jo pranali hai usme yogya hai ki us par vishwas kiya ja sakta hai iska koi side effect hai jisko mana jaaye ya karne se hani jisko hum maante hain oyo karne se hani nahi hoti hai basharte ki jaise bataya jaaye ya jaise aapko us cheez ko adhyayan kare ya pade ya koi bataye saaf karte hain toh hamein jaha tak ummid hai ki koi hani ka sawaal nahi hai toh aap log kar sakte hain aayog ke pouranik manyata hai aisa nahi hai pur mein bataya bhi ki isko shiv puran mein aur aapko bhagwat geeta mein bhagwan krishna bhi cheez ko ka chitra kiya dhanyavad

आपका क्वेश्चन है योगा की अवधारणा भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार कैसे पैदा हुई तो देखिए योग

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Dr. Sarika Changulani

Founder & Director - Sarika's Touch Of Health

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योगा की अवधारणा फाटक पानी कथाओं के अनुसार कैसे पैदा होती होगा तो देखो हमारे शास्त्रों में भी बताया गया है गीता में श्री कृष्ण जी ने इसका उल्लेख किया है कि योगा कर्मसु कौशलम् में सब अपने कर्मों को इतनी कुशलता से करते हैं उसका नाम ही योग है योगा का हमारी भारतीय संस्कृति के साथ में तो काफी पुराना संबंध बोला जाएगा जब हमारे श्री कृष्ण ही नजर गीता में उपदेश दे ही दिया योगा का तो आपको सोचे कि कितना पुराना होगा उसके बाद धीरे-धीरे वैसे भी होगा बढ़ता जा रहा है अपनी संस्कृति के कोडिंग महर्षि पतंजलि को बोला जाता है योगगुरु तो फिर आप सो सकते हो कि कितना पूरा नहीं हुआ है ओके थैंक यू

yoga ki avdharna phatak paani kathao ke anusaar kaise paida hoti hoga toh dekho hamare shastron mein bhi bataya gaya hai geeta mein shri krishna ji ne iska ullekh kiya hai ki yoga karmasu kaushalam mein sab apne karmon ko itni kushalata se karte hain uska naam hi yog hai yoga ka hamari bharatiya sanskriti ke saath mein toh kaafi purana sambandh bola jaega jab hamare shri krishna hi nazar geeta mein updesh de hi diya yoga ka toh aapko soche ki kitna purana hoga uske baad dhire dhire waise bhi hoga badhta ja raha hai apni sanskriti ke coding maharshi patanjali ko bola jata hai yogguru toh phir aap so sakte ho ki kitna pura nahi hua hai ok thank you

योगा की अवधारणा फाटक पानी कथाओं के अनुसार कैसे पैदा होती होगा तो देखो हमारे शास्त्रों में

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योगा का भारतीय पुराणों में जा मारी ग्रंथ छात्रों में उसको निर्माण किया गया है यह काफी सालों पुरानी बात है आने हमारा धार्मिक ग्रंथ जो होता है भगवत गीता भगवत गीता के अंदर श्री कृष्ण भगवान ने अर्जुन को जो योग दिया था उसको योगा बोलते प्रॉपर्ली आज लोगों को या हुआ का अर्थ मालूम नहीं और सब जने चौकी योगा कर रहे योगा का प्रॉपर अर्थ मालूम रहना चाहिए हरिया होगा धार्मिक ग्रंथों के अनुसार ही करना तो पूरी की पूरी प्रॉब्लम जो एक ही खत्म हो जाती है कुछ प्रॉब्लम नहीं बचता है तो हमारे धार्मिक ग्रंथों में जो योगा बताया गया है तो शुरू से ईश्वर से लेकर तो आज तक योगा से ही ईश्वर की प्राप्ति होती है बल्लेबाजी ईश्वर की प्राप्ति के लिए हमें योगा ही एक कुत्ते साधन है और निरोगी रहने के साधन है इसीलिए हमारे पौराणिक कथा में योगा का सबसे ज्यादा महत्व बताया गया है

yoga ka bharatiya purano mein ja mari granth chhatro mein usko nirmaan kiya gaya hai yah kaafi salon purani baat hai aane hamara dharmik granth jo hota hai bhagwat geeta bhagwat geeta ke andar shri krishna bhagwan ne arjun ko jo yog diya tha usko yoga bolte properly aaj logo ko ya hua ka arth maloom nahi aur sab jane chowki yoga kar rahe yoga ka proper arth maloom rehna chahiye hariya hoga dharmik granthon ke anusaar hi karna toh puri ki puri problem jo ek hi khatam ho jaati hai kuch problem nahi bachta hai toh hamare dharmik granthon mein jo yoga bataya gaya hai toh shuru se ishwar se lekar toh aaj tak yoga se hi ishwar ki prapti hoti hai ballebaji ishwar ki prapti ke liye hamein yoga hi ek kutte sadhan hai aur nirogee rehne ke sadhan hai isliye hamare pouranik katha mein yoga ka sabse zyada mahatva bataya gaya hai

योगा का भारतीय पुराणों में जा मारी ग्रंथ छात्रों में उसको निर्माण किया गया है यह काफी सालो

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Ravishankar Prasad

Yoga, Pranic Healing & Acupressure Expert

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योग की अवधारणा घाटी पौराणिक कथाओं के अनुसार कैसे पैदा हुई जो प्राचीन काल में लोग के संसाधनों की कमी थी और पहले लोग आज के पिता संसाधनों की कमी थी इसलिए पहले लोग ज्यादा से ज्यादा हाथ से चला कर वर्क कर लेते थे लेकिन आज के जमाने में मॉडल दुनिया में वो काम नहीं कर रहे हैं तो उसके कितने लोग अपना कार्य नहीं कर मतलब ठीक नहीं कर पा रहे हैं हेलो लोग मतलब राजा महाराजा हुआ करते थे करते थे तो आया करते थे और आज के लोग यह सब काम नहीं करते हैं टेक्नोलाजी जितने आ गई है कि मानसिक वर्क ज्यादा कर रहे हैं जिससे कि हमारे अनपढ़ जा रहा है और पहले जो लोग साधु महात्मा थे वह लोग योग किया करते थे और उनको खाने-पीने की सामग्री के लिए परिश्रम करते थे कि कर्म करते हैं मानचित्र ज्यादा करते हैं और कोई भी काम थोड़ा बहुत कर लेते हैं कि हमने बहुत ज्यादा मेहनत के लिए हमको योगा करने के लिए योगा करने की जरूरत है आज के जमाने में भी होगा बहुत ही जरूरी है उसे आप योगा करना जरूरी है मेरी टेशन योगा यह बहुत ही जरूरी है माइंड को कल स्टेट करने के लिए स्टेशन का नाम और बॉडी को स्थिति बनाए रखने के लिए योगा करना पड़ेगा थैंक यू

yog ki avdharna ghati pouranik kathao ke anusaar kaise paida hui jo prachin kaal mein log ke sansadhano ki kami thi aur pehle log aaj ke pita sansadhano ki kami thi isliye pehle log zyada se zyada hath se chala kar work kar lete the lekin aaj ke jamane mein model duniya mein vo kaam nahi kar rahe hain toh uske kitne log apna karya nahi kar matlab theek nahi kar paa rahe hain hello log matlab raja maharaja hua karte the karte the toh aaya karte the aur aaj ke log yah sab kaam nahi karte hain teknolaji jitne aa gayi hai ki mansik work zyada kar rahe hain jisse ki hamare anpad ja raha hai aur pehle jo log sadhu mahatma the vaah log yog kiya karte the aur unko khane peene ki samagri ke liye parishram karte the ki karm karte hain manchitra zyada karte hain aur koi bhi kaam thoda bahut kar lete hain ki humne bahut zyada mehnat ke liye hamko yoga karne ke liye yoga karne ki zarurat hai aaj ke jamane mein bhi hoga bahut hi zaroori hai use aap yoga karna zaroori hai meri teshan yoga yah bahut hi zaroori hai mind ko kal state karne ke liye station ka naam aur body ko sthiti banaye rakhne ke liye yoga karna padega thank you

योग की अवधारणा घाटी पौराणिक कथाओं के अनुसार कैसे पैदा हुई जो प्राचीन काल में लोग के संसाधन

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S Bajpay

Yoga Expert | Beautician & Gharelu Nuskhe Expert

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युवा की अवधारणा भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार कैसे पैदा हुई तो मैं आपको बता दूं कि भारतीयों में श्रम योगी का गेम शिव को योग का सबसे बड़ा अवतार बताया गया है और शिव के बारे में कहा जाता है भगवान शंकर के बारे में कि योग मुद्रा में जाकर वह लाखों करोड़ों वर्षों के लिए योग बल से तपस्या करते एक मूर्ति मिली है जिसके जिसके बारे में लोग कहते हैं कि संदीप भारती की सभ्यता के लोगों ने आप से 5 साल की हुई है जिसके चारों ओर पशु बैठे हुए हैं बैठे हुए हैं मूर्ति बैठी है उस शिव के परम योग्य दिखाती है तो लोगों का यह कहना है कि इस प्रकार की मूर्ति और शिवपुराण संस्थाओं में शिव को महायोगी बताया गया है भगवत गीता में कृष्ण ने जो कि बारे में काफी विस्तार से बताया है उन्होंने कहा है कि सरकार के कार्यों में कुशलता होना ही योगा कर्मसु कौशलम्

yuva ki avdharna bharatiya pouranik kathao ke anusaar kaise paida hui toh main aapko bata doon ki bharatiyon me shram yogi ka game shiv ko yog ka sabse bada avatar bataya gaya hai aur shiv ke bare me kaha jata hai bhagwan shankar ke bare me ki yog mudra me jaakar vaah laakhon karodo varshon ke liye yog bal se tapasya karte ek murti mili hai jiske jiske bare me log kehte hain ki sandeep bharati ki sabhyata ke logo ne aap se 5 saal ki hui hai jiske charo aur pashu baithe hue hain baithe hue hain murti baithi hai us shiv ke param yogya dikhati hai toh logo ka yah kehna hai ki is prakar ki murti aur shivapuran sasthaon me shiv ko mahayogi bataya gaya hai bhagwat geeta me krishna ne jo ki bare me kaafi vistaar se bataya hai unhone kaha hai ki sarkar ke karyo me kushalata hona hi yoga karmasu kaushalam

युवा की अवधारणा भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार कैसे पैदा हुई तो मैं आपको बता दूं कि भारतीय

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Shubham Saini

Software Engineer

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योग की अवधारणा हमारे अथर्ववेद में पाया जाता है जिसने योगा के बारे में बहुत अच्छे से मिलता है संस्था के बारे में बताया गया अगर कोई व्यक्ति होगा करता है तो उसका

yog ki avdharna hamare atharvaved me paya jata hai jisne yoga ke bare me bahut acche se milta hai sanstha ke bare me bataya gaya agar koi vyakti hoga karta hai toh uska

योग की अवधारणा हमारे अथर्ववेद में पाया जाता है जिसने योगा के बारे में बहुत अच्छे से मिलता

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योग को सबसे पहले एक परम योगी शिव शंकर जी ने पार्वती के लिए बताया था उन्होंने योग के लिए 8400000 आसनों का जिक्र किया था उसके बाद भारत के अनेक गुणों ने उसको अपने अनुसार अलग-अलग ढंग से कहा पतंजलि ने इन्हें क्रमबद्ध तरीके से लिख कर एक नया स्वरूप दिया अलग-अलग लोगों ने अलग-अलग भावनाओं के साथ स्कोर प्रस्तुत किया

yog ko sabse pehle ek param yogi shiv shankar ji ne parvati ke liye bataya tha unhone yog ke liye 8400000 aasanon ka jikarr kiya tha uske baad bharat ke anek gunon ne usko apne anusaar alag alag dhang se kaha patanjali ne inhen krambaddh tarike se likh kar ek naya swaroop diya alag alag logo ne alag alag bhavnao ke saath score prastut kiya

योग को सबसे पहले एक परम योगी शिव शंकर जी ने पार्वती के लिए बताया था उन्होंने योग के लिए

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योग के सबसे बड़े जनक भगवान शिव हैं शिव महापुराण में योग के बारे में विस्तार से बताया गया है फिर आगे चलकर इसके अलावा वेद शास्त्रों में भी योग का महत्व स्पष्ट दिया गया है आगे चलकर एक माहौल ऋषि पतंजलि हुए उन पतंजलि मुनि ने योग के लिए एक विशेष ग्रंथ पतंजलि योग नामक पुस्तक का निर्माण किया समय-समय पर इसका विस्तार होता गया और आज भी बहुत सारे ऋषि परंपरा से जुड़े हुए गुरुकुल जॉब पर कक्षाएं देते हैं

yog ke sabse bade janak bhagwan shiv hain shiv mahapuran me yog ke bare me vistaar se bataya gaya hai phir aage chalkar iske alava ved shastron me bhi yog ka mahatva spasht diya gaya hai aage chalkar ek maahaul rishi patanjali hue un patanjali muni ne yog ke liye ek vishesh granth patanjali yog namak pustak ka nirmaan kiya samay samay par iska vistaar hota gaya aur aaj bhi bahut saare rishi parampara se jude hue gurukul job par kakshaen dete hain

योग के सबसे बड़े जनक भगवान शिव हैं शिव महापुराण में योग के बारे में विस्तार से बताया गया ह

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हाय फ्रेंड गुड मॉर्निंग आपके द्वारा काफी बढ़िया क्वेश्चन किया गया पर मैं आपको बता दो यह पुरानी कथाओं से इसलिए जुड़ा हुआ है और आपने देखा भी होगा कि पहले जब कोई व्यक्ति शिक्षा ग्रहण करने जाता तो ऋषि मासियों के पास जाते थे और वह जंगल में जाते थे जिनको अंतर्ध्यान करना यह योग से जुड़ी बातें ज्यादातर बताई जाती थी और उनमें ही उनकी शिक्षा चिपकी हुई थी और वह ऐसा मानते थे कि इन चीजों से काफी हद तक बीमारियों को दूर किया जा सकता है और स्वस्थ रहने का एक अच्छा मंत्र होता है इसी को देखते देखते आगे कुछ लोगों ने अपनाया और एक बड़े से इलाज के रूप में से देखा गया और आज इतना ज्यादा प्रमोट हो गया कि आज पूरा वर्ल्ड योग बना रहे और योग दिवस के रूप में इसे लोग फॉलो कर रहे हैं थैंक यू

hi friend good morning aapke dwara kaafi badhiya question kiya gaya par main aapko bata do yah purani kathao se isliye juda hua hai aur aapne dekha bhi hoga ki pehle jab koi vyakti shiksha grahan karne jata toh rishi masiyon ke paas jaate the aur vaah jungle me jaate the jinako antardhyan karna yah yog se judi batein jyadatar batai jaati thi aur unmen hi unki shiksha chipaki hui thi aur vaah aisa maante the ki in chijon se kaafi had tak bimariyon ko dur kiya ja sakta hai aur swasth rehne ka ek accha mantra hota hai isi ko dekhte dekhte aage kuch logo ne apnaya aur ek bade se ilaj ke roop me se dekha gaya aur aaj itna zyada promote ho gaya ki aaj pura world yog bana rahe aur yog divas ke roop me ise log follow kar rahe hain thank you

हाय फ्रेंड गुड मॉर्निंग आपके द्वारा काफी बढ़िया क्वेश्चन किया गया पर मैं आपको बता दो यह पु

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हम सब जानते हैं कि जो आज हमारा स्वरूप है ऐसा नहीं था हम जंगली थे आदिवासिस हाथी आदमी जिसका नाम आपने सुना होगा आदिवासी था इंसान भटकता था शिकार करता था भूख लगती थी तो कुछ भी खा लेता था पेड़ पत्ते फल जड़ तना जो भी उसके हाथ लगा जानवरों को भी खाने लगा तो स्टार्ट से ही इंसान प्रकृति के टच में रहा है प्रकृति के साथ में रहने की वजह से उस में योग वगैरह योगदान किया जब उसको फायदा होने लगा तो उसको उसने अपना लिया

hum sab jante hain ki jo aaj hamara swaroop hai aisa nahi tha hum jungli the adivasis haathi aadmi jiska naam aapne suna hoga adiwasi tha insaan bhatakta tha shikaar karta tha bhukh lagti thi toh kuch bhi kha leta tha ped patte fal jad tana jo bhi uske hath laga jaanvaro ko bhi khane laga toh start se hi insaan prakriti ke touch me raha hai prakriti ke saath me rehne ki wajah se us me yog vagera yogdan kiya jab usko fayda hone laga toh usko usne apna liya

हम सब जानते हैं कि जो आज हमारा स्वरूप है ऐसा नहीं था हम जंगली थे आदिवासिस हाथी आदमी जिसका

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