क्यों भगवान गणेश पर एक हाथी का एक चेहरा है?...


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इस प्रकार का जो है वर्णन शिवपुराण कथा में जाति धर्म हिंदू धर्म मानता हूं कि भगवान गणेश जी का सर काट दिया तो उसके स्थान पुरवा में जो है हाथी का चेहरा जो उनके सर पर रख कर उन्हें पुनर्जीवित किया धार्मिक कथाओं का आपेक्षिक वेग धर्म ग्रंथों में मिलता है बाकी जो है सच्चाई 755 का गणेश जी का चेहरा जो है वह बताइए धार्मिक कथाओं का वर्कर जॉब आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मनोबल

is prakar ka jo hai varnan shivapuran katha me jati dharm hindu dharm maanta hoon ki bhagwan ganesh ji ka sir kaat diya toh uske sthan purva me jo hai haathi ka chehra jo unke sir par rakh kar unhe punarjeevit kiya dharmik kathao ka aapekshik veg dharm granthon me milta hai baki jo hai sacchai 755 ka ganesh ji ka chehra jo hai vaah bataiye dharmik kathao ka worker job anganwadi karyakartaon ka manobal

इस प्रकार का जो है वर्णन शिवपुराण कथा में जाति धर्म हिंदू धर्म मानता हूं कि भगवान गणेश जी

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RJ Rashi

RJ, singer, engineer

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माना जाता है कि जब मतलब जब गणेश जी का जन्म हुआ था उसके बाद में एक बार पर्वती मा स्टैंड करेंगी तो उन्होंने अपने पुत्र गणेश जी से कहा कि कोई भी अगर आता है तो उसे अंदर मत आने देना इसलिए अरे गणेश जी को यह नहीं पता था कि शंकर जी जो है वह मेरे पिताजी होते तो वह शंकर जी अंदर प्रवेश करना चाहते हैं तो वह कड़ी क्यों नहीं देते जिस पर क्रोधित होकर संघर्ष के अंदर अपना चितचोर चला देते हैं और उनका सर को ज्यादा है और जो शंकर जी का त्रिशूल है उससे अगर किसी का सिर काटा जाता है तो वह दुबारा नहीं जुड़ सकता इसलिए कोई भी इंसान नहीं मिला जो नंदी और जो बिगड़ उनके ढूंढने गए थे सर को तो हाथी का सिर उठाया था उसके कुछ हैपेंड सिंस है तो वही सरवन के लगा दिया गया जिससे वह आप ही की तरह हो गया

mana jata hai ki jab matlab jab ganesh ji ka janam hua tha uske baad mein ek baar parvati ma stand karengi toh unhone apne putra ganesh ji se kaha ki koi bhi agar aata hai toh use andar mat aane dena isliye are ganesh ji ko yah nahi pata tha ki shankar ji jo hai vaah mere pitaji hote toh vaah shankar ji andar pravesh karna chahte hain toh vaah kadi kyon nahi dete jis par krodhit hokar sangharsh ke andar apna chitchor chala dete hain aur unka sir ko zyada hai aur jo shankar ji ka trishool hai usse agar kisi ka sir kaata jata hai toh vaah dubara nahi jud sakta isliye koi bhi insaan nahi mila jo nandi aur jo bigad unke dhundhne gaye the sir ko toh haathi ka sir uthaya tha uske kuch happened sins hai toh wahi sarvan ke laga diya gaya jisse vaah aap hi ki tarah ho gaya

माना जाता है कि जब मतलब जब गणेश जी का जन्म हुआ था उसके बाद में एक बार पर्वती मा स्टैंड करे

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