भारत का संविधान एकात्मक है या संघीय है?...


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यही है सबका साथ सबका विकास की बात करेगी विशेष के लिए गरीबी का

yahi hai sabka saath sabka vikas ki BA at karegi vishesh ke liye garibi ka

यही है सबका साथ सबका विकास की बात करेगी विशेष के लिए गरीबी का

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Suman Kumar Gupta

Politician, Social Worker

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गरीब अमीर सबके लिए तो जो संविधान अंबेडकर ने बनाया था कि अग्रवाल समाज में लेकिन उसको आरक्षण नहीं था वरना की आर्थिक आधार बनी है तिवारी ओबीसी आरक्षण

garib amir sabke liye toh jo samvidhan ambedkar ne BA naya tha ki agrawal samaj mein lekin usko aarakshan nahi tha varna ki aarthik aadhaar BA ni hai tiwari obc aarakshan

गरीब अमीर सबके लिए तो जो संविधान अंबेडकर ने बनाया था कि अग्रवाल समाज में लेकिन उसको आरक्षण

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Lalit Kumar

Journalist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

पंजाब प्रदेश स्टेट कबीर राजमहल के राज्य केंद्र का भी केंद्र और राज्य दोनों मिलकर एकता भारत की राजनीतिक संगठन से अलग हटके हटके

punjab pradesh state kabir rajmahal ke rajya kendra ka bhi kendra aur rajya dono milkar ekta bharat ki raajnitik sangathan se alag hatake hatake

पंजाब प्रदेश स्टेट कबीर राजमहल के राज्य केंद्र का भी केंद्र और राज्य दोनों मिलकर एकता भारत

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Mehmood Alum

Law Student

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत का संविधान मिश्रित संविधान है जिसमें एकात्मक और संघात्मक दोनों तरह के गुण पाए जाते हैं

bharat ka samvidhan mishrit samvidhan hai jisme ekatmak aur sanghatmak dono tarah ke gun paye jaate hain

भारत का संविधान मिश्रित संविधान है जिसमें एकात्मक और संघात्मक दोनों तरह के गुण पाए जाते है

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Bhaskar Saurabh

Politics Follower | Engineer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत एक संवैधानिक गणराज्य है भारत के संविधान की प्रस्तावना को संविधान की आत्मा कहा जाता है और भारत में संघीय शासन व्यवस्था लागू हैं किंतु संविधान में कहीं भी संघात्मक शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है तो मेरे मुताबिक भारत का जो संविधान है वह संघात्मक तो है ही और साथ ही साथ इसमें एकात्मक व्यवस्था के लक्षण भी दिखाई देते हैं अगर हम देखें कि भारत का संविधान संघात्मक कैसे हैं तो हमें मालूम पड़ेगा कि जैसे संविधान को ही सर्वोच्च माना गया है और केंद्र और राज्य में अलग-अलग सरकारी होती हैं केंद्र और राज्य के बीच में शक्तियों का विभाजन किया गया है और अगर एकात्मक लक्षण के बारे में बात करें तो ऐसे पता हमें चलेगा कि यहां पर एक ही कृत न्याय व्यवस्था है और शक्तियों का जो बटवारा किया गया है वह केंद्र के पक्ष में ज्यादा है संघ तथा राज्य के लिए एक ही संविधान है और केंद्र सरकार को राज्यों की सीमा परिवर्तन का अधिकार भी मिला हुआ है और इसके अलावा राज्यों में जो राज्यपालों की नियुक्ति होती है वह भी राष्ट्रपति के द्वारा ही की जाती है और संकट काल में एकात्मक स्वरूप देखने को मिलता है हमें अपने संविधान का तो इन सारी चीजों से हम समझ सकते हैं कि भारत का जो संविधान है वह पूरी तरह से ना तो संघात्मक है और ना ही एकात्मक है यह दोनों का एक मिश्रित रूप है

bharat ek samvaidhanik ganrajya hai bharat ke samvidhan ki prastavna ko samvidhan ki aatma kaha jata hai aur bharat mein sanghiy shasan vyavastha laagu hai kintu samvidhan mein kahin bhi sanghatmak shabd ka prayog nahi kiya gaya hai toh mere mutabik bharat ka jo samvidhan hai vaah sanghatmak toh hai hi aur saath hi saath isme ekatmak vyavastha ke lakshan bhi dikhai dete hai agar hum dekhen ki bharat ka samvidhan sanghatmak kaise hai toh hamein maloom padega ki jaise samvidhan ko hi sarvoch mana gaya hai aur kendra aur rajya mein alag alag sarkari hoti hai kendra aur rajya ke beech mein shaktiyon ka vibhajan kiya gaya hai aur agar ekatmak lakshan ke BA re mein BA at kare toh aise pata hamein chalega ki yahan par ek hi krit nyay vyavastha hai aur shaktiyon ka jo BA twara kiya gaya hai vaah kendra ke paksh mein zyada hai sangh tatha rajya ke liye ek hi samvidhan hai aur kendra sarkar ko rajyo ki seema parivartan ka adhikaar bhi mila hua hai aur iske alava rajyo mein jo rajyapalon ki niyukti hoti hai vaah bhi rashtrapati ke dwara hi ki jaati hai aur sankat kaal mein ekatmak swaroop dekhne ko milta hai hamein apne samvidhan ka toh in saree chijon se hum samajh sakte hai ki bharat ka jo samvidhan hai vaah puri tarah se na toh sanghatmak hai aur na hi ekatmak hai yah dono ka ek mishrit roop hai

भारत एक संवैधानिक गणराज्य है भारत के संविधान की प्रस्तावना को संविधान की आत्मा कहा जाता है

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Pooja Kairav

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भारत एक संवैधानिक गणराज्य है भारत के संविधान की प्रस्तावना को संविधान की आत्मा कहा जाता है और भारत में संघीय शासन व्यवस्था लागू हैं किंतु संविधान में कहीं भी संघात्मक शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है तो मेरे मुताबिक भारत का जो संविधान है वह संघात्मक तो है ही और साथ ही साथ इसमें एकात्मक व्यवस्था के लक्षण भी दिखाई देते हैं अगर हम देखें कि भारत का संविधान संघात्मक कैसे हैं तो हमें मालूम पड़ेगा कि जैसे संविधान को ही सर्वोच्च माना गया है और केंद्र और राज्य में अलग-अलग सरकारी होती हैं केंद्र और राज्य के बीच में शक्तियों का विभाजन किया गया है और अगर एकात्मक लक्षण के बारे में बात करें तो ऐसे पता हमें चलेगा कि यहां पर एक ही कृत न्याय व्यवस्था है और शक्तियों का जो बटवारा किया गया है वह केंद्र के पक्ष में ज्यादा है संघ तथा राज्य के लिए एक ही संविधान है।

bharat ek samvaidhanik ganrajya hai bharat ke samvidhan ki prastavna ko samvidhan ki aatma kaha jata hai aur bharat mein sanghiy shasan vyavastha laagu hai kintu samvidhan mein kahin bhi sanghatmak shabd ka prayog nahi kiya gaya hai toh mere mutabik bharat ka jo samvidhan hai vaah sanghatmak toh hai hi aur saath hi saath isme ekatmak vyavastha ke lakshan bhi dikhai dete hai agar hum dekhen ki bharat ka samvidhan sanghatmak kaise hai toh hamein maloom padega ki jaise samvidhan ko hi sarvoch mana gaya hai aur kendra aur rajya mein alag alag sarkari hoti hai kendra aur rajya ke beech mein shaktiyon ka vibhajan kiya gaya hai aur agar ekatmak lakshan ke BA re mein BA at kare toh aise pata hamein chalega ki yahan par ek hi krit nyay vyavastha hai aur shaktiyon ka jo BA twara kiya gaya hai vaah kendra ke paksh mein zyada hai sangh tatha rajya ke liye ek hi samvidhan hai

भारत एक संवैधानिक गणराज्य है भारत के संविधान की प्रस्तावना को संविधान की आत्मा कहा जाता है

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Jyoti Mehta

Ex-History Teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जी हां भारत का संविधान संघात्मक है क्योंकि हमारे देश भारत की जनसंख्या और क्षेत्रफल दोनों ही दृष्टि से एक विशाल देश है तथा बहुत अधिक विविधताओं का भी देश है ऐसी स्थिति में भारत के लिए संघात्मक शासन व्यवस्था को रखना स्वाभाविक हो जाता है और भारतीय संविधान के द्वारा ऐसा ही किया भी गया भारत के संविधान के प्रथम अनुच्छेद में ही कहा भी गया है कि भारत गणराज्य भारत राज्यों का एक संघ है संघात्मक व्यवस्था के लक्षण संविधान की सर्वोच्चता केंद्र व राज्य सरकार की अलवर राज्य की अलग-अलग सरकारी केंद्र व राज्य में शक्तियों का विभाजन तथा स्वतंत्र सर्वोच्च न्यायालय है परंतु अलग-अलग विचारकों के अलग-अलग इसके प्रति विचार भी हैं प्रोफेसर पायली के अनुसार भारत के संविधान का ढांचा तो संघात्मक है किंतु उसकी आत्मा एकात्मक है जबकि डी डी बसु के अनुसार भारत का संविधान एकात्मक और संघात्मक दोनों का ही संयोजन है

ji haan bharat ka samvidhan sanghatmak hai kyonki hamare desh bharat ki jansankhya aur kshetrafal dono hi drishti se ek vishal desh hai tatha BA hut adhik vividhtaon ka bhi desh hai aisi sthiti mein bharat ke liye sanghatmak shasan vyavastha ko rakhna swabhavik ho jata hai aur bharatiya samvidhan ke dwara aisa hi kiya bhi gaya bharat ke samvidhan ke pratham anuched mein hi kaha bhi gaya hai ki bharat ganrajya bharat rajyo ka ek sangh hai sanghatmak vyavastha ke lakshan samvidhan ki sarvochchata kendra va rajya sarkar ki alwar rajya ki alag alag sarkari kendra va rajya mein shaktiyon ka vibhajan tatha swatantra sarvoch nyayalaya hai parantu alag alag vicharakon ke alag alag iske prati vichar bhi hai professor payali ke anusaar bharat ke samvidhan ka dhancha toh sanghatmak hai kintu uski aatma ekatmak hai jabki d d BA su ke anusaar bharat ka samvidhan ekatmak aur sanghatmak dono ka hi sanyojan hai

जी हां भारत का संविधान संघात्मक है क्योंकि हमारे देश भारत की जनसंख्या और क्षेत्रफल दोनों ह

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kisne kaha ki bhartiya sangh earth sanghatmak hai ; संघात्मक सरकार है ;

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