मिट्टी का क्या महत्व है, मनुष्य के जीवन में?...


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Hemant Priyadarshi

Writer | Philospher| Teacher |

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आप पूछते हैं कि मिट्टी का क्या महत्व है मनुष्य के जीवन में मिट्टी के बिना तो मनुष्य ही नहीं है उसके मिट्टी का महत्व तो बाद में और समझने के लिए मुख्य तो यह समझें कि मिट्टी के बिना मनुष्य ही नहीं है मिट्टी हमारे शरीर का जो अंग अंग है वह मिट्टी ही तो है अगर इस शरीर से पंचतत्व हट जाए तो यह सारी रात की भांति गिर जाएगा इस मिट्टी पर वह भी आकाश में ना उड़ेगा जल में ना भी करेगा इस मिट्टी पर बिखर कर रहा है जाएगा हमारा शरीर पांच तत्वों से बना है अग्नि जल वायु धरती और आकाश इनमें से एक जो धरती है यह धरती मिट्टी से ही धरती और इस से बना हुआ है अगर शरीर के यह पांचों तत्व निकल जाए हट जाए या कोई एक तत्व भी अपना प्रभाव खत्म कर दे एक तत्व का भी प्रभाव खत्म कर दें योग बन से आपको तो करना कठिन है आपको योग बन उसके लिए योग विद्या जानी पड़ेगी तो आप ऐसा कर पाएंगे लेकिन आप ऐसा नहीं करेंगे अब बिखर जाएंगे पांच तत्वों से ही मिलकर हमारा शरीर बना हुआ है और उसमें एक धरती है मिट्टी है पहली बार और दूसरी बात कि हमारा जन्म जहां होता है वह हमारी माता है इस धरती पर ही होती हमारा जन्म स्थिति पर ही होता है फिर जब हम बड़े होते हैं कि इसी धरती के मिट्टी पर लूटते हैं पूछते हैं तो हम मजबूत होते हैं खेलते हैं पूछते हैं पिता की उंगली पकड़कर चलते हैं मां का मां की बातें सीखते हैं इसी घर की फिर उसके बाद हम जो खाते हैं खाने में चाहे वह जानवरों को पकाकर खाएं या हम पेड़ पौधों का सेवन करें यह दोनों चीज मिट्टी पर ही हैं इस मिट्टी से ही वह है कि टीना रहे तू वह दोनों चीज नहीं है हम जो भी सुख भोग करते हैं या दुख भोग करते हैं वह सब कुछ इसी धरती पर हैं इसी मिट्टी पर हैं हम आकाश में नहीं रख सकते इससे ज्यादा महत्वपूर्ण क्या होगा ना हो तो क्या हम आकाश में लटकते रह सकते हैं असंभव अगर आप यह मानते हो शरीर पांच तत्वों से बना है और मिट्टी से भी बना है तो आपको यह तो मानना ही मानना है समझना ही समझना है कि अगर मिट्टी ना हो तो क्या हम जल में जी सकते हैं यह कश्मीरी सकते हवा में लटकते जी सकते हैं यह संभव नहीं हमारा जन्म भी इसी धरती पर होता है चलना भी यहां सीखते हैं खेलना भी इसी मिट्टी पर सीखते ज्ञान भी इसी मिट्टी पर रहकर प्राप्त करते हैं हम सुख वह भी इसी मिट्टी पर करते हैं और अंत में जब हमारा अंत्येष्टि होता है अंतिम कर्म होता है उसके बाद भी हम इसी मिट्टी में खाक हो जाते हैं चाहे वह जला दिया जाए तो राख बनकर इस मिट्टी पर बिखर जाए या पानी में बिखर कर मिट्टी में मिल जाए या मिट्टी में दफन या दफना दिया जाए तुम्हें लेकिन मरने के इसी मिट्टी मिट्टी पर हमारा जन्म होता है इसी मिट्टी में हम मिल जाता है अब इससे ज्यादा मिट्टी के महत्व को समझने की क्या बात हो सकती है जन भी हमारा इसी मिट्टी पर हमारा पूरा जीवन इसी मिट्टी पर और मृत्यु पर्यंत भी इसी मिट्टी में मिल जाना पड़ता यहां तक कि हमारा शरीर भी इसी मिट्टी से बना यह हमारे जीवन में मिट्टी का महत्व

aap poochhte hain ki mitti ka kya mahatva hai manushya ke jeevan me mitti ke bina toh manushya hi nahi hai uske mitti ka mahatva toh baad me aur samjhne ke liye mukhya toh yah samajhe ki mitti ke bina manushya hi nahi hai mitti hamare sharir ka jo ang ang hai vaah mitti hi toh hai agar is sharir se panchatatwa hut jaaye toh yah saari raat ki bhanti gir jaega is mitti par vaah bhi akash me na udega jal me na bhi karega is mitti par bikhar kar raha hai jaega hamara sharir paanch tatvon se bana hai agni jal vayu dharti aur akash inmein se ek jo dharti hai yah dharti mitti se hi dharti aur is se bana hua hai agar sharir ke yah panchon tatva nikal jaaye hut jaaye ya koi ek tatva bhi apna prabhav khatam kar de ek tatva ka bhi prabhav khatam kar de yog ban se aapko toh karna kathin hai aapko yog ban uske liye yog vidya jani padegi toh aap aisa kar payenge lekin aap aisa nahi karenge ab bikhar jaenge paanch tatvon se hi milkar hamara sharir bana hua hai aur usme ek dharti hai mitti hai pehli baar aur dusri baat ki hamara janam jaha hota hai vaah hamari mata hai is dharti par hi hoti hamara janam sthiti par hi hota hai phir jab hum bade hote hain ki isi dharti ke mitti par lootate hain poochhte hain toh hum majboot hote hain khelte hain poochhte hain pita ki ungli pakadakar chalte hain maa ka maa ki batein sikhate hain isi ghar ki phir uske baad hum jo khate hain khane me chahen vaah jaanvaro ko pakaakar khayen ya hum ped paudho ka seven kare yah dono cheez mitti par hi hain is mitti se hi vaah hai ki tina rahe tu vaah dono cheez nahi hai hum jo bhi sukh bhog karte hain ya dukh bhog karte hain vaah sab kuch isi dharti par hain isi mitti par hain hum akash me nahi rakh sakte isse zyada mahatvapurna kya hoga na ho toh kya hum akash me latakte reh sakte hain asambhav agar aap yah maante ho sharir paanch tatvon se bana hai aur mitti se bhi bana hai toh aapko yah toh manana hi manana hai samajhna hi samajhna hai ki agar mitti na ho toh kya hum jal me ji sakte hain yah kashmiri sakte hawa me latakte ji sakte hain yah sambhav nahi hamara janam bhi isi dharti par hota hai chalna bhi yahan sikhate hain khelna bhi isi mitti par sikhate gyaan bhi isi mitti par rahkar prapt karte hain hum sukh vaah bhi isi mitti par karte hain aur ant me jab hamara Antyesthi hota hai antim karm hota hai uske baad bhi hum isi mitti me khak ho jaate hain chahen vaah jala diya jaaye toh raakh bankar is mitti par bikhar jaaye ya paani me bikhar kar mitti me mil jaaye ya mitti me dafan ya dafana diya jaaye tumhe lekin marne ke isi mitti mitti par hamara janam hota hai isi mitti me hum mil jata hai ab isse zyada mitti ke mahatva ko samjhne ki kya baat ho sakti hai jan bhi hamara isi mitti par hamara pura jeevan isi mitti par aur mrityu paryant bhi isi mitti me mil jana padta yahan tak ki hamara sharir bhi isi mitti se bana yah hamare jeevan me mitti ka mahatva

आप पूछते हैं कि मिट्टी का क्या महत्व है मनुष्य के जीवन में मिट्टी के बिना तो मनुष्य ही नही

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