भारत और अफगानिस्तान के संबंध कैसे हैं?...


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Ranjeet Singh Uppal

Retired GM ONGC

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भारत और अफगानिस्तान के संबंध हमेशा से अच्छे ही रहे हैं यह ज्यादा अच्छे तब हुए थे 1980 में जब हमारा और उनका सहयोग के क्षेत्रों में बड़ा था परंतु 90 के दशक में तालिबान स्ट्रांग हो गया और वह सत्ता में आ गया तो हमारे अफगानिस्तान के साथ संबंध कमजोर पड़ गए थे 2001 के बाद तालिबान की सत्ता में बाहर सत्ता से बाहर हुआ तब से हमारे संबंध पिछले दो दशक तालिबान के साथ काफी अच्छे हैं हमने वहां 3 अरब डालर की उनको सहायता दी है और 116 योजनाओं में हम उनके साथ हैं जो 31 प्रांतों में चल रही हैं इसमें शिक्षा स्वास्थ्य कृषि सिंचाई पेयजल ऊर्जा खेल इत्यादि है काबुल में शहतूत बंद का काम है धन धर्म में कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की स्थापना है जो वहां के विस्थापित लोग हैं उनके लिए सस्ते घरों का निर्माण है ऐसे कई योजनाएं हम मां चला रहे हैं और वो डालर के हम वहां प्रोजेक्ट कर चुके हैं और अभी भी हम बहुत काम वहां पर कर रहे हैं इन कार्यों से आज की तारीख में तो हम वहां काफी लोकप्रिय है लेकिन पाकिस्तान जो है वहां तालिबान को समर्थन देता रहता है और आतंकवाद बीच-बीच में फैलाता रहता है और उसके वह चाहता है कि भारत का प्रभाव वहां कम अभी तक जो अफगानिस्तान की सुरक्षा थी वह अमरीकी सैनिक कर रहे थे लेकिन धीरे-धीरे अमेरिका अपने सैनिक हटा रहा है जब अमेरिकी सैनिक पूरी तरह से हट जाएंगे तो एक खतरा है कि तालिबान फिर से हावी हो जाएगा उस समय हमारे को जैन निर्णय लेना पड़ेगा क्या हम अपनी सेना भेजें अफगानिस्तान की सुरक्षा के लिए सीधी से ना भेजना शायद उचित नहीं होगा और हम संयुक्त राष्ट्र संघ से रिक्वेस्ट कर सकते हैं कि संयुक्त राष्ट्र संघ की सेना जाए उसके थ्रू हम अपनी सेना देख सकते हैं लेकिन रूस के साथ अच्छे संबंध है रूस का सहयोग हम इस मामले में ले सकते हैं उस समय हमारी कूटनीति की असल परीक्षा होगी की कैसे रक्षा की जाए या हम डायरेक्ट बीच तालिबान से संवाद स्थापित कर सकते हैं परंतु यह सब थोड़ी सी चीजें हैं जो आने वाली है धन्यवाद

bharat aur afghanistan ke sambandh hamesha se acche hi rahe hain yah zyada acche tab hue the 1980 me jab hamara aur unka sahyog ke kshetro me bada tha parantu 90 ke dashak me taliban strong ho gaya aur vaah satta me aa gaya toh hamare afghanistan ke saath sambandh kamjor pad gaye the 2001 ke baad taliban ki satta me bahar satta se bahar hua tab se hamare sambandh pichle do dashak taliban ke saath kaafi acche hain humne wahan 3 arab dollar ki unko sahayta di hai aur 116 yojnao me hum unke saath hain jo 31 praaton me chal rahi hain isme shiksha swasthya krishi sinchai paijaal urja khel ityadi hai kabul me shahtoot band ka kaam hai dhan dharm me krishi vigyan evam praudyogiki vishwavidyalaya ki sthapna hai jo wahan ke visthaapit log hain unke liye saste gharon ka nirmaan hai aise kai yojanaye hum maa chala rahe hain aur vo dollar ke hum wahan project kar chuke hain aur abhi bhi hum bahut kaam wahan par kar rahe hain in karyo se aaj ki tarikh me toh hum wahan kaafi lokpriya hai lekin pakistan jo hai wahan taliban ko samarthan deta rehta hai aur aatankwad beech beech me failata rehta hai aur uske vaah chahta hai ki bharat ka prabhav wahan kam abhi tak jo afghanistan ki suraksha thi vaah amariki sainik kar rahe the lekin dhire dhire america apne sainik hata raha hai jab american sainik puri tarah se hut jaenge toh ek khatra hai ki taliban phir se haavi ho jaega us samay hamare ko jain nirnay lena padega kya hum apni sena bheje afghanistan ki suraksha ke liye seedhi se na bhejna shayad uchit nahi hoga aur hum sanyukt rashtra sangh se request kar sakte hain ki sanyukt rashtra sangh ki sena jaaye uske through hum apni sena dekh sakte hain lekin rus ke saath acche sambandh hai rus ka sahyog hum is mamle me le sakte hain us samay hamari kootneeti ki asal pariksha hogi ki kaise raksha ki jaaye ya hum direct beech taliban se samvaad sthapit kar sakte hain parantu yah sab thodi si cheezen hain jo aane wali hai dhanyavad

भारत और अफगानिस्तान के संबंध हमेशा से अच्छे ही रहे हैं यह ज्यादा अच्छे तब हुए थे 1980 में

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