क्या आप बता सकते हैं की बिहार के लोगों में IAS बनने का जज़्बा कहाँ से आता है?...


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घर में या उत्तर प्रदेश में भी दिखेंगे कम से कम 1 बैच में है लगभग एक तिहाई लोग जो है उसी से बिजली दोनों राज्यों से होता है तो वजह क्या है कि वहां बिहार के लोग जो है उन्होंने बताया कि उसके स्टोरीकल बैकग्राउंड भी देखेगा उसके फेसबुक में देख ऐतिहासिक रूप से यह सब जगह जहां पर किए थे तो कहीं दो तरह के लोग हैं एक तो जो वह हाथ में कमान थी तब जमीदारी से जुड़े हुए थे तू अपना पावर जो है वह सब दिखाइए को पावर वाली फीलिंग आती थी दूसरे व फर्स्ट क्लास के लोग थे जो यह देखते हैं कि हमारा ऑपरेशन हुआ है कम मतलब दबे कुचले से थे तो हम भी दी इस तरह के बन जाएंगे हम इसमें चल जाता है सिविल सर्विसेस में चले जाते हैं तो मर जाए हम इन चीजों को दूर कर पाएंगे या मतलब जाएं हम भी ऐसा रुतबा बना सकते हैं राजीव का कम आना है उसे उनको लगता कि समाज में देखोगी तो बढ़ गई मुझसे दृष्टि से देखते हैं अब कहीं पर भी देखा डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट है या असली है जिले में सबसे ज्यादा इज्जत पाता कुछ भी कहना तो लोग कहेंगे यह सब चीजें तो बच्चे देखते हैं उनको कहीं अपील करता हूं बहुत ज्यादा इंडस्ट्रियल एस्टेट है जैसे हमारा महाराष्ट्र तमिलनाडु में सब जगह अब दिखे तू क्यों आईटी के सेक्टर में चला गया यार मतलब जो देख रहा जो ज्यादा इंडस्ट्रियलिस्ट मंटालिटी के लोग हैं उनको लगता है कि वह इतना समय क्यों खराब करना निकलो और काम में लगे कुछ टेक्निकल नॉलेज में निकल लो यहां से वहां

ghar mein ya uttar pradesh mein bhi dikhenge kam se kam 1 batch mein hai lagbhag ek tihai log jo hai usi se bijli dono rajyo se hota hai toh wajah kya hai ki wahan bihar ke log jo hai unhone bataya ki uske storikal background bhi dekhega uske facebook mein dekh etihasik roop se yah sab jagah jaha par kiye the toh kahin do tarah ke log hain ek toh jo vaah hath mein kamaan thi tab jamidari se jude hue the tu apna power jo hai vaah sab dikhaaiye ko power wali feeling aati thi dusre va first class ke log the jo yah dekhte hain ki hamara operation hua hai kam matlab dabe kuchle se the toh hum bhi di is tarah ke ban jaenge hum isme chal jata hai civil services mein chale jaate hain toh mar jaaye hum in chijon ko dur kar payenge ya matlab jayen hum bhi aisa rutbaa bana sakte hain rajeev ka kam aana hai use unko lagta ki samaj mein dekhogi toh badh gayi mujhse drishti se dekhte hain ab kahin par bhi dekha district magistrate hai ya asli hai jile mein sabse zyada izzat pata kuch bhi kehna toh log kahenge yah sab cheezen toh bacche dekhte hain unko kahin appeal karta hoon bahut zyada Industrial estate hai jaise hamara maharashtra tamil nadu mein sab jagah ab dikhe tu kyon it ke sector mein chala gaya yaar matlab jo dekh raha jo zyada industrialist mantaliti ke log hain unko lagta hai ki vaah itna samay kyon kharab karna niklo aur kaam mein lage kuch technical knowledge mein nikal lo yahan se wahan

घर में या उत्तर प्रदेश में भी दिखेंगे कम से कम 1 बैच में है लगभग एक तिहाई लोग जो है उसी से

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Ashish Kumati

Director - Eklavya IAS Academy Lakshya Prakalp

0:30
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बिहार के बच्चों के बिल्ली वाले

bihar ke baccho ke billi waale

बिहार के बच्चों के बिल्ली वाले

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Udit Kumar Mishra

Founder-The Rural IAS

0:27
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यूपी बिहार के बच्चे इसलिए पैशनेट होता है क्योंकि उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं होता और पानी के लिए बहुत कुछ होता है ठीक है मध्यम वर्ग का बच्चा उतना नहीं बनता कितना गरीब घर का बच्चा बनता क्योंकि उनके पास होने के लिए कुछ है नहीं दो-दो खेत बेच के बाद चले आए वापस

up bihar ke bacche isliye passionate hota hai kyonki unke paas khone ke liye kuch nahi hota aur paani ke liye bahut kuch hota hai theek hai madhyam varg ka baccha utana nahi banta kitna garib ghar ka baccha banta kyonki unke paas hone ke liye kuch hai nahi do do khet bech ke baad chale aaye wapas

यूपी बिहार के बच्चे इसलिए पैशनेट होता है क्योंकि उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं होता और पान

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Latesh Kapadia

Director of LK Academy

0:51
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अगर आप थोड़ा रिसर्च करेंगे ना तो आपको पता लगेगा बिहार के ज्यादातर लोग सरकारी नौकरी में होते हैं जब भी बच्चा समझना शुरू कर देता है उससे यही होता है कि हां हमें आई आईएस ऑफिसर ही बनना है हमें जरूर साबित करनी है तो वहां पर ही रहता है कि वहां का बच्चा और बच्ची आईएएस बनना ही चाहते हैं इसलिए यहां पर और कोई ऐसा लॉजिक नहीं है कि वहां के बच्चे ही क्यों आईएस करना चाहते हैं या गुजरात के बच्चे क्यों आईएस नहीं करना चाहते हैं कल्चर जैसे डिफरेंट हो जाता है वैसे ही लोगों का इंटरेस्ट रेंज हो जाता है तो बिहार के लोगों में पहले से ही यह रहा है कि सरकारी नौकरियां का काफी क्रेज रहा है तो बिहार के लोगों में ज्यादातर आईएस बनने का जज्बा बहुत होता है

agar aap thoda research karenge na toh aapko pata lagega bihar ke jyadatar log sarkari naukri mein hote hain jab bhi baccha samajhna shuru kar deta hai usse yahi hota hai ki haan hamein I ias officer hi bana hai hamein zaroor saabit karni hai toh wahan par hi rehta hai ki wahan ka baccha aur bachi IAS bana hi chahte hain isliye yahan par aur koi aisa logic nahi hai ki wahan ke bacche hi kyon ias karna chahte hain ya gujarat ke bacche kyon ias nahi karna chahte hain culture jaise different ho jata hai waise hi logo ka interest range ho jata hai toh bihar ke logo mein pehle se hi yah raha hai ki sarkari naukriyan ka kaafi craze raha hai toh bihar ke logo mein jyadatar ias banne ka jajba bahut hota hai

अगर आप थोड़ा रिसर्च करेंगे ना तो आपको पता लगेगा बिहार के ज्यादातर लोग सरकारी नौकरी में होत

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Dr. P. N. Jha

TOPPERS IAS app. Sr.Facuty, IAS Coaching.

1:39

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आईएस बनने का जज्बा सिर्फ बिहार में ही नहीं बल्कि पूरे भारत के युवाओं के बीच में है इतना ही नहीं है तो आजकल उत्तर पूर्व के पहाड़ी राज्यों के बीच के में भी देखा जा सकता है हां यह बात सत्य है कि बिहार के युवाओं के बीच में सिविल सेवा के प्रति रुझान को ज्यादा है इसके पीछे जो सबसे महत्वपूर्ण कारण है वह भारत की भारत भारत नहीं बल्कि बिहार के सामाजिक चरित्र की बिहार का जो समाज है वह कुछ सामंतवादी चरित्र का है और इसमें आज प्रचार आंतरिक व्यवस्था में काफी बदलाव आया है लेकिन फिर भी आईएएस और आईपीएस जिले में शक्ति के केंद्र के रूप में देखे जाते हैं उनकी थोड़ी इच्छाशक्ति से एक भयभीत समाज में असामाजिक शक्तियों पर लगाम लगता है और जनता के बीच में अमन चैन और सुख देखा जा सकता है यह अधिकारी शीघ्र ही युवाओं के बीच में का आदर्श बन जाते हैं और देखते देखते यह आदर्श घर-घर तक पहुंचते हैं और सभी घर का सपना होता है कि उनका बच्चा भी इसी प्रकार से सिविल सेवा के जरिए आईएस आईपीएस बंद कर समाज में रहकर काम करें आदर्श प्रतिष्ठा का विषय बने इसलिए आज बिहार में आज भी युवाओं की जो सबसे पहली पसंद है और सिविल सेवा है

ias banne ka jajba sirf bihar mein hi nahi balki poore bharat ke yuvaon ke beech mein hai itna hi nahi hai toh aajkal uttar purv ke pahadi rajyo ke beech ke mein bhi dekha ja sakta hai haan yah baat satya hai ki bihar ke yuvaon ke beech mein civil seva ke prati rujhan ko zyada hai iske peeche jo sabse mahatvapurna karan hai vaah bharat ki bharat bharat nahi balki bihar ke samajik charitra ki bihar ka jo samaj hai vaah kuch samantavadi charitra ka hai aur isme aaj prachar aantarik vyavastha mein kaafi badlav aaya hai lekin phir bhi IAS aur ips jile mein shakti ke kendra ke roop mein dekhe jaate hain unki thodi ichchhaashakti se ek bhayabhit samaj mein asamajik shaktiyon par lagaam lagta hai aur janta ke beech mein aman chain aur sukh dekha ja sakta hai yah adhikari shighra hi yuvaon ke beech mein ka adarsh ban jaate hain aur dekhte dekhte yah adarsh ghar ghar tak pahunchate hain aur sabhi ghar ka sapna hota hai ki unka baccha bhi isi prakar se civil seva ke jariye ias ips band kar samaj mein rahkar kaam kare adarsh prathishtha ka vishay bane isliye aaj bihar mein aaj bhi yuvaon ki jo sabse pehli pasand hai aur civil seva hai

आईएस बनने का जज्बा सिर्फ बिहार में ही नहीं बल्कि पूरे भारत के युवाओं के बीच में है इतना ही

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Sanjay Sir

Director,Oriental Study Center

0:54
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जहां प्रशासनिक पद की महत्ता जितनी जाता है जहां विकल्प जितने सीमित है वहां लोगों की संख्या भी ज्यादा होगी और वेकेशन समर्पण भी जाता होगा निश्चित रूप से बिहार में अन्य चीजों की अपेक्षा प्रशासनिक मात्रा ज्यादा है निश्चित रूप से वहां पर प्रशासन की एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है समस्त योजनाओं को संचालित करने में और लोगों के जीवन को बदलने में निश्चित रूप से यह जो प्रशासनिक अधिकारियों की महत्ता है समाज में यह प्रेरित करती है कि आप एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई समाज की

jahan prashaasnik pad ki mahatta jitni jata hai jaha vikalp jitne simit hai wahan logo ki sankhya bhi zyada hogi aur vacation samarpan bhi jata hoga nishchit roop se bihar mein anya chijon ki apeksha prashaasnik matra zyada hai nishchit roop se wahan par prashasan ki ek bahut mahatvapurna bhumika hoti hai samast yojnao ko sanchalit karne mein aur logo ke jeevan ko badalne mein nishchit roop se yah jo prashaasnik adhikaariyo ki mahatta hai samaj mein yah prerit karti hai ki aap ek mahatvapurna bhumika nibhaai samaj ki

जहां प्रशासनिक पद की महत्ता जितनी जाता है जहां विकल्प जितने सीमित है वहां लोगों की संख्या

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Dhirendra Kumar

Retired IFS Officer/Director - Abhinav Silk Pvt. Ltd.

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टाइपिंग का ऑप्शन नहीं है ना लेकिन अब झारखंड में क्या देना चाहिए

typing ka option nahi hai na lekin ab jharkhand mein kya dena chahiye

टाइपिंग का ऑप्शन नहीं है ना लेकिन अब झारखंड में क्या देना चाहिए

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Anand Kumar Sinha

Director - Atulya IAS Academy

0:21
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ग्रामीण वेलफेयर ग्रामीण बैंक में आई है और इनकी डिमांड इनके इनके सोशल स्टेटस आगे होता है वहां पर

gramin welfare gramin bank mein I hai aur inki demand inke inke social status aage hota hai wahan par

ग्रामीण वेलफेयर ग्रामीण बैंक में आई है और इनकी डिमांड इनके इनके सोशल स्टेटस आगे होता है वह

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Mohit Yadav

Director - Darpan Academy

0:35
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टेक्नेट देखिए इस वजह से होते हैं उसका रीजन जो मुझे पता है जहां तक लगता है आपने देखा होगा कि बिहार में सबसे ज्यादा वहां से सिलेक्शन जो रहता है वहीं सजा को देखकर वहां का मतलब

teknet dekhiye is wajah se hote hai uska reason jo mujhe pata hai jaha tak lagta hai aapne dekha hoga ki bihar mein sabse zyada wahan se selection jo rehta hai wahi saza ko dekhkar wahan ka matlab

टेक्नेट देखिए इस वजह से होते हैं उसका रीजन जो मुझे पता है जहां तक लगता है आपने देखा होगा क

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Acharya Balendu Tripathi

Astrologer/ Founder - Sarvmanya Classes

0:55
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बिहार में पहले जहां पहली थी और वह बहुत से लोग तमाम सिन्हा उलझा थे उस समय कमी थी को बरामद कर ली थी उन्होंने शुरू में ध्यान दिया था और अंग्रेजों का इतिहास दर्शन तो कर दिया था जब तो बाद में वह फैमिली ज्यादा आती तो धीरे-धीरे निकल जाता है तो धीरे-धीरे बच्चे माता-पिता ज्यादा उनको फिकर थी जब की बात नहीं सभी वर्गों में जागरूकता करने लगे हम भी बेहतर कर सकते हैं अन्य प्रांतों में नहीं आई इसलिए ज्यादा मूल्य प्राप्त किया उन्होंने नए तरीके से

bihar mein pehle jaha pehli thi aur vaah bahut se log tamaam sinha uljha the us samay kami thi ko baramad kar li thi unhone shuru mein dhyan diya tha aur angrejo ka itihas darshan toh kar diya tha jab toh baad mein vaah family zyada aati toh dhire dhire nikal jata hai toh dhire dhire bacche mata pita zyada unko fikar thi jab ki baat nahi sabhi vargon mein jagrukta karne lage hum bhi behtar kar sakte hain anya praaton mein nahi I isliye zyada mulya prapt kiya unhone naye tarike se

बिहार में पहले जहां पहली थी और वह बहुत से लोग तमाम सिन्हा उलझा थे उस समय कमी थी को बरामद क

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Ram Kashyap

Director - Ram Kashyap Ias Academy

0:59
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दो कारण भी बन जाता है समय से खाना बन जाता था हमारे यहां के बच्चे क्या किसी के पास जाना भी प्यार सिंह जागरूक हो राजा साहब बोले कि सरकारी करके बात करना चाहिए और जागरूक हो रहा है तू कि उनका मार्गदर्शन है वहां कुछ लोग हैं जो पहले जानते हैं और वैसे भी साफ दिखे तो वहां पर जो कुछ लोग तो नहीं कर सकते हैं

do karan bhi ban jata hai samay se khana ban jata tha hamare yahan ke bacche kya kisi ke paas jana bhi pyar Singh jagruk ho raja saheb bole ki sarkari karke baat karna chahiye aur jagruk ho raha hai tu ki unka margdarshan hai wahan kuch log hain jo pehle jante hain aur waise bhi saaf dikhe toh wahan par jo kuch log toh nahi kar sakte hain

दो कारण भी बन जाता है समय से खाना बन जाता था हमारे यहां के बच्चे क्या किसी के पास जाना भी

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Sanjay Gupta

Founder & Director - Srishti IAS

1:05
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

रोजगार की बात करते हैं तो उत्तर प्रदेश बिहार इन जैसे राज्यों में पिछड़े राज्यों में शैक्षणिक पृष्ठभूमि चढ़ी हुई है यहां अधिकांश बच्चा जो बात करता है वह साधारण सामान्य परीक्षा पात्रता के पास करता है b.a. करता है भी काम करता है यदि यदि करता है तो उसका कोई पाठ्यक्रम के पास उसके पास एक ही निकल बसपा की सरकारी नौकरी का प्रयास करें और आज भी उत्तर भारत में सरकारी सेवा का बहुत ही महत्वपूर्ण है जितना महत्त्व लोगों का पालन होता कि नहीं वह सरकारी नौकरी तो बैंक का कर्मचारी है या सिविल सेवा का कर्मचारी है यह लोक सेवा आयोग का कर्मचारी है इसका मतलब हमेशा याद आ रहा है और संभव पर आगे भी ज्यादा रहे

rojgar ki baat karte hain toh uttar pradesh bihar in jaise rajyo mein pichade rajyo mein shaikshnik prishthbhumi chadhi hui hai yahan adhikaansh baccha jo baat karta hai vaah sadhaaran samanya pariksha patrata ke paas karta hai b a karta hai bhi kaam karta hai yadi yadi karta hai toh uska koi pathyakram ke paas uske paas ek hi nikal BSP ki sarkari naukri ka prayas kare aur aaj bhi uttar bharat mein sarkari seva ka bahut hi mahatvapurna hai jitna mahatva logo ka palan hota ki nahi vaah sarkari naukri toh bank ka karmchari hai ya civil seva ka karmchari hai yah lok seva aayog ka karmchari hai iska matlab hamesha yaad aa raha hai aur sambhav par aage bhi zyada rahe

रोजगार की बात करते हैं तो उत्तर प्रदेश बिहार इन जैसे राज्यों में पिछड़े राज्यों में शैक्षण

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Chandan Priya

Founder - Perfection IAS

1:04
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मिट्टी में जो हम लोग जो भी चीजें ग्रहण करते हैं वह आसमां से गर्म करते हैं बचपन से ही जाता है वह लोग जो हमारे लिए कुछ हेल्प कर दें यह इसका संकेत करता है लोगों के मन में भी होती है कि हम समाज दीपिका ने हमारे

mitti mein jo hum log jo bhi cheezen grahan karte hain vaah asaman se garam karte hain bachpan se hi jata hai vaah log jo hamare liye kuch help kar de yah iska sanket karta hai logo ke man mein bhi hoti hai ki hum samaj deepika ne hamare

मिट्टी में जो हम लोग जो भी चीजें ग्रहण करते हैं वह आसमां से गर्म करते हैं बचपन से ही जाता

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

3:18
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बिहार के लोगों के अंदर आईएएस बनने का जज्बा कहां से आते हैं कि बिहार के लोग बहुत चतुर चालाक होते समय आने पर किसी को भी चकमा देने से पीछे नहीं हटते बिहार के लोग मैं यह कहूं अपने लक्ष्य को पाने के लिए आपके चरणों में लोड लोड भी लगा लेंगे क्यों नहीं कोई संकोच नहीं दूसरी बार उन्हें अपने आप को मैनेज करना बहुत अच्छी तरीके से आता है एक छोटे से कमरे में आठ-दस लोग किराए में रह लेंगे वह उनमें से दो खाना बनाने का स्टाइल कर लेगा यानी कम पैसे में वह जुनून के साथ लग जाएंगे इसके अलावा अगर मजदूरी की दर और योग्यता की कीमत अगर इंसान को उसके श्रम के बनने में मिलने वाली कीमत है तो उसको निम्न स्तर पर लाने की मुख्य श्रेय इन बिहार के लोगों को जाते हैं क्योंकि किसी भी कीमत पर काम करने को तैयार हो जाते हैं तो एक काबिल इंसान जो है वह अपनी उचित कीमत नहीं पापा का मकसद क्या है कि हमें सिर्फ यह करना है और जहां से भी पैसे आते हैं कैसी भी साधन आते हैं यह साधन जुटाने इसमें कोई संदेह नहीं बाकी लोग संकोच रणजी तक में बैठे रह जाते हैं यह मजदूरी करके अपने लक्ष्य को पाने के लिए पड़ जाते हैं और इसलिए यह कहा जाता है और यह बात ठीक है कि इनके पास जुनून हो जाता है जुनून केवल स्वार्थ तक होता है इनकी लक्ष्य तक होता है यह आगे बढ़ जाते हैं तुझको मैं बहुत धन्यवाद कहूंगा लेकिन आगे बढ़ने के बाद एक किसी के भी साथ समर्थन सहयोग सद्भाव की भावना से खड़े नहीं होते इसका चीज नहीं हुआ कि मैं बिहार के लोगों का अपमान कर रहा हूं या बिहार के लोगों की कमियां बता रहा हूं मैं बिहार के लोगों के अस्तित्व और व्यक्तित्व की कहानी बताएं जो 100000 परसेंट सही है हंड्रेड परसेंट आप आजमा कर देख लीजिए अगर जहां कहीं गलत साबित होता है तो निसंकोच आपने व्यूज रखिए सभ्य भाषा में रखिए मैं शब्द भाषा में जवाब दूंगा और यह साबित भी कर लूंगा कि जो मैं स्टेटमेंट 100000 परसेंट सही और मैंने कहा उतावले पन्ने पर या बिट्टू की पल में विद्रोह की भावना कर कोई गलत उठाना मत दीजिए

bihar ke logo ke andar IAS banne ka jajba kahaan se aate hain ki bihar ke log bahut chatur chalak hote samay aane par kisi ko bhi chakma dene se peeche nahi hatate bihar ke log main yah kahun apne lakshya ko paane ke liye aapke charno mein load load bhi laga lenge kyon nahi koi sankoch nahi dusri baar unhe apne aap ko manage karna bahut achi tarike se aata hai ek chote se kamre mein aath das log kiraye mein reh lenge vaah unmen se do khana banane ka style kar lega yani kam paise mein vaah junun ke saath lag jaenge iske alava agar mazdoori ki dar aur yogyata ki kimat agar insaan ko uske shram ke banne mein milne wali kimat hai toh usko nimn sthar par lane ki mukhya shrey in bihar ke logo ko jaate hain kyonki kisi bhi kimat par kaam karne ko taiyar ho jaate hain toh ek kaabil insaan jo hai vaah apni uchit kimat nahi papa ka maksad kya hai ki hamein sirf yah karna hai aur jaha se bhi paise aate hain kaisi bhi sadhan aate hain yah sadhan jutane isme koi sandeh nahi baki log sankoch ranji tak mein baithe reh jaate hain yah mazdoori karke apne lakshya ko paane ke liye pad jaate hain aur isliye yah kaha jata hai aur yah baat theek hai ki inke paas junun ho jata hai junun keval swarth tak hota hai inki lakshya tak hota hai yah aage badh jaate hain tujhko main bahut dhanyavad kahunga lekin aage badhne ke baad ek kisi ke bhi saath samarthan sahyog sadbhav ki bhavna se khade nahi hote iska cheez nahi hua ki main bihar ke logo ka apman kar raha hoon ya bihar ke logo ki kamiyan bata raha hoon main bihar ke logo ke astitva aur vyaktitva ki kahani bataye jo 100000 percent sahi hai hundred percent aap ajama kar dekh lijiye agar jaha kahin galat saabit hota hai toh nisankoch aapne Views rakhiye sabhya bhasha mein rakhiye main shabd bhasha mein jawab dunga aur yah saabit bhi kar lunga ki jo main statement 100000 percent sahi aur maine kaha utavale panne par ya bittu ki pal mein vidroh ki bhavna kar koi galat uthana mat dijiye

बिहार के लोगों के अंदर आईएएस बनने का जज्बा कहां से आते हैं कि बिहार के लोग बहुत चतुर चालाक

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

एक्स वीडियो नॉटी बहुत ज्यादा हार्डवर्क इसलिए अब इतनी बड़ी तड़पाती मासूम आते हैं और जो छोटी-छोटी में पढ़ते हैं दिखाइए विक्रम की तैयारी तैयारी करने बिहारी बहुत ज्यादा होती है इनकी ज्यादा होती है वहां क्लिक कर निकलती है कि बिहारी यारा तेरी यारी को

x video naughty bahut zyada hardwork isliye ab itni badi tadpati masoom aate hain aur jo choti choti mein padhte hain dikhaaiye vikram ki taiyari taiyari karne bihari bahut zyada hoti hai inki zyada hoti hai wahan click kar nikalti hai ki bihari yaara teri yaari ko

एक्स वीडियो नॉटी बहुत ज्यादा हार्डवर्क इसलिए अब इतनी बड़ी तड़पाती मासूम आते हैं और जो छोटी

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Shashikant Mani Tripathi

Yoga Expert | Life Coach

3:00
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निश्चित ही बिहार के लोगों में आईएएस बनने का जज्बा उनके चाहने से आता है किसी भी चीज को आप प्राप्त तभी कर पाते हैं जब आप उसे चाहते हो आईएस भारत का सबसे प्रतिष्ठित सेवा है जहां पर पहुंचने के बाद आपके पीछे के बैकग्राउंड को भूलकर समाज में सबसे अधिक इज्जत आपको मिलती है किसी जिले के कलेक्टर व एसपी को उस जिले में सबसे अधिक सम्मानित माना जाता है तो इस सेवा में आने का क्या उद्देश्य है तो सम्मान पाने की इच्छा भी लोगों ने हो तभी वह उस तरफ मुखर होंगे तो जीवन में कई बार लोगों के उद्देश्य अलग-अलग होता है कुछ लोगों का भी टोटा है कि मुझे गिफ्ट पैसे कमाने हैं बड़ी जस्सी डालनी है या नौकरी करना है तो नौकरी में कोई भी नौकरी करना है जिससे हम अपना भरण-पोषण कर ले अपनी रुचि के अनुसार करना है नौकरी कितने सम्मान भी हो और कार्य करने का अवसर भी हो तो निश्चित ही को नौकरी आईएस की हो सकती है वह सर्विस पीसीएस की हो सकती है इस तरह वह लोग विशेष रूप से सक्रिय होते हैं जिनको सम्मान पाने की इच्छा हो और कुछ नया करने का जज्बा हो समंता इंटरव्यू और पूछा जाता है कि आप आईएस बनकर क्या करना चाहते हैं क्यों बनना चाहते हैं लोग कहते हैं कि हम कुछ नया करना चाहते हैं सोसाइटी को देना चाहते हैं तो सोसाइटी को देने का भाव तो होता है सम्मान का भाव सकता है और यह भी हो सकता है कि हम अपनी पीढ़ियों की गुलामी यात्रियों की हीनता की भावना को दूर कर सके इस सेवा में आने के बाद और बिहार में जमीदार लोग रहे हैं उसमें दो तबके के लोग तो रहे ही हैं एक कहीं शोषक रहा है एक कभी सोच रहा है कि बिहार में ही नहीं है तो सब जगह रहा है जिन लोगों ने ऐसा महसूस किया कि अगर हमें दबाया गया या हम बहुत विकसित नहीं हो पाए तो वहीं चुनाव में आ कर के अपने उस भावना को दूर करना चाहते हैं या जो लोग इस भाव के साथ थे कि हमारी जिम्मेदारी दक्षिण गई लेकिन फिर भी हम सम्मानित होकर जीवन कैसे जिए तो उठाना चाहते हैं तो ऐसा कारण है कि सम्मान के साथ कुछ करने कुछ नया करने की भावना जिम में होती है वह निश्चित ही इन सेवाओं के विपरीत होते हैं और उसे प्राप्त करना चाहते हैं और बाकी स्टेट में चुक इंडस्ट्री का काफी विकास हो चुका है और आसानी से लोगों को जॉब मिल जाता है तो जॉब ओरिएंटेड कोर्स लो करना चाहते हैं बजाज तरफ अपना दिमाग लगाने की वह अपनी तैयारी उस्तव करते हैं तो बिहार यूपी से अधिकतम लोगों के होने की एक वजह है कि उनके अंदर सम्मान के साथ साथ समाज में कुछ कंट्रीब्यूट करने की जिज्ञासा अन्य प्रांतों के अपेक्षा ज्यादा है इस नाते वह लोग ऐसी सेवाओं को आप करते हैं और उसमें अधिक से अधिक अपनी भागीदारी प्रस्तुत करते हैं धन्यवाद

nishchit hi bihar ke logo mein IAS banne ka jajba unke chahne se aata hai kisi bhi cheez ko aap prapt tabhi kar paate hai jab aap use chahte ho ias bharat ka sabse pratishthit seva hai jaha par pahuchne ke baad aapke peeche ke background ko bhulkar samaj mein sabse adhik izzat aapko milti hai kisi jile ke collector va SP ko us jile mein sabse adhik sammanit mana jata hai toh is seva mein aane ka kya uddeshya hai toh sammaan paane ki iccha bhi logo ne ho tabhi vaah us taraf mukhar honge toh jeevan mein kai baar logo ke uddeshya alag alag hota hai kuch logo ka bhi totta hai ki mujhe gift paise kamane hai baadi jassi daalni hai ya naukri karna hai toh naukri mein koi bhi naukri karna hai jisse hum apna bharan poshan kar le apni ruchi ke anusaar karna hai naukri kitne sammaan bhi ho aur karya karne ka avsar bhi ho toh nishchit hi ko naukri ias ki ho sakti hai vaah service pcs ki ho sakti hai is tarah vaah log vishesh roop se sakriy hote hai jinako sammaan paane ki iccha ho aur kuch naya karne ka jajba ho samanta interview aur poocha jata hai ki aap ias bankar kya karna chahte hai kyon bana chahte hai log kehte hai ki hum kuch naya karna chahte hai society ko dena chahte hai toh society ko dene ka bhav toh hota hai sammaan ka bhav sakta hai aur yah bhi ho sakta hai ki hum apni peedhiyon ki gulaami yatriyon ki hinata ki bhavna ko dur kar sake is seva mein aane ke baad aur bihar mein jamidaar log rahe hai usme do tabke ke log toh rahe hi hai ek kahin shoshak raha hai ek kabhi soch raha hai ki bihar mein hi nahi hai toh sab jagah raha hai jin logo ne aisa mehsus kiya ki agar hamein dabaya gaya ya hum bahut viksit nahi ho paye toh wahi chunav mein aa kar ke apne us bhavna ko dur karna chahte hai ya jo log is bhav ke saath the ki hamari jimmedari dakshin gayi lekin phir bhi hum sammanit hokar jeevan kaise jiye toh uthna chahte hai toh aisa karan hai ki sammaan ke saath kuch karne kuch naya karne ki bhavna gym mein hoti hai vaah nishchit hi in sewaon ke viprit hote hai aur use prapt karna chahte hai aur baki state mein chuke industry ka kaafi vikas ho chuka hai aur aasani se logo ko job mil jata hai toh job oriented course lo karna chahte hai bajaj taraf apna dimag lagane ki vaah apni taiyari ustav karte hai toh bihar up se adhiktam logo ke hone ki ek wajah hai ki unke andar sammaan ke saath saath samaj mein kuch kantribyut karne ki jigyasa anya praaton ke apeksha zyada hai is naate vaah log aisi sewaon ko aap karte hai aur usme adhik se adhik apni bhagidari prastut karte hai dhanyavad

निश्चित ही बिहार के लोगों में आईएएस बनने का जज्बा उनके चाहने से आता है किसी भी चीज को आप प

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Anil Ramola

Yoga Instructor | Engineer

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बिहार का जो राज्य हमारे देश को सबसे लायंस देने वाला एकमात्र राज्य जहां से हर वर्ष सबसे ज्यादा आईएएस होते हैं कुछ लोगों में इतना ना हमको पता है कि अगर में कुछ करना है तो आइए विकल्प जिसके द्वारा कि हम कुछ प्राप्त कर सकते हैं वहां पर रोते वह काफी कम है और बाकी जो स्ट्रक्चर है विकास का उपयोग कम है इसीलिए बच्चों को यह लगता है कि सिर्फ पढ़ाई एक जरिया है एक आईएस एक ऐसा माध्यम है जिसके जीवन में कुछ बात कर सकते हैं सफल बन सकते हैं और एक अच्छे क्वेश्चन जा सकते हैं जो एटमॉस्फेयर है वहां काफी हद तक इसके लिए जिम्मेदार है इस लोक नीति का अर्थ

bihar ka jo rajya hamare desh ko sabse lions dene vala ekmatra rajya jaha se har varsh sabse zyada IAS hote hain kuch logo mein itna na hamko pata hai ki agar mein kuch karna hai toh aaiye vikalp jiske dwara ki hum kuch prapt kar sakte hain wahan par rote vaah kaafi kam hai aur baki jo structure hai vikas ka upyog kam hai isliye baccho ko yah lagta hai ki sirf padhai ek zariya hai ek ias ek aisa madhyam hai jiske jeevan mein kuch baat kar sakte hain safal ban sakte hain aur ek acche question ja sakte hain jo etamasfeyar hai wahan kaafi had tak iske liye zimmedar hai is lok niti ka arth

बिहार का जो राज्य हमारे देश को सबसे लायंस देने वाला एकमात्र राज्य जहां से हर वर्ष सबसे ज्य

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C M JHA

Engineer

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vedprakash singh

Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका सवाल है कि क्या आप बता सकते हैं कि बिहार के लोगों में इस बन्नी का जज्बा कहां से आते हैं मैं आपको बताना चाहूंगा कि बिहार और यूपी से जगत राज का एग्जाम जो कि कल थे इसका कारण है कि बिहार और यूपी में बेरोजगारी है अब इस गाड़ी के कारण 3 लोग पढ़े लिखे होते हैं जो लोग संघर्ष करते हुए ज्यादातर तेज होते हैं दिमाग उसकी तेज होती है क्योंकि जो शादी की मेहनत करते हैं उसका शरीर ठीक रहेगा जो मानसिक मेहनत करते उसका दिमाग से रहे हो तो होता ही है ना कि वहां बिहार या यूपी में जमींदारी प्रथा थी तो लोग जमीन वगैरह की इसके बाद पहले बंधुआ मजदूर होते थे जो कि एक दूसरे को अपने अंदर काम पर लगाते थे उसके बच्चे उसके बच्चे उसके बच्चे उसके अंदर काम करते थे लेकिन छुटकारा नहीं था और बदले में बहुत कम ही रकम भूत कबीरा कब मिलती थी और इसके बाद और भी बातें थी कि लोग मजदूरी वाली बातें थी लोग गरीब थे लोग सोचते थे कि जमीनी मामला जाति आवासीय भूत पुत्र की बातें थी तो इन सब बातों में यह होता था जाति पाति का भेदभाव था इस देश में लोग को एक बार थोड़ी जात बना दो पूरी जिंदगी उठने का नाम नहीं है क्योंकि छोटी जात हो गया तो तो तो पूरी जिंदगी में भगवान बना कर भेजे उसे वह तो लेकिन विदेशों में ऐसी बात नहीं है विदेश में है कि वहां पर वर्ग होते हैं उसे वर्ग नीचे और मतलब गरीब अमीर गरीब आदमी तो होता ही है इसके बाद यह भी होता है कि जातिवादी भी जो एक बार बनने के बाद दूसरा नहीं बन पाता है इसलिए यार कि लोग संघर्ष करना चाहते हैं सोते थे कि एक बार आईएस बन जाए तो फिर झज्जर की नहीं है इसलिए 122 में कम से कम तिहाई मतलब क्या 10 में कम से कम तीन 10 में से 3 बच्चे जरूर आइए एग्जाम निकालने का सोचते वैसे तो 6:00 तक सोचते हैं सोचो 10 की होती है लेकिन 3:00 तक आ जाती एक जरूरी काली लेते हैं यादों पक्की कर लेती हूं 3:00 तक निकाल ले तेरी मेहनत करे तो पक्की बात है ऐसी बात होती है गाली देती हो इसलिए बिहार के लोग ज्यादा आईएएस बनने का जज्बा आता है उससे यह जमीदारी प्रथा यह जो पहले थी जब भी एक बार जमीन दर्द स्वर बिकती थी अवश्य बात नहीं नहीं विश्वास शिक्षा नीति पहले और जमीन सस्ते थे लोगों खाने पीने की यदि थी वैसे भी बिहार में अभी भी बेरोजगारी ज्यादा है वैसे तो बिहार में अब सर बहुत है काम के बिहार विजेता कबूतर दूसरी जगह नहीं है बहुत काम के अवसर है कि बिहार के लोग बिहार में काम नहीं करना चाहते दूसरे का करते ऐसा नहीं कि बिहार में काम में बहुत काम के अवसर है और जगह-जगह मॉल सारे कुछ खुल रहे हैं लोग उसमें काम करने के लिए जा रहे काम करने के लिए साइकिल हो रहे हैं इसीलिए तो अच्छी बात है तेरी बिहार के लोग आगे बढ़ने में अपने जज्बात ले रहे हैं

aapka sawaal hai ki kya aap bata sakte hai ki bihar ke logo mein is bani ka jajba kahaan se aate hai aapko bataana chahunga ki bihar aur up se jagat raj ka exam jo ki kal the iska karan hai ki bihar aur up mein berojgari hai ab is gaadi ke karan 3 log padhe likhe hote hai jo log sangharsh karte hue jyadatar tez hote hai dimag uski tez hoti hai kyonki jo shadi ki mehnat karte hai uska sharir theek rahega jo mansik mehnat karte uska dimag se rahe ho toh hota hi hai na ki wahan bihar ya up mein jamindari pratha thi toh log jameen vagera ki iske baad pehle bandhua majdur hote the jo ki ek dusre ko apne andar kaam par lagate the uske bacche uske bacche uske bacche uske andar kaam karte the lekin chhutkara nahi tha aur badle mein bahut kam hi rakam bhoot kabira kab milti thi aur iske baad aur bhi batein thi ki log mazdoori wali batein thi log garib the log sochte the ki zameeni maamla jati aavaasiya bhoot putra ki batein thi toh in sab baaton mein yah hota tha jati pati ka bhedbhav tha is desh mein log ko ek baar thodi jaat bana do puri zindagi uthane ka naam nahi hai kyonki choti jaat ho gaya toh toh toh puri zindagi mein bhagwan bana kar bheje use vaah toh lekin videshon mein aisi baat nahi hai videsh mein hai ki wahan par varg hote hai use varg niche aur matlab garib amir garib aadmi toh hota hi hai iske baad yah bhi hota hai ki jativadi bhi jo ek baar banne ke baad doosra nahi ban pata hai isliye yaar ki log sangharsh karna chahte hai sote the ki ek baar ias ban jaaye toh phir jhajjar ki nahi hai isliye 122 mein kam se kam tihai matlab kya 10 mein kam se kam teen 10 mein se 3 bacche zaroor aaiye exam nikalne ka sochte waise toh 6 00 tak sochte hai socho 10 ki hoti hai lekin 3 00 tak aa jaati ek zaroori kali lete hai yaadon pakki kar leti hoon 3 00 tak nikaal le teri mehnat kare toh pakki baat hai aisi baat hoti hai gaali deti ho isliye bihar ke log zyada IAS banne ka jajba aata hai usse yah jamidari pratha yah jo pehle thi jab bhi ek baar jameen dard swar bikti thi avashya baat nahi nahi vishwas shiksha niti pehle aur jameen saste the logo khane peene ki yadi thi waise bhi bihar mein abhi bhi berojgari zyada hai waise toh bihar mein ab sir bahut hai kaam ke bihar vijeta kabootar dusri jagah nahi hai bahut kaam ke avsar hai ki bihar ke log bihar mein kaam nahi karna chahte dusre ka karte aisa nahi ki bihar mein kaam mein bahut kaam ke avsar hai aur jagah jagah mall saare kuch khul rahe hai log usme kaam karne ke liye ja rahe kaam karne ke liye cycle ho rahe hai isliye toh achi baat hai teri bihar ke log aage badhne mein apne jazbaat le rahe hain

आपका सवाल है कि क्या आप बता सकते हैं कि बिहार के लोगों में इस बन्नी का जज्बा कहां से आते ह

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#technicalmaulik

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हमारी बिहार में जो आईएएस बनने का सपना और जो उच्च पद की जो नौकरी पाने की जो एक ख्वाब होता है वह उनकी गरीबी उनकी जो वातावरण है उनके वहां का वह और उनकी जो समस्याएं परेशानी उन को देखते हुए उनकी मनोवृत्ति में एक जज्बा उत्पन्न होता है कि वह भी एक आईएएस अफसर बने और अपनी वातावरण या वह जहां रह रहे हैं जहां पर जो परेशानियां हैं उनको अपने कर्तव्य द्वारा वहां की परेशानियों को हल करने का एक तरीका अपना सकें या उसको फॉलो करके वहां की परेशानियों को खत्म कर सके जिसके मन में रहता है उसमें बहुत ही बड़ा प्रभाव पड़ता है हमारे वातावरण का क्योंकि हम कभी सेफ जोन में रहते हैं और एग्जांपल जैसी के कमरे मैं आराम से बैठे हैं तो हम कभी बाहर नहीं जाना चाहेंगे और जब तुम बाहर नहीं जाएंगे तो फिर बाहर हम यह नहीं देख सकेंगे कि हम तो सुख में है लेकिन जो बाहर और लोग भी हैं क्या वह सुख में है तो यह सिम में ऐसा होता है कि हम एक दूसरे के भावनाओं की कद्र हमें नहीं कर पाते हैं तो लेकिन जो इंसान पहले से तप रहा है तो मुझे नहीं चाहता कि मैं तपा हूं तो दूसरा इतने तब को सह सके इसलिए हमारे बिहार में हमारे ऑल ओवर इंडिया में कहीं भी अगर जैसे उस पथ की नौकरियों के लोग सपने देखते हैं तो वह अपने वातावरण को ध्यान में रखते हुए यह सपना देखते हैं वह अपने करतब की पूर्ति को करने के लिए ऐसे सपने देखते हैं

hamari bihar me jo IAS banne ka sapna aur jo ucch pad ki jo naukri paane ki jo ek khwaab hota hai vaah unki garibi unki jo vatavaran hai unke wahan ka vaah aur unki jo samasyaen pareshani un ko dekhte hue unki manovritti me ek jajba utpann hota hai ki vaah bhi ek IAS officer bane aur apni vatavaran ya vaah jaha reh rahe hain jaha par jo pareshaniya hain unko apne kartavya dwara wahan ki pareshaniyo ko hal karne ka ek tarika apna sake ya usko follow karke wahan ki pareshaniyo ko khatam kar sake jiske man me rehta hai usme bahut hi bada prabhav padta hai hamare vatavaran ka kyonki hum kabhi safe zone me rehte hain aur example jaisi ke kamre main aaram se baithe hain toh hum kabhi bahar nahi jana chahenge aur jab tum bahar nahi jaenge toh phir bahar hum yah nahi dekh sakenge ki hum toh sukh me hai lekin jo bahar aur log bhi hain kya vaah sukh me hai toh yah sim me aisa hota hai ki hum ek dusre ke bhavnao ki kadra hamein nahi kar paate hain toh lekin jo insaan pehle se tap raha hai toh mujhe nahi chahta ki main tapa hoon toh doosra itne tab ko sah sake isliye hamare bihar me hamare all over india me kahin bhi agar jaise us path ki naukriyon ke log sapne dekhte hain toh vaah apne vatavaran ko dhyan me rakhte hue yah sapna dekhte hain vaah apne kartab ki purti ko karne ke liye aise sapne dekhte hain

हमारी बिहार में जो आईएएस बनने का सपना और जो उच्च पद की जो नौकरी पाने की जो एक ख्वाब होता ह

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