इंसान जिस धर्म में पैदा होता है उसी में अक्सर मरता है जबकि उस को पता नहीं होता की वह धर्म सही है या गलत, आपकी राय?...


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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

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आपने जैसा कहा कि जहां जन्म उत्तम ही मरता है कोई राय नहीं है ढंग बदलने से इंसान का ज्ञान नहीं मिलता इंसान अपने ज्ञान से धन को अच्छा या बुरा मनाता जेसीबी चलने आपका जन्म हुआ है उसमें विशेषताएं उत्पन्न करें ग्रुप की मर्यादा का पालन करें उनकी सरकार लोगों को बताएं पहले खुशी के प्रवासियों की अच्छाइयां बताएं अगर कोई कमी है तो स्त्रियों को चेकिंग और लोगों को उस कमियों को चाटने का आपके स्वास्थ्य में यह तो हर इंसान कर सकता है उसी पर निर्भर करता है ठंड सही है अपना घर में कोई गलत नहीं होता हमारी सोच गलत होती है क्योंकि हम तुमको अपने अनुसार उपयोग में लाते हैं इसलिए हम धर्म को ही गलत साबित कर देते हैं हमेशा इंसान ईंधन का नक्षत्र और इंसान ईंधन का रक्षक

aapne jaisa kaha ki jaha janam uttam hi marta hai koi rai nahi hai dhang badalne se insaan ka gyaan nahi milta insaan apne gyaan se dhan ko accha ya bura manata JCB chalne aapka janam hua hai usme visheshtayen utpann kare group ki maryada ka palan kare unki sarkar logo ko bataye pehle khushi ke pravaasiyon ki achaiya bataye agar koi kami hai toh sthreeyon ko checking aur logo ko us kamiyon ko chatne ka aapke swasthya me yah toh har insaan kar sakta hai usi par nirbhar karta hai thand sahi hai apna ghar me koi galat nahi hota hamari soch galat hoti hai kyonki hum tumko apne anusaar upyog me laate hain isliye hum dharm ko hi galat saabit kar dete hain hamesha insaan indhan ka nakshtra aur insaan indhan ka rakshak

आपने जैसा कहा कि जहां जन्म उत्तम ही मरता है कोई राय नहीं है ढंग बदलने से इंसान का ज्ञान नह

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Dinesh Mishra

Theosophists | Accountant

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इंसान जिस घर में पैदा होता है उसी में अक्सर मरता है जबकि उसको पता नहीं होता कि वह धर्म सही है या गलत आप की राय देखिए धर्म जो है वह अपने आप में सही हुआ करता है धर्म जो है वह कभी भी गलत नहीं हुआ करता है वह हमेशा अनीश की बात किया करता है और नीता चरण क्या करता है और नीच का ही संवाद किया करता है

insaan jis ghar me paida hota hai usi me aksar marta hai jabki usko pata nahi hota ki vaah dharm sahi hai ya galat aap ki rai dekhiye dharm jo hai vaah apne aap me sahi hua karta hai dharm jo hai vaah kabhi bhi galat nahi hua karta hai vaah hamesha aneesh ki baat kiya karta hai aur neeta charan kya karta hai aur neech ka hi samvaad kiya karta hai

इंसान जिस घर में पैदा होता है उसी में अक्सर मरता है जबकि उसको पता नहीं होता कि वह धर्म सही

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Bk Arun Kaushik

Youth Counselor Motivational Speaker

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Shiv Shankar

Social Worker

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धर्म ही तो सारे फसाद की जड़ है सबसे बड़ा धर्म मानवता का है इंसानियत का जब यह सृष्टि बनी तो उसमें जाति धर्म मजा है कुछ नहीं था नर नारी करके सृष्टि की उत्पत्ति हुई और धीरे-धीरे समाज में अज्ञानता के कारण यह सब वर्ण व्यवस्था जाति धर्म संप्रदाय बने जो वास्तव में आज कहते तो है सबका मालिक एक है लेकिन वह एक कौन है ना समझने की वजह से आज भावना से ग्रसित होकर छोटे-बड़े ऊंच-नीच मैं बैठ गए हैं लेकिन जिस दिन उस एक की की अनुभूति और ज्ञान उसे परमात्मा को जान लेंगे तो सारा भरम खत्म हो जाएगा

dharm hi toh saare fasad ki jad hai sabse bada dharm manavta ka hai insaniyat ka jab yah shrishti bani toh usme jati dharm maza hai kuch nahi tha nar nari karke shrishti ki utpatti hui aur dhire dhire samaj me agyanata ke karan yah sab varn vyavastha jati dharm sampraday bane jo vaastav me aaj kehte toh hai sabka malik ek hai lekin vaah ek kaun hai na samjhne ki wajah se aaj bhavna se grasit hokar chote bade unch neech main baith gaye hain lekin jis din us ek ki ki anubhuti aur gyaan use paramatma ko jaan lenge toh saara bharm khatam ho jaega

धर्म ही तो सारे फसाद की जड़ है सबसे बड़ा धर्म मानवता का है इंसानियत का जब यह सृष्टि बनी तो

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ज्योतिषी झा मेरठ (Pt. K L Shashtri)

Astrologer Jhaमेरठ,झंझारपुर और मुम्बई

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Manish Bhargava

Trainer/ Mentor in Delhi education deptt.

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इंसान जिस धर्म में पैदा होता है उसी धर्म में अक्सर मरता है जबकि उसको पता ही नहीं होता कोई धर्म सही है फोन बंद कर लिया कोई भी कुछ स्तर में जो भी है वह कर लिया और बस ठीक है उनसे कुछ लोग ऐसे होते हैं जो धर्म की गहराई को समझने की कोशिश करते हैं उन्हें पता चलता है कि ऐसे कम ही लोग होते हैं जिस चीज को स्वीकार करते हैं अन्यथा अधिकांश लोग इस चीज में मतलब ही नहीं करता जिंदगी जी नौकरी करी बड़े-बड़े परिवार में जिया पता ही नहीं चला कब समय निकल गया अधिकांश लोगों का धर्म सिर्फ और सिर्फ उनके उनके लिए और मल्टी ही है जिसे वह अपनापन और दूसरे धर्म होते तो भी ऐसी फॉरवर्ड देती किसी और तीसरे मौत हो गई है सही रहता उनको फर्क है उसको अच्छे से समझते हैं स्वीकार करते हैं और दूसरों को भी बता दो और हां नशे में ही जीते हैं और चले जाते हैं हम कोलंबस को देख सकते हैं इस ने अमेरिका की खोज की थी और उसे ही लगा था कि उन्हें इंडिया की खोज कर ली और मरते दम तक उसका पता चल ही नहीं पाया कि निश्चित रूप से कई लोग चले जाते हैं

insaan jis dharm me paida hota hai usi dharm me aksar marta hai jabki usko pata hi nahi hota koi dharm sahi hai phone band kar liya koi bhi kuch sthar me jo bhi hai vaah kar liya aur bus theek hai unse kuch log aise hote hain jo dharm ki gehrai ko samjhne ki koshish karte hain unhe pata chalta hai ki aise kam hi log hote hain jis cheez ko sweekar karte hain anyatha adhikaansh log is cheez me matlab hi nahi karta zindagi ji naukri kari bade bade parivar me jiya pata hi nahi chala kab samay nikal gaya adhikaansh logo ka dharm sirf aur sirf unke unke liye aur multi hi hai jise vaah apnapan aur dusre dharm hote toh bhi aisi forward deti kisi aur teesre maut ho gayi hai sahi rehta unko fark hai usko acche se samajhte hain sweekar karte hain aur dusro ko bhi bata do aur haan nashe me hi jeete hain aur chale jaate hain hum columbus ko dekh sakte hain is ne america ki khoj ki thi aur use hi laga tha ki unhe india ki khoj kar li aur marte dum tak uska pata chal hi nahi paya ki nishchit roop se kai log chale jaate hain

इंसान जिस धर्म में पैदा होता है उसी धर्म में अक्सर मरता है जबकि उसको पता ही नहीं होता कोई

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Santosh Singh indrwar

Business Consultant & Life Couch

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दोस्त संसार में एक ही धर्म है और वह है हिंदू धर्म संसार में जितने भी मनुष्य जन्म लेते हैं हिंदू धर्म में ही जन्म लेते हैं और हिंदू बनकर ही जन्म लेते हैं लेकिन उनके घर परिवार वाले उनके आगे आस-पड़ोस के लोग उसे उन्हें अपने धर्म मतलब एक विशेष धर्म की ओर खींच के ले जाते हैं जो उनके दिमाग में पहले से बसा हुआ है उनके उन्होंने पहले से उसे माना हुआ है उसका अनुसरण किया हुआ है

dost sansar me ek hi dharm hai aur vaah hai hindu dharm sansar me jitne bhi manushya janam lete hain hindu dharm me hi janam lete hain aur hindu bankar hi janam lete hain lekin unke ghar parivar waale unke aage aas pados ke log use unhe apne dharm matlab ek vishesh dharm ki aur khinch ke le jaate hain jo unke dimag me pehle se basa hua hai unke unhone pehle se use mana hua hai uska anusaran kiya hua hai

दोस्त संसार में एक ही धर्म है और वह है हिंदू धर्म संसार में जितने भी मनुष्य जन्म लेते हैं

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Acharya shree guru ji vyas /call-8898408005

Shreemad Bhagwat Katha, Ramkatha, Bhajan Sandhya Program , Mata Ki Chowki, Jagran , all Types Devosnal & Festival Program Contact Us- 8898408005

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इंसान किस धर्म में पैदा होता है उसी में अक्सर मरता है जबकि उसको पता नहीं होता कि वह धर्म सही है या गलत आप की राय हरिओम इंसान जब भी पैदा होता है कोई बालक जब पैदा होता है तो वह किसी न किसी के घर में पैदा होता उसका कोई माता-पिता होता ही है और अगर माता-पिता किसी धर्म को न मानकर के नास्तिक है तो भी बच्चे का जन्म तो हुआ है लेकिन अक्सर दुनिया में कुछ ही क्षेत्र ऐसे हैं जो किसी भी धर्म को नहीं मानते हैं कुछ लोग धर्म को माने अथवा न माने लेकिन उनके माता-पिता का जो धर्म है उसी परिवेश में पैदा होते हैं उसी में बढ़ते हैं लेकिन वह धार्मिक मान्यताओं को बहुत ज्यादा ना तो तू लेते हैं और ना ही उसमें शरीक होते हैं वह अपने काम से काम रखते हैं और परंपराओं के निर्वाह के लिए थोड़ा बहुत उसमें सम्मिलित हो जाते हैं धर्म सही है या गलत धर्म जिसे कहा गया है वह आप के अंतः करण में स्थित चेतना को जागृत करने का जो विधान है और उसकी जो विधियां है उस विधि और विधान उनको धर्म कहा गया है इसे हम चेतना को या ईश्वर को जान सकें इसके अलावा जो भी हमें बाहर रूप से दिखाई देती है वह सब हमारी परंपराएं हैं कि हमारे मन और मस्तिष्क को केवल प्रदूषित करते हैं जिसके कारण एक न एक हम मैंने आवरण जो है धर्म और परंपरा के नाम पर अपने मन और मस्तिष्क पर चढ़ा लेते हैं लेकिन वहां पर धर्म नहीं होता है और इन परंपराओं को कट्टरता के साथ जब एक दूसरे व्यक्ति पर थोपा जाता है तो वहां पर कटता पैदा होती है संघर्ष पैदा होता है और धर्म बाद में जितनी संघर्ष है वह इस कट्टरता का परिणाम है जबकि मूल रूप से धर्म के व्यवहार में सरलता विनम्रता निर्मलता है धर्म का मूल उद्देश्य मानव अपने आप में जीवन काल में किसी भी प्रकार के अवरोधों से उनका उन्मूलन करता हुआ मुक्त रूप से जीवन जीने की कला को जाने और सीखे जिसे हम मुक्त अवस्था कहते हैं मुक्ति कोई मरने के बाद नहीं होती मैंने के बाद में मुक्ति किसने देखी मुक्त अवस्था तो हमारे मन की अंतः करण में विलय के बाद ही जागृत होती है कृष्ण इसीलिए का अंत में था तो बता क्यों मेरा स्मरण करता हुआ अंत में मेरे को प्राप्त होगा जो जैसा चिंतन करेगा यहां पर यही आया कि हमारी मृत्यु में क्या बसा हुआ है और वही बरतिया जो है हमारी मृत्यु के बाद होंगी और तदनुसार ही हमारा अगले जन्म का जो शरीर मिलेगा उसी के अनुरूप होगा इसलिए धर्म सही है इसकी जिज्ञासा अपने जीवन में अगर आप अपनी अंतर इतना में जागृति चाहते हैं तो अवश्य करें जीवन में मुक्त होना सबसे बड़ी उपलब्धि है या उपलब्धि देने वाले संत समाज है लेकिन यहां पर संत किसको कहा गया है यह समझना आवश्यक होगा संत वही व्यक्ति है जो खत विकारों से रहित होकर के जिसमें त्रिगुणात्मक रजोगुण तमोगुण और सतोगुण का विशेष प्रभाव ना हो वह इन गुणों के अंतर्गत आधीन हो करके बर्ताव न करता हूं वहीं गुरु का स्वामी हूं उसे ही संत कहा गया है दैनिक जीवन में हमारे और संत के आवश्यकताओं में कोई विशेष फर्क नहीं होता है हो सकता है किस देश में फर्क हो लेकिन संत पुरुष ग्रस्त में भी हो सकता है सन्यास में भी हो सकता है बालक भी हो सकता है व्रत भी हो सकता है इस्त्री भी हो सकता है पुरुष भी हो सकता है कोई भी जिसकी वृत्तियों में कट विकार और त्रिगुणात्मक विधाएं ना हो वही व्यक्ति संत की परिभाषा में खरे उतरते हैं और वह जानते हैं कि व्यक्ति का उत्थान किस प्रकार होगा और कैसे होगा संत हमें विवेक की जागृति देते हैं जिस जागृति से हम अपना स्वयं का पुनरुद्धार करते हैं हमें दूसरे का उद्धार करने की आवश्यकता तो तब होती है जब हमारा अपना उद्धार हो गया हो हमारा मन निर्मल हो गया हो हमारा अंतःकरण शुद्ध हुआ हो हमारे मन के अंदर विकृतियां और त्रिगुणात्मक प्रभाव ना हो यह सारी वस्तुएं जो है हमें सदुपयोग करने के लिए ईश्वर ने दी है लेकिन हमें इनके आधी नहीं रहना है लेकिन हमारे परिवेश और वातावरण में हमें इनके अधीन बना दिया है क्योंकि वह इन परिवेश और अधिकता के कारण अपना लाभ मुझसे उठाना चाहते हैं वह हमें नहीं होना देना चाहते हैं क्योंकि उनकी आकांक्षाएं इच्छाएं तभी पूरी हो सकती हैं जब हम तदनुसार उनके अनुकूल होकर उनके कहे अनुसार चलें यह समाज का प्रवेश है इसलिए जो संस्कार देने की बात कही जाती है वह संस्कार एक लम्हा है जिस तरीके से तांबे या पीतल के बर्तनों में आप कलाई करते हैं तो उस कलाई को प्रशांत भाषा में संस्कार कहा जाता है किस तरीके से औषध मूल औषध में कुछ अन्य औषधियों को मिला करके उनको हम कहते हैं विशुद्ध कर रहे हैं तो संस्कार जो है कहने के लिए भी शुद्धता है लेकिन हम ऐसे संस्कार दे रहे हैं कि मानव जो है हमारे अपने अनुकूल चले चाहे वह राजनीतिक व्यवस्थाएं हो चाहे धार्मिक व्यवस्था हो पारिवारिक व्यवस्थाएं हैं चाहे वह सामाजिक व्यवस्था हैं अपने अनुकूल व्यक्ति को ढालने की जो प्रक्रिया है परिवार का परिवेश में भी सबसे पहले ही होता कि बच्चा को हम अपने अनुकूल व्यवहार में डालना चाहते हैं और उसे हम अपनी पहचान बनाना चाहते हैं कि बच्चा देखो यह हमारा है और यह अपने मां-बाप और परिवार के पूर्वजों की तरह ही व्यवहार कर रहा है यह संस्कार देना है लेकिन इन संस्कारों में बना हुआ व्यक्ति कभी मुक्त नहीं हो सकता क्योंकि वह परिवार के परिवेश में परिवार के लिए ही उसका एक धारा बनता है और वह उसी अनुरूप उतना ही व्यवहार करेगा उसका व्यवहार

insaan kis dharm me paida hota hai usi me aksar marta hai jabki usko pata nahi hota ki vaah dharm sahi hai ya galat aap ki rai hariom insaan jab bhi paida hota hai koi balak jab paida hota hai toh vaah kisi na kisi ke ghar me paida hota uska koi mata pita hota hi hai aur agar mata pita kisi dharm ko na maankar ke nastik hai toh bhi bacche ka janam toh hua hai lekin aksar duniya me kuch hi kshetra aise hain jo kisi bhi dharm ko nahi maante hain kuch log dharm ko maane athva na maane lekin unke mata pita ka jo dharm hai usi parivesh me paida hote hain usi me badhte hain lekin vaah dharmik manyataon ko bahut zyada na toh tu lete hain aur na hi usme sharique hote hain vaah apne kaam se kaam rakhte hain aur paramparaon ke nirvah ke liye thoda bahut usme sammilit ho jaate hain dharm sahi hai ya galat dharm jise kaha gaya hai vaah aap ke antah karan me sthit chetna ko jagrit karne ka jo vidhan hai aur uski jo vidhiyan hai us vidhi aur vidhan unko dharm kaha gaya hai ise hum chetna ko ya 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hi uska ek dhara banta hai aur vaah usi anurup utana hi vyavhar karega uska vyavhar

इंसान किस धर्म में पैदा होता है उसी में अक्सर मरता है जबकि उसको पता नहीं होता कि वह धर्म स

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Rakesh Tiwari

Life Coach, Management Trainer

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Ashok Bajpai

Rtd. Additional Collector P.C.S. Adhikari

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आपका प्रश्न पैदा हुआ है उसी में मरता है उसको पता नहीं होता कि वह दम सही है विकी इंसान के अंदर कैसा होता है और अक्षय को सुधारने मरता है क्यों धर्म परिवर्तन इंसान बहुत कम करता है आपका चिंता यह है कि इंसान को भी मालूम नहीं होता वह धर्म सही है दूध की किताब धर्म की तत्वों को नहीं जानेंगे अपने धर्म को नहीं अपने धर्म का ज्ञान प्राप्त नहीं करेंगे तो आपको निश्चित रूप से नहीं मालूम किस भेद को मिटाने के लिए कि हमारा धर्म सही है हिंदू धर्म में पड़ेंगे आपको अपनी धड़कनों में जानता करना चाहिए और मैं तो यह कहता हूं कि हर धर्म में अच्छे गुण होते ही ज्यादा रखो होते हैं बहुत कम बुरे होते हैं तो अपने धर्म के अच्छे गुणों पार्क जाने लोगों को बताएं और यदि कोई बुरी गुण है अंधविश्वास है कुरीतियां हैं आपके धर्म में तो उनको दूर करने का प्रयास करें उनके विरुद्ध जम्मत जलाएं जैसे राजा राममोहन राय ने किया उन्होंने उन्हें सती प्रतापगढ़ी का कि उन्होंने सती प्रथा के विरुद्ध आंदोलन चलाया पता नहीं जी गलत है कि कोई व्यक्ति मर जाता है तो उसकी स्त्री को भी उसके संग जलाया जाए नहीं यह तो गलत है हिंदू धर्म किस प्रकार किया रजत बनाया और उसके बाद में उन्होंने अंग्रेजी सरकार को बाध्य किया लॉर्ड विलियम बेंटिक को बात किया उन्होंने 1829 में सती प्रथा के विरुद्ध बद्री कहूंगा राजा राममोहन राय हिंदू धर्म की सच्ची ज्ञाता थी उन्होंने हिंदू धर्म की कुरीति को मिटाने की कोशिश दूध कि आप धर्म पर जब तक जान प्राप्त नहीं करेंगे तब तक आपको आपके धर्म के विषय में ही मालूम नहीं होगा कि आपका धर्म सही है कि आपको बता दूं कि धर्म हर कोई सही होता है कोई धर्म नहीं होता है हम धर्म में धर्मावलंबियों में कुछ अंधविश्वासों फुंसियां होती हैं उन्हें दूर करने का हमको प्रयास करना चाहिए

aapka prashna paida hua hai usi me marta hai usko pata nahi hota ki vaah dum sahi hai vicky insaan ke andar kaisa hota hai aur akshay ko sudhaarne marta hai kyon dharm parivartan insaan bahut kam karta hai aapka chinta yah hai ki insaan ko bhi maloom nahi hota vaah dharm sahi hai doodh ki kitab dharm ki tatvon ko nahi jaanege apne dharm ko nahi apne dharm ka gyaan prapt nahi karenge toh aapko nishchit roop se nahi maloom kis bhed ko mitane ke liye ki hamara dharm sahi hai hindu dharm me padenge aapko apni dhadkanon me jaanta karna chahiye aur main toh yah kahata hoon ki har dharm me acche gun hote hi zyada rakho hote hain bahut kam bure hote hain toh apne dharm ke acche gunon park jaane logo ko bataye aur yadi koi buri gun hai andhavishvas hai kuritiyan hain aapke dharm me toh unko dur karne ka prayas kare unke viruddh jammat jalaen jaise raja rammohan rai ne kiya unhone unhe sati pratapagadhi ka ki unhone sati pratha ke viruddh andolan chalaya pata nahi ji galat hai ki koi vyakti mar jata hai toh uski stree ko bhi uske sang jalaya jaaye nahi yah toh galat hai hindu dharm kis prakar kiya rajat banaya aur uske baad me unhone angrezi sarkar ko badhya kiya lord william bentik ko baat kiya unhone 1829 me sati pratha ke viruddh badri kahunga raja rammohan rai hindu dharm ki sachi gyaata thi unhone hindu dharm ki kuriti ko mitane ki koshish doodh ki aap dharm par jab tak jaan prapt nahi karenge tab tak aapko aapke dharm ke vishay me hi maloom nahi hoga ki aapka dharm sahi hai ki aapko bata doon ki dharm har koi sahi hota hai koi dharm nahi hota hai hum dharm me dharmavalambiyon me kuch andhvishvaso phunsiyaan hoti hain unhe dur karne ka hamko prayas karna chahiye

आपका प्रश्न पैदा हुआ है उसी में मरता है उसको पता नहीं होता कि वह दम सही है विकी इंसान के

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Manish Dev

Motivational Speaker, Yoga-Meditation Guide, Spiritualist, Psycho-analyst, Astrologer, Spiritual Healer, Life Coach

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धर्म धर्म होता है धर्म के साथ सही गलत कुछ भी नहीं होता ऐसे यह प्रकृति है ना प्रकृति सही है या गलत प्रकृति ने भूकंप लाया लाखों मर गए बाढ़ आ गया प्राकृतिक आपदा किसी रूप में आगे तो आप क्या कहोगे प्रकृति सही है या गलत आप उसके बारे में नहीं सोचते इसलिए धर्म कभी भी सही या गलत नहीं होता आदमी के लिए सही और गलत हो सकती है चेक विचारधाराएं सही और गलत हो सकती हैं लेकिन धर्म जो है जिसे सनातन कहा गया है धर्म शब्द का प्रयोग इसलिए किसी आप ही के इस वोकल में ही कोई पीछे ने पूछा था कि धर्म मजहब यह सब क्या होता है तो मजहब अलग चीजें धर्म अलग चीजें रिलीजन अलग चीज है और धर्म अलग चीजें धर्म का तात्पर्य धारण रिलीजन का तात्पर्य जो है बॉन्डिंग से और जो मजहब है वह भी एक सामाजिक था उसमें कॉमेडी है लेकिन धर्म एक व्यक्तिगत चीज है व्यक्तिगत आस्था है आपका व्यक्तिगत है कि आपने क्या धारण किया है वही आपका धर्म है ठीक तो इसलिए धर्म कभी आपने जो धारण किया है वह आपका धर्म बन जाता है और जब हम सनातन को धारण करते हैं ईश्वरीय सत्ता को धारण करते हैं उसको हम अपने जीवन में अपना लक्ष्य बना लेते हैं तो फिर उसमें सही गलत वाली कोई बात नहीं होती है इसलिए इस भावना से मुक्त रहकर धर्म में पैदा हुआ उसी में अक्सर बढ़ता है जबकि उसको पता नहीं होता कि वह धर्म सही है या गलत है तो उसे अनुसंधान करना चाहिए कि उसे क्या धारण करना है वह सत्य को धारण करें जो धारण करने योग्य है इसलिए कहा गया है संसार में प्रत्येक वस्तु परिवर्तनशील है तो वह धारण करने योग्य नहीं है इस पर परिवर्तनशील नहीं है सनातन है जो जो सनातन है वह धारण करने योग्य है जो सनातन नहीं है वह धारण करने योग्य नहीं है वह स्वर है जो नशा क्षणभंगुर है वह धारण करने योग्य नहीं है जो सनातन ईश्वर है वही धारण करने योग्य है और जो धारण करने योग्य है वही धर्म है तो धारण करने से धर्म है हार्ली जबजब का डेफिनिशन अलग है तो यह इस बात को समझना होगा कि तो यहां पर यह प्रश्न ही गलत हो जाएगा कि धर्म सही है या गलत इसका यह आप उस परिवेश से पूछ रहे हैं जहां पर आप पधारो बजा बार लिसन एक मानते हैं लेकिन ये तीनों एक नहीं है तीनों का शाब्दिक अर्थ 12 लिटरल मीनिंग होना चाहिए तीनों का वही अलग अलग अलग भाषा के लैटिन भाषा की रैली गियर वर्ड से बना है जिसका अर्थ होता है बॉन्डिंग अर्थात जोड़ने का काम करना एक दूसरे को आप जो ईएस का मतलब ही होता है ग्रुप समाज वहां पर बहुत सारे लोग हैं अपने मजहब अपने संप्रदाय को के विकास के लिए वह काम करते हैं और धर्म एक व्यक्तिगत विषय है एक व्यक्ति ने क्या धारण कर रखा है जूस धारण कर रखा है उसका धर्म है अगर उसने नश्वर संसार को धारण किया तो नश्वर यह क्या शादी हुई तो आपने कहा धर्मपत्नी क्योंकि आपने धारण कितना इसी प्रकार से यह धमकी को परिभाषित होता तो वहां पर सही और गलत होने का मतलब नहीं है सनातन को धारण करना ही धर्म जो धारण करने योग्य है वह सनातन ईश्वर है उसको धारण करना ही धर्म है

dharm dharm hota hai dharm ke saath sahi galat kuch bhi nahi hota aise yah prakriti hai na prakriti sahi hai ya galat prakriti ne bhukamp laya laakhon mar gaye baadh aa gaya prakirtik aapda kisi roop me aage toh aap kya kahoge prakriti sahi hai ya galat aap uske bare me nahi sochte isliye dharm kabhi bhi sahi ya galat nahi hota aadmi ke liye sahi aur galat ho sakti hai check vichardharaen sahi aur galat ho sakti hain lekin dharm jo hai jise sanatan kaha gaya hai dharm shabd ka prayog isliye kisi aap hi ke is vocal me hi koi peeche ne poocha tha ki dharm majhab yah sab kya hota hai toh majhab alag cheezen dharm alag cheezen religion alag cheez hai aur dharm alag cheezen dharm ka tatparya dharan religion ka tatparya jo hai bonding se aur jo majhab hai vaah bhi ek samajik tha usme comedy hai lekin dharm ek vyaktigat cheez hai vyaktigat astha hai aapka vyaktigat hai ki aapne kya dharan kiya hai wahi aapka dharm hai theek toh isliye dharm kabhi aapne jo dharan kiya hai vaah aapka dharm ban jata hai aur jab hum sanatan ko dharan karte hain ishwariya satta ko dharan karte hain usko hum apne jeevan me apna lakshya bana lete hain toh phir usme sahi galat wali koi baat nahi hoti hai isliye is bhavna se mukt rahkar dharm me paida hua usi me aksar badhta hai jabki usko pata nahi hota ki vaah dharm sahi hai ya galat hai toh use anusandhan karna chahiye ki use kya dharan karna hai vaah satya ko dharan kare jo dharan karne yogya hai isliye kaha gaya hai sansar me pratyek vastu parivartanshil hai toh vaah dharan karne yogya nahi hai is par parivartanshil nahi hai sanatan hai jo jo sanatan hai vaah dharan karne yogya hai jo sanatan nahi hai vaah dharan karne yogya nahi hai vaah swar hai jo nasha kshanabhangur hai vaah dharan karne yogya nahi hai jo sanatan ishwar hai wahi dharan karne yogya hai aur jo dharan karne yogya hai wahi dharm hai toh dharan karne se dharm hai harli jabjab ka definition alag hai toh yah is baat ko samajhna hoga ki toh yahan par yah prashna hi galat ho jaega ki dharm sahi hai ya galat iska yah aap us parivesh se puch rahe hain jaha par aap padhaaro baja baar listen ek maante hain lekin ye tatvo ek nahi hai tatvo ka shabdik arth 12 literal meaning hona chahiye tatvo ka wahi alag alag alag bhasha ke latin bhasha ki rally gear word se bana hai jiska arth hota hai bonding arthat jodne ka kaam karna ek dusre ko aap jo ES ka matlab hi hota hai group samaj wahan par bahut saare log hain apne majhab apne sampraday ko ke vikas ke liye vaah kaam karte hain aur dharm ek vyaktigat vishay hai ek vyakti ne kya dharan kar rakha hai juice dharan kar rakha hai uska dharm hai agar usne nashwar sansar ko dharan kiya toh nashwar yah kya shaadi hui toh aapne kaha dharmpatni kyonki aapne dharan kitna isi prakar se yah dhamki ko paribhashit hota toh wahan par sahi aur galat hone ka matlab nahi hai sanatan ko dharan karna hi dharm jo dharan karne yogya hai vaah sanatan ishwar hai usko dharan karna hi dharm hai

धर्म धर्म होता है धर्म के साथ सही गलत कुछ भी नहीं होता ऐसे यह प्रकृति है ना प्रकृति सही है

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मनोज सैनी

Business Planning Manager, Author and RTI Activist.

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नमस्कार वाले की व्यक्तिगत राय है कि आपका यह कहना बिल्कुल ठीक है कि इंसान जीता में पैदा होता है कि मैं अक्सर मर्द बहुत कम बार होता है कि इंसान एक धर्म में पैदा होता है उसमें हम परिवर्तन करना भी अपने आप में एक बहुत बड़ा चैलेंज आपको लोग बहुत संभावना से देखना शुरू कर देते हैं तो आपको अपना धर्म समझ आ रहा है या नहीं आ रहा है आप उसमें कमियां लग रही है नहीं लग रही है इसके बावजूद भी आप का मन है या नहीं आ सकते करने का या किसी और धर्म को किस करना चाहते हैं इसके बावजूद भी धर्म परिवर्तन करना हमारे लिए हमारी सोसाइटी में बहुत बड़ा विजन होता है जिस धर्म में पैदा होते ही क्वेश्चन था कि पता ही नहीं होता क्यों कर रही है मिश्री कोई भी धर्म इस दुनिया में जितने भी धर्म है इनिशियली वह धर्म स्टार्ट हुए या तो स्टार्टिंग कब पीरियड थे उनमें कोई धर्म कभी भी कोई धर्म गलत है लेकिन धर्म में स्लिपफॉर्म हुए और जो आज हम फॉलो करते हैं इतना लगा सकते कि आप उसका विकृत रूप फॉलो कर रहे हैं इसीलिए किसी मोमेंट के हमेशा लगता है कि अभी हमारे धर्म में 1 लोगों ने अपने फायदे के लिए कहीं पर तुम भूल बस अज्ञानता व या कहीं पर चालाकी है अपने फायदे के लिए धर्म की व्याख्या व्याख्या ही बदल चीजों में जिससे धर्म होता है कोई भी मोड़ कर दिया ओर से जानने के बजाय उसको खुद हर धर्म में कुछ ना कुछ धार्मिक ग्रंथ होते हैं जो धर्म ग्रंथों को पढ़कर कुश से अपनी व्याख्या सेट करने की विधि द्वारा गर्म कॉलिंग कर दिया गया है गलत तरीके से अपने मन मुताबिक उसको समझ कर आगे बढ़ने की जब आप अपने धर्म को सबसे एडिट करना स्टार्ट करेंगे उसे समझना स्टार्ट करेंगे तो आप किसी धर्म को मानते हो रहा है कि धर्म कभी गलत नहीं होता व्यक्ति ही गलत होता है उसको मानने वाले लोगों ने उसको गलत तरह से प्रजेंट कर दिया कांसेप्ट लेना अगर आप अपनी पिक के देखी होगी मेरे को बता नहीं आपने पीके देखी नहीं देखी आपने उससे क्या लिया क्या समझा क्या नहीं समझा मैं आपका एडवाइज करूंगा किसी को एक बार वापस समझने की कोशिश करो कि वह क्या मैसेज देने की कोशिश कर रहे हैं कैसे मटका रे तो उस कांसेप्ट पर समझने की कोशिश करो कि मैं नजरों से बचने की कोशिश कर और खुद से धर्म को समझने क्वेश्चन कभी बनेगा ही नहीं कि हम जिस धर्म में पैदा हुए थे हम उसी धर्म में क्यों माता धन्यवाद

namaskar waale ki vyaktigat rai hai ki aapka yah kehna bilkul theek hai ki insaan jita me paida hota hai ki main aksar mard bahut kam baar hota hai ki insaan ek dharm me paida hota hai usme hum parivartan karna bhi apne aap me ek bahut bada challenge aapko log bahut sambhavna se dekhna shuru kar dete hain toh aapko apna dharm samajh aa raha hai ya nahi aa raha hai aap usme kamiyan lag rahi hai nahi lag rahi hai iske bawajud bhi aap ka man hai ya nahi aa sakte karne ka ya kisi aur dharm ko kis karna chahte hain iske bawajud bhi dharm parivartan karna hamare liye hamari society me bahut bada vision hota hai jis dharm me paida hote hi question tha ki pata hi nahi hota kyon kar rahi hai mishri koi bhi dharm is duniya me jitne bhi dharm hai inishiyali vaah dharm start hue ya toh starting kab period the unmen koi dharm kabhi bhi koi dharm galat hai lekin dharm me slipafarm hue aur jo aaj hum follow karte hain itna laga sakte ki aap uska vikrit roop follow kar rahe hain isliye kisi moment ke hamesha lagta hai ki abhi hamare dharm me 1 logo ne apne fayde ke liye kahin par tum bhool bus agyanata va ya kahin par chalaki hai apne fayde ke liye dharm ki vyakhya vyakhya hi badal chijon me jisse dharm hota hai koi bhi mod kar diya aur se jaanne ke bajay usko khud har dharm me kuch na kuch dharmik granth hote hain jo dharm granthon ko padhakar kush se apni vyakhya set karne ki vidhi dwara garam Calling kar diya gaya hai galat tarike se apne man mutabik usko samajh kar aage badhne ki jab aap apne dharm ko sabse edit karna start karenge use samajhna start karenge toh aap kisi dharm ko maante ho raha hai ki dharm kabhi galat nahi hota vyakti hi galat hota hai usko manne waale logo ne usko galat tarah se present kar diya concept lena agar aap apni pic ke dekhi hogi mere ko bata nahi aapne pk dekhi nahi dekhi aapne usse kya liya kya samjha kya nahi samjha main aapka edavaij karunga kisi ko ek baar wapas samjhne ki koshish karo ki vaah kya massage dene ki koshish kar rahe hain kaise matka ray toh us concept par samjhne ki koshish karo ki main nazro se bachne ki koshish kar aur khud se dharm ko samjhne question kabhi banega hi nahi ki hum jis dharm me paida hue the hum usi dharm me kyon mata dhanyavad

नमस्कार वाले की व्यक्तिगत राय है कि आपका यह कहना बिल्कुल ठीक है कि इंसान जीता में पैदा होत

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Rovins Nigam

IAS Dreamer

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जी कोई भी इंसान हो चाहे वह किसी भी धर्म में पैदा हो तो उसको यह अधिकार होता है कि वह अपनी मर्जी से जब उसको सूझबूझ से जो उसे धर्म अच्छा लगे उसे वह धर्म स्वीकार करने का अधिकार उसके पास होता है वह नहीं कि उसके बाप दादा इसी धर्म में थे तो वह भी इसी धर्म में रहेगा ऐसी बात नहीं है हर आदमी का अधिकार होता है कि वह जो धर्म चाहे वह धर्म स्वीकार कर सकता है

ji koi bhi insaan ho chahen vaah kisi bhi dharm me paida ho toh usko yah adhikaar hota hai ki vaah apni marji se jab usko sujhbujh se jo use dharm accha lage use vaah dharm sweekar karne ka adhikaar uske paas hota hai vaah nahi ki uske baap dada isi dharm me the toh vaah bhi isi dharm me rahega aisi baat nahi hai har aadmi ka adhikaar hota hai ki vaah jo dharm chahen vaah dharm sweekar kar sakta hai

जी कोई भी इंसान हो चाहे वह किसी भी धर्म में पैदा हो तो उसको यह अधिकार होता है कि वह अपनी म

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देखिए तो जाहिर सी बात है कि इंसान जिस धर्म में पैदा हुआ है उसी धर्म में उसकी मृत्यु होनी है हां कभी-कभी या कुछ व्यक्ति की परिस्थितियां और व्यक्ति की लालच के कारण धर्म परिवर्तन व्यक्ति कर लेता है और अक्सर देखा जाता है कि यहां नहीं होता तो मेरे विचार से आपका सवाल जब कि उसको पता नहीं होता कि वह धर्म सही या गलत मतलब इतना तो तय है कि अगर आप एक एक निश्चय व्यक्ति हैं एक अपने आप पर काबू करने वाले व्यक्ति हैं जो आप धर्म का मतलब आसानी से जान सकते हैं और धर्म अगर आप समझ गए हैं तो आप जानते ही होंगे कि यहां तक कि दूसरे का धर्म भी गलत नहीं होता तो आपका धर्म गलत हो ही नहीं सकता तो धर्म कभी गलत नहीं होता धर्म को गलत नजरिए से देखें तब वह गलत बन जाएगा

dekhiye toh jaahir si baat hai ki insaan jis dharm me paida hua hai usi dharm me uski mrityu honi hai haan kabhi kabhi ya kuch vyakti ki paristhiyaann aur vyakti ki lalach ke karan dharm parivartan vyakti kar leta hai aur aksar dekha jata hai ki yahan nahi hota toh mere vichar se aapka sawaal jab ki usko pata nahi hota ki vaah dharm sahi ya galat matlab itna toh tay hai ki agar aap ek ek nishchay vyakti hain ek apne aap par kabu karne waale vyakti hain jo aap dharm ka matlab aasani se jaan sakte hain aur dharm agar aap samajh gaye hain toh aap jante hi honge ki yahan tak ki dusre ka dharm bhi galat nahi hota toh aapka dharm galat ho hi nahi sakta toh dharm kabhi galat nahi hota dharm ko galat nazariye se dekhen tab vaah galat ban jaega

देखिए तो जाहिर सी बात है कि इंसान जिस धर्म में पैदा हुआ है उसी धर्म में उसकी मृत्यु होनी ह

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Ajeet Singh khamano

Youtuber, Motivational speaker, fashion influencer

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धत्रक का सवाल है कि इंसान जिस धर्म में पैदा होता है उसी में अक्सर मरता है जबकि उसको पता नहीं होता कि वह धर्म सही है या गलत आप की राय सबसे पहले ब्रदर मैं आपको जो एक बात बता दूं कि दुनिया के अंदर जितने भी लोग पैदा हुए हैं इस सारे संसार के अंदर जितने लोग रहते हैं सभी का एक ही धर्म है वह इंसानियत वह एक परमात्मा को मानना और वह है उस परमात्मा के अंदर चलना उसकी मर्जी उसकी रजा के अंदर चलना तो इसको आप किसी एक कैटिगरीज अनकैटिगराइज्ड कर सकते क्योंकि धर्म का जो संबंध है वह किसी किसी भाषा के साथ नहीं होता वह कितनी पहरा दे किताब नहीं होता और वह किसी भी तरीके के भोजन के साथ नहीं होता है धर्म और धर्म इज द रियल एंड अमित कनेक्टेड गॉड था अब जिद जिद कि आप बात करें कि जिस धर्म में पैदा हुआ दर्द नोट धर्म एक्चुली उसको बोला जाता है मदद मदद का मतलब होता धर्म के करजा अमित धर्म से जोड़ता है सुबह मधुबाला के हर एक इंसान को धर्म के साथ जोड़ने के लिए धर्म के कर्म के तार जोड़ने के लिए तत्व संतों का दया धर्म धीरज इन सभी चीजों के साथ जोड़ने के लिए और मुसली आपको हर हर मजहब के अंदर यह सभी चीजें कॉमन सी मिलेंगी ठीक है इसके अलावा उन मदद के अंदर कुछ रीति रिवाज बदल गई जाते जो इस्लाम है मुसलमान है इस्लामिक कंट्री है उनके बीच में मुर्दे को जलाया नहीं जाता दफनाया जाता है हिंदू दिन के अंदर चलाया जाता है उनको एक खाली जगह पर गिर जाती है और वह डेडबॉडी को खाती है नोच नोच के कुछ लोग पानी में बहा देते हैं ठीक है तू अलग अलग किसको बोला जाता है जस्टिफिकेशन और जूजू अवेलेबिलिटी है उसके हिसाब से धर्म को मदद को उन लोगों ने मोड़ दिया जलाने के लिए लकड़ियां जमीन में दब आएंगे ना जाबे लकड़ियों की भरमार है वहां पर जमीन में अंतर आने की क्या जरूरत है क्योंकि जमीन तो हमारी उपजाऊ है तो हम जमीन उपजाऊ जमीन को हम लोग खेती के लिए यूज करते हैं कि उन्होंने सोचा की डेड बॉडी अपनी पड़ी है तो धर्म के साथ में जोड़ते भूखे रहने से धर्म धर्म कभी भी गलत नहीं होता मगर जो बनाई गई थी उस धर्म के साथ जोड़ने के लिए बनाए गए थे के साथ-साथ वह हमारी कट्टरता के साथ जुड़ते गए और किसकी वजह से गलत लगने लग गए हैं कोई भी मतलब है वह मैं गलत लगने लग गया क्योंकि उसके अंदर कट्टरता ही आके एक लड़की थी उनके घर में दही को जाग लगाया जाता दूध को जाग लगाकर दही जमाया जाता था तो मैं बोलती थी बेटा बिल्ली को पकड़ के टुकड़े के नीचे दे दे ताकि हम दूध जमा दे क्योंकि बिल्ली अगर खुली तो करते-करते बचपन से लेकर जवान होते तो कुछ लड़की की है बेटा दिल्ली दूध जमाना तो दिल्ली को टोकरी के नीचे देना लड़की की शादी हो गई बस उधर चली गई अब तसल्ली तो है नहीं तो सासू मां ने बोला बेटा दूध जमाना तो दो जमा दो तो आसपास भी ढूंढने लग गई तेरे को ढूंढ ढूंढ रही है तो अब इसका मतलब इसका मतलब है कि वह एक तरीके से निवास बन गया उसकी सोच के मुताबिक जब तक बिल्ली को ठोकरें के नीचे दब आएंगे नहीं अब तक दूध नहीं जमेगा तो उसकी मेंटालिटी बुक की बहुत सारी चीजें बोतल के ऊपर काम कर चुके हैं और अब आपको कोई भी बुरा नहीं लगेगा कोई भी मदद बुरा नहीं लगेगा उसके पीछे जोड़ी थी उनके पीछे हिस्टोरिकल चलते वह कुछ है जिनकी शायद आज जरूरत नहीं है सभी की कोई जरूरत नहीं है तेरी बातें दिल की आज की जरूरत है अगर आपका दिमाग है अगर आप धर्म के अंदर पैदा हो क्योंकि धर्म में मर जाते हैं वह अनएजुकेशन के रीजन है क्योंकि वह लकीर के फकीर है उसी चीज को फॉलो करते हैं उनको सिखाई गई है ऐसे ही चल रहा है

dhatrak ka sawaal hai ki insaan jis dharm me paida hota hai usi me aksar marta hai jabki usko pata nahi hota ki vaah dharm sahi hai ya galat aap ki rai sabse pehle brother main aapko jo ek baat bata doon ki duniya ke andar jitne bhi log paida hue hain is saare sansar ke andar jitne log rehte hain sabhi ka ek hi dharm hai vaah insaniyat vaah ek paramatma ko manana aur vaah hai us paramatma ke andar chalna uski marji uski raza ke andar chalna toh isko aap kisi ek kaitigrij anakaitigraijd kar sakte kyonki dharm ka jo sambandh hai vaah kisi kisi bhasha ke saath nahi hota vaah kitni pahara de kitab nahi hota aur vaah kisi bhi tarike ke bhojan ke saath nahi hota hai dharm aur dharm is the real and amit connected god tha ab jid jid ki aap baat kare ki jis dharm me paida hua dard note dharm ekchuli usko bola jata hai madad madad ka matlab hota dharm ke kurja amit dharm se Jodta hai subah madhubala ke har ek insaan ko dharm ke saath jodne ke liye dharm ke karm ke taar jodne ke liye tatva santo ka daya dharm dheeraj in sabhi chijon ke saath jodne ke liye aur musali aapko har har majhab ke andar yah sabhi cheezen common si milegi theek hai iske alava un madad ke andar kuch riti rivaaj badal gayi jaate jo islam hai musalman hai islamic country hai unke beech me murde ko jalaya nahi jata dafnaya jata hai hindu din ke andar chalaya jata hai unko ek khaali jagah par gir jaati hai aur vaah dedbadi ko khati hai notch notch ke kuch log paani me baha dete hain theek hai tu alag alag kisko bola jata hai jastifikeshan aur juju avelebiliti hai uske hisab se dharm ko madad ko un logo ne mod diya jalane ke liye lakdiyan jameen me dab aayenge na jabe lakdiyon ki bharamar hai wahan par jameen me antar aane ki kya zarurat hai kyonki jameen toh hamari upajau hai toh hum jameen upajau jameen ko hum log kheti ke liye use karte hain ki unhone socha ki dead body apni padi hai toh dharm ke saath me jodte bhukhe rehne se dharm dharm kabhi bhi galat nahi hota magar jo banai gayi thi us dharm ke saath jodne ke liye banaye gaye the ke saath saath vaah hamari kattartaa ke saath judte gaye aur kiski wajah se galat lagne lag gaye hain koi bhi matlab hai vaah main galat lagne lag gaya kyonki uske andar kattartaa hi aake ek ladki thi unke ghar me dahi ko jag lagaya jata doodh ko jag lagakar dahi Jamaya jata tha toh main bolti thi beta billi ko pakad ke tukde ke niche de de taki hum doodh jama de kyonki billi agar khuli toh karte karte bachpan se lekar jawaan hote toh kuch ladki ki hai beta delhi doodh jamana toh delhi ko tokri ke niche dena ladki ki shaadi ho gayi bus udhar chali gayi ab tasalli toh hai nahi toh sasu maa ne bola beta doodh jamana toh do jama do toh aaspass bhi dhundhne lag gayi tere ko dhundh dhundh rahi hai toh ab iska matlab iska matlab hai ki vaah ek tarike se niwas ban gaya uski soch ke mutabik jab tak billi ko thokaren ke niche dab aayenge nahi ab tak doodh nahi jamega toh uski mentalaity book ki bahut saari cheezen bottle ke upar kaam kar chuke hain aur ab aapko koi bhi bura nahi lagega koi bhi madad bura nahi lagega uske peeche jodi thi unke peeche historical chalte vaah kuch hai jinki shayad aaj zarurat nahi hai sabhi ki koi zarurat nahi hai teri batein dil ki aaj ki zarurat hai agar aapka dimag hai agar aap dharm ke andar paida ho kyonki dharm me mar jaate hain vaah anaejukeshan ke reason hai kyonki vaah lakir ke fakir hai usi cheez ko follow karte hain unko sikhai gayi hai aise hi chal raha hai

धत्रक का सवाल है कि इंसान जिस धर्म में पैदा होता है उसी में अक्सर मरता है जबकि उसको पता नह

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एकदम खूबसूरत सवाल पूछा है आपने लेकिन इंसान सिद्ध में पड़ता है उसी धर्म आता है यह बात एक पर्सेंट सच है उसकी वजह हमारी मानसिकता जो समाज में यह जो माहौल में या जो इंवॉल्वमेंट में हम रहते हैं उनकी मानसिकता ऐसी बना दी गई है क्या कर्म धर्म परिवर्तन कर चेंज करेंगे तो मतलब हम यहां पर सबसे बड़े गुनहगार हो जाती है सबसे बड़ा जुर्म करते जब जिंदगी का और दूसरा इसके अभ्यस्त के अंदर हम किस समाज में ऐसी तरुण पैदा होते अगर उसके बारे में हमने कुछ प्रश्न पूछ लिया कि ऐसा ही किया वैसा ही क्यों 22 को ही क्यों पूछना है इसकी की मदद करनी अजानी क्यों देनी है पूजा क्यों करनी है नमाजी के ऊपर मिर्ची क्यों जाना है तो मतलब हमने सबसे बड़ा पाप कर दिया उसकी सबसे बड़ी वजह है मानसिक मेरी राय की है कि यह बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल हंड्रेड परसेंट गलत है हमें चेक करना चाहिए कि हम सिख धर्म पैदा हुए वह सही है या गलत है अगर मान लो अगर की बच्ची को बचपन में अगर मुसलमान में घर में कोई बच्चा पैदा होता है किसी को दे देते और किसी हिंदू भर के बच्चे को अगर मुसलमान धर्म में लेकर उसकी परवरिश करके तुमको पता ही नहीं कि वह हिंदू पैदा होकर मुसलमान पैदा हो गए थे तो मेरी यह राय है कि हमें चेक करना चाहिए हमें सोचना चाहिए हमारे धर्म के बारे में तो कितना सही कितना गलत है उसके दूसरे धर्म के बारे में पढ़ना चाहिए और हमारे धर्म के बारे में पढ़ना चाहिए

ekdam khoobsurat sawaal poocha hai aapne lekin insaan siddh me padta hai usi dharm aata hai yah baat ek percent sach hai uski wajah hamari mansikta jo samaj me yah jo maahaul me ya jo invalwament me hum rehte hain unki mansikta aisi bana di gayi hai kya karm dharm parivartan kar change karenge toh matlab hum yahan par sabse bade gunahagar ho jaati hai sabse bada jurm karte jab zindagi ka aur doosra iske abhyast ke andar hum kis samaj me aisi tarun paida hote agar uske bare me humne kuch prashna puch liya ki aisa hi kiya waisa hi kyon 22 ko hi kyon poochna hai iski ki madad karni ajani kyon deni hai puja kyon karni hai namaji ke upar mirchi kyon jana hai toh matlab humne sabse bada paap kar diya uski sabse badi wajah hai mansik meri rai ki hai ki yah bilkul bilkul bilkul hundred percent galat hai hamein check karna chahiye ki hum sikh dharm paida hue vaah sahi hai ya galat hai agar maan lo agar ki bachi ko bachpan me agar musalman me ghar me koi baccha paida hota hai kisi ko de dete aur kisi hindu bhar ke bacche ko agar musalman dharm me lekar uski parvarish karke tumko pata hi nahi ki vaah hindu paida hokar musalman paida ho gaye the toh meri yah rai hai ki hamein check karna chahiye hamein sochna chahiye hamare dharm ke bare me toh kitna sahi kitna galat hai uske dusre dharm ke bare me padhna chahiye aur hamare dharm ke bare me padhna chahiye

एकदम खूबसूरत सवाल पूछा है आपने लेकिन इंसान सिद्ध में पड़ता है उसी धर्म आता है यह बात एक पर

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Manish🙂

Love To Help🤗

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हम किस धर्म के अंतर्गत जन्म देते हैं हमारा परिवार यह हम जिस धर्म से बिलॉन्ग करते हैं हमारा उसके प्रति झुकाव होना आजा एकदम होना भी चाहिए लेकिन धर्म भगवान ने नहीं बनाया इस बात को समझना सबसे ज्यादा जरूरी है आज पूरा दुनिया में अलग-अलग धर्म है देश के अनुसार क्षेत्र के अनुसार राज्य के अनुसार यह जो है बे सबसे इसी की वजह से दुनिया में अशांति विद्यमान है अगर अगर यह धर्म हटाकर सिर्फ एक धर्म चलाया जाए जिसका नाम इंसानियत धनुष अगर आप इस धर्म को मानते हैं तो सही है और इसमें कोई गलत नहीं है कि हम जिस धर्म जन्म लेते हैं उस घर में अगर हमारा उत्थान के प्रति हमारा गांव रहता है उसी धर्म को मानते हैं एकदम गलत नहीं है आप उसको फॉलो कर सकते हैं धन्यवाद

hum kis dharm ke antargat janam dete hain hamara parivar yah hum jis dharm se Belong karte hain hamara uske prati jhukaav hona aajad ekdam hona bhi chahiye lekin dharm bhagwan ne nahi banaya is baat ko samajhna sabse zyada zaroori hai aaj pura duniya me alag alag dharm hai desh ke anusaar kshetra ke anusaar rajya ke anusaar yah jo hai be sabse isi ki wajah se duniya me ashanti vidyaman hai agar agar yah dharm hatakar sirf ek dharm chalaya jaaye jiska naam insaniyat dhanush agar aap is dharm ko maante hain toh sahi hai aur isme koi galat nahi hai ki hum jis dharm janam lete hain us ghar me agar hamara utthan ke prati hamara gaon rehta hai usi dharm ko maante hain ekdam galat nahi hai aap usko follow kar sakte hain dhanyavad

हम किस धर्म के अंतर्गत जन्म देते हैं हमारा परिवार यह हम जिस धर्म से बिलॉन्ग करते हैं हमारा

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Parveen Kumar

praveenbhooria9672@gmail.com

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देखो किसी के धर्म पर पहली अंगुली नहीं करनी चाहिए चाहे वह धर्म हिंदू हो चाहे मुस्लिम हो जाए ऐसी कोशिश की ओर से इस वीडियो कोई भी धर्म हो लेकिन किसी के धर्म पर नहीं करनी चाहिए और बात रही कि वह सही है कि गलत हों सभी का सही है अपनी जगह हम बोलते हैं कि मुस्लिम गलत है मुस्लिम बोलता है मुस्लिम बोलता है कि हिंदू गलत है तो बोलते बोलते रहते हैं लेकिन सभी का अपनी अपनी जगह सही है कभी किसी के धर्म पर अंगुली नहीं उठाने चाहिए

dekho kisi ke dharm par pehli anguli nahi karni chahiye chahen vaah dharm hindu ho chahen muslim ho jaaye aisi koshish ki aur se is video koi bhi dharm ho lekin kisi ke dharm par nahi karni chahiye aur baat rahi ki vaah sahi hai ki galat ho sabhi ka sahi hai apni jagah hum bolte hain ki muslim galat hai muslim bolta hai muslim bolta hai ki hindu galat hai toh bolte bolte rehte hain lekin sabhi ka apni apni jagah sahi hai kabhi kisi ke dharm par anguli nahi uthane chahiye

देखो किसी के धर्म पर पहली अंगुली नहीं करनी चाहिए चाहे वह धर्म हिंदू हो चाहे मुस्लिम हो जाए

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Roni

make A INDIAN MAN =siv)

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यह बातें तो आप हटा दीजिए कि कोई धर्म सही या गलत कोई धर्म सही या गलत दिखाओ नहीं तो आदमी की सोच पर डिपेंड करता है आदमी वह कार्य पर डिपेंड करता हुआ किस क्या सोचते हैं और किस टाइप का कार्य कर रहा है इसमें धर्म का कोई लेना देना नहीं है धर्म वगैरह तो हमने ही बनाए हैं तू आप यह मत देखिए कि धर्म सही या गलत है इंसानियत है धर्म कोई सही और गलत में तो धर्म धर्म होता है

yah batein toh aap hata dijiye ki koi dharm sahi ya galat koi dharm sahi ya galat dikhaao nahi toh aadmi ki soch par depend karta hai aadmi vaah karya par depend karta hua kis kya sochte hain aur kis type ka karya kar raha hai isme dharm ka koi lena dena nahi hai dharm vagera toh humne hi banaye hain tu aap yah mat dekhiye ki dharm sahi ya galat hai insaniyat hai dharm koi sahi aur galat me toh dharm dharm hota hai

यह बातें तो आप हटा दीजिए कि कोई धर्म सही या गलत कोई धर्म सही या गलत दिखाओ नहीं तो आदमी की

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इंसान किसी भी धर्म में पैदा हो उसके लिए सबसे जरूरी उसकी सबसे जरूरी उसकी मानवता होती है सभी धर्मों के विकास और यही कहता है कि हमें मानवता को सबसे ज्यादा पेशेंस देना चाहिए ना कि हमें धार्मिक आधार पर लड़ना चाहिए या एक दूसरे के धर्म को बढ़ाने के लिए अपने धर्म का प्रचार ज्यादा से ज्यादा कर के हम बढ़ाने के लिए किसी दूसरे को प्रलोभन देना भी गलत है जैसे ईसाई मिशन भी और भी कम्युनिटी ऐसा करती है

insaan kisi bhi dharm me paida ho uske liye sabse zaroori uski sabse zaroori uski manavta hoti hai sabhi dharmon ke vikas aur yahi kahata hai ki hamein manavta ko sabse zyada patience dena chahiye na ki hamein dharmik aadhar par ladana chahiye ya ek dusre ke dharm ko badhane ke liye apne dharm ka prachar zyada se zyada kar ke hum badhane ke liye kisi dusre ko pralobhan dena bhi galat hai jaise isai mission bhi aur bhi community aisa karti hai

इंसान किसी भी धर्म में पैदा हो उसके लिए सबसे जरूरी उसकी सबसे जरूरी उसकी मानवता होती है सभी

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Sumit Gondhiya

Educator, Content Creator, Counselor

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सही और गलत क्या होता है वह भी जब उसका जन्म होता है तब उसे पता नहीं होता सही और गलत ही परिभाषा भी समझने सिखाई हुई है सारी की सारी भाषाएं भी समाज में असल अवस्था तो अज्ञानता की अवस्था है वही सब कुछ सही और गलत कुछ है ही नहीं कुछ नहीं है कुछ भी ना सही है ना ही कुछ गलत शून्यता अज्ञानता जब मन ही नहीं है उस अवस्था को अध्यात्मा कहा जाता है बाकी सब बकवास है

sahi aur galat kya hota hai vaah bhi jab uska janam hota hai tab use pata nahi hota sahi aur galat hi paribhasha bhi samjhne sikhai hui hai saari ki saari bhashayen bhi samaj me asal avastha toh agyanata ki avastha hai wahi sab kuch sahi aur galat kuch hai hi nahi kuch nahi hai kuch bhi na sahi hai na hi kuch galat shunyata agyanata jab man hi nahi hai us avastha ko adhyatma kaha jata hai baki sab bakwas hai

सही और गलत क्या होता है वह भी जब उसका जन्म होता है तब उसे पता नहीं होता सही और गलत ही परिभ

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Purushottam Choudhary

ब्राह्मण Next IAS institute गार्ड

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ना तो इंसान गलत होता है ना तो धर्म गलत होता है मैं माया मोह में पड़कर कुछ संस्कार के संसर्ग में आकर अपने धर्म को भूल जाते हैं और भाई बंध भाई बंध भाई बंधु का के ढिंढोरा होता है मजाक तो एक ही है वह है इंसानियत का अगर आपके अंदर इंसानियत है तो समझ में आप एक नंबर के मजहब के रखवाले एक नंबर धर्म के रखवाले हैं जय श्री राम

na toh insaan galat hota hai na toh dharm galat hota hai main maya moh me padhkar kuch sanskar ke sansarg me aakar apne dharm ko bhool jaate hain aur bhai bandh bhai bandh bhai bandhu ka ke dhindhora hota hai mazak toh ek hi hai vaah hai insaniyat ka agar aapke andar insaniyat hai toh samajh me aap ek number ke majhab ke rakhwale ek number dharm ke rakhwale hain jai shri ram

ना तो इंसान गलत होता है ना तो धर्म गलत होता है मैं माया मोह में पड़कर कुछ संस्कार के संसर्

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देखिए किस साल में इंसान पैदा होता है क्या मरता है उसको पता नहीं होता विधान सही है या नहीं तो शाम को पता है जो उस घर में पैदा हुआ है आपको जैसे पता होगा कि हम पिछले जन्म की कृतियों का परिणाम या दुष्परिणाम अपने इस जन्म में पाते हैं तो आपको यह भी पता होगा कि यह धर्मराज जो है उनके भाई हैं शनिदेव और शनिदेव बुरे कर्मों का फल देने वाले होते हैं तो धर्मराज इस जन्म में यानी कि जब इंसान मर जाता है उस वक्त उस व्यक्ति के प्रारंभ में यह लिखते हैं कि वह क्या सजा पाएगा तो वह सजा उसे उस धर्म से दौड़ती है जिस धर्म में रह करके उसको उन कानूनों का पालन करना पड़ता है जिस कानून का पालन उसने अपने पिछले जन्म में नहीं किया था आपको पता ही होगा दोस्तों की हर जन्म हर धर्म मतलब आप जैसे कि हिंदू मुस्लिम सिख इसाई इन सब के कानून थोड़े थोड़े अलग हैं मतलब धर्म की संज्ञा थोड़ी थोड़ी अलग है घर में पूजा पाठ के कृत्य अलग-अलग हैं तो यह कृत्य भगवान ने इंसान में बुद्धि में डालकर के बनवाए हैं जिससे कि उनको इस जन्म में जो करना है वह अपने धर्म के अनुसार कर सके जैसे कि हिंदू धर्म में यह मान्यता है कि हम हां सुबह शाम पूजा-अर्चना करें और अपने देवताओं को अपने घर में विराजित करें मतलब कि आपको पता ही होगा जैसा कि नहीं भी पता है तो मैं बता देती हूं कि हम चिश्ती भगवान की दया अगरबत्ती करते हैं तो हमारे घर में ऐसा एटमॉस के हो जाता है कि हम भी उसी भगवान की तरह काम करने लगते हैं अर्थात जैसे कि कोई व्यक्ति श्री राम जी की पूजा करता है तो श्री राम जी की तरह ही वह मर्यादा पुरुषोत्तम रहने लगता है और यदि कोई व्यक्ति मां सरस्वती मां की पूजा करता है तो सरस्वती मां की तरह उसे विद्या मिलती है तो इसी प्रकार से मुस्लिम धर्म में भी नमाज की रवायत है तो वह नमाज उससे बिल्कुल और ईश्वर के करीब या अल्लाह के करीब ले जाती है तो अलग करीब आ जाने से ऐसा होता है कि वह अल्लाह की ही तरह आचरण को निभाने लगता है जो आचरण भगवान ने उसके लिए लिखा है और सिख धर्म में भी ऐसे ही है वह गुरु को मानते हैं और गुरु भी वही होते हैं जो भगवान की तरह होते हैं गुरु ज्ञान देने का काम करते हैं दुनिया को तो वह भी गुरु की ही तरह आचरण करते हैं और लोगों को ज्ञान देते हैं कि गुरु के सानिध्य में देखकर यह उनका आजीवन फलता फूलता है तो कहने का मतलब यह है कि जिस घर में पैदा होता है गुस्से में मरता है तो वह मरता है इसलिए है क्योंकि वह उस घर में पैदा हुआ है उनसे धर्म में उसको मारना है आप देखिए कि कोई व्यक्ति क्रिश्चियन धर्म के हो करके हिंदू बन जाइए हिंदू होकर के क्वेश्चन बन जाए तुम अपना धर्म परिवर्तन करा लेते हैं तो इसका मतलब यह कि वह अपने संस्कार को परिवर्तित कर लेते हैं किसी व्यक्ति को अगर हिंदू धर्म पसंद नहीं है तो वह मुस्लिम बन सकता है और किसी को मुस्लिम धर्म पसंद नहीं है तो वह हिंदू बन सकता है जैसे कि हमारे यहां की जिस की तरह मिस्त्री चली जा तू भी उसी धर्म की हो जाती है तो यह कहना तो उचित नहीं कि जिस धर्म में पैदा होता है उसी में अक्सर माता है यह स्वेच्छा पर है कि हम अपने कर्मों के अनुसार दूसरों के धर्म में जा भी सकते हैं और अपने धर्म से मुक्ति के पास रखते हैं तो अगर अपने धर्म में रहकर के मृत्यु को प्राप्त हो गए हैं तो वही धर्म है यह सोचना गलत होगा क्योंकि आपने देखा होगा कि एक स्त्री किसी दूसरे धर्म में विवाह कर लेती है तो वह दूसरे धर्म की हो जाती है और वहां जाकर ही मृत्यु को प्राप्त होती है ऐसा नहीं है कि वह अपने धर्म में आ कर के वापस में मरती है तो यह कहना उचित नहीं होगा सिर्फ इसका मतलब यही है कि जिस से धर्म में पैदा होता है उसी में मरे यह जरूरी नहीं है लेकिन अपने पूर्व जन्म के कर्मों के अनुसार उसे किस धर्म में और इस जन्म में अगर वह चाहता है तो कोई अच्छा सा धर्म परिवर्तन कर सकता है

dekhiye kis saal me insaan paida hota hai kya marta hai usko pata nahi hota vidhan sahi hai ya nahi toh shaam ko pata hai jo us ghar me paida hua hai aapko jaise pata hoga ki hum pichle janam ki kritiyon ka parinam ya dushparinaam apne is janam me paate hain toh aapko yah bhi pata hoga ki yah Dharamraj jo hai unke bhai hain shanidev aur shanidev bure karmon ka fal dene waale hote hain toh Dharamraj is janam me yani ki jab insaan mar jata hai us waqt us vyakti ke prarambh me yah likhte hain ki vaah kya saza payega toh vaah saza use us dharm se daudati hai jis dharm me reh karke usko un kanuno ka palan karna padta hai jis kanoon ka palan usne apne pichle janam me nahi kiya tha aapko pata hi hoga doston ki har janam har dharm matlab aap jaise ki hindu muslim sikh isai in sab ke kanoon thode thode alag hain matlab dharm ki sangya thodi thodi alag hai ghar me puja path ke kritya alag alag hain toh yah kritya bhagwan ne insaan me buddhi me dalkar ke banwaye hain jisse ki unko is janam me jo karna hai vaah apne dharm ke anusaar kar sake jaise ki hindu dharm me yah manyata hai ki hum haan subah shaam puja archna kare aur apne devatao ko apne ghar me virajit kare matlab ki aapko pata hi hoga jaisa ki nahi bhi pata hai toh main bata deti hoon ki hum chistee bhagwan ki daya agarbatti karte hain toh hamare ghar me aisa etamas ke ho jata hai ki hum bhi usi bhagwan ki tarah kaam karne lagte hain arthat jaise ki koi vyakti shri ram ji ki puja karta hai toh shri ram ji ki tarah hi vaah maryada purushottam rehne lagta hai aur yadi koi vyakti maa saraswati maa ki puja karta hai toh saraswati maa ki tarah use vidya milti hai toh isi prakar se muslim dharm me bhi namaz ki ravayat hai toh vaah namaz usse bilkul aur ishwar ke kareeb ya allah ke kareeb le jaati hai toh alag kareeb aa jaane se aisa hota hai ki vaah allah ki hi tarah aacharan ko nibhane lagta hai jo aacharan bhagwan ne uske liye likha hai aur sikh dharm me bhi aise hi hai vaah guru ko maante hain aur guru bhi wahi hote hain jo bhagwan ki tarah hote hain guru gyaan dene ka kaam karte hain duniya ko toh vaah bhi guru ki hi tarah aacharan karte hain aur logo ko gyaan dete hain ki guru ke sanidhya me dekhkar yah unka aajivan phalata fulta hai toh kehne ka matlab yah hai ki jis ghar me paida hota hai gusse me marta hai toh vaah marta hai isliye hai kyonki vaah us ghar me paida hua hai unse dharm me usko marna hai aap dekhiye ki koi vyakti Christian dharm ke ho karke hindu ban jaiye hindu hokar ke question ban jaaye tum apna dharm parivartan kara lete hain toh iska matlab yah ki vaah apne sanskar ko parivartit kar lete hain kisi vyakti ko agar hindu dharm pasand nahi hai toh vaah muslim ban sakta hai aur kisi ko muslim dharm pasand nahi hai toh vaah hindu ban sakta hai jaise ki hamare yahan ki jis ki tarah mistiri chali ja tu bhi usi dharm ki ho jaati hai toh yah kehna toh uchit nahi ki jis dharm me paida hota hai usi me aksar mata hai yah swachcha par hai ki hum apne karmon ke anusaar dusro ke dharm me ja bhi sakte hain aur apne dharm se mukti ke paas rakhte hain toh agar apne dharm me rahkar ke mrityu ko prapt ho gaye hain toh wahi dharm hai yah sochna galat hoga kyonki aapne dekha hoga ki ek stree kisi dusre dharm me vivah kar leti hai toh vaah dusre dharm ki ho jaati hai aur wahan jaakar hi mrityu ko prapt hoti hai aisa nahi hai ki vaah apne dharm me aa kar ke wapas me marti hai toh yah kehna uchit nahi hoga sirf iska matlab yahi hai ki jis se dharm me paida hota hai usi me mare yah zaroori nahi hai lekin apne purv janam ke karmon ke anusaar use kis dharm me aur is janam me agar vaah chahta hai toh koi accha sa dharm parivartan kar sakta hai

देखिए किस साल में इंसान पैदा होता है क्या मरता है उसको पता नहीं होता विधान सही है या नहीं

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Mursalin

Tailors

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आपका सवाल के इंसान जिस धर्म में पैदा होता है उसे मैं अक्सर मरता है अक्षर का मतलब होता है उसी में ही मरता है जबकि उसको पता नहीं होता कि वह धर्म सही है या गलत आप की क्या राय है सर साफ-साफ बात धर्म की अगर बात करें तो सही बात है कि सब धर्म सही नहीं होगी तो सब गलत भी नहीं है लेकिन यह खास जगह बात करने जा रहा हूं इसे एक बार जो समझेगा मैं कहता हूं कि अल्लाह और गॉड भगवान हूं सबका मालिक तो एक ही है हम जिसे पूजा जी से बात करते हैं वह सब एक ही है क्योंकि इंसान नृत्य का नाम है जिसके मौत आती है वह जीवन है जीवन को मौत आती है और मरने के बाद ही ईश्वर के पास जाता है और इश्वर के जो भी मतलब बनाया गया जगह वहां पर जाता है तो मैं कहता हूं कि धर्म गलत और सही हो कुछ हुआ नहीं है हम जिस से जिस मकसद से उसी पूजा करते हैं उस धर्म में रहकर उस ईश्वर की पूजा करते हैं या इबादत करते हैं जो भी तो वह हिसाब से देखा जाए तो हम अपने तरफ सही है गलत नहीं है लेकिन धर्म की बात करें तो धर्म हमें यह नहीं सिखाता कहीं किसकी झगड़ा का उससे झगड़ा कर वह सिखाने वाले धर्म पुजारी होते हैं जो कहा जाए तो मौलवी एम उल्ला पंडित क्रिश्चियन में जो बड़े-बड़े जो लीडर्स कहा जाए तो वह लोग में से ऐसे होते हैं जो कुछ हमको भट्ट कहते हैं गलत राह पर ले कर जाते बाकी धर्म में एक ही चीज का पूरा अधिकार है कि भाई चार की रखी है एक ईश्वर की बात प्रिय और धुआंधार अपना सर आइए थैंक यू

aapka sawaal ke insaan jis dharm me paida hota hai use main aksar marta hai akshar ka matlab hota hai usi me hi marta hai jabki usko pata nahi hota ki vaah dharm sahi hai ya galat aap ki kya rai hai sir saaf saaf baat dharm ki agar baat kare toh sahi baat hai ki sab dharm sahi nahi hogi toh sab galat bhi nahi hai lekin yah khas jagah baat karne ja raha hoon ise ek baar jo samjhega main kahata hoon ki allah aur god bhagwan hoon sabka malik toh ek hi hai hum jise puja ji se baat karte hain vaah sab ek hi hai kyonki insaan nritya ka naam hai jiske maut aati hai vaah jeevan hai jeevan ko maut aati hai aur marne ke baad hi ishwar ke paas jata hai aur ishvar ke jo bhi matlab banaya gaya jagah wahan par jata hai toh main kahata hoon ki dharm galat aur sahi ho kuch hua nahi hai hum jis se jis maksad se usi puja karte hain us dharm me rahkar us ishwar ki puja karte hain ya ibadat karte hain jo bhi toh vaah hisab se dekha jaaye toh hum apne taraf sahi hai galat nahi hai lekin dharm ki baat kare toh dharm hamein yah nahi sikhata kahin kiski jhagda ka usse jhagda kar vaah sikhane waale dharm pujari hote hain jo kaha jaaye toh maulavi M ulla pandit Christian me jo bade bade jo leaders kaha jaaye toh vaah log me se aise hote hain jo kuch hamko bhatt kehte hain galat raah par le kar jaate baki dharm me ek hi cheez ka pura adhikaar hai ki bhai char ki rakhi hai ek ishwar ki baat priya aur dhuaandhar apna sir aaiye thank you

आपका सवाल के इंसान जिस धर्म में पैदा होता है उसे मैं अक्सर मरता है अक्षर का मतलब होता है उ

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अस्सलाम वालेकुम भाई नमस्कार आप का सवाल है इंसान जिस धर्म में पैदा होता है उसी में अक्सर मरता है जबकि उसको पता नहीं होता है कि वह धर्म सही है या गलत है तो आप आपने यह सवाल पूछा तो उस पर बहुत से विशेषज्ञों ने अलग अलग तरह का जवाब दिया है सब लोगों ने अपनी अपनी राय रखी है मेरी अपनी राय को आज तक शामिल करना चाहता हूं आपके जवाब में मेरा मानना है कि धर्म हमेशा सही होता है वह गलत नहीं होता है उस धर्म के मानने वाले लोग गलत होते हैं जो उसका गलत मतलब गलत अर्थ निकालते हैं उसका गलत उपयोग करते हैं जिसके कारण उस धर्म का उन लोगों की वजह से बदनामी होती है इंसान हमेशा गलत होता है ना कि धर्म धर्म हमेशा ही अपने आप में सही है चाहे वह हिंदू हो मुस्लिम हो सिख हो इसाई हो है कोई भी धर्म हो वह हमेशा सही रहता है कुछ लोग होते हैं जो अपना धर्म बदल लेते हैं लेकिन यह उनकी मन की भावनाएं हैं वह क्यों बदलते हैं क्या कारण है बदलने का यह उनसे पहले आने वाले लोगों की वजह से उनका यह काम होता है जैसे कि अगर कोई मुस्लिम है तो वह अगर अरब पाकिस्तान के लोगों से मिलेगा वह जहाज के बारे में बात करेंगे दूसरे को मारना कुछ करना तबाही बचाना लेकिन इस्लाम धर्म में इसकी इजाजत नहीं देता है किसी को जानबूझकर मारा जाए बिना गलती का तो उन लोगों की वजह से धर्म की बदनामी होती लोग उस धर्म को गलत समझते हैं लेकिन धर्म अपने आप में सही होता है बस उसका उपयोग करने वाला सही हो अगर हमारी जवाब आपको अच्छा लगा हो तो आप हमें अपना हमारे यूट्यूब चैनल अरे साइंस पर फॉलो कर सकते हैं धन्यवाद

assalam walekum bhai namaskar aap ka sawaal hai insaan jis dharm me paida hota hai usi me aksar marta hai jabki usko pata nahi hota hai ki vaah dharm sahi hai ya galat hai toh aap aapne yah sawaal poocha toh us par bahut se vishesagyon ne alag alag tarah ka jawab diya hai sab logo ne apni apni rai rakhi hai meri apni rai ko aaj tak shaamil karna chahta hoon aapke jawab me mera manana hai ki dharm hamesha sahi hota hai vaah galat nahi hota hai us dharm ke manne waale log galat hote hain jo uska galat matlab galat arth nikalate hain uska galat upyog karte hain jiske karan us dharm ka un logo ki wajah se badnami hoti hai insaan hamesha galat hota hai na ki dharm dharm hamesha hi apne aap me sahi hai chahen vaah hindu ho muslim ho sikh ho isai ho hai koi bhi dharm ho vaah hamesha sahi rehta hai kuch log hote hain jo apna dharm badal lete hain lekin yah unki man ki bhaavnaye hain vaah kyon badalte hain kya karan hai badalne ka yah unse pehle aane waale logo ki wajah se unka yah kaam hota hai jaise ki agar koi muslim hai toh vaah agar arab pakistan ke logo se milega vaah jahaj ke bare me baat karenge dusre ko marna kuch karna tabaahi bachaana lekin islam dharm me iski ijajat nahi deta hai kisi ko janbujhkar mara jaaye bina galti ka toh un logo ki wajah se dharm ki badnami hoti log us dharm ko galat samajhte hain lekin dharm apne aap me sahi hota hai bus uska upyog karne vala sahi ho agar hamari jawab aapko accha laga ho toh aap hamein apna hamare youtube channel are science par follow kar sakte hain dhanyavad

अस्सलाम वालेकुम भाई नमस्कार आप का सवाल है इंसान जिस धर्म में पैदा होता है उसी में अक्सर मर

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