ऐसा क्या है जो आप चाहते हैं की भारत में सामाजिक रूप से स्वीकार्य होना चाहिए?...


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मेरे हिसाब से भारत में सामाजिक रूप से स्वीकार्य अपने स्वयं के विचार को प्रस्तुत करने की होनी चाहिए हां आज अगर हम अपने विचार सामाजिक रुप में अगर हम भेजते हैं तो हमारे विचारों को कड़ी निंदा की जाती है उसके बारे में यह नहीं पूछा कि हमारे विचार कितने सही है या कितने गलत बयानबाजी शुरू हो जाती है जैसे कि अभी पद्मावती फिल्म पद्मावती में लेकिन किसी ने क्या पूछा कि पद्मावती में सही में भी गलत नहीं है क्या किसी ने भी तो समझ को समझना होगा सोचना होगा उसके ऊपर चिंतन मनन करने के बाद हमें कोई हमें कोई डिसीजन लेना चाहिए क्योंकि बिना चिंतन मनन करें आजकल कुछ नहीं हो सकता हम एक इंसान हैं हम सबसे पहले कुछ सोचना होगा कि उसकी विचार में अगर सही है और अगर गलत भी है तो हमें उसे स्वीकार लेना है बस उस को फॉलो नहीं करना है लेकिन आजकल इंडिया जैसे एक महान स्वतंत्र और आजादी वाले देश में जहां पर महापुरुष जन्मे हुए हैं वहां पर हम ऐसे ही मुर्ख जैसे किसी को भी बस फॉलो किए जा रहे हैं भले अफवाहें फैला रहे आजकल देखे WhatsApp पर भी कितनी जल्दी फेक न्यूज़ पहली गली जा रही है तो हमें यह सब रोकना होगा हमें दूसरों के विचार को समझना होगा और अगर वह सही है तो उसे आगे बढ़ो बिना सोचे समझे आगे बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है जय हिंद वंदे मातरम

mere hisab se bharat mein samajik roop se svikarya apne swayam ke vichar ko prastut karne ki honi chahiye haan aaj agar hum apne vichar samajik roop mein agar hum bhejate hain toh hamare vicharon ko kadi ninda ki jaati hai uske bare mein yah nahi poocha ki hamare vichar kitne sahi hai ya kitne galat bayanbazi shuru ho jaati hai jaise ki abhi padmavati film padmavati mein lekin kisi ne kya poocha ki padmavati mein sahi mein bhi galat nahi hai kya kisi ne bhi toh samajh ko samajhna hoga sochna hoga uske upar chintan manan karne ke baad hamein koi hamein koi decision lena chahiye kyonki bina chintan manan kare aajkal kuch nahi ho sakta hum ek insaan hain hum sabse pehle kuch sochna hoga ki uski vichar mein agar sahi hai aur agar galat bhi hai toh hamein use sweekar lena hai bus us ko follow nahi karna hai lekin aajkal india jaise ek mahaan swatantra aur azadi waale desh mein jaha par mahapurush janme hue hain wahan par hum aise hi murkh jaise kisi ko bhi bus follow kiye ja rahe hain bhale afwayen faila rahe aajkal dekhe WhatsApp par bhi kitni jaldi fake news pehli gali ja rahi hai toh hamein yah sab rokna hoga hamein dusro ke vichar ko samajhna hoga aur agar vaah sahi hai toh use aage badho bina soche samjhe aage badhane ki koi zarurat nahi hai jai hind vande mataram

मेरे हिसाब से भारत में सामाजिक रूप से स्वीकार्य अपने स्वयं के विचार को प्रस्तुत करने की हो

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मेरी राय में भारत जैसे विशाल एवं संस्कृत देश में यौन संबंधों पर सार्वजनिक चर्चा एक सामान्य वर्षा होना चाहिए और स्कूलों में भी यह एक अनिवार्य विषय होना चाहिए इसके लिए योग्य शिक्षकों की नियुक्ति रहनी चाहिए ताकि किशोर उम्र से ही बच्चों में सामान्य बात करें कोई झिझक चर्म संकोच का विषय में यौन संबंधों के अनैतिक तरीकों से होने वाली हानियों के बारे में भी लोगों को जागरुक करने के प्रचार और प्रसार को भी सामान्य विज्ञापनों की तरह ही दिखाया जाए जिससे यह सिर्फ वयस्कों की बात ना रहे और बच्चों की मानसिकता कुंठित जो गलत धारणा वाली ना आखिर कंडोम के विज्ञापन की समय सीमा को निर्धारित करने की जरूरत है जब सेनेटरी पैड का विज्ञापन एक सामान्य विज्ञापन हेतु बल्कि इसके साथ ही कम उम्र में कई लोगों से शारीरिक संबंध बनाने से होने वाली हानि को भी सामान्य रोजमर्रा के विज्ञापनों के जरिए दिखाया जाना चाहिए क्योंकि बहुत सारी यौन समस्या बच्चे अपने बड़ों से नहीं पूछ पाते कोई सटीक जानकारी नहीं रहती या आधी अधूरी जानकारी में सही निर्णय नहीं ले पाते इसीलिए एक बौद्धिक समाज में यौन संबंध एक सामान्य विषय होना चाहिए

meri rai mein bharat jaise vishal evam sanskrit desh mein yaun sambandhon par sarvajanik charcha ek samanya varsha hona chahiye aur schoolon mein bhi yah ek anivarya vishay hona chahiye iske liye yogya shikshakon ki niyukti rehni chahiye taki kishore umr se hi baccho mein samanya baat kare koi jhijhak charm sankoch ka vishay mein yaun sambandhon ke anaitik trikon se hone wali haaniyon ke bare mein bhi logo ko jagruk karne ke prachar aur prasaar ko bhi samanya vigyapanon ki tarah hi dikhaya jaaye jisse yah sirf vayaskon ki baat na rahe aur baccho ki mansikta kunthit jo galat dharana wali na aakhir condom ke vigyapan ki samay seema ko nirdharit karne ki zarurat hai jab sanitary pad ka vigyapan ek samanya vigyapan hetu balki iske saath hi kam umr mein kai logo se sharirik sambandh banane se hone wali hani ko bhi samanya rozmarra ke vigyapanon ke jariye dikhaya jana chahiye kyonki bahut saree yaun samasya bacche apne badon se nahi puch paate koi sateek jaankari nahi rehti ya aadhi adhuri jaankari mein sahi nirnay nahi le paate isliye ek baudhik samaj mein yaun sambandh ek samanya vishay hona chahiye

मेरी राय में भारत जैसे विशाल एवं संस्कृत देश में यौन संबंधों पर सार्वजनिक चर्चा एक सामान्य

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Pragati

Aspiring Lawyer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मैं यह तो नहीं कहूंगी कि क्या है जो मैं चाहती हूं जो भारत में स्वीकार हो लेकिन मैं यह जरूर कहना चाहूंगी कि मैं उन लोगों को स्वीकार करवाना चाहती हूं भारत में चले हम भारत में हीन भावना से देखते हैं वह है किन्नर प्रजाति तो मैं चाहूंगी कि हमारे भारत में लोग किन्नर प्रजाति को सामाजिक रुप से स्वीकार करना शुरु करें उनको वही सम्मान मिले जो कि आम आदमी और औरत को मिलता है उनको लोग ऐसा ना ऐसा ना समझे कि वह एक अलग इंसान है जो हमारे बीच नहीं रह सकते हमारे बीच नहीं खा पी सकते उनको एक अलग दर्जा ना देकर उनको हमारे जैसा समझ कर सभी लोग स्वीकार करेंगे तभी शायद उन लोगों के बीच जो हीन भावना पैदा हो चुकी है उनके लिए सबके अंदर वह सब काम हो सकती है और उनको भी हवा मनुष्य की तरह हम देख सकते हैं

main yah toh nahi kahungi ki kya hai jo main chahti hoon jo bharat mein sweekar ho lekin main yah zaroor kehna chahungi ki main un logo ko sweekar karwana chahti hoon bharat mein chale hum bharat mein heen bhavna se dekhte hain vaah hai kinnar prajati toh main chahungi ki hamare bharat mein log kinnar prajati ko samajik roop se sweekar karna shuru kare unko wahi sammaan mile jo ki aam aadmi aur aurat ko milta hai unko log aisa na aisa na samjhe ki vaah ek alag insaan hai jo hamare beech nahi reh sakte hamare beech nahi kha p sakte unko ek alag darja na dekar unko hamare jaisa samajh kar sabhi log sweekar karenge tabhi shayad un logo ke beech jo heen bhavna paida ho chuki hai unke liye sabke andar vaah sab kaam ho sakti hai aur unko bhi hawa manushya ki tarah hum dekh sakte hain

मैं यह तो नहीं कहूंगी कि क्या है जो मैं चाहती हूं जो भारत में स्वीकार हो लेकिन मैं यह जरूर

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