धर्म बड़ा है या कर्म?...


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कर्म बड़ा है

karm bada hai

कर्म बड़ा है

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सर्व धर्म कर्म धर्म से ही कर्म जो जैसा कर्म करोगे वैसा फल शाम को पूजा के सामान समझकर निश्चित रूप से कर्म करोगे ऐसे फल प्राप्त करें

surv dharm karm dharm se hi karm jo jaisa karm karoge waisa fal shaam ko puja ke saamaan samajhkar nishchit roop se karm karoge aise fal prapt kare

सर्व धर्म कर्म धर्म से ही कर्म जो जैसा कर्म करोगे वैसा फल शाम को पूजा के सामान समझकर निश्

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देखिए कर्म से बड़ा वजन अधिक करना शादी करना खेलना खुद नहीं सब कर्म ईश्वर उपासना परोपकार यह सब धर्म तो कर्म से पहले धर्म धर्म धर्म

dekhiye karm se bada wajan adhik karna shadi karna khelna khud nahi sab karm ishwar upasana paropkaar yah sab dharm toh karm se pehle dharm dharam dharam

देखिए कर्म से बड़ा वजन अधिक करना शादी करना खेलना खुद नहीं सब कर्म ईश्वर उपासना परोपकार यह

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

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धर्म-कर्म दोनों का ही समान महत्व मैं भगवान से बड़ा करम है मैं कर्म से बड़ा धर्म है दोनों पर ही संबंधी होना चाहिए दोनों समान है धर्म उसे कहते हैं जो धारण की जाता है जुलूस जो संकल्प किया जाता है और उसका एक साधन है दोनों का एक दूसरे से संबंध भी है देखी आज के समय में धर्म से रहित होकर के कर्म किए जा रहे हैं परिणाम श्रुति देखो बद से बदतर किसकी है इसलिए ना धर्म बुरा ना कर्म बुरा है लेकिन आप बड़े होते हैं आपने यदि इंसानियत के प्रति और इंसान को इंसान की उन्नति में सहयोग करना चाहिए इंसान को इंसान के हितकारी काम करना चाहिए इंसानियत ही सबसे बड़ी है दारू से भी बड़ी है कर्म से भी बड़ी है किंतु आज के राजनीतिज्ञों ने इसको धर्म से जोड़ दिया जाति से छोड़ दिया इसलिए तुम देख रहे हो मुझे तो बहुत बहुत बहुत महान रहा है इसलिए आज कितने लोगों ने जो राजनीति कर अपने स्वार्थों के कारण से धर्म से जोड़ दिया धर्म-कर्म से युक्त आना चाहिए कर्म के आधार पर ही धर्म होता है कर्म और तुम दोनों एक समान दोनों पर ही समंदर में चाहिए और धर्म कर्म पर अगर कर्ता कर्म धर्म पर आधारित करता है

dharm karma donon ka hea saman mahatva chahiye main bhagwan se bada karam hai karma se bada dharm hai donon per hea sambadhee hona chahie donon saman hai dharm usse kehte hain joe dharan ki jaata hai juloosh joe sankalp kiya jaata hai aur uska ek sadhana hai donon ka ek dusre se sambandh bhi hai chahiye dekhi aj K samay mein chahiye dharm se rahit hokra K karma kiye ja rahe hain parinam shruti dekho bad se badtar kiski hai chahiye eeslie na dharm bura na karma bura hai lekin aap bade hote hain aapne yadi insaaniyat K prati aur insaan co insaan ki unnati mein sahyog krna chahie insaan co insaan K hitkari kama krna chahie insaaniyat hea sabse badi hai daaru se bhi badi hai karma se bhi badi hai kitu aj K rajnitigyon ne isko dharm se jod diya jati se chod diya eeslie tum dekh rahe ho mujhe to bahut bahut bahut mahan raha hai eeslie aj kitne logo ne joe rajniti car apne swarthon K karan se dharm se jod diya chahiye dharm karma se yukta aana chahie karma K aadhaar per hea dharm hota hai chahiye karma aur tum donon ek saman donon per hea samandar mein chahie aur dharm karma per agar karta karma dharm per aadhaarit karata hai

धर्म-कर्म दोनों का ही समान महत्व मैं भगवान से बड़ा करम है मैं कर्म से बड़ा धर्म है दोनों

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Dr Kanahaiya

Dr Kanahaiya Reki Grand Masstr Apt .Sujok .Homyopathy .

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नमस्कार दोस्तों आपका प्रश्न खराब कर रहा है या कर्म मैं धर्म बड़ा है क्योंकि धर्म क्या है धर्म एक ज्ञान ज्ञान आपको बताता है कैसी कर्म करना चाहिए आपको मालूम नहीं पड़ेगा कैसे काम करना है तो आप कैसे कर्म करोगे तो ज्ञानी आप आदमी को कर्म करवाता है और ज्ञान नहीं यह तो करा दी कोई कर्म नहीं कर सकता कोई क्लियर कर सकता इसलिए धर्म बड़ा है धर्म यानी ज्ञान ज्ञान बढ़ाए ज्ञानी मनुष्य ही कर्म कर पाते हो जिसको ज्ञान नहीं है तो कोई कारण नहीं करता वह पक्का पापड़ पड़ा सोता है

namaskar doston aapka prashna kharab kar raha hai ya karm main dharm bada hai kyonki dharm kya hai dharm ek gyaan gyaan aapko batata hai kaisi karm karna chahiye aapko maloom nahi padega kaise kaam karna hai toh aap kaise karm karoge toh gyani aap aadmi ko karm karwata hai aur gyaan nahi yah toh kara di koi karm nahi kar sakta koi clear kar sakta isliye dharm bada hai dharm yani gyaan gyaan badhae gyani manushya hi karm kar paate ho jisko gyaan nahi hai toh koi karan nahi karta vaah pakka papad pada sota hai

नमस्कार दोस्तों आपका प्रश्न खराब कर रहा है या कर्म मैं धर्म बड़ा है क्योंकि धर्म क्या है ध

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Hari Ram

Spiritual/Religious Guru

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बड़ा हमेशा धर्म होता है धर्म ही है जो आदमी को अच्छा कर्म कराना सिखाता है बड़ा हमेशा धर्म है धर्म जैसा होगा वैसा ही आदमी कर्म करेगा धर्म के हिसाब से ही आदमी कर्म करता है कर्म करता है तभी आदमी का पता चलता है कि यह कितना धार्मिक है धर्म है तभी ही आदमी अच्छा कर्म करेगा जय हिंद

bada hamesha dharm hota hai dharm hi hai jo aadmi ko accha karm krana sikhata hai bada hamesha dharm hai dharm jaisa hoga waisa hi aadmi karm karega dharm ke hisab se hi aadmi karm karta hai karm karta hai tabhi aadmi ka pata chalta hai ki yah kitna dharmik hai dharm hai tabhi hi aadmi accha karm karega jai hind

बड़ा हमेशा धर्म होता है धर्म ही है जो आदमी को अच्छा कर्म कराना सिखाता है बड़ा हमेशा धर्म ह

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Vimla Bidawatka

Spiritual Thinker

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धर्म बड़ा है या कर्म मेरे ख्याल से कर्म सबसे बड़ा है धर्म सब एक है यह तो हमने लकीरें खींच दिए कि यह मुसलमान है हिंदू या सिख इसाई है यह हमने बनाया है यह भगवान की तरफ से हमें नहीं मिला है कि तुम इस धर्म के हो तुमको यह काम करना चाहिए लेकिन कर्म आप कर्मों से पहचाने जाते हो आप अगर मरने के बाद अगर आप ऊपर जाते हो या भगवान के पास जाते हो तो जिम्मेदार हूं कि आप ने मनुष्य जन्म पाकर क्या कर्म किए क्या अपनी इंसानियत का कर्म किए जानवर के कर्म करके आए हो तो सबसे बड़ा धर्म से गर्म है और कर्म ही हम साथ लेकर जाते हैं ऊपर धर्म साथ में लेकर जाते हैं हमने धर्म का पालन किया कि नहीं मंदिर गए कि नहीं मस्जिद गए कि नहीं 5th में नमाज पढ़ी कि नहीं उससे ज्यादा हमने किसी गरीब की मदद की कि नहीं अगर कोई दुखी है तो हमने उसको सुख पहुंचाया कि नहीं यह हमने किसी से द्वेष नहीं किया हमने किसी हमारे से किसी को कष्ट तो नहीं पहुंचा ये जो हमारे कर्म ही हमसे हमारी पहचान है और यह हमारे साथ जाएंगे कोई उपाय ऐसा कुछ हमारे साथ में जाएगा जो हमने काम किया है जो हमने कर्म किए हैं वह हमारी पहचान है और वह हमारे साथ जाएंगे लोग धर्म वाले को याद नहीं करते जिस ने क्या काम किया क्या कर्म है उसके लोग उसको याद करते मरने के बाद भी जो अच्छे कर्म करते हो वह जाने जाते हैं अच्छे कर्मों के कारण तो धर्म से बहुत बड़ा धर्म है धर्म अपनी जगह है लेकिन कर्म बहुत बड़ा है

dharm bada hai ya karma mere khyala se karma sabse bada hai dharm sub ek hai yeh to humne lakeeren khinch die qi yeh muslim hai hindu ya sikh isai hai yeh humne banaya hai yeh bhagwan ki tarf se human nahin milaa hai qi tum is dharm K ho tumko yeh kama krna chahie lekin karma aap karmo se pahchane jaate ho aap agar marney K baad agar aap upar jaate ho ya bhagwan K pass jaate ho to jimmedar hoon qi aap ne manusya janm paakara kya karma kiye kya apni insaaniyat ka karma kiye zanwar K karma karake ae ho to sabse bada dharm se germa hai aur karma hea hum sathe lycra jaate hain upar dharm sathe mein lycra jaate hain humne dharm ka palan kiya qi nahin mandir ge qi nahin masjid ge qi nahin 5th mein namaj padhi qi nahin usase jyada humne kisi garib ki madada ki qi nahin agar koi dukhi hai to humne usko sukh pahunchaya qi nahin yeh humne kisi se dwesh nahin kiya humne kisi hamare se kisi co kusht to nahin pohcha ye joe hamare karma hea humse hamari pehchan hai aur yeh hamare sathe jaenge koi upay aisa kuch hamare sathe mein jaaegaa joe humne kama kiya hai joe humne karma kiye hain wah hamari pehchan hai aur wah hamare sathe jaenge log dharm wale co youth nahin karte jisha ne kya kama kiya kya karma hai uske log usko youth karte marney K baad bhi joe achchhe karma karte ho wah jane jaate hain achchhe karmo K karan to dharm se bahut bada dharm hai dharm apni jagah hai lekin karma bahut bada hai

धर्म बड़ा है या कर्म मेरे ख्याल से कर्म सबसे बड़ा है धर्म सब एक है यह तो हमने लकीरें खींच

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सबसे बड़ा कर्म होता है धर्म नहीं

sabse bada karm hota hai dharm nahi

सबसे बड़ा कर्म होता है धर्म नहीं

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कर्म ही प्रधान है क्योंकि हमारे कर्म के अनुसार ही यह ज्ञात होता है कि हमने कर्म धर्म करा है या धर्म करा इसलिए कर्म ही प्रधान है

karm hi pradhan hai kyonki hamare karm ke anusaar hi yah gyaat hota hai ki humne karm dharm kara hai ya dharm kara isliye karm hi pradhan hai

कर्म ही प्रधान है क्योंकि हमारे कर्म के अनुसार ही यह ज्ञात होता है कि हमने कर्म धर्म करा ह

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Ramandeep Singh

Waheguru industry

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धर्म को चलाने के लिए कर्म चाहिए और कर्म को अच्छा बनाने के लिए धर्म चाहिए धार्मिक कर्म ही सर्वोच्च है ना तो अकेला धर्म चल सकता है ना ही अकेला कर्म चल सकता है एक ना एक जगह जगह माना जाए तो कर्म गलत सही हो सकते हैं चल सकता है गलत सही हो सकते हैं लेकिन धर्म और कर्म दोनों को इकट्ठा करके चलाएंगे तो कहीं ना कहीं हमको हमारे मंजिल की प्राप्ति होगी हमको उस परमात्मा ईश्वर की प्राप्ति होगी धन्यवाद

dharm ko chalane ke liye karm chahiye aur karm ko accha banane ke liye dharm chahiye dharmik karm hi sarvoch hai na toh akela dharm chal sakta hai na hi akela karm chal sakta hai ek na ek jagah jagah mana jaaye toh karm galat sahi ho sakte hain chal sakta hai galat sahi ho sakte hain lekin dharm aur karm dono ko ikattha karke chalayenge toh kahin na kahin hamko hamare manjil ki prapti hogi hamko us paramatma ishwar ki prapti hogi dhanyavad

धर्म को चलाने के लिए कर्म चाहिए और कर्म को अच्छा बनाने के लिए धर्म चाहिए धार्मिक कर्म ही स

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Deepak

Godly Sewa Mai Samrpit

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धर्म और कर्म धर्म बड़ा है या कर पहले हम यह दोनों बातों को समझने धर्म क्या होता कर्म क्या होता है देखिए वास्तव में इस धरती पर तीन अविनाशी सताए जो बताई गई है आत्मा परमात्मा और यह प्राकृतिक प्राकृतिक मानचित्र तू आ जाती धरती अकाल जल अग्नि वायु और इनके साथ में आ जाती है जीव जगत सारा इस प्राकृतिक के अंदर तीन अविनाशी सकता है आत्मा परमात्मा और जीव जगत की प्राकृतिक यह तीनों एक अविनाशी का नाटक जैसे कोई नाटक का एक लिखा हुआ स्क्रिप होता है जिसके तहत उस फिल्म का शूटिंग किया जाता है उस अनुसार वह एक पेड़ नाटक कोई आए कहानी कोई और फिल्म को पूरा किया जाता है वैसे ही इस नाटक को जिसमें आत्मा और परमात्मा और अप्राकृतिक पांचों तत्व जिस खेल पीरियड में पूरे होते हैं 5000 साल के चक्कर को इसको कह सकते हैं कि धर्म क्योंकि जिस आधार पर इसको पूर्ण पूर्ण होना है क्रिया को पूर्ण की जाने वाली है और इसमें जो न्याय प्रक्रिया होने वाली है पहले सच्चाई सफाई थी बीच में झूठ आता है फिर झूठा अति हो जाता तो झूठ का यह पाप का अंत करके फिर से पुनर्स्थापना कर दी जाती है तो यह धर्म के न्याय प्रक्रिया के अनुसार होता है एक धर्म यह भी होता है दूसरा धर्म उसको कहा जाता है जो आत्मा का धर्म होता है आत्मा का धर्म जैसे कि मैं आत्मा हूं तो आज का इंसान धर्मप्रकाश समझता मानवता का धर्म इंसानियत का धर्म अधर्म आज दूषित रूप में पहुंच गया है तो वह लोग अपने को हिंदू मुस्लिम सिख इसाई धर्म जाति पार्टी के रूप से मांगते हैं लेकिन यह कोई धर्म नहीं होता हिंदू होना मुस्लिम होना सिख इसाई धर्म नहीं धर्म का अर्थ होता है धारणा धारणा क्या चीज की होनी वास्तव में आत्मा की रूहानियत की धारणा आत्मिक ता की धारणा जो सभी को एक समान दृष्टि से देखें एक प्रकार की न्याय प्रक्रिया हो सबके लिए एक समान हो सबके लिए सुखदाई हो धर्म न्याय प्रक्रिया जो बनी हुई होती है धर्म की धारणा कि वह सब की सुविधा के लिए बनी होती है धर्म इंसान को या आत्माओं को सुख देने के लिए बहुत धर्म के लिए आत्मा ही नहीं बनी होती है धर्म बनता है आत्मा को सुख देने के लिए लेकिन आज उल्टा चलता है धर्म के लिए इंसान बन चुका है और अपने हिसाब से उसको मारता रहता है तो होता रहता है या फिर अपने मतलब से उसको जो भी चाहे वह गलत सिद्ध करके उसका बेनिफिट उठाने को स्नातक वह धर्म नहीं और ना ही हिंदू मुस्लिम सिख इसाई कल है यह धर्म में आत्मा अंगों का धर्म ईश्वर के लिए बोलते हैं कि ईश्वर सदा ही सत्य है वह सदा ही सत्य का साथ देता है हमेशा सहारा देता है कोई कितना भी बड़ा पापी हो लेकिन उसको भी माफी मांगने पर माफ कर देता है प्रकृति कभी धर्म होता है पांचों तत्व का जो जैसा कर्म क्या होता है उसको वैसा ही शरीर प्रदान करती है उसको उसी अनुसार पांचों तत्व का बना हुआ यह जीव जगत है तो पांचों तत्वों का जो शरीर मिलता है जो जैसा कर्म क्या होता है उसी अनुसार इसके शरीर में इफेक्ट डिफेक्ट परफेक्ट यह बनता बिगड़ता रहता है तो वह और कर्म क्या होता है कर्म जैसे कि इस धर्म की धारणा के आधार पर जो हम उसका रूप प्रतिरूप देते हैं उसके लिए जो कर्म करते हैं वह है करें तो यूं कह सकते हैं एक शॉर्ट में की आत्मिक रूप में हम इंसानियत का यहां महात्माओं का कर्म धर्म है सुख शांति पवित्रता प्रेम शक्ति आनंद और ज्ञान सुख में रहना शांति में नैना प्रेम में रहना प्रेम से मतलब सभी से पवित्र भाव से रहना ज्ञान युक्त भाव से रहना आनंद स्वरूप भाव से रहना रहम दिल भाव से रहना यह सब हुआ हाथ एकता का धर्म और यह धर्म रहकर में जो कर्म करता हूं आत्मिक ता भाव में रहकर जो कर्म करूं सब के लिए प्रैक्टिकल रूप 2 प्रैक्टिकल कार करूं उसको बोलते हैं करो कि यह धर्म और कर्म यह दोनों है आदित्य आध्यात्मिक के आधार पर ओके ओम शांति पड़ा सॉरी आपको एक बात और बताएं धर्म बड़ा है या कर हम कह सकते हैं पहला आत्माओं का धर्म है क्योंकि बिना धर्म के कोई भी कर्म किया हुआ पाप कर्म चला जाता है क्योंकि कार्य में भी तीन प्रकार को तत्काल अकर्म विकर्म कर्म तो कर्म होता ही है साधारण कर्म कोई विक्रम कर रहे हो सांस लेते रहे इंसान कोई चाहे आचे करम करना करे लेकिन सांस लेने का कर्म करना है देखने का कर्म कर रहा है सोने उठने बैठने का मन सन्यासी भी हो सन्यासी बोलते हम कर्म सन्यास ले लिया वह समझते घर किसी को छोड़ देना कर्म सन्यास और कर्म का सन्यास से कभी हो ही नहीं सकता क्योंकि कर्म करने के लिए भगवान ने शरीर दिया है और शरीर के अंदर कर्म इंद्रियां है तो कर्म इंदिरा चाहे जंगल में जाओ चाहे घर गिरस्ती सांस लेना उठना बैठना खाना-पीना यह भी तो कर्म है कि कर्म तो कहीं पर भी जाओगे वह कर्म तो करना ही पड़ेगा तो कर्म कभी रोक नहीं सकता जब तक शरीर है साथ और लेकिन जो धर्म के आधार पर कर्म विकर्म होता है जो बिना धर्म के ज्ञान के बिना कोई है ज्ञान के आधार पर जो कर्म करते हैं यदि भान में जो कर्म करते हुए भी कर्म होता है और कर्म वह जो आत्मिक ता भाव में टिक्कड़ जो हम कर्म करते हैं की आत्मा कर्म कर रही है शरीर के द्वारा उस कर्म को अकरम खा जाता है तो यह करम हुआ लेकिन यह कार में भी धर्म से छोटा होता है क्योंकि धर्म हर एक चीज का समझ है ज्ञान है मानता हूं कि जैसे कि एक उदाहरण देकर मुझे जाना है यहां से 2 किलोमीटर आगे सामने रास्ता ऊपर नीचे उबर खाबर है तो आंखें क्या करेगी रास्ते को देखने का काम करेगी बीच में नदी तालाब झड़ने जंगल झाड़ सब कुछ है खाली वही सब है आंखें क्या करती हैं देखने का कार्य करती है किधर रास्ते पर कैसे कैसे जाना है और चलने का कार्य करता है अब कहे की आंखें बड़ी की शाम की कृपा हो तो वह रास्ता तय करेगी लेकिन तब कर सकेगी ना जब आपकी सही होगा तब तो इसीलिए आंखों को पहले मेन मान जाएगा आंखों को एक आधार क्योंकि वह देखने का का कर रही है समझने का कार्य कर रही है इसी प्रकार से क्यों क्यों करनी चलने के लिए तो चल भी लेगा कर भी लेगा आंखों के बिना तो चल भी ले लेकिन परिणाम उल्टा ही होगा दुखदाई हो गा और आखिर ही भले कर्म ना करें लेकिन वह पाप कर्म तो नहीं होगा दिखेगा तो नहीं बात पहुंच तोड़ेगा तो नहीं इधर उधर बैठकर का तो नहीं एक जग जानता है कि उस रास्ते पर जाने लेकिन पाव चल नहीं है तेरा साथ नहीं दे रहा है चल कोई पाप कर्म है आंखें नहीं है फिर भी हम चले जा रहे हैं लेकिन उसका परिणाम बहुत बुरा होगा हाथों तोड़ेगा मरेगा इसीलिए कहते हैं करना करने से अच्छा है कर्म आप कर्म करने से अच्छा के कुछ कर्म कुछ नहीं करनी ना करो ना पूरा करो तो इसमें कुछ तो नहीं होगा और घर वही है जो हमें सही और गलत का रास्ता बता दे इसलिए धर्म बड़ा है कर्म की वजह ओके ओम शांति

dharm aur karm dharm bada hai ya kar pehle hum yah dono baaton ko samjhne dharm kya hota karm kya hota hai dekhiye vaastav me is dharti par teen avinashi sataye jo batai gayi hai aatma paramatma aur yah prakirtik prakirtik manchitra tu aa jaati dharti akaal jal agni vayu aur inke saath me aa jaati hai jeev jagat saara is prakirtik ke andar teen avinashi sakta hai aatma paramatma aur jeev jagat ki prakirtik yah tatvo ek avinashi ka natak jaise koi natak ka ek likha hua scrip hota hai jiske tahat us film ka shooting kiya jata hai us anusaar vaah ek ped natak koi aaye kahani koi aur film ko pura kiya jata hai waise hi is natak ko jisme aatma aur paramatma aur apraakrtik panchon tatva jis khel period me poore hote hain 5000 saal ke chakkar ko isko keh sakte hain ki dharm kyonki jis aadhar par isko purn purn hona hai kriya ko purn ki jaane wali hai aur isme jo nyay prakriya hone wali hai pehle sacchai safaai thi beech me jhuth aata hai phir jhutha ati ho jata toh jhuth ka yah paap ka ant karke phir se punarsthapana kar di jaati hai toh yah dharm ke nyay prakriya ke anusaar hota hai ek dharm yah bhi hota hai doosra dharm usko kaha jata hai jo aatma ka dharm hota hai aatma ka dharm jaise ki main aatma hoon toh aaj ka insaan dharmaprakash samajhata manavta ka dharm insaniyat ka dharm adharma aaj dushit roop me pohch gaya hai toh vaah log apne ko hindu muslim sikh isai dharm jati party ke roop se mangate hain lekin yah koi dharm nahi hota hindu hona muslim hona sikh isai dharm nahi dharm ka arth hota hai dharana dharana kya cheez ki honi vaastav me aatma ki ruhaniyat ki dharana atmik ta ki dharana jo sabhi ko ek saman drishti se dekhen ek prakar ki nyay prakriya ho sabke liye ek saman ho sabke liye sukhdayi ho dharm nyay prakriya jo bani hui hoti hai dharm ki dharana ki vaah sab ki suvidha ke liye bani hoti hai dharm insaan ko ya atmaon ko sukh dene ke liye bahut dharm ke liye aatma hi nahi bani hoti hai dharm banta hai aatma ko sukh dene ke liye lekin aaj ulta chalta hai dharm ke liye insaan ban chuka hai aur apne hisab se usko maarta rehta hai toh hota rehta hai ya phir apne matlab se usko jo bhi chahen vaah galat siddh karke uska benefit uthane ko snatak vaah dharm nahi aur na hi hindu muslim sikh isai kal hai yah dharm me aatma angon ka dharm ishwar ke liye bolte hain ki ishwar sada hi satya hai vaah sada hi satya ka saath deta hai hamesha sahara deta hai koi kitna bhi bada papi ho lekin usko bhi maafi mangne par maaf kar deta hai prakriti kabhi dharm hota hai panchon tatva ka jo jaisa karm kya hota hai usko waisa hi sharir pradan karti hai usko usi anusaar panchon tatva ka bana hua yah jeev jagat hai toh panchon tatvon ka jo sharir milta hai jo jaisa karm kya hota hai usi anusaar iske sharir me effect defect perfect yah banta bigadta rehta hai toh vaah aur karm kya hota hai karm jaise ki is dharm ki dharana ke aadhar par jo hum uska roop pratirup dete hain uske liye jo karm karte hain vaah hai kare toh yun keh sakte hain ek short me ki atmik roop 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aankhen kya karegi raste ko dekhne ka kaam karegi beech me nadi taalab jhadne jungle jhad sab kuch hai khaali wahi sab hai aankhen kya karti hain dekhne ka karya karti hai kidhar raste par kaise kaise jana hai aur chalne ka karya karta hai ab kahe ki aankhen badi ki shaam ki kripa ho toh vaah rasta tay karegi lekin tab kar sakegi na jab aapki sahi hoga tab toh isliye aakhon ko pehle main maan jaega aakhon ko ek aadhar kyonki vaah dekhne ka ka kar rahi hai samjhne ka karya kar rahi hai isi prakar se kyon kyon karni chalne ke liye toh chal bhi lega kar bhi lega aakhon ke bina toh chal bhi le lekin parinam ulta hi hoga dukhdai ho jaayega aur aakhir hi bhale karm na kare lekin vaah paap karm toh nahi hoga dikhega toh nahi baat pohch todega toh nahi idhar udhar baithkar ka toh nahi ek jag jaanta hai ki us raste par jaane lekin paav chal nahi hai tera saath nahi de raha hai chal koi paap karm hai aankhen nahi hai phir bhi hum chale ja rahe hain lekin uska parinam bahut bura hoga hathon todega marega isliye kehte hain karna karne se accha hai karm aap karm karne se accha ke kuch karm kuch nahi karni na karo na pura karo toh isme kuch toh nahi hoga aur ghar wahi hai jo hamein sahi aur galat ka rasta bata de isliye dharm bada hai karm ki wajah ok om shanti

धर्म और कर्म धर्म बड़ा है या कर पहले हम यह दोनों बातों को समझने धर्म क्या होता कर्म क्या ह

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Akshay Pratap Singh

motivational Speker Business Coach And Lab Technician

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सबसे बड़ा कर्म होता है ना कि धर्म माली जी नरेंद्र मोदी ना क्योंकि लोग जाति से पहचानते हैं बल्कि उनके कर्म से पहचानते हैं लोग

sabse bada karm hota hai na ki dharm maali ji narendra modi na kyonki log jati se pehchante hain balki unke karm se pehchante hain log

सबसे बड़ा कर्म होता है ना कि धर्म माली जी नरेंद्र मोदी ना क्योंकि लोग जाति से पहचानते हैं

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Prem Singh

Teacher

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धर्म जो है वह कर्म से बड़ा नहीं है कर्म बड़ा होता है धर्म बड़ा नहीं होता है कर्म के अकॉर्डिंग अगर हम देखा जाए थोड़ा सांविधिक संविदा के अंतर्गत जाते हैं तो वहां पर हम देखते हैं कि कर्म के आधार पर धर्मों का विभाजन किया गया है यहां बाद में धर्म बना दिए गए हैं बट पहले कर्म पोटेंट होता है कर्म करने से ही हम किसी भी धर्म के चला सकते अगर हम किसी दूसरे धर्म का कार्य कार्य कार्य कर रहे हैं उसके कोडिंग कर्म कर रहे हैं कि मांग की जली हम उस धर्म के कोडिंग आ जाएंगे और अगर हम किसी दूसरे धर्म अगर हिंदू धर्म मुस्लिम धर्म सिक्ख धर्म ईसाई धर्म किसी भी धर्म के अंतर्गत अगर काम करते हैं तो जिस दिन के लिए हम काम करें उस दिन कि व्यक्ति के रूप में हमें लोग जानने और पहचानने लग जाएंगे थोड़े से भक्ति के बाद में बट इंपोर्टेंट नहीं रखता कि धर्म क्या है सबसे ज्यादा इंपोर्टेंट होता है कर्म अगर हम कर्म कर रहे हैं वह सबसे ज्यादा इंपोर्टेंट है यानी कि घर में सबसे बड़ा होता है

dharam jo hai vaah karm se bada nahi hai karm bada hota hai dharm bada nahi hota hai karm ke according agar hum dekha jaaye thoda samvidhik samvida ke antargat jaate hain toh wahan par hum dekhte hain ki karm ke aadhar par dharmon ka vibhajan kiya gaya hai yahan baad mein dharm bana diye gaye hain but pehle karm potent hota hai karm karne se hi hum kisi bhi dharm ke chala sakte agar hum kisi dusre dharm ka karya karya karya kar rahe hain uske coding karm kar rahe hain ki maang ki jali hum us dharm ke coding aa jaenge aur agar hum kisi dusre dharm agar hindu dharm muslim dharm sikkh dharm isai dharm kisi bhi dharm ke antargat agar kaam karte hain toh jis din ke liye hum kaam kare us din ki vyakti ke roop mein hamein log jaanne aur pahachanne lag jaenge thode se bhakti ke baad mein but important nahi rakhta ki dharm kya hai sabse zyada important hota hai karm agar hum karm kar rahe hain vaah sabse zyada important hai yani ki ghar mein sabse bada hota hai

धर्म जो है वह कर्म से बड़ा नहीं है कर्म बड़ा होता है धर्म बड़ा नहीं होता है कर्म के अकॉर्ड

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धर्म बड़ा है या कर्म तो वैसे देखा जाए तो धर्म के साथ-साथ कर्म भी करते रहो क्योंकि कर्म तो बड़ा है ही लेकिन साथ में धर्म भी बड़ा है

dharm bada hai ya karm toh waise dekha jaaye toh dharm ke saath saath karm bhi karte raho kyonki karm toh bada hai hi lekin saath me dharm bhi bada hai

धर्म बड़ा है या कर्म तो वैसे देखा जाए तो धर्म के साथ-साथ कर्म भी करते रहो क्योंकि कर्म तो

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कुछ सवाल धर्म बड़ा या कर्म आपका जवाब मुझे आपसे ही होना चाहिए घर जब तक हम नहीं करेंगे किसी भी धर्म का पालन नहीं कर सकते धर्म अलग-अलग सबका अलग-अलग धर्म का पालन कोई करता नहीं है आपकी लोग इसको तक तो बोले कि नष्ट कर चुका तो कर्म जब तक हम करेंगे नहीं धर्म कोई भी नहीं माने आएंगे कर्म बड़ा हो सकता है अगर जवाब आपके से शुरू करें कमेंट में जरूर बताएं लगता है कि मेरी धारणा मेरी देखने की दृष्टिकोण हो गई है

kuch sawaal dharm bada ya karm aapka jawab mujhe aapse hi hona chahiye ghar jab tak hum nahi karenge kisi bhi dharm ka palan nahi kar sakte dharm alag alag sabka alag alag dharm ka palan koi karta nahi hai aapki log isko tak toh bole ki nasht kar chuka toh karm jab tak hum karenge nahi dharm koi bhi nahi maane aayenge karm bada ho sakta hai agar jawab aapke se shuru kare comment mein zaroor bataye lagta hai ki meri dharana meri dekhne ki drishtikon ho gayi hai

कुछ सवाल धर्म बड़ा या कर्म आपका जवाब मुझे आपसे ही होना चाहिए घर जब तक हम नहीं करेंगे किसी

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भाई कर्म सबसे बड़ा है तब तक तुम करोगे नहीं करोगे तो धर्म कहां से ऊपर कर्म यह सबसे बड़ा है इससे बड़ा कुछ नहीं है

bhai karm sabse bada hai tab tak tum karoge nahi karoge toh dharm kaha se upar karm yah sabse bada hai isse bada kuch nahi hai

भाई कर्म सबसे बड़ा है तब तक तुम करोगे नहीं करोगे तो धर्म कहां से ऊपर कर्म यह सबसे बड़ा है

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Ruchi

Student

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धर्म बड़ा है या कर्म है क्रिश्चन श्री में ना धर्म बुरा ना कर्म बड़ा और इनको देखा जाए तो पहली बार कहता है कि किसी भी मनुष्य का कोई स्पेसिफिक धर्म होता ही नहीं है अगर कोई धर्म है तो है मानवता का धर्म मैंने पी इससे बड़ा कोई धर्म नहीं है और यही कर्म है यही धर्म है और यही करम है अपनी मानवता मनुष्यता को निभाना ही उसका धर्म वही उसका कर्म है जैसे कर्म करोगे वैसा फल मिलता है कहते हैं ना कर्म पर ही जिंदगी आने वाला फ्यूचर आने वाला जन्म सब कुछ कर उन पर ही निर्भर होता और जो कर्म है हमारा जो कर्म करते हैं वही हमारा धर्म होता है कैसा भी काम कर रहे हो कुछ भी काम कर रहे हैं किसी भी लेवल पर कर रहे हैं कोई भी कर्म छोटा या बड़ा अच्छा या बुरा नहीं होता कर्म सिर्फ कर्म होता है और जो अपने कर्म को तन मन से सच्ची श्रद्धा से करता है वही उसका सबसे बड़ा धर्म होता है

dharm bada hai ya karm hai christian shri me na dharm bura na karm bada aur inko dekha jaaye toh pehli baar kahata hai ki kisi bhi manushya ka koi specific dharm hota hi nahi hai agar koi dharm hai toh hai manavta ka dharm maine p isse bada koi dharm nahi hai aur yahi karm hai yahi dharm hai aur yahi karam hai apni manavta manushyata ko nibhana hi uska dharm wahi uska karm hai jaise karm karoge waisa fal milta hai kehte hain na karm par hi zindagi aane vala future aane vala janam sab kuch kar un par hi nirbhar hota aur jo karm hai hamara jo karm karte hain wahi hamara dharm hota hai kaisa bhi kaam kar rahe ho kuch bhi kaam kar rahe hain kisi bhi level par kar rahe hain koi bhi karm chota ya bada accha ya bura nahi hota karm sirf karm hota hai aur jo apne karm ko tan man se sachi shraddha se karta hai wahi uska sabse bada dharm hota hai

धर्म बड़ा है या कर्म है क्रिश्चन श्री में ना धर्म बुरा ना कर्म बड़ा और इनको देखा जाए तो पह

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Vinod Sharma

Hypnotist

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कर्म बढ़ाएं

karm badhaye

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धर्म से बड़ा सबसे ज्यादा कर्म बड़ा होता है

dharm se bada sabse zyada karm bada hota hai

धर्म से बड़ा सबसे ज्यादा कर्म बड़ा होता है

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बोलो

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कर्म जीवन का मूल तत्व है मानव जीवन का मूल तत्व सेवा सत्कार में सेवा सदन के द्वारा ही भरपूर बड़ा धन कमाया जा सकता है टेंशन फ्री ग्रेट एंड स्मार्ट लाइफ को हासिल किया जा सकता है सीक्रेट सीखने हेतु संपर्क करें पीएस यादव 98375 35360

karm jeevan ka mul tatva hai manav jeevan ka mul tatva seva satkar me seva sadan ke dwara hi bharpur bada dhan kamaya ja sakta hai tension free great and smart life ko hasil kiya ja sakta hai secret sikhne hetu sampark kare PS yadav 98375 35360

कर्म जीवन का मूल तत्व है मानव जीवन का मूल तत्व सेवा सत्कार में सेवा सदन के द्वारा ही भरपूर

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विक्रम बड़ा है जब हमारे कर्म सही होंगे तभी हम लोग धर्म की रास्ता पर चल सकते इसलिए कर्म सर्वश्रेष्ठ है और धर्म कर्म के बाद में धर्म आता

vikram bada hai jab hamare karm sahi honge tabhi hum log dharm ki rasta par chal sakte isliye karm sarvashreshtha hai aur dharm karm ke baad me dharm aata

विक्रम बड़ा है जब हमारे कर्म सही होंगे तभी हम लोग धर्म की रास्ता पर चल सकते इसलिए कर्म सर

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एप्स लूट ली कर्म बड़ा या धर्म के हिसाब से कर्म करो या कर्म के धागों से धर्म करो बात एक ही है लेकिन स्पष्ट बता देता हूं आपको के अच्छे कर्म ही धर्म तो अपने आप हो जाएगा जरूर नहीं है कि आपका धर्म क्या कहता है इंसान पीठ हेल्प करो

apps loot li karma bada ya dharm K hisaab se karma karo ya karma K dhaagon se dharm karo baat ek hea hai lekin spasht bata deta hoon aapko K achchhe karma hea dharm to apne aap ho jaaegaa jarur nahin hai qi aapka dharm kya kehta hai insaan peeth help karo

एप्स लूट ली कर्म बड़ा या धर्म के हिसाब से कर्म करो या कर्म के धागों से धर्म करो बात एक ही

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