जिन शब्दों के रूप में विकार या परिवर्तन आता है वह क्या कहलाता है?...


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Kavita Chandak

Psychologist, Psychotherapist

1:17
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आपका प्रश्न है कि जिन शब्दों के रूप में भी कार्य परिवर्तन है आता है उसे क्या कहते हैं शब्द कहेंगे शब्दों के रूप में विकार आता है मैं जानती हूं जैसे आप कहें कि विपक्षी शब्दावली में भी ले सकते हैं कि व्यक्ति से बहुत संयमित रहता है कंट्रोल्ड रहता है और बैलेंस रहता है तो यह तो हुआ इसका एक रूप यह भी चीज को मैं जैसे मैं कहूं हिटलर लाइक भी परिवर्तन होता है यदि व्यक्ति को फॉलो नहीं करता है उस आर्डर को उस जैसे प्लेन को उस आर्डर कोई इंजेक्शन को रोटेशन के तहत दी गई है तो वह उसमें उसको पनिश कहता है कि यही डिस्क्रु हो गया थैंक यू

aapka prashna hai ki jin shabdon ke roop me bhi karya parivartan hai aata hai use kya kehte hain shabd kahenge shabdon ke roop me vikar aata hai main jaanti hoon jaise aap kahein ki vipakshi shabdavli me bhi le sakte hain ki vyakti se bahut sanyamit rehta hai controlled rehta hai aur balance rehta hai toh yah toh hua iska ek roop yah bhi cheez ko main jaise main kahun hitler like bhi parivartan hota hai yadi vyakti ko follow nahi karta hai us order ko us jaise plane ko us order koi injection ko rotation ke tahat di gayi hai toh vaah usme usko punish kahata hai ki yahi diskru ho gaya thank you

आपका प्रश्न है कि जिन शब्दों के रूप में भी कार्य परिवर्तन है आता है उसे क्या कहते हैं शब्द

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vikram mani tiwari

आध्यत्मिक गुरु

5:47
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका सवाल है जिन शब्दों के रूप में विकार या परिवर्तन आता है वह क्या कहलाता है तो विकार या परिवर्तन आना इसको हम मानसिक बीमारी का सकते हैं या मानसिक कमजोरी भी कह सकते हैं यार उसको हम कह सकते हैं कि हमारे मस्तिष्क में केमिकल का अभाव हो तो हो चुका कम ज्यादा हो रहा है असंतुलन है तू कई भाषा में इसको कई शब्दों में बांट सकते हैं लेकिन अगर विकास आता है तो वह किस कौन सा निकाल है अवसाद का विकास है या इंग्लिश में जिसको बाइपोलर डिसऑर्डर बोलते हैं पृथ्वी बेकार है या ओसीडी है आपसे से कंपनी डिसाइड है जिसमें बार-बार हाथ धोना साला चेक करना नहीं मानसिक रोग बहुत है और एक आंकड़ा मैं आपको बता देना चाहता हूं कि शाम में 9:00 8% रोगी जो होते जो रोगी होते हैं 100 में 90% मानसिक रोग से ग्रसित होते हैं उनके उनको शरीर में कोई पीड़ा होती ही नहीं है जो दो पर्सेंट रोगी हैं उनमें कैंसर के रोगी हैं उनमें टीवी के हैं उनमें डायबिटीज के हैं और हृदय के हैं और ज्यादातर रोग रोग जो होते हैं वह मानसिक रूप के ही कारण होते हैं और मानसिक रोग के काम हमें सबसे पहला रोग होता है हाइपरटेंशन जिसको पोल पर ब्लड ब्लड प्रेशर ब्लड प्रेशर भी सब लोगों की जान है तो ऐसे हम अप्रत्यक्ष रूप से कह सकते हैं कि अगर हम मानसिक रूप से स्वस्थ एवं शारीरिक रूप से भी स्वस्थ ही रहेंगे और अगर हमें शारीरिक रूप से स्वस्थ दीर्घायु और लंबा जीवन जीना है तो हमें कहीं ना कहीं अपने मानसिक स्वास्थ्य की ओर भी ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है अब आओ अब हम बात आते हैं आजकल की जो बहुत बड़ी समस्या बन गई है डिप्रेशन अवसाद के ऊपर तो कहने को तो सबकी छोटा साहिब और साहस लेकिन जब आदमी अवसाद ग्रस्त होता है अवसाद ग्रस्त व्यक्ति तभी होता है जब वह अभावग्रस्त होता है जिस दिन व्यक्ति को किसी चीज का अभाव होता है उसी दिन से वह अवसाद की ओर चलता है फिर अगर आप हाउस उसका खत्म भी हो गया तब भी अब क्योंकि वह साथ की ओर बढ़ चला है तू रुकेगा नहीं उसके अंदर नकारात्मक विचार आने शुरू हो जाएंगी इतने आएंगे आएंगे अभी तक तो वह अवसाद का शिकार था फिर वह गिरधारी भी कार्य तमाम मानसिक रोगों का शिकार हो सकता है तो हमें कुछ नहीं करना है मैंने कुछ ध्यान पद्धतियां है वैदिक कालीन आज इनको मैंने आज के आधुनिक परिपेक्ष में डाला हुआ है वह आप उसे लोगों से निवेदन करूंगा कि आप लोग अगर मानसिक रूप से स्वस्थ रहना है तो हूं वह जल्द उसको अवश्य करें अपनी आंखों को बंद कर ले उसके बाद जो भी जगह आपको अच्छी लगती हो जिस जगह से आप का प्रयोग है चाहे वह पहाड़ हो चाहे वह कोई मंदिर हो चाहे वह कोई तीर्थ स्थलों चाहे वह आपका अपना घर हो जब आप का पैतृक निवास हो चाहे जो हो आंखें बंद करके आपको उसकी 5 मिनट तक कल्पना करने कि हम उस आपको उसी पांच आंख बंद करके उसी 5 मिनट के अंदर जीना है उसी जी उसी जगह में आपको यह आवाज करना कि मैं सोच रहा हूं यह दिल्ली अगर आप 5 मिनट एक करेंगे फिर उसके बाद जिस भी धर्म को मानते हैं पूजा-पाठ और यह काबा अगर आप करते रहेंगे तो नीचे आपको मानसिक रूप से बहुत स्वस्थ रहेंगे और कोशिश यह करें कि सूर्य की टाटा की किरणें जो है वह आपके शरीर पर पड़े यह भी हमारे मानसिक स्वास्थ्य बहुत गहरा असर करती है और ओम शब्द का दिन में कम से कम 100 बार तो उच्चारण 11 करेगा सोनक अर्पण 250 250 न कर पाए तो 25 बार उच्चारण करें उनका उनका एक उच्चारण करके आपको बता दे रहा हूं कि कैसे करना है आखरी का जो मां है उसको आप को बुलाना है और अनुभव करना कि हमारे दिमाग में पूरा उसकी ध्वनि गूंज रही है तो यह सब मैंने तरीके आपको बताया बहुत आसान तरीके किसी व्यवस्था में आप बैठकर लेट के कर सकते हैं और एक सुखद मानसिक जीवन जी सकते हैं और किसी विकार मानसिक विकार या किसी मानसिक परिवर्तन के बगैर मैं विक्रमण तिवारी हूं अयोध्या पुलिस एक आध्यात्मिक गुरु धन्यवाद

aapka sawaal hai jin shabdon ke roop me vikar ya parivartan aata hai vaah kya kehlata hai toh vikar ya parivartan aana isko hum mansik bimari ka sakte hain ya mansik kamzori bhi keh sakte hain yaar usko hum keh sakte hain ki hamare mastishk me chemical ka abhaav ho toh ho chuka kam zyada ho raha hai asantulan hai tu kai bhasha me isko kai shabdon me baant sakte hain lekin agar vikas aata hai toh vaah kis kaun sa nikaal hai avsad ka vikas hai ya english me jisko bipolar disorder bolte hain prithvi bekar hai ya OCD hai aapse se company decide hai jisme baar baar hath dhona sala check karna nahi mansik rog bahut hai aur ek akanda main aapko bata dena chahta hoon ki shaam me 9 00 8 rogi jo hote jo rogi hote hain 100 me 90 mansik rog se grasit hote hain unke unko sharir me koi peeda hoti hi nahi hai jo do percent rogi hain unmen cancer ke rogi hain unmen TV ke hain unmen diabetes ke hain aur hriday ke hain aur jyadatar rog rog jo hote hain vaah mansik roop ke hi karan hote hain aur mansik rog ke kaam hamein sabse pehla rog hota hai hypertension jisko pole par blood blood pressure blood pressure bhi sab logo ki jaan hai toh aise hum apratyaksh roop se keh sakte hain ki agar hum mansik roop se swasth evam sharirik roop se bhi swasth hi rahenge aur agar hamein sharirik roop se swasth dirghayu aur lamba jeevan jeena hai toh hamein kahin na kahin apne mansik swasthya ki aur bhi dhyan dena atyant aavashyak hai ab aao ab hum baat aate hain aajkal ki jo bahut badi samasya ban gayi hai depression avsad ke upar toh kehne ko toh sabki chota sahib aur saahas lekin jab aadmi avsad grast hota hai avsad grast vyakti tabhi hota hai jab vaah abhaavgrast hota hai jis din vyakti ko kisi cheez ka abhaav hota hai usi din se vaah avsad ki aur chalta hai phir agar aap house uska khatam bhi ho gaya tab bhi ab kyonki vaah saath ki aur badh chala hai tu rukega nahi uske andar nakaratmak vichar aane shuru ho jayegi itne aayenge aayenge abhi tak toh vaah avsad ka shikaar tha phir vaah girdhari bhi karya tamaam mansik rogo ka shikaar ho sakta hai toh hamein kuch nahi karna hai maine kuch dhyan paddhatiyan hai vaidik kaleen aaj inko maine aaj ke aadhunik paripeksh me dala hua hai vaah aap use logo se nivedan karunga ki aap log agar mansik roop se swasth rehna hai toh hoon vaah jald usko avashya kare apni aakhon ko band kar le uske baad jo bhi jagah aapko achi lagti ho jis jagah se aap ka prayog hai chahen vaah pahad ho chahen vaah koi mandir ho chahen vaah koi tirth sthalon chahen vaah aapka apna ghar ho jab aap ka paitrik niwas ho chahen jo ho aankhen band karke aapko uski 5 minute tak kalpana karne ki hum us aapko usi paanch aankh band karke usi 5 minute ke andar jeena hai usi ji usi jagah me aapko yah awaaz karna ki main soch raha hoon yah delhi agar aap 5 minute ek karenge phir uske baad jis bhi dharm ko maante hain puja path aur yah Kaba agar aap karte rahenge toh niche aapko mansik roop se bahut swasth rahenge aur koshish yah kare ki surya ki tata ki kirne jo hai vaah aapke sharir par pade yah bhi hamare mansik swasthya bahut gehra asar karti hai aur om shabd ka din me kam se kam 100 baar toh ucharan 11 karega sonak arpan 250 250 na kar paye toh 25 baar ucharan kare unka unka ek ucharan karke aapko bata de raha hoon ki kaise karna hai aakhri ka jo maa hai usko aap ko bulana hai aur anubhav karna ki hamare dimag me pura uski dhwani goonj rahi hai toh yah sab maine tarike aapko bataya bahut aasaan tarike kisi vyavastha me aap baithkar late ke kar sakte hain aur ek sukhad mansik jeevan ji sakte hain aur kisi vikar mansik vikar ya kisi mansik parivartan ke bagair main vikraman tiwari hoon ayodhya police ek aadhyatmik guru dhanyavad

आपका सवाल है जिन शब्दों के रूप में विकार या परिवर्तन आता है वह क्या कहलाता है तो विकार या

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