गुरु परशुराम कौन सी जाति के बच्चों को पढ़ाते थे?...


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गुरु परशुराम किस जाति के बच्चों को पढ़ाते थे ऐसे खाते थे यह सीमा नहीं है वह प्रत्येक व्यक्ति या बालक जो ब्राह्मणों को धारण करने पर अजीब होता था यह शक्ल निशा से परशुराम को प्रभावित कर लेता था परशुराम उसे ही पढ़ाते थे

guru parshuram kis jati ke baccho ko padhate the aise khate the yah seema nahi hai vaah pratyek vyakti ya balak jo brahmanon ko dharan karne par ajib hota tha yah shakl nisha se parshuram ko prabhavit kar leta tha parshuram use hi padhate the

गुरु परशुराम किस जाति के बच्चों को पढ़ाते थे ऐसे खाते थे यह सीमा नहीं है वह प्रत्येक व्यक्

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भगवान परशुराम ब्राह्मण जाति के बच्चों को शिक्षा देते थे आप लोगों के मन में यह प्रश्न हवा से उठ रहा होगा कि ब्राह्मण यानी कि भगवान भी क्या करूं को फॉलो करते हैं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है भगवान जातिवाद को फॉलो नहीं करते उनके हिसाब से ब्राह्मण का अर्थ था जिसमें वह गुण मतलब वैदिक काल के सिद्धांत को मानते थे कि जिस बच्चे में सीखने की क्षमता हो जिस बच्चे में सीखने के लिए ललक हो जिस बच्चे में सीखने और सिखाने का गुण उस बच्चे को वह ब्राह्मण मानते थे यदि मैं यह सिर्फ कह देता कि ब्राह्मण को भगवान परशुराम शिक्षा देते हैं तो आपके मन में यह प्रश्न उठता कि तब भगवान ने महामहिम भीष्म को कैसे शिक्षा दी थी 28 भीष्म पितामह के नाम से आप जानते हो मैंने आपको एक्सप्लेन किया कि क्यों उन्होंने भीष्म पितामह को भी शिक्षा दी क्योंकि वह उन्हें ब्राह्मण में कर्ण का यह दोष नहीं ताकि वह सूत पुत्र कर्ण का यह दोस्त था कि उन्होंने अपने गुरु से झूठ बोला था और उन्हें इसका दंड गुरुदेव में नहीं बल्कि प्रकृति के नियम नहीं दिया हम भी झूठ बोलते हैं तो हमें भी इसका सजा मिलता है भगवान परशुराम ने कोई शौक नहीं दिया क्योंकि शराब यदि कोई महान व्यक्ति देता है तो उस रात कोई चमत्कार नहीं होता वह मात्र प्रकृति का नियम होता है जो कि शराब के जरिए बता दिया जाता है कि जैसे कि हमें महाभारत के अंत में हमने देखा था कि भगवान श्री कृष्ण को गांधारी के द्वारा श्राप मिला था तो भगवान श्रीकृष्ण ने भी कहा था कि आप का श्राप नहीं है यह मेरी नियति है मैंने मैं अपने कर्मों का ही फल प्राप्त करूंगा और यह मेरे जाने का एक मार्ग टो बे निवाडा क्योंकि आपको मेरे उत्तर से थोड़ी मदद मिली होगी

bhagwan parshuram brahman jati ke baccho ko shiksha dete the aap logo ke man me yah prashna hawa se uth raha hoga ki brahman yani ki bhagwan bhi kya karu ko follow karte hain aisa bilkul bhi nahi hai bhagwan jaatiwad ko follow nahi karte unke hisab se brahman ka arth tha jisme vaah gun matlab vaidik kaal ke siddhant ko maante the ki jis bacche me sikhne ki kshamta ho jis bacche me sikhne ke liye lalak ho jis bacche me sikhne aur sikhane ka gun us bacche ko vaah brahman maante the yadi main yah sirf keh deta ki brahman ko bhagwan parshuram shiksha dete hain toh aapke man me yah prashna uthata ki tab bhagwan ne mahamhim bhishma ko kaise shiksha di thi 28 bhishma pitamah ke naam se aap jante ho maine aapko explain kiya ki kyon unhone bhishma pitamah ko bhi shiksha di kyonki vaah unhe brahman me karn ka yah dosh nahi taki vaah sut putra karn ka yah dost tha ki unhone apne guru se jhuth bola tha aur unhe iska dand gurudev me nahi balki prakriti ke niyam nahi diya hum bhi jhuth bolte hain toh hamein bhi iska saza milta hai bhagwan parshuram ne koi shauk nahi diya kyonki sharab yadi koi mahaan vyakti deta hai toh us raat koi chamatkar nahi hota vaah matra prakriti ka niyam hota hai jo ki sharab ke jariye bata diya jata hai ki jaise ki hamein mahabharat ke ant me humne dekha tha ki bhagwan shri krishna ko gandhari ke dwara shraap mila tha toh bhagwan shrikrishna ne bhi kaha tha ki aap ka shraap nahi hai yah meri niyati hai maine main apne karmon ka hi fal prapt karunga aur yah mere jaane ka ek marg toe be nivada kyonki aapko mere uttar se thodi madad mili hogi

भगवान परशुराम ब्राह्मण जाति के बच्चों को शिक्षा देते थे आप लोगों के मन में यह प्रश्न हवा स

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