सुप्रीम कोर्ट क्या है? यह कैसे बना? क्या सुप्रीम कोर्ट का हर फ़ैसला सही होता है?...


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Govind Saraf

Entrepreneur

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सुप्रीम कोर्ट को हम लोगों ने उच्च न्यायालय के आधार पर हम देखते हैं सुप्रीम कोर्ट से ट्यूशन में एक बहुत ही ऊंचा दर्जा दिया गया है न्यायालय के तौर पर जहां पर न्याय सबको परोसा जाता है जिन्हें भी दिक्कत होती है जलन सूजन होती है सुप्रीम कोर्ट के पास जाकर ने न्याय की मांग मानते हैं सबसे बड़ी बात है सुप्रीम कोर्ट का फैसला सही होता है सुप्रीम कोर्ट का फैसला की बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट सब उतर जाता है इमोशंस पर नहीं तो सुप्रीम कोर्ट सबूतों के आधार पर जो फैसला देता है तो वह फैसला देखने के लिए टाइम सही होता है लेकिन बहुत बार जो है सबूत कम होते हैं सबूत पहुंचा रिपीट नहीं किए जाते हैं या फिर सपूतों की कमी के वजह से सुप्रीम कोर्ट का फैसला कभी-कभी में गिनी में सुप्रीम कोर्ट का अपमान नहीं करना चाहता हूं लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कभी-कभी थोड़ा सा डिफरेंस नजर आ सकता है क्योंकि इसमें गलती सुप्रीम कोर्ट कि नहीं इसमें गलती जो है सबूतों पर जो पेश की गई है वह गलती है तो पूरे सबूत नहीं पेश किए गए इसलिए सुप्रीम कोर्ट को सिर डाइव कभी-कभी थोड़ा डिफरेंट डिफरेंट देना पड़ता है तो इसमें गलती पूरी सुप्रीम कोर्ट के एक दम नहीं है और उच्च न्यायालय पर आज भी हमें भरोसा है कि पूरे देश को न्यायालय उच्च न्यायालय न्याय है न्याय देता है

supreme court ko hum logo ne ucch nyayalaya ke aadhaar par hum dekhte hain supreme court se tuition mein ek bahut hi uncha darja diya gaya hai nyayalaya ke taur par jaha par nyay sabko parosa jata hai jinhen bhi dikkat hoti hai jalan sujan hoti hai supreme court ke paas jaakar ne nyay ki maang maante hain sabse badi baat hai supreme court ka faisla sahi hota hai supreme court ka faisla ki baat yah hai ki supreme court sab utar jata hai emotional par nahi toh supreme court sabuton ke aadhaar par jo faisla deta hai toh vaah faisla dekhne ke liye time sahi hota hai lekin bahut baar jo hai sabut kam hote hain sabut pohcha repeat nahi kiye jaate hain ya phir saputon ki kami ke wajah se supreme court ka faisla kabhi kabhi mein gini mein supreme court ka apman nahi karna chahta hoon lekin supreme court ke faisle mein kabhi kabhi thoda sa difference nazar aa sakta hai kyonki isme galti supreme court ki nahi isme galti jo hai sabuton par jo pesh ki gayi hai vaah galti hai toh poore sabut nahi pesh kiye gaye isliye supreme court ko sir dive kabhi kabhi thoda different different dena padta hai toh isme galti puri supreme court ke ek dum nahi hai aur ucch nyayalaya par aaj bhi hamein bharosa hai ki poore desh ko nyayalaya ucch nyayalaya nyay hai nyay deta hai

सुप्रीम कोर्ट को हम लोगों ने उच्च न्यायालय के आधार पर हम देखते हैं सुप्रीम कोर्ट से ट्यूशन

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