प्रगतिवादी युग की दो विशेषताएं?...


user

Chandan Singh

want to become IPS Officer

3:46
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हेलो फ्रेंड्स गुड मॉर्निंग आपका प्लस नहीं की प्रगतिवादी युग की दो विशेषताएं बताएं दोस्त प्रगतिवादी कभी जो है वो छायवादी कवि भी कहे जाते हैं जैसे आपका निराला पंत महादेवी वर्मा यह सभी जो कमियां रही कवि और कवित्री रहे यह सब छायवादी कवि के साथ-साथ प्रगतिवादी साहित्यकार भी रहे दोस्त प्रगतिवादी युग की दो प्रमुख विशेषताएं निर्णय पहला प्रगतिवादी साहित्य कार्य कवि ईश्वर को सृष्टि का कर्ता नहीं मानते थे बल्कि मानवता की शक्ति में विश्वास रखते थे इन कवियों को ईश्वर की सत्ता आत्मा परलोक भाग्य धर्म स्वर्ग नरक इत्यादि पर किसी तरह का विश्वास नहीं था दोस्त दूसरा प्रगतिवादी कवि क्रांति में विश्वास रखते हैं उनकी लिखी हुई साहित्य क्रांति से परिपूर्ण साहित्य होता था क्योंकि वह पूंजीवादी व्यवस्था और शोषण की साम्राज्य अर्थात साम्राज्यवादी व्यवस्था का साथ विरोध करते थे यह शोषण के साम्राज्य को समूल नष्ट करने के लिए विरोध का स्वर लिखते थे अपने साहित्य में अपने किताब में अपने उपन्यास में प्रगतिवादी साहित्यकार धरती पर ही स्वर्ग बनाना चाहते थे अर्थात उनके अनुसार शोषण दल अर्थात जिनका शोषण हो रहा था जैसे ही मजदूर किसान के साथ-साथ नारियों का भी शोषण होता था अर्थात नालियों को भी सामान अधिकार नहीं मिला हुआ था नारी को भोग की वस्तु समझा जाता था नारी को घर से बाहर निकलने नहीं दिया जाता था उनके जीवन पर आजादी नहीं थी ना उन्हें शिक्षा ग्रहण करने की आजादी की ना मंदिरों में जाने की आजादी थी साथ ही बाजार भी नहीं जा सकती थी अर्थात पूरी तरह उनको परदे में रहने के लिए विवश किया जाता था तो इस तरह की विभिन्न ताई वाली जो व्यवस्था थी उन व्यवस्थाओं का अंत करना चाहते थे और एक ही तरह का पूरे देश में अधिकार को प्रदान करवाना चाहते थे इसलिए उन्होंने अपने साहित्य में हर बार पूंजी वादियों के विरुद्ध में लिखा करते थे दोस्त पूरे समाज का भेदभाव को मिटाना चाहते थे प्रगतिवादी कवि और पूरे समाज को एक ही डिस्ट्रिक्ट कौन से देखने की बात करते थे और वह कहते थे कि इस भेदभाव जब यह भेद-भाव मिट जाएगी गरीबी अमीरी और मर्द और स्टीरियो वाली भाव भेदभाव मिट जाएगी खत्म हो जाएगी तो धरती स्वर्ग से भी बढ़िया बन जाएगा धरती स्वर्ग से भी बढ़कर बन जाएगा

hello friends good morning aapka plus nahi ki pragativadi yug ki do visheshtayen bataye dost pragativadi kabhi jo hai vo chayvadi kavi bhi kahe jaate hain jaise aapka niraala pant mahadevi verma yah sabhi jo kamiyan rahi kavi aur kaviyatri rahe yah sab chayvadi kavi ke saath saath pragativadi sahityakaar bhi rahe dost pragativadi yug ki do pramukh visheshtayen nirnay pehla pragativadi sahitya karya kavi ishwar ko shrishti ka karta nahi maante the balki manavta ki shakti me vishwas rakhte the in kaviyon ko ishwar ki satta aatma parlok bhagya dharm swarg narak ityadi par kisi tarah ka vishwas nahi tha dost doosra pragativadi kavi kranti me vishwas rakhte hain unki likhi hui sahitya kranti se paripurna sahitya hota tha kyonki vaah punjiwadi vyavastha aur shoshan ki samrajya arthat samrajyavadi vyavastha ka saath virodh karte the yah shoshan ke samrajya ko samul nasht karne ke liye virodh ka swar likhte the apne sahitya me apne kitab me apne upanyas me pragativadi sahityakaar dharti par hi swarg banana chahte the arthat unke anusaar shoshan dal arthat jinka shoshan ho raha tha jaise hi majdur kisan ke saath saath nariyon ka bhi shoshan hota tha arthat naliyon ko bhi saamaan adhikaar nahi mila hua tha nari ko bhog ki vastu samjha jata tha nari ko ghar se bahar nikalne nahi diya jata tha unke jeevan par azadi nahi thi na unhe shiksha grahan karne ki azadi ki na mandiro me jaane ki azadi thi saath hi bazaar bhi nahi ja sakti thi arthat puri tarah unko parde me rehne ke liye vivash kiya jata tha toh is tarah ki vibhinn taii wali jo vyavastha thi un vyavasthaon ka ant karna chahte the aur ek hi tarah ka poore desh me adhikaar ko pradan karwana chahte the isliye unhone apne sahitya me har baar punji vadiyon ke viruddh me likha karte the dost poore samaj ka bhedbhav ko mitana chahte the pragativadi kavi aur poore samaj ko ek hi district kaun se dekhne ki baat karte the aur vaah kehte the ki is bhedbhav jab yah bhed bhav mit jayegi garibi amiri aur mard aur stereo wali bhav bhedbhav mit jayegi khatam ho jayegi toh dharti swarg se bhi badhiya ban jaega dharti swarg se bhi badhkar ban jaega

हेलो फ्रेंड्स गुड मॉर्निंग आपका प्लस नहीं की प्रगतिवादी युग की दो विशेषताएं बताएं दोस्त प्

Romanized Version
Likes  36  Dislikes    views  505
WhatsApp_icon
3 जवाब
qIcon
ask
ऐसे और सवाल
Loading...
Loading...
user

Poonam

Teacher

0:15
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हिंदी साहित्य में दो प्रकार के योग थे जैसे छायावादी युग प्रगतिवादी युग प्रतिवादी युग के दो कवि हैं सूरदास और तुलसीदास उन्होंने विभिन्न प्रकार की रचनाओं का लेख लिखा है

hindi sahitya mein do prakar ke yog the jaise chhayavadi yug pragativadi yug prativadi yug ke do kabhi hai surdas aur tulsidas unhone vibhinn prakar ki rachnaon ka lekh likha hai

हिंदी साहित्य में दो प्रकार के योग थे जैसे छायावादी युग प्रगतिवादी युग प्रतिवादी युग के दो

Romanized Version
Likes  4  Dislikes    views  288
WhatsApp_icon
play
user

Anumita Dutta

Volunteer

0:33

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

पृथ्वी के जीव के लिए करीब 70 से 1 परसेंट ऑक्सीजन समुद्र से आता है और और समुद्र की पांच लेंस या स्तर होते हैं जैसे कि शाम लाइट जोन या स्तर हाइलाइट्स ऑन द ट्वाइलाइट सर मिडनाइट सुन या मिडनाइट एफबी से एंड ऑल फ्रेंड्स

prithvi ke jeev ke liye kareeb 70 se 1 percent oxygen samudra se aata hai aur aur samudra ki paanch lens ya sthar hote hai jaise ki shaam light zone ya sthar highlights on the twilight sir midnait sun ya midnait FB se and all friends

पृथ्वी के जीव के लिए करीब 70 से 1 परसेंट ऑक्सीजन समुद्र से आता है और और समुद्र की पांच लें

Romanized Version
Likes  11  Dislikes    views  231
WhatsApp_icon
qIcon
ask

Related Searches:
pragativadi yug ki do visheshtaye ; प्रगतिवादी युग की विशेषता ; प्रगतिवादी ki visheshta ; प्रगतिवाद की विशेषताएं ; pragativad ki visheshta bataye ; pragativadi yug ki visheshtaye ; प्रगतिवादी युग की दो प्रमुख प्रवृत्तियां लिखिए ; pragativad ki pramukh visheshtaye ; pragativadi ki visheshta ; pragativad ki visheshta ; प्रगतिवादी युग की विशेषताएं ; pragativad ki do visheshtaye ; प्रगतिवादी युग की दो विशेषताएं ; pragativadi yug ki do pramukh prabhatiya likhiye ; प्रगतिवादी युग की दो विशेषताओं को लिखिए ; pragativadi ; प्रगतिवाद की दो विशेषताएं ; प्रगतिवाद की चार विशेषताएं ; pragativadi yug ;

This Question Also Answers:

QuestionsProfiles

Vokal App bridges the knowledge gap in India in Indian languages by getting the best minds to answer questions of the common man. The Vokal App is available in 11 Indian languages. Users ask questions on 100s of topics related to love, life, career, politics, religion, sports, personal care etc. We have 1000s of experts from different walks of life answering questions on the Vokal App. People can also ask questions directly to experts apart from posting a question to the entire answering community. If you are an expert or are great at something, we invite you to join this knowledge sharing revolution and help India grow. Download the Vokal App!