आपकी पसंदीदा बचपन की यादें क्या हैं जिन्हें आप कभी नहीं भूल सकते?...


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Dr. KRISHNA CHANDRA

Rehabilitation Psychologist

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Dr. Priya Shatanjib Jha

Psychologist|Counselor|Dentist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्ते दोस्तों मेरी यानी डॉक्टर प्रिया झा के तरफ से आप सब को दिन की बहुत सारी शुभकामनाएं बचपन की यादें हम सब को बहुत प्यारी होती हैं और मुझे भी ऑफिस भी बहुत प्यारी हैं बहुत ज्यादा इनमें मुझे लगता है कि आपको मालूम है हम सबके समर वेकेशन जाते हैं यानी कि गर्मियों की छुट्टी तो उन दौरान और उस दौरान ना मेरे घर में मुझे आधे किए जाते हैं अभी आते हैं और शम्मी कपूर और उस टाइम की मूवी जाना मतलब वही सिंह का मैं बता दूं आपको सोचकर के रेंज में यही सब पुराने मूवी जाते थे काफी आज शाम को यानी कि 3:00 और 3:00 बजे से लेकर वह चलते रहते थे आपने 6:00 बजे 5:00 बजे जो भी टाइम तक तो उस टाइम को हम लोग सब मिल एक और टोस्ट और मैगी और फ्रूट्स मतलब फल यह सारी चीजों को हम लोग मेरे मेरे डैड मेरी मम्मी मेरे मेरा भाई और मैं हम लोग बैठ कर इंजॉय करते थे और टीवी देखते थे साथ में तो आई थी कि मेरे लिए बहुत ही इमोशनल और बहुत ही प्यारे मेमोरी में हमेशा जो मेमोरीज जा मेरे बचपन के हैं उनमें से सबसे ज्यादा और मुझे लगता है सिर्फ शामली की शादी जो मैंने सेट किया है वही मेरे लिए बहुत इंपोर्टेंट और बहुत ही प्रेषित हैं उनमें से यह मुझे जरूर महसूस भी करती हो और मुझे बहुत अच्छा लगता है इसके बारे में सोच कर तो वहां जो दोपहर के टाइम दोपहर के टाइम जो हम लोग पूरे समर वेकेशन में की थी तब तो वीकेंड भी देगा कुछ रहता नहीं है स्कूल रहता नहीं है तो हर दिन हम लोग सब इंजॉय करते थे और अच्छा खाना खाते थे शाम का नाश्ता और मूवी चल रहा था तभी सिनेमा में यह सब मुझे याद है और मुझे बहुत मजा आता था तो यही है

namaste doston meri yani doctor priya jha ke taraf se aap sab ko din ki bahut saree subhkamnaayain bachpan ki yaadain hum sab ko bahut pyaari hoti hain aur mujhe bhi office bhi bahut pyaari hain bahut zyada inme mujhe lagta hai ki aapko maloom hai hum sabke summer vacation jaate hain yani ki garmiyo ki chhutti toh un dauran aur us dauran na mere ghar mein mujhe aadhe kiye jaate hain abhi aate hain aur shammi kapur aur us time ki movie jana matlab wahi Singh ka main bata doon aapko sochkar ke range mein yahi sab purane movie jaate the kaafi aaj shaam ko yani ki 3 00 aur 3 00 baje se lekar vaah chalte rehte the aapne 6 00 baje 5 00 baje jo bhi time tak toh us time ko hum log sab mil ek aur toast aur maggi aur Fruits matlab fal yah saree chijon ko hum log mere mere dad meri mummy mere mera bhai aur main hum log baith kar enjoy karte the aur TV dekhte the saath mein toh I thi ki mere liye bahut hi emotional aur bahut hi pyare memory mein hamesha jo memories ja mere bachpan ke hain unmen se sabse zyada aur mujhe lagta hai sirf shamili ki shadi jo maine set kiya hai wahi mere liye bahut important aur bahut hi preshit hain unmen se yah mujhe zaroor mehsus bhi karti ho aur mujhe bahut accha lagta hai iske bare mein soch kar toh wahan jo dopahar ke time dopahar ke time jo hum log poore summer vacation mein ki thi tab toh weekend bhi dega kuch rehta nahi hai school rehta nahi hai toh har din hum log sab enjoy karte the aur accha khana khate the shaam ka nashta aur movie chal raha tha tabhi cinema mein yah sab mujhe yaad hai aur mujhe bahut maza aata tha toh yahi hai

नमस्ते दोस्तों मेरी यानी डॉक्टर प्रिया झा के तरफ से आप सब को दिन की बहुत सारी शुभकामनाएं ब

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Kankan Sarmah

Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका सवाल है आखिर पसंदीदा बचपन की यादें किया है जिन्हें आप कभी नहीं भूल सकते आदर्श बहुत कुछ है बहुत सारे है लेकिन एक दिन मेरे साथ हुआ था तब मैं क्लास सेवंथ कक्षा में था तो उस दिन मेरा तबीयत बहुत ही मन खराब था थोड़ा बहुत हल्के फुल्के बुखार भी था मेंटली डाउन और उसी दिन हम लोग को एक कटिंग के लिए स्कूल की तरफ से पैकिंग के लिए एक नया 3 किलोमीटर का 1 किलोमीटर का हम लोग का उधर कितनी ही मनाएंगे तो सारे दोस्त लोग वहां पर शामिल है तो उस दिन मेरा हालत मतलब का तबीयत सही नहीं है लेकिन में इतना मोटिवेट चेक की नई इमेज जाऊंगा और मैं वहां पर एंजॉय कर आऊंगा मॉर्निंग में सुबह मेरा हालत खराब दोस्तों से खेला फिर वहां जाने के बाद जो जो एक्टिविटी हम लोगों ने किया है फिर वह पहाड़ी इलाका था वहां पर कॉल गीता मंदिर से सभी जगह हम लोगों ने घुमा देखा फिर लिख ली अच्छा लगा था शाम तक यह भी महसूस नहीं हुआ था कि सुबह मेरा हालत बहुत ही खड़ा था या फिर वह सब कुछ खत्म हो गया था तो वह जिन्हें हमेशा दोहराता हूं यादों में जहां से मुझे मिलती है और वही शक्तियों के साथ में थोड़ा सा अपने आप को और फिर माइंड को सुंदर बना लेता हूं और वह सब होता है कि मुझे काम करने का मतलब पूछा मिलन के साथ मिलता है तो यह एक्सीडेंट है धन्यवाद

aapka sawaal hai aakhir pasandida bachpan ki yaadain kiya hai jinhen aap kabhi nahi bhool sakte adarsh bahut kuch hai bahut saare hai lekin ek din mere saath hua tha tab main class sevanth kaksha mein tha toh us din mera tabiyat bahut hi man kharab tha thoda bahut halke fulke bukhar bhi tha mentally down aur usi din hum log ko ek cutting ke liye school ki taraf se packing ke liye ek naya 3 kilometre ka 1 kilometre ka hum log ka udhar kitni hi manayenge toh saare dost log wahan par shaamil hai toh us din mera halat matlab ka tabiyat sahi nahi hai lekin mein itna motivate check ki nayi image jaunga aur main wahan par enjoy kar aaunga morning mein subah mera halat kharab doston se khela phir wahan jaane ke baad jo jo activity hum logo ne kiya hai phir vaah pahadi ilaka tha wahan par call geeta mandir se sabhi jagah hum logo ne ghuma dekha phir likh li accha laga tha shaam tak yah bhi mehsus nahi hua tha ki subah mera halat bahut hi khada tha ya phir vaah sab kuch khatam ho gaya tha toh vaah jinhen hamesha dohrata hoon yaadon mein jaha se mujhe milti hai aur wahi shaktiyon ke saath mein thoda sa apne aap ko aur phir mind ko sundar bana leta hoon aur vaah sab hota hai ki mujhe kaam karne ka matlab poocha milan ke saath milta hai toh yah accident hai dhanyavad

आपका सवाल है आखिर पसंदीदा बचपन की यादें किया है जिन्हें आप कभी नहीं भूल सकते आदर्श बहुत कु

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ganesh pazi

Motivator

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

दोस्तों के साथ दूसरे की बाड़ी के फल चुराना बड़ा अच्छा लगता था गालियां खाना और 2 बीघा गांव के तालाब में जाकर पूरे कपड़े उतार के नहाना भी बड़ा अच्छा लगता था और सबसे बढ़िया लगता था दोस्तों के साथ विशाल को जो समय रहता था उसका घर में आकर सफाई देने के तरीके और उसके बाद में भी आता है और बहुत सारी चीजें में बचपन ही खुद यादगार होता है मगर सबसे प्यारी आगे रहती है जो अपने दोस्तों के साथ एंजॉय करते

doston ke saath dusre ki baadi ke fal churana bada accha lagta tha galiya khana aur 2 bigha gaon ke taalab mein jaakar poore kapde utar ke nahaana bhi bada accha lagta tha aur sabse badhiya lagta tha doston ke saath vishal ko jo samay rehta tha uska ghar mein aakar safaai dene ke tarike aur uske baad mein bhi aata hai aur bahut saree cheezen mein bachpan hi khud yaadgaar hota hai magar sabse pyaari aage rehti hai jo apne doston ke saath enjoy karte

दोस्तों के साथ दूसरे की बाड़ी के फल चुराना बड़ा अच्छा लगता था गालियां खाना और 2 बीघा गांव

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Dr. Jitubhai Shah

Friend, Philosopher and Guide

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बचपन में जब मैं 10th स्टैंडर्ड में था तब शिक्षक दिन के दिन में शिक्षक बना था और मेरे ही क्लास में मैंने एक फैशन दिया था उस दिन मैंने जो कपड़े पहने थे जिस तरह से मैंने तैयारी की थी जिस तरह से क्लास में उन्होंने सब को पढ़ाया था वह मुझे बहुत याद है दूसरा महीने वही स्टैंडर्ड में रेडियो नाटक में भाग लिया था तुम्हें पाटन से अहमदाबाद गया था और भक्त नरसी मेहता नाम का नाटक था जिसमें मैंने भगवान श्री कृष्ण का रोल किया था और वह नाटक वीडियो की रिलीज हुआ था तो उस समय मुझे बहुत खुशी हुई थी तो हमारी बोर्डिंग थी और उसमें हर साल एक विद्यार्थी को श्रेष्ठ विद्यार्थी का इनाम दिया जाता था करीब 100 स्टूडेंट हम इसमें एक बार मुझे श्रीदेवी बहुत याद है एजुकेशन में स्वच्छता अच्छा होना चाहिए इस सब कहते हैं कि अनुषा मुझे चुना गया था लेकिन घटना है जब भी मैं याद करता हूं तो मुझे बहुत खुशी होती है

bachpan mein jab main 10th standard mein tha tab shikshak din ke din mein shikshak bana tha aur mere hi class mein maine ek fashion diya tha us din maine jo kapde pehne the jis tarah se maine taiyari ki thi jis tarah se class mein unhone sab ko padhaya tha vaah mujhe bahut yaad hai doosra mahine wahi standard mein radio natak mein bhag liya tha tumhe patan se ahmedabad gaya tha aur bhakt narasi mehta naam ka natak tha jisme maine bhagwan shri krishna ka roll kiya tha aur vaah natak video ki release hua tha toh us samay mujhe bahut khushi hui thi toh hamari boarding thi aur usme har saal ek vidyarthi ko shreshtha vidyarthi ka inam diya jata tha kareeb 100 student hum isme ek baar mujhe sridevi bahut yaad hai education mein swachhta accha hona chahiye is sab kehte hai ki anusha mujhe chuna gaya tha lekin ghatna hai jab bhi main yaad karta hoon toh mujhe bahut khushi hoti hai

बचपन में जब मैं 10th स्टैंडर्ड में था तब शिक्षक दिन के दिन में शिक्षक बना था और मेरे ही क्

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