क्या आप मुझे एक आध्यात्मिक और धार्मिक व्यक्ति के बीच का अंतर समझा सकते है?...


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Harish Sharma

Yog Acharya

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ऐसे और सवाल
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Diksha career expert

Career Counsellor

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हेलो दोस्तों यह जो सवाल है आध्यात्मिक और धार्मिक में स्पेशल चेक एंड रिलीजियस तो इसमें बहुत ही डिफरेंस है आम ही कहना चाहूंगी कि स्पीचलेस इसमें आपका जो मन है और जो आत्मा है वह एक पीस की तरफ आपको मोड़ देती है और जो रिलीजस है जो धर्म कहता है वह आपको धर्म के साथ काली के साथ थी ज्योति है तो यह दोनों बातें अपने लेवल पर अलग अलग ही हैं इस बीच में क्या होता है कि आप आप एक अपने को खोजने की कोशिश करते हैं अपने अंदर की आत्मा को खोजने की कोशिश करते हैं कि आप कौन हैं आपका क्या काम है किस लिए हैं आप क्यों हैं आपको क्या करना है आप भी सब चीजों से ही आप जुड़े रहते हैं ठीक है और धार्मिक व्यक्ति के अंदर क्या है कि वह सिर्फ एक धर्म के प्रति अपना काम करता रहता है कि यह उसका धर्म है अगर सपोज शादी हो जाती है इंसान की तो उसको लगता है कि मुझे पैसा कमाना है मुझे यह मेरा धर्म है तो यह मैं अपने परिवार को मुझे पालना है तो मुझे अपनी रोजी रोटी कमाने के लिए मुझे पैसा कमाना है तो यह आपका धर्म हो गया अगर शादी के बाद सबको निभाना है तो यह आपका धर्म ज्ञान आपके बच्चे बड़े हो जाते हैं उनकी शादी की रानी है यह आपका धर्म है इस लेवल पर धर्म और कर्म दोनों ही जोड़ के काम करते हैं लेकिन आध्यात्मिक इंसान शांति की तरफ जाता है और एक अच्छे कर्म करके और अच्छी साधना करके अच्छी योग साधना करके हो ईश्वर की प्राप्ति लेता है ईश्वर की प्राप्ति ईश्वर के दर्शन को अनुभव करता है तो यह सब चीज अपने अपने लेवल पर एकदम डिफरेंट ही है आई हो आपको समझ में आया होगा मैं क्या कहना चलिए धन्यवाद

hello doston yah jo sawaal hai aadhyatmik aur dharmik me special check and rilijiyas toh isme bahut hi difference hai aam hi kehna chahungi ki speechless isme aapka jo man hai aur jo aatma hai vaah ek peace ki taraf aapko mod deti hai aur jo rilijas hai jo dharm kahata hai vaah aapko dharm ke saath kali ke saath thi jyoti hai toh yah dono batein apne level par alag alag hi hain is beech me kya hota hai ki aap aap ek apne ko khojne ki koshish karte hain apne andar ki aatma ko khojne ki koshish karte hain ki aap kaun hain aapka kya kaam hai kis liye hain aap kyon hain aapko kya karna hai aap bhi sab chijon se hi aap jude rehte hain theek hai aur dharmik vyakti ke andar kya hai ki vaah sirf ek dharm ke prati apna kaam karta rehta hai ki yah uska dharm hai agar suppose shaadi ho jaati hai insaan ki toh usko lagta hai ki mujhe paisa kamana hai mujhe yah mera dharm hai toh yah main apne parivar ko mujhe paalna hai toh mujhe apni rozi roti kamane ke liye mujhe paisa kamana hai toh yah aapka dharm ho gaya agar shaadi ke baad sabko nibhana hai toh yah aapka dharm gyaan aapke bacche bade ho jaate hain unki shaadi ki rani hai yah aapka dharm hai is level par dharm aur karm dono hi jod ke kaam karte hain lekin aadhyatmik insaan shanti ki taraf jata hai aur ek acche karm karke aur achi sadhna karke achi yog sadhna karke ho ishwar ki prapti leta hai ishwar ki prapti ishwar ke darshan ko anubhav karta hai toh yah sab cheez apne apne level par ekdam different hi hai I ho aapko samajh me aaya hoga main kya kehna chaliye dhanyavad

हेलो दोस्तों यह जो सवाल है आध्यात्मिक और धार्मिक में स्पेशल चेक एंड रिलीजियस तो इसमें बहुत

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Vishnu Shankar

Yoga Instructor

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आध्यात्मिक और धार्मिक व्यक्ति के बीच अंतर को समझने से पहले हमें संप्रदाय और उसकी मान्यताओं को समझना होगा आज हम विभिन्न संप्रदायों को ही धर्म समझने लगे चाहे वह हिंदू हो बौद्ध हो सिख हो जैन हो पारसी हो मुस्लिम हो कोई भी हो इनकी अपने संप्रदाय हैं इनकी मान्यताएं हैं इनके प्रतीक हैं और इन्हीं मान्यताओं और प्रतीकों को ही लोग धर्म समझने लगे जबकि धर्म इससे इस तरह से अलग धर्म क्या है धर्म का शाब्दिक अर्थ है धारण करने योग्य जो सबसे उचित है उसको धारण करना धार्य थे इति धर्मः यानी जो धारण करने योग्य है वही धर्म हमारे शास्त्रों में धर्म के लक्षण भी बताए गए हैं धृति क्षमा दमोह स्टेडियम शोषण इंद्रिय धीर विद्या सत्य मकरो 210 कम धर्म लक्षणम् धृति धैर्य क्षमा दम दम अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण करना अस्तेय में चोरी ना करना सोच सुचिता बाहर की भीतर की शुद्धि इंद्रिय निग्रह यानी अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण भी बुद्धि का प्रयोग बुद्धिमता का प्रयोग विद्या एनी ज्ञान पिपासा सत्य मन वचन और वाणी से सत्य का अभ्यास करना और क्रोध यह धर्म के 10 लक्षण बताएं अब यह किसी भी संप्रदाय का व्यक्ति हूं अगर इन लक्षणों को धर्म के इन 10 लक्षणों का पालन करता है निसंदेह वह सुखी रहेगा वह प्रसन्न रहेगा और वह प्रकृति के नियमों का नृत्य के नियमों का पालन करेगा रही बात आध्यात्मिक की तो अध्यात्म को इस तरह से परिभाषित किया गया है स्वभाव अध्यात्म उच्चतर यानी अपने स्वरूप में स्थित होना ही अध्यात्म कहलाता है स्वयं को जानना ही अध्यात्म अपनी खोज करना अपने चेतना के स्तर तक पहुंचना ही अध्यात्म एक तरह से ऐसा देखा जा सकता है कि धर्म सार्वभौमिक और सार्वजनिक है और अध्यात्म स्वयं को जानने की यात्रा है इस तरह से एक धार्मिक व्यक्ति आध्यात्मिक व्यक्ति हो सकता है और एक आध्यात्मिक व्यक्ति धार्मिक व्यक्ति भी हो सकता है दोनों एक तरह से एक दूसरे के पूरक भी हैं किंतु हमें इसे संप्रदायों से जोड़कर नहीं देखना चाहिए धर्म सबके लिए एक धर्म मानव को मानव बनना सिखाता है धर्म किसी मत या पंथ में नहीं बांटता सिखाता है हरि ओम तत्सत

aadhyatmik aur dharmik vyakti ke beech antar ko samjhne se pehle hamein sampraday aur uski manyataon ko samajhna hoga aaj hum vibhinn sampradayon ko hi dharm samjhne lage chahen vaah hindu ho Baudh ho sikh ho jain ho parasi ho muslim ho koi bhi ho inki apne sampraday hain inki manyatae hain inke prateek hain aur inhin manyataon aur pratikon ko hi log dharm samjhne lage jabki dharm isse is tarah se alag dharm kya hai dharm ka shabdik arth hai dharan karne yogya jo sabse uchit hai usko dharan karna dharya the iti dharmah yani jo dharan karne yogya hai wahi dharm hamare shastron me dharm ke lakshan bhi bataye gaye hain dhriti kshama damoh stadium shoshan indriya dheer vidya satya makaro 210 kam dharm lakshanam dhriti dhairya kshama dum dum apni ikchao par niyantran karna astey me chori na karna soch suchita bahar ki bheetar ki shudhi indriya nigrah yani apni indriyon par niyantran bhi buddhi ka prayog buddhimata ka prayog vidya any gyaan pipasa satya man vachan aur vani se satya ka abhyas karna aur krodh yah dharm ke 10 lakshan bataye ab yah kisi bhi sampraday ka vyakti hoon agar in lakshano ko dharm ke in 10 lakshano ka palan karta hai nisandeh vaah sukhi rahega vaah prasann rahega aur vaah prakriti ke niyamon ka nritya ke niyamon ka palan karega rahi baat aadhyatmik ki toh adhyaatm ko is tarah se paribhashit kiya gaya hai swabhav adhyaatm uchatar yani apne swaroop me sthit hona hi adhyaatm kehlata hai swayam ko janana hi adhyaatm apni khoj karna apne chetna ke sthar tak pahunchana hi adhyaatm ek tarah se aisa dekha ja sakta hai ki dharm sarvabhaumik aur sarvajanik hai aur adhyaatm swayam ko jaanne ki yatra hai is tarah se ek dharmik vyakti aadhyatmik vyakti ho sakta hai aur ek aadhyatmik vyakti dharmik vyakti bhi ho sakta hai dono ek tarah se ek dusre ke purak bhi hain kintu hamein ise sampradayon se jodkar nahi dekhna chahiye dharm sabke liye ek dharm manav ko manav banna sikhata hai dharm kisi mat ya panth me nahi bantata sikhata hai hari om tatsat

आध्यात्मिक और धार्मिक व्यक्ति के बीच अंतर को समझने से पहले हमें संप्रदाय और उसकी मान्यताओं

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कृष्णा नंद मिश्र। वशिष्ठ जी।

विद्या।दान।यज्ञ करना

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Madan Nanda Haral patil

Soft Skill Trainer

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हां नमस्कार मेरा नाम मिस्टर मदन हर पाटील है अहमदनगर से बोल रहा हूं आपने बहुत अच्छा सवाल मुझे पूछा है क्या आप मुझे एक आध्यात्मिक और धार्मिक व्यक्ति के बीच का अंतर समझा सकते हैं तो देखिए कि आध्यात्मिक और धार्मिक यह एक 9:00 के दो साइड है आध्यात्मिक व्यक्ति धार्मिक होता है धार्मिक व्यक्ति अध्ययन में होता है तो उसमें से कोई फर्क नहीं है और आपको कुछ आपको कोई उसमें से फर्क लगता है तो आपकी मानसिकता है क्योंकि आध्यात्मिकता धार्मिक बढ़ने के बाद याद आती है धार्मिकता का मतलब ऐसा मत समझो कि हिंदू-मुस्लिम करें क्योंकि हर एक का धर्म है अलग-अलग धर्म है हर एक व्यक्ति अपने धर्म का रिस्पेक्ट करते हैं जीवन बिताते हैं धर्म तो हर एक व्यक्ति को अच्छा रास्ता दिखाता है और अच्छा रास्ते पर चलने वाला व्यक्ति तो आध्यात्मिक होता ही है तो बिल्कुल है धार्मिक बनो अपने धर्म का अपने धर्म को प्यार करो धर्मेंद्र की जो विचार है उससे अपनाओ और उस विचारधारा से आध्यात्मिक जीवन में उन्नति लाओ मेडिटेशन करो विश्वर का नाम लो अच्छे कार्य करो लोगों को शुक्र करो और आप अच्छा धन्यवाद

haan namaskar mera naam mister madan har patil hai ahmednagar se bol raha hoon aapne bahut accha sawaal mujhe poocha hai kya aap mujhe ek aadhyatmik aur dharmik vyakti ke beech ka antar samjha sakte hain toh dekhiye ki aadhyatmik aur dharmik yah ek 9 00 ke do side hai aadhyatmik vyakti dharmik hota hai dharmik vyakti adhyayan me hota hai toh usme se koi fark nahi hai aur aapko kuch aapko koi usme se fark lagta hai toh aapki mansikta hai kyonki aadhyatmikta dharmik badhne ke baad yaad aati hai dharmikata ka matlab aisa mat samjho ki hindu muslim kare kyonki har ek ka dharm hai alag alag dharm hai har ek vyakti apne dharm ka respect karte hain jeevan Bitate hain dharm toh har ek vyakti ko accha rasta dikhaata hai aur accha raste par chalne vala vyakti toh aadhyatmik hota hi hai toh bilkul hai dharmik bano apne dharm ka apne dharm ko pyar karo dharmendra ki jo vichar hai usse apnao aur us vichardhara se aadhyatmik jeevan me unnati laao meditation karo vishwar ka naam lo acche karya karo logo ko shukra karo aur aap accha dhanyavad

हां नमस्कार मेरा नाम मिस्टर मदन हर पाटील है अहमदनगर से बोल रहा हूं आपने बहुत अच्छा सवाल मु

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Dr. J.Singh

Financial Expert || Ayurvedic Doctor

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मीनिंग सारा जातिगत वह व्यक्ति होता है जो आध्यात्मिक सा साधन को भी जा बहुत पास से जानता हूं ग्रुप में जान जाता लेकिन भाभी व्यक्ति से धर्म को जानता है क्या तू नहीं जानता है यही दोनों के बीच में अंतर होता है धन्यवाद

meaning saara jaatigat vaah vyakti hota hai jo aadhyatmik sa sadhan ko bhi ja bahut paas se jaanta hoon group me jaan jata lekin bhabhi vyakti se dharm ko jaanta hai kya tu nahi jaanta hai yahi dono ke beech me antar hota hai dhanyavad

मीनिंग सारा जातिगत वह व्यक्ति होता है जो आध्यात्मिक सा साधन को भी जा बहुत पास से जानता हूं

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Siyaram Dubey

YouTuber/Spiritual Person/Thinker/Social-media Activist

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अशोक गुप्ता

Founder of Vision Commercial Services.

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अध्यात्म का मतलब होता है आत्मा का अध्याय क्योंकि हमारी देह के भीतर जो शक्ति बैठी हुई है वह आत्मा है वही जीवन का संचालन कर रही है तू जब हम आत्मा के संबंध में हम ऐसे नहीं जान सकते तो आपको सिर्फ इतना करना है परहित सरिस धर्म नहिं भाई पर आपके मन में होना चाहिए कि मैं एक्सीडेंट से जीवन पूछो कि मेरा अपना भी हिट हो और मेरे साथ औरों का भी हित हो यही सच्चा अध्यात्म है

adhyaatm ka matlab hota hai aatma ka adhyay kyonki hamari deh ke bheetar jo shakti baithi hui hai vaah aatma hai wahi jeevan ka sanchalan kar rahi hai tu jab hum aatma ke sambandh me hum aise nahi jaan sakte toh aapko sirf itna karna hai parhit saris dharm nahin bhai par aapke man me hona chahiye ki main accident se jeevan pucho ki mera apna bhi hit ho aur mere saath auron ka bhi hit ho yahi saccha adhyaatm hai

अध्यात्म का मतलब होता है आत्मा का अध्याय क्योंकि हमारी देह के भीतर जो शक्ति बैठी हुई है वह

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Babin Mukherjee Arup Kumar Mukherjee

Artist (Vocal Music) And IT professional

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bhaand's Theatre and Acting Classes

Acting And drama Coach Casting director Drama Director

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देखिए धर्म और धार्मिक और आध्यात्मिक का हर एक व्यक्ति का एक अलग अलग ज्ञान होता है और उसी के अनुसार लोग तर्क वितर्क करते हैं और आपको बताते हैं लेकिन मेरे हिसाब से धार्मिक और आध्यात्मिक दोनों का अर्थ अलग होता है देखिए अध्यात्म मतलब 2 शब्दों को मिला हुआ है शब्द है यह आप भी मतलब मतलब चारों दिशा और मतलब आप खुद तो यूं कह लीजिए कि अध्यात्म मतलब आपको खुद को जानना होता है आपको खुद का अध्ययन करना होता है और धार्मिक धार्मिक का अर्थ होता है कि आप रक्षा करें हां अब मतलब अलग-अलग धर्म की रक्षा होती है जिसे मात्र धर्म की रक्षा चित्र धर्म की रक्षा राजधर्म सारे अलग-अलग धर्म होते हैं और जो आत्मा अध्यात्म है वह बता ही दिया मैंने कि अध्य मतलब चारों ओर आ तो मतलब स्वयं स्वयं को जानना अध्ययन है अध्यात्म है और जब आप आध्यात्मिक के बारे में और ज्यादा ज्यादा ज्यादा ज्यादा अग्रसर होंगे अलग-अलग मिलेंगे वैसे तो अध्यात्म और धर्म में मूल रूप से कोई अंतर नहीं है लेकिन धर्म शब्द का बहुत दुरुपयोग किया गया है धर्म शब्द के मूल अर्थ को अनेक उदाहरणों में मतलब बदल दिया गया है जिसके कारण दुनिया में अनेकों विवाद हुए हैं और मानव समाज को दुख के दौर से गुजरना पड़ा है तो इसलिए धर्म का अर्थ लोगों ने बदल दिया है यही यह मेरा ज्ञान था और इसके आगे अगर आपको कुछ और मिलता है तो जरूर शेयर कीजिए धन्यवाद

dekhiye dharm aur dharmik aur aadhyatmik ka har ek vyakti ka ek alag alag gyaan hota hai aur usi ke anusaar log tark vitark karte hain aur aapko batatey hain lekin mere hisab se dharmik aur aadhyatmik dono ka arth alag hota hai dekhiye adhyaatm matlab 2 shabdon ko mila hua hai shabd hai yah aap bhi matlab matlab charo disha aur matlab aap khud toh yun keh lijiye ki adhyaatm matlab aapko khud ko janana hota hai aapko khud ka adhyayan karna hota hai aur dharmik dharmik ka arth hota hai ki aap raksha kare haan ab matlab alag alag dharm ki raksha hoti hai jise matra dharm ki raksha chitra dharm ki raksha rajdharm saare alag alag dharm hote hain aur jo aatma adhyaatm hai vaah bata hi diya maine ki adhya matlab charo aur aa toh matlab swayam swayam ko janana adhyayan hai adhyaatm hai aur jab aap aadhyatmik ke bare me aur zyada zyada zyada zyada agrasar honge alag alag milenge waise toh adhyaatm aur dharm me mul roop se koi antar nahi hai lekin dharm shabd ka bahut durupyog kiya gaya hai dharm shabd ke mul arth ko anek udaharanon me matlab badal diya gaya hai jiske karan duniya me anekon vivaad hue hain aur manav samaj ko dukh ke daur se gujarana pada hai toh isliye dharm ka arth logo ne badal diya hai yahi yah mera gyaan tha aur iske aage agar aapko kuch aur milta hai toh zaroor share kijiye dhanyavad

देखिए धर्म और धार्मिक और आध्यात्मिक का हर एक व्यक्ति का एक अलग अलग ज्ञान होता है और उसी के

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Pawan

Financial Planer

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आध्यात्मिकता और जो आपने दूसरा पूजा में से धार्मिक धार्मिक और अध्यापक में फर्क है अध्ययन जगतसुख लालच मेरा कुछ भी नहीं होता ठीक है और जो आपका धार्मिक होता हूं किसी एक धर्म को मानता है उस धर्म के पीछे अपने मतलब उस पर को पूरी तरह से मानता बहुत आधा फसाना

aadhyatmikta aur jo aapne doosra puja me se dharmik dharmik aur adhyapak me fark hai adhyayan jagatsukh lalach mera kuch bhi nahi hota theek hai aur jo aapka dharmik hota hoon kisi ek dharm ko maanta hai us dharm ke peeche apne matlab us par ko puri tarah se maanta bahut aadha fasana

आध्यात्मिकता और जो आपने दूसरा पूजा में से धार्मिक धार्मिक और अध्यापक में फर्क है अध्ययन जग

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Dr JP Verma, Swami Jagteswer Anand

जगतेश्वर आनंद धाम एवं कल्पांत हिलिंग सेंटर फिजियोथैरेपी, नेचुरोपैथी, एक्युप्रेशर, योग, प्राणायाम, ध्यान साधनाए, रेंकी, स्प्रीचुअल हीलिंग, अहार एवं नेचुरल व हर्बल थैरेपी (ट्रीटमेंन्ट एवं ट्रेनिंग सेंन्टर)

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आध्यात्मिक और धार्मिक व्यक्ति के बीच का अंतर अगर कुछ है तो केवल यह कि धार्मिक व्यक्ति अपनी संस्कार मान्यताओं के आधार पर सत्य को मानता है जो चीज संसार हैं जो उसके मान्यताएं हैं वह उसके आधार पर तय करता है कि उसको क्या प्राप्त हो रहा है लेकिन आध्यात्मिक व्यक्ति इस बात को नहीं मानता आध्यात्मिक व्यक्ति केवल सत्य को मानता है धार्मिक व्यक्ति अपने धर्म के अनुसार आचरण करता है व्यवहार करता हुआ दांत में व्यक्ति किसी धर्म को किसी मान्यता को नहीं मानता वह ध्यान से ऊपर होता है

aadhyatmik aur dharmik vyakti ke beech ka antar agar kuch hai toh keval yah ki dharmik vyakti apni sanskar manyataon ke aadhar par satya ko maanta hai jo cheez sansar hain jo uske manyatae hain vaah uske aadhar par tay karta hai ki usko kya prapt ho raha hai lekin aadhyatmik vyakti is baat ko nahi maanta aadhyatmik vyakti keval satya ko maanta hai dharmik vyakti apne dharm ke anusaar aacharan karta hai vyavhar karta hua dant me vyakti kisi dharm ko kisi manyata ko nahi maanta vaah dhyan se upar hota hai

आध्यात्मिक और धार्मिक व्यक्ति के बीच का अंतर अगर कुछ है तो केवल यह कि धार्मिक व्यक्ति अपनी

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Agrim Gupta - Motivational Speaker

Motivational Speaker | Business Coach

3:25
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नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है अग्रिम गुप्ता और बहुत ही सुंदर प्रश्न पूछा गया यहां पर इन सज्जन के द्वारा की आध्यात्मिक और धार्मिक व्यक्ति के बीच का अंतर समझा सकते आध्यात्मिक और धार्मिक व्यक्ति में बहुत बड़ा अंतर होता है वो रहता है एक आध्यात्मिक व्यक्ति धर्म को मानने के साथ-साथ उसका पालन भी करता है ज्योति जैन धर्म में लिखी हैं ज्योतिष एवं पुराणों वेदों में लिखी है उनकी वो का पालन बहुत अच्छे से करता है खाद्य आध्यात्मिक होती लेकिन जो एक धार्मिक व्यक्ति वह हमेशा उसकी शक्ल नहीं कर पाएगा उदय आज आत्मा का ज्ञान होना हो बुध धर्म को फॉलो करें उसके धर्म के विरुद्ध अगर उसके सामने कोई खड़ा है तुम्हें कैसे हो सकता है हम भलीभांति देखते हैं हिंदू मुसलमान के झगड़े दो अलग-अलग धर्म है किसी ने कुछ बोल दिया और हम चलेगा लड़ने उससे लोको हमने कट्टरता धार्मिक होने के कारण उन्हें पाई जाती है जितनी ज्यादा लोग धार्मिक बन रहे हैं इस चीज से अंदाजा लगाया जा सकता है कि आगे चलके हम कहीं अपने आप को बर्बाद मत अपने हमें आध्यात्मिक आध्यात्मिक सिखाता है हमें की निस्वार्थ निसंकोच ओके हम अपने उन लोगों के भलाई के बारे में क्या सोच सकते हैं चाहे वह किसी भी धर्म का आज रात में धर्म से जोड़ा नहीं आज रात में यह कहता है कि आप अपने आप को सर्वश्रेष्ठ कैसे बनाएं दूसरों में अच्छाई ऐसे थे धर्म धर्म है तो अधर्म भी है और धार्मिक लोक ही अधर्म करते हैं आज यह जमाना है दोस्तों नागरिकता भली-भांति आप से कहता हूं कि आप अध्यात्म को फॉलो करें क्योंकि हमारे आसपास कई धर्म के लोग और वह उनकी कई अलग-अलग साधारण हमें सब के साथ एडजस्ट करके रहना ही पड़ेगा क्योंकि वह अपने धर्म कांटा रहेंगे और हम अपने धर्म कट्टर रहेंगे कोई नहीं भी आएगा और सब खत्म हो जाएंगे इसलिए आध्यात्मिक व्यक्ति कभी भी लड़ाई झगड़ा नहीं करता कभी हिंसा का पालन नहीं करता कभी भी उसको कोई दूसरा इंसान जरूरत से ज्यादा गलत नहीं लगता हां वह गलत काम कर रहा है तो गलत हो सकता है लेकिन अगर उसका फर्म उससे गलत काम करवा रहा है वह बात अलग है तो दोस्तों बस इसी विचारों के साथ आप मेरे साथ जुड़े रहिए और मुझसे और सवाल पूछते रहिए धन्यवाद मेरा नाम है अग्रिम गुप्ता

namaskar doston mera naam hai agrim gupta aur bahut hi sundar prashna poocha gaya yahan par in sajjan ke dwara ki aadhyatmik aur dharmik vyakti ke beech ka antar samjha sakte aadhyatmik aur dharmik vyakti me bahut bada antar hota hai vo rehta hai ek aadhyatmik vyakti dharm ko manne ke saath saath uska palan bhi karta hai jyoti jain dharm me likhi hain jyotish evam purano vedo me likhi hai unki vo ka palan bahut acche se karta hai khadya aadhyatmik hoti lekin jo ek dharmik vyakti vaah hamesha uski shakl nahi kar payega uday aaj aatma ka gyaan hona ho buddha dharm ko follow kare uske dharm ke viruddh agar uske saamne koi khada hai tumhe kaise ho sakta hai hum bhalibhanti dekhte hain hindu musalman ke jhagde do alag alag dharm hai kisi ne kuch bol diya aur hum chalega ladane usse loco humne kattartaa dharmik hone ke karan unhe payi jaati hai jitni zyada log dharmik ban rahe hain is cheez se andaja lagaya ja sakta hai ki aage chal ke hum kahin apne aap ko barbad mat apne hamein aadhyatmik aadhyatmik sikhata hai hamein ki niswarth nisankoch ok hum apne un logo ke bhalai ke bare me kya soch sakte hain chahen vaah kisi bhi dharm ka aaj raat me dharm se joda nahi aaj raat me yah kahata hai ki aap apne aap ko sarvashreshtha kaise banaye dusro me acchai aise the dharm dharm hai toh adharma bhi hai aur dharmik lok hi adharma karte hain aaj yah jamana hai doston nagarikta bhali bhanti aap se kahata hoon ki aap adhyaatm ko follow kare kyonki hamare aaspass kai dharm ke log aur vaah unki kai alag alag sadhaaran hamein sab ke saath adjust karke rehna hi padega kyonki vaah apne dharm kanta rahenge aur hum apne dharm kattar rahenge koi nahi bhi aayega aur sab khatam ho jaenge isliye aadhyatmik vyakti kabhi bhi ladai jhagda nahi karta kabhi hinsa ka palan nahi karta kabhi bhi usko koi doosra insaan zarurat se zyada galat nahi lagta haan vaah galat kaam kar raha hai toh galat ho sakta hai lekin agar uska firm usse galat kaam karva raha hai vaah baat alag hai toh doston bus isi vicharon ke saath aap mere saath jude rahiye aur mujhse aur sawaal poochhte rahiye dhanyavad mera naam hai agrim gupta

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है अग्रिम गुप्ता और बहुत ही सुंदर प्रश्न पूछा गया यहां पर इन सज्ज

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Manish Dev

Motivational Speaker, Yoga-Meditation Guide, Spiritualist, Psycho-analyst, Astrologer, Spiritual Healer, Life Coach

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मित्र एक आध्यात्मिक व्यक्ति सर्वदा धार्मिक ही होता है हां यह हो सकता है कि सारे धार्मिक आध्यात्मिक ना हो पाए हो सकता है लेकिन जो आध्यात्मिक है वह सर्वदा धार्मिक होता है क्योंकि धर्म का उद्देश्य ही अध्यात्म है अध्यापकों को समझना है अध्यात्म को जानना है लेकिन बाहर से धार्मिक आचरण कर रहा हुआ व्यक्ति हो सकता है कि वह आध्यात्मिक ना हो तो आध्यात्मिक होने का तात्पर्य है कि आप सत्य को जानने के जिज्ञासु सत्य अन्वेषी हो सकता के खोजी हो और कौन सा सत्य जो पारलौकिक है जो तात्विक सत्य का तात्पर्य यह नहीं कि किसी ने झूठ बोल दिया किसी ने सच बोल दिया वह असत्य नहीं कानूनी सकते नहीं जो भारत सरकार के कानून का सत्य है वह सत्य नहीं वह सकते जो प्रकृति का सत्य है वह सत्य जो यूनिवर्सल है उस सत्य की खोज करना उसको जानने के प्रयास में रहना और स्वयं को जानने के प्रयास की स्वयं को जानकर ही वास्तविक सत्य को जाना जा सकता है इंसान संसार को जानकर कि संसार में चीजें परिवर्तित होती रहती है बदलती रहती है निरंतर परिवर्तनशील है उसका सप्तमी तो परिवर्तित हो जाएगा लेकिन जो परिवर्तित हो गया वह सत्य कहां रह गया तो उसे ईश्वरीय सत्य को जानना आत्मिक सत्य को जानने का प्रयास जो करता है वह वह आध्यात्मिक व्यक्ति है तो वह निश्चय ही धार्मिक भी हो गया लेकिन सभी धार्मिक धार्मिक होना होने का स्वरूप थोड़ा बड़ा विस्तृत है आप दो स्तर पर धार्मिक हो सकते हैं निजी स्तर पर भी और सामाजिक स्तर पर भी तो जो सामाजिक स्तर पर जो धार्मिक है हो सकता है कि उनमें कुछ लोग अध्यात्मिक भी हो लेकिन सारे धार्मिक आध्यात्मिक है ऐसा नहीं हो सकता और ना होता है फल लेकिन सारे अध्यात्मिक धार्मिक निश्चित रूप से होते हैं जो आध्यात्मिक है उन निश्चित रूप से धार्मिक है और जो धार्मिक है सारे जरूरी नहीं कि जो बाहर से धार्मिक दिख रहा है वह आध्यात्मिक अध्यात्मिक सकता है कि वह भय के कारण मात्र धर्म का आचरण कर रहा हूं डरा हुआ हो और भय के कारण वह ईश्वर को मानता हो या फिर ईश्वर में आस्था रखता हो या धर्म में आस्था रखता हो वह के कारण करता हूं तब देखा देखी मैं करता हूं भाई समाज के सब लोग कर रहे हैं चलो हम भी करते हैं और कुछ और पाखंड के रूप में धर्म का आचरण करते हैं तो धार्मिक है वह अध्यात्मिक हो यह जरूरी नहीं है लेकिन जो आध्यात्मिक है वह हंड्रेड परसेंट धार्मिक होता ही है धार्मिक होने में अध्यात्मिक होने में भेज नहीं है वैसे तो लेकिन फिर भी बाहर ही व्यवहार में इसमें भेजा जाता है आध्यात्मिक व्यक्ति हमेशा ही चीजों को सरल कर देता है और जो धार्मिक भेरु है वह तुम्हारे अंदर भय पैदा करेगा वह तुम्हारे अंदर धर्म को और कठिन रास्ता बना कर तुम्हारे समक्ष प्रस्तुत करेगा और तुम्हें भी करने का कोशिश करेगा धर्म के नाम पर तुम्हें डराने की कोशिश करेगा ईश्वर या भय पैदा करने की कोशिश करेगा और जो आध्यात्मिक है वह कभी भी इस भय से सर्वदा मुक्त होता है कभी इस बात को नहीं मानता कि ईश्वर किसी को दंड देने आएंगे तो आध्यात्मिक व्यक्ति का जीवन इसलिए बहुत ही शांत और जो है स्वतंत्र होता है बस अपनी विचारधारा के में वह काफी स्वतंत्र होता है अन्य धार्मिक ओं की तुलना में तो निश्चित रूप से एक आध्यात्मिक व्यक्ति धार्मिक होता ही है लेकिन हो सकता है जो बहुत सारे धार्मिक हैं वह अध्यात्मिक ना तो यह इस तरह से इस बात को समझने धन्यवाद

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मित्र एक आध्यात्मिक व्यक्ति सर्वदा धार्मिक ही होता है हां यह हो सकता है कि सारे धार्मिक आध

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Vikas Singh

Political Analyst

10:00
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखेगा देखा जाए तो आध्यात्मिक और धार्मिक दोनों व्यक्ति एक जैसे ही होते हैं मैं उन लोगों को आध्यात्मिक नहीं मानता जो अध्यात्म में रहने के बाद कुछ गलत गतिविधि को अंजाम देते हैं भ्रष्टाचार करते हैं और बहुत लोगों के साथ नाइंसाफी करते हैं उन्हें ना तो मैं अध्यात्मिक पुरुष मानता हूं और ना तो धार्मिक पुरुष मानता हूं आप अध्यात्मिक पुरुष और धार्मिक पुरुष तभी हो सकते हैं जब आप अपने मन को कंट्रोल करें आप अपने आप पर विजय प्राप्त करें उसके बाद जब आप अपने ऊपर विजय प्राप्त कर लेते हो तो उसके बाद आप समाज में बहुत बड़ा बदलाव लाते हो जब बदलाव लाने के लिए आप प्रयास करना शुरू करते हो तो आप की बहुत आलोचना होती है लेकिन उन सभी आलोचनाओं को सहने के बाद भी आप लगातार सत्य के पथ पर चलते रहते हो और बाद में यही समाज जो आपका आलोचना कर रहा था यह आपको एक्सेप्ट करता है और यह आपकी प्रशंसा करता है और आपके अच्छाई के गुर्दा चारों तरफ होते हैं भगवान बुद्ध का जीवन उठाइए पूरा जा के लड़के थे उन्हें किसी भी चीज की दिक्कत नहीं थी लेकिन उन्होंने अपना पूरा राजपाट घर-परिवार छोड़कर वह निकले सत्य की खोज में और बहुत दिनों तक वह बहुत मेहनत की है अगर उनके जीवन को आप देखेंगे तो बहुत संघर्षपूर्ण जीवन रहा है लेकिन एक बार वह बैठे एक ब्रिज के नीचे और वह सोचे कि यार राजपाट सब कुछ हमने थोड़ा और अभी तक मुझे सत्य की प्राप्ति नहीं हुई उन्होंने संकल्प किया दृढ़ संकल्प किया कि अब मैं अपनी आंख बंद करूंगा और तब तक अपनी आंखें नहीं खोलूंगा जब तक भगवान मुझे दर्शन नहीं दे देंगे मुझे सत्य की प्राप्ति नहीं हो जाएगी और वह ध्यान में लग गए तपस्या में लीन हो गए अंत में भगवान उन्हें दर्शन दिए और सत्य की प्राप्ति हुई महावीर स्वामी के जीवन को आप उठाइए जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे और उन्होंने भी अपना राजपाट छोड़कर के लिए बहुत मेहनत किया बहुत प्रयास किया आप महात्मा गांधी के जीवन को देखिए बहुत ही संघर्षपूर्ण जीवन रहा है जब साउथ अफ्रीका में रहते थे तो काले और गोरे का भेद भाव था उन्हें तो एक बार ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया था लेकिन वह सत्य के पथ पर चलते रहे और उन्हें अहिंसा का पुजारी आज भी बोला जाता है आज पूरी दुनिया उनको आदर करके बुलाती है हमारे हिंदुस्तान के वह फादर हैं और हमेशा रहेंगे क्योंकि उन्होंने अच्छा काम किया साईं बाबा को अब देखिए वह खाना बनाते थे और सब को खिलाते थे और अंत में जो थोड़ा बहुत बसता था उसको खाते थे तो यह सभी लोग अध्यात्मिक पुरुष थे भगवान श्री राम के जीवन को देखें वह भी आध्यात्मिक पुरुष थे उन्होंने जब रावण को मार दिया था जब अयोध्या आए तो यह कहानी बहुत कम लोगों को पता है मैंने एक जगह पड़ा था भगवान श्री राम रावण को मारने के लिए पश्चाताप करने के लिए वह एक साथ फिर जंगल में तपस्या करने गए थे तो लक्ष्मण जी ने पूछा कि रावण तो अधर्मी था अत्याचारी था अब पश्चाताप किस बात का कर रहे हैं तो उन्होंने बोला कि मैंने एक राक्षस को मारा लेकिन मैंने एक भक्त को भी मारा है तो वह भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था तो मैं इसके लिए पश्चाताप करने जा रहा हूं और 1 साल 14 साल बनवास काटने के बाद रावण अधर्मी को मारने के बाद भगवान श्रीराम ने एक साल और अपने शरीर को कष्ट दिया और ऐसा उदाहरण पेश किया समाज के सामने की जीवन शैली ऐसी होनी चाहिए बहुत लोग बोलते हैं कि मैं अध्यात्मिक पुरुष हूं मैं धर्म की रक्षा करने वाला हूं धर्म की रक्षा करने का मतलब यह नहीं होता है कि आप किसी को मारिए किसी के बहन बेटी के साथ रेप करिए जानवरों को काटकर खाइए यह सब बिल्कुल भी नहीं होता बाई चांस अगर आप शाकाहारी भी हो आपकी सोच अच्छी नहीं है तो आप कभी भी आध्यात्मिक पुरुष नहीं बन सकते कभी भी आप धार्मिक पुरुष नहीं बन सकते बन सकते धर्म हमें जीना सिखाता है धर्म कहता है कि सत्य के पथ पर चलो धर्म कहता है कि कुछ ऐसा काम करो जिससे समाज में खुशहाली आए लोग आपके काम से खुश धर्म और अध्यात्म यह कहता है कि कभी भी किसी भी प्राणी को कष्ट मत दो सब के सब सब का मतलब मदद करो हमेशा दूसरों के लिए भी जीना सीखो और हमेशा शांति स्थापित करने के लिए कुछ न कुछ कार्य करो अशांति अगर आप स्थापित करते हैं अपने वाणी से या अपने कर्मों से तो आप अध्यात्मिक पुरुष भी नहीं है और आप धार्मिक पुरुष भी नहीं है आप कोई पुरुष नहीं है मैं आपको अत्याचारी पुरुष कहूंगा क्योंकि आपने किसी को कष्ट दिया है भगवान राम एक अधर्मी को मारे थे तो उनकी प्रशंसा हुई थी लेकिन भगवान राम ने एक भक्त को मारा उसके लिए वह 1 साल और जंगल में जाकर रहे इससे उनकी प्रशंसा और ज्यादा होती है ऐसा होना चाहिए लोग घबरा जाते हैं घबराइए मत अध्यात्म में आप अगर लीन हो जाएंगे और सही में अगर आप आध्यात्मिक पुरुष बन जाएंगे तो आप समाज में बहुत ज्यादा बदलाव लाएंगे अगर आप अच्छे धार्मिक पुरुष हो तो आप समाज में बहुत ज्यादा चिंतित लाओगे पूरे समाज में शांति स्थापित होगी चेंज होगा एक बदलाव होगा एक नई शुरुआत होगी और जब नई शुरुआत होगी अच्छा सभी लोग काम करेंगे तो फिर कोई किसी से लड़ेगा नहीं झगड़ा नहीं करेगा लेकिन मैक्सिमम आध्यात्मिक पुरुष और धार्मिक पुरुष आज की डेट में एक दूसरे को लड़ा रहे हैं लाडो मारो काटो हम आपसे पूछना चाहते हैं क्या यही अध्यात्म कहता है क्या यही धर्म कहता है नहीं तो जब हम खुद को अच्छे से प्रेरणा देंगे अपने मन के ऊपर कंट्रोल करेंगे और कुछ अच्छा दृढ़ संकल्प करेंगे कि नहीं मुझे कुछ अच्छा करना है अगर मैं अच्छा करूंगा तो हो सकता है इसका रिकॉर्ड समाज के पास ना हो अभी हमारे जिंदा रहते हुए लेकिन ऊपरवाला सब का रिकॉर्ड देखता है कौन क्या कर रहा है पूरा सॉफ्टवेयर ठीक है सब के बॉडी में वह रीट कर रहा है कौन अच्छा कर्म कर रहा है कौन गलत कर्म कर रहा है उसके हिसाब से हर व्यक्ति को फल मिलता जाता है तो इसलिए हमेशा अच्छा काम करना है कभी भी गलत काम नहीं करना है और गलत के बारे में सोचना भी नहीं है जब गलत के बारे में नहीं सोचना है सभी धर्म के लोग अपने धर्म का सही मतलब निकालेंगे और सभी लोग सोचेंगे कि नहीं शांति के लिए काम काम करना स्थापित करने के लिए असत्य का कभी भी साथ नहीं देना है भ्रष्टाचार का हमेशा विरोध करना है कहीं भी किसी भी धर्म में कोई भी गलत काम हो रहा हो तो उस धर्म के लोगों को सबसे पहले खड़ा सोना चाहिए जागरूक होना चाहिए कि नहीं यह गलत हो रहा है हमारे धर्म में और इसको खत्म करना चाहिए मुसलमान धर्म के लोग हैं अगर कोई गलत काम कर रहा है तो उस धर्म के लोग हैं उनको बोलना चाहिए कि नहीं यह गलत है हिंदू धर्म के लोग हैं अगर आपकी हिंदू धर्म में कोई गलत काम कर रहा है तो अपना करिए नहीं यह गलत है उसका विरोध करिए सिख धर्म में अगर कोई व्यक्ति किसी को प्रताड़ित कर रहा है गलत कर रहा है तो तुरंत जागरूक सिखों को बोलना चाहिए नहीं यहां पर गलत हो रहा है ईसाई धर्म के लोगों को भी कुछ ऐसा ही करना चाहिए जब सभी लोग अच्छे लोग समाज में बदलाव लाने के बारे में प्रयास करेंगे मेहनत करेंगे तब जाकर पूरे विश्व में शांति स्थापित होगी अभी पूरा विश्व को रोना से जूझ रहा है को रोना महामारी ने पूरे विश्व को संकट में डाल दिया है तो आप सभी भारत वासियों से निवेदन है आध्यात्मिक और धार्मिक पुरुषों से भी निवेदन है कृपया करके आप भेदभाव मत करिए मिलजुल काम करिए यह किसी धर्म या जाति पर खतरा नहीं है यह इंसानियत पर खतरा आया है मानवता पर खतरा आया है इसलिए हर आदमी को इंसानियत के धर्म का पालन करना होगा जो इंसानियत के धर्म का पालन करेगा वही असली आध्यात्मिक पुरुष है वही असली धार्मिक पुरुष है अगर किसी मुस्लिम भाई के बगल में कोई गरीब व्यक्ति रहता है तो आप कोशिश करिए कि उसका मेहनत करी उसको खाना खिलाइए या उसको अनाज दीजिए ताकि वह गरीब व्यक्ति खा सकें अगर किसी हिंदू भाई के बगल में पड़ोस में आसपास कोई मुस्लिम भाई गरीब रहता है तो आप उसकी मदद करिए किसी ईसाई भाई के बगल में अगर हिंदू मुस्लिम कोई गरीब भाई रहता है तो आप उसकी मदद करिए सब लोग मदद करिए और खुद को आध्यात्मिक और धार्मिक बनाइए धन्यवाद

dekhega dekha jaaye toh aadhyatmik aur dharmik dono vyakti ek jaise hi hote hain main un logo ko aadhyatmik nahi maanta jo adhyaatm me rehne ke baad kuch galat gatividhi ko anjaam dete hain bhrashtachar karte hain aur bahut logo ke saath nainsafi karte hain unhe na toh main adhyatmik purush maanta hoon aur na toh dharmik purush maanta hoon aap adhyatmik purush aur dharmik purush tabhi ho sakte hain jab aap apne man ko control kare aap apne aap par vijay prapt kare uske baad jab aap apne upar vijay prapt kar lete ho toh uske baad aap samaj me bahut bada badlav laate ho jab badlav lane ke liye aap prayas karna shuru karte ho toh aap ki bahut aalochana hoti hai lekin un sabhi aalochanaon ko sahane ke baad bhi aap lagatar satya ke path par chalte rehte ho aur baad me yahi samaj jo aapka aalochana kar raha tha yah aapko except karta hai aur yah aapki prashansa karta hai aur aapke acchai ke gurda charo taraf hote hain bhagwan buddha ka jeevan uthaiye pura ja ke ladke the unhe kisi bhi cheez ki dikkat nahi thi lekin unhone apna pura rajpat ghar parivar chhodkar vaah nikle satya ki khoj me aur bahut dino tak vaah bahut mehnat ki hai agar unke jeevan ko aap dekhenge toh bahut sangharshapurn jeevan raha hai lekin ek baar vaah baithe ek bridge ke niche aur vaah soche ki yaar rajpat sab kuch humne thoda aur abhi tak mujhe satya ki prapti nahi hui unhone sankalp kiya dridh sankalp kiya ki ab main apni aankh band karunga aur tab tak apni aankhen nahi kholunga jab tak bhagwan mujhe darshan nahi de denge mujhe satya ki prapti nahi ho jayegi aur vaah dhyan me lag gaye tapasya me Lean ho gaye ant me bhagwan unhe darshan diye aur satya ki prapti hui mahavir swami ke jeevan ko aap uthaiye jain dharm ke ve tirthankar the aur unhone bhi apna rajpat chhodkar ke liye bahut mehnat kiya bahut prayas kiya aap mahatma gandhi ke jeevan ko dekhiye bahut hi sangharshapurn jeevan raha hai jab south africa me rehte the toh kaale aur gore ka bhed bhav tha unhe toh ek baar train se bahar fenk diya 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ashanti agar aap sthapit karte hain apne vani se ya apne karmon se toh aap adhyatmik purush bhi nahi hai aur aap dharmik purush bhi nahi hai aap koi purush nahi hai main aapko atyachari purush kahunga kyonki aapne kisi ko kasht diya hai bhagwan ram ek adharmee ko maare the toh unki prashansa hui thi lekin bhagwan ram ne ek bhakt ko mara uske liye vaah 1 saal aur jungle me jaakar rahe isse unki prashansa aur zyada hoti hai aisa hona chahiye log ghabara jaate hain ghabaraiye mat adhyaatm me aap agar Lean ho jaenge aur sahi me agar aap aadhyatmik purush ban jaenge toh aap samaj me bahut zyada badlav layenge agar aap acche dharmik purush ho toh aap samaj me bahut zyada chintit laouge poore samaj me shanti sthapit hogi change hoga ek badlav hoga ek nayi shuruat hogi aur jab nayi shuruat hogi accha sabhi log kaam karenge toh phir koi kisi se ladega nahi jhagda nahi karega lekin maximum aadhyatmik purush aur dharmik purush aaj ki date me ek dusre ko lada rahe hain lado maaro kato hum aapse 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kisi dharm ya jati par khatra nahi hai yah insaniyat par khatra aaya hai manavta par khatra aaya hai isliye har aadmi ko insaniyat ke dharm ka palan karna hoga jo insaniyat ke dharm ka palan karega wahi asli aadhyatmik purush hai wahi asli dharmik purush hai agar kisi muslim bhai ke bagal me koi garib vyakti rehta hai toh aap koshish kariye ki uska mehnat kari usko khana khilaiye ya usko anaaj dijiye taki vaah garib vyakti kha sake agar kisi hindu bhai ke bagal me pados me aaspass koi muslim bhai garib rehta hai toh aap uski madad kariye kisi isai bhai ke bagal me agar hindu muslim koi garib bhai rehta hai toh aap uski madad kariye sab log madad kariye aur khud ko aadhyatmik aur dharmik banaiye dhanyavad

देखेगा देखा जाए तो आध्यात्मिक और धार्मिक दोनों व्यक्ति एक जैसे ही होते हैं मैं उन लोगों को

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Megh Achaarya

vastu Expert,Motivational Speaker Meditation Studio.

1:53
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जहां बिल्कुल मैं आपके पैसों को लेकर बहुत उत्साहित हूं इसका उत्तर देने के लिए देखे आध्यात्मिक और धार्मिक में अंतर है किंतु अधिक अंतर इसमें नहीं हम कहेंगे अध्यात्मिक है जो स्वयं अपने आध्यात्मिक के अंदर ही अंदर अध्याय अध्यन करना शुरू कर दे समझना शुरू कर दे अपने भीतर उसके हृदय की गति सांसो की और शरीर के अन्य जगहों पर पैर के नाखून से लेकर सर के बाल तक हर एक चीज को महसूस करने लगे कि मैं इस का अंग हूं और इसमें से कितना मेरा हिस्सा है मैं कहां हूं मतलब मेरे शरीर के अंदर मैं कहां हूं अध्यात्मिक या शहर धार्मिक अगर आप चाहें तो धार्मिक में आप यह समझ लीजिए कि किसी एक आपने जैसे बुक को फॉलो कर लिया किसी एक किसी भी एक चीज को आप आध्यात्मिक में अध्यात्म में किसी चीज को फॉलो नहीं करने अध्यात्म में सिर्फ अपने अंदर चलते चले जाना है और धार्मिक में किसी एक चीज को फॉलो करना है यही अंतर है इन दोनों के बीच में अगर आप किसी चीज को फॉलो कर रहे हैं तो वह आप धार्मिक व्यक्ति कैसे जाएंगे और अधिक यदि आप अपने अंदर चलते चले आ रहे हैं अपने आप को पहचान रहे हैं अपने आप के बारे में जानकारी ले रहे हैं अध्याय कर रहे हैं खुद खुद को अध्याय में बांट रहे हैं एक निराकार के पीछे चल रहे हैं उसका कोई आकार नहीं है कोई लक्ष्य नहीं है इसीलिए इन दो शब्दों में मैं आपको इसका आंसर की देना चाहूंगा अलख निरंजन मतलब ना तो मेरा कोई लक्ष्य है और ना ही कोई आकार है मैं अपने अंतर्मन के अध्याय में अध्ययन में लीन अलख निरंजन किसी चीज को फॉलो करते हैं यही अंतर है मेरी शुभकामनाएं आपके साथ है बहुत-बहुत धन्यवाद

jaha bilkul main aapke paison ko lekar bahut utsaahit hoon iska uttar dene ke liye dekhe aadhyatmik aur dharmik me antar hai kintu adhik antar isme nahi hum kahenge adhyatmik hai jo swayam apne aadhyatmik ke andar hi andar adhyay adhyan karna shuru kar de samajhna shuru kar de apne bheetar uske hriday ki gati saanso ki aur sharir ke anya jagaho par pair ke nakhun se lekar sir ke baal tak har ek cheez ko mehsus karne lage ki main is ka ang hoon aur isme se kitna mera hissa hai main kaha hoon matlab mere sharir ke andar main kaha hoon adhyatmik ya shehar dharmik agar aap chahain toh dharmik me aap yah samajh lijiye ki kisi ek aapne jaise book ko follow kar liya kisi ek kisi bhi ek cheez ko aap aadhyatmik me adhyaatm me kisi cheez ko follow nahi karne adhyaatm me sirf apne andar chalte chale jana hai aur dharmik me kisi ek cheez ko follow karna hai yahi antar hai in dono ke beech me agar aap kisi cheez ko follow kar rahe hain toh vaah aap dharmik vyakti kaise jaenge aur adhik yadi aap apne andar chalte chale aa rahe hain apne aap ko pehchaan rahe hain apne aap ke bare me jaankari le rahe hain adhyay kar rahe hain khud khud ko adhyay me baant rahe hain ek nirakaar ke peeche chal rahe hain uska koi aakaar nahi hai koi lakshya nahi hai isliye in do shabdon me main aapko iska answer ki dena chahunga alakh niranjan matlab na toh mera koi lakshya hai aur na hi koi aakaar hai main apne antarman ke adhyay me adhyayan me Lean alakh niranjan kisi cheez ko follow karte hain yahi antar hai meri subhkamnaayain aapke saath hai bahut bahut dhanyavad

जहां बिल्कुल मैं आपके पैसों को लेकर बहुत उत्साहित हूं इसका उत्तर देने के लिए देखे आध्यात्म

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Dr.Sachin Pathak

Dietician And Reiki GrandMaster

2:06
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क्या आप मुझे एक आध्यात्मिक और एक धार्मिक व्यक्ति के बीच का अंतर समझा सकते हैं यह सवाल भी बहुत अच्छा है मैं आपकी कुछ मदद जरूर कर सकता हूं सबसे पहले तो इस सवाल का जवाब आपके शब्दों में ही है आध्यात्मिक व्यक्ति और धार्मिक व्यक्ति जो व्यक्ति धर्म कर्म कर रहा होता है उसे हम धार्मिक व्यक्ति कहते हैं और जो व्यक्ति आध्यात्मिक यात्रा पर है उसे हम आध्यात्मिक व्यक्ति कहते हैं यह बिल्कुल जरूरी नहीं है कि आध्यात्मिक व्यक्ति धर्म कर्म की प्रक्रिया करता रहे बिल्कुल जरूरी नहीं है क्योंकि धर्म कर्म करने वाला धार्मिक व्यक्ति जीवन भर एक ही कार्य में लगा रहता है परंतु जो आध्यात्मिक व्यक्ति होता है वह अपने आध्यात्मिक ऊर्जा का विकास करने के लिए निरंतर कार्यरत रहता है उसे अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए हमेशा कहीं ना कहीं कुछ न कुछ अलग अलग कार्य करते रहने पड़ते हैं जो कि हम हैं हमारी पांचों ज्ञानेंद्रियों से मिलते हैं जब आध्यात्मिक व्यक्ति का विकास होता है तब वह पूरे समाज में पूरे देश में पूरे विश्व में एक अलग प्रतिभा वाला व्यक्ति बन के उभर के सामने आता है लेकिन ऐसे बहुत ही कम धार्मिक व्यक्ति होते हैं जो इस तरह के पर्सनैलिटी बनकर उभर कर आते हैं गलत कोई नहीं होता मैं धार्मिक आध्यात्मिक धार्मिक व्यक्ति धर्म-कर्म का ज्ञाता होता है और आध्यात्मिक व्यक्ति अपनी ही शक्तियों का ज्ञाता होता है और मेरे हिसाब से यदि आपको आपकी शक्तियों की जानकारी है तो आप से बड़ा शक्तिशाली और कोई नहीं हो सकता आशा करता हूं कि आपको मेरा जवाब नया होगा मैं रेकी ग्रैंड मास्टर सचिन पाठक थैंक यू वेरी मच

kya aap mujhe ek aadhyatmik aur ek dharmik vyakti ke beech ka antar samjha sakte hain yah sawaal bhi bahut accha hai main aapki kuch madad zaroor kar sakta hoon sabse pehle toh is sawaal ka jawab aapke shabdon me hi hai aadhyatmik vyakti aur dharmik vyakti jo vyakti dharm karm kar raha hota hai use hum dharmik vyakti kehte hain aur jo vyakti aadhyatmik yatra par hai use hum aadhyatmik vyakti kehte hain yah bilkul zaroori nahi hai ki aadhyatmik vyakti dharm karm ki prakriya karta rahe bilkul zaroori nahi hai kyonki dharm karm karne vala dharmik vyakti jeevan bhar ek hi karya me laga rehta hai parantu jo aadhyatmik vyakti hota hai vaah apne aadhyatmik urja ka vikas karne ke liye nirantar karyarat rehta hai use apni aadhyatmik urja ko badhane ke liye hamesha kahin na kahin kuch na kuch alag alag karya karte rehne padate hain jo ki hum hain hamari panchon gyanendriyon se milte hain jab aadhyatmik vyakti ka vikas hota hai tab vaah poore samaj me poore desh me poore vishwa me ek alag pratibha vala vyakti ban ke ubhar ke saamne aata hai lekin aise bahut hi kam dharmik vyakti hote hain jo is tarah ke personality bankar ubhar kar aate hain galat koi nahi hota main dharmik aadhyatmik dharmik vyakti dharm karm ka gyaata hota hai aur aadhyatmik vyakti apni hi shaktiyon ka gyaata hota hai aur mere hisab se yadi aapko aapki shaktiyon ki jaankari hai toh aap se bada shaktishali aur koi nahi ho sakta asha karta hoon ki aapko mera jawab naya hoga main reki grand master sachin pathak thank you very match

क्या आप मुझे एक आध्यात्मिक और एक धार्मिक व्यक्ति के बीच का अंतर समझा सकते हैं यह सवाल भी ब

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Acharya Vivekaditya(Guru shree)

Spiritual Guru, Educationist,Wellness & Yoga Expert, Founder Of Pavitram Meditation yoga Retreat , Founder :Karmyoga International , Founder Secy ,STSJ Degree College

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अपनी पूछा कि एक आध्यात्मिक और धार्मिक व्यक्ति के बीच क्या अंतर है धर्म अगर हम भारतीय परंपरा में धर्म की परिभाषा देखें धर्म नियम है जिनसे प्रकृतिक चल रही है उनकी खोज सूर्य का धर्म वैदिक सूर्य किन नियमों से चल रहा है पृथ्वी का धर्म के नियमों से चल रही है उसका स्वभाव और मनुष्य एक पिता के रूप में एक पुत्र के रूप में एक पत्नी के रूप में एक बहन के रूप में देश के नागरिक के रूप में एक दृश्य नागरिक के रूप में जांच का कर्तव्य इस कदर अगर हम इस तरह से देखें तो धर्म लेकर किसी भी व्यक्ति की प्रकृति और उसके कर्तव्यों की व्यवस्था है उसको धर्म महाभारत जैसे ग्रंथों की परिभाषा के अनुसार मैंने गया लेकिन जब समाज में धर्म शब्द किसी खास धर्म ओरेगन हम कहें कि हिंदू धर्म मुस्लिम धर्म ईसाई धर्म यहूदी धर्म पारसी धर्म और बौद्ध धर्म सिख जैन बौद्ध जितने भी धर्म हम सुनते हैं यह सब क्या और धर्म को हमें और धार्मिक व्यक्ति ग्रुप में इसी संदर्भ में समझता होगा इसमें आप ही देखिए किसी भी धर्म में एक इतिहास होता है कि धर्म की उत्पत्ति कैसे हुई या कब से उसका विकास चला रहा है कौन कौन महापुरुष उसमें परम श्रद्धा के रूप में पूजे जाते हैं जैसे कि हिंदू धर्म में ऋषि-मुनियों को और राम और कृष्ण और विष्णु के अवतारों की पूजा की परंपरा है विचारधारा होती है एक धर्म हिंदू धर्म में कुछ लोग ईश्वर को सुकून मांग कर पूछते हैं कुछ लोग निर्गुण मानकर पूजते हैं इस्लाम धर्म में मोहम्मद को ईश्वर का अल्लाह के पैगंबर माना गया है और इसाई धर्म में जीसस को सन ऑफ गॉड माना गया है पर ऐसे भी धर्म में जैन धर्म बौद्ध धर्म को धर्म दुनिया में ऐसे भी हैं जो ईश्वर को मानते भी नहीं है दिने नास्तिक धर्म कहते हैं जो सिर्फ प्रकृति की व्यवस्था में विश्वास करते हैं तो इस तरह धर्म की बात करते हैं कि धर्म में कुछ महापुरुष होते जैन धर्म की ईश्वर को नहीं मानता वह भी 24:53 तक सामान्य समझ के सभी सदस्य उनकी पूजा करते हैं और बौद्ध धर्म में बुध और बोधिसत्व की पूजा की जाती है विश्व के सभी धर्मों में कुछ-कुछ पवित्र ग्रंथ हर धर्म का पवित्र ग्रंथ वेदों को परम पवित्र माना गया है उसके अलावा महाकाव्य पुराण और उपनिषदों की पवित्रता को माना गया है ईसाई धर्म में बाइबल को यदि धर्म में ओल्ड टेस्टामेंट को और मुस्लिम धर्म में कुरान को पवित्र माना गया तो हर धर्म में कुछ महापुरुषों उचित स्थान है कुछ परंपराएं हैं कुछ त्यौहार है कुछ मान्यताएं हैं स्वर्ग नरक की या मरने के बाद क्या होता है और शादी और विभाग को कैसे संपन्न करें जन्म और मृत्यु को कैसे सेलिब्रेट करें यह सब अलग-अलग धर्मों का अलग-अलग है इस पूरी व्यवस्था को अगर हम देखें तो धर्म हमें क्या नजर आता है कि धर्म एक सामाजिक व्यवस्था है अगर आप हिंदू धर्म और इस्लाम का पहनावा भाषा और किताब पूज्य धार्मिक यात्रा करने के तरीके सब एक अंतर मिलेगा तो धर्म एक सामाजिक व्यवस्था है जो व्यक्ति के जीवन को बहुत कुछ कंट्रोल करती है उसके जन्म से लेकर मृत्यु तक उसे अपने सारे जीवन के कार्य कैसे करने हैं यह उस बात से प्रभावित होता है जिस धर्म में वह पैदा हुआ धर्म में इन सब बातों के अलावा उनकी खोज और एक परम शक्ति की खोज देश दुनिया को चला रही है उसके भी संदर्भ होते हैं और इसी को हम आध्यात्मिक आकर अध्यात्म की कि जो सबसे पहले उदाहरण आपको मिलेंगे वह धार्मिक ग्रंथों में ही मिलेंगे वेदों में उपनिषदों में व्यक्ति को अपनी खोज और संसार की शक्तियों की परम शक्ति की खोज के बारे में प्रेरित किया गया वह गुरु और शिष्य आपस में वार्तालाप करते हैं और उनकी और परम शक्ति की खोज में को एक वैज्ञानिक विधि से आगे बढ़ते यह आदत अब अध्यात्म धार्मिक ग्रंथों का एक हिस्सा है लेकिन आध्यात्मिक व्यक्ति का एक निजी मामला है जिसमें एक व्यक्ति किसी धर्म के नियमों से पूरी तरह यह जरूरी नहीं वह अपने आप स्वयं एक वैज्ञानिक की तरह अपने अंदर ध्यान के माध्यम से चिंतन के माध्यम से अपने अनुभव के माध्यम से अपने स्वरूप का ज्ञान प्राप्त करता है और इस ब्रह्मांड को चलाने वाली परम शक्ति है या नहीं है इस विषय पर व खुले मन से विचार करता है और उस विचार को आगे बढ़ाते हुए प्रयोग करता है और उस प्रयोग में वह जो भी प्राप्त करता है उसको स्वीकार करता है उसकी अपनी खोज और अपनी प्राप्ति ही प्रमुख होती है फिर वह चाहे किसी धर्म से यह किसी धर्म के नियमों से मेल खाएं या ना खाएं यह कोई जरूरी नहीं कि जब कोई व्यक्ति अपने जीवन में आध्यात्मिक को बहुत ज्यादा बोल देता है तू किसी एक धर्म का बहुत श्रद्धालु या किसी एक धर्म के नियमों से पूरी तरह नहीं बन पाता वह वहीं तक अपने धर्म को मानता है जहां तक कि उसके अंतरात्मा से स्वीकार करती अंतर्विरोध एक व्यक्ति अपने जीवन में सामाजिक तौर पर एक सामाजिक प्राणी के रूप में उस धर्म की सभी बातों को पूरा करते हुए जिसमें वह पैदा हुआ है अध्यात्म की खोज में आगे बढ़ सकता है और एक व्यक्ति नास्तिक होकर भी आध्यात्म की खोज कर सकता है धर्म और अध्यात्म में धर्म एक व्यापक सामाजिक घटना है जबकि आध्यात्मिक आपका एक निजी मामला एक आपकी निजी खोज है यह पर्सनल लाइफ का कपना प्रोजेक्ट है इसमें आप अपने आप को यह सृष्टि से संबंधित प्रश्नों के उत्तर सुन खोजने के लिए एक वैज्ञानिक और खोली की तरह आगे बढ़ते यही धर्म और अध्यात्म में अंतर कुछ लोग इनको एक दूसरे का विरोधी मांगते हैं ऐसा नहीं अध्यात्म की जो रहना है वह धार्मिक ग्रंथों से ही शुरू हुई भगवत गीता उपनिषद् और खासकर उपनिषद आध्यात्मिक सबसे बड़े गिरे थे जिनमें व्यक्ति को किसी धर्म की मान्यता पूजा पद्धति विशेष को अपनाने की बात नहीं कही गई है किसी गुरु या धर्म ग्रंथ में अंधश्रद्धा रखने की भी नहीं कहीं कोई व्यक्ति को स्वयं खुद करने के लिए प्रेरित किया गया इस प्रकार आप अध्यात्म और धर्म का अंतर समझ सकते हैं सा रूप में यही है कि धार्मिक सामाजिक घटना है एक सामाजिक व्यवस्था है परंपरा है इतिहास सपना और नैतिक नियम है उसके अपने और आध्यात्मिक आपका अपना निजी खोज कर प्रोजेक्ट हूं उसमें आप अपने आप को और इस सृष्टि के रहस्यों को जानने के लिए सोमवार को जो भी आपको अपनी खोज में मिलता है उसे स्वीकार करते हैं धन्यवाद नमस्कार

apni poocha ki ek aadhyatmik aur dharmik vyakti ke beech kya antar hai dharm agar hum bharatiya parampara me dharm ki paribhasha dekhen dharm niyam hai jinse prakritik chal rahi hai unki khoj surya ka dharm vaidik surya kin niyamon se chal raha hai prithvi ka dharm ke niyamon se chal rahi hai uska swabhav aur manushya ek pita ke roop me ek putra ke roop me ek patni ke roop me ek behen ke roop me desh ke nagarik ke roop me ek drishya nagarik ke roop me jaanch ka kartavya is kadar agar hum is tarah se dekhen toh dharm lekar kisi bhi vyakti ki prakriti aur uske kartavyon ki vyavastha hai usko dharm mahabharat jaise granthon ki paribhasha ke anusaar maine gaya lekin jab samaj me dharm shabd kisi khas dharm oregan hum kahein ki hindu dharm muslim dharm isai dharm yahudi dharm parasi dharm aur Baudh dharm sikh jain Baudh jitne bhi dharm hum sunte hain yah sab kya aur dharm ko hamein aur dharmik vyakti group me isi sandarbh me samajhata hoga isme aap hi dekhiye kisi bhi dharm me ek itihas hota hai ki dharm ki utpatti kaise hui ya kab se uska vikas chala raha hai kaun kaun mahapurush usme param shraddha ke roop me puje jaate hain jaise ki hindu dharm me rishi muniyon ko aur ram aur krishna aur vishnu ke avataron ki puja ki parampara hai vichardhara hoti hai ek dharm hindu dharm me kuch log ishwar ko sukoon maang kar poochhte hain kuch log nirgun maankar pujte hain islam dharm me muhammad ko ishwar ka allah ke paigambar mana gaya hai aur isai dharm me jesus ko san of god mana gaya hai par aise bhi dharm me jain dharm Baudh dharm ko dharm duniya me aise bhi hain jo ishwar ko maante bhi nahi hai dine nastik dharm kehte hain jo sirf prakriti ki vyavastha me vishwas karte hain toh is tarah dharm ki baat karte hain ki dharm me kuch mahapurush hote jain dharm ki ishwar ko nahi maanta vaah bhi 24 53 tak samanya samajh ke sabhi sadasya unki puja karte hain aur Baudh dharm me buddha aur Bodhisatva ki puja ki jaati hai vishwa ke sabhi dharmon me kuch kuch pavitra granth har dharm 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khoj aur ek param shakti ki khoj desh duniya ko chala rahi hai uske bhi sandarbh hote hain aur isi ko hum aadhyatmik aakar adhyaatm ki ki jo sabse pehle udaharan aapko milenge vaah dharmik granthon me hi milenge vedo me upnishadon me vyakti ko apni khoj aur sansar ki shaktiyon ki param shakti ki khoj ke bare me prerit kiya gaya vaah guru aur shishya aapas me vartalaap karte hain aur unki aur param shakti ki khoj me ko ek vaigyanik vidhi se aage badhte yah aadat ab adhyaatm dharmik granthon ka ek hissa hai lekin aadhyatmik vyakti ka ek niji maamla hai jisme ek vyakti kisi dharm ke niyamon se puri tarah yah zaroori nahi vaah apne aap swayam ek vaigyanik ki tarah apne andar dhyan ke madhyam se chintan ke madhyam se apne anubhav ke madhyam se apne swaroop ka gyaan prapt karta hai aur is brahmaand ko chalane wali param shakti hai ya nahi hai is vishay par va khule man se vichar karta hai aur us vichar ko aage badhate hue prayog karta hai aur us prayog me vaah jo bhi prapt karta hai usko 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log inko ek dusre ka virodhi mangate hain aisa nahi adhyaatm ki jo rehna hai vaah dharmik granthon se hi shuru hui bhagwat geeta upanishad aur khaskar upanishad aadhyatmik sabse bade gire the jinmein vyakti ko kisi dharm ki manyata puja paddhatee vishesh ko apnane ki baat nahi kahi gayi hai kisi guru ya dharm granth me andhsradha rakhne ki bhi nahi kahin koi vyakti ko swayam khud karne ke liye prerit kiya gaya is prakar aap adhyaatm aur dharm ka antar samajh sakte hain sa roop me yahi hai ki dharmik samajik ghatna hai ek samajik vyavastha hai parampara hai itihas sapna aur naitik niyam hai uske apne aur aadhyatmik aapka apna niji khoj kar project hoon usme aap apne aap ko aur is shrishti ke rahasyon ko jaanne ke liye somwar ko jo bhi aapko apni khoj me milta hai use sweekar karte hain dhanyavad namaskar

अपनी पूछा कि एक आध्यात्मिक और धार्मिक व्यक्ति के बीच क्या अंतर है धर्म अगर हम भारतीय परंप

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Manish Bhargava

Trainer/ Mentor in Delhi education deptt.

1:44
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क्या आप मुझे एक आध्यात्मिक और धार्मिक व्यक्ति के बीच का अंतर होता है आध्यात्मिक विचारों से धर्म की पुस्तक में दिया है उसकी छोड़कर आगे बढ़ता है धार्मिक व्यक्ति भी आगे चलकर आते ही हो जाता है क्योंकि धर्म भी आध्यात्मिक की रास्ता दिखाता है और आध्यात्मिक व्यक्ति भी कई बार सब कुछ करते करते किसी एक धर्म की तरफ से विजयपाल की तरफ से धार्मिक बन जाता है इन दोनों में कई ऐसी स्थिति है कि दोनों व्यक्ति एक ही है एक ही व्यक्ति है जिसमें दोनों ही की जा संबंधित है इनका पूरी तरह से अंतर कर पाना संभव नहीं है पर मूल अंतर यही है कि आध्यात्मिक व्यक्ति वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए मैं कौन हूं चारों तरफ मेरे क्या है इस चीज पर अध्ययन करता है खुद और धार्मिक व्यक्ति जो उसे धर्म का ज्ञान मिला है उसके जरिए अध्ययन करके आगे बढ़ता है धार्मिक व्यक्ति कर्मकांड को मानने में ही भरोसा रखता है अन्य चीजों के साथ-साथ आध्यात्मिक व्यक्ति कर्मकांड में भरोसा नहीं रखता वह सिर्फ फीलिंग में भरोसा रखता है आध्यात्मिक व्यक्ति के आधार पर बताता है और धार्मिक व्यक्ति पढ़ने पढ़ाई के आधार पर दोनों में ही बेसिक अंतर है एक ने पढ़कर सीखा है एक-एक करके सिखाएं

kya aap mujhe ek aadhyatmik aur dharmik vyakti ke beech ka antar hota hai aadhyatmik vicharon se dharm ki pustak me diya hai uski chhodkar aage badhta hai dharmik vyakti bhi aage chalkar aate hi ho jata hai kyonki dharm bhi aadhyatmik ki rasta dikhaata hai aur aadhyatmik vyakti bhi kai baar sab kuch karte karte kisi ek dharm ki taraf se vijayapal ki taraf se dharmik ban jata hai in dono me kai aisi sthiti hai ki dono vyakti ek hi hai ek hi vyakti hai jisme dono hi ki ja sambandhit hai inka puri tarah se antar kar paana sambhav nahi hai par mul antar yahi hai ki aadhyatmik vyakti vaigyanik drishtikon apanate hue main kaun hoon charo taraf mere kya hai is cheez par adhyayan karta hai khud aur dharmik vyakti jo use dharm ka gyaan mila hai uske jariye adhyayan karke aage badhta hai dharmik vyakti karmakand ko manne me hi bharosa rakhta hai anya chijon ke saath saath aadhyatmik vyakti karmakand me bharosa nahi rakhta vaah sirf feeling me bharosa rakhta hai aadhyatmik vyakti ke aadhar par batata hai aur dharmik vyakti padhne padhai ke aadhar par dono me hi basic antar hai ek ne padhakar seekha hai ek ek karke sikhaye

क्या आप मुझे एक आध्यात्मिक और धार्मिक व्यक्ति के बीच का अंतर होता है आध्यात्मिक विचारों से

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

1:29
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मुझे एक अच्छा तुमको धार्मिक बच्ची के बीच संतुलन सकते हैं अभी जो है वह हमेशा ज्ञान के लिए ज्ञान की तरह के लिए ज्ञान की चरम सीमा पाने के लिए भगवान की भक्ति में डूबा रहता है और जब तक भगवान से को शक्ति प्राप्त कर लेता है ज्ञान प्राप्त कर लेता है तब तक चैन नहीं मिलती वह भक्ति और शक्ति और ज्ञान प्राप्त करके अध्यात्मिक लोगों की जानकारी प्राप्त करते हैं जबकि धार्मिक व्यक्ति धर्म के प्रति निष्ठावान होता है वह किसी देवी या देवता की आराधना को लेकर अपने धन के अनुसार समर्पित धन के हर आचरण को पत्र धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करता है और वह शेष धन पर आधारित होता है लेकिन ठंड के हर व्यक्ति को ज्ञान की प्राप्ति को उसके पास रखती हो उसके पास सकती हो यह जरूरी नहीं धड़कती धन का पुजारी तो होता है भगवान के प्रति आस्था भी रखते हैं लेकिन उसे अनोखी ज्ञान की जानकारी नहीं होती है इसलिए आध्यात्मिक और धार्मिक में कुछ अंतर

mujhe ek accha tumko dharmik bachi ke beech santulan sakte hain abhi jo hai vaah hamesha gyaan ke liye gyaan ki tarah ke liye gyaan ki charam seema paane ke liye bhagwan ki bhakti me dooba rehta hai aur jab tak bhagwan se ko shakti prapt kar leta hai gyaan prapt kar leta hai tab tak chain nahi milti vaah bhakti aur shakti aur gyaan prapt karke adhyatmik logo ki jaankari prapt karte hain jabki dharmik vyakti dharm ke prati nisthawan hota hai vaah kisi devi ya devta ki aradhana ko lekar apne dhan ke anusaar samarpit dhan ke har aacharan ko patra dharmik riti rivajon ka palan karta hai aur vaah shesh dhan par aadharit hota hai lekin thand ke har vyakti ko gyaan ki prapti ko uske paas rakhti ho uske paas sakti ho yah zaroori nahi dhadkati dhan ka pujari toh hota hai bhagwan ke prati astha bhi rakhte hain lekin use anokhi gyaan ki jaankari nahi hoti hai isliye aadhyatmik aur dharmik me kuch antar

मुझे एक अच्छा तुमको धार्मिक बच्ची के बीच संतुलन सकते हैं अभी जो है वह हमेशा ज्ञान के लिए ज

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Shubham Saini

Software Engineer

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हां जरूर आपको मैं आध्यात्मिक और धार्मिक व्यक्तियों के बीच का अंतर स्पष्ट करा सकता हूं आध्यात्मिक व्यक्ति होते हैं जो ध्यान और योग करते हैं साथ ही साथ वह वर्तमान के हर एक नियमों का पालन करते हैं धार्मिक व्यक्ति बहुत हैं जो धर्म पर विश्वास करते हैं धर्म की सारी बातें उनके लिए रामबाण है वह उन्हीं हो नहीं मानेंगे और समाज की बातों को नहीं मानेंगे ऐसे लोग धार्मिक होते हैं जो ईश्वर और दिव्य शक्तियों में विश्वास रखते हैं

haan zaroor aapko main aadhyatmik aur dharmik vyaktiyon ke beech ka antar spasht kara sakta hoon aadhyatmik vyakti hote hain jo dhyan aur yog karte hain saath hi saath vaah vartaman ke har ek niyamon ka palan karte hain dharmik vyakti bahut hain jo dharm par vishwas karte hain dharm ki saari batein unke liye rambaan hai vaah unhi ho nahi manenge aur samaj ki baaton ko nahi manenge aise log dharmik hote hain jo ishwar aur divya shaktiyon me vishwas rakhte hain

हां जरूर आपको मैं आध्यात्मिक और धार्मिक व्यक्तियों के बीच का अंतर स्पष्ट करा सकता हूं आध्य

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Dinesh Mishra

Theosophists | Accountant

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क्या आप मुझे एक आध्यात्मिक और धार्मिक व्यक्ति के बीच का अंतर समझा सकते हैं देखिए आध्यात्मिक और धार्मिक व्यक्ति एक ही हुआ करता है इसमें कोई अंतर नहीं है

kya aap mujhe ek aadhyatmik aur dharmik vyakti ke beech ka antar samjha sakte hain dekhiye aadhyatmik aur dharmik vyakti ek hi hua karta hai isme koi antar nahi hai

क्या आप मुझे एक आध्यात्मिक और धार्मिक व्यक्ति के बीच का अंतर समझा सकते हैं देखिए आध्यात्मि

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akanksha jain

Business Owner

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आध्यात्मिक व्यक्ति वह व्यक्ति होता है जिसके अंदर ज्ञान होता है ज्ञान की ज्योति होती है जिसके अंदर शास्त्रों का वेद पुराणों का ज्ञान होता है उस व्यक्ति को हम आध्यात्मिक व्यक्ति कहते हैं जो अपनी आत्मा का ज्ञान रखता है इसके लिए संसार सिर्फ सुख का साधन नहीं है जिसे संसार की सुख नहीं चाहिए जिसने संसार में आकर संसार के महत्व को समझ लिया है वह व्यक्ति आध्यात्मिक व्यक्ति होता है धार्मिक व्यक्ति हम उस व्यक्ति को कहेंगे कि अंदर धर्म है और सही कहा जाए तो धर्म की व्याख्या भी अपने आप में अध्यात्म से ही जुड़ी है लेकिन आजकल की जनरेशन के लिए तो इतना ही है कि धार्मिक व्यक्ति उस व्यक्ति को कहा जाता है इस जो चैनल ही पूजा-पाठ शान मंदिर जाना ईश्वर की भक्ति करना पूजा पाठ करना बस सच में लिखा जाए तो धर्म यह नहीं होता यह तो क्रियाएं होती हैं धर्म होता है इसके अंदर हमें व्यक्ति के साथ किए जाने वाले हित और अहित का ज्ञान हो अगर हमारे किसी भी कर्म से किसी भी व्यक्ति के अंदर किसी भी तरीके का दुख आता है तो हम धार्मिक प्रवृत्ति किया था दूसरी कोई सकते हमें अपने अंदर अपने अपने व्यवहार को अपनी व्या अपनी वाणी को अपने व्यक्तित्व को इस तरीके से डालना पड़ता है या इस तरीके से रखना पड़ता है कि हम हमारे द्वारा किए गए कार्य से किसी को भी तकलीफ में हूं बट देखा जाए तो असल में बहुत ही मस्त है पंचम काल में यह सबसे ज्यादा मुझसे कार्य है लेकिन फिर भी दोनों ही चीजों का अपना-अपना महत्व है आप अध्यात्म का कितना ज्ञान होगा आप धर्म के इतने करीब होते चले जाएंगे इसीलिए हमें दोनों ही चीजों का पालन करना चाहिए दोनों ही चीजों का उल्लेख अपने जीवन में रखना चाहिए और दोनों ही चीजों के महत्व को समझना चाहिए

aadhyatmik vyakti vaah vyakti hota hai jiske andar gyaan hota hai gyaan ki jyoti hoti hai jiske andar shastron ka ved purano ka gyaan hota hai us vyakti ko hum aadhyatmik vyakti kehte hain jo apni aatma ka gyaan rakhta hai iske liye sansar sirf sukh ka sadhan nahi hai jise sansar ki sukh nahi chahiye jisne sansar me aakar sansar ke mahatva ko samajh liya hai vaah vyakti aadhyatmik vyakti hota hai dharmik vyakti hum us vyakti ko kahenge ki andar dharm hai aur sahi kaha jaaye toh dharm ki vyakhya bhi apne aap me adhyaatm se hi judi hai lekin aajkal ki generation ke liye toh itna hi hai ki dharmik vyakti us vyakti ko kaha jata hai is jo channel hi puja path shan mandir jana ishwar ki bhakti karna puja path karna bus sach me likha jaaye toh dharm yah nahi hota yah toh kriyaen hoti hain dharm hota hai iske andar hamein vyakti ke saath kiye jaane waale hit aur ahit ka gyaan ho agar hamare kisi bhi karm se kisi bhi vyakti ke andar kisi bhi tarike ka dukh aata hai toh hum dharmik pravritti kiya tha dusri koi sakte hamein apne andar apne apne vyavhar ko apni vya apni vani ko apne vyaktitva ko is tarike se dalna padta hai ya is tarike se rakhna padta hai ki hum hamare dwara kiye gaye karya se kisi ko bhi takleef me hoon but dekha jaaye toh asal me bahut hi mast hai pancham kaal me yah sabse zyada mujhse karya hai lekin phir bhi dono hi chijon ka apna apna mahatva hai aap adhyaatm ka kitna gyaan hoga aap dharm ke itne kareeb hote chale jaenge isliye hamein dono hi chijon ka palan karna chahiye dono hi chijon ka ullekh apne jeevan me rakhna chahiye aur dono hi chijon ke mahatva ko samajhna chahiye

आध्यात्मिक व्यक्ति वह व्यक्ति होता है जिसके अंदर ज्ञान होता है ज्ञान की ज्योति होती है जिस

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आपका सवाल है कि क्या आप मुझे एक आध्यात्मिक और धार्मिक व्यक्ति के बीच का अंतर समझा सकते हैं दोनों ही चीजें आपके अंतर्मन को बदलने वाली एक स्थिति की तरफ इशारा करती हैं उसको आप चाहे तो धार्मिकता कह ले उसको आप चाहे तो आध्यात्मिकता के लिए मतलब बाहर से उसका कोई ज्यादा संबंध नहीं है आपके भीतर आपके अंतर्मन की स्थिति कैसी है और उस अंतर्मन की जब स्थिति बदलती है तो इंसान के अंदर धार मिटाना शुरू होती है और वह ऐसी बदली हुई मानसिक स्थिति के साथ अपने आसपास व्यवहार करना शुरू करता है और ऐसा व्यवहार सब के लिए अच्छा होता है उसे खुद के लिए भी अच्छा तो होता ही होता है लेकिन बदले हुए गवार के साथ जब वह दुनिया में अपना जो भी काम है या कर्म करता है तो उसकी की बदली भी स्थिति की झलक भी उसमें दिखाई देने लगती है तो इससे पता चल जाता है कि व्यक्ति आध्यात्मिक होता जा रहा है और यह दोनों ही टर्न्स बहुत गहरी हैं धर्म धार्मिकता और आध्यात्मिकता से ऐसे समझ ले कि कोई एक व्यक्ति संवेदनशील है तो संवेदनशील है तो वह किसी के दुख में भी महसूस करेगा दुख को और कोई गति संवेदनशील है किसी के मन में करुणा है तो वह प्रार्थना भी करेगा कि किसी के मन में किसी के जीवन में दुख ना आए यह सभी अच्छे से रहें या सभी प्रसन्न रहें इस तरीके की भावना रखने वाला व्यक्ति यही वास्तविक धार्मिकता का सूचक है या आध्यात्मिकता का सूचक है मतलब हमारे भीतर के गुणों में परिवर्तन होना और जो जब वह परिवर्तन होंगे तो हमारी विचारधारा में बदलाव आएगा हमारी सोच में बदलाव आएगा सोच बदलेगी तो हमारे व्यवहार बदलाव आएगा हमारे कर्मों में भी बदलाव आएगा एक गुणवत्ता ना शुरू होगी क्वालिटी आना शुरू होगी और वह ही क्वालिटी फिर हमको आगे ऊपर ले जाएगी तो बिल्कुल ऐसी प्रक्रिया है रिवर्स इतना जितना आप आध्यात्मिक होते जाते हैं आप धार्मिक होते जाते हैं उतना उतना आपकी बाहर की प्रगति भी बढ़ती चली जाती है

aapka sawaal hai ki kya aap mujhe ek aadhyatmik aur dharmik vyakti ke beech ka antar samjha sakte hain dono hi cheezen aapke antarman ko badalne wali ek sthiti ki taraf ishara karti hain usko aap chahen toh dharmikata keh le usko aap chahen toh aadhyatmikta ke liye matlab bahar se uska koi zyada sambandh nahi hai aapke bheetar aapke antarman ki sthiti kaisi hai aur us antarman ki jab sthiti badalti hai toh insaan ke andar dhar mitana shuru hoti hai aur vaah aisi badli hui mansik sthiti ke saath apne aaspass vyavhar karna shuru karta hai aur aisa vyavhar sab ke liye accha hota hai use khud ke liye bhi accha toh hota hi hota hai lekin badle hue gavar ke saath jab vaah duniya me apna jo bhi kaam hai ya karm karta hai toh uski ki badli bhi sthiti ki jhalak bhi usme dikhai dene lagti hai toh isse pata chal jata hai ki vyakti aadhyatmik hota ja raha hai aur yah dono hi turns bahut gehri hain dharm dharmikata aur aadhyatmikta se aise samajh le ki koi ek vyakti samvedansheel hai toh samvedansheel hai toh vaah kisi ke dukh me bhi mehsus karega dukh ko aur koi gati samvedansheel hai kisi ke man me corona hai toh vaah prarthna bhi karega ki kisi ke man me kisi ke jeevan me dukh na aaye yah sabhi acche se rahein ya sabhi prasann rahein is tarike ki bhavna rakhne vala vyakti yahi vastavik dharmikata ka suchak hai ya aadhyatmikta ka suchak hai matlab hamare bheetar ke gunon me parivartan hona aur jo jab vaah parivartan honge toh hamari vichardhara me badlav aayega hamari soch me badlav aayega soch badalegi toh hamare vyavhar badlav aayega hamare karmon me bhi badlav aayega ek gunavatta na shuru hogi quality aana shuru hogi aur vaah hi quality phir hamko aage upar le jayegi toh bilkul aisi prakriya hai reverse itna jitna aap aadhyatmik hote jaate hain aap dharmik hote jaate hain utana utana aapki bahar ki pragati bhi badhti chali jaati hai

आपका सवाल है कि क्या आप मुझे एक आध्यात्मिक और धार्मिक व्यक्ति के बीच का अंतर समझा सकते हैं

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Dr Sanjay Kumar

Life Coach, Parenting Mentor, Relationship Coach

1:43
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार दोस्तों में डॉक्टर संजय कुमार कमेंट अर्ग आइडल लाइव फेसबुक पर फिर से आपका स्वागत करता हूं क्या आप मुझे एक आध्यात्मिक और धार्मिक के बीच का अंतर समझा सकते हैं तो दोनों को डिफाइन करने का प्रयत्न करते हैं आध्यात्मिक व्यक्ति व्यक्ति है जो अध्यात्म मतलब अपने अंदर की यात्रा करता है अपने क्वेश्चन का अध्ययन करता है और अपने शारीरिक मानसिक भावनात्मक और आध्यात्मिक विकास के लिए अग्रसर रहता है और अपने अंदर की यात्रा करते हुए अपने को समझता है और वहीं पर धार्मिक व्यक्ति वही है जो धर्म मतलब उस समय की परिस्थितियों के अनुसार जो भी आपकी कर्तव्य परायणता है कर्तव्य जो भी हैं आपकी उसके हिसाब से आश्रम जो करता है किसी पट्टी कूलर तरीके से एक जो है दूध के द्वारा उसको धार्मिक व्यक्ति बोलते हैं तो दोनों में फर्क जरूर है लेकिन दोनों ही व्यक्ति अपनी अपनी जगह इंपॉर्टेंट है और दोनों ही लोग लोगों की जिंदगी में हर अपनी जिंदगी में वैल्यू एडिशन करते हैं कॉन्ट्रिब्यूशन करते हैं बशर्ते वह कट्टर ना हो और दूसरे को फायदा पहुंचाने और टेलीविजन की तरफ बात करने की तरफ अग्रसर रहे दोनों ही चीजें बहुत सुंदर है अपने अपने तरीके से अपने अपने जिंदगी के मायने ढूंढे हम और खुशियां हासिल करें अपने साथी से समाप्त करता हूं आपकी जिंदगी और आपके आने वाले दिन बहुत शुभ हो नमस्कार

namaskar doston me doctor sanjay kumar comment arg idol live facebook par phir se aapka swaagat karta hoon kya aap mujhe ek aadhyatmik aur dharmik ke beech ka antar samjha sakte hain toh dono ko define karne ka prayatn karte hain aadhyatmik vyakti vyakti hai jo adhyaatm matlab apne andar ki yatra karta hai apne question ka adhyayan karta hai aur apne sharirik mansik bhavnatmak aur aadhyatmik vikas ke liye agrasar rehta hai aur apne andar ki yatra karte hue apne ko samajhata hai aur wahi par dharmik vyakti wahi hai jo dharm matlab us samay ki paristhitiyon ke anusaar jo bhi aapki kartavya parayanata hai kartavya jo bhi hain aapki uske hisab se ashram jo karta hai kisi patti cooler tarike se ek jo hai doodh ke dwara usko dharmik vyakti bolte hain toh dono me fark zaroor hai lekin dono hi vyakti apni apni jagah important hai aur dono hi log logo ki zindagi me har apni zindagi me value edition karte hain contribution karte hain basharte vaah kattar na ho aur dusre ko fayda pahunchane aur television ki taraf baat karne ki taraf agrasar rahe dono hi cheezen bahut sundar hai apne apne tarike se apne apne zindagi ke maayne dhundhe hum aur khushiya hasil kare apne sathi se samapt karta hoon aapki zindagi aur aapke aane waale din bahut shubha ho namaskar

नमस्कार दोस्तों में डॉक्टर संजय कुमार कमेंट अर्ग आइडल लाइव फेसबुक पर फिर से आपका स्वागत कर

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Ashok Bajpai

Rtd. Additional Collector P.C.S. Adhikari

1:05
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राम राम जी आपका प्रश्न क्या आप मुझे आध्यात्मिक और धार्मिक के बीच का अंतर समझा सकते गीता में कृष्ण भगवान ने तीन तरह की भक्ताई एक तो भक्ति योग तीन प्रकार के योग बताए तो भक्ति योग एक ज्ञान योगिक कर दो दूध की भक्ति योग जो व्यक्ति करता है वह धार्मिक व्यक्ति होता है और ज्ञान योग जो व्यक्ति करता है वह आध्यात्मिक होता है ज्ञान पिपासु विज्ञान की खोज रहा है जबकि धार्मिक व्यक्ति के बारे में छुपा है दोनों में एक भेजें आप जो होता है वह ज्ञान योग से ईश्वर पाना चाहता है धार्मिक व्यक्ति भक्तियोग से

ram ram ji aapka prashna kya aap mujhe aadhyatmik aur dharmik ke beech ka antar samjha sakte geeta me krishna bhagwan ne teen tarah ki bhaktai ek toh bhakti yog teen prakar ke yog bataye toh bhakti yog ek gyaan yogic kar do doodh ki bhakti yog jo vyakti karta hai vaah dharmik vyakti hota hai aur gyaan yog jo vyakti karta hai vaah aadhyatmik hota hai gyaan pipasu vigyan ki khoj raha hai jabki dharmik vyakti ke bare me chupa hai dono me ek bheje aap jo hota hai vaah gyaan yog se ishwar paana chahta hai dharmik vyakti bhaktiyog se

राम राम जी आपका प्रश्न क्या आप मुझे आध्यात्मिक और धार्मिक के बीच का अंतर समझा सकते गीता मे

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जाटनी व्यक्ति योग और अध्यात्म के द्वारा ज्ञान प्राप्त कर्ताओं धार्मिक व्यक्ति जो है मंदिर और भगवान का सच्चा भक्त होता है इन दोनों में अंतर दोनों का उद्देश्य होता है दोनों के माध्यम अलग अलग होता है एक मंदिर जाकर पूजा करता है और अध्यात्म MP3 में योगा करता है और वही अपने आराध्य को सांसों के माध्यम से ज्ञान चक्र के माध्यम से उद्दे करके पूजा करता है

jatni vyakti yog aur adhyaatm ke dwara gyaan prapt kartaon dharmik vyakti jo hai mandir aur bhagwan ka saccha bhakt hota hai in dono me antar dono ka uddeshya hota hai dono ke madhyam alag alag hota hai ek mandir jaakar puja karta hai aur adhyaatm MP3 me yoga karta hai aur wahi apne aradhya ko shanson ke madhyam se gyaan chakra ke madhyam se udde karke puja karta hai

जाटनी व्यक्ति योग और अध्यात्म के द्वारा ज्ञान प्राप्त कर्ताओं धार्मिक व्यक्ति जो है मंदिर

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Best Astrologer Anju Sharma

Astrologer Consultant

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सर आपका सवाल है आध्यात्मिक और धार्मिक व्यक्ति के बीच का अंतर तो सर वेरी ईजी टो अंडरस्टैंड धार्मिक को है जो धर्म के हिसाब से चल रहा है धर्म की कट्टरता के हिसाब से भी चल सकता है और मंदिरों में जाना पूजा पाठ कर्मकांड करना लेकिन आध्यात्मिक वो होता है जो अपने अंतर आत्मा के साथ जुड़ा हुआ है जो हर इंसान के अंदर की आत्मा के साथ बात करता है उसके अंदर के परमेश्वर को देख लेता है वह है आध्यात्मिक जो अपने धर्म के हिसाब से चलता है हिंदू है सीखे मुसलमान है इंसान नहीं है उन पर लेबल लगाकर चलता है वह धार्मिक है और जो विदाउट लेवल चलता है कि मैं प्यार नहीं कर धन्यवाद

sir aapka sawaal hai aadhyatmik aur dharmik vyakti ke beech ka antar toh sir very easy toe understand dharmik ko hai jo dharm ke hisab se chal raha hai dharm ki kattartaa ke hisab se bhi chal sakta hai aur mandiro me jana puja path karmakand karna lekin aadhyatmik vo hota hai jo apne antar aatma ke saath juda hua hai jo har insaan ke andar ki aatma ke saath baat karta hai uske andar ke parmeshwar ko dekh leta hai vaah hai aadhyatmik jo apne dharm ke hisab se chalta hai hindu hai sikhe musalman hai insaan nahi hai un par lebal lagakar chalta hai vaah dharmik hai aur jo without level chalta hai ki main pyar nahi kar dhanyavad

सर आपका सवाल है आध्यात्मिक और धार्मिक व्यक्ति के बीच का अंतर तो सर वेरी ईजी टो अंडरस्टैंड

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Meenaxi Yadav

Wellness Coach

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आध्यात्मिक व्यक्ति वह होता है जो आध्यात्मिक के जो मतलब नियमों को मानता है जॉब इन नियमों को जीता है जो नियमों का पालन करता है जो अपने धर्म के नियमों का पालन करता है और धार्मिक व्यक्ति होता है जो धर्म के प्रभु गंडा गंडा कुमार धर्म धर्म धर्म एक धार्मिक उन्माद होता है जो बिना सोचे समझे बस जो पोपो वनडे जो शुरू हो जाते हैं बस उनको लेकर चलता है अध्यात्म बुक है जो आत्मा का विज्ञान है जो मतलब आत्मा को आपकी शुद्ध करता है और धार्मिकता है जो अध्यात्म वह है जो ज्ञानी है जो ज्ञान आपको अंदर आपकी आत्मा को शुद्ध करता है आपको नियमित करता है आप को अनुशासित क धार्मिक होना मतलब धर्म एक ऐसी चीज है जो प्रोपेगंडा को मारने के लिए हमें मजबूर करता है

aadhyatmik vyakti vaah hota hai jo aadhyatmik ke jo matlab niyamon ko maanta hai job in niyamon ko jita hai jo niyamon ka palan karta hai jo apne dharm ke niyamon ka palan karta hai aur dharmik vyakti hota hai jo dharm ke prabhu ganda ganda kumar dharm dharm dharm ek dharmik unmaad hota hai jo bina soche samjhe bus jo popo oneday jo shuru ho jaate hain bus unko lekar chalta hai adhyaatm book hai jo aatma ka vigyan hai jo matlab aatma ko aapki shudh karta hai aur dharmikata hai jo adhyaatm vaah hai jo gyani hai jo gyaan aapko andar aapki aatma ko shudh karta hai aapko niyamit karta hai aap ko anushasit k dharmik hona matlab dharm ek aisi cheez hai jo propaganda ko maarne ke liye hamein majboor karta hai

आध्यात्मिक व्यक्ति वह होता है जो आध्यात्मिक के जो मतलब नियमों को मानता है जॉब इन नियमों क

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अध्यात्म का संबंध आत्मिक विकास से से चक्की धर्म का संबंध नैतिक विचारों से ही

adhyaatm ka sambandh atmik vikas se se chakki dharm ka sambandh naitik vicharon se hi

अध्यात्म का संबंध आत्मिक विकास से से चक्की धर्म का संबंध नैतिक विचारों से ही

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