साधारण मनुष्य जीवन में कभी संतुष्ट नहीं होते। जब एक चीज़ मिल जाती है तो उन्हें कुछ और चाहिए होता है। ऐसा क्यों होता है क्या आप हमें बता सकते है?...


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Pankaj Kr(youtube -AJ PANKAJ MATHS GURU)

Motivational Speaker/YouTube-AJ PANKAJ MATHS GURU

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मनीष पिक्चर ननंद है एक चक्रवर्ती होती है दूसरी चा जाती है फिर उसको प्राप्त करने में अपना समय बर्बाद करते हैं इसलिए इंसान को संतुष्टि होना चाहिए जो इन जिस इंसान को संतुष्टि नहीं है व जीवन में कभी सुख नहीं प्राप्त करता है वैसा इंसान हमेशा मैंने जिसको प्राप्त करने का कोशिश करेगा और मैं जाने के बावजूद भी परेशान रहेगा

manish picture nanand hai ek chakravarti hoti hai dusri cha jaati hai phir usko prapt karne me apna samay barbad karte hain isliye insaan ko santushti hona chahiye jo in jis insaan ko santushti nahi hai va jeevan me kabhi sukh nahi prapt karta hai waisa insaan hamesha maine jisko prapt karne ka koshish karega aur main jaane ke bawajud bhi pareshan rahega

मनीष पिक्चर ननंद है एक चक्रवर्ती होती है दूसरी चा जाती है फिर उसको प्राप्त करने में अपना स

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मैं हूं और यह मेरा है तू है और यह तेरा है बस माया इसी को कहते हैं यही अंजाना दे रहा है मानवता अगर उसके अंदर कितनी होती अज्ञानता उसके अंदर घिरे हुए हैं जिस आदमी की आवश्यकताएं अनंत है उसका मन नहीं भरता कभी किस देश से जीवन में पैसे के पीछे चमक के पीछे भागते रहता है जिसे संतोष नहीं उसे कभी संतोष नहीं होता और अंत में वह जीवन अपना खो देता है अपने जीवन को संतोष में बनाइए जो जितनी आपकी कमाई उतनी कमाई पर भरोसा कीजिए उस मानसिकता कल के लिए बचाइए संतोषी प्रक्रिया पर रखिए किसी तरह से किसी से ईर्ष्या और द्वेष भावना रखिए यह सब चीजें जीवन को सही मार्ग पर ले जाने के लिए बहुत अच्छा कार्य करना चाहता हूं कि मानवता इसी उद्देश्य से हम लोग आगे बढ़ा सकते हैं समाज की सेवा भी कर सकते हैं

main hoon aur yah mera hai tu hai aur yah tera hai bus maya isi ko kehte hain yahi anjaana de raha hai manavta agar uske andar kitni hoti agyanata uske andar ghire hue hain jis aadmi ki aavashyakataen anant hai uska man nahi bharta kabhi kis desh se jeevan me paise ke peeche chamak ke peeche bhagte rehta hai jise santosh nahi use kabhi santosh nahi hota aur ant me vaah jeevan apna kho deta hai apne jeevan ko santosh me banaiye jo jitni aapki kamai utani kamai par bharosa kijiye us mansikta kal ke liye bachaiye santosh prakriya par rakhiye kisi tarah se kisi se irshya aur dvesh bhavna rakhiye yah sab cheezen jeevan ko sahi marg par le jaane ke liye bahut accha karya karna chahta hoon ki manavta isi uddeshya se hum log aage badha sakte hain samaj ki seva bhi kar sakte hain

मैं हूं और यह मेरा है तू है और यह तेरा है बस माया इसी को कहते हैं यही अंजाना दे रहा है मान

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जीवन गतिमान है और मनुष्य महत्व कम थी और होना भी चाहिए अगर यह जीने की भूख नहीं होगी आगे बढ़ने का उत्साह नहीं होगा तो मनीष निराश हो जाएगा मुझे निराशा उसे या तो मनोरोग की तरफ से जाएगी या फिर आत्मदाह की तरफ इसलिए मनुष्य को महत्वाकांक्षी भी आना चाहिए उसे लालची भी होना चाहिए लेकिन सामाजिक मर्यादाओं का पालन करते हुए किसी का हक छीन कर हमें आगे नहीं बढ़ रहे हैं हमें अपने मेहनत करना है

jeevan gatiman hai aur manushya mahatva kam thi aur hona bhi chahiye agar yah jeene ki bhukh nahi hogi aage badhne ka utsaah nahi hoga toh manish nirash ho jaega mujhe nirasha use ya toh manorog ki taraf se jayegi ya phir aatmadaah ki taraf isliye manushya ko mahatwakanshi bhi aana chahiye use lalchi bhi hona chahiye lekin samajik maryadaon ka palan karte hue kisi ka haq cheen kar hamein aage nahi badh rahe hain hamein apne mehnat karna hai

जीवन गतिमान है और मनुष्य महत्व कम थी और होना भी चाहिए अगर यह जीने की भूख नहीं होगी आगे बढ़

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Krishna Kumar Gupta

Astrologer And Tantrokt Vastu Consultant

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

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सलमान मलिक कभी संतुष्ट नहीं होते 1 जून को प्राप्त होती है कि दूसरे की इच्छा हो जाती है दूसरी प्राप्त होती है 251 इच्छा हो जाती है और वे लोग संतुष्ट नहीं हो पाते प्राया मनुष्य की आवश्यकताएं अनंत साधन सीमित आवश्यकताओं के गाना इंसान प्रयास करता है क्योंकि उसके इंडिया उसके काबू में नहीं होती मन बस में नहीं होता इसलिए इंसान होगी और सभी प्रकार की वस्तुओं को संचित करते हैं वह भौतिक पदार्थों को संचित करता है बजाएं आध्यात्मिक कर्मों के परिणाम यह होता है कि वह व्यक्ति कभी संतुष्ट नहीं हो पाता अगर वह आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त कर लेता है तो वह भौतिक पदार्थों के प्रति उसका आकर्षण कम हो जाता है और वह संतुष्ट हो जाता है लेकिन आम आदमी पौष्टिक पदार्थों के आकर्षण से लालायित रहता है इसलिए वह उन्हें प्राप्ति के लिए प्यार करता है और उसकी आवश्यकता है जो है वह कभी संतुष्ट नहीं होती तो कि उसका मनोभावों ऐसा हो जाता है

salman malik kabhi santusht nahi hote 1 june ko prapt hoti hai ki dusre ki iccha ho jaati hai dusri prapt hoti hai 251 iccha ho jaati hai aur ve log santusht nahi ho paate praya manushya ki aavashyakataen anant sadhan simit avashayaktaon ke gaana insaan prayas karta hai kyonki uske india uske kabu me nahi hoti man bus me nahi hota isliye insaan hogi aur sabhi prakar ki vastuon ko sanchit karte hain vaah bhautik padarthon ko sanchit karta hai bajaye aadhyatmik karmon ke parinam yah hota hai ki vaah vyakti kabhi santusht nahi ho pata agar vaah aadhyatmik gyaan prapt kar leta hai toh vaah bhautik padarthon ke prati uska aakarshan kam ho jata hai aur vaah santusht ho jata hai lekin aam aadmi paushtik padarthon ke aakarshan se lalayit rehta hai isliye vaah unhe prapti ke liye pyar karta hai aur uski avashyakta hai jo hai vaah kabhi santusht nahi hoti toh ki uska manobhavon aisa ho jata hai

सलमान मलिक कभी संतुष्ट नहीं होते 1 जून को प्राप्त होती है कि दूसरे की इच्छा हो जाती है दूस

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

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साधारण मनुष्य जीवन में कभी संतुष्ट नहीं होते जो एक चीज मिल जाती है तो उन्हें कुछ और चाहिए होता है ऐसा क्यों होता है क्या हमें बता सकते जैसा होता है कि मानव जिंदगी में अपने जिंदगी में वह ऐसा सोचता है कि जो अलग-अलग बोल सकने डिसाइड कर रखे हैं वह से से जावेद चेक कर लेता है आ जाता है चीज को उसके बाद में दूसरे को सेट करता है और फिर बाद में एक के बाद एक वह सफलता अगर आता जाता है और चीजों को हासिल करने करते जाता है इसके बाद क्या इसके बाद क्या इसके बाद क्या जब यह भावना मन में आती है तो उसके मन में एक समय ऐसा जरूर आता है और वह समय ऐसा होता है क्यों खुद अपने आप के दिमाग से सोचने पर मजबूर हो जाता है कि इसके बाद क्या उसका जवाब उसे सिर्फ अनंत इच्छाओं के बाद सिर्फ एक ही चीज नजर आती है मुझे अवश्यंभावी है और वह इसके बारे में सोचकर जरूर थोड़ा अपने विचारों को बदलने के लिए मजबूर हो जाता है जो भौतिक चीजें में जिंदगी में इच्छा की और मिली उत्सव भौतिक चीजों का आनंद लेने के बाद उसे पूरा बहुत उसका झुकाव अध्यक्षता अध्यक्ष होना ज्यादा बेहतर होता है कुछ लोग आध्यात्मिकता के तरफ उनका झुकाव होता है और कुछ लोगों का नहीं होता वह मरते दम तक से भौतिक चीजों के पीछे देशों के पीछे धन के पीछे सब चीज के पीछे भागते रहते हैं और वह लोग कभी भी संतृप्त नहीं होते और और और चाहिए और चाहिए लेकिन और चाहते चाहते हैं उनकी अंत समय नजदीक आ जाता है इसलिए जो धर्म जो आध्यात्मिकता अगर वह उनके मानस में अगर आ जाए तो उन्हें एक तरह की सिचुएशन टिकट का अनुभव होता है और वह तंत्र पर हो जाते हैं याने की संतोषी हो जाते हैं और जो संतोष काका होता है फिर उन्हें किसी और ज्यादा चीज की चाहत नहीं रहती वह सब भौतिक चीजों के पीछे फिर नहीं भागते जो अभी तक उन्होंने अर्जित कर लिया है जो पाया है उसी में वह आनंदित रहते हैं और यह प्रस्तुति जब आती है तो एक तरह से कहा जाए कि ज्यादा सुंदर समय उनके लिए हो जाता है और हर एक इंसान को अगर यह परिस्थिति ऐसी अगर आए तो उन्हें दुनिया बहुत ही सुंदर लगती है बहुत-बहुत धन्यवाद

sadhaaran manushya jeevan me kabhi santusht nahi hote jo ek cheez mil jaati hai toh unhe kuch aur chahiye hota hai aisa kyon hota hai kya hamein bata sakte jaisa hota hai ki manav zindagi me apne zindagi me vaah aisa sochta hai ki jo alag alag bol sakne decide kar rakhe hain vaah se se javed check kar leta hai aa jata hai cheez ko uske baad me dusre ko set karta hai aur phir baad me ek ke baad ek vaah safalta agar aata jata hai aur chijon ko hasil karne karte jata hai iske baad kya iske baad kya iske baad kya jab yah bhavna man me aati hai toh uske man me ek samay aisa zaroor aata hai aur vaah samay aisa hota hai kyon khud apne aap ke dimag se sochne par majboor ho jata hai ki iske baad kya uska jawab use sirf anant ikchao ke baad sirf ek hi cheez nazar aati hai mujhe awasyambhavi hai aur vaah iske bare me sochkar zaroor thoda apne vicharon ko badalne ke liye majboor ho jata hai jo bhautik cheezen me zindagi me iccha ki aur mili utsav bhautik chijon ka anand lene ke baad use pura bahut uska jhukaav adhyakshata adhyaksh hona zyada behtar hota hai kuch log aadhyatmikta ke taraf unka jhukaav hota hai aur kuch logo ka nahi hota vaah marte dum tak se bhautik chijon ke peeche deshon ke peeche dhan ke peeche sab cheez ke peeche bhagte rehte hain aur vaah log kabhi bhi santript nahi hote aur aur aur chahiye aur chahiye lekin aur chahte chahte hain unki ant samay nazdeek aa jata hai isliye jo dharm jo aadhyatmikta agar vaah unke manas me agar aa jaaye toh unhe ek tarah ki situation ticket ka anubhav hota hai aur vaah tantra par ho jaate hain yane ki santosh ho jaate hain aur jo santosh kaka hota hai phir unhe kisi aur zyada cheez ki chahat nahi rehti vaah sab bhautik chijon ke peeche phir nahi bhagte jo abhi tak unhone arjit kar liya hai jo paya hai usi me vaah anandit rehte hain aur yah prastuti jab aati hai toh ek tarah se kaha jaaye ki zyada sundar samay unke liye ho jata hai aur har ek insaan ko agar yah paristhiti aisi agar aaye toh unhe duniya bahut hi sundar lagti hai bahut bahut dhanyavad

साधारण मनुष्य जीवन में कभी संतुष्ट नहीं होते जो एक चीज मिल जाती है तो उन्हें कुछ और चाहिए

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Rakesh Tiwari

Life Coach, Management Trainer

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आपका फ्रेंड है धार्मिक जीवन वास्तव में इच्छाओं की जगह होता है कुत्ते को संतुष्ट किया जाए उतना ही पड़ती है वास्तव में वासना को जितना राम ने उतना संतुष्ट किया जाता है इसका स्वरूप और आकार उतना ही बढ़ता जाता है और जब व्यक्ति के अंदर लोग हो वीडियो उसके अंदर कभी भी संतुष्ट न होने के संग्रह चीजों के पीछे पड़ा रहता है वास्तव में असंतुष्ट होना एक तरह से आभार को हनुमान है सब कुछ होते हुए भी आपके पास कुछ नहीं होता कि आप शक्कर के ढेर में बैठे जिम्मेदार होगा जीवन में कभी संतुष्ट नहीं होती और अपने जीवन को तनाव और कविता

aapka friend hai dharmik jeevan vaastav me ikchao ki jagah hota hai kutte ko santusht kiya jaaye utana hi padti hai vaastav me vasana ko jitna ram ne utana santusht kiya jata hai iska swaroop aur aakaar utana hi badhta jata hai aur jab vyakti ke andar log ho video uske andar kabhi bhi santusht na hone ke sangrah chijon ke peeche pada rehta hai vaastav me asantusht hona ek tarah se abhar ko hanuman hai sab kuch hote hue bhi aapke paas kuch nahi hota ki aap shakkar ke dher me baithe zimmedar hoga jeevan me kabhi santusht nahi hoti aur apne jeevan ko tanaav aur kavita

आपका फ्रेंड है धार्मिक जीवन वास्तव में इच्छाओं की जगह होता है कुत्ते को संतुष्ट किया ज

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Ankur Bhardwaj

Lawn Tennis Coach, Motivational Speaker.

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नमस्कार मैं खुद भारद्वाज हूं मुझे एक प्रश्न मिलाया के साधारण मनुष्य जीवन में कभी संतुष्ट नहीं होते जो व्यक्ति मिल जाती है तो उसे कुछ और चाहिए होता है ऐसा क्यों होता है क्या आप बता सकते हैं बिल्कुल मैं अपने अपने फोन से कोशिश करता हूं मैं जितना हो सके आपकी इस संस्था को समझा सकूं लिखी बात ऐसी है कि लोग किसी भी पायदान पर पहुंच कर जिंदगी के संतुष्ट नहीं होते अगर कोई बंदा 1000000 कमा रहा है तो वह कहेगा कि मैं 20 कमाने और कोई 5000000 हमारे तो वह कहेगा मैं असीला कमाओ घर एक लड़का मारा था कि मैं तो अगर आप चाहती है इस चीज को कंट्रोल करना तो परमात्मा से सिर्फ एक ही दुआ कीजिए कि वह आपको इतना दे कि आपके घर में आपका परिवार तीन टाइम खाना खा सके कपड़े पहन सके और अपनी एक नार्मल लाइक जी सकें विकी जरूरतें कम है उसके जमीर में दम है मैं सिर्फ यह बात आपको कहना चाहूंगा अपनी जरूरतों को लिमिटेड कर लीजिए हमें जरूरत को बढ़ाइए मत जा जितना चाहे जूतों को बढ़ा सकते हैं उतना ही आप खर्चा बना लेगी उतना आपको ढूंढ लेना पड़ेगा तो कई बार यह रात हो जाती है बंदे की की पदावली सॉन्ग को देखने के लिए वैसा काम करता है कि सारी उम्र उसकी वह कर्ज चुकाने में निकल जाती है तो मेरे हिसाब से ऐसा करने का कोई फायदा नहीं अपने शरीर को कष्ट देने का कोई फायदा नहीं कटे को रिकॉर्डिंग जरूर रखे हैं बस उनके लिए एक्सपेंडिचर करें और अपने परिवार को भी बच्चों को भी शिक्षा दें कि फालतू खर्चा बंद करें यह मोह माया की चीजों से जितना हो सके दूर रहें यह सब चीजें देखने में बहुत अच्छी लगती है हिंदी बड़ी-बड़ी गाड़ी है बड़े-बड़े कर लेकिन जवाब रेल टीम उनके अंदर घुस कर देखेंगे तो उनके घरों में सुकून नहीं होंगे घर में सुकून की नींद नहीं है तो पीपल आर यू स्लीपिंग पिल्स ऑलमोस्ट बाप देखेंगे बड़े-बड़े करो के लड़के उनके बच्चे या तो वह गलत सोसाइटी में पड़ जाते हैं या फिर उनको रात को ऐसे ही प्रॉब्लम होती है क्योंकि कुछ रिपीटर्स लेकर सोना पड़ता है तो भगवान को छूकर कि आप को जितना भी है बहुत है अगर आपका परिवार तीन टाइम खाना खा रहा है तो उससे बड़ा आप सुख कहीं नहीं आपको मिल सकता अगर आप अपने जूते कम कर देंगे तो आपकी जिंदगी बहुत अच्छी हो जाएगी अपने को दूसरों से कंपेयर करना बंद कीजिए उसके पास और भी है मेरे पास वरना है तो मुझे नहीं होनी चाहिए तो यह चीजें जो है यह तक आपके मन में ऐसी चीजें आती रहेगी तब तक आपके अंदर लालसा बढ़ेगी या अंदर बढ़ेगा तरीका गीत दिखा सकते हैं बताऊंगा गीत मनुष्य का तो जिंदगी का एक आप कह सकते हैं कि मनुष्य चीज ही ऐसी बनाई परमात्मने रखा है वह चाहते हैं कि जान इसी को बचाने और मोक्ष के रास्ते जाने की सोच ना सके उसको समझने भी ध्यान दे थोड़ा कम करें बिना फालतू के खर्च एवं को बंद करें तो जरूरत हो जाएंगे और आपकी जिंदगी बहुत अच्छे रास्ते पर आ जाएगी

namaskar main khud bhardwaj hoon mujhe ek prashna milaya ke sadhaaran manushya jeevan me kabhi santusht nahi hote jo vyakti mil jaati hai toh use kuch aur chahiye hota hai aisa kyon hota hai kya aap bata sakte hain bilkul main apne apne phone se koshish karta hoon main jitna ho sake aapki is sanstha ko samjha sakun likhi baat aisi hai ki log kisi bhi payadan par pohch kar zindagi ke santusht nahi hote agar koi banda 1000000 kama raha hai toh vaah kahega ki main 20 kamane aur koi 5000000 hamare toh vaah kahega main asila kamao ghar ek ladka mara tha ki main toh agar aap chahti hai is cheez ko control karna toh paramatma se sirf ek hi dua kijiye ki vaah aapko itna de ki aapke ghar me aapka parivar teen time khana kha sake kapde pahan sake aur apni ek normal like ji sake vicky jaruratein kam hai uske jamir me dum hai main sirf yah baat aapko kehna chahunga apni jaruraton ko limited kar lijiye hamein zarurat ko badhaiye mat ja jitna chahen jooton ko badha sakte hain utana hi aap kharcha bana legi utana aapko dhundh lena padega toh kai baar yah raat ho jaati hai bande ki ki padavali song ko dekhne ke liye waisa kaam karta hai ki saari umar uski vaah karj chukaane me nikal jaati hai toh mere hisab se aisa karne ka koi fayda nahi apne sharir ko kasht dene ka koi fayda nahi kate ko recording zaroor rakhe hain bus unke liye expenditure kare aur apne parivar ko bhi baccho ko bhi shiksha de ki faltu kharcha band kare yah moh maya ki chijon se jitna ho sake dur rahein yah sab cheezen dekhne me bahut achi lagti hai hindi badi badi gaadi hai bade bade kar lekin jawab rail team unke andar ghus kar dekhenge toh unke gharon me sukoon nahi honge ghar me sukoon ki neend nahi hai toh pipal R you Sleeping pills alamost baap dekhenge bade bade karo ke ladke unke bacche ya toh vaah galat society me pad jaate hain ya phir unko raat ko aise hi problem hoti hai kyonki kuch ripitars lekar sona padta hai toh bhagwan ko chhukar ki aap ko jitna bhi hai bahut hai agar aapka parivar teen time khana kha raha hai toh usse bada aap sukh kahin nahi aapko mil sakta agar aap apne joote kam kar denge toh aapki zindagi bahut achi ho jayegi apne ko dusro se compare karna band kijiye uske paas aur bhi hai mere paas varna hai toh mujhe nahi honi chahiye toh yah cheezen jo hai yah tak aapke man me aisi cheezen aati rahegi tab tak aapke andar lalasa badhegi ya andar badhega tarika geet dikha sakte hain bataunga geet manushya ka toh zindagi ka ek aap keh sakte hain ki manushya cheez hi aisi banai paramatmane rakha hai vaah chahte hain ki jaan isi ko bachane aur moksha ke raste jaane ki soch na sake usko samjhne bhi dhyan de thoda kam kare bina faltu ke kharch evam ko band kare toh zarurat ho jaenge aur aapki zindagi bahut acche raste par aa jayegi

नमस्कार मैं खुद भारद्वाज हूं मुझे एक प्रश्न मिलाया के साधारण मनुष्य जीवन में कभी संतुष्ट न

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Gopal Srivastava

Acupressure Acupuncture Sujok Therapist

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Trainer Yogi Yogendra

Motivational Speaker || Career Coach || Business Coach || Marketing & Management Expert's

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हेलो फ्रेंड्स मैं योगेंद्र शर्मा मोटिवेशनल स्पीकर केरियर को संपर्क में बात करने वाले हैं माय डियर फ्रेंड है कि साधारण मनुष्य की जाती है तो दूसरी चाहिए होती है ऐसा क्यों होता है क्या आप हमें बता सकते हैं कि इंसान क्यों है यह क्या जाता है इंसान की जिंदगी के पीछे भागता है वह इंसान कभी संतुष्ट नहीं हो पाता क्योंकि ऊपर वाले जो है पूर्णता प्राप्त करता है और जो भौतिक सुखों के पीछे जाता है वह इंसान जो है उसकी बढ़ती ही जाती जाती जाती है उसका

hello friends main yogendra sharma Motivational speaker Career ko sampark me baat karne waale hain my dear friend hai ki sadhaaran manushya ki jaati hai toh dusri chahiye hoti hai aisa kyon hota hai kya aap hamein bata sakte hain ki insaan kyon hai yah kya jata hai insaan ki zindagi ke peeche bhagta hai vaah insaan kabhi santusht nahi ho pata kyonki upar waale jo hai purnata prapt karta hai aur jo bhautik sukho ke peeche jata hai vaah insaan jo hai uski badhti hi jaati jaati jaati hai uska

हेलो फ्रेंड्स मैं योगेंद्र शर्मा मोटिवेशनल स्पीकर केरियर को संपर्क में बात करने वाले हैं म

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Dr. Swatantra Jain

Psychotherapist, Family & Career Counsellor and Parenting & Life Coach

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जीवन में कभी कोई चीज मिल जाती है तो उन्हें कुछ और चाहिए जीवन में चंद ट्रस्ट इसलिए नहीं होते क्योंकि उनकी लालसा कभी खत्म नहीं होती यह बिल्कुल सही कहा है आपने एक चीज मिल जाती है तूने कुछ और चाहिए होता है इसका जवाब आप चाहते हैं कि इसका जवाब आपको दिया जाए कि ऐसा क्यों होता है वैसे ही होता है कि उनकी लालसा कभी खत्म नहीं होती यार कभी खत्म नहीं होता और एक इच्छा पूरी होने पर दूसरा दूसरी इच्छा के लिए कुछ भी करते हैं यह होने पर

jeevan me kabhi koi cheez mil jaati hai toh unhe kuch aur chahiye jeevan me chand trust isliye nahi hote kyonki unki lalasa kabhi khatam nahi hoti yah bilkul sahi kaha hai aapne ek cheez mil jaati hai tune kuch aur chahiye hota hai iska jawab aap chahte hain ki iska jawab aapko diya jaaye ki aisa kyon hota hai waise hi hota hai ki unki lalasa kabhi khatam nahi hoti yaar kabhi khatam nahi hota aur ek iccha puri hone par doosra dusri iccha ke liye kuch bhi karte hain yah hone par

जीवन में कभी कोई चीज मिल जाती है तो उन्हें कुछ और चाहिए जीवन में चंद ट्रस्ट इसलिए नहीं होत

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Harender Kumar Yadav

Career Counsellor.

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साधारण एक चीज मिल जाती है तो और कुछ और चाहिए होता है ऐसा क्यों क्या बता सकती है मनुष्य की जिज्ञासा होती है मनुष्य की मात्राएं होती हैं और एक मिलता है दूसरे के लिए कामना करता रहता है तो निश्चित तौर पर अगर हम इंसान को देख कर ले और और को सीमित करने अपने दायरे में तो फिर ऐसा नहीं होगी लेकिन जब हम तुलना करते हैं दूसरों से और दूसरों को देखते हैं पड़ोस में ही देखते हैं तो मरीज कैसे और तीव्र हो जाती है और फिर कहेंगे इंसान लालची होता है और चाहता है क्या राजा तो राजा और आज तो इसकी चक्कर में सारी सीमाएं लांघ जाता है और अच्छा करने के चक्कर में हो परेशान रहता है और उसी के प्रयास करता है और जिंदगी इसी तरह से कितना हुआ उसकी जल्दी खत्म हो जाती है

sadhaaran ek cheez mil jaati hai toh aur kuch aur chahiye hota hai aisa kyon kya bata sakti hai manushya ki jigyasa hoti hai manushya ki matraen hoti hain aur ek milta hai dusre ke liye kamna karta rehta hai toh nishchit taur par agar hum insaan ko dekh kar le aur aur ko simit karne apne daayre me toh phir aisa nahi hogi lekin jab hum tulna karte hain dusro se aur dusro ko dekhte hain pados me hi dekhte hain toh marij kaise aur tivra ho jaati hai aur phir kahenge insaan lalchi hota hai aur chahta hai kya raja toh raja aur aaj toh iski chakkar me saari simaye langh jata hai aur accha karne ke chakkar me ho pareshan rehta hai aur usi ke prayas karta hai aur zindagi isi tarah se kitna hua uski jaldi khatam ho jaati hai

साधारण एक चीज मिल जाती है तो और कुछ और चाहिए होता है ऐसा क्यों क्या बता सकती है मनुष्य की

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Karanbir Singh

Sports Psychologist

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ब्लूटूथ नहीं है ना होते तो आपको अपनी पिक जंगली देखा जाए तो अब ओवरों देखा जाए तो लोग ज्यादा कर दो लोग में तितली आने के लिए टिकट नहीं होना नहीं होना टूटा टूटा एक गोल किया वही काम करने जा रहे हैं

bluetooth nahi hai na hote toh aapko apni pic jungli dekha jaaye toh ab ovaron dekha jaaye toh log zyada kar do log mein titli aane ke liye ticket nahi hona nahi hona tuta tuta ek gol kiya wahi kaam karne ja rahe hain

ब्लूटूथ नहीं है ना होते तो आपको अपनी पिक जंगली देखा जाए तो अब ओवरों देखा जाए तो लोग ज्यादा

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Bhavin J. Shah

Life Coach

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मनुष्य प्राणी में फर्क इतना ही है कि मनुष्य में भगवान ने तृष्णा डाली है प्राणी को एक बार खाना मिल जाए तो कभी दूसरे दिन का इकट्ठा नहीं करता वह कल वह भगवान उसको दे ही देगा उसी भरोसे के साथ आज का दिन बिता देता है साधारण नहीं कोई भी मनुष्य कभी भी संतुष्ट नहीं होता क्योंकि कृष्णा एक ऐसी चीज है जो उसको अंदर ही अंदर एक चीज से दूसरी चीज दूसरी सी सी टी सी चीज 5000 ए 25 लाख 5:00 लाख 25 करोड़ पास करो नहीं तो 50 करोड़ कैसे बनए और 50 करोड़ 25 100 करोड़ ऐसे कैसे बनए उसी रेट रेस में दौड़ आती रहती है और यह तृष्णा से मुक्त होने का एक ही रास्ता है स्वीकार जो है जितना है भगवान ने दिया है मुझे शिकारी है इसका मतलब यह नहीं है कि मैं घूमना रखूं या मैं मेहनत ना करूं लेकिन इसके प्रति मेरा अटैचमेंट नहीं होना चाहिए होप फॉर द बेस्ट पेपर फॉर दिव्य फर्स्ट एक्सेप्ट एग्जिट कम्स थैंक यू

manushya prani mein fark itna hi hai ki manushya mein bhagwan ne trishna dali hai prani ko ek baar khana mil jaaye toh kabhi dusre din ka ikattha nahi karta vaah kal vaah bhagwan usko de hi dega usi bharose ke saath aaj ka din bita deta hai sadhaaran nahi koi bhi manushya kabhi bhi santusht nahi hota kyonki krishna ek aisi cheez hai jo usko andar hi andar ek cheez se dusri cheez dusri si si T si cheez 5000 a 25 lakh 5 00 lakh 25 crore paas karo nahi toh 50 crore kaise banye aur 50 crore 25 100 crore aise kaise banye usi rate race mein daudh aati rehti hai aur yah trishna se mukt hone ka ek hi rasta hai sweekar jo hai jitna hai bhagwan ne diya hai mujhe shikaaree hai iska matlab yah nahi hai ki main ghumana rakhun ya main mehnat na karu lekin iske prati mera attachment nahi hona chahiye hope for the best paper for divya first except exit comes thank you

मनुष्य प्राणी में फर्क इतना ही है कि मनुष्य में भगवान ने तृष्णा डाली है प्राणी को एक बार

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Anil Kumar Tiwari

Yoga, Meditation & Astrologer

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Rajesh Rana

Educator, Lawyer

2:28
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देखिए जीवन एक मायाजाल है माया है जब हम जन्म लेते हैं तो खाली हाथ आते हैं और जब मरते हैं तो खाली हाथ जाते लाखो आदमी रोज मरते हैं और लाखों रोज पैदा होते जीवन चक्र लेकिन इस जन्म और मरण के बीच में हमारा दिमाग ऐसा बना दिया गया बस सब कुछ मेरी जेब में आ जाए सब कुछ मेरा हो जाए और इसी में हम एक दूसरे को धोखा देते हैं मारपीट करते हैं खून तक कर दें यह सच्चाई तो यह सब इस माया का फेर है जो मैं समझने की जरूरत है इसके साथ एक बात और भी है लेकिन जो आपको समझ नहीं पड़ेगी कि जो संतुष्टि है अगर हम संतुष्ट हो गए तो जीवन रुक जाएगा मैनेजमेंट में कहावत है एंड सेटिस्फाई डॉग इज बेटर देन ए सेटिस्फाइड यह तो शहर बने हैं यह शहर कैसे बनाएं गांव के आदमी जब असंतुष्ट थे तो शहर आए और शहर आकर उसने उन्होंने काम धंधा शुरू किए और यह पूरी दुनिया फैलती चली गई यह बड़ी-बड़ी फैक्ट्री बड़े-बड़े कारखाने बड़े-बड़े ओके सो सो मंजिल की बिल्डिंग ए अनसेटिस्फेक्शन का ही नतीजा है संतुष्ट होना तो इसके पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों ही प्रभाव है जब आप इसको पॉजिटिव लेकर चलते हो तो विस्तार होता है तरक्की होती है नई नई इमारतें बनती आरती लेकर जाती हैं और आप जब नेगेटिव करते हो तो सब कुछ अपने अंदर समा देना चाहते हो अपनी जेब में डाल देना चाहते हो और ऐसे में आप लाखों करोड़ो आदमी को दुख दर्द है तो यह असंतोष था जो है वह तो तेरे से चलती है और दोनों ही तरह के आदमी इस दुनिया में है ले ऐसे इंसान जो दूसरों का हिस्सा भी खुद मार लेना चाहते हैं ऐसे कम और जो चाहते हैं कि दूसरे भी तरक्की करें ऐसे होते हैं अगर बड़ी बड़ी फैक्ट्री आंचल रिलायंस की टाटा की लाखों आदमियों को नौकरियां तेरे लाखो आदमियों को रोजगार दे रहे हैं उनके परिवार पल रहे हैं यह उनके असंतुष्ट होने के कारण ही हुआ बरनाला को आदमी इतने बड़े लेवल पर काम नहीं कर पाते

dekhiye jeevan ek mayajal hai maya hai jab hum janam lete hain toh khaali hath aate hain aur jab marte hain toh khaali hath jaate lakho aadmi roj marte hain aur laakhon roj paida hote jeevan chakra lekin is janam aur maran ke beech mein hamara dimag aisa bana diya gaya bus sab kuch meri jeb mein aa jaaye sab kuch mera ho jaaye aur isi mein hum ek dusre ko dhokha dete hain maar peet karte hain khoon tak kar de yah sacchai toh yah sab is maya ka pher hai jo main samjhne ki zarurat hai iske saath ek baat aur bhi hai lekin jo aapko samajh nahi padegi ki jo santushti hai agar hum santusht ho gaye toh jeevan ruk jaega management mein kahaavat hai and satisfy dog is better then a setisfaid yah toh shehar bane hain yah shehar kaise banaye gaon ke aadmi jab asantusht the toh shehar aaye aur shehar aakar usne unhone kaam dhandha shuru kiye aur yah puri duniya failati chali gayi yah badi badi factory bade bade karkhane bade bade ok so so manjil ki building a anasetisfekshan ka hi natija hai santusht hona toh iske positive aur Negative dono hi prabhav hai jab aap isko positive lekar chalte ho toh vistaar hota hai tarakki hoti hai nayi nayi imaraten banti aarti lekar jaati hain aur aap jab Negative karte ho toh sab kuch apne andar sama dena chahte ho apni jeb mein daal dena chahte ho aur aise mein aap laakhon croredo aadmi ko dukh dard hai toh yah asantosh tha jo hai vaah toh tere se chalti hai aur dono hi tarah ke aadmi is duniya mein hai le aise insaan jo dusro ka hissa bhi khud maar lena chahte hain aise kam aur jo chahte hain ki dusre bhi tarakki kare aise hote hain agar badi badi factory aanchal reliance ki tata ki laakhon adamiyo ko naukriyan tere lakho adamiyo ko rojgar de rahe hain unke parivar pal rahe hain yah unke asantusht hone ke karan hi hua barnala ko aadmi itne bade level par kaam nahi kar paate

देखिए जीवन एक मायाजाल है माया है जब हम जन्म लेते हैं तो खाली हाथ आते हैं और जब मरते हैं तो

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Grt2100

Youtube Par S T Motivation

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साधारण मनुष्य की बात नहीं है हर कोई भी चाहता है अगर उसको कोई एक चीज मिल जाती है ना फिर वह दूसरे के बारे में सोचने लगता है लेकिन लेकिन ऐसा होता है अगर आप आप खुद एक चीज प्रैक्टिकल हो आपने कोई गाड़ी सोच ले क्या कोई आपने बंगला सोच लिया ना आपने कोई जॉब सोचिए कुछ भी सोच लिया आपको वह चीज मिल गई है ना आपका वह टारगेट पूरा हो गया भाई अगर आपको बुढ़ार गेट पूरा हो गया तो फिर माइंड यह कहेगा माइंड खाली नहीं बैठेगा माइंड नहीं करेगा भाई अब कुछ और करो कुछ तुम और बड़ा करने की सोचोगे कि आदमी कभी संतुष्ट नहीं होता इतना तो हमेशा तो लाइफ में करील होकर अपने मां-बाप को अच्छे से रख सकूं

sadhaaran manushya ki baat nahi hai har koi bhi chahta hai agar usko koi ek cheez mil jaati hai na phir vaah dusre ke bare me sochne lagta hai lekin lekin aisa hota hai agar aap aap khud ek cheez practical ho aapne koi gaadi soch le kya koi aapne bangla soch liya na aapne koi job sochiye kuch bhi soch liya aapko vaah cheez mil gayi hai na aapka vaah target pura ho gaya bhai agar aapko budhar gate pura ho gaya toh phir mind yah kahega mind khaali nahi baithega mind nahi karega bhai ab kuch aur karo kuch tum aur bada karne ki sochoge ki aadmi kabhi santusht nahi hota itna toh hamesha toh life me kareela hokar apne maa baap ko acche se rakh sakun

साधारण मनुष्य की बात नहीं है हर कोई भी चाहता है अगर उसको कोई एक चीज मिल जाती है ना फिर वह

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guest_195F3रामफल

डायरेट सेलिंग

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साधारण मनुष्य को जीवन में कभी संस्कृति इसलिए नहीं मिलती क्योंकि शरीर जो है इसमें काम क्रोध मद लोभ तीनों भरे हुए हैं एक के बाद दूसरी और सच्चाई के बाद दूसरी आ सकता हमेशा जीवन भर लगी रहती और मनुष्य के नाम से खरीददारी जो है उनके मरने के 13 दिन तक बात होती रहती है और अंतरिक्ष टीवी उनकी होती रहती है इसलिए संतुष्ट मनुष्य तभी हो पाता है जब वह लोग मुंह करके पर हो और संतुष्टि मनुष्य के जीवन में बहुत कम ही होता है ठीक ही किसी ने कहा है कि जीवन में अगर सुखी रहना चाहते हो यह तीनों को तीनों त्यागने के बाद ही आपके जीवन में आपको आराम मिलेगा संतुष्ट तभी होता है जब उसकी आत्मा और परमात्मा से मिलान करें तभी उसके अंदर संतोष आता है जब प्रख्यात में नहीं जाएगा तब तक उसको आराम नहीं आए आध्यात्मिक जाने के बाद ही उसको आराम मिलेगा इसलिए अध्यात्म में रहिए जीवन को सुखी और सफल बनाइए और संतुष्टि तभी होगी जब आप आध्यात्मिक में रहेंगे आध्यात्मिक कार्य करेंगे तभी आपस संतुष्टि मिल सकती है

sadhaaran manushya ko jeevan me kabhi sanskriti isliye nahi milti kyonki sharir jo hai isme kaam krodh mad lobh tatvo bhare hue hain ek ke baad dusri aur sacchai ke baad dusri aa sakta hamesha jeevan bhar lagi rehti aur manushya ke naam se kharidadaari jo hai unke marne ke 13 din tak baat hoti rehti hai aur antariksh TV unki hoti rehti hai isliye santusht manushya tabhi ho pata hai jab vaah log mooh karke par ho aur santushti manushya ke jeevan me bahut kam hi hota hai theek hi kisi ne kaha hai ki jeevan me agar sukhi rehna chahte ho yah tatvo ko tatvo tyaagane ke baad hi aapke jeevan me aapko aaram milega santusht tabhi hota hai jab uski aatma aur paramatma se milaan kare tabhi uske andar santosh aata hai jab prakhyaat me nahi jaega tab tak usko aaram nahi aaye aadhyatmik jaane ke baad hi usko aaram milega isliye adhyaatm me rahiye jeevan ko sukhi aur safal banaiye aur santushti tabhi hogi jab aap aadhyatmik me rahenge aadhyatmik karya karenge tabhi aapas santushti mil sakti hai

साधारण मनुष्य को जीवन में कभी संस्कृति इसलिए नहीं मिलती क्योंकि शरीर जो है इसमें काम क्रोध

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12345mintu yadav

Bsc 1year college Student

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ऐश्वर्या यह चीज ना एक सेकेंड भगवान ने इंसान से दूसरे इंसान को टीवी है तो यार अंधेरे में क्या टीवी देखने सॉरी मतलब टीवी दरभंगा बिहार खड़ी होकर टीवी देखेंगे तो वैसे ही करना लेकिन कर्म से ज्यादा बढ़ जाए तो वह जीवन को बर्बाद करके एक इंसान दूसरे इंसान को चाहता है संतुष्ट न होकर दिन-ब-दिन दिन-ब-दिन अपनी कामनाओं को बढ़ाता चला जाता है उसके वश में नहीं होती तो आए थे मेरे ख्याल से यही है

aishwarya yah cheez na ek second bhagwan ne insaan se dusre insaan ko TV hai toh yaar andhere me kya TV dekhne sorry matlab TV darbhanga bihar khadi hokar TV dekhenge toh waise hi karna lekin karm se zyada badh jaaye toh vaah jeevan ko barbad karke ek insaan dusre insaan ko chahta hai santusht na hokar din bsp din din bsp din apni kamanaon ko badhata chala jata hai uske vash me nahi hoti toh aaye the mere khayal se yahi hai

ऐश्वर्या यह चीज ना एक सेकेंड भगवान ने इंसान से दूसरे इंसान को टीवी है तो यार अंधेरे में क्

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Purushottam Choudhary

ब्राह्मण Next IAS institute गार्ड

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Amit Kumar

Motivational Spiker,youtube Kriyeter,professional Advisers (For Carrier Network Marketing , Fitness, Health)

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santosh Kumar santosh

College Chairman

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बिल्कुल बता सकते हैं क्योंकि मनुष्य का जो इच्छा होता है वह अनंत होता है और उसकी इच्छाओं का कोई अंत नहीं होता है जैसे जैसे वह चीजें प्राप्त करते चले जाते हैं वैसे-वैसे उनकी इच्छा और जिज्ञासा बढ़ते जाते हैं सिंपल सी बात है पहले लोग भारत में रहते थे अभी मतलब पृथ्वी पर रहते थे अभी लोग एलियंस की खोज करने में जुटे और दूसरी गृह में रहने के बारे में खोजा गया सोचा जा रहा है किससे साधारण सी बातें सिंपल कहा जा सकता है कि मनुष्यों का संतुष्टि कभी पूरा नहीं हो सकता और यह अच्छी बात है क्योंकि मनुष्य जी की आज तक कभी पूरा नहीं होता

bilkul bata sakte hain kyonki manushya ka jo iccha hota hai vaah anant hota hai aur uski ikchao ka koi ant nahi hota hai jaise jaise vaah cheezen prapt karte chale jaate hain waise waise unki iccha aur jigyasa badhte jaate hain simple si baat hai pehle log bharat me rehte the abhi matlab prithvi par rehte the abhi log aliens ki khoj karne me jute aur dusri grah me rehne ke bare me khoja gaya socha ja raha hai kisse sadhaaran si batein simple kaha ja sakta hai ki manushyo ka santushti kabhi pura nahi ho sakta aur yah achi baat hai kyonki manushya ji ki aaj tak kabhi pura nahi hota

बिल्कुल बता सकते हैं क्योंकि मनुष्य का जो इच्छा होता है वह अनंत होता है और उसकी इच्छाओं का

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