धर्म को ले कर लोग इतनी बातें करते है। हर कोई अपने धर्म को सर्वोच्च मानता है। धर्म किसी के जीवन का कितना महत्वपूर्ण हिस्सा है?...


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Harish Chand

Social Worker

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ऐसे और सवाल
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Virendra Pratap Singh Chundawat

Philanthropist & a Politician

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धर्मपुर लेकर जितनी भी लोग चाहे वह किसी बड़े मंदिर का पुजारी हूं चाय मठाधीश हो जाए किसी मस्जिद का मौलवी मौलाना हो चाहे किसी चर्च के पादरी हो जो भी लोग धर्म पर लेकर सार्वजनिक तौर पर बातें कर रहे हैं वह सब लोग धर्म को समझते ही नहीं है धर्म नितांत निजी विषय है हर व्यक्ति का अपना अपना तरीका होता है धर्म को मानने का पालन करने का यह अलग बात है कि धर्म आपका निजी विशेष तब तक है जब तक कि आप उस पर सार्वजनिक तौर पर बात नहीं करते हैं अगर आप अपने धर्म को लिखिए किसी और की धर्म को लेकर सार्वजनिक तौर पर बात करते हैं कोई सवाल उठाते हैं जवाब देते हैं तो फिर धर्म उस उन व्यक्तियों के लिए जूस आर्थिक तौर पर इसको लेकर आए हैं उन्हीं विषय नहीं है ओके सर जी कुछ बन जाता है कि जब तक मैं अपने धर्म को लेकर बात कर रहा हूं मैं अपने धर्म को मानता हूं अपने चरण के साथ चल रहा हूं तब तक मेरा जो धर्म है मेरा निजी विषय है

dharmpur lekar jitni bhi log chahen vaah kisi bade mandir ka pujari hoon chai mathadhish ho jaaye kisi masjid ka maulavi maulana ho chahen kisi church ke paadri ho jo bhi log dharm par lekar sarvajanik taur par batein kar rahe hain vaah sab log dharm ko samajhte hi nahi hai dharm nitant niji vishay hai har vyakti ka apna apna tarika hota hai dharm ko manne ka palan karne ka yah alag baat hai ki dharm aapka niji vishesh tab tak hai jab tak ki aap us par sarvajanik taur par baat nahi karte hain agar aap apne dharm ko likhiye kisi aur ki dharm ko lekar sarvajanik taur par baat karte hain koi sawaal uthate hain jawab dete hain toh phir dharm us un vyaktiyon ke liye juice aarthik taur par isko lekar aaye hain unhi vishay nahi hai ok sir ji kuch ban jata hai ki jab tak main apne dharm ko lekar baat kar raha hoon main apne dharm ko maanta hoon apne charan ke saath chal raha hoon tab tak mera jo dharm hai mera niji vishay hai

धर्मपुर लेकर जितनी भी लोग चाहे वह किसी बड़े मंदिर का पुजारी हूं चाय मठाधीश हो जाए किसी मस्

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Avdesh Pratap Soam

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देखो धर्म को लेकर जो हर तरह की बातें हैं और चीजें हैं ठीक है और धर्म का क्या रोल है एक इंसान की जिंदगी में मेरा मानना है जो मैं मानता हूं इसमें अपने हिंदू धर्म से हूं और थोड़ी वह चीजें जो जितनी मैं जानता हूं अपने धर्म के बारे में तू हिंदू धर्म को धर्म बोलते हैं कि धर्म ना होकर धर्म से ज्यादा कुछ है जैसे एक जीवन शैली एक जीवन जीने के लिए कितनी सैलरी होनी चाहिए इंसान की जो एक प्रोसीजर होना चाहिए वह सब कुछ इसके अंदर आता है या नहीं जीवन जीने के लिए चेक्स सिद्धांत आपको चाहिए वह धर्म के अंदर होता है अब जो जिस धर्म से है उसके कोडिंग उसके सिद्धांत है उसकी सोच का नजरिया वह सभी चीजें उसके हिसाब से होती हैं अब जिस में बात करता हूं सनातन धर्म यानी कि जो सनातन मतलब कभी खत्म होने वाला और कम बात करते हैं हिंदू धर्म सनातन धर्म की दुनिया में जो सबसे पुराने लिखित दस्तावेज है वह सनातन धर्म के ठीक है तो पुराने की बात अब बात करता हूं दस्तावेजों की दस्तावेजों की बात करें तो उनमें जो चीजें लिखी हुई है जो है वह कहीं ना कहीं आपकी लाइफ इज डिलीट करती है तो उनके साथ साइंटिफिक तथ्य जुड़े होते हैं साइंटिफिक लॉजिक्स होते हैं जीवन के लिए आपकी लाइफ के लिए एक छोटा सा एग्जांपल लेते हैं जिससे तुलसी का पौधा पौधे तो बहुत सारे हैं दुनिया में लेकिन घर में लगाने के लिए तुलसी के पौधे को क्यों परेशान किया जाता है क्योंकि उसके अंदर औषधीय गुण है अप एग्री ऐसी से ठीक है अब दूसरे हम चीज मानते हैं एक छोटा सा एग्जांपल ऐसे घर में जो दीपक जलाया था जो भी पूजा का स्थान है नजरिया लड़ाई के पूजा करे लेकिन मैं केवल बात करूंगी कभी पक्की दीपक जलाया जाता है देसी घी का उसका चलो अजीब होता है बहुत है कि वह आपके यहां पर नेगेटिव एनर्जी है जो नकारात्मक उर्जा उसको खत्म करता उसको समाप्त करता है यानी कि पॉजिटिविटी वहां पर आती जहां पर घी का दीपक जलता है तो जलने के टिप चीजें हांगाउट्स शेयर में समझ सकते हैं उन चीजों को खत्म कर दे अभी अगर बात करें यह धवन का B.Ed में क्या होता है सामग्री सामग्री और बहुत सारी चीजें इन चीजों के अंदर-अंदर अलग-अलग तरह के औषधीय गुण हैं और मोदी जी क्या करती हैं आप के आस पास जो भी चीजें हैं जो गेट मोर फिर उसको प्योर करती हैं यह तो हो गई चीजें जो है कहीं ना कहीं को डायरेक्ट ली अब हम सेंड कर दो कि हम उन चीजों को कितना समझते कितना लॉजिक समझते हैं हां कुछ जो चतुर लोग हैं थोड़ी चलोगे उन चीजों का मतलब बदल गया और अपने मतलब के हिसाब से लोगों को बता दिया वह चीजें वह बात अलग है लेकिन सही बात करते हैं और कुछ जो दस्तावेज हैं कुछ और पवित्र पुस्तक है धर्म की ठीक है जैसी बात करते हैं हम अभी रीसेंट में मतलब महाभारत रामायण बहुत ठंड में काफी लोगों ने देखा भी और जितना मेरा अपना ओपिनियन है उनके बारे में वह क्या है कि को रामायण के अंदर जो चीजें हैं तो केवल आपको यह सिखाती हैं सब कुछ आपकी जिंदगी की जो रिश्ते हैं क्योंकि हर इंसान के रिश्ते हैं रिलेशन है वह कैसे चलाना चाहिए कैसे रखनी चाहिए किसी रिश्ते को निभाया जाता है कहीं ना कहीं जो उस चीज के अंदर है जो उस पुस्तक के अंदर है जो सुख महाकाव्य के अंदर में कहां आपके रियल लाइफ सागर रिलेट कर रहे हो तो वह को क्या सिखा रहा है कि बहुत सारे लोगों की चैलेंज है आज सही जिंदगी जीना सही रिलेशन कैसे निभाते हैं दूसरे ग्रुप की बात करते हैं महाभारत महाभारत से अगर कुछ सीख सकते हैं तो वहां पर अब सीख सकती को क्या नहीं करना चाहिए आपको जिंदगी में कौन सी चीजें करने से लाइफ किस तरह से आपकी मोर ले सकती ठीक है तीसरे महाकाल की बात करता है श्रीमद्भागवत गीता श्रीमद् भागवत गीता जिसका भी इंसान पड़ता है उसको अपनी लाइफ पर डिलीट कर सकता है कि उसके अंदर इतनी समझने की क्षमता है वहां पर क्या होगा वह समझ पाएगा कि सच विषम परिस्थितियां जैसी भी उसके साथ होंगे उन चीजों को कैसे शॉट आउट कर सकता है यानी कि जिंदगी को जीना कैसे आ सकते हैं तो यही कह सकता हूं धर्म का जो मतलब है आपकी लाइफ में मेरी लाइफ में जीवन शैली जिंदगी किस तरह से देनी चाहिए यह पता लगे कि कुछ लालची लोगों ने धर्म का मतलब बदल दिया है अपने पर्सनल प्रॉफिट के लिए कोई धर्म खराब नहीं होता लेकिन जो उस धर्म के अंदर लोग हैं और जो जो सीधे जो मासूम लोग हैं बस उनको दिशाहीन कर देते हैं बस यही अंतर है बिल्कुल सही इंसान है जो सही मतलब समझ सकता है धर्म का वही जीवन शैली को फॉलो करते हैं और जो शायद इसमें चीजें पड़ी भी नहीं है और उसको चालाक आदमी ने क्या हुआ उस धर्म के नाम पर की ओर धकेल दिया क्योंकि उसका अपना प्रॉफिट स्टेट से हो रहा है यह होता है कि सही तरह सागर फॉलो करते हैं तो एक अच्छा जीवन जी सकते हैं अगर आप किसी के कहने से चीजों को फॉलो करते हैं उनके नाम पर चीजें और आपकी लाइफ में डिफिकल्ट हो सकती है आईपीएल के सॉन्ग

dekho dharm ko lekar jo har tarah ki batein hain aur cheezen hain theek hai aur dharm ka kya roll hai ek insaan ki zindagi me mera manana hai jo main maanta hoon isme apne hindu dharm se hoon aur thodi vaah cheezen jo jitni main jaanta hoon apne dharm ke bare me tu hindu dharm ko dharm bolte hain ki dharm na hokar dharm se zyada kuch hai jaise ek jeevan shaili ek jeevan jeene ke liye kitni salary honi chahiye insaan ki jo ek procedure hona chahiye vaah sab kuch iske andar aata hai ya nahi jeevan jeene ke liye checks siddhant aapko chahiye vaah dharm ke andar hota hai ab jo jis dharm se hai uske coding uske siddhant hai uski soch ka najariya vaah sabhi cheezen uske hisab se hoti hain ab jis me baat karta hoon sanatan dharm yani ki jo sanatan matlab kabhi khatam hone vala aur kam baat karte hain hindu dharm sanatan dharm ki duniya me jo sabse purane likhit dastavej hai vaah sanatan dharm ke theek hai toh purane ki baat ab baat karta hoon dastawejon ki dastawejon ki baat kare toh unmen jo cheezen likhi hui hai jo hai vaah kahin na kahin aapki life is delete karti hai toh unke saath scientific tathya jude hote hain scientific lajiks hote hain jeevan ke liye aapki life ke liye ek chota sa example lete hain jisse tulsi ka paudha paudhe toh bahut saare hain duniya me lekin ghar me lagane ke liye tulsi ke paudhe ko kyon pareshan kiya jata hai kyonki uske andar aushadhiye gun hai up agree aisi se theek hai ab dusre hum cheez maante hain ek chota sa example aise ghar me jo deepak jalaya tha jo bhi puja ka sthan hai najariya ladai ke puja kare lekin main keval baat karungi kabhi pakki deepak jalaya jata hai desi ghee ka uska chalo ajib hota hai bahut hai ki vaah aapke yahan par Negative energy hai jo nakaratmak urja usko khatam karta usko samapt karta hai yani ki positivity wahan par aati jaha par ghee ka deepak jalta hai toh jalne ke tip cheezen hangauts share me samajh sakte hain un chijon ko khatam kar de abhi agar baat kare yah dhawana ka B Ed me kya hota hai samagri samagri aur bahut saari cheezen in chijon ke andar andar alag alag tarah ke aushadhiye gun hain aur modi ji kya karti hain aap ke aas paas jo bhi cheezen hain jo gate mor phir usko pure karti hain yah toh ho gayi cheezen jo hai kahin na kahin ko direct li ab hum send kar do ki hum un chijon ko kitna samajhte kitna logic samajhte hain haan kuch jo chatur log hain thodi chaloge un chijon ka matlab badal gaya aur apne matlab ke hisab se logo ko bata diya vaah cheezen vaah baat alag hai lekin sahi baat karte hain aur kuch jo dastavej hain kuch aur pavitra pustak hai dharm ki theek hai jaisi baat karte hain hum abhi recent me matlab mahabharat ramayana bahut thand me kaafi logo ne dekha bhi aur jitna mera apna opinion hai unke bare me vaah kya hai ki ko ramayana ke andar jo cheezen hain toh keval aapko yah sikhati hain sab kuch aapki zindagi ki jo rishte hain kyonki har insaan ke rishte hain relation hai vaah kaise chalana chahiye kaise rakhni chahiye kisi rishte ko nibhaya jata hai kahin na kahin jo us cheez ke andar hai jo us pustak ke andar hai jo sukh mahakavya ke andar me kaha aapke real life sagar relate kar rahe ho toh vaah ko kya sikha raha hai ki bahut saare logo ki challenge hai aaj sahi zindagi jeena sahi relation kaise nibhate hain dusre group ki baat karte hain mahabharat mahabharat se agar kuch seekh sakte hain toh wahan par ab seekh sakti ko kya nahi karna chahiye aapko zindagi me kaun si cheezen karne se life kis tarah se aapki mor le sakti theek hai teesre mahakal ki baat karta hai shrimadbhagavat geeta shrimad bhagwat geeta jiska bhi insaan padta hai usko apni life par delete kar sakta hai ki uske andar itni samjhne ki kshamta hai wahan par kya hoga vaah samajh payega ki sach visham paristhiyaann jaisi bhi uske saath honge un chijon ko kaise shot out kar sakta hai yani ki zindagi ko jeena kaise aa sakte hain toh yahi keh sakta hoon dharm ka jo matlab hai aapki life me meri life me jeevan shaili zindagi kis tarah se deni chahiye yah pata lage ki kuch lalchi logo ne dharm ka matlab badal diya hai apne personal profit ke liye koi dharm kharab nahi hota lekin jo us dharm ke andar log hain aur jo jo sidhe jo masoom log hain bus unko dishaaheen kar dete hain bus yahi antar hai bilkul sahi insaan hai jo sahi matlab samajh sakta hai dharm ka wahi jeevan shaili ko follow karte hain aur jo shayad isme cheezen padi bhi nahi hai aur usko chalak aadmi ne kya hua us dharm ke naam par ki aur dhakel diya kyonki uska apna profit state se ho raha hai yah hota hai ki sahi tarah sagar follow karte hain toh ek accha jeevan ji sakte hain agar aap kisi ke kehne se chijon ko follow karte hain unke naam par cheezen aur aapki life me difficult ho sakti hai IPL ke song

देखो धर्म को लेकर जो हर तरह की बातें हैं और चीजें हैं ठीक है और धर्म का क्या रोल है एक इंस

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

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अपने काम को लेकर लोग इतनी बातें करते हैं ठीक है तुम को जरूरत मानता है जब किसी के जीवन का कितना मैं हमेशा सच्चाई यह सब चर्चा करते हैं अच्छा करते हैं हम तो मरने वाले कुल 10 परसेंट लोग धर्म के आधार पर चढ़ने वाले लोग जब परसेंट पेपर संगठन में रहकर भी ठंड की महत्व परिभाषा नहीं जानते जल के नियम कानून नहीं जानते ठंड कम है तो नहीं जानते उनके जीवन में धन क्या योगदान रखता है केवल हिंदू धर्म मुस्लिम धर्म सामान्य नहीं होता इसके अलावा भी ठंड का बहुत महत्व होता है जिसे लोग वंचित होते हैं जमुनेश का मैच पुणे मंथन की भूमिका उनके जीवन में कहां होगी और कितनी होगी या आप समझ सकते हैं

apne kaam ko lekar log itni batein karte hain theek hai tum ko zarurat maanta hai jab kisi ke jeevan ka kitna main hamesha sacchai yah sab charcha karte hain accha karte hain hum toh marne waale kul 10 percent log dharm ke aadhar par chadhne waale log jab percent paper sangathan me rahkar bhi thand ki mahatva paribhasha nahi jante jal ke niyam kanoon nahi jante thand kam hai toh nahi jante unke jeevan me dhan kya yogdan rakhta hai keval hindu dharm muslim dharm samanya nahi hota iske alava bhi thand ka bahut mahatva hota hai jise log vanchit hote hain jamunesh ka match pune manthan ki bhumika unke jeevan me kaha hogi aur kitni hogi ya aap samajh sakte hain

अपने काम को लेकर लोग इतनी बातें करते हैं ठीक है तुम को जरूरत मानता है जब किसी के जीवन का क

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Ridhaan Panwar

Entrepreneur

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आपका क्वेश्चन है कि धर्म को लेकर लोग इतनी बातें करते हैं हर कोई अपने धर्म को सर्वोच्च मानता है धर्म किसी के जीवन का कितना महत्वपूर्ण हिस्सा है तो सबसे पहले मैं आपको बता दूं कि जो लोग अपने धर्म को सर्वोच्च मानते हैं तो अलग बात है सबकी अपनी-अपनी आस्था होती है अपने धर्म के प्रति और धर्म किसी के जीवन में कितना महत्वपूर्ण हिस्सा लगता है कि मैं आपको बताता हूं धर्म इंसान को जिंदगी जीने के लिए जिंदगी जीने का एक रास्ता दिखाता है धर्म आपको बताता है कि क्या सही है और क्या गलत है जैसे एक छोटे बच्चे को उसकी मां बचपन में बताती है कि यह सही है या गलत है सर मैं आपकी पूरी जिंदगी में आपको रास्ता दिखाता है सही और गलत का डिफरेंस आपको बताता है और आप को सबसे बड़ी बात जो धर्म आपको सिखाती है धर्म आपको मानवता का ज्ञान देती है धर्म आप को जोड़ने का ज्ञान देती है मिलाने का ज्ञान देती है तो उन्हें का ज्ञान कभी नहीं देती और धर्म मानवता सिखाती है आपस में प्यार करना सिखाती है और जो आपके लाइफ में जो बड़ी-बड़ी प्रॉब्लम्स आती है उससे कैसे आपका निपटा आपको निपटारा करना है कैसे उस सिचुएशंस को आपने क्रॉस करना है तो यह आपसे धर्म के माध्यम से कर सकते हैं एक ज्ञान की पूंजी है जो आपको पूरी जिंदगी में आपका काम

aapka question hai ki dharm ko lekar log itni batein karte hain har koi apne dharm ko sarvoch maanta hai dharm kisi ke jeevan ka kitna mahatvapurna hissa hai toh sabse pehle main aapko bata doon ki jo log apne dharm ko sarvoch maante hain toh alag baat hai sabki apni apni astha hoti hai apne dharm ke prati aur dharm kisi ke jeevan me kitna mahatvapurna hissa lagta hai ki main aapko batata hoon dharm insaan ko zindagi jeene ke liye zindagi jeene ka ek rasta dikhaata hai dharm aapko batata hai ki kya sahi hai aur kya galat hai jaise ek chote bacche ko uski maa bachpan me batati hai ki yah sahi hai ya galat hai sir main aapki puri zindagi me aapko rasta dikhaata hai sahi aur galat ka difference aapko batata hai aur aap ko sabse badi baat jo dharm aapko sikhati hai dharm aapko manavta ka gyaan deti hai dharm aap ko jodne ka gyaan deti hai milaane ka gyaan deti hai toh unhe ka gyaan kabhi nahi deti aur dharm manavta sikhati hai aapas me pyar karna sikhati hai aur jo aapke life me jo badi badi problems aati hai usse kaise aapka nipta aapko niptara karna hai kaise us sichueshans ko aapne cross karna hai toh yah aapse dharm ke madhyam se kar sakte hain ek gyaan ki punji hai jo aapko puri zindagi me aapka kaam

आपका क्वेश्चन है कि धर्म को लेकर लोग इतनी बातें करते हैं हर कोई अपने धर्म को सर्वोच्च मानत

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Nirbhay kumar

Programmer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बहुत ही अच्छा सवाल ही धर्म को लेकर के धर्म का मतलब सबसे पहले यह होता है कि जो धारण करने के लायक हो जिसे हम अपने पूरे जीवन में धारण कर सके और इसे धारण करने के बाद हम इस दुनिया को सही दिशा प्रदान कर सके क्योंकि जिसे हम धारण करेंगे वही मुझे सही दिशा प्रदान करेगा और फिर मैं इस दुनिया को बहुत आगे बढ़ा सकता हूं या बहुत पीछे ले जा सकता हूं तो बहुत आगे बढ़ाना और बहुत पीछे ले जाना यह दोनों धर्म का ही काम होता है क्योंकि धर्म एक बंधन होता है धर्म एक बंधन होता है जिसमें इंसान बन जाता है और उस धर्म में लिखे गए क्या कहे गए बहुत अच्छे-अच्छे महात्मा हुए हैं जो उस धर्म से रिलेटेड होते हैं तो उस धर्म से रिलेटेड जो महात्मा लोग हुए हैं वो ऋषि मुनि हुए हैं तो वह लोग उस धर्म को लेकर के बहुत से अपने भीम रखे हैं और हमें उस धर्म से रिलेटेड जितने जो भी है उस भीम को पालन करना होता है तो हमें यह सोचना चाहिए कि उस धर्म को पालन करते करते क्या हम ऐसा तो नहीं कि हम इस समाज को बहुत पीछे ले जा रहे हैं ऐसा तो नहीं कि समाज के बहुत बड़े भाग को हम डिस्ट्रॉय कर रहे हैं सर्वनाश कर रहे हैं तो धर्म हमेशा इंसान का एक परेशानी होता है धर्म हमेशा इंसान को एक आईना होता है जो इंसान को अपना शक्ल दिखाता है अपने आपको बारे में बताता है कि हां देखो या आपका धर्म है और एक प्रकार से बोल सकते कि धार्मिक कंटेंट है इस को फॉलो करके इस दुनिया में आगे बढ़ती हो इसलिए धर्म जो धारण करते हैं वही होता है धर्म से हमें विमुख नहीं होनी चाहिए और जिस धर्म का पालन करें उस धर्म को अच्छे से पालन करें उसके बारे में बहुत अच्छे गहराई में जाकर कि उसके बारे में पहले अध्ययन करें जो धर्म है क्या वह धर्म कहता क्या है क्या वह धर्म एक दूसरे से नफरत करना तो नहीं सिखाता अगर सिखाता है तुम उसी से मुझे धर्म कुछ देखते हैं

bahut hi accha sawaal hi dharm ko lekar ke dharm ka matlab sabse pehle yah hota hai ki jo dharan karne ke layak ho jise hum apne poore jeevan me dharan kar sake aur ise dharan karne ke baad hum is duniya ko sahi disha pradan kar sake kyonki jise hum dharan karenge wahi mujhe sahi disha pradan karega aur phir main is duniya ko bahut aage badha sakta hoon ya bahut peeche le ja sakta hoon toh bahut aage badhana aur bahut peeche le jana yah dono dharm ka hi kaam hota hai kyonki dharm ek bandhan hota hai dharm ek bandhan hota hai jisme insaan ban jata hai aur us dharm me likhe gaye kya kahe gaye bahut acche acche mahatma hue hain jo us dharm se related hote hain toh us dharm se related jo mahatma log hue hain vo rishi muni hue hain toh vaah log us dharm ko lekar ke bahut se apne bhim rakhe hain aur hamein us dharm se related jitne jo bhi hai us bhim ko palan karna hota hai toh hamein yah sochna chahiye ki us dharm ko palan karte karte kya hum aisa toh nahi ki hum is samaj ko bahut peeche le ja rahe hain aisa toh nahi ki samaj ke bahut bade bhag ko hum destroy kar rahe hain sarvanash kar rahe hain toh dharm hamesha insaan ka ek pareshani hota hai dharm hamesha insaan ko ek aaina hota hai jo insaan ko apna shakl dikhaata hai apne aapko bare me batata hai ki haan dekho ya aapka dharm hai aur ek prakar se bol sakte ki dharmik content hai is ko follow karke is duniya me aage badhti ho isliye dharm jo dharan karte hain wahi hota hai dharm se hamein vimukh nahi honi chahiye aur jis dharm ka palan kare us dharm ko acche se palan kare uske bare me bahut acche gehrai me jaakar ki uske bare me pehle adhyayan kare jo dharm hai kya vaah dharm kahata kya hai kya vaah dharm ek dusre se nafrat karna toh nahi sikhata agar sikhata hai tum usi se mujhe dharm kuch dekhte hain

बहुत ही अच्छा सवाल ही धर्म को लेकर के धर्म का मतलब सबसे पहले यह होता है कि जो धारण करने के

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Suneel Solutions

Business Owner

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Santosh Singh indrwar

Business Consultant & Life Couch

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धर्म व्यक्ति के जीवन का एक महत्वपूर्ण सा है इसमें कोई दो राय नहीं है लेकिन अपने धर्म को लोग सबसे सर्वोच्च मानते हैं उसका कारण बस इतना है वह दूसरों के धर्म के बारे में या तो नॉलेज नहीं रखते और या फिर दूसरे को जानना नहीं चाहते समझना नहीं चाहते और एक बात इसमें यह भी है कि लोग के दिमाग में एक्सपीरियंस रेफरेंसेस भरे हुए पड़े रहते हैं जो लोगों को उनके अपनों ने उनके गुरुओं ने उनके मित्रों ने भर के रखे हैं जो कि नई चीज को एक्सेप्ट नहीं करने देते इसीलिए वह अपनी चीज को अपने धर्म को जानती

dharm vyakti ke jeevan ka ek mahatvapurna sa hai isme koi do rai nahi hai lekin apne dharm ko log sabse sarvoch maante hain uska karan bus itna hai vaah dusro ke dharm ke bare me ya toh knowledge nahi rakhte aur ya phir dusre ko janana nahi chahte samajhna nahi chahte aur ek baat isme yah bhi hai ki log ke dimag me experience refarenses bhare hue pade rehte hain jo logo ko unke apnon ne unke guruon ne unke mitron ne bhar ke rakhe hain jo ki nayi cheez ko except nahi karne dete isliye vaah apni cheez ko apne dharm ko jaanti

धर्म व्यक्ति के जीवन का एक महत्वपूर्ण सा है इसमें कोई दो राय नहीं है लेकिन अपने धर्म को लो

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Faridul Haque

Industrial Consultant

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

धन के बारे में थोड़ा सा विस्तार से एक चीज बताना चाहूंगा क्या होता है आपको बचपन से ही समाज द्वारा क्या सही है क्या गलत है इसके बारे में बताया जाता है हर मोड़ पर चाहे वापस स्कूल में हो घर में हो या कोई बड़े लोग हो या कानून हो यह सब आपको सही और गलत में एक लाइन खींचते हैं बट कभी-कभी आपके जीवन में कुछ ऐसी परिस्थितियां आ जाती हैं जहां आप इस बात का निर्णय नहीं ले पाते कि यह सही है या गलत उस समय धर्म काम में आता है उस समय हो सके तो आप पूरे दिन भी ध्यान से वड़ोदरा यू आर अ मुस्लिम और हिंदू इतिहास को पलट के देख लो पलट के देख सकते हैं कि अगर श्रीराम के सामने यह प्रस्तुति होती तो क्या करते अगर हुजूर सल्ला वाले वसल्लम के सामने स्वयं तरह की परिस्थिति होती तो वह क्या करते हैं इसके लिए आपको धर्म धार्मिक पुराणों को पढ़ना पड़ेगा और धर्म की यही एक पता है धर्म आपको सही जिंदगी जीने का रास्ता दिखाता है क्योंकि हर चीज को ब्लैक एंड वाइट में जिंदगी को डिफाइन नहीं जा सकता कुछ भी होते हैं उसमें आपको सही हो गलत का फैसला करना सिखा सकता है धन्यवाद

dhan ke bare me thoda sa vistaar se ek cheez batana chahunga kya hota hai aapko bachpan se hi samaj dwara kya sahi hai kya galat hai iske bare me bataya jata hai har mod par chahen wapas school me ho ghar me ho ya koi bade log ho ya kanoon ho yah sab aapko sahi aur galat me ek line khichte hain but kabhi kabhi aapke jeevan me kuch aisi paristhiyaann aa jaati hain jaha aap is baat ka nirnay nahi le paate ki yah sahi hai ya galat us samay dharm kaam me aata hai us samay ho sake toh aap poore din bhi dhyan se vadodara you R a muslim aur hindu itihas ko palat ke dekh lo palat ke dekh sakte hain ki agar shriram ke saamne yah prastuti hoti toh kya karte agar huzur salla waale vasallam ke saamne swayam tarah ki paristhiti hoti toh vaah kya karte hain iske liye aapko dharm dharmik purano ko padhna padega aur dharm ki yahi ek pata hai dharm aapko sahi zindagi jeene ka rasta dikhaata hai kyonki har cheez ko black and white me zindagi ko define nahi ja sakta kuch bhi hote hain usme aapko sahi ho galat ka faisla karna sikha sakta hai dhanyavad

धन के बारे में थोड़ा सा विस्तार से एक चीज बताना चाहूंगा क्या होता है आपको बचपन से ही समाज

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

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प्रीति धर्म की शुद्ध परिभाषा होती है बेदर्द विचार या पर यह दृढ़ संकल्प जिसे भी करके आप जीवन जीने का अपना रास्ता बना लेते हैं वह धर्म चलाता है अब यह जो मानव है यह सब या तो उनको यह मानी है कि अब पूर्ण शिक्षित हैं या यह मानिए कि धार्मिक असहिष्णुता से रहित हैं यह मानिए कि यह बे इंसान है जो मानवता कर दिए आपस में हितकारी नहीं देगी आपस में धर्म के नाम पर चढ़ते हैं बाकी इमानदारी से सोचा जाए तो यह समस्त धर्म जितने भी आपको दिखाई दे रहे हैं यह केवल लड़ाने का काम करते हैं धार्मिक संकीर्णता बंद करते हैं धर्मांधता उत्पन्न करते हैं जबकि सच्चाई में पूरी पृथ्वी के रहने वाले इंसानों का एकमात्र धर्म है इंसानियत दारू यह धर्म सभी को आपस में प्रेम पूर्वक मिलकर के भाईचारे के साथ सेवा सहायता करते हुए एक दूसरे के प्रति सहानुभूति रखते हुए संवेदना रखते हुए जियो और जीने दो के सिद्धांत सिखाता है अर्थात सभी की खुशी में हमारी खुशी है सभी प्रसन्न रहें मानव मानव उचित कार्य करें इंसानों के लिए भलाई के कार्य करें सेवा के कार्य करें सहायता की तारीख करें मैं तो इंसानियत धर्म को ही सबसे बड़ा धर्म मानता हूं बाकी सब धर्म बढ़ाने वाले हैं और जो धर्म उन्मादी धर्म से की पूर्ण परिभाषा नहीं जानते हैं वे इन दिनों का रूप दे देते हैं धर्म बाद से झगड़े करते हैं बाकी समझदार आदमी कभी झगड़ा नहीं करता है

preeti dharm ki shudh paribhasha hoti hai bedard vichar ya par yah dridh sankalp jise bhi karke aap jeevan jeene ka apna rasta bana lete hain vaah dharm chalata hai ab yah jo manav hai yah sab ya toh unko yah maani hai ki ab purn shikshit hain ya yah maniye ki dharmik asahishnuta se rahit hain yah maniye ki yah be insaan hai jo manavta kar diye aapas me hitkari nahi degi aapas me dharm ke naam par chadhte hain baki imaandari se socha jaaye toh yah samast dharm jitne bhi aapko dikhai de rahe hain yah keval ladane ka kaam karte hain dharmik sankirnata band karte hain dharmandhata utpann karte hain jabki sacchai me puri prithvi ke rehne waale insano ka ekmatra dharm hai insaniyat daaru yah dharm sabhi ko aapas me prem purvak milkar ke bhaichare ke saath seva sahayta karte hue ek dusre ke prati sahanubhuti rakhte hue samvedana rakhte hue jio aur jeene do ke siddhant sikhata hai arthat sabhi ki khushi me hamari khushi hai sabhi prasann rahein manav manav uchit karya kare insano ke liye bhalai ke karya kare seva ke karya kare sahayta ki tarikh kare main toh insaniyat dharm ko hi sabse bada dharm maanta hoon baki sab dharm badhane waale hain aur jo dharm unmadi dharm se ki purn paribhasha nahi jante hain ve in dino ka roop de dete hain dharm baad se jhagde karte hain baki samajhdar aadmi kabhi jhagda nahi karta hai

प्रीति धर्म की शुद्ध परिभाषा होती है बेदर्द विचार या पर यह दृढ़ संकल्प जिसे भी करके आप जीव

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Manish Dev

Motivational Speaker, Yoga-Meditation Guide, Spiritualist, Psycho-analyst, Astrologer, Spiritual Healer, Life Coach

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धर्म को लेकर लोग इतनी बातें करते हैं हर कोई अपने धर्म को सर्वोच्च समानता है धर्म किसी के जीवन का कितना महत्वपूर्ण हिस्सा है धर्म ही जीवन है आप ऐसा समझ ली धर्म को लेकर बातें करते हैं लोग अपने धर्म को सर्वोच्च मानते अपने हर कोई अपने धर्म को सर्वोच्च समानता है यह बहुत ही अलग बात है कि लोग अपने धर्म को सर्वोच्च मानते हैं लेकिन धर्म को सर्वोच्च मानना अपने-अपने धर्म को क्योंकि हम धर्म मान लिया करते हैं जैसे कि क्या है कि आपने कहा धर्म है इसाई एक क्रिश्चियनिटी इस्लाम एक धर्म है आर्य सनातन धर्म है हिंदू धर्म है आप ऐसा कहते सर्वप्रथम जब आप इसका आकलन करते हैं अथवा इस पर चर्चा करते हैं तो आपको पता होना चाहिए कि धर्म क्या है और धर्म में और रिलेशन में और मजहब में अंतर क्या है आपको यह पता होना चाहिए आप अगर यह मानते हैं कि धर्म का पर्यायवाची रिलीजन है या धर्म का पर्यायवाची मजहब है तो अब बड़ी गलतफहमी में आप और भाषाओं में जाकर उन शब्दों का अर्थ ढूंढिए आपको स्पष्ट हो जाएगा मुझे एक बात बताइए एक बात मुझे आप बताइए कि भारत धर्म में भारत के अंदर जो धर्म हुए जो धर्म है हिंदू धर्म व मंदिरों की पूजा होती है या पूजा पाठ का वह है और तो बहुत पहले जब धर्म की परिकल्पना ईश्वर की परिकल्पना याय मान्यताएं नहीं की तब से यह सनातन धर्म है यही कारण है कि आप इंडोनेशिया चले जाएं कंबोडिया चले जाएं तो वहां पर भी आपको पौराणिक मंदिर मिलेंगे आज भी उपलब्ध है वह पौराणिक मंदिर लेकिन में एक कोई जो प्रचार का जो सेंटर होता है प्रचार करने की जो क्रिया होती है वह सनातन धर्म में आपको देखने को नहीं मिलेगा बहुत बाद में आया है बहुत बाद में कि हां हमें अपने मत का या अपने उसका विचारधारा का प्रचार करना है यह जो चीज है यह बहुत बाद में आया है लेकिन अगर आप ईसाई धर्म का इतिहास पड़ेंगे क्रिश्चियनिटी का आप हिस्ट्री को पड़ेंगे तू जिस काल से ही उनके जो डिसाइड पंखे पीटर आदि जुड़े साइकल से ऐसे प्रचारक एक तरह के प्रचारक के रूप में कार्य करते थे और गांव गांव में जाकर लोगों को जोड़ने का काम करते अपने मत से कि वह ईसा मसीह को माने और गॉड को माने और ईसा मसीह को अपना जो है उनका उसका पैगंबर एक मसीहा माने तो इस प्रकार से वह ईसा मसीह की महानता का प्रचार करते थे लेकिन हिंदू धर्मावलंबियों में सनातन धर्मावलंबी में इस तरह की प्रथा का प्रचलन नहीं था कि तुम घूम घूम के प्रचार किया था कि आप कुछ विचार विचार करना कोई जरूरी नहीं है आप इसको अपनाई और आप अपने घर में जो ही पूजा-पाठ करते हैं वह किया कुछ इस तरह की मान्यता पिक क्यों यह आपको तभी समझ में आएगा जब आप धर्म मजहब और रिलीजन इन तीनों के डिफरेंस को समझें तीनों कैसे अलग अलग तो धर्म का अर्थ होता है धारण करना धर्म का तात्पर्य धारण करने से है आपने क्या धारण किया है किसको धारण किया है वह का धर्म है अगर आपने विवाह कर लिया तो धर्मपत्नी हो गई धर्म पति हो गया वहां पर भी किया अपने पत्नी को धारण किया तो धर्म उससे जुड़ गया भावनात्मक रूप से जब कोई चीज धारण की जाती है विशेष रूप से भावनात्मक रूप से तो उसी को धर्म कहा जाता है अब आपने जिस ईश्वर है तो आपने ईश्वर यह धर्म को धारण किया ईश्वर नहीं है तो आपने अनीश वरवंता को धारण किया हमारे देश में भारतीय इतिहास के अंदर अगर आप जाएंगे दर्शन शास्त्र के इतिहास को पड़ेंगे क्लास सिक्स हिस्ट्री जो इंडिया की है अगर आप उसका अध्ययन करेंगे तो बहुत पहले से अमित शुक्रवार को यहां पर माना गया है रखा गया है बहुत से लोग अनीश वरवादी होते सभी ईश्वर वादी नहीं हुआ करते थे वह बुध जैन आदि जो मत हैं वह भी अनीश वरवादी रही है लेकिन पश्चिम में आप जाएंगे इस आई या फिर क्रिश्चियनिटी में आप जाएंगे तो वहां पर अनीश वरवादी होना तो बहुत बड़ा पाप वहां पर अगर कोई अल्लाह को नहीं मानता है या गॉड को नहीं मांगता है तो सीधे गोली मार देने की वहां पर यह एक बार नहीं मानता तो उसे खत्म करो पूरा जिहाद का जो है लाभ हो इसी बात पर है कि लोग अल्लाह को नहीं मारते उनको खत्म कर देना उनकी मान्यता में ऐसी विचारधारा का कोई प्रसाद नहीं जो बांट दो खत्म कर दो अगर वह तुम्हारे भगवान को नहीं मानता तो तुम उसे मार दो खत्म कर दो ऐसी विचारधारा का प्रचार धर्म के संदर्भ में नहीं है क्योंकि यहां पर धारण करने से यहां पर व्यक्ति का बहुत महत्व है उस आईटी का महत्व नहीं है किसी ने क्या धारण किया इस बात का महत्व है क्या धारण किया अब इसमें भी मान्यता यही कहती है कि अब दो चीजें हो सकती हैं धारण करने में एक जो नाशवान है नश्वर है नष्ट हो जाने वाली है परिवर्तनशील हो गया संसार के रिश्ते नाते हो गए धन वैभव हो गए हैं अब नहीं होते हैं जो नहीं है वह ईश्वर है तो तुम ऐसा धारण करो जो लास्ट ना होता है उसे धारण करो तो जो लेफ्ट नहीं होता उसी को हम कहते हैं ईश्वर तो तुम ईश्वर को धारण करो तो शाश्वत को धारण करना शाश्वत धर्म है उसी को सनातन धर्म कहते हैं सनातन जो कभी परिवर्तित नहीं होता जो सनातन नहीं है वह हमें परिवर्तनशील और दो परिवर्तनशील नहीं है जो सृष्टि के आरंभ में भी वैसा ही था आज भी व्यवस्था है उसकी के अंत में भी वैसा ही रहेगा उसके अंदर कोई परिवर्तन नहीं आएगा वह ईश्वर सनातन है तो इसलिए उसको धारण करना सनातन धर्म हो जाता है तो धर्म शब्द का तात्पर्य धारण करने से यहां पर व्यक्तिगत विषय है कि आप क्या धारण करते हैं अब जो है दूसरा आम आते हैं आपको रिलीजन रिलीजन शब्द लैटिन भाषा की रैली गियर से बना है जिसका अर्थ है बॉन्डिंग अर्थात बॉन्डिंग करना बॉन्डिंग मतलब लोगों को जोड़ना उसका तात्पर्य लोगों को जोड़ने से है आप लोगों को जोड़िए दिल्ली से ज्वाइन द रिलीजन अर्थात आप एक कम्यूनिटी डेवलप कर रहे हैं वहां पर धर्म की परिभाषा में कम्युनिटी डिवेलप करने वाली बात भी की परिभाषा में लोगों को जोड़ने की बात है वहां पर और फिर मजहब मजहब शब्द का अर्थ संप्रदाय से एक संप्रदाय एक कबीला संप्रदाय से है अपने संप्रदाय की ताकत को बढ़ाओ बजा भी ताकत को बढ़ाओ यह बहुत बड़ा डिफरेंस है धारा में एक व्यक्तिगत चीज है मजहब सामूहिक है रिलीजन भी सामूहिक लेकिन धर्म व्यक्तिगत है कि आपने क्या स्वीकार किया यह आपका व्यक्तिगत मैटर है और आप उसको पालन करें आप उसको माने उसको आप ठाकुर दूसरा आप की प्रेरणा से मांगता है तो भी मानव धर्म को सर्वोच्च मानता है सभी अपने धर्म को सर्वोच्च मानता धर्म किसी के जीवन का कितना महत्वपूर्ण होता है धर्म अगर अगर आप रिलीजर के बात करते हैं मजहब के बात करते हैं तो वह तो लोगों को जोड़ने से एक समूह के लिए वह सारे शब्द इस्तेमाल किए जाते हैं और साबू शक्ति को बढ़ाने के लिए सांप्रदायिक ताकत को बढ़ाने के लिए लेकिन जब धर्म की बात करते हैं तो आप व्यक्तिगत विकास से जुड़ जाते एक व्यक्तिगत विकास अपने आत्मा का कल्याण आत्म कल्याण की चर्चा आपने कभी सुना कि भाई क्रिश्चियनिटी ने आत्म कल्याण की बात की हो गॉड को मारने की बात विज्ञान इंपोर्टेंट होता है आत्मज्ञान का महत्व होता है धर्म के अंदर मोक्ष का महत्व होता लिबरेशन का ना कि गॉड का एक ईश्वर को प्राप्त मत करो या मत करो तुम्हें मोक्ष प्राप्त करना है बुक स्वतंत्रता सभी सांसारिक बंधनों से मुक्ति मोक्ष तो यह बहुत बड़ा अंतर हो जाता है इस प्रकार से इसको समझ ही तो धर्म ज्यादा महत्वपूर्ण है और होना भी चाहिए

dharm ko lekar log itni batein karte hain har koi apne dharm ko sarvoch samanata hai dharm kisi ke jeevan ka kitna mahatvapurna hissa hai dharm hi jeevan hai aap aisa samajh li dharm ko lekar batein karte hain log apne dharm ko sarvoch maante apne har koi apne dharm ko sarvoch samanata hai yah bahut hi alag baat hai ki log apne dharm ko sarvoch maante hain lekin dharm ko sarvoch manana apne apne dharm ko kyonki hum dharm maan liya karte hain jaise ki kya hai ki aapne kaha dharm hai isai ek krishchiyaniti islam ek dharm hai arya sanatan dharm hai hindu dharm hai aap aisa kehte sarvapratham jab aap iska aakalan karte hain athva is par charcha karte hain toh aapko pata hona chahiye ki dharm kya hai aur dharm me aur relation me aur majhab me antar kya hai aapko yah pata hona chahiye aap agar yah maante hain ki dharm ka paryayvachi religion hai ya dharm ka paryayvachi majhab hai toh ab badi galatfahamee me aap aur bhashaon me jaakar un shabdon ka arth dhundhiye aapko spasht ho jaega mujhe 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jis ishwar hai toh aapne ishwar yah dharm ko dharan kiya ishwar nahi hai toh aapne aneesh varvanta ko dharan kiya hamare desh me bharatiya itihas ke andar agar aap jaenge darshan shastra ke itihas ko padenge class six history jo india ki hai agar aap uska adhyayan karenge toh bahut pehle se amit sukravaar ko yahan par mana gaya hai rakha gaya hai bahut se log aneesh varvadi hote sabhi ishwar wadi nahi hua karte the vaah buddha jain aadi jo mat hain vaah bhi aneesh varvadi rahi hai lekin paschim me aap jaenge is I ya phir krishchiyaniti me aap jaenge toh wahan par aneesh varvadi hona toh bahut bada paap wahan par agar koi allah ko nahi maanta hai ya god ko nahi mangta hai toh sidhe goli maar dene ki wahan par yah ek baar nahi maanta toh use khatam karo pura jihad ka jo hai labh ho isi baat par hai ki log allah ko nahi marte unko khatam kar dena unki manyata me aisi vichardhara ka koi prasad nahi jo baant do khatam kar do agar vaah tumhare bhagwan ko nahi maanta toh tum use maar do 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धर्म को लेकर लोग इतनी बातें करते हैं हर कोई अपने धर्म को सर्वोच्च समानता है धर्म किसी के ज

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Upendra Kaushik

Life Coach, Spiritual Knowledge Seeker

3:25
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लोग धर्म के बारे में बहुत बातें कर रहे हैं सब अपने धर्म को सर्वोच्च मान रहे हैं और जीवन का कितना महत्वपूर्ण हिस्सा है धर्म तो मैं सबसे पहले बता दूं कि लोग धर्म की बातें कर रहे हैं आज की डेट में जो माहौल चल रहा है उस माहौल के अंदर आर्थिक गतिविधियां बंद है बाहर घूमना फिरना सैर सपाटा रेस्टोरेंट्स वॉपिंग हर चीज बंद है और आदमी अपने घर पर बैठा है जब आदमी अपने घर पर और शांत बैठा है तो एक ही चीज है जो जब घर में आदमी अपने ओरिजिनल साउंड में पहुंचता है तो उसको देखने के लिए उसके एक्सपीरियंस में आती है और वह है धर्म धर्म की अगर में व्याख्या करूं सनातन यानी बहुत अनंत काल से जो ऋषि मुनि साधक और बड़े हमारे पेपर फिट यह जो भी है उन्होंने जब आओ तो बॉडी एक पीरियड से जा करके देखा कि ह्यूमन के लिए नेचर की क्या-क्या चीजें आवश्यक हैं उनको वह जो साइंटिफिक हैं उनको जगह के हिसाब से और लैंग्वेज के हिसाब से अलग-अलग शब्द देकर सामान्य जनमानस को बताते गए जैसे कि आप पेरासिटामोल गोली बुखार के लिए खाते हैं आपको डॉक्टर पर पूरा भरोसा होता है कि उसने सही गोली दी है गोली बनाने वाले के ऊपर भी आपको पूरा भरोसा होता है कि उसने बिल्कुल सही बोली बनाई है और बेचने वाले केमिस्ट के ऊपर भी भरोसा होता है ऐसे ही धर्म में किस तरीके से आपको जीना है उस जीने के तरीके को जिसने बनाया या लिखा फिर जिसने उस को आगे बढ़ाया गुरु शिष्य परंपरा में फिर जिसने आपको बताया परिवार में उसे फॉलो किया गया आसपास में फॉलो किया गया और आज आप भी पूरे विश्वास के साथ उसे फॉलो कर रहे हैं तो जब हम पेरासिटामोल की गोलियां खाते हैं तो अपने बुखार को उतारने और अपने शरीर को स्वस्थ करने के लिए खाते हैं ऐसे ही जब हम कहीं बताए हुए धर्म के मार्ग पर चलते हैं तो वह भी हमें बेनिफिट लेने के लिए होता है मगर अगर आप उसके एनालिसिस में जाएंगे तो भी आप वहीं पर पहुंचेंगे जैसे की प्रेयर किसी भी धर्म प्रेयर करने में पांच तत्व से जिनसे दुनिया बनी है वह इस्तेमाल होते हैं पांच तत्वों से आपके शरीर बना है वह इस्तेमाल होते हैं स्वास की क्रिया होती है आवाज से वाइब्रेशन निकाली जाती है बहुत एक जगह के हिसाब से वह कुछ भी हो सकती है और भाषा के हिसाब से को कुछ भी हो सकती है पर ओम बोले हैं क्या अल्लाह बोलेंगे कुछ भी आप बोलें शरीर से बोलिए एंटी में जो इस रोज शॉर्ट में जो सी क्रिया होती है ओसामा नहीं होती है सभी में अग्नि होती है सभी में कपड़े होते हैं सभी में गरीबों को खिलाना होता है सब धर्म एक ही है निस्वार्थ भाव से गरीबों की सेवा करना दीन हीन के काम आना निस्वार्थ भाव यही धर्म है सबसे अंत में आप यही पहुंचेंगे वृंदावन बिहारी लाल की जय

log dharm ke bare me bahut batein kar rahe hain sab apne dharm ko sarvoch maan rahe hain aur jeevan ka kitna mahatvapurna hissa hai dharm toh main sabse pehle bata doon ki log dharm ki batein kar rahe hain aaj ki date me jo maahaul chal raha hai us maahaul ke andar aarthik gatividhiyan band hai bahar ghumana phirna sair sapata Restaurants whopping har cheez band hai aur aadmi apne ghar par baitha hai jab aadmi apne ghar par aur shaant baitha hai toh ek hi cheez hai jo jab ghar me aadmi apne original sound me pahuchta hai toh usko dekhne ke liye uske experience me aati hai aur vaah hai dharm dharm ki agar me vyakhya karu sanatan yani bahut anant kaal se jo rishi muni sadhak aur bade hamare paper fit yah jo bhi hai unhone jab aao toh body ek period se ja karke dekha ki human ke liye nature ki kya kya cheezen aavashyak hain unko vaah jo scientific hain unko jagah ke hisab se aur language ke hisab se alag alag shabd dekar samanya janmanas ko batatey gaye jaise ki aap paracetamol goli bukhar ke liye khate hain aapko doctor par pura bharosa hota hai ki usne sahi goli di hai goli banane waale ke upar bhi aapko pura bharosa hota hai ki usne bilkul sahi boli banai hai aur bechne waale chemist ke upar bhi bharosa hota hai aise hi dharm me kis tarike se aapko jeena hai us jeene ke tarike ko jisne banaya ya likha phir jisne us ko aage badhaya guru shishya parampara me phir jisne aapko bataya parivar me use follow kiya gaya aaspass me follow kiya gaya aur aaj aap bhi poore vishwas ke saath use follow kar rahe hain toh jab hum paracetamol ki goliya khate hain toh apne bukhar ko utarane aur apne sharir ko swasth karne ke liye khate hain aise hi jab hum kahin bataye hue dharm ke marg par chalte hain toh vaah bhi hamein benefit lene ke liye hota hai magar agar aap uske analysis me jaenge toh bhi aap wahi par pahunchenge jaise ki prayer kisi bhi dharm prayer karne me paanch tatva se jinse duniya bani hai vaah istemal hote hain paanch tatvon se aapke sharir bana hai vaah istemal hote hain swas ki kriya hoti hai awaaz se vibration nikali jaati hai bahut ek jagah ke hisab se vaah kuch bhi ho sakti hai aur bhasha ke hisab se ko kuch bhi ho sakti hai par om bole hain kya allah bolenge kuch bhi aap bolen sharir se bolie anti me jo is roj short me jo si kriya hoti hai osama nahi hoti hai sabhi me agni hoti hai sabhi me kapde hote hain sabhi me garibon ko khilana hota hai sab dharm ek hi hai niswarth bhav se garibon ki seva karna din heen ke kaam aana niswarth bhav yahi dharm hai sabse ant me aap yahi pahunchenge vrindavan bihari laal ki jai

लोग धर्म के बारे में बहुत बातें कर रहे हैं सब अपने धर्म को सर्वोच्च मान रहे हैं और जीवन का

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Rakesh Tiwari

Life Coach, Management Trainer

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कृष्ण धर्म को लेकर लोग इतनी बातें करते हैं हर कोई अपने धर्म को सर दोस्त मानता है जीवन का हर एक जीवन पद्धति है एक आस्था विश्वास का एक केंद्र है जो आपकी जीवनशैली को जीवन मूल्यों को दिशा देता है नियंत्रित करता है यह सर्वोपरि लेकिन ज्यादा नहीं 1 संपदा मानव समुदाय के आध्यात्मिक कल्याण और उनके समायोजन एवं उनकी व्यवस्था में सुधार करने का भाव और धर्म के प्रति आदर और सम्मान का भाव

krishna dharm ko lekar log itni batein karte hain har koi apne dharm ko sir dost maanta hai jeevan ka har ek jeevan paddhatee hai ek astha vishwas ka ek kendra hai jo aapki jeevan shaili ko jeevan mulyon ko disha deta hai niyantrit karta hai yah sarvopari lekin zyada nahi 1 sampada manav samuday ke aadhyatmik kalyan aur unke samaayojan evam unki vyavastha me sudhaar karne ka bhav aur dharm ke prati aadar aur sammaan ka bhav

कृष्ण धर्म को लेकर लोग इतनी बातें करते हैं हर कोई अपने धर्म को सर दोस्त मानता है जीवन का ह

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Puneet Kumar Pandey

Freelancer Journalist And P.hd Scholar

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हिंदू धर्म भारत का सर्वाधिक प्राचीनतम धर्म में से एक है और सबसे बड़ी बात मैं यह कहना चाहूंगा कि धर्मो रक्षति रक्षिता यदि आप धर्म की रक्षा करेंगे तो धर्म की रक्षा करेगा अपने धर्म के प्रति सद्भाव रखना ना केवल हिंदू धर्म के नागरिकों का परम कर्तव्य है वरन पूरे विश्व के नागरिकों का परम कर्तव्य है इसीलिए तो युग युग में भगवान ने स्वयं इस धरा धरातल पर अवतरण किया है अवतार धारण किया है यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारता अभ्युत्थानम अधर्मस्या तादात्मनम सुजानगढ़ सुर संत हित लीन मनुज अवतार और आधुनिक युग में महात्मा गांधी ने भी यह बात कही थी

hindu dharm bharat ka sarvadhik prachintam dharm me se ek hai aur sabse badi baat main yah kehna chahunga ki dharmon rakshati rakshita yadi aap dharm ki raksha karenge toh dharm ki raksha karega apne dharm ke prati sadbhav rakhna na keval hindu dharm ke nagriko ka param kartavya hai WREN poore vishwa ke nagriko ka param kartavya hai isliye toh yug yug me bhagwan ne swayam is dhara dharatal par avataran kiya hai avatar dharan kiya hai yada yada hi dharmasya glanirbhavati bharta abhyutthanam adharmasya tadatmanam sujangarh sur sant hit Lean manuj avatar aur aadhunik yug me mahatma gandhi ne bhi yah baat kahi thi

हिंदू धर्म भारत का सर्वाधिक प्राचीनतम धर्म में से एक है और सबसे बड़ी बात मैं यह कहना चाहूं

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Manoj Kumar

Spiritual Knowdge / working as a Social Worker

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देखिए यह जो धर्म बनाए गए हैं यह हम सभी मूर्ख व्यक्तियों नहीं बनाए हैं जो यह नहीं समझ पाए कि परमात्मा एक है जब परमात्मा ने हमें बनाते समय कोई फर्क नहीं किया सभी को एक ही तरह से पैदा किया एक ही तरह के अंग हैं तो फिर यह धर्म कहां से पैदा हो गया अभी मैं हिंदू में मुस्लिम न सीखना है परमात्मा की वाणी है कि जीव हमारी जाति है मानव धर्म हमारा हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई धर्म नहीं कोई न्यारा तो फिर यह धर्म जात दीजिए कहां से है वास्तव में यह तुम लोगों की देन है जिन्होंने कभी धर्म को समझा ही नहीं वह जानते ही नहीं कि परमात्मा है कौन कहते सभी हैं कि परमात्मा एक है लेकिन पहचानता कोई नहीं कि परमात्मा कौन है उसका नाम क्या है इन सभी बातों की जानकारी अगर आपको चाहिए तो कृपया अवश्य देखें प्रतिदिन साधना टीवी 7:30 पीएम से 8:30 पीएम तक आपको आपके सभी सवालों के जवाब कुछ दिन के सत्संग में ही मिल जाएंगे

dekhiye yah jo dharm banaye gaye hain yah hum sabhi murkh vyaktiyon nahi banaye hain jo yah nahi samajh paye ki paramatma ek hai jab paramatma ne hamein banate samay koi fark nahi kiya sabhi ko ek hi tarah se paida kiya ek hi tarah ke ang hain toh phir yah dharm kaha se paida ho gaya abhi main hindu me muslim na sikhna hai paramatma ki vani hai ki jeev hamari jati hai manav dharm hamara hindu muslim sikh isai dharm nahi koi nyara toh phir yah dharm jaat dijiye kaha se hai vaastav me yah tum logo ki then hai jinhone kabhi dharm ko samjha hi nahi vaah jante hi nahi ki paramatma hai kaun kehte sabhi hain ki paramatma ek hai lekin pahachanta koi nahi ki paramatma kaun hai uska naam kya hai in sabhi baaton ki jaankari agar aapko chahiye toh kripya avashya dekhen pratidin sadhna TV 7 30 pm se 8 30 pm tak aapko aapke sabhi sawalon ke jawab kuch din ke satsang me hi mil jaenge

देखिए यह जो धर्म बनाए गए हैं यह हम सभी मूर्ख व्यक्तियों नहीं बनाए हैं जो यह नहीं समझ पाए क

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Dinesh Mishra

Theosophists | Accountant

0:46
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धर्म को लेकर लोग इतनी बातें करते हैं हर कोई अपने धर्म को सर्वोच्च मानता है धर्म किसी के जीवन का कितना महत्वपूर्ण है देखिए जो धर्म होता है वह सर्वोच्च हुआ करता है वह नीतिगत हुआ करता है और किसी प्रकार की हनी तो उसमें नहीं हुआ करती है और वह धारण किया जाता है जो सोचता है और जो आचार है ईद का उसको धारण किए जाते हैं धर्म जो है वह जीवन में महत्वपूर्ण भूमिकाओं का निर्वहन किया करता है यदि धर्म नहीं है तो व्यक्ति का जो जीवन है वह निरर्थक और व्यर्थ हो जाया करता है

dharm ko lekar log itni batein karte hain har koi apne dharm ko sarvoch maanta hai dharm kisi ke jeevan ka kitna mahatvapurna hai dekhiye jo dharm hota hai vaah sarvoch hua karta hai vaah nitigat hua karta hai aur kisi prakar ki honey toh usme nahi hua karti hai aur vaah dharan kiya jata hai jo sochta hai aur jo aachar hai eid ka usko dharan kiye jaate hain dharm jo hai vaah jeevan me mahatvapurna bhoomikaon ka nirvahan kiya karta hai yadi dharm nahi hai toh vyakti ka jo jeevan hai vaah nirarthak aur vyarth ho jaya karta hai

धर्म को लेकर लोग इतनी बातें करते हैं हर कोई अपने धर्म को सर्वोच्च मानता है धर्म किसी के जी

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Pankaj Kr(youtube -AJ PANKAJ MATHS GURU)

Motivational Speaker/YouTube-AJ PANKAJ MATHS GURU

0:36
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जीवन में धार्मिक जान लेना जरूरी है धार्मिक शिक्षा लेना जरूरी है सत्संग में जाना जरूरी है ईश्वर की भक्ति करना जरूरी है लेकिन अपने अपने धर्म को मत देना

jeevan me dharmik jaan lena zaroori hai dharmik shiksha lena zaroori hai satsang me jana zaroori hai ishwar ki bhakti karna zaroori hai lekin apne apne dharm ko mat dena

जीवन में धार्मिक जान लेना जरूरी है धार्मिक शिक्षा लेना जरूरी है सत्संग में जाना जरूरी है ई

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Dhirendra kumar soni

Naturopath & Railway employee

2:45
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मित्रों नमस्कार बहुत ही कीमती सवाल आपने पूछा धर्म को लेकर लेकर लोग इतनी बातें करते हैं हर कोई अपने धर्म को सर्वोच्च मानता है धर्म किसी के जीवन का कितना महत्वपूर्ण हिस्सा है मित्रों में एक बात बता दूं कि जो सबसे बड़ा धर्म है मानवता का धर्म वह धर्म जिससे किसी का नुकसान होता हो किसी को तकलीफ होती हो कुछ लोग इरिटेट होते हो कुछ लोग खुश होते हो कुछ लोगों को एक विशेष समुदाय को किसी कार्य करने में बहुत आनंद मिलता है और दूसरों को दुख मिलता है हम प्राणी हिंसा करते हैं किसी धर्म के अंतर्गत प्राणियों को मारते हैं प्राणियों को सताते हैं हम एक दूसरे को सताते हैं फालतू का शोरगुल मचाते हैं जिससे हमें तो खुशी मिल सकती है परंतु दूसरे उसमें दुखी हो जाते हैं तो ऐसा कार्य जो धर्म के अंतर्गत किया जा रहा है यह धर्म नहीं है क्योंकि धर्म की सीधी और साधारण सी परिभाषा है वह कार्य जिसकी करने से समाज का भला होता है समाज को सुख शांति पहुंचती है समाज का कल्याण होता है वह धर्म है रामचरितमानस में सीधी सी भाषा में लिखा है परहित सरिस धर्म नहिं भाई मित्रों परहित का सीधा सा मतलब होता है दूसरों का है यानी कि वह कार्य जो मेरे द्वारा जो किया जा रहा है उसके करने से सभी लोगों का हित होना चाहिए लाभ होना चाहिए कल्याण होना चाहिए वह धर्म है और अगर हम किसी भी तरीके से किसी को दुख देते हैं तनाव देते हैं चिंताएं देते हैं परेशानियां देते तो इधर नहीं हो सकता है तो मित्रों जो सबसे बड़ा धर्म है वह परहित है और यह हमारे जीवन का बहुत बड़ा हिस्सा है हमारा संपूर्ण जीवन अगर इसी धर्म में जाए तो हम समझेंगे कि हमारा जीवन उज्जवल हो गया और हमें जिस कार्य के लिए भगवान ने भेजा है परम पिता ने बनाया है वह कार्य हमने संपन्न कर पाया थैंक यू वेरी मच

mitron namaskar bahut hi kimti sawaal aapne poocha dharm ko lekar lekar log itni batein karte hain har koi apne dharm ko sarvoch maanta hai dharm kisi ke jeevan ka kitna mahatvapurna hissa hai mitron me ek baat bata doon ki jo sabse bada dharm hai manavta ka dharm vaah dharm jisse kisi ka nuksan hota ho kisi ko takleef hoti ho kuch log irritate hote ho kuch log khush hote ho kuch logo ko ek vishesh samuday ko kisi karya karne me bahut anand milta hai aur dusro ko dukh milta hai hum prani hinsa karte hain kisi dharm ke antargat praniyo ko marte hain praniyo ko satate hain hum ek dusre ko satate hain faltu ka shoragul machate hain jisse hamein toh khushi mil sakti hai parantu dusre usme dukhi ho jaate hain toh aisa karya jo dharm ke antargat kiya ja raha hai yah dharm nahi hai kyonki dharm ki seedhi aur sadhaaran si paribhasha hai vaah karya jiski karne se samaj ka bhala hota hai samaj ko sukh shanti pohchti hai samaj ka kalyan hota hai vaah dharm hai ramcharitmanas me seedhi si bhasha me likha hai parhit saris dharm nahin bhai mitron parhit ka seedha sa matlab hota hai dusro ka hai yani ki vaah karya jo mere dwara jo kiya ja raha hai uske karne se sabhi logo ka hit hona chahiye labh hona chahiye kalyan hona chahiye vaah dharm hai aur agar hum kisi bhi tarike se kisi ko dukh dete hain tanaav dete hain chintaen dete hain pareshaniya dete toh idhar nahi ho sakta hai toh mitron jo sabse bada dharm hai vaah parhit hai aur yah hamare jeevan ka bahut bada hissa hai hamara sampurna jeevan agar isi dharm me jaaye toh hum samjhenge ki hamara jeevan ujjawal ho gaya aur hamein jis karya ke liye bhagwan ne bheja hai param pita ne banaya hai vaah karya humne sampann kar paya thank you very match

मित्रों नमस्कार बहुत ही कीमती सवाल आपने पूछा धर्म को लेकर लेकर लोग इतनी बातें करते हैं ह

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N. K. SINGH 'Nitesh'

Educator, Life Coach, Writer and Expert in British English Language, Author of Book/Fiction Lucky Girl (Love vs Marriage)

3:11

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देखिए आपने पूछा कि धर्म को लेकर के इतनी बातें लोग करते हैं और हर कोई अपने धर्म को सर्वोच्च मानता है धर्म किसी के जीवन का इतना महत्वपूर्ण है ऐसे तो मैं आपको बताता हूं कि सदियों से कुछ तथाकथित धर्म गुरु धर्म के नाम पर लोगों को डराते आ रहे हैं धर्म के नाम पर लोगों को इकट्ठा करने का तरीका ढूंढते आए हैं और इस डराने के नाम पर जो धर्म का वास्तविक उद्देश्य मानव कल्याण वह पीछे छूटता चला गया और जीतना ही जिस धर्म की उत्पत्ति जब हुई होगी उसे जितना ही आप आगे निकलते जाएंगे कितना समय बीतता जाता हुआ उसने इतनी ज्यादा भ्रांतियां उतना ही ज्यादा कुरीतियां उतनी ही ज्यादा धार्मिक परंपराओं को तोड़ मरोड़ कर पेश किए जाने की संभावना होती जाती है और जो नए-नए धर्मगुरु होते जाते हैं वह अपने अपने हिसाब से व्याख्या करते जाते जाते और व्याख्या के पीछे उद्देश्य भटक जाते हैं जो असल उद्देश्य मानव कल्याण जगत का कल्याण विश्व का कल्याण हो से पड़ेंगे तो उनको महत्व कौन देगा मैं यह नहीं कहता कि जब धर्म की स्थापना हुई होगी तो सारे ऋषि महर्षि जो है वह गलत है वह निश्चित रूप से सहित है क्योंकि इतना बड़ा धर्म का व्यापक दृष्टिकोण और खास करके सनातन धर्म में देखा जाए सामान्य आदमी की बस की बात नहीं और उन्होंने मानव जगत कल्याण के लिए क्या-क्या किया किस तरह की रचनाएं की और इस तरह के उपनिषद लिखे गए ग्रंथ लिखे गए धार्मिक जो वो दिखाए लिखे गए यह लोग महान लोग उन सब के पीछे उनका उद्देश्य था मानव कल्याण की सुप्रजा लेकिन आज हम उससे जो भटकते जा रहे हैं इसके पीछे है धर्म के नाम पर डरा कर के और लोगों को एकत्रित करना लो तो इसलिए हर व्यक्ति अपने धर्म को सर्वोच्च मानता है कि उस धर्म से बना हुआ है दूसरी बात बिना डर के भी क्या होता है कि यह धर्म परंपरा में शामिल हो जाते संस्कार में शामिल हो जाती है लंबे वक्त तक जब हम उस धर्म का पालन करते हैं जैसे हम एक हिंदू परिवार में जन्म लेते हैं तो हम बचपन से देखते आ रहे हैं कि हम हमारे माता-पिता मंदिरों में जाते हैं पूजा करते हैं देवी देवताओं के सम्मुख होते ही हमारा विषय हम भी श्रद्धा से दूर होते हैं क्योंकि वह धर्म अब हमारे संस्कार में शामिल हो चुका होता है इसलिए इन लोगों के बीच एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया हर कोई अपने दम पर सर्वोच्च बताने में लगा हुआ धन्यवाद

dekhiye aapne poocha ki dharm ko lekar ke itni batein log karte hain aur har koi apne dharm ko sarvoch manata hai dharm kisi ke jeevan ka itna mahatvapurna hai aise toh main aapko batata hoon ki sadiyon se kuch tathakathit dharm guru dharm ke naam par logo ko darate aa rahe hain dharm ke naam par logo ko ikattha karne ka tarika dhoondhate aaye hain aur is darane ke naam par jo dharm ka vastavik uddeshya manav kalyan vaah peeche chhutataa chala gaya aur jeetna hi jis dharm ki utpatti jab hui hogi use jitna hi aap aage nikalte jaenge kitna samay bitta jata hua usne itni zyada bhrantiyan utana hi zyada kuritiyan utani hi zyada dharmik paramparaon ko tod marod kar pesh kiye jaane ki sambhavna hoti jaati hai aur jo naye naye dharmguru hote jaate hain vaah apne apne hisab se vyakhya karte jaate jaate aur vyakhya ke peeche uddeshya bhatak jaate hain jo asal uddeshya manav kalyan jagat ka kalyan vishwa ka kalyan ho se padenge toh unko mahatva kaun dega main yah nahi kahata ki jab dharm ki sthapna hui hogi toh saare rishi maharshi jo hai vaah galat hai vaah nishchit roop se sahit hai kyonki itna bada dharm ka vyapak drishtikon aur khaas karke sanatan dharm mein dekha jaaye samanya aadmi ki bus ki baat nahi aur unhone manav jagat kalyan ke liye kya kya kiya kis tarah ki rachnaye ki aur is tarah ke upanishad likhe gaye granth likhe gaye dharmik jo vo dekhiye likhe gaye yah log mahaan log un sab ke peeche unka uddeshya tha manav kalyan ki supraja lekin aaj hum usse jo bhatakte ja rahe hain iske peeche hai dharm ke naam par dara kar ke aur logo ko ekatrit karna lo toh isliye har vyakti apne dharm ko sarvoch manata hai ki us dharm se bana hua hai dusri baat bina dar ke bhi kya hota hai ki yah dharm parampara mein shaamil ho jaate sanskar mein shaamil ho jaati hai lambe waqt tak jab hum us dharm ka palan karte hain jaise hum ek hindu parivar mein janam lete hain toh hum bachpan se dekhte aa rahe hain ki hum hamare mata pita mandiro mein jaate hain puja karte hain devi devatao ke sammukh hote hi hamara vishay hum bhi shraddha se dur hote hain kyonki vaah dharm ab hamare sanskar mein shaamil ho chuka hota hai isliye in logo ke beech ek mahatvapurna hissa ban gaya har koi apne dum par sarvoch bata mein laga hua dhanyavad

देखिए आपने पूछा कि धर्म को लेकर के इतनी बातें लोग करते हैं और हर कोई अपने धर्म को सर्वोच्च

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Dr Kanahaiya

Dr Kanahaiya Reki Grand Masstr Apt .Sujok .Homyopathy .

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धर्म धर्म क्या है धर्म विज्ञान है जितना जरूरी खाना होता है उतना जरी ज्ञान होता है ज्ञान इंसान को महान बनाता है अगर मनुष्य पास ज्ञान है तो महान है ज्ञान नहीं है तो उस महान क्या कुछ नहीं है इसलिए ज्ञान जो शिक्षा को धर्म का नाम दे दिया गया हमारी पुरानी शिक्षार्थी पुराना तौर तरीका ताजा खून ने सब ने मिलकर उसको अलग धर्म का नाम दे दिया शिक्षा को धर्म परिवर्तन कर दिया असल में क्या हमारे लिए ज्ञात था आज का ज्ञान कोना शिक्षा बस आज का ज्ञान उसको शिक्षा बता रहे हो जो हमारा पुराना शिक्षा ज्ञान था उसको धर्म का नाम दे दिया है तो धर्म इंसान के लिए बहुत जरूरी है जितना जरूरी खाना होता है उतना जरूरी शिक्षा जारी

dharam dharm kya hai dharm vigyan hai jitna zaroori khana hota hai utana jaree gyaan hota hai gyaan insaan ko mahaan banata hai agar manushya paas gyaan hai toh mahaan hai gyaan nahi hai toh us mahaan kya kuch nahi hai isliye gyaan jo shiksha ko dharm ka naam de diya gaya hamari purani shiksharthi purana taur tarika taaza khoon ne sab ne milkar usko alag dharm ka naam de diya shiksha ko dharm parivartan kar diya asal mein kya hamare liye gyaat tha aaj ka gyaan kona shiksha bus aaj ka gyaan usko shiksha bata rahe ho jo hamara purana shiksha gyaan tha usko dharm ka naam de diya hai toh dharm insaan ke liye bahut zaroori hai jitna zaroori khana hota hai utana zaroori shiksha jaari

धर्म धर्म क्या है धर्म विज्ञान है जितना जरूरी खाना होता है उतना जरी ज्ञान होता है ज्ञान इं

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Bhavin J. Shah

Life Coach

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बत्तू साहब उदंबू वस्तु का स्वभाव ही उसका धर्म है आपका धर्म है गर्मी देना बर्फ का धर्म है शीतलता देना ऐसे ही मनुष्य का धर्म भगवान ने जो बनाया है वह यह है कि वह खुशी शांति प्रेम जैसे गुणों का अपने अंतरात्मा में विकास करें और उसका लोगों के बीच बिहार में इलावा करें हम जितना ज्यादा खुश रहेंगे शांत रहेंगे प्रेम बढ़ाएंगे उतना ही हम तहे दिल से शांति पाएंगे सबसे बड़ा धर्म अगर इस दुनिया में कोई है तो वह है अपने अपने गुणों का विकास करना जो यूनिवर्सल प्रिंसिपल से उसके साथ सीधा और सब धर्म एक धर्म है और सबसे बड़ा धर्म है खुशी शांति प्रेम थैंक यू

battu saheb udambu vastu ka swabhav hi uska dharm hai aapka dharm hai garmi dena barf ka dharm hai shitalata dena aise hi manushya ka dharm bhagwan ne jo banaya hai vaah yah hai ki vaah khushi shanti prem jaise gunon ka apne antaraatma mein vikas kare aur uska logo ke beech bihar mein alawa kare hum jitna zyada khush rahenge shaant rahenge prem badhaenge utana hi hum tahe dil se shanti payenge sabse bada dharm agar is duniya mein koi hai toh vaah hai apne apne gunon ka vikas karna jo universal principal se uske saath seedha aur sab dharm ek dharm hai aur sabse bada dharm hai khushi shanti prem thank you

बत्तू साहब उदंबू वस्तु का स्वभाव ही उसका धर्म है आपका धर्म है गर्मी देना बर्फ का धर्म है श

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आपका सवाल है धर्म को लेकर लोग इतनी बातें करते हैं हर कोई अपने धर्म को सर्वोच्च मानता है धर्म किसके जीवन का कितना महत्वपूर्ण है कि आजकल तो लोग धर्म के सिर्फ बातें करते हैं 50% लोग और 40% लोग जो है धर्म का उसकी 40% में 20% लोग धर्म का पूरा पालन करते हैं और उसके अंदर 20% बसते हैं ना धर्म की बातें करते हैं ना धर्म का पालन करते हैं और इंसानियत को मानते हैं सिर्फ इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है और जीवन में कितना महत्वपूर्ण हिस्सा है देखिए लोग जितना धर्म को मानते हैं जितना महत्वपूर्ण समझते हैं से पूरी दुनिया में पूर्ण होने के बाद बता रहा हूं ना सिर्फ एक दो से 40 40 सिसोदिया 20 पैसे दिए 60 फ़ीसदी की बातें बता रहा हूं मेरे ख्याल से सब के जीवन में मानवता जो है वह 20 फ़ीसदी हिस्सा है बस यह धर्म की बातें करने वाली 20 फ़ीसदी 20 परसेंट जो है मानवता को फॉलो करते हैं और धर्म का पालन करने वाले भी 20 फ़ीसदी मानवता को ही धर्म मानते हैं और जो बिल्कुल धर्म को नहीं मानते वह लोग भी 20% ही मानवता को धर्म मानते हैं महत्वपूर्ण सिर्फ समाज को डरकर मानते हैं क्योंकि हम किस समाज में पैदा हुए और हमारा अंत क्या होगा स्वर्ग नरक इन सब बातों को डर के धर्म को महत्वपूर्ण मानते अगर स्वर्ग और नर्क की बात ना होती तो कोई भी मेरे ख्याल से धर्म को महत्वता नहीं देता

aapka sawaal hai dharm ko lekar log itni batein karte hain har koi apne dharm ko sarvoch maanta hai dharm kiske jeevan ka kitna mahatvapurna hai ki aajkal toh log dharm ke sirf batein karte hain 50 log aur 40 log jo hai dharm ka uski 40 me 20 log dharm ka pura palan karte hain aur uske andar 20 baste hain na dharm ki batein karte hain na dharm ka palan karte hain aur insaniyat ko maante hain sirf insaniyat hi sabse bada dharm hai aur jeevan me kitna mahatvapurna hissa hai dekhiye log jitna dharm ko maante hain jitna mahatvapurna samajhte hain se puri duniya me purn hone ke baad bata raha hoon na sirf ek do se 40 40 sisodiya 20 paise diye 60 fisadi ki batein bata raha hoon mere khayal se sab ke jeevan me manavta jo hai vaah 20 fisadi hissa hai bus yah dharm ki batein karne wali 20 fisadi 20 percent jo hai manavta ko follow karte hain aur dharm ka palan karne waale bhi 20 fisadi manavta ko hi dharm maante hain aur jo bilkul dharm ko nahi maante vaah log bhi 20 hi manavta ko dharm maante hain mahatvapurna sirf samaj ko darker maante hain kyonki hum kis samaj me paida hue aur hamara ant kya hoga swarg narak in sab baaton ko dar ke dharm ko mahatvapurna maante agar swarg aur nark ki baat na hoti toh koi bhi mere khayal se dharm ko mahatvata nahi deta

आपका सवाल है धर्म को लेकर लोग इतनी बातें करते हैं हर कोई अपने धर्म को सर्वोच्च मानता है धर

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Purushottam Choudhary

ब्राह्मण Next IAS institute गार्ड

0:37
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धर्म तो वैसे मेन चीज है धर्म के रास्ते पर अगर आप चलेंगे कहीं अभी आप सही कर्म कर पाएंगे बिना धर्म के रास्ते पर चले अगर कोई चाहे कि मैं अच्छा कर्म कर लूंगा इतना आसान नहीं है क्योंकि आपको पता ही नहीं चलेगा कि आखिर कर्म है क्या धर्म ही हमें कर्म करने के लिए प्रेरित करता है इसलिए धर्म को भूले नहीं आप जो भी धर्म से बिलॉन्ग करते हो तो प्रॉब्लम आप उस धर्म को मानते चले अपने आप अच्छे कर्म पर आप लग जाएंगे धन्यवाद

dharm toh waise main cheez hai dharm ke raste par agar aap chalenge kahin abhi aap sahi karm kar payenge bina dharm ke raste par chale agar koi chahen ki main accha karm kar lunga itna aasaan nahi hai kyonki aapko pata hi nahi chalega ki aakhir karm hai kya dharm hi hamein karm karne ke liye prerit karta hai isliye dharm ko bhule nahi aap jo bhi dharm se Belong karte ho toh problem aap us dharm ko maante chale apne aap acche karm par aap lag jaenge dhanyavad

धर्म तो वैसे मेन चीज है धर्म के रास्ते पर अगर आप चलेंगे कहीं अभी आप सही कर्म कर पाएंगे बिन

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Vinod Kumar

Political Student

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सभी धर्म सर्वोच्च है ना कोई छोटा है ना कोई बड़ा है धर्म सब बराबर है लेकिन इंसानों ने आपसी मतभेद में आपस में फर्क डालकर अपने आपस में दूसरे के धर्म को नीचा दिखाने के लिए छोटी छोटी छोटी हरकतें करते हैं जब सब धर्म बना हुआ है भगवान के घर अलग है लेकिन निवासी स्थानीय की है दोस्त लोगों को अपने मन में जो मेला खत्म करना चाहिए

sabhi dharm sarvoch hai na koi chota hai na koi bada hai dharm sab barabar hai lekin insano ne aapasi matbhed me aapas me fark dalkar apne aapas me dusre ke dharm ko nicha dikhane ke liye choti choti choti harakatein karte hain jab sab dharm bana hua hai bhagwan ke ghar alag hai lekin niwasi sthaniye ki hai dost logo ko apne man me jo mela khatam karna chahiye

सभी धर्म सर्वोच्च है ना कोई छोटा है ना कोई बड़ा है धर्म सब बराबर है लेकिन इंसानों ने आपसी

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Roni

make A INDIAN MAN =siv)

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जब धर्म से जुड़ी हुई जो बातें होती है ना यह सभी को भ्रम में डाल देता और विनाश की ओर ले जाते यह जो बातें हैं यह ढकोसला वाली बात है आदमी को गुमराह करने वाली बात क्या धर्म में कितने इतने घर में जानता हूं अपने कर्म जानता हूं कि तुम खुश रहो दूसरे को कुछ करो तुम खुद करो कि दूसरों को भी एक भी पढ़ ना इधर उधर कोई मतलब नहीं है आप अच्छे हो और बाकी जिओ के साथ मुझे कह रहा हूं यह कराइए मंदिर कहां और कहां जाएंगे हम जंग से निकले और जंगल में खो जाएंगे

jab dharm se judi hui jo batein hoti hai na yah sabhi ko bharam me daal deta aur vinash ki aur le jaate yah jo batein hain yah dhakosala wali baat hai aadmi ko gumrah karne wali baat kya dharm me kitne itne ghar me jaanta hoon apne karm jaanta hoon ki tum khush raho dusre ko kuch karo tum khud karo ki dusro ko bhi ek bhi padh na idhar udhar koi matlab nahi hai aap acche ho aur baki jio ke saath mujhe keh raha hoon yah karaiye mandir kaha aur kaha jaenge hum jung se nikle aur jungle me kho jaenge

जब धर्म से जुड़ी हुई जो बातें होती है ना यह सभी को भ्रम में डाल देता और विनाश की ओर ले जात

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Sumit Gondhiya

Educator, Content Creator, Counselor

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धर्म या फिर संप्रदाय वह सही मायनों में जब तक समझ से नहीं आता तो मालूम नहीं है आप किसी धर्म को मान रहे हो लेकिन उस धर्म में जो कहा गया है उसका विज्ञान उसका तत्वज्ञान उसकी साइकोलॉजि अगर आपकी समझ में नहीं है तो वह दम बेकार वरना समझ से आने वाली नास्तिकता भी सार्थक है

dharm ya phir sampraday vaah sahi maayano me jab tak samajh se nahi aata toh maloom nahi hai aap kisi dharm ko maan rahe ho lekin us dharm me jo kaha gaya hai uska vigyan uska tatwagyan uski psycology agar aapki samajh me nahi hai toh vaah dum bekar varna samajh se aane wali nastikata bhi sarthak hai

धर्म या फिर संप्रदाय वह सही मायनों में जब तक समझ से नहीं आता तो मालूम नहीं है आप किसी ध

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Brijesh ojha

Nurse Assitance

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जी लोगों ने धर्म को ज्यादा मायने रखता है कोई भी इंसान हूं परधनवा में पुरानी सुनना चाहता मैं उसकी बुराई करेगा हमेशा अच्छा ही करेगा धमकी दिलाना कि आज कोई अच्छा बताएं जो आज के समय लोग धर्म सभा मायने हो गया जान के बगैर लोग मौजूद नहीं है हम लोग को ज्यादा पुराना धर्म को लेकर लोगों में लड़ाई झगड़ा होते रहते हैं

ji logo ne dharm ko zyada maayne rakhta hai koi bhi insaan hoon paradhanava me purani sunana chahta main uski burayi karega hamesha accha hi karega dhamki dilana ki aaj koi accha bataye jo aaj ke samay log dharm sabha maayne ho gaya jaan ke bagair log maujud nahi hai hum log ko zyada purana dharm ko lekar logo me ladai jhagda hote rehte hain

जी लोगों ने धर्म को ज्यादा मायने रखता है कोई भी इंसान हूं परधनवा में पुरानी सुनना चाहता मै

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