क्या कभी आकाश में भगवान् शिव को किसी ने देखा है?...


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BK Vishal

Rajyoga Trainer

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ओम शांति बीके परमात्मा शिव का जो स्वरूप है वह देखने आंखों से देखने जैसा है नहीं क्योंकि वह अविनाशी है और अविनाशी को अविनाशी ही तरीके से देखा जा सकता है अगर आप आंखों से देखने की बात करेंगे तो आखिर क्योंकि अविनाशी नहीं है विनाशी है नष्ट हो सकती हैं नेत्र ज्योति समाप्त हो जाती व्यक्ति नेत्रहीन हो जाता है तो उसको कुछ भी नहीं दिखता तो ऐसी चीज से जो खुद विनाशी है उससे अविनाशी को कैसे देख पाएंगे इसलिए आकाश तो क्या कहीं भी उसको नहीं देखा जा सकता परंतु दिव्य दृष्टि से उसको अनुभव जरूर किया जा सकता है यहां दिव्य दृष्टि की जरूर बात करता हूं तो दिव्य दृष्टिकोण की बात करता हूं जो परमात्मा का परिचय परमात्मा देते हैं और तब हम उनको अनुभव कर सकते हैं और वह आकाश में नहीं आकाश से भी परे परात्पर देश को कहा जाता है परमधाम के रहने वाले हैं उनको शांति धाम निर्माण था ब्रह्म लोक परलोक सातवां आसमान कुछ भी कई नामों से उसको जाना जाता है वह स्थान सबसे ऊपर है जहां आत्माओं के पिता परम पिता परमात्मा रहते हैं और हम आत्माएं भी वही की रहने वाली थी वहीं से आई है फिर वही जाना है अगर आपको कोई और पसंद हो तो अवश्य कमेंट करें अथवा मेरे व्हाट्सएप नंबर पर भी आप उत्तर कर सकते हैं नमस्कार

om shanti BK paramatma shiv ka jo swaroop hai vaah dekhne aakhon se dekhne jaisa hai nahi kyonki vaah avinashi hai aur avinashi ko avinashi hi tarike se dekha ja sakta hai agar aap aakhon se dekhne ki baat karenge toh aakhir kyonki avinashi nahi hai vinaashi hai nasht ho sakti hain netra jyoti samapt ho jaati vyakti netrahin ho jata hai toh usko kuch bhi nahi dikhta toh aisi cheez se jo khud vinaashi hai usse avinashi ko kaise dekh payenge isliye akash toh kya kahin bhi usko nahi dekha ja sakta parantu divya drishti se usko anubhav zaroor kiya ja sakta hai yahan divya drishti ki zaroor baat karta hoon toh divya drishtikon ki baat karta hoon jo paramatma ka parichay paramatma dete hain aur tab hum unko anubhav kar sakte hain aur vaah akash me nahi akash se bhi pare paratpar desh ko kaha jata hai paramadham ke rehne waale hain unko shanti dhaam nirmaan tha Brahma lok parlok satvaan aasman kuch bhi kai namon se usko jana jata hai vaah sthan sabse upar hai jaha atmaon ke pita param pita paramatma rehte hain aur hum aatmaen bhi wahi ki rehne wali thi wahi se I hai phir wahi jana hai agar aapko koi aur pasand ho toh avashya comment kare athva mere whatsapp number par bhi aap uttar kar sakte hain namaskar

ओम शांति बीके परमात्मा शिव का जो स्वरूप है वह देखने आंखों से देखने जैसा है नहीं क्योंकि वह

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आकाश में देखना कोई जरूरी नहीं है भगवान शिव की उपलब्धि पर पत्थर से पत्थर में भगवान शिव आपको हर जगह

akash me dekhna koi zaroori nahi hai bhagwan shiv ki upalabdhi par patthar se patthar me bhagwan shiv aapko har jagah

आकाश में देखना कोई जरूरी नहीं है भगवान शिव की उपलब्धि पर पत्थर से पत्थर में भगवान शिव आपको

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रवि प्रकाश सिंह"रमण"

Industrialist/Businessman/Poet/Writer

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आपका प्रश्न है क्या कभी आकाश में भगवान शिव को किसी ने देखा है देखिए भगवान शिव का दर्शन इतना सहज नहीं है अगर भगवान शिव का दर्शन इतना सहज होता तो रावण हजार साल तपस्या न करता शिव के ऐसा नहीं है कि ईश्वर दर्शन नहीं देते हैं ईश्वर दर्शन देते हैं लेकिन इसके लिए व्यक्ति को मन वचन और कर्म से शुद्ध होना होगा अभी बहुत पुरानी बात नहीं है ए 19 वी सदी की बीसवीं सदी की बात है रामकृष्ण परमहंस साक्षात देवी को देखते थे उन्हें किसी भी स्त्री में देवी दिख जाते थे क्योंकि उन्होंने अपने अंतःकरण को इतना पवित्र कर लिया था उन्हें अपनी पत्नी में भगवा मां काली के दर्शन हो गया और उन्होंने उनको मां मांग लिया और आजीवन उनको माही मानते रहे तो यह मन की शुद्धता की बात है ईश्वर वही है हम पूजा-पाठ करते समय स्नान स्नान वगैरह करते हैं तो स्नान वगैरा तो प्रतीक है असली शुद्धता जो है वह मन की शुद्धता है ईश्वर वही है हां मन शुद्ध है इसलिए मन की शुद्धता महत्वपूर्ण है यदि आप अपने मन को अपने अंतःकरण को अपनी अंतरात्मा को शुद्ध विकार रहित करने में अगर सफल हो जाते हैं तो ईश्वर का दर्शन आप नित्य करेंगे ईश्वर हमेशा आपको दिखते रहे लेकिन मुश्किल यही है कि अंतरात्मा को विकार रहित करना आसान नहीं है कीचड़ में रहकर व्यक्ति कब तक और किस तरह स्वयं को शुद्ध कर सकता है उसके लिए कीचड़ एक कमल के समान बनना होगा जो कि आसान नहीं है उसके लिए बहुत जब तक ध्यान योग की जरूरत है धन्यवाद

aapka prashna hai kya kabhi akash me bhagwan shiv ko kisi ne dekha hai dekhiye bhagwan shiv ka darshan itna sehaz nahi hai agar bhagwan shiv ka darshan itna sehaz hota toh ravan hazaar saal tapasya na karta shiv ke aisa nahi hai ki ishwar darshan nahi dete hain ishwar darshan dete hain lekin iske liye vyakti ko man vachan aur karm se shudh hona hoga abhi bahut purani baat nahi hai a 19 v sadi ki biswin sadi ki baat hai ramakrishna paramhans sakshat devi ko dekhte the unhe kisi bhi stree me devi dikh jaate the kyonki unhone apne antahkaran ko itna pavitra kar liya tha unhe apni patni me bhagva maa kali ke darshan ho gaya aur unhone unko maa maang liya aur aajivan unko maahi maante rahe toh yah man ki shuddhta ki baat hai ishwar wahi hai hum puja path karte samay snan snan vagera karte hain toh snan vagera toh prateek hai asli shuddhta jo hai vaah man ki shuddhta hai ishwar wahi hai haan man shudh hai isliye man ki shuddhta mahatvapurna hai yadi aap apne man ko apne antahkaran ko apni antaraatma ko shudh vikar rahit karne me agar safal ho jaate hain toh ishwar ka darshan aap nitya karenge ishwar hamesha aapko dikhte rahe lekin mushkil yahi hai ki antaraatma ko vikar rahit karna aasaan nahi hai kichad me rahkar vyakti kab tak aur kis tarah swayam ko shudh kar sakta hai uske liye kichad ek kamal ke saman banna hoga jo ki aasaan nahi hai uske liye bahut jab tak dhyan yog ki zarurat hai dhanyavad

आपका प्रश्न है क्या कभी आकाश में भगवान शिव को किसी ने देखा है देखिए भगवान शिव का दर्शन इ

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Shri Nirmal Dev Ji

Shirmad Bhagwat Kathaparwekta

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जीएमएस भगवान शिव को आकाश में नहीं बल्कि मंदिर में स्थापित साका रूपीस होते हैं और निराकार ओं में भगवान शंकर के लोग मिल सकते हैं देखने को हर जगह मिल सकते हर कहीं मिल सकते हैं वह भी कठिन भक्ति में संघर्ष करने के बाद

GMS bhagwan shiv ko akash me nahi balki mandir me sthapit saka Rupees hote hain aur nirakaar on me bhagwan shankar ke log mil sakte hain dekhne ko har jagah mil sakte har kahin mil sakte hain vaah bhi kathin bhakti me sangharsh karne ke baad

जीएमएस भगवान शिव को आकाश में नहीं बल्कि मंदिर में स्थापित साका रूपीस होते हैं और निराकार ओ

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भगवान निराकार होते हैं उन्हें सपने में तो हम अनुभव कर सकते हैं देख सकते हैं लेकिन साकार रूप में वह मुझे नहीं दिखाई देंगे अगर दिखाई देंगे भी तो हम लोग जान नहीं पाएंगे इसलिए मेरा मानना तो यह है कि शिव शंकर भोलेनाथ जो है वह निराकार है इसका कोई आकार नहीं होता है उसकी शक्ति का कोई कॉल नहीं कोई मोल नहीं उसकी शक्ति अपार होती है जो मेरा काम होता है साकार की तो शक्ति को सब जान लेते किस के अंदर कितनी शक्ति है और जिसकी शक्ति ना जान पाए वह निराकार शिव शंकर भोलेनाथ निराकार है और वह अपारशक्ति वाले हमारे प्रभु शिव शंकर मेरा मानना तो यह है कि आकाश में उन्हें नहीं देखा गया होगा क्यों जो निराकार है उन्हें साकार रूप लेने की जरूरत नहीं पड़ती है

bhagwan nirakaar hote hain unhe sapne me toh hum anubhav kar sakte hain dekh sakte hain lekin saakar roop me vaah mujhe nahi dikhai denge agar dikhai denge bhi toh hum log jaan nahi payenge isliye mera manana toh yah hai ki shiv shankar bholenaath jo hai vaah nirakaar hai iska koi aakaar nahi hota hai uski shakti ka koi call nahi koi mole nahi uski shakti apaar hoti hai jo mera kaam hota hai saakar ki toh shakti ko sab jaan lete kis ke andar kitni shakti hai aur jiski shakti na jaan paye vaah nirakaar shiv shankar bholenaath nirakaar hai aur vaah aparshakti waale hamare prabhu shiv shankar mera manana toh yah hai ki akash me unhe nahi dekha gaya hoga kyon jo nirakaar hai unhe saakar roop lene ki zarurat nahi padti hai

भगवान निराकार होते हैं उन्हें सपने में तो हम अनुभव कर सकते हैं देख सकते हैं लेकिन साकार रू

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भगवानपुरा का शरबत रिश्वत दिए मुस्कान पर देखने की आवश्यकता नहीं है तो वह मनुष्य के दिल में होते हैं और मनुष्य का पाचन तंत्र जापान को स्वीकार करना चाहिए तो कस्तूरी कुंडल बसे मृग ढूंढे बन माहि ऐसे कटवाना दुनिया देखे - प्रकाश भगवान शिव जी भगवान हमारे हमारे हमें अपने अंतर्मन से जोड़ दिया राजा चंदन मानो पास था अभी करना चाहिए और अपने हृदय से स्वीकार करना चाहिए कि जो हमारे अंतर्मन में और हमारे ह्रदय में और हमारे लिए हम पर करम बाजवा ने और भी है उनके दर्शन और अपने क्षेत्र क्रमांक चल गया बाद में बात करते हैं फिर सोते वक्त और हमारे व्यवहार हमारे मन में हमारे नियंत्रण में स्वाभिमान को बात नहीं कोई ना कोई भी के अलावा हमारे मित्र कौन से भगवान को जोशी परिवार और भगवान को जो है देखने का प्रयास करना चाहिए यह कहते भी हैं कि कस्तूरी कुंडल बसे मृग ढूंढे बन माहि ऐसे कटवाना मत दुनिया देख कर आई थी

bhagwanpura ka sharbat rishwat diye muskaan par dekhne ki avashyakta nahi hai toh vaah manushya ke dil me hote hain aur manushya ka pachan tantra japan ko sweekar karna chahiye toh kasturi kundal base mrig dhundhe ban mahi aise katvana duniya dekhe prakash bhagwan shiv ji bhagwan hamare hamare hamein apne antarman se jod diya raja chandan maano paas tha abhi karna chahiye aur apne hriday se sweekar karna chahiye ki jo hamare antarman me aur hamare hriday me aur hamare liye hum par karam bajva ne aur bhi hai unke darshan aur apne kshetra kramank chal gaya baad me baat karte hain phir sote waqt aur hamare vyavhar hamare man me hamare niyantran me swabhiman ko baat nahi koi na koi bhi ke alava hamare mitra kaun se bhagwan ko joshi parivar aur bhagwan ko jo hai dekhne ka prayas karna chahiye yah kehte bhi hain ki kasturi kundal base mrig dhundhe ban mahi aise katvana mat duniya dekh kar I thi

भगवानपुरा का शरबत रिश्वत दिए मुस्कान पर देखने की आवश्यकता नहीं है तो वह मनुष्य के दिल में

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YUAPrepplus

Education Portal

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देखिए अभी तो पैसा नहीं बाकी भगवान शंकर किसी ने आकाश पर देखा हो लेकिन हां ग्राम के दशक में चाहते तो आपके अंदर है वह आप एक बार कुत्ता के देखे तन से तन मन धन से अपने याद कीजिए वह आपके अंदर नजर आएंगे थैंक यू

dekhiye abhi toh paisa nahi baki bhagwan shankar kisi ne akash par dekha ho lekin haan gram ke dashak me chahte toh aapke andar hai vaah aap ek baar kutta ke dekhe tan se tan man dhan se apne yaad kijiye vaah aapke andar nazar aayenge thank you

देखिए अभी तो पैसा नहीं बाकी भगवान शंकर किसी ने आकाश पर देखा हो लेकिन हां ग्राम के दशक में

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Anand Pandey

Real Eastate Broker

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हमारे पुराण वेद और भागवत गीता वगैरह से पढ़ने के बाद तुझे समझ में आता है कि भगवान शिव को आकाश मैंने साक्षात लोग ऋषि मुनि लोग देखेंगे अतीत में लेकिन वर्तमान में 100 देशों साल का कोई इतिहास नहीं मिलता है

hamare puran ved aur bhagwat geeta vagera se padhne ke baad tujhe samajh me aata hai ki bhagwan shiv ko akash maine sakshat log rishi muni log dekhenge ateet me lekin vartaman me 100 deshon saal ka koi itihas nahi milta hai

हमारे पुराण वेद और भागवत गीता वगैरह से पढ़ने के बाद तुझे समझ में आता है कि भगवान शिव को आक

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Kanta Jhanwar

Self Employed

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नमस्कार आपने लिखा कभी-कभी क्या कभी आकाश में भगवान को शिव को किसी ने देखा है देखिए यह भाव प्रधान होता है जिसके दिल में आस्था होती है और भाव होता है तो ऐसा है बहुत कई बार एक बार हमने एक बच्चे के मुंह से यह बात सुनी थी जब हम लोग छत पर सोते थे तब एक बच्चे ने यह बात कही कि आकाश पर इस तरह का जैसे कोई सवारी पर बैठा हुआ है और बूढ़े हवा में हाथ में ऐसा कुछ है उसके हाथ में तो उसी हिसाब से अनुमान लगा सकते कि उसने शिवजी को देखा होगा और भी लोगों के मुंह से सुना है तो यह सब देखी आस्था और भावनाओं का और विश्वास का विश्वास की बात है ईश्वर है यह सत्य है ईश्वर सबके सामने तो आती नहीं है ना ईश्वर कभी किसी के सामने साक्षात तो आती नहीं है प्रभाव प्रधान पक्का बंद है आपने तो आपको भी ईश्वर देख सकते हैं

namaskar aapne likha kabhi kabhi kya kabhi akash me bhagwan ko shiv ko kisi ne dekha hai dekhiye yah bhav pradhan hota hai jiske dil me astha hoti hai aur bhav hota hai toh aisa hai bahut kai baar ek baar humne ek bacche ke mooh se yah baat suni thi jab hum log chhat par sote the tab ek bacche ne yah baat kahi ki akash par is tarah ka jaise koi sawari par baitha hua hai aur budhe hawa me hath me aisa kuch hai uske hath me toh usi hisab se anumaan laga sakte ki usne shivaji ko dekha hoga aur bhi logo ke mooh se suna hai toh yah sab dekhi astha aur bhavnao ka aur vishwas ka vishwas ki baat hai ishwar hai yah satya hai ishwar sabke saamne toh aati nahi hai na ishwar kabhi kisi ke saamne sakshat toh aati nahi hai prabhav pradhan pakka band hai aapne toh aapko bhi ishwar dekh sakte hain

नमस्कार आपने लिखा कभी-कभी क्या कभी आकाश में भगवान को शिव को किसी ने देखा है देखिए यह भाव प

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यह सवाल तो बनाइए जीव है किसी ने देखा हुआ जिसने देखा हो तो उसी को पता होगा वह थोड़ी ना किसी को बताने जाकर मैंने देखा और देखा हो किसको पता है क्या गारंटी है कि उसने देखा कि भगवान है निराकार है वह समय-समय पर सगुण रूप धारण करके धरती पर आते रहते हैं और उसमें भी उनको हर कोई पहचान ले संभव नहीं है जिसे रामावतार हुआ कृष्णा अवतार हुआ मुन्नी गए थे उनको पता था कि कृष्ण भगवान है बाकी सारे संसार वालों को पता ही नहीं था कि भगवान है

yah sawaal toh banaiye jeev hai kisi ne dekha hua jisne dekha ho toh usi ko pata hoga vaah thodi na kisi ko batane jaakar maine dekha aur dekha ho kisko pata hai kya guarantee hai ki usne dekha ki bhagwan hai nirakaar hai vaah samay samay par shagun roop dharan karke dharti par aate rehte hain aur usme bhi unko har koi pehchaan le sambhav nahi hai jise ramavatar hua krishna avatar hua munni gaye the unko pata tha ki krishna bhagwan hai baki saare sansar walon ko pata hi nahi tha ki bhagwan hai

यह सवाल तो बनाइए जीव है किसी ने देखा हुआ जिसने देखा हो तो उसी को पता होगा वह थोड़ी ना किसी

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आपने पूछा क्या कभी आकाश में भगवान शिव को किसने देखा है देखिए आकाश में ही भगवान और शिव में ही भगवान हैं उन्हीं के वजह से इस प्रकृति चलती है तो कहने का मकसद ही नहीं बनता क्या आकाश में भगवान शिव को किसने देखा है वही अकाश है वही शिवा

aapne poocha kya kabhi akash me bhagwan shiv ko kisne dekha hai dekhiye akash me hi bhagwan aur shiv me hi bhagwan hain unhi ke wajah se is prakriti chalti hai toh kehne ka maksad hi nahi banta kya akash me bhagwan shiv ko kisne dekha hai wahi akash hai wahi shiva

आपने पूछा क्या कभी आकाश में भगवान शिव को किसने देखा है देखिए आकाश में ही भगवान और शिव में

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