कभी कभी मैं यह सोचता हूँ की अगर इस ब्रम्हांड में जीवन नहीं होता तो क्या यह दुनिया होती जिसमें हम रह रहे है? आपका क्या विचार है?...


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Bk Arun Kaushik

Youth Counselor Motivational Speaker

1:16
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

प्रशन है कभी-कभी मैं यह सोचता हूं कि अगर इस ब्रह्मांड में जीवन नहीं होता तो क्या यह दुनिया होती जिसमें हम रह रहे हैं बहुत ही अजीब सा प्रशन यह होता तो कैसा होता यह ना होता तो क्या होता मैं तो यह सोचता हूं कि तू है वही सब कुछ जो मेरी पहुंचकर बाहर है समझ से बाहर है उसके बारे में चिंतन करके अपने जीवन का समय क्यों वेट करूं या तो होना ही था क्योंकि मानव नहीं संसार चलाना है और तो कहीं कुछ है नहीं तो फिर बरमान की वैल्यू क्या होती अलग ही ना होता मानव है तभी तो ब्रह्मांड है इसका नाम पर मान रखा गया है नीतू मानव नहीं होता तो उसको ब्रहमांड कौन कहता इसलिए ऐसी हाथों के बारे में चिंतन करके अपना समय केस मत करो बल्कि इस ब्रह्मांड में अपने जीवन को बढ़िया जीने के प्रयास में लग जाओ धन्यवाद

prashn hai kabhi kabhi main yah sochta hoon ki agar is brahmaand me jeevan nahi hota toh kya yah duniya hoti jisme hum reh rahe hain bahut hi ajib sa prashn yah hota toh kaisa hota yah na hota toh kya hota main toh yah sochta hoon ki tu hai wahi sab kuch jo meri pahuchkar bahar hai samajh se bahar hai uske bare me chintan karke apne jeevan ka samay kyon wait karu ya toh hona hi tha kyonki manav nahi sansar chalana hai aur toh kahin kuch hai nahi toh phir barman ki value kya hoti alag hi na hota manav hai tabhi toh brahmaand hai iska naam par maan rakha gaya hai neetu manav nahi hota toh usko brahamand kaun kahata isliye aisi hathon ke bare me chintan karke apna samay case mat karo balki is brahmaand me apne jeevan ko badhiya jeene ke prayas me lag jao dhanyavad

प्रशन है कभी-कभी मैं यह सोचता हूं कि अगर इस ब्रह्मांड में जीवन नहीं होता तो क्या यह दुनिया

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

2:14
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपने जो प्रश्न किया है उसका उत्तर भी यही दुनिया किशन का कभी-कभी मैं सोचता हूं क्या गरीब दुनिया या गरीब सामान्य जीवन नहीं होता तो क्या या दुनिया होती अरे भाई जब ब्रह्मांड के संचालन करने वाले प्रभु ने कोई साक्षी को जन्मदिन नहीं दिया होता कोई शक्ति की बनावट तो आप बताइए क्यों कैसे होता क्यों नहीं होता तो जीने की रचना कैसे होती है दुनिया की रचना नहीं होती तो शमशान में सुख-दुख का कुछ नहीं होता पृथ्वी पर कुछ नहीं होता लेकिन इस संसार की को भगवान ने रचा है भगवान ने अपनी क्रिएटिविटी से मानव जाति को जन्म दिया इस जयपुर में शान यह संसार की स्थापना हुई और उस चमचा की स्थापना में जीव विज्ञान से मानव विज्ञान से हमें बहुत कुछ चेतन सीखने को मिला रूम में जाना राजेश m4q जकरिया चेंज कभी जीवन में बताया कि जीवन में कुछ करना कुछ करने के लिए सुनसान आदमी ने जीवन में सब कुछ सीख लेना तुम साथियों के प्रयोग से जीवन को जिंदगी में बना

aapne jo prashna kiya hai uska uttar bhi yahi duniya kishan ka kabhi kabhi main sochta hoon kya garib duniya ya garib samanya jeevan nahi hota toh kya ya duniya hoti are bhai jab brahmaand ke sanchalan karne waale prabhu ne koi sakshi ko janamdin nahi diya hota koi shakti ki banawat toh aap bataiye kyon kaise hota kyon nahi hota toh jeene ki rachna kaise hoti hai duniya ki rachna nahi hoti toh shamshan me sukh dukh ka kuch nahi hota prithvi par kuch nahi hota lekin is sansar ki ko bhagwan ne racha hai bhagwan ne apni creativity se manav jati ko janam diya is jaipur me shan yah sansar ki sthapna hui aur us chamacha ki sthapna me jeev vigyan se manav vigyan se hamein bahut kuch chetan sikhne ko mila room me jana rajesh m4q jakriya change kabhi jeevan me bataya ki jeevan me kuch karna kuch karne ke liye sunsaan aadmi ne jeevan me sab kuch seekh lena tum sathiyo ke prayog se jeevan ko zindagi me bana

आपने जो प्रश्न किया है उसका उत्तर भी यही दुनिया किशन का कभी-कभी मैं सोचता हूं क्या गरीब दु

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bhaand's Theatre and Acting Classes

Acting And drama Coach Casting director Drama Director

1:22
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आप ने सवाल पूछा है कभी-कभी मैं यह सोचता हूं कि अगर इस ब्रह्मांड में जीवन नहीं होता तो क्या यह दुनिया होती जिसमें हम रह रहे हैं आपका क्या विचार है जब जीवन ही नहीं होता तो आपको लगता है कि आप इस सोच विचार करने के लिए यहां होते इस पृथ्वी पर अगर जीव नहीं होता तो यह पृथ्वी उसी उन्ही ग्रहों की तरह होती है जैसे मंगल जैसे चंद्रमा आपने देखा होगा सेटेलाइट पिक्चरों में कि वहां जीव नहीं है तो किस प्रकार से वहां का वातावरण है वहां कुछ नहीं है शांति है यह भी होता चंद्र हो पर जीव नहीं है आप अभी गूगल कीजिए और उनके पिक्चर्स देखिए की सेटेलाइट ना बहुत सारी चीजें डाल रखी है तो उनका अध्ययन करेंगे तो आपको पता चल जाएगा कि दुनिया किस प्रकार की होती क्या होता है धन्यवाद

aap ne sawaal poocha hai kabhi kabhi main yah sochta hoon ki agar is brahmaand me jeevan nahi hota toh kya yah duniya hoti jisme hum reh rahe hain aapka kya vichar hai jab jeevan hi nahi hota toh aapko lagta hai ki aap is soch vichar karne ke liye yahan hote is prithvi par agar jeev nahi hota toh yah prithvi usi unhi grahon ki tarah hoti hai jaise mangal jaise chandrama aapne dekha hoga satellite pikcharon me ki wahan jeev nahi hai toh kis prakar se wahan ka vatavaran hai wahan kuch nahi hai shanti hai yah bhi hota chandra ho par jeev nahi hai aap abhi google kijiye aur unke pictures dekhiye ki satellite na bahut saari cheezen daal rakhi hai toh unka adhyayan karenge toh aapko pata chal jaega ki duniya kis prakar ki hoti kya hota hai dhanyavad

आप ने सवाल पूछा है कभी-कभी मैं यह सोचता हूं कि अगर इस ब्रह्मांड में जीवन नहीं होता तो क्या

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Siyaram Dubey

YouTuber/Spiritual Person/Thinker/Social-media Activist

2:03
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Dr. Suman Aggarwal

Personal Development Coach

0:50
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वीडियो आप का सवाल पढ़ कर मुझे ऐसा लगता है कि आपकी उम्र काफी कम होगी चलो जो भी है दुनिया होती नहीं होती उस पर लोग होते नहीं होते यह बात हम बाद में सोचे कैसा हो अगर आप पहले यह सोचा कि अभी आप जिस दुनिया में रह रहे हो आप ऐसा क्या काम करो कि यह दुनिया कुछ अच्छी हो जाए अभी जैसी है उससे आप इसे थोड़ी और अच्छी बना सकूं तो मेरे ख्याल से आपकी सोच को एक नया डायरेक्शन मिलेगा और आप अपने जीवन में कुछ अच्छा कर पाओगे अभी जो जीवन है उसको बहुत अच्छे से जीलो लोगों के मन में आपके लिए जगह हो कोई आप ऐसा काम करो जिससे बहुत सारे लोगों की मदद हो तो आप इसे दुनिया को पहले बेहतर बना लो फिर उसके बाद हम सोचेंगे कि अगर दुनिया होती है ना होती तो क्या होता

video aap ka sawaal padh kar mujhe aisa lagta hai ki aapki umr kaafi kam hogi chalo jo bhi hai duniya hoti nahi hoti us par log hote nahi hote yah baat hum baad mein soche kaisa ho agar aap pehle yah socha ki abhi aap jis duniya mein reh rahe ho aap aisa kya kaam karo ki yah duniya kuch achi ho jaaye abhi jaisi hai usse aap ise thodi aur achi bana saku toh mere khayal se aapki soch ko ek naya direction milega aur aap apne jeevan mein kuch accha kar paoge abhi jo jeevan hai usko bahut acche se jilo logo ke man mein aapke liye jagah ho koi aap aisa kaam karo jisse bahut saare logo ki madad ho toh aap ise duniya ko pehle behtar bana lo phir uske baad hum sochenge ki agar duniya hoti hai na hoti toh kya hota

वीडियो आप का सवाल पढ़ कर मुझे ऐसा लगता है कि आपकी उम्र काफी कम होगी चलो जो भी है दुनिया हो

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अशोक गुप्ता

Founder of Vision Commercial Services.

3:54
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ब्रह्म ही जीवन है ब्रह्म उस चैतन्य को कहने के लिए इशारा करने के लिए एक महान है और ब्रह्म का अर्थ होता है कि जो हमेशा फैलता ही जाए आप कहेंगे यह कैसे होगा हम ब्रह्म को जितना देख पाते हैं बहुत कुछ देखने को श्रेष्ठ रहता है बताओ अभी तो इतना ही देखा इतना बाकी है जो बाकी है उसमें हम जितना देख पाते हैं तो लगता है तो और ज्यादा बाकी है इसे ब्रह्म का फैलना कहा जाता है ब्रह्म ही जीवन है उसी चैतन्य से उर्जा का जन्म हुआ सितारों का सूरज का तमाम जितने भी आप इस पूरे आकाश में ग्रह नक्षत्र जो कुछ भी देखते हैं वह सब उसी ब्रह्म की उत्पत्ति है इसलिए ब्रह्मा को हमने सिस्टर का निर्माता कहा है ब्रह्मांड में जीवन में होता यह तो एक पर्यायवाची बता करें कि जीवन में जीवन नहीं होता जीवन ही प्रभु है जीवन ही परमात्मा है जीवन ही सब कुछ है यहां और जीवन केवल तब नहीं होता जब आप बोलते हो या सुनते हो जब कोई मूर्ख पत्थर भी है वह भी जीवन है सोया हुआ जीवन है वृक्ष यह कुछ जागे हुए जीवन है पशु थोड़ा और जगह हुआ जीवन है और मनुष्य सबसे विकसित दिखने वाला जीवन है उसके बाद देवता अदृश्य जरूर है और मनुष्य से भी विकसित हैं ऋषि मुनि जीवन सबसे व्यापक शब्द है आजीवन हैं आप परमात्मा से हैं आप कुछ भी कह ले यह सब उसी के ओर इशारा है आशा है मित्र आपको कुछ इशारा मिला होगा इतना चिंता मत करिए आपके भी तो जो जीवन है उसकी चिंता करिए यह मौका पता नहीं कब चेंज है हाथों से इसलिए जीवन को जो मिला है जीना शुरू करें यह काल्पनिक लंबे-लंबे प्रश्न पूछने से आप समय गवा देंगे सब इसलिए जो कुछ आपके चालू है अपने आप के भीतर भी है जो ब्रह्मांड में वही पिंड में है अपने भीतर जो मूवी बनाकर भीतर धड़क रहा है उसकी आवाज सुनी ए कह रहा है कि मैं कभी भी बंद हो सकती हूं कभी भी हो ऐसा नहीं होगा क्या आने वाली स्वास कभी जान ना जाए रुक जाए वहीं पर और कभी यह भी हो कि कोई श्वास आप भी ना पाए तब जीवन ठहर जाता है उस जगह लेकिन जीवन नष्ट कभी नहीं होता है ना कभी हो सकता है यह जीवन विज्ञान भी कह रहा है उर्जा भी अविनाशी है पदार्थ अविनाशी चेतन अविनाशी है ही इसलिए आपको बहुत-बहुत स्नेह सहज होकर जीवन पूर्वी लीजिए कबीर ने सहज समाधि भली कहा है ओशो को भी थोड़ा पढ़िए आपको आपके प्रश्न का बेहतर मिलेगा बहुत प्यार

Brahma hi jeevan hai Brahma us chaitanya ko kehne ke liye ishara karne ke liye ek mahaan hai aur Brahma ka arth hota hai ki jo hamesha failata hi jaaye aap kahenge yah kaise hoga hum Brahma ko jitna dekh paate hain bahut kuch dekhne ko shreshtha rehta hai batao abhi toh itna hi dekha itna baki hai jo baki hai usme hum jitna dekh paate hain toh lagta hai toh aur zyada baki hai ise Brahma ka failna kaha jata hai Brahma hi jeevan hai usi chaitanya se urja ka janam hua sitaron ka suraj ka tamaam jitne bhi aap is poore akash me grah nakshtra jo kuch bhi dekhte hain vaah sab usi Brahma ki utpatti hai isliye brahma ko humne sister ka nirmaata kaha hai brahmaand me jeevan me hota yah toh ek paryayvachi bata kare ki jeevan me jeevan nahi hota jeevan hi prabhu hai jeevan hi paramatma hai jeevan hi sab kuch hai yahan aur jeevan keval tab nahi hota jab aap bolte ho ya sunte ho jab koi murkh patthar bhi hai vaah bhi jeevan hai soya hua jeevan hai vriksh yah kuch jago hue jeevan hai pashu thoda aur jagah hua jeevan hai aur manushya sabse viksit dikhne vala jeevan hai uske baad devta adrishya zaroor hai aur manushya se bhi viksit hain rishi muni jeevan sabse vyapak shabd hai aajivan hain aap paramatma se hain aap kuch bhi keh le yah sab usi ke aur ishara hai asha hai mitra aapko kuch ishara mila hoga itna chinta mat kariye aapke bhi toh jo jeevan hai uski chinta kariye yah mauka pata nahi kab change hai hathon se isliye jeevan ko jo mila hai jeena shuru kare yah kalpnik lambe lambe prashna poochne se aap samay gawa denge sab isliye jo kuch aapke chaalu hai apne aap ke bheetar bhi hai jo brahmaand me wahi pind me hai apne bheetar jo movie banakar bheetar dhadak raha hai uski awaaz suni a keh raha hai ki main kabhi bhi band ho sakti hoon kabhi bhi ho aisa nahi hoga kya aane wali swas kabhi jaan na jaaye ruk jaaye wahi par aur kabhi yah bhi ho ki koi swas aap bhi na paye tab jeevan thahar jata hai us jagah lekin jeevan nasht kabhi nahi hota hai na kabhi ho sakta hai yah jeevan vigyan bhi keh raha hai urja bhi avinashi hai padarth avinashi chetan avinashi hai hi isliye aapko bahut bahut sneh sehaz hokar jeevan purvi lijiye kabir ne sehaz samadhi bhali kaha hai osho ko bhi thoda padhiye aapko aapke prashna ka behtar milega bahut pyar

ब्रह्म ही जीवन है ब्रह्म उस चैतन्य को कहने के लिए इशारा करने के लिए एक महान है और ब्रह्

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Ruchi Garg

Counsellor and Psychologist(Gold MEDALIST)

0:55
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इसमें मैं यह कहना चाहूंगी कि जीवन से पहले ब्रह्मांड है ब्रह्मांड है तो ही जीवन है ब्रह्मा ने नहीं होता तो जीवन कैसे होता अब इसका उत्तर हम साइंस की नजर से देखे तो साइंस ही कहती है कि इस संसार में ब्रह्मांड में जो ग्रेविटी है वह एक चमत्कार है बिकॉज अगर ग्रेविटी बहुत ज्यादा हो जाती तू ही तो जीवन ही बना सकता था और ग्रेविटी अगर थोड़ी सी भी बहुत कम होती तो जो है यह जो चीज है जो धरती से लगी हुई है वह भी नहीं चिपक पाती और जो तू ही जीवन पनप नहीं सकता था तो ग्रेविटी का ब्रह्मांड का बिल्कुल एग्जैक्ट होना जो जीवन के लिए सही है वह खुद ही चमत्कार है यह कुछ साइंस कहती है

isme main yah kehna chahungi ki jeevan se pehle brahmaand hai brahmaand hai toh hi jeevan hai brahma ne nahi hota toh jeevan kaise hota ab iska uttar hum science ki nazar se dekhe toh science hi kehti hai ki is sansar mein brahmaand mein jo gravity hai vaah ek chamatkar hai because agar gravity bahut zyada ho jaati tu hi toh jeevan hi bana sakta tha aur gravity agar thodi si bhi bahut kam hoti toh jo hai yah jo cheez hai jo dharti se lagi hui hai vaah bhi nahi chipak pati aur jo tu hi jeevan panap nahi sakta tha toh gravity ka brahmaand ka bilkul exact hona jo jeevan ke liye sahi hai vaah khud hi chamatkar hai yah kuch science kehti hai

इसमें मैं यह कहना चाहूंगी कि जीवन से पहले ब्रह्मांड है ब्रह्मांड है तो ही जीवन है ब्रह्मा

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Dr. KRISHNA CHANDRA

Rehabilitation Psychologist

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Umesh Upaadyay

Life Coach | Motivational Speaker

1:59
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

200 आप यह जानना चाहते हैं कि भाई यह प्रमाणित होता ब्रह्मांड माने क्या भाई गैलैक्सीस हैं स्टार्स है कौन स्टेशन से नरेला से यह सारी कुछ चीजें तो है लेकिन जीवन नहीं आ देखे देखा जाए तो जीवन किस में होता है किस में नहीं होता हर एक चीज एनर्जी फॉर में आपको जो भी कुछ दिखता है एनर्जी फॉर मेन कुली में किसी की एनर्जी फार्मेसी है कोई ऐसी है कोई इस डेट में कोई उस डेट में अब अगर आप पहाड़ को देखते हैं तो बोलेंगे तो एनर्जी लाइट को भी एनर्जी फॉर्म है लेकिन डॉर्मेंट है रहा सवाल जीवन नहीं होता तो जीवन किस में है हर एक चीज में जीवने पेड़ पौधे में भी तो जीवन है ना वहां पर कुछ प्रक्रिया चल रही है ना जिससे वह ग्रो करता है बूढ़ा होता है और उसके बाद सूख जाता है मर जाता है गिर जाता है इसी तरह पशु-पक्षी जानवर इंसान सब में तो जीवन है ना तो अगर आप यह बोलते हैं कि अगर जीवन नहीं होता तो क्या होता देखिए अगर जीवन नहीं होता इन सारी चीजों में मतलब जीवन ही नहीं होता तो क्या होता तो देखिए जितनी भी चीजें हैं ना जैसे पहाड़ हो गए तो पत्थर हो गए यह सारी चीजें तो होती लेकिन बाकी सारी चीज नहीं होती और बाकी सारी चीजों में सर्वश्रेष्ठ है इंसान जो कि सोचने की महसूस करने की काम करने की काबिलियत रखता है उसी ने आज एक प्लेनेट की बात करते हैं औरत को ऐसा बना दिया जैसा आप देखते हैं आप थोड़ा पोल्यूटेड कर दिया है थोड़े से टेक्नोलॉजी के लिए एडवांस हो गए हैं बहुत सारी चीज़ें हम कर रहे हैं हम उन पर पहुंच गया कहां जाने की तैयारी हो रही है बहुत सारे काम में किया तो फिर यह इंसानी जीवन नहीं होता तो यह सारे काम नहीं होते आपको क्या दिखता कि अगर जीवन कहीं भी नहीं है कुछ भी जीवन नहीं है तो कुछ भी नहीं दिखता खाली आपको वह सारी चीजें जैसे जैसे पहाड़ हो गया पत्थर हो गया यह सारी चीजें की तिथि एंड नक्षत्र लाइफ ऐसी होती है प्लेनेट ऐसे ही दिखता हमारा और इससे ज्यादा कुछ और नहीं होता

200 aap yah janana chahte hai ki bhai yah pramanit hota brahmaand maane kya bhai gailaiksis hai stars hai kaun station se narela se yah saree kuch cheezen toh hai lekin jeevan nahi aa dekhe dekha jaaye toh jeevan kis mein hota hai kis mein nahi hota har ek cheez energy for mein aapko jo bhi kuch dikhta hai energy for main kuli mein kisi ki energy pharmacy hai koi aisi hai koi is date mein koi us date mein ab agar aap pahad ko dekhte hai toh bolenge toh energy light ko bhi energy form hai lekin dormant hai raha sawaal jeevan nahi hota toh jeevan kis mein hai har ek cheez mein jivane ped paudhe mein bhi toh jeevan hai na wahan par kuch prakriya chal rahi hai na jisse vaah grow karta hai budha hota hai aur uske baad sukh jata hai mar jata hai gir jata hai isi tarah pashu pakshi janwar insaan sab mein toh jeevan hai na toh agar aap yah bolte hai ki agar jeevan nahi hota toh kya hota dekhiye agar jeevan nahi hota in saree chijon mein matlab jeevan hi nahi hota toh kya hota toh dekhiye jitni bhi cheezen hai na jaise pahad ho gaye toh patthar ho gaye yah saree cheezen toh hoti lekin baki saree cheez nahi hoti aur baki saree chijon mein sarvashreshtha hai insaan jo ki sochne ki mehsus karne ki kaam karne ki kabiliyat rakhta hai usi ne aaj ek planet ki baat karte hai aurat ko aisa bana diya jaisa aap dekhte hai aap thoda polyuted kar diya hai thode se technology ke liye advance ho gaye hai bahut saree chize hum kar rahe hai hum un par pohch gaya kahaan jaane ki taiyari ho rahi hai bahut saare kaam mein kiya toh phir yah insani jeevan nahi hota toh yah saare kaam nahi hote aapko kya dikhta ki agar jeevan kahin bhi nahi hai kuch bhi jeevan nahi hai toh kuch bhi nahi dikhta khaali aapko vaah saree cheezen jaise jaise pahad ho gaya patthar ho gaya yah saree cheezen ki tithi and nakshtra life aisi hoti hai planet aise hi dikhta hamara aur isse zyada kuch aur nahi hota

200 आप यह जानना चाहते हैं कि भाई यह प्रमाणित होता ब्रह्मांड माने क्या भाई गैलैक्सीस हैं स्

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Dr. Priya Shatanjib Jha

Psychologist|Counselor|Dentist

2:00
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्ते दोस्तों मेरी आणि डॉक्टर प्रिया झा के तरफ से आप सबको दिन की बहुत सारी शुभकामनाएं दी कि अगर ब्राह्मण में जीवन नहीं होता और आपको अगर यह महसूस हो रहा है कि हम लोग नहीं होते दुनिया जैसा है वैसा नहीं रहता तो हमारा क्या होता है यह जो प्रश्न है अरुण डोगरा अपने सीरियसली पूछा है कि मजाक में पूछा है वैसे मुझे तो इसमें मजाक का इंग्लिश रहा है लेकिन मैं आपसे एक मॉडल इट्रावे मैं आपको इसका रिप्लाई देना चाहूंगी तो देखिए ह्यूमन बिंग क्रॉस्बी नो हाउ टो सरवाइव इन एनी कंडीशन तो अगर आपका अगर अभी जैसा है एनवायरमेंट अगर ऐसा अगर समय नहीं होता और अगर कुछ और समय होती और ज्यादा गड़बड़ होता तो आप इतना विश्वास रखें कि इसमें भी आप कुछ ना कुछ इसका हल निकल जाता और हम अपना रास्ता निकाल लेते हैं हम लोग तो हमारा हम यू मीन मीनिंग इंसानों को बनाएंगे ऐसा गया है हम ऐसे बनी है कि हम कोई भी चीज में अपना रास्ता निकाल लेते हैं तो इसमें आपको बिल्कुल भी चिंतित नहीं होना चाहिए और आपको घबराना नहीं चाहिए कि हमारा क्या होता है तो यह रियल स्टेट एंगल हो गया दूसरा मैं आपको यह बताना चाहूंगी कि जो चीज जो चीज नहीं है उस चीज के बारे में सोचना और उसके बारे में टेंशन लेना यह सब बिल्कुल अच्छी बात नहीं है तो आप बिल्कुल भी चिंतित मत रहिए की ब्लूटूथ लूट लाए कि अगर वैसा होता तो क्या होता और उसमें आप ज्यादा टेंशन ले रहे हो अभी वैसा चीज नहीं है अभी इस दुनिया में जो भी चीजें हैं जो भी हम आधुनिक चीजें हो गई है और लोग जितने अच्छे हैं आजू-बाजू हम अपने काम में कितना अच्छा कर सकते हैं और क्या आपने कैपेबिलिटीज हैं आपके श्रमिक में क्या कि बिलिटी हैं यह सब अच्छी चीज क्या खुश रही है अभी ना अभी पूछ रही है आगे जो होना है वह देखा जाएगा और हम सब चीज का हमारे पास उपाय है हम कर लेंगे बिहार 10 सुपीरियर ब्रेन ओके थैंक यू

namaste doston meri aani doctor priya jha ke taraf se aap sabko din ki bahut saree subhkamnaayain di ki agar brahman mein jeevan nahi hota aur aapko agar yah mehsus ho raha hai ki hum log nahi hote duniya jaisa hai waisa nahi rehta toh hamara kya hota hai yah jo prashna hai arun dogra apne seriously poocha hai ki mazak mein poocha hai waise mujhe toh isme mazak ka english raha hai lekin main aapse ek model itrawe main aapko iska reply dena chahungi toh dekhiye human binge crosby no how toe survive in any condition toh agar aapka agar abhi jaisa hai environment agar aisa agar samay nahi hota aur agar kuch aur samay hoti aur zyada gadbad hota toh aap itna vishwas rakhen ki isme bhi aap kuch na kuch iska hal nikal jata aur hum apna rasta nikaal lete hain hum log toh hamara hum you meen meaning insano ko banayenge aisa gaya hai hum aise bani hai ki hum koi bhi cheez mein apna rasta nikaal lete hain toh isme aapko bilkul bhi chintit nahi hona chahiye aur aapko ghabrana nahi chahiye ki hamara kya hota hai toh yah real state Angle ho gaya doosra main aapko yah bataana chahungi ki jo cheez jo cheez nahi hai us cheez ke bare mein sochna aur uske bare mein tension lena yah sab bilkul achi baat nahi hai toh aap bilkul bhi chintit mat rahiye ki bluetooth loot laye ki agar waisa hota toh kya hota aur usme aap zyada tension le rahe ho abhi waisa cheez nahi hai abhi is duniya mein jo bhi cheezen hain jo bhi hum aadhunik cheezen ho gayi hai aur log jitne acche hain aju baju hum apne kaam mein kitna accha kar sakte hain aur kya aapne kaipebilitij hain aapke shramik mein kya ki biliti hain yah sab achi cheez kya khush rahi hai abhi na abhi puch rahi hai aage jo hona hai vaah dekha jaega aur hum sab cheez ka hamare paas upay hai hum kar lenge bihar 10 Superior brain ok thank you

नमस्ते दोस्तों मेरी आणि डॉक्टर प्रिया झा के तरफ से आप सबको दिन की बहुत सारी शुभकामनाएं दी

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Suraj Kumar Gupta

Educator, Speaker, Spiritual

1:57
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लेकिन इस सवाल का जवाब जो है वह को उदाहरण के तौर पर देना चाहता हूं आपने कहा कि ब्रह्मांड में जीवन नहीं होता तो तो हम लोग अगर आप साइंस पढ़ते हो तो आपने एक बहुत ही कानून से नाम सुना होगा इन्हें कहते हैं वायरस पीके वह लिविंग और नॉन लिविंग मतलब सजीव और निर्जीव चीजों के बीच में सजीव और निर्जीव मतलब लिविंग नॉन लिविंग ऑर्गेनाइज्म्स के बीच में डीलिंग का काम करते हैं ठीक है जब तक अनफेवरेबल कंडीशन से वह नॉन लिविंग रहते हैं और जैसे ही कंडीशन फेवरेबल हो जाती है वह लविंग हो जाते हैं ठीक है तो जीवन नहीं होना मतलब अनफेवरेबल कंडीशन और जैसे ही चीजें फेवरेबल हुई तो क्या हो गया लेकिन बन गए वह तो वैसे ही ब्रह्मांड में आप जीवन का कहीं भी उदाहरण ले ले जा कर प्रमाण में जीवन अगर कभी नहीं था तो यह लगा लीजिए आपकी वहां पर जो लिविंग कंडीशंस थी वह उतनी फेवरेबल नहीं थी लेकिन जीवन आ गया तो मतलब कंडीशन फेवरेबल हुई इस ब्रह्मांड एक चीज है जो हमेशा कांस्टेंट रहती है वह चेंज ठीक है बदलाव तो अब जैसे आपने देखा है स्पैक्यूलेशंस लगाया जा रहा है कि मार्च में आने वाले समय पर इलाज से एक डेढ़ लाख साल बाद शायद जल का स्तर पृथ्वी के बराबर हो जाएगा तो पॉसिबल है कि वहां पर भी जीवन आ जाए ठीक है तो जीवन का ना होना इस बात का सूचक नहीं है कि जीवन हो ही नहीं सकता तो अगर ब्रह्मांड में जीवन नहीं होना होता तो जो जैसे दुनिया जिसमें हम रह रहे हैं जैसा आपने पूछा है तो हां यह वैसे हो सकती है समय जरूर लगता लेकिन हां यह हो सकती थी ठीक है क्योंकि एक समय अगर आप देखो जो हमारी थ्योरी जो भी आज तक हम लोग मान गए तो उनके अकॉर्डिंग एक समय जीवन नई ताकत धीरे धीरे जीवन पाना तो पॉसिबल ईटिंग से कभी नकारा नहीं जा सकता जीवन अपने जो मार्ग है वह ढूंढ ही लेता है धन्यवाद

lekin is sawaal ka jawab jo hai vaah ko udaharan ke taur par dena chahta hoon aapne kaha ki brahmaand mein jeevan nahi hota toh toh hum log agar aap science padhte ho toh aapne ek bahut hi kanoon se naam suna hoga inhen kehte hain virus pk vaah living aur non living matlab sajeev aur nirjeev chijon ke beech mein sajeev aur nirjeev matlab living non living argenaijms ke beech mein dealing ka kaam karte hain theek hai jab tak unfavourable condition se vaah non living rehte hain aur jaise hi condition favorable ho jaati hai vaah loving ho jaate hain theek hai toh jeevan nahi hona matlab unfavourable condition aur jaise hi cheezen favorable hui toh kya ho gaya lekin ban gaye vaah toh waise hi brahmaand mein aap jeevan ka kahin bhi udaharan le le ja kar pramaan mein jeevan agar kabhi nahi tha toh yah laga lijiye aapki wahan par jo living conditions thi vaah utani favorable nahi thi lekin jeevan aa gaya toh matlab condition favorable hui is brahmaand ek cheez hai jo hamesha constant rehti hai vaah change theek hai badlav toh ab jaise aapne dekha hai spaikyuleshans lagaya ja raha hai ki march mein aane waale samay par ilaj se ek dedh lakh saal baad shayad jal ka sthar prithvi ke barabar ho jaega toh possible hai ki wahan par bhi jeevan aa jaaye theek hai toh jeevan ka na hona is baat ka suchak nahi hai ki jeevan ho hi nahi sakta toh agar brahmaand mein jeevan nahi hona hota toh jo jaise duniya jisme hum reh rahe hain jaisa aapne poocha hai toh haan yah waise ho sakti hai samay zaroor lagta lekin haan yah ho sakti thi theek hai kyonki ek samay agar aap dekho jo hamari theory jo bhi aaj tak hum log maan gaye toh unke according ek samay jeevan nayi takat dhire dhire jeevan paana toh possible eating se kabhi nakara nahi ja sakta jeevan apne jo marg hai vaah dhundh hi leta hai dhanyavad

लेकिन इस सवाल का जवाब जो है वह को उदाहरण के तौर पर देना चाहता हूं आपने कहा कि ब्रह्मांड मे

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Gopal Srivastava

Acupressure Acupuncture Sujok Therapist

1:24
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह तो आप जानते ही हैं ब्रह्मांड में पृथ्वी कैसी है जहां मनुष्य प्राणी है बाकी किसी में कुछ नहीं है किसी प्रमाण के किसी ग्रह में गर्मी ज्यादा है का तूफानी हवा है किसी की ठंडक ज्यादा है एक पृथ्वी ऐसी है जिससे आपको 12 महीने का मौसम विभाग पुलिस की पुरानी यही मिलता है मनुष्य के साथ-साथ आपके पास दिमाग है सोचने के लिए दिमाग है साथ रहने की रिश्तेदार हैं दोस्त है भाईचारा है प्यार मोहब्बत है इंसानियत है सेवा भाव है मिलन फ्री है यह सब आपको अपने आरोही बधाई करी हुई आपको अंत में काम आती है जब आपका जीवन का आखिरी समय आता है उसमें आपको सारी बातें याद आती है कि आपने किसके लिए क्या अच्छा जरा इसके लिए क्या बुरा करें कि भगवान है इसमें जीवन मिला है आपको इस जीवन को मौत के साथ दीजिए बजे उड़ आई ए एस के लिए लोगों की सेवा करिए प्यार से बोलिए प्यार के रही

yah toh aap jante hi hain brahmaand mein prithvi kaisi hai jaha manushya prani hai baki kisi mein kuch nahi hai kisi pramaan ke kisi grah mein garmi zyada hai ka tufani hawa hai kisi ki thandak zyada hai ek prithvi aisi hai jisse aapko 12 mahine ka mausam vibhag police ki purani yahi milta hai manushya ke saath saath aapke paas dimag hai sochne ke liye dimag hai saath rehne ki rishtedar hain dost hai bhaichara hai pyar mohabbat hai insaniyat hai seva bhav hai milan free hai yah sab aapko apne aarohi badhai kari hui aapko ant mein kaam aati hai jab aapka jeevan ka aakhiri samay aata hai usme aapko saree batein yaad aati hai ki aapne kiske liye kya accha zara iske liye kya bura kare ki bhagwan hai isme jeevan mila hai aapko is jeevan ko maut ke saath dijiye baje ud I a s ke liye logo ki seva kariye pyar se bolie pyar ke rahi

यह तो आप जानते ही हैं ब्रह्मांड में पृथ्वी कैसी है जहां मनुष्य प्राणी है बाकी किसी में कुछ

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J.P. Y👌g i

Psychologist

5:45
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका भक्त परसेंट विश्व में है क्या आधार पर रुझान को दे रहा है इससे स्थिति है कि ब्रह्मांड व्यास जहां तक ब्रह्मांड का बात आती है कि ब्रह्मांड कितना अनंत है और ब्रह्मांड में हमारी जो धरती पर दिन जो गुजरता है वह हमारे लिए प्रकाशित हो राज लेकिन ब्रह्मांड के छोर में यह भी विलुप्त है तो ब्रह्मांड की दशा एक अलग है और इसकी संरचना में वैज्ञानिक लोग लगे हैं कि यही जीवन का उल्लेख हो रहा है कि नहीं है धरती के ऊपर उसकी व्यवस्था दिख रही है लेकिन अनंत ब्रह्मांड और में जितने अनंत आकाशगंगा हैं किसी भी दूरी का अंत आज तक नहीं पता चल पाया है रही बात पर कि दुनिया में होता क्या क्यों अगर अध्यात्म की गहराई में समझे तो इस जगत में अवस्थाएं जिसे हम रोज ही रात में जब सोते हैं सुप्त अवस्था में चले जाते हैं यानी सुप्त अवस्था तीसरी पोजीशन है जिसमें जागृत में जगत नाम शरीर के साथ व्यवहार करते हैं और सपनों में हम शिक्षण विधि शिक्षण शरीर के आधार पर स्कीम संवेदनाओं को ग्रहण करते अश्वशक्ति में हमें कोई भी चीज पता नहीं है विलोप है डीजे जगत में जो सरचना हो रही है प्रकृति की रचना का जोश वार है जो समझ बूझ है इस मानव योनि के अंदर मनुष्य के अंदर ही प्रस्तावित हुई है और यही सारे अनुभव केदारे को ले रहा है और उसमें ज्यादा ही अनुभवी किस तरह जुड़ा हुआ है यह प्रकृति क्रश लेती है जो मानव जाति के अंदर ही है और वह अंत करण के और बाहरी संरचना में अभिव्यक्ति को प्रधान बना करके ओकारे को देख रहा है और समुचित सिस्टिक में में जो भी कुछ असर व्यसर ज्ञात अज्ञात हर तत्वों के प्रति कुछ भी अनुभूति आ रही है तो यह मानव योनि के अंदर ही एक बहुत बड़ी विशेषता का प्रतिफल है वह चेतन से है तो समझते ब्रह्मांड के अंदर अध्यात्म में यही कि जब सृष्टि नहीं थी तो क्या था 10 ताती पकड़ती जो जड़ है अर्थात उस पर चेतन नहीं है जिस चीज में और लेकिन उसकी बनावट इफिकर से जो आकर्षण विधि आ रही है वह चित्र में है तू समग्र सृष्टि के अंदर एक चेतन है और एक जड़ है इन्हीं की युक्ति से ही सृष्टि का प्रतिभा सो रहा है वही चीज भौतिकवाद यह वह नहीं मानता है कि सृष्टि में कोई करता पुरुष है या नीची तन है कि जो नियोजित पूर्वक जाने जानते हुए संत किस रचना में आ रहा है और अकारण नहीं बन रहा है भौतिकवाद होते हैं वह मानते हैं कि जगत की सृष्टि एक घटनाक्रम के अनुसार काल परिणाम के प्रभाव में उद्घाटित हो रहा है और इसकी तफ्तीश हो रही है लेकिन इसमें कहीं ना कहीं से अगर सोचा जाए तो हमें प्रिय प्रिय वस्तु क्यों लग रही है और क्यों हमें अट्रैक्ट कर रही हो तो वह ट्रैक्टर किस पर यह मनुष्य की ही चीज ना बिंदु को कर रही है तो इससे यह स्पष्ट हो जाता है किस चीज तन है और परसेंट जहां तभी आ रहा है कि ब्रह्मांड में जीवन नहीं होता तो क्या होता जीवन नहीं होता तो भी वह तब तो हमेशा रहता है जिसकी व्याख्या आज भी अध्यात्म जगत की पृष्ठभूमि में ही आधारित है कि कोई ऐसा तत्व है जो सर्वश्रेष्ठ है जिसके द्वारा प्रकृति बर्ताव में अपने कार्य में संगठन सक्रियता मेला रहा है और यह तो का जो संगठन है और जिसको परिचालित करने की जागृत और सुषुप्ति प्रसुप्त दशा रूप से दशा में गतिमान सृष्टि हो रही है तो मनुष्य के अंदर इतनी कितना बनी कि वह अपनी बॉडी से भी अलग निर्माण उस पद में प्रस्तुत हो जा रहा है जिसको सीधा वास्ता में आ जाते हैं जो मनुष्य शरीर का सही सदुपयोग कर लेते हैं जो चेतना का हमारे अंतर्गत जितनी भी सर्किट है मोती की और उनके सही परिमाप को जानने की विधि से वह ज्ञान से परिपूर्ण होता चला जाता है तो वह उसकी अवस्था भी एक है कुछ इस तरीके बन जाता है तो यही सब चीजें हैं कि जितना मनुष्य ज्ञान से परिपूर्ण होता चला जाएगा उतना उसको हर प्रश्न का जवाब उसमें स्वता ही मिलेगा तो और मनुष्य ही सबसे ज्यादा श्रेष्ठ है सीखना है अगर समग्र सृष्टि में चेतना ना रहा है और यह सिर्फ प्रकृति और भाषित होती रहे तो उसके परिणामों को कौन भूल सकता है तो यह निश्चित ही मनुष्य के सर्वश्रेष्ठ कृति ईश्वर की है इसलिए इसको महत्वपूर्ण था देगी गई है कि इस पर कि हर प्रयोजन को मनुष्य के द्वारा ही निर्मित हो रही है और उसमें ही अपनी कला को प्रसारित कर रहा है तो इसी लिए अनशन सी के युग में लोग साधना करते हैं कि वास्तव में अपने स्वरूप से उसके साथ मिल कर के हम समग्र ज्ञान को बटोर सके धन्यवाद मैं जेपी योगी वोकल प्लेटफार्म से

aapka bhakt percent vishwa mein hai kya aadhar par rujhan ko de raha hai isse sthiti hai ki brahmaand vyas jaha tak brahmaand ka baat aati hai ki brahmaand kitna anant hai aur brahmaand mein hamari jo dharti par din jo guzarta hai vaah hamare liye prakashit ho raj lekin brahmaand ke chhor mein yah bhi vilupt hai toh brahmaand ki dasha ek alag hai aur iski sanrachna mein vaigyanik log lage hain ki yahi jeevan ka ullekh ho raha hai ki nahi hai dharti ke upar uski vyavastha dikh rahi hai lekin anant brahmaand aur mein jitne anant akashganga hain kisi bhi doori ka ant aaj tak nahi pata chal paya hai rahi baat par ki duniya mein hota kya kyon agar adhyaatm ki gehrai mein samjhe toh is jagat mein avasthae jise hum roj hi raat mein jab sote hain supt avastha mein chale jaate hain yani supt avastha teesri position hai jisme jagrit mein jagat naam sharir ke saath vyavhar karte hain aur sapno mein hum shikshan vidhi shikshan sharir ke aadhar par scheme sanvednaon ko grahan karte aswashakti mein hamein koi bhi cheez pata nahi hai vilop hai DJ jagat mein jo sarchana ho rahi hai prakriti ki rachna ka josh war hai jo samajh boojh hai is manav yoni ke andar manushya ke andar hi prastavit hui hai aur yahi saare anubhav kedare ko le raha hai aur usme zyada hi anubhavi kis tarah jinko hua hai yah prakriti crush leti hai jo manav jati ke andar hi hai aur vaah ant karan ke aur bahri sanrachna mein abhivyakti ko pradhan bana karke okare ko dekh raha hai aur samuchit sistik mein mein jo bhi kuch asar vyasar gyaat agyaat har tatvon ke prati kuch bhi anubhuti aa rahi hai toh yah manav yoni ke andar hi ek bahut badi visheshata ka pratiphal hai vaah chetan se hai toh samajhte brahmaand ke andar adhyaatm mein yahi ki jab shrishti nahi thi toh kya tha 10 tatti pakadti jo jad hai arthat us par chetan nahi hai jis cheez mein aur lekin uski banawat ifikar se jo aakarshan vidhi aa rahi hai vaah chitra mein hai tu samagra shrishti ke andar ek chetan hai aur ek jad hai inhin ki yukti se hi shrishti ka pratibha so raha hai wahi cheez bhautikvad yah vaah nahi maanta hai ki shrishti mein koi karta purush hai ya nichi tan hai ki jo niyojit purvak jaane jante hue sant kis rachna mein aa raha hai aur akaran nahi ban raha hai bhautikvad hote hain vaah maante hain ki jagat ki shrishti ek ghatanaakram ke anusaar kaal parinam ke prabhav mein udghatit ho raha hai aur iski taftish ho rahi hai lekin isme kahin na kahin se agar socha jaaye toh hamein priya priya vastu kyon lag rahi hai aur kyon hamein attract kar rahi ho toh vaah tractor kis par yah manushya ki hi cheez na bindu ko kar rahi hai toh isse yah spasht ho jata hai kis cheez tan hai aur percent jaha tabhi aa raha hai ki brahmaand mein jeevan nahi hota toh kya hota jeevan nahi hota toh bhi vaah tab toh hamesha rehta hai jiski vyakhya aaj bhi adhyaatm jagat ki prishthbhumi mein hi aadharit hai ki koi aisa tatva hai jo sarvashreshtha hai jiske dwara prakriti bartaav mein apne karya mein sangathan sakriyata mela raha hai aur yah toh ka jo sangathan hai aur jisko parichalit karne ki jagrit aur sushupti prasupt dasha roop se dasha mein gatiman shrishti ho rahi hai toh manushya ke andar itni kitna bani ki vaah apni body se bhi alag nirmaan us pad mein prastut ho ja raha hai jisko seedha vasta mein aa jaate hain jo manushya sharir ka sahi sadupyog kar lete hain jo chetna ka hamare antargat jitni bhi circuit hai moti ki aur unke sahi parimap ko jaanne ki vidhi se vaah gyaan se paripurna hota chala jata hai toh vaah uski avastha bhi ek hai kuch is tarike ban jata hai toh yahi sab cheezen hain ki jitna manushya gyaan se paripurna hota chala jaega utana usko har prashna ka jawab usme swata hi milega toh aur manushya hi sabse zyada shreshtha hai sikhna hai agar samagra shrishti mein chetna na raha hai aur yah sirf prakriti aur bhashit hoti rahe toh uske parinamon ko kaun bhool sakta hai toh yah nishchit hi manushya ke sarvashreshtha kriti ishwar ki hai isliye isko mahatvapurna tha degi gayi hai ki is par ki har prayojan ko manushya ke dwara hi nirmit ho rahi hai aur usme hi apni kala ko prasarit kar raha hai toh isi liye anshan si ke yug mein log sadhna karte hain ki vaastav mein apne swaroop se uske saath mil kar ke hum samagra gyaan ko bator sake dhanyavad main jp yogi vocal platform se

आपका भक्त परसेंट विश्व में है क्या आधार पर रुझान को दे रहा है इससे स्थिति है कि ब्रह्मांड

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देखिए ब्रह्मांड में जीवन है और वह हर जगह जहां भी हमारी प्रकृति है पृथ्वी है चाहे वह विश्वत रेखा रहने वाला हो मकर रेखा के नीचे रहने वाले हो चाहा का सिकंदर के नीचे रहने वाले हो सब में जीवन है और जहां जीवन है वहां पर कृपया जहां पर कि वहां जीवन है

dekhiye brahmaand mein jeevan hai aur vaah har jagah jaha bhi hamari prakriti hai prithvi hai chahen vaah vishwat rekha rehne vala ho makar rekha ke niche rehne waale ho chaha ka sikandar ke niche rehne waale ho sab mein jeevan hai aur jaha jeevan hai wahan par kripya jaha par ki wahan jeevan hai

देखिए ब्रह्मांड में जीवन है और वह हर जगह जहां भी हमारी प्रकृति है पृथ्वी है चाहे वह विश्वत

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Rakesh Tiwari

Life Coach, Management Trainer

1:50
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कभी-कभी मैं सोचता हूं इसमें जीवन नहीं होता तो क्या दुनिया होती जिसमें हम रह रहे हैं आपका क्या विचार है हां भोले के पश्चात जब तक जोड़ी हरा भरा जंगल बहुत अच्छी और संभावित लगती थी लेकिन वह अपने अंदर 152 बोरियत महसूस करता था इसी तरह की होती तो हमारी जितने की कल्पनाएं हैं एकदम हाल है इसकी रचना है एक रानी है और ब्रह्मांड में रहने का अलग आनंद है प्रकृति एवं पुरुष इस संसार में हम जितना आनंद उठा सकते हैं डकैत का नदी का चरणों का हीरो का जंगलों का प्राणियों प्राणियों की वीरता का मनुष्य का मनुष्य की विधि तथा उनके धर्म का मुख्य लक परंपरा रीति आस्था आनंदमई देखें इस जमाने में

kabhi kabhi main sochta hoon isme jeevan nahi hota toh kya duniya hoti jisme hum reh rahe hain aapka kya vichar hai haan bhole ke pashchat jab tak jodi hara bhara jungle bahut achi aur sambhavit lagti thi lekin vaah apne andar 152 boriyat mehsus karta tha isi tarah ki hoti toh hamari jitne ki kalpanaen hain ekdam haal hai iski rachna hai ek rani hai aur brahmaand me rehne ka alag anand hai prakriti evam purush is sansar me hum jitna anand utha sakte hain dacoit ka nadi ka charno ka hero ka jungalon ka praniyo praniyo ki veerta ka manushya ka manushya ki vidhi tatha unke dharm ka mukhya luck parampara riti astha anandamai dekhen is jamane me

कभी-कभी मैं सोचता हूं इसमें जीवन नहीं होता तो क्या दुनिया होती जिसमें हम रह रहे हैं आपका क

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Deepaben R.Shimpi

Mind Trainer | Trainer Motivational | Trainer Textbook Writer don't Copy My Answer

1:19
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नमस्कार सुप्रभातम आपका प्रश्न कभी-कभी आप सोचते हो कि ब्रह्मांड में जीवन नहीं होता तो दुनिया होती जिससे हम रह रहे हैं दुनिया तो सदियों से युगो से है दुनिया तो चलती आ रही है हम चाहे हो ना हो दुनिया को कोई फर्क नहीं पड़ता जीवन ना हो फिर भी दुनिया तो रहेगी दुनिया तो रहने वाली है उसको उसका तो कोई नष्ट नहीं कर सकता हमारे वेदों में बताया गया है कि सतयुग त्रेता युग द्वापर युग चार योग्य मारे कलयुग तो दुनिया तो चलती रहेगी जीवन चाहे हो ना हो लेकिन सब हार और सर्जन या किया तो ब्रह्मांड में होती रहती है जिसका सर्जन हुआ है उसका तो हार भी होगा तो हार होने के बाद नहीं सोचती की रचना होगी कलयुग के बाद सतयुग आएगा तो यह तो चलने वाला है यह परंपरा तो चलती रहेगी या चक्र तो चलता रहेगा आपको इसके बारे में सोचने की कोई जरूरत नहीं

namaskar suprabhatam aapka prashna kabhi kabhi aap sochte ho ki brahmaand me jeevan nahi hota toh duniya hoti jisse hum reh rahe hain duniya toh sadiyon se yugo se hai duniya toh chalti aa rahi hai hum chahen ho na ho duniya ko koi fark nahi padta jeevan na ho phir bhi duniya toh rahegi duniya toh rehne wali hai usko uska toh koi nasht nahi kar sakta hamare vedo me bataya gaya hai ki satayug treta yug dwapar yug char yogya maare kalyug toh duniya toh chalti rahegi jeevan chahen ho na ho lekin sab haar aur Surgeon ya kiya toh brahmaand me hoti rehti hai jiska Surgeon hua hai uska toh haar bhi hoga toh haar hone ke baad nahi sochti ki rachna hogi kalyug ke baad satayug aayega toh yah toh chalne vala hai yah parampara toh chalti rahegi ya chakra toh chalta rahega aapko iske bare me sochne ki koi zarurat nahi

नमस्कार सुप्रभातम आपका प्रश्न कभी-कभी आप सोचते हो कि ब्रह्मांड में जीवन नहीं होता तो दुनिय

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Kshama Jadeja

Health Department

0:20
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ब्रह्मांड में दिल नहीं होता तो प्यार नहीं होता तो यह दुनिया नहीं होती

brahmaand me dil nahi hota toh pyar nahi hota toh yah duniya nahi hoti

ब्रह्मांड में दिल नहीं होता तो प्यार नहीं होता तो यह दुनिया नहीं होती

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आपको यह पता होना चाहिए कि ब्रह्मांड की उत्पत्ति पहले हुई है और जीव की उत्पत्ति बाद में हुई है इसलिए अगर जीतना भी हो तो ब्रह्मांड रह सकता है अगर ब्रह्मांड होगा तो जीव की उत्पत्ति आवाज सुने संभव है

aapko yah pata hona chahiye ki brahmaand ki utpatti pehle hui hai aur jeev ki utpatti baad me hui hai isliye agar jeetna bhi ho toh brahmaand reh sakta hai agar brahmaand hoga toh jeev ki utpatti awaaz sune sambhav hai

आपको यह पता होना चाहिए कि ब्रह्मांड की उत्पत्ति पहले हुई है और जीव की उत्पत्ति बाद में हुई

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Kamlesh Kumar Jay Mata ki

Berojgar Vyavsay Ki Khoj

0:53
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जय माता की आपने जो प्रश्न किया है जो मनुष्य के कर्म क्षेत्र से नकारात्मक है इसका कोई महत्व जीवन में नहीं है फिर भी मैं आपको बता देता हूं कि जब भी अपनी आंख खुले तभी सवेरा समझ लेना चाहिए आपके लिए बता रहा हूं जब भी अपनी आंख खुले तभी सवेरा समझ ले समझ लेना चाहिए यही अपने कर्म क्षेत्र के अंतर्गत आता है अर्थात हमारे सोने के बाद कुछ नहीं है उसी प्रकार से इस सृष्टि में ब्रह्मांड में हम नहीं होते तो क्या होता या क्या नहीं होता यह हमारे जीवन का कोई प्रश्न नहीं है कोई महत्व नहीं रखता जय माता

jai mata ki aapne jo prashna kiya hai jo manushya ke karm kshetra se nakaratmak hai iska koi mahatva jeevan me nahi hai phir bhi main aapko bata deta hoon ki jab bhi apni aankh khule tabhi savera samajh lena chahiye aapke liye bata raha hoon jab bhi apni aankh khule tabhi savera samajh le samajh lena chahiye yahi apne karm kshetra ke antargat aata hai arthat hamare sone ke baad kuch nahi hai usi prakar se is shrishti me brahmaand me hum nahi hote toh kya hota ya kya nahi hota yah hamare jeevan ka koi prashna nahi hai koi mahatva nahi rakhta jai mata

जय माता की आपने जो प्रश्न किया है जो मनुष्य के कर्म क्षेत्र से नकारात्मक है इसका कोई महत्व

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अगर इस जहां मांडवी जीवन नहीं होता यह दुनिया मेरी दुनिया तो होती दुनिया तो होती लेकिन अगर जीवन नहीं हो तो ब्राह्मण कैसे होता है बताइए जीवन तो पशु पक्षी है तो जीवन है

agar is jaha mandvi jeevan nahi hota yah duniya meri duniya toh hoti duniya toh hoti lekin agar jeevan nahi ho toh brahman kaise hota hai bataiye jeevan toh pashu pakshi hai toh jeevan hai

अगर इस जहां मांडवी जीवन नहीं होता यह दुनिया मेरी दुनिया तो होती दुनिया तो होती लेकिन अगर ज

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शायद आपने पढ़ा होगा जीव विज्ञान में प्राकृतिक तंत्र या एक ऐसा चैन बना हुआ है रितिक और एक ऐसा चैन बना हुआ है चैन की तरह हर एक जीव-जंतु पेड़-पौधे एक से एक जुड़ी हुई है इसे तोड़ना अत्यंत खतरनाक होगा और पृथ्वी से पूरी जी जीवन ही समाप्त हो जाए

shayad aapne padha hoga jeev vigyan me prakirtik tantra ya ek aisa chain bana hua hai hrithik aur ek aisa chain bana hua hai chain ki tarah har ek jeev jantu ped paudhe ek se ek judi hui hai ise todna atyant khataranaak hoga aur prithvi se puri ji jeevan hi samapt ho jaaye

शायद आपने पढ़ा होगा जीव विज्ञान में प्राकृतिक तंत्र या एक ऐसा चैन बना हुआ है रितिक और एक ऐ

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हाय फ्रेंड गुड इवनिंग आपके द्वारा काफी बढ़िया क्वेश्चन किया गया पर मैं आपको बता दूं कि ब्रह्मांड में जीवन नहीं होता तो दुनिया बिल्कुल ही होती लेकिन सबसे पहली बात मैं आपको यह बता दूं कि जीवन के ऊपर ही ब्रह्मांड निर्भय निर्भर है और और ब्रह्मांड के ऊपर जीवन निर्भर है क्योंकि आप एक सिंपल सा एग्जांपल थे तो आप समझ सकते हैं कि किस सभी जीव जीव दूसरे पेड़ पौधे जैसे की फसल के थ्रू या फल के दो रूप तभी हम खा पाते हैं और जो हम लोग अपना बेस्ट उत्सर्जित करते हैं उनसे उनको खाना मिलता होता है दूसरा एग्जांपल आप यह उठा सकते जैसे कि हम लोग ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं जिससे पेड़ पौधे लेकर के और उसे ऑक्सीजन में चेंज करते हैं और अपना भोजन बनाते तो कहीं एक दूसरे पर डिपेंड होते हैं लोग तो यह चीजें नहीं होगी तो दोनों भी नहीं होगा अगर जीवन में होती तो ब्रह्मांड भी नहीं होता मतलब दुनिया नहीं होती और दुनिया अगर नहीं दोनों एक दूसरे के पहले रूप में डेवलप होते हैं थैंक यू

hi friend good evening aapke dwara kaafi badhiya question kiya gaya par main aapko bata doon ki brahmaand me jeevan nahi hota toh duniya bilkul hi hoti lekin sabse pehli baat main aapko yah bata doon ki jeevan ke upar hi brahmaand nirbhay nirbhar hai aur aur brahmaand ke upar jeevan nirbhar hai kyonki aap ek simple sa example the toh aap samajh sakte hain ki kis sabhi jeev jeev dusre ped paudhe jaise ki fasal ke through ya fal ke do roop tabhi hum kha paate hain aur jo hum log apna best utsarjit karte hain unse unko khana milta hota hai doosra example aap yah utha sakte jaise ki hum log oxygen grahan karte hain aur carbon dioxide chodte hain jisse ped paudhe lekar ke aur use oxygen me change karte hain aur apna bhojan banate toh kahin ek dusre par depend hote hain log toh yah cheezen nahi hogi toh dono bhi nahi hoga agar jeevan me hoti toh brahmaand bhi nahi hota matlab duniya nahi hoti aur duniya agar nahi dono ek dusre ke pehle roop me develop hote hain thank you

हाय फ्रेंड गुड इवनिंग आपके द्वारा काफी बढ़िया क्वेश्चन किया गया पर मैं आपको बता दूं कि ब्र

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सामाजिक कार्यकर्ता

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Purushottam Choudhary

ब्राह्मण Next IAS institute गार्ड

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