धर्म ही पूजा है या फिर पूजा ही धर्म है?...


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पूजा पूजा पूजा के समाचार

puja puja puja ke samachar

पूजा पूजा पूजा के समाचार

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धर्म ही पूजा है या फिर पूजा ही धर्म है ऐसा आप का प्रश्न है तो सर्वप्रथम हमें यह जान लेना चाहिए कि धर्म क्या है तो आपको इस बात से चिंतित होना चाहिए और विधि सुना जयपुर की धर्म जो है हमारा विवेक के के अनुरूप जो हम समय अनुसार प्रस्तुति के अनुरूप जो उचित कर्तव्य करते हैं जिसका सु परिणाम निकलता है वह घर में अर्थात अपने कर्तव्य पथ पर उतरना धर्म और धर्म ही पूजा है तो कितने लोग यह कहते हैं कि करतब भी पूजा है वर्क इज वरशिप तो ऐसे में हमको सकते हैं कि जो पूजा होता है अगर आप उसे विशेष दृष्टिकोण से देखे तुझे पूजा होता है वह धर्म का एक उपकरण होता है कहीं ऐसा होता है वह पूजा वह साधन है जो टूल है जिसके माध्यम से हम अपने धार्मिक होने को दिखाते हैं प्रदर्शित करते हैं जिसमें पूजा कर्मकांड इत्यादि आते हैं किंतु इसके पीछे की जो भावनाएं होती है वहीं धार्मिक होती है और आप को चिर शांति की तरफ ले जाती है फिर आ गया कृष्ण की पूजा ही धर्म है तो सिर्फ पूजा ही धर्म है ऐसा नहीं है बल्कि पूजा के साथ इनके साथ जो हमारी भावनाएं सम्मिलित हैं और कर्मकांड है उनके पीछे जो हमारे भाव है श्रद्धा है उस सब धर्म है तू अगर आप इस भाव से पूजा करते हैं कि मुझे एक धार्मिक व्यक्ति बनना है या मेरे अंदर धर्म की स्थापना हो हम अपने स्वधर्म को पहचान सके अपने शो प्रति अपने शरीर के प्रति कर्तव्य अपने समाज परिवार के प्रति अपने राष्ट्र के प्रति कर्तव्य के प्रति जागरूक हो सके तो निश्चित रूप से आपका प्रत्येक कर्म पूजा है आपका प्रत्येक पूजा का धर्म बनता चला जाता है तो यह आपका प्रश्न का उत्तर है धन्यवाद

dharm hi puja hai ya phir puja hi dharm hai aisa aap ka prashna hai toh sarvapratham hamein yah jaan lena chahiye ki dharm kya hai toh aapko is baat se chintit hona chahiye aur vidhi suna jaipur ki dharm jo hai hamara vivek ke ke anurup jo hum samay anusaar prastuti ke anurup jo uchit kartavya karte hain jiska su parinam nikalta hai vaah ghar me arthat apne kartavya path par utarna dharm aur dharm hi puja hai toh kitne log yah kehte hain ki kartab bhi puja hai work is worship toh aise me hamko sakte hain ki jo puja hota hai agar aap use vishesh drishtikon se dekhe tujhe puja hota hai vaah dharm ka ek upkaran hota hai kahin aisa hota hai vaah puja vaah sadhan hai jo tool hai jiske madhyam se hum apne dharmik hone ko dikhate hain pradarshit karte hain jisme puja karmakand ityadi aate hain kintu iske peeche ki jo bhaavnaye hoti hai wahi dharmik hoti hai aur aap ko chir shanti ki taraf le jaati hai phir aa gaya krishna ki puja hi dharm hai toh sirf puja hi dharm hai aisa nahi hai balki puja ke saath inke saath jo hamari bhaavnaye sammilit hain aur karmakand hai unke peeche jo hamare bhav hai shraddha hai us sab dharm hai tu agar aap is bhav se puja karte hain ki mujhe ek dharmik vyakti banna hai ya mere andar dharm ki sthapna ho hum apne swadharm ko pehchaan sake apne show prati apne sharir ke prati kartavya apne samaj parivar ke prati apne rashtra ke prati kartavya ke prati jagruk ho sake toh nishchit roop se aapka pratyek karm puja hai aapka pratyek puja ka dharm banta chala jata hai toh yah aapka prashna ka uttar hai dhanyavad

धर्म ही पूजा है या फिर पूजा ही धर्म है ऐसा आप का प्रश्न है तो सर्वप्रथम हमें यह जान लेना च

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Harsh Goyal

Chemical Engineer

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घर में पूजा है या फिर पूजा ही धर्म है धर्म ही पूजा है यह तो ठीक हो गया अगर आप धार्मिक रीति से अपना जीवन व्यतीत करते हैं किसी को दुख नहीं पहुंचाते हैं इससे बड़ी पूजा और क्या होगी इससे बड़ी पूजा और कुछ नहीं हो सकती है दूसरी बात आप ने बोली पूजा ही धर्म है पूजा ही धर्म है ऐसा नहीं हो सकता है पूजा तो आप धर्म मानते थे लेकिन पूजा ही धर्म है मतलब आपने पूजा करी और आपने सोचा के बाद मेरा धर्म हो गया अब बाद में मैं कुछ भी करूंगा ऐसा नहीं हो सकता है पूजा करके बाद में कुछ भी करें ऐसा नहीं चल सकता धर्म अलग विषय है धर्म है किसी को भी देखना पहुंचाना धर्म यह नहीं कि मैं दूसरे के साथ वह करूंगी मैं स्वयं की चार्ट चाहता हूं यह चीज धर्म है तो सिर्फ पूजा करने से यह सब कुछ नहीं हो सकता है धन्यवाद

ghar me puja hai ya phir puja hi dharm hai dharm hi puja hai yah toh theek ho gaya agar aap dharmik riti se apna jeevan vyatit karte hain kisi ko dukh nahi pahunchate hain isse badi puja aur kya hogi isse badi puja aur kuch nahi ho sakti hai dusri baat aap ne boli puja hi dharm hai puja hi dharm hai aisa nahi ho sakta hai puja toh aap dharm maante the lekin puja hi dharm hai matlab aapne puja kari aur aapne socha ke baad mera dharm ho gaya ab baad me main kuch bhi karunga aisa nahi ho sakta hai puja karke baad me kuch bhi kare aisa nahi chal sakta dharm alag vishay hai dharm hai kisi ko bhi dekhna pahunchana dharm yah nahi ki main dusre ke saath vaah karungi main swayam ki chart chahta hoon yah cheez dharm hai toh sirf puja karne se yah sab kuch nahi ho sakta hai dhanyavad

घर में पूजा है या फिर पूजा ही धर्म है धर्म ही पूजा है यह तो ठीक हो गया अगर आप धार्मिक रीति

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Sunil Kumar Pandey

Editor And Writer

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नमस्कार आपका प्रश्न है धर्म ही पूजा है या फिर पूजा ही धर्म है जहां तक मुझे जानकारी है पूजा का हो गया है धर्म धर्म करेंगे तो उसमें सबसे पहला जो विधान है वह आराधना कारू देवता की पूजा करते हैं भक्त ईश्वर में आस्था विश्वास धन्यवाद

namaskar aapka prashna hai dharm hi puja hai ya phir puja hi dharm hai jaha tak mujhe jaankari hai puja ka ho gaya hai dharm dharm karenge toh usme sabse pehla jo vidhan hai vaah aradhana karu devta ki puja karte hain bhakt ishwar me astha vishwas dhanyavad

नमस्कार आपका प्रश्न है धर्म ही पूजा है या फिर पूजा ही धर्म है जहां तक मुझे जानकारी है पूजा

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धर्म जैसे लोकतंत्र है उसका संविधान है धर्म ऐसे ही नियमावली है मनुष्य के जीवन जीने की सिद्धांत आदर्श और मूल्य हैं पूजा पूजा ईश्वर की की जाती हैं जिससे वे हमें धर्म पर चलने की पात्रता विकसित करता है 92 गुणों गुणों का विकास मसीह के भीतर होता है धर्म अलग है पूजा अलग है आप यह तो कह सकते हैं कर्म ही धर्म है कर्म ही पूजा है

dharm jaise loktantra hai uska samvidhan hai dharm aise hi niyamawli hai manushya ke jeevan jeene ki siddhant adarsh aur mulya hain puja puja ishwar ki ki jaati hain jisse ve hamein dharm par chalne ki patrata viksit karta hai 92 gunon gunon ka vikas masih ke bheetar hota hai dharm alag hai puja alag hai aap yah toh keh sakte hain karm hi dharm hai karm hi puja hai

धर्म जैसे लोकतंत्र है उसका संविधान है धर्म ऐसे ही नियमावली है मनुष्य के जीवन जीने की सिद्

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Rahul Agrawal

Engineer//परमात्मा प्रेमी

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देखिए कर्म ही पूजा और पूजा ही करम है यह धर्म का कांटेक्ट कहां से आ गया मेरे भाई धर्म को हम लोगों ने बहुत गलत समझ लिया धर्म कुछ नहीं है कैसे भारत का संविधान है भारत का धर्म में संविधान को फॉलो करना ऐसी हिंदू धर्म मुस्लिम धर्म धर्म की पार्टी कूलर काम पर्टिकुलर तरीके से कैसे किया जाए यह धर्म और धर्म चेंज होता रहता है इंसान का धर्म परिस्थिति के अनुसार ही होता रहता है इसी समय कुछ धर्म होता है किसी तरह होता है कर्मों पर जोर दिया गया हमारे शास्त्रों ने इसलिए धर्म कोई धर्म से बड़ा माना गया है इसलिए कर्म ही पूजा है

dekhiye karm hi puja aur puja hi karam hai yah dharm ka Contact kaha se aa gaya mere bhai dharm ko hum logo ne bahut galat samajh liya dharm kuch nahi hai kaise bharat ka samvidhan hai bharat ka dharm me samvidhan ko follow karna aisi hindu dharm muslim dharm dharm ki party cooler kaam particular tarike se kaise kiya jaaye yah dharm aur dharm change hota rehta hai insaan ka dharm paristhiti ke anusaar hi hota rehta hai isi samay kuch dharm hota hai kisi tarah hota hai karmon par jor diya gaya hamare shastron ne isliye dharm koi dharm se bada mana gaya hai isliye karm hi puja hai

देखिए कर्म ही पूजा और पूजा ही करम है यह धर्म का कांटेक्ट कहां से आ गया मेरे भाई धर्म को हम

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घर में पूजा है या पूजा ही धर्म है इसका उत्तर यही होगा कि धर्म ही पूजा है अगर आप अपने धर्म पर सदैव अटल है और अपने धर्म पर मतलब अपने धर्म को पूरी निष्ठा से डटे हुए हैं तो आपका धर्म ही पूजा कहलाएगा अपने धर्म का प्रचार करें यही सबसे बड़ी पूजा है

ghar me puja hai ya puja hi dharm hai iska uttar yahi hoga ki dharm hi puja hai agar aap apne dharm par sadaiv atal hai aur apne dharm par matlab apne dharm ko puri nishtha se date hue hain toh aapka dharm hi puja kehlaega apne dharm ka prachar kare yahi sabse badi puja hai

घर में पूजा है या पूजा ही धर्म है इसका उत्तर यही होगा कि धर्म ही पूजा है अगर आप अपने धर्म

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आपकी यह बात तो बहुत ही तक है और आप इस बात को मैं आपको क्लियर करना चाहता हूं लोगों को इसमें कमीशन होती है कि धर्म ही पूजा है ना पूजा ही धर्म है तो मैं आपको बताता हूं धर्म ही पूजा है पूजा धर्म नहीं है मैं आपको जिस बात को क्लियर कर देता हूं धर्म का मतलब आप यह कतई मत समझिए कि वह एक पूजा पद्धति व धर्म मजहब या पंथ या संप्रदाय 11 जीने का तरीका है यह दुनिया पढ़ने का तरीका है आप सभी जो सनातनी हैं जो भी लोग सनातनी हैं वह एक्सप्लोरर फोटो अपलोड है वो एकदम से पीछे पीछे पीछे लंबे क़द धर्म में जो भी हैं वह सब अपनी दुनिया खुद ढूंढ रहा है यह एक पद्धति रही है जबकि दूसरे लांबा क्रिश्चियनिटी हुआ यहूदी हुए बौद्ध हुए जैन हुए यह सब संप्रदाय ठीक है साथियों में तनातनी जितने भी एशियन धर्म है जितने भी धर्म को मानने वाले लोग हैं यह धर्म का पालन करना ही पूजा होता है धर्म का मतलब यहां कथा का पालन करना सख्त भाव से निराश अभाव में कोई आ सकती नहीं रखना जो अच्छा होगा उसके लिए भी खुश नहीं हो ना और ना बुरा होने पर दुखी हो जाना अपने जीवन के अंदर यह बात ध्यान करले नहीं है कि आपका कार्य जो है आपका कार्य जो है उनको कर्म करना है उसके फल को प्राप्त करना नहीं है आपको खेत जोतता है कि से फसल बानी हैं इसका लगे नहीं है दीपू फसल आपके लिए है यह वाली तिथि अभी तो याद रखी है इसलिए आपको बात नहीं होती है अगर धर्मपाल करनी होती है वो यह है कि कांटा भी का ईश्वर होगा कर विश्वर होगा और का और उसका कारण भी ईश्वर ही होंगे ठीक है यह चीज होती है धर्म अधर्म पालन में एक बात और आपको ध्यान रखनी होती है वह यह है कि आप न्याय फ्री हो आप अपने साथ भी न्याय करें और दूसरों के साथ भी ना करें जो चीज आपके आपको अच्छे ना आपके जीवन में आपको अच्छा लगता हूं दूसरे साफ करने का कोई भी महकते नहीं होता किसी चीज सही होना चाहिए अगर कोई चीज गलत है तो चीज गलत है उसमें लगा लेती नहीं देखी जाएगी कौन बड़ा है कौन छोटा नहीं देना चाहिए हमें विश्वास है कि यह चीज असत्य है और आसक्ति का साथ कभी दे देना चाहिए तो आप धर्म का पालन करते हो और मेरे हिसाब से धर्म ही पूजा है पूजा घर नहीं है

aapki yah baat toh bahut hi tak hai aur aap is baat ko main aapko clear karna chahta hoon logo ko isme commision hoti hai ki dharm hi puja hai na puja hi dharm hai toh main aapko batata hoon dharm hi puja hai puja dharm nahi hai main aapko jis baat ko clear kar deta hoon dharm ka matlab aap yah katai mat samjhiye ki vaah ek puja paddhatee va dharm majhab ya panth ya sampraday 11 jeene ka tarika hai yah duniya padhne ka tarika hai aap sabhi jo sanatani hain jo bhi log sanatani hain vaah eksaplorar photo upload hai vo ekdam se peeche peeche peeche lambe kad dharm me jo bhi hain vaah sab apni duniya khud dhundh raha hai yah ek paddhatee rahi hai jabki dusre laamba krishchiyaniti hua yahudi hue Baudh hue jain hue yah sab sampraday theek hai sathiyo me tanatani jitne bhi asian dharm hai jitne bhi dharm ko manne waale log hain yah dharm ka palan karna hi puja hota hai dharm ka matlab yahan katha ka palan karna sakht bhav se nirash abhaav me koi aa sakti nahi rakhna jo accha hoga uske liye bhi khush nahi ho na aur na bura hone par dukhi ho jana apne jeevan ke andar yah baat dhyan karle nahi hai ki aapka karya jo hai aapka karya jo hai unko karm karna hai uske fal ko prapt karna nahi hai aapko khet jotta hai ki se fasal bani hain iska lage nahi hai deepoo fasal aapke liye hai yah wali tithi abhi toh yaad rakhi hai isliye aapko baat nahi hoti hai agar dharmpal karni hoti hai vo yah hai ki kanta bhi ka ishwar hoga kar vishwar hoga aur ka aur uska karan bhi ishwar hi honge theek hai yah cheez hoti hai dharm adharma palan me ek baat aur aapko dhyan rakhni hoti hai vaah yah hai ki aap nyay free ho aap apne saath bhi nyay kare aur dusro ke saath bhi na kare jo cheez aapke aapko acche na aapke jeevan me aapko accha lagta hoon dusre saaf karne ka koi bhi mahkate nahi hota kisi cheez sahi hona chahiye agar koi cheez galat hai toh cheez galat hai usme laga leti nahi dekhi jayegi kaun bada hai kaun chota nahi dena chahiye hamein vishwas hai ki yah cheez asatya hai aur aasakti ka saath kabhi de dena chahiye toh aap dharm ka palan karte ho aur mere hisab se dharm hi puja hai puja ghar nahi hai

आपकी यह बात तो बहुत ही तक है और आप इस बात को मैं आपको क्लियर करना चाहता हूं लोगों को इसमें

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suraj singh

Business Owner

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घर में पूजा है यह कहना बहुत ही उचित है क्योंकि जहां तक देखा जाए तो धर्म क्या है धर्म हमारे कर्तव्य के अनुसार सदृश होती है यानी हम जो कर्तव्य कर्म करते हैं वही धर्म और पूजा पूजा का मतलब यह हुआ कि हम किस तरह किसी कर्म को करते हैं अगर हम नैतिकता से के साथ उस धर्म की रक्षा के लिए खड़े होते हैं वह धर्म की पूजा हुई पूजा ही धर्म है यह कहना उचित नहीं है बल्कि धर्म ही पूजा है यह कहना उचित पहले हम कर्म को नैतिकता के अनुसार अगर हम करेंगे वही पूजा होगी अनैतिकता के अनुसार जब हम करेंगे किसी भी काम को तो यह हमारा धर्म होगा वैसे भी शास्त्रों में कहा गया है धर्मो रक्षति रक्षिता धर्म की तुम रक्षा करो धर्म हमारी रक्षा करेगा का अर्थ यह है कि तुम कर्म करते हुए अपने पद पर अडिग रहो से लोग कल्याण हो आलोकित में हमेशा कोई भी कर्म करना सर्वथा उचित है

ghar me puja hai yah kehna bahut hi uchit hai kyonki jaha tak dekha jaaye toh dharm kya hai dharm hamare kartavya ke anusaar sadrish hoti hai yani hum jo kartavya karm karte hain wahi dharm aur puja puja ka matlab yah hua ki hum kis tarah kisi karm ko karte hain agar hum naitikta se ke saath us dharm ki raksha ke liye khade hote hain vaah dharm ki puja hui puja hi dharm hai yah kehna uchit nahi hai balki dharm hi puja hai yah kehna uchit pehle hum karm ko naitikta ke anusaar agar hum karenge wahi puja hogi anaitikta ke anusaar jab hum karenge kisi bhi kaam ko toh yah hamara dharm hoga waise bhi shastron me kaha gaya hai dharmon rakshati rakshita dharm ki tum raksha karo dharm hamari raksha karega ka arth yah hai ki tum karm karte hue apne pad par adig raho se log kalyan ho alokit me hamesha koi bhi karm karna sarvatha uchit hai

घर में पूजा है यह कहना बहुत ही उचित है क्योंकि जहां तक देखा जाए तो धर्म क्या है धर्म हमारे

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धर्म ही पूजा है या फिर पूजा ही धर्म है यह प्रश्न जो आपने पूछा है या बड़ा ही गुण प्रश्न है धर्म का संबंध सिर्फ पूजन से ही नहीं इस संपूर्ण ब्रह्मांड में चल रही जो भौतिक अलौकिक समस्त गतिविधियां हैं उनसे अपने नियामक व्यवहार के आधार पर नियमित व्यवहार को निर्धारण करने की विधि ही धर्म कहलाती है हां धर्म के इकाई में पूजन जरूर है रितिक शमा द मोस्ट एवं इंद्रिय निग्रह आदि धर्म के 10 स्तंभ प्रकार बताए गए हैं कि धर्म इन 10 विधियों से साधन किया जाता पूजन की बात है पूजा ही धर्म नहीं है पूजा धर्म की एक इकाई है धर्म का एक हिस्सा है पूजा अवश्य में पूजन की प्रक्रिया धार्मिक अमन की पहचान कराती है मगर यह समझना कि सिर्फ पूजा पाठ कर लेना ही धार्मिक होने की पहचान है यह तर्कसंगत नहीं है या शास्त्रों के आधार पर उचित नहीं है धर्म की अन्य इकाइयां भी है जिसमें दान है तब वह व्रत है नेम है आचरण और भी बहुत सारी बात जय श्रीमन्नारायण

dharm hi puja hai ya phir puja hi dharm hai yah prashna jo aapne poocha hai ya bada hi gun prashna hai dharm ka sambandh sirf pujan se hi nahi is sampurna brahmaand me chal rahi jo bhautik alaukik samast gatividhiyan hain unse apne niyamak vyavhar ke aadhar par niyamit vyavhar ko nirdharan karne ki vidhi hi dharm kahalati hai haan dharm ke ikai me pujan zaroor hai hrithik shama the most evam indriya nigrah aadi dharm ke 10 stambh prakar bataye gaye hain ki dharm in 10 vidhiyon se sadhan kiya jata pujan ki baat hai puja hi dharm nahi hai puja dharm ki ek ikai hai dharm ka ek hissa hai puja avashya me pujan ki prakriya dharmik aman ki pehchaan karati hai magar yah samajhna ki sirf puja path kar lena hi dharmik hone ki pehchaan hai yah tarksangat nahi hai ya shastron ke aadhar par uchit nahi hai dharm ki anya ikaiyan bhi hai jisme daan hai tab vaah vrat hai name hai aacharan aur bhi bahut saari baat jai shrimannarayan

धर्म ही पूजा है या फिर पूजा ही धर्म है यह प्रश्न जो आपने पूछा है या बड़ा ही गुण प्रश्न है

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Usha Devi Urawat Krishna

हाउस वाईफ

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घर में पूजा है या फिर पूजा ही धर्म है सबसे बड़ा धर्म तो इंसान का कर्तव्य है कर्म है अगर इंसान का कर्म अच्छा है तो सबसे बड़ी पूजा है अगर किसी के प्रति उसकी भावनाएं अच्छी है तो सबसे बड़ा धर्म है अधर्म पूजा तो अपने मन का ही है आपको जिस में रुचि हो वह आप कर सकते हैं अगर आपका मन मानता है कि मैं पूजा करूं पूजा ही धर्म है तो उसे मानने और अगर आपका मन करता है घर भी पूजा है उसे भी माननीय दोनों का सीन है धर्म को भी पूजा बोला जाता पूजा को भी धर्म बोला जाता है अपने अपने धर्म का सभी कोई पालन करते हैं जैसे हिंदू हैं मंदिरों में जाते हैं मुस्लिम है तो क्या होता और लोगों का उसमें जाते हैं अल्लाह अकबर आजम पड़ते हैं उसमें मस्ती धाबी मस्जिद में जाते हैं तो अपने घर में जाते हैं मरियम की पूजा करती जो करते हैं प्रार्थना करते हैं पूरे करते हैं तू हर किसी का बेस्ट पंजाबी सरदार दी तो अपने धर्म का पूजा करते हैं मासिक धर्म है तो अपना पूजा करके अपना धर्म है अपने तरीके से हर कोई पूजा करता है और सबसे बड़ी पूजा मन की अच्छी भावनाएं हैं अच्छे कर्म है और लोगों के प्रति अच्छे कर्तव्य हैं बड़ों के प्रति आदर हैं वही आधार हमें झुकना सिखाती है धर्म क्या है धर्म उसे कहते हैं जिसे करने में मन को शांति मिले बड़ों का आदर करते हैं जैसे बड़ों के सामने झुकते हैं तो इसका यह मतलब नहीं कि मैं उनके सामने क्यों झुकू जी नहीं आप आदर और सम्मान दे रहे हैं बड़ों को इसलिए आप उनके सामने झुक रहे हैं इसी तरह धर्म अगर आप किसी देवी देवता को मानते हैं आप धर्म मानते हैं तो फिर आप पूजा करें या अपने धर्म का हर किसी का धर्म अपने लिए प्रिय होता है अधर्म ही पूजा है पूजा ही धर्म है

ghar me puja hai ya phir puja hi dharm hai sabse bada dharm toh insaan ka kartavya hai karm hai agar insaan ka karm accha hai toh sabse badi puja hai agar kisi ke prati uski bhaavnaye achi hai toh sabse bada dharm hai adharma puja toh apne man ka hi hai aapko jis me ruchi ho vaah aap kar sakte hain agar aapka man maanta hai ki main puja karu puja hi dharm hai toh use manne aur agar aapka man karta hai ghar bhi puja hai use bhi mananiya dono ka seen hai dharm ko bhi puja bola jata puja ko bhi dharm bola jata hai apne apne dharm ka sabhi koi palan karte hain jaise hindu hain mandiro me jaate hain muslim hai toh kya hota aur logo ka usme jaate hain allah akbar azam padate hain usme masti Dhabi masjid me jaate hain toh apne ghar me jaate hain mariyam ki puja karti jo karte hain prarthna karte hain poore karte hain tu har kisi ka best punjabi sardar di toh apne dharm ka puja karte hain maasik dharm hai toh apna puja karke apna dharm hai apne tarike se har koi puja karta hai aur sabse badi puja man ki achi bhaavnaye hain acche karm hai aur logo ke prati acche kartavya hain badon ke prati aadar hain wahi aadhar hamein jhukna sikhati hai dharm kya hai dharm use kehte hain jise karne me man ko shanti mile badon ka aadar karte hain jaise badon ke saamne jhukate hain toh iska yah matlab nahi ki main unke saamne kyon jhuku ji nahi aap aadar aur sammaan de rahe hain badon ko isliye aap unke saamne jhuk rahe hain isi tarah dharm agar aap kisi devi devta ko maante hain aap dharm maante hain toh phir aap puja kare ya apne dharm ka har kisi ka dharm apne liye priya hota hai adharma hi puja hai puja hi dharm hai

घर में पूजा है या फिर पूजा ही धर्म है सबसे बड़ा धर्म तो इंसान का कर्तव्य है कर्म है अगर इ

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पूजा है कर्म है धर्म एक सिस्टम है धर्मा हम जहां भी जिस जगह भी पैदा हुए तो दुनिया में आने के बाद की बात है पूजा ईश्वर के लिए अनंत काली ने जिसे निरंजन निराकार है वह किसी को दिखता नहीं उसका कोई औकात नहीं उसका कोई मां बाप का बेटा नहीं तो शादी में भी इंसान में बीए दरिंदों परिंदा भी है सब जगह

puja hai karm hai dharm ek system hai dharma hum jaha bhi jis jagah bhi paida hue toh duniya me aane ke baad ki baat hai puja ishwar ke liye anant kali ne jise niranjan nirakaar hai vaah kisi ko dikhta nahi uska koi aukat nahi uska koi maa baap ka beta nahi toh shaadi me bhi insaan me BA darindo parinda bhi hai sab jagah

पूजा है कर्म है धर्म एक सिस्टम है धर्मा हम जहां भी जिस जगह भी पैदा हुए तो दुनिया में आने क

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Dr. Mahesh Mohan Jha

Asst. Professor,Astrologer,Author

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नमस्कार आपका प्रश्न धर्म ही पूजा है या फिर पूजा ही धर्म मैं आपको बता दूं पूजा अलग है धर्म अलग धर्म आपको धारण करना है और धारण करने के बाद फिर आप पूजा कर पूजा जो है वह आपके जो भी इस है जो भी आराध्य देव है उनका आदर सत्कार ही पूजा है उनके प्रति प्रेम ही पूजा है और धर्म को आपको धारण करना है मानव कल्याण के लिए कर मानव कल्याण के लिए आप धर्म को धारण करते हैं उससे ईश्वर भी प्रसन्न हुई और इस तरह से वह भी एक पूजा ही कहलाएगा कोई शेर धर्म अलग है पूजा अलग धर्म आपको धारण करना है और पूजा अपने आराध्य इष्ट देव के प्रति जो आपका प्रेम व्यक्त करते हैं वह पूजा है धन्यवाद

namaskar aapka prashna dharm hi puja hai ya phir puja hi dharm main aapko bata doon puja alag hai dharm alag dharm aapko dharan karna hai aur dharan karne ke baad phir aap puja kar puja jo hai vaah aapke jo bhi is hai jo bhi aradhya dev hai unka aadar satkar hi puja hai unke prati prem hi puja hai aur dharm ko aapko dharan karna hai manav kalyan ke liye kar manav kalyan ke liye aap dharm ko dharan karte hain usse ishwar bhi prasann hui aur is tarah se vaah bhi ek puja hi kehlaega koi sher dharm alag hai puja alag dharm aapko dharan karna hai aur puja apne aradhya isht dev ke prati jo aapka prem vyakt karte hain vaah puja hai dhanyavad

नमस्कार आपका प्रश्न धर्म ही पूजा है या फिर पूजा ही धर्म मैं आपको बता दूं पूजा अलग है धर्म

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हेलो दोस्तों मैं आपका विशाल कुमार बताना चाहता हूं धर्म की पूजा है या फिर पूजा ही धर्म है पहले मैं इस बात यह प्रश्न का उत्तर देना चाहूं तो मैं कहना चाहता हूं कि कर्म ही पूजा है अगर हम अच्छे कर्म करते हैं तो ही हमारे लिए सबसे बड़ी पूजा है और अगर हम कर्म करते हैं तो पूजा के रूप में धर्म करनी होती है यानी कि धर्म मिलती है पूजा के अनुरूप धर्म होती है अगर अच्छे कर नहीं करेंगे जरूर है कि शक्ति से अधिक होगी तो सब हो गए तो धर्म नष्ट होगा लेकिन सकते नहीं इसीलिए कर्म जो है सबसे बड़ी है तो कर्म के अनुकूल पूजा बड़ी है और पूजा है इसलिए हम लोग करते हैं पूजा ही धर्म है

hello doston main aapka vishal kumar batana chahta hoon dharm ki puja hai ya phir puja hi dharm hai pehle main is baat yah prashna ka uttar dena chahu toh main kehna chahta hoon ki karm hi puja hai agar hum acche karm karte hain toh hi hamare liye sabse badi puja hai aur agar hum karm karte hain toh puja ke roop me dharm karni hoti hai yani ki dharm milti hai puja ke anurup dharm hoti hai agar acche kar nahi karenge zaroor hai ki shakti se adhik hogi toh sab ho gaye toh dharm nasht hoga lekin sakte nahi isliye karm jo hai sabse badi hai toh karm ke anukul puja badi hai aur puja hai isliye hum log karte hain puja hi dharm hai

हेलो दोस्तों मैं आपका विशाल कुमार बताना चाहता हूं धर्म की पूजा है या फिर पूजा ही धर्म है प

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