भगवान का अर्थ?...


user

Ajay Kumar

Astrologer With Advocate

6:12
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भगवान का अर्थ होता है भगवान भगवान हमारे हिंदू धर्म में भगवान की पूजा होती है और भगवान का अर्थ भग का मतलब होता यूनी शो कामाख्या मंदिर में स्थापित है जो यीशु देवल का सिद्ध पीठ मंदिर है वान का मतलब होता है मैं हम मनुष्य जाति भक्त प्लस 1 बराबर भगवान कहीं ना कहीं मनीष हिंदू जाति कितनी सारी सुधारना है और मैं ज्योति शास्त्री अजय कुमार धूम मचा लूंगा की भक्तो यूनी 1 दिसंबर हम लोग तू अर्थ यह है कि भगवान की पूजा हम लोग करते हैं मगर कहीं ना कहीं हम लोग अपनी पूजा स्वयं करते अपने आपको पूजा करते हैं अपने आप को देखते हैं अपने आप को खोजते हैं अपने आप को सर्च करते हैं कि आखिर हम कौन हैं हम कहां से आए इसी का दूसरा रूप भगवान है और एक मूर्ति को स्थापित करके हम उस मृत में अपने आप को स्थापित करते हैं और देखते हैं कि मेरे अंदर कितनी ज्यादा शालीनता है हमारे अंदर कितनी भक्ति है हम भक्ति में कितनी विभोर हो सकती हैं और अपनी भगवान कितना जगह सकते हैं इसीलिए बोला गया शरणागत दीनार तक परित्राना ंपरा यानी सर्वोच्च आरती हरे देवी नारायणी नमोस्तुते जितने भी संसार में जूनिया हैं सारे देवी देवता के अधीन है वह देवी देवता के सारी दुनिया प्रेम नहीं है और जितने भी हैं सब अधीन है कहने का अर्थ है कि बोला जाता है मन चंगा तो कठौती में गंगा अगर हम मन को स्वस्थ रखे तो भगवान मेरे अंदर है इसीलिए भगवान है क्योंकि हमारा धर्म सनातन है हमारा धर्म सनातन ही है और हम सनातन धर्म से हैं तो भगवान भी हैं और उनको श्रद्धापूर्वक अगर पूजा किया जाए अच्छे से पूजा किया जाए तो भगवान हमारे साथ क्योंकि भगवान कहीं इधर-उधर नहीं भगवान हमारे मन में ही भगवान का जो रूप है उस रूप में बुद्धिजीवी प्राणी मानव आदमी को भी भगवान बनाए हैं अब सोचा जाए कि भगवान की जो आकृति है उस स्थिति में मनुष्य जाति को भी देखने में उसी आकृति को मनुष्य जाति भी लगता है तो इसलिए क्योंकि भगवान हम लोग के अंदर हैं सारे जीव जंतु के अंदर है मगर हम लोग बुद्धिजीवी प्राणी है इस कारण से हम लोग भगवान को सर्च कर सकते हैं जो तक शान से जैसे अपने आप के अंग हम अब हमारे अंदर मनीष जाति के अंदर पंचतत्व पंच भूतानि पंच शरीर जल पावक गगन समीरा पंच तत्व बना धाम शरीरा पांच तत्व को पहचान कर लेता है उसे भगवान ही हो जाता है हमारे पूरा भारत वर्ष पूरा ब्रह्मांड में ऋषि मुनि लोग जितने भी हैं वह भगवान की तिल्ली क्यों हो जाते हैं क्यों हूं अपने शरीर को इतना भगवान के अनुरूप बना देते हैं कि वह भगवान ही हो जाते हैं क्योंकि पांच तत्वों में से पांच तत्व जीवधारी शरीर को रखने के लिए बहुत जरूरी होता है और जूजू चौक तक तपस्या से पांच तत्व को बैलेंस कर लेता है भगवान स्वरूप ही माना जाता है इसीलिए बोला जाता है की शुक्रिया नाड़ी शोधन योगासन और उसके बाद आपका कुंडली जागृत जागरण इस दुष्ट क्रियाएं हैं भगवान के रास्ते में जो भगवान को पहचानने का यह रास्ता है माध्यम है क्योंकि यह स्थूल शरीर नगरी में आकर के जो नहीं हो पाएगा उसके लिए हम कितना भी जग से नहा ले अपने शरीर को अपने जो शरीर को ऊपरी आवरण को सेंट लगाकर की दिशा से कपड़ा होता है उसमें से कपड़े जिसको हम साफ कर सकते हैं मगर मन के अंदर जो चीज है उसको साफ करने के लिए भगवान का बना हुआ रास्ते में चलना जरूरी होगा और वह वास्तविकता है शुक्रिया नाड़ी शोधन और बहुत सारी क्रियाएं हैं मुद्रा सर्च तू यह सब प्राप्त करने के बाद मनुष्य भगवान खुद हो सकता है और प्रभु मिलन होना चाहिए तभी प्रभु भक्ति भगवान का अर्थ ही भगवान भगवान भगवान और मुक्ता मुंशीलाल धन्यवाद

bhagwan ka arth hota hai bhagwan bhagwan hamare hindu dharm me bhagwan ki puja hoti hai aur bhagwan ka arth bhag ka matlab hota Tunisian show kamakhya mandir me sthapit hai jo yeshu deol ka siddh peeth mandir hai i ka matlab hota hai main hum manushya jati bhakt plus 1 barabar bhagwan kahin na kahin manish hindu jati kitni saari sudharna hai aur main jyoti shastri ajay kumar dhoom macha lunga ki bhakto Tunisian 1 december hum log tu arth yah hai ki bhagwan ki puja hum log karte hain magar kahin na kahin hum log apni puja swayam karte apne aapko puja karte hain apne aap ko dekhte hain apne aap ko khojate hain apne aap ko search karte hain ki aakhir hum kaun hain hum kaha se aaye isi ka doosra roop bhagwan hai aur ek murti ko sthapit karke hum us mrit me apne aap ko sthapit karte hain aur dekhte hain ki mere andar kitni zyada shalinata hai hamare andar kitni bhakti hai hum bhakti me kitni vibhor ho sakti hain aur apni bhagwan kitna jagah sakte hain isliye bola gaya sharanagat dinar tak paritrana mpara yani sarvoch aarti hare devi narayani namostute jitne bhi sansar me juniya hain saare devi devta ke adheen hai vaah devi devta ke saari duniya prem nahi hai aur jitne bhi hain sab adheen hai kehne ka arth hai ki bola jata hai man changa toh kathauti me ganga agar hum man ko swasth rakhe toh bhagwan mere andar hai isliye bhagwan hai kyonki hamara dharm sanatan hai hamara dharm sanatan hi hai aur hum sanatan dharm se hain toh bhagwan bhi hain aur unko shraddhapurvak agar puja kiya jaaye acche se puja kiya jaaye toh bhagwan hamare saath kyonki bhagwan kahin idhar udhar nahi bhagwan hamare man me hi bhagwan ka jo roop hai us roop me buddhijeevi prani manav aadmi ko bhi bhagwan banaye hain ab socha jaaye ki bhagwan ki jo akriti hai us sthiti me manushya jati ko bhi dekhne me usi akriti ko manushya jati bhi lagta hai toh isliye kyonki bhagwan hum log ke andar hain saare jeev jantu ke andar hai magar hum log buddhijeevi prani hai is karan se hum log bhagwan ko search kar sakte hain jo tak shan se jaise apne aap ke ang hum ab hamare andar manish jati ke andar panchatatwa punch bhutani punch sharir jal pawak gagan samira punch tatva bana dhaam sharira paanch tatva ko pehchaan kar leta hai use bhagwan hi ho jata hai hamare pura bharat varsh pura brahmaand me rishi muni log jitne bhi hain vaah bhagwan ki tilli kyon ho jaate hain kyon hoon apne sharir ko itna bhagwan ke anurup bana dete hain ki vaah bhagwan hi ho jaate hain kyonki paanch tatvon me se paanch tatva jeevadhari sharir ko rakhne ke liye bahut zaroori hota hai aur juju chauk tak tapasya se paanch tatva ko balance kar leta hai bhagwan swaroop hi mana jata hai isliye bola jata hai ki shukriya naadi sodhan yogasan aur uske baad aapka kundali jagrit jagran is dusht kriyaen hain bhagwan ke raste me jo bhagwan ko pahachanne ka yah rasta hai madhyam hai kyonki yah sthool sharir nagari me aakar ke jo nahi ho payega uske liye hum kitna bhi jag se naha le apne sharir ko apne jo sharir ko upari aavaran ko sent lagakar ki disha se kapda hota hai usme se kapde jisko hum saaf kar sakte hain magar man ke andar jo cheez hai usko saaf karne ke liye bhagwan ka bana hua raste me chalna zaroori hoga aur vaah vastavikta hai shukriya naadi sodhan aur bahut saari kriyaen hain mudra search tu yah sab prapt karne ke baad manushya bhagwan khud ho sakta hai aur prabhu milan hona chahiye tabhi prabhu bhakti bhagwan ka arth hi bhagwan bhagwan bhagwan aur mukta munshilal dhanyavad

भगवान का अर्थ होता है भगवान भगवान हमारे हिंदू धर्म में भगवान की पूजा होती है और भगवान का अ

Romanized Version
Likes  3  Dislikes    views  78
WhatsApp_icon
6 जवाब
qIcon
ask
ऐसे और सवाल
Loading...
Loading...
Likes  25  Dislikes    views  330
WhatsApp_icon
user

B.P.Sharma

By Profession a Mech. Engineer (Machinning Expert) in advance Technology , Having Deep Understanding , Belief and Faith In Almighty "THE ONLY LIFE CONTROLLER" Also Having Firm Faith In Implementing Positive Thoughts As Per Time, Place and Situation To Achieve Goal By Getting Motivation, Through Principle Of Attraction.

2:13
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भगवान एक परम व्यापक शब्द है जिससे संसार उत्पन्न होता है किससे संसार का पालन होता है और जो अपने आप में सभी को समाहित कर लेता है उस शब्द का व्यापक नाम भगवान है कभी-कभी ऐसा लगने लगता है कि गुरु और भगवान दोनों में कौन बड़े हैं कुछ शक्तियां भगवान कभी जीव मात्र को नहीं देते हैं वह चीजें अपने हाथ में रखते हैं जो 3 मूलभूत कार्य हैं उनको अपने हाथ में रहते हैं बाकी जितनी भी शक्तियां होती है सब ग्रुप में समाहित हो जाती है और वह गुरु गुरु परम भक्त भगवान का ही एक रूप हो जाता है अर्थात भगवान में खुद समाहित हो जाता है रात से निष्कर्ष निकलता है कि भगवान एक प्रकृति रूप वह सकती हैं जिससे संसार उत्पन्न होता है जिससे संसार का पालन होता है और जो कल्प के अंत में सभी संरचनाओं को अपने अंदर समाहित कर लेता है उसका कभी जन्म नहीं होता उसका कभी अंत नहीं है अनंत है नीति है धन्यवाद

bhagwan ek param vyapak shabd hai jisse sansar utpann hota hai kisse sansar ka palan hota hai aur jo apne aap me sabhi ko samahit kar leta hai us shabd ka vyapak naam bhagwan hai kabhi kabhi aisa lagne lagta hai ki guru aur bhagwan dono me kaun bade hain kuch shaktiyan bhagwan kabhi jeev matra ko nahi dete hain vaah cheezen apne hath me rakhte hain jo 3 mulbhut karya hain unko apne hath me rehte hain baki jitni bhi shaktiyan hoti hai sab group me samahit ho jaati hai aur vaah guru guru param bhakt bhagwan ka hi ek roop ho jata hai arthat bhagwan me khud samahit ho jata hai raat se nishkarsh nikalta hai ki bhagwan ek prakriti roop vaah sakti hain jisse sansar utpann hota hai jisse sansar ka palan hota hai aur jo kalp ke ant me sabhi sanrachanaon ko apne andar samahit kar leta hai uska kabhi janam nahi hota uska kabhi ant nahi hai anant hai niti hai dhanyavad

भगवान एक परम व्यापक शब्द है जिससे संसार उत्पन्न होता है किससे संसार का पालन होता है और

Romanized Version
Likes  4  Dislikes    views  82
WhatsApp_icon
play
user

Saurabh

Student

0:19

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भगवान का अर्थ होता है ऐश्वर्या ली या पूज्यया मान्य और अगर संज्ञा में से लेंगे तो इसका इसमें सीधा सा अर्थ ईश्वर के रूप में मोदी आया था धन्यवाद

bhagwan ka arth hota hai aishwarya li ya pujyaya manya aur agar sangya me se lenge toh iska isme seedha sa arth ishwar ke roop me modi aaya tha dhanyavad

भगवान का अर्थ होता है ऐश्वर्या ली या पूज्यया मान्य और अगर संज्ञा में से लेंगे तो इसका इसम

Romanized Version
Likes  7  Dislikes    views  51
WhatsApp_icon
user

KMP campus

Engineer

1:08
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जैसे आपने पूछा है कि भगवान का क्या अर्थ होता है तो भगवान का अर्थ वही होता है जो हम समझते हैं मतलब आपका विश्वास मुसीबत ना जाफर जाते आपका कोई माल है तो कहीं कोई एक्सीडेंट टाइप का हो जाए तो प्रॉब्लम बहुत बढ़िया जाए तो उस टाइम सबसे पहले आप क्या करते हो फर्स्ट ऑफ ऑल आपके दिमाग में आता है कि हे भगवान मुझे बचा ले किसी ना किसी को तुरंत ही बुलाने लगते हैं उस प्रॉब्लम में महसूस करते कोई आकर मुझे बचा है तो जिसको आप बुलाते हो ना उस मुसीबत में उस प्रॉब्लम है वही भगवान होता है आपकी श्रद्धा विश्वास भी भगवान है तो ऐसा नहीं है कि कुछ लोग कहते हैं भगवान हैं कुछ लोग कहते नहीं हैं तो इन सब चीजों को सोचने से बेहतर यह है कि जब हम बहुत मुसीबत में होते हैं उस टाइम हमारे दिल में क्या ख्याल आता है किस को याद करते हैं और हम जिसको भी याद करते हमारे लिए वही भगवान होता है कि हम और कौन प्रॉब्लम से बाहर निकाल उसी चीज को भगवान समझते हैं

jaise aapne poocha hai ki bhagwan ka kya arth hota hai toh bhagwan ka arth wahi hota hai jo hum samajhte hain matlab aapka vishwas musibat na jaafar jaate aapka koi maal hai toh kahin koi accident type ka ho jaaye toh problem bahut badhiya jaaye toh us time sabse pehle aap kya karte ho first of all aapke dimag me aata hai ki hai bhagwan mujhe bacha le kisi na kisi ko turant hi bulane lagte hain us problem me mehsus karte koi aakar mujhe bacha hai toh jisko aap bulate ho na us musibat me us problem hai wahi bhagwan hota hai aapki shraddha vishwas bhi bhagwan hai toh aisa nahi hai ki kuch log kehte hain bhagwan hain kuch log kehte nahi hain toh in sab chijon ko sochne se behtar yah hai ki jab hum bahut musibat me hote hain us time hamare dil me kya khayal aata hai kis ko yaad karte hain aur hum jisko bhi yaad karte hamare liye wahi bhagwan hota hai ki hum aur kaun problem se bahar nikaal usi cheez ko bhagwan samajhte hain

जैसे आपने पूछा है कि भगवान का क्या अर्थ होता है तो भगवान का अर्थ वही होता है जो हम समझते ह

Romanized Version
Likes  5  Dislikes    views  76
WhatsApp_icon
user

123

Lawyer

0:15
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अर्थात जो भाग्य या योनि से उत्पन्न ना हुआ हो उसे भगवान कहते हैं

arthat jo bhagya ya yoni se utpann na hua ho use bhagwan kehte hain

अर्थात जो भाग्य या योनि से उत्पन्न ना हुआ हो उसे भगवान कहते हैं

Romanized Version
Likes  2  Dislikes    views  91
WhatsApp_icon
qIcon
ask
QuestionsProfiles

Vokal App bridges the knowledge gap in India in Indian languages by getting the best minds to answer questions of the common man. The Vokal App is available in 11 Indian languages. Users ask questions on 100s of topics related to love, life, career, politics, religion, sports, personal care etc. We have 1000s of experts from different walks of life answering questions on the Vokal App. People can also ask questions directly to experts apart from posting a question to the entire answering community. If you are an expert or are great at something, we invite you to join this knowledge sharing revolution and help India grow. Download the Vokal App!