भारत में शिक्षा के बारें में बताएँ?...


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भारत की शिक्षा व्यवस्था बहुत ही उन्नत व्यवस्था प्राचीन समय में थी यह हम कह सकते हैं क्योंकि विश्व का प्रथम विश्वविद्यालय नालंदा उसके बाद तक्षशिला इशारे विश्वविद्यालय बने तो हम यह कह सकते हैं कि संपूर्ण विश्व को शिक्षा देने का काम जो है और शिक्षित करने का कार्य जो है उच्च शिक्षा का मार्गदर्शन करने का कार्य है यह भारतवर्ष ने किया भारतवर्ष में मैं गुरुकुल ओं की व्यवस्था थी ग्रंथ लिखे गए आज विश्व में जितनी भारतीय पांडुलिपि या हैं इतनी विश्व के किसी भी बना तो भाषा में है ना ही किसी देश के पास है यह बताती हैं लगभग 4500000 पांडुलिपियों भारतवर्ष में संस्कृत देवनागरी ग्राम निवारी आदि लिपियों में लिखी हुई रखी हैं अंग्रेजी चमक व्यवस्था रही है और जब हम भारतीय दर्शनों को देखें भारतीय वेदांग वेद वेद अरण्यक पुराण धर्म ग्रंथ इतिहास ग्रंथ अर्थशास्त्र ज्योतिष विज्ञान शब्द विज्ञान इस तरह के शास्त्रों को जो हम देखेंगे तो बहुत सारी चीजें हमें देखने को मिलते हैं मिलते हैं यह प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था वर्तमान में भारतीय शिक्षा व्यवस्था ठीक है चल रही है लेकिन पाश्चात्य शिक्षा व्यवस्था से प्रभावित दिख रही है पाश्चात्य शिक्षा व्यवस्था का चादर ओढ़ करके चल रही है तो वर्तमान में पूर्ण रूप में भारतीय शिक्षा व्यवस्था नहीं चल रही है भारत की शिक्षा व्यवस्था आधुनिक के चीजों को लेकर के चल रहे यद्यपि आधुनिक कीजिए जरूरी है वह भी होना चाहिए लेकिन थोड़ा कहीं ना कहीं हमें परिवर्तन की आवश्यकता है क्योंकि जिस समय अंग्रेजों का यहां था 1835 में काले हैं तो मैं काले महोदय लिख रहे हैं कि यहां पर 9798 परसेंट या 99% शिक्षा व्यवस्था थी सब के सब लोग शिक्षित होगा हुआ करते थे और उस समय अगर सब के सब लोग शिक्षित हुए तो आज हम इतने वर्षों के बाद भी अगर हम प्रयास नहीं कर पा रहे हैं कि हमारे यहां हंड्रेड परसेंट शिक्षित लोग हो जाए तो कहीं ना कहीं हमारी शिक्षा व्यवस्था में दोष है हमें उस दोस्त को सुधारने की आवश्यकता है पाश्चात्य शिक्षा व्यवस्था की जो कमियां हैं उनको हम दूर करके अपने यहां की शिक्षा व्यवस्था को सुधारें और अपने यहां की जो शिक्षा व्यवस्था के गुण हैं उनको अपना करके उसे हम बढ़ाएं त्याग पर आदर्श संस्कार परख शिक्षा को बढ़ावा देना केवल विकृत विकास को ले आए अपितु समन्वय के सहित है जो विकास है समाज को साथ में लेकर चलने वाला जो विकास है ऐसी शिक्षा व्यवस्था हम कल्पित करें ऐसी शिक्षा व्यवस्था कल्पित करें जिसमें सिक्के भाव पूर्ण शिक्षा मिले केवल शिक्षा एक पुस्तक विज्ञान ना रह जाए जो हमें आत्म बोध कराने वाली हो जो हमें भावों से पूर्ण करने वाली हो ऐसी शिक्षा हमें चाहिए और ऐसी शिक्षा व्यवस्था हमारी भारतीय शिक्षा व्यवस्था थी और कुछ अंशों में अभी है अभी धन्यवाद

bharat ki shiksha vyavastha bahut hi unnat vyavastha prachin samay me thi yah hum keh sakte hain kyonki vishwa ka pratham vishwavidyalaya nalanda uske baad takshashila ishare vishwavidyalaya bane toh hum yah keh sakte hain ki sampurna vishwa ko shiksha dene ka kaam jo hai aur shikshit karne ka karya jo hai ucch shiksha ka margdarshan karne ka karya hai yah bharatvarsh ne kiya bharatvarsh me main gurukul on ki vyavastha thi granth likhe gaye aaj vishwa me jitni bharatiya pandulipi ya hain itni vishwa ke kisi bhi bana toh bhasha me hai na hi kisi desh ke paas hai yah batati hain lagbhag 4500000 paandulipiyon bharatvarsh me sanskrit devnagari gram niwari aadi lipiyon me likhi hui rakhi hain angrezi chamak vyavastha rahi hai aur jab hum bharatiya darshano ko dekhen bharatiya vedang ved ved aranyak puran dharm granth itihas granth arthashastra jyotish vigyan shabd vigyan is tarah ke shastron ko jo hum dekhenge toh bahut saari cheezen hamein dekhne ko milte hain milte hain yah prachin bharatiya shiksha vyavastha vartaman me bharatiya shiksha vyavastha theek hai chal rahi hai lekin pashchayat shiksha vyavastha se prabhavit dikh rahi hai pashchayat shiksha vyavastha ka chadar odh karke chal rahi hai toh vartaman me purn roop me bharatiya shiksha vyavastha nahi chal rahi hai bharat ki shiksha vyavastha aadhunik ke chijon ko lekar ke chal rahe yadyapi aadhunik kijiye zaroori hai vaah bhi hona chahiye lekin thoda kahin na kahin hamein parivartan ki avashyakta hai kyonki jis samay angrejo ka yahan tha 1835 me kaale hain toh main kaale mahoday likh rahe hain ki yahan par 9798 percent ya 99 shiksha vyavastha thi sab ke sab log shikshit hoga hua karte the aur us samay agar sab ke sab log shikshit hue toh aaj hum itne varshon ke baad bhi agar hum prayas nahi kar paa rahe hain ki hamare yahan hundred percent shikshit log ho jaaye toh kahin na kahin hamari shiksha vyavastha me dosh hai hamein us dost ko sudhaarne ki avashyakta hai pashchayat shiksha vyavastha ki jo kamiyan hain unko hum dur karke apne yahan ki shiksha vyavastha ko sudhare aur apne yahan ki jo shiksha vyavastha ke gun hain unko apna karke use hum badhaye tyag par adarsh sanskar parakh shiksha ko badhawa dena keval vikrit vikas ko le aaye apitu samanvay ke sahit hai jo vikas hai samaj ko saath me lekar chalne vala jo vikas hai aisi shiksha vyavastha hum kalpit kare aisi shiksha vyavastha kalpit kare jisme sikke bhav purn shiksha mile keval shiksha ek pustak vigyan na reh jaaye jo hamein aatm bodh karane wali ho jo hamein bhavon se purn karne wali ho aisi shiksha hamein chahiye aur aisi shiksha vyavastha hamari bharatiya shiksha vyavastha thi aur kuch anshon me abhi hai abhi dhanyavad

भारत की शिक्षा व्यवस्था बहुत ही उन्नत व्यवस्था प्राचीन समय में थी यह हम कह सकते हैं क्यों

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Dr. Ashwani Kumar Singh

Chairman & Director at VEMS

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नमस्कार वह कल के नेता वह कल एप्स पर आपका स्वागत है आप ने भारतीय शिक्षा के बारे में लिखिए भारत का शिक्षा से बहुत गहरा संबंध रहा आज के समय में अब यह कोई छिपी हुई बात जानकार में कोई बात नहीं है कि विश्व मानव जाति में सबसे पहले शिक्षा कब विस्तृत और उन्नत काल रांची सनातनी संस्कृति का केंद्र भारत शिक्षा जो हमारी पद्धति की मौत हुई बाहर से आए हुए आक्रांता on&on लूटने वाले डकैतों याहू समूह और बाद में ईस्ट इंडिया कंपनी के रूप में अंग्रेजों का शासन यह जो बाहर से आक्रांत आए मुगलिया यह लोग आए ई-मेल जहां से आए थे वहां के हालात अच्छे तरीके और इनका जो धर्म और संस्कृति ना वह दूसरे की चीजों को हड़पना और उसके सिर अपना कुछ लगा देना कि यह मेरा है हम नहीं किया तो उनके लिए दिक्कत था कि जो यह सांस्कृतिक केंद्र और जो इसके ओरिजिन में मानव जाति के सभ्यता के नस नस उसके रहते यहां पर इनका टिकना मुश्किल तो इन लोगों ने उस सारी पद्धति को नष्ट की जॉइन इन की संस्कृति को पनपने में बाधा पहुंचा है और उन कमियों को ढूंढा जिसके बदौलत यह अपना जड़ जमा सके यह मुगल भी और ब्रिटिश पर उन्होंने शिक्षा पद्धति में वह सारी चीजें गुसाईं वह सारा तरीका अपनाया भारतीय ही लोगों को जो डर से इस्लाम स्वीकार कर सकते थे उनको डरा के जो लोग से कर सकते हैं फूलों को देखकर जो एक दूसरे से राजा आपस में व्यक्ति आपस में यह परिवार आपस में बैर रखते थे उनके बना नाश्ता का लाभ उठाते इन लोगों ने यहां जड़ जमाए चीजों को ध्वस्त किया जो इनकी मान्यता को स्थापित होने में बाधा देते और इसीलिए यहां की शिक्षा पद्धति विश्व की सबसे सुरक्षा व्यवस्थित और उत्तम उसका प्रभाव आज अमेरिका में जिस व्यक्ति ने शिक्षा को वहां पर व्यवस्थित किया है वर्तमान के हिसाब से आज फिर वापस कोरोना वायरस के कारण हम उन तमाम चीजों को साफ-साफ देख पा रहे हैं जो भारत में थी भारत के लिए योगी और मानव जाति के लिए अमेरिका में व्यवस्थित शिक्षण करने में भारतीयों का भारतीय व्यक्ति आप सोच कर देखिए कि अपनी गुरुकुल परंपरा मानो कि किसी भी विशेष बुक परिष्कृत करके उसके जीवन का आधार बना हर मानव में कोई न कोई विशेषता होती है उस विशेषज्ञता के आधार पर उस मानव जीवन पर स्थापित करना और उसके लिए राष्ट्र और समाज के हित के अनुकूल बना यही शिक्षा पद्धति का मूल मंत्र और जब से यह हम लोगों को पश्चात कूड़ा करकट समझाना शुरू लोगों ने किया उसका परिणाम हम लोग देखते रहे हैं दूसरी एक बात पर चर्चा करना चाहूंगा देने वाली संस्था है वह अपने हित कारकों के अनुसार उस बहुत सारी चीजें उसमें कभी-कभी अच्छे लोग भी आ जाते हैं लेकिन आप जो भी देखिएगा मैग्सेसे पुरस्कार है और बाकी जो अभी तक यह विवाद विवाद रहित नहीं तो उन सारी चीजों को ध्यान में रखकर सारी चीज लुक करते रहे सुविधा के हिसाब से जो भी अधूरी आजादी से पहले तक करते रहे और शिक्षण के प्रारंभिक कालू में बच्चे के मन में शिक्षण और उसके बिग टिट्स में जो गुण समाहित होते हैं जंजाल उनको ढूंढना और उसके हिसाब से उनको शिक्षित करना परिष्कृत करना प्रशिक्षित करने के लिए उनको मोटिवेट करना प्रेरित करना यह शिक्षक का बोलता अपने गुरुकुल में जब बच्चा 20 22 साल में निकलता था गुरुकुल से वह अपना जीवन बिना जेब में एक पैसा रहे भी जीवन को कहीं भी बेटी तो किसी डिग्री की जरूरत नहीं मानव के मनुष्यता को जीवन को आगे बढ़ाते हुए जिस उत्कृष्टता की जरूरत होती थी उसके हिसाब से अपने को ढाल लेने की क्षमता गुरुकुल के लोगों में अभी भी अमेरिका में आप पागल 50 साल की उम्र है और अगर आपको मिलना चाहते हैं तो आपको किसी भी डिग्री किस टीम से आप पढ़ाई करके आए हैं इसके यह नहीं होता है उसकी कुछ परीक्षाएं होती है अगर वह परीक्षाएं अगर आप पास कर लेते हैं तो वह डिपार्टमेंट करता है कि आपको शिक्षा उस विषय का देना है यानी यानी क्या आप 80 साल की उम्र में भी आप तो हमने अपनी शिक्षण पद्धति पर जो बाहरी लोगों का भी पत्र हाउस के हिसाब से उसको हमारे भीतर जो शस्त्र और शास्त्र का समय संबंध संबंध में हुआ करता था गुरु की कृपा है करो ना कि कल से पहले से यह सारी चीजें पुनर्स्थापित होने की ओर है और पूरे विश्व की आशा भारत बना हुआ है और ईश्वर चाहेंगे तो निश्चित रूप से यह आशा परिपूर्ण और फलीभूत होगी शुक्रिया

namaskar vaah kal ke neta vaah kal apps par aapka swaagat hai aap ne bharatiya shiksha ke bare me likhiye bharat ka shiksha se bahut gehra sambandh raha aaj ke samay me ab yah koi chipi hui baat janakar me koi baat nahi hai ki vishwa manav jati me sabse pehle shiksha kab vistrit aur unnat kaal ranchi sanatani sanskriti ka kendra bharat shiksha jo hamari paddhatee ki maut hui bahar se aaye hue akranta on on lutane waale dakaiton yahoo samuh aur baad me east india company ke roop me angrejo ka shasan yah jo bahar se akrant aaye mooghaliya yah log aaye E male jaha se aaye the wahan ke haalaat acche tarike aur inka jo dharm aur sanskriti na vaah dusre ki chijon ko hadpana aur uske sir apna kuch laga dena ki yah mera hai hum nahi kiya toh unke liye dikkat tha ki jo yah sanskritik kendra aur jo iske origin me manav jati ke sabhyata ke nas nas uske rehte yahan par inka tikna mushkil toh in logo ne us saari paddhatee ko nasht ki join in ki sanskriti ko panapne me badha pohcha hai aur un kamiyon ko dhundha jiske badaulat yah apna jad jama sake yah mughal bhi aur british par unhone shiksha paddhatee me vaah saari cheezen gusain vaah saara tarika apnaya bharatiya hi logo ko jo dar se islam sweekar kar sakte the unko dara ke jo log se kar sakte hain fulo ko dekhkar jo ek dusre se raja aapas me vyakti aapas me yah parivar aapas me bair rakhte the unke bana nashta ka labh uthate in logo ne yahan jad jamaye chijon ko dhwast kiya jo inki manyata ko sthapit hone me badha dete aur isliye yahan ki shiksha paddhatee vishwa ki sabse suraksha vyavasthit aur uttam uska prabhav aaj america me jis vyakti ne shiksha ko wahan par vyavasthit kiya hai vartaman ke hisab se aaj phir wapas corona virus ke karan hum un tamaam chijon ko saaf saaf dekh paa rahe hain jo bharat me thi bharat ke liye yogi aur manav jati ke liye america me vyavasthit shikshan karne me bharatiyon ka bharatiya vyakti aap soch kar dekhiye ki apni gurukul parampara maano ki kisi bhi vishesh book parishkrit karke uske jeevan ka aadhar bana har manav me koi na koi visheshata hoti hai us visheshagyata ke aadhar par us manav jeevan par sthapit karna aur uske liye rashtra aur samaj ke hit ke anukul bana yahi shiksha paddhatee ka mul mantra aur jab se yah hum logo ko pashchat kooda karakat samajhana shuru logo ne kiya uska parinam hum log dekhte rahe hain dusri ek baat par charcha karna chahunga dene wali sanstha hai vaah apne hit kaarakon ke anusaar us bahut saari cheezen usme kabhi kabhi acche log bhi aa jaate hain lekin aap jo bhi dekhiega magsaysay puraskar hai aur baki jo abhi tak yah vivaad vivaad rahit nahi toh un saari chijon ko dhyan me rakhakar saari cheez look karte rahe suvidha ke hisab se jo bhi adhuri azadi se pehle tak karte rahe aur shikshan ke prarambhik kalu me bacche ke man me shikshan aur uske big tits me jo gun samahit hote hain janjal unko dhundhana aur uske hisab se unko shikshit karna parishkrit karna prashikshit karne ke liye unko motivate karna prerit karna yah shikshak ka bolta apne gurukul me jab baccha 20 22 saal me nikalta tha gurukul se vaah apna jeevan bina jeb me ek paisa rahe bhi jeevan ko kahin bhi beti toh kisi degree ki zarurat nahi manav ke manushyata ko jeevan ko aage badhate hue jis utkrishtata ki zarurat hoti thi uske hisab se apne ko dhal lene ki kshamta gurukul ke logo me abhi bhi america me aap Pagal 50 saal ki umar hai aur agar aapko milna chahte hain toh aapko kisi bhi degree kis team se aap padhai karke aaye hain iske yah nahi hota hai uski kuch parikshaen hoti hai agar vaah parikshaen agar aap paas kar lete hain toh vaah department karta hai ki aapko shiksha us vishay ka dena hai yani yani kya aap 80 saal ki umar me bhi aap toh humne apni shikshan paddhatee par jo bahri logo ka bhi patra house ke hisab se usko hamare bheetar jo shastra aur shastra ka samay sambandh sambandh me hua karta tha guru ki kripa hai karo na ki kal se pehle se yah saari cheezen punarsthapit hone ki aur hai aur poore vishwa ki asha bharat bana hua hai aur ishwar chahenge toh nishchit roop se yah asha paripurna aur falibhut hogi shukriya

नमस्कार वह कल के नेता वह कल एप्स पर आपका स्वागत है आप ने भारतीय शिक्षा के बारे में लिखिए भ

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संत श्री रामजी महाराज

ध्यान योगी, आध्यात्मिक गुरु, राम कथा भागवत कथा,प्रवक्ता वित्तीय सलाहकार राजनेता एवं विचारक

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वर्तमान में भारत के नहीं संपूर्ण विश्व केवल और केवल मात्र विज्ञान के तरफ दौड़ रहा है जिसे हम प्रकृति कहते हैं उसे हम भगवान करे अल्लाह कहे मौला कहे यीशु कहे जो कुछ कहे उस सर्वशक्तिमान के प्रभाव को भूलते जा रहे हैं नैतिकता को मात्र एक व्यवहार समझते हैं और उसको अपने ऊपर लागू करना जरूरी नहीं समझते हैं ऐसे में व्यक्ति को मैं विज्ञान का विरोधी नहीं हूं लेकिन केवल मात्र विकलांग होने से व्यक्ति भूखा हो जाता है आपका ज्ञान भी बड़े आपकी शिक्षा के अंदर नैतिक शिक्षा हो संस्कृति की शिक्षा और सामाजिक शिक्षा हो आध्यात्मिक शिक्षा हो आपकी वैदिक शिक्षा हो आपको हमारे भारत की ध्यान योग आदि की शिक्षा योग दर्शन है दर्शनशास्त्र को जाने मनु शिक्षा को जाने का समावेश हो तो बहुत अच्छा होगा धन्यवाद

vartaman me bharat ke nahi sampurna vishwa keval aur keval matra vigyan ke taraf daudh raha hai jise hum prakriti kehte hain use hum bhagwan kare allah kahe maula kahe yeshu kahe jo kuch kahe us sarvshaktimaan ke prabhav ko bhulte ja rahe hain naitikta ko matra ek vyavhar samajhte hain aur usko apne upar laagu karna zaroori nahi samajhte hain aise me vyakti ko main vigyan ka virodhi nahi hoon lekin keval matra viklaang hone se vyakti bhukha ho jata hai aapka gyaan bhi bade aapki shiksha ke andar naitik shiksha ho sanskriti ki shiksha aur samajik shiksha ho aadhyatmik shiksha ho aapki vaidik shiksha ho aapko hamare bharat ki dhyan yog aadi ki shiksha yog darshan hai darshanashastra ko jaane manu shiksha ko jaane ka samavesh ho toh bahut accha hoga dhanyavad

वर्तमान में भारत के नहीं संपूर्ण विश्व केवल और केवल मात्र विज्ञान के तरफ दौड़ रहा है जिसे

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डी.एस.पटनायक

सेवानिव्रृत प्राचार्य

4:09
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भारतीय शिक्षा व्यवस्था भारतीय भूगोल की फांसी एक बार है अलग-अलग राज्यों उत्तर दक्षिण पूर्व पश्चिम में विभिन्न रूप से बना हुआ है यह भाषा इसलिए प्रत्येक भाषा प्रत्येक बोली के हिसाब से ही शिक्षा का विस्तार किया गया है इसलिए हम यह नहीं कह सकते फिर इसमें केंद्रीय विद्यालय अलग हैं राज्य के विद्यालय के विद्यालयों का कांसेप्ट अलग है केंद्रीय विद्यालय पाठ्यक्रम कमोबेश अलग इसलिए हम यह नहीं कह सकते हैं कि भारत की शिक्षा व्यवस्था हमारे देश में बहुत विभिन्न प्रकार की विभिन्न प्रकार के बोर्ड हैं जबकि जब कोई देश स्वतंत्र होता है सबसे पहले अपनी शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की शिक्षा व्यवस्था है उसका एक स्वतंत्र शिक्षण पत्रिका होना एकरूपता लाने का प्रश्न नहीं है आज देखते हैं कि भारत की अखंडता अखंड खंडित करने वाले मापदंड है शिक्षा क्षमा करेंगे कहते हो मुझे बिल्कुल संकोच नहीं है इसको करने वाले हमारे बड़े बड़े दिक्कत विद्वान हैं जिन्होंने इस ओर ध्यान नहीं दिया इधर ध्यान दिया होता तो आज भारत हम कहते अखंड राष्ट्र हैं लेकिन विचारधारा खंडित है यहां पर और इन सब का सुधार शिक्षा से ही प्रारंभ होता है शिक्षा की ओर सर्वप्रथम समुचित ध्यान दिया जाना आवश्यक है सेंट्रल बोर्ड के विद्यार्थी राज्य बोर्ड के विद्यार्थियों पर विद्यालय आदि आदि अनेक प्रकार की शिक्षण पद्धतियां और शैक्षिक उपक्रम है परंतु यह सब असफल है अपने मोदी उद्देश्य को प्राप्त करने में केवल किताबी ज्ञान सब देते हैं आचरण का ध्यान कोई नहीं देखता है चरित्र निर्माण की प्रक्रिया ब्रिटनी उनके अंदर वह मनोबल नहीं हैं वह नहीं है वह टूटता नहीं है देश के बारे में सोचने की तो बात ही नहीं आज के विद्यार्थियों को देखिए वर्ल्ड के अंदर देश प्रेम का चुनाव होना चाहिए जो जुनून होना चाहिए वह नहीं क्योंकि आजकल देश प्रेम भी फैशन में दो बार आंदोलन पर झंडा उठाए देश प्रेम कथा ऐसी शिक्षा पद्धति किस देश की है जितना मैं जानती हूं जितना मैंने पढ़ा सुना और देखा मुझे अच्छा नहीं लगता है यह कहते हुए यह स्वतंत्र राष्ट्र की शिक्षा पत्र

bharatiya shiksha vyavastha bharatiya bhugol ki fansi ek baar hai alag alag rajyo uttar dakshin purv paschim me vibhinn roop se bana hua hai yah bhasha isliye pratyek bhasha pratyek boli ke hisab se hi shiksha ka vistaar kiya gaya hai isliye hum yah nahi keh sakte phir isme kendriya vidyalaya alag hain rajya ke vidyalaya ke vidhayalayo ka concept alag hai kendriya vidyalaya pathyakram kamobesh alag isliye hum yah nahi keh sakte hain ki bharat ki shiksha vyavastha hamare desh me bahut vibhinn prakar ki vibhinn prakar ke board hain jabki jab koi desh swatantra hota hai sabse pehle apni shiksha vyavastha ko sudhaarne ki shiksha vyavastha hai uska ek swatantra shikshan patrika hona ekrupta lane ka prashna nahi hai aaj dekhte hain ki bharat ki akhandata akhand khandit karne waale maapdand hai shiksha kshama karenge kehte ho mujhe bilkul sankoch nahi hai isko karne waale hamare bade bade dikkat vidhwaan hain jinhone is aur dhyan nahi diya idhar dhyan diya hota toh aaj bharat hum kehte akhand rashtra hain lekin vichardhara khandit hai yahan par aur in sab ka sudhaar shiksha se hi prarambh hota hai shiksha ki aur sarvapratham samuchit dhyan diya jana aavashyak hai central board ke vidyarthi rajya board ke vidyarthiyon par vidyalaya aadi aadi anek prakar ki shikshan paddhatiyan aur shaikshik upakram hai parantu yah sab asafal hai apne modi uddeshya ko prapt karne me keval kitabi gyaan sab dete hain aacharan ka dhyan koi nahi dekhta hai charitra nirmaan ki prakriya brittany unke andar vaah manobal nahi hain vaah nahi hai vaah tootata nahi hai desh ke bare me sochne ki toh baat hi nahi aaj ke vidyarthiyon ko dekhiye world ke andar desh prem ka chunav hona chahiye jo junun hona chahiye vaah nahi kyonki aajkal desh prem bhi fashion me do baar andolan par jhanda uthye desh prem katha aisi shiksha paddhatee kis desh ki hai jitna main jaanti hoon jitna maine padha suna aur dekha mujhe accha nahi lagta hai yah kehte hue yah swatantra rashtra ki shiksha patra

भारतीय शिक्षा व्यवस्था भारतीय भूगोल की फांसी एक बार है अलग-अलग राज्यों उत्तर दक्षिण पूर्व

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डाॅ. देवेन्द्र जोशी उज्जैन म प्र

पत्रकार, साहित्यकार शिक्षाविद

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भारत में ही नहीं सारी दुनिया में शिक्षा का एकमात्र उद्देश्य लोगों के सर्वांगीण विकास कर रहा है शिक्षक ही मनुष्य अपनी क्षमताओं का विकास कर पाता है जिस देश में शिक्षा का स्तर इतना ऊंचा होता है वह देश उतना अधिक आत्मनिर्भर और प्रगतिशील माना जाता है इसलिए हर व्यक्ति को अपनी शिक्षा को दूध अपनी शिक्षा से अपने आप को संभालने की कोशिश करना चाहिए और देश के शैक्षणिक विकास में अपना सहयोग देना चाहिए

bharat me hi nahi saari duniya me shiksha ka ekmatra uddeshya logo ke Sarvangiṇa vikas kar raha hai shikshak hi manushya apni kshamataon ka vikas kar pata hai jis desh me shiksha ka sthar itna uncha hota hai vaah desh utana adhik aatmanirbhar aur pragatisheel mana jata hai isliye har vyakti ko apni shiksha ko doodh apni shiksha se apne aap ko sambhalne ki koshish karna chahiye aur desh ke shaikshnik vikas me apna sahyog dena chahiye

भारत में ही नहीं सारी दुनिया में शिक्षा का एकमात्र उद्देश्य लोगों के सर्वांगीण विकास कर रह

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Dr Anshuman Vallabh Mishra

Professor , Writer

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नमस्कार भारतीय शिक्षा प्राणी इस समय एक पारंपरिक ढंग से चल रही है और अब जिस प्रकार से आप भी देख रहे हैं कि कोरोना जैसे विषाणु संक्रमित हो रहे हैं वातावरण में और सभी दिशाओं में एक नया परिवर्तन दिखाई दे रहा है उसी प्रकार की शिक्षा तंत्र भी बदलेगा और इसको भी डिजिटल स्मार्ट बहुत बनाने की आवश्यकता है

namaskar bharatiya shiksha prani is samay ek paramparik dhang se chal rahi hai aur ab jis prakar se aap bhi dekh rahe hain ki corona jaise vishnu sankrameet ho rahe hain vatavaran me aur sabhi dishaon me ek naya parivartan dikhai de raha hai usi prakar ki shiksha tantra bhi badlega aur isko bhi digital smart bahut banane ki avashyakta hai

नमस्कार भारतीय शिक्षा प्राणी इस समय एक पारंपरिक ढंग से चल रही है और अब जिस प्रकार से आप भ

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Prabhakar Tiwari

National Trainer,Motivational Speaker, Social Activist

1:46
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प्रश्न है कि भारत में शिक्षा के बारे में बताइए भारत में शिक्षा नीति लॉर्ड मैकाले ने बनाई थी और जब लॉर्ड मैकाले भारत की शिक्षा नीति बना रहा था तो उस समय वेस्टर्न वेस्टर्न चर्च इन उसने पूछा कि इस तरह का एजुकेशन सिस्टम बना रहा है तो लार्ड मैकाले ने कहा कि मुस्कुराके एजुकेशन सिस्टम बना रहा है कि 50 से 70 साल के बीच में भारत की संस्कृति सभ्यता परंपरा सब धीरे-धीरे नष्ट होने लगेगी लोग इस सेंटेंस है वह हमेशा लोग दिमाग में आता है कि उसने कहा था कि ओन्ली पेटी ऑफिशल्स विल बांड केवल रट्टू तोता पैदा होंगे और आज आप देख रहे हैं हर साल अलग-अलग देशों को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है हमारे देश में इस तरह के वैज्ञानिक नहीं हो रहे हैं इस तरह के लोग नहीं हो रहा है जिनको हर फील्ड में अलग-अलग फील्ड में नोबेल से सम्मानित किया जा सके क्योंकि हमारे ऐसा देश है जहां पर एक अरब ₹30 बादी है तो विद्वानों की कमी नहीं है लेकिन एजुकेशन सिस्टम ही ऐसा है कि हम किसी भी क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं एक ओलंपिक के लिए भी हम तरसते रहते हैं एक तरफ 30 करोड़ की पापुलेशन होने के बावजूद एक ओलंपिक में स्वर्ण रजत कहां तक जीतने के लिए तरसते रहते हैं 2115 मिल जाए इसका मतलब कि हमारी शिक्षा पद्धति में कहीं न कहीं बहुत बड़ी कमी है

prashna hai ki bharat me shiksha ke bare me bataiye bharat me shiksha niti lord maikale ne banai thi aur jab lord maikale bharat ki shiksha niti bana raha tha toh us samay western western church in usne poocha ki is tarah ka education system bana raha hai toh lord maikale ne kaha ki muskurake education system bana raha hai ki 50 se 70 saal ke beech me bharat ki sanskriti sabhyata parampara sab dhire dhire nasht hone lagegi log is sentence hai vaah hamesha log dimag me aata hai ki usne kaha tha ki only peti afishals will bond keval rattu tota paida honge aur aaj aap dekh rahe hain har saal alag alag deshon ko nobel puraskar se sammanit kiya jata hai hamare desh me is tarah ke vaigyanik nahi ho rahe hain is tarah ke log nahi ho raha hai jinako har field me alag alag field me nobel se sammanit kiya ja sake kyonki hamare aisa desh hai jaha par ek arab Rs badi hai toh vidvaano ki kami nahi hai lekin education system hi aisa hai ki hum kisi bhi kshetra me aage nahi badh paa rahe hain ek olympic ke liye bhi hum taraste rehte hain ek taraf 30 crore ki population hone ke bawajud ek olympic me swarn rajat kaha tak jitne ke liye taraste rehte hain 2115 mil jaaye iska matlab ki hamari shiksha paddhatee me kahin na kahin bahut badi kami hai

प्रश्न है कि भारत में शिक्षा के बारे में बताइए भारत में शिक्षा नीति लॉर्ड मैकाले ने बनाई थ

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Dr Sandeep Kumar Sharma

लेखक,निर्माता निर्देशक

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शिक्षा अनेक अर्थों में समझना जरूरी है वास्तव में शिक्षा का अर्थ है कि हम सभी विषयों के बारे में जाने दुनिया के बारे में जाने अपने देश के बारे में जाने आपकी रुचि किस विषय में है उससे ज्यादा ज्ञान अध्ययन करते हैं लेकिन शिक्षा का वास्तविक रूप होना चाहिए ना होना चाहिए कि जो बच्चे की मातृभाषा है इसका 15 दिन बाद अटम कहती सही मायने में मातृभाषा में शिक्षा मिलनी चाहिए और उसका सबसे बड़ा कारण यह है कि कोई भी बच्चा

shiksha anek arthon me samajhna zaroori hai vaastav me shiksha ka arth hai ki hum sabhi vishyon ke bare me jaane duniya ke bare me jaane apne desh ke bare me jaane aapki ruchi kis vishay me hai usse zyada gyaan adhyayan karte hain lekin shiksha ka vastavik roop hona chahiye na hona chahiye ki jo bacche ki matrubhasha hai iska 15 din baad atam kehti sahi maayne me matrubhasha me shiksha milani chahiye aur uska sabse bada karan yah hai ki koi bhi baccha

शिक्षा अनेक अर्थों में समझना जरूरी है वास्तव में शिक्षा का अर्थ है कि हम सभी विषयों के ब

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Devdutt

Electrical Electronics Engineer

2:55
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नमस्कार मेरे प्यारे दोस्तों क्वेश्चन पूछा गया है भारत के शिक्षा के बारे में बताएं तो यह प्रश्न मेरे मन में काफी दिनों से उठ रहा था कि मैं इसके ऊपर स्टॉप पी के ऊपर कुछ बोलूं या मैं अपनी राय रखूं तू आज मिल गई मौका मिल गया वह कल केतु मैं इसके ऊपर कुछ अपने जो मैं पर्सनली टिप्स देना चाहता या पर्सनल अपनी राय रखना चाहता हूं तो उसके ऊपर में कुछ आपको बताना चाहता हूं आज जो हमारी भाग की शिक्षा पद्धति है उसमें सुधार की डेट निकली आवश्यकता हो गई है इसकी सुधार की आवश्यकता इसलिए हो गई है आज हम जिस दौर से गुजर रहे हैं हमारी जो पुरानी शिक्षा पद की है इसके लिए बिल्कुल उसको तोतली निरस्त कर दिया क्योंकि हमारा जो शिक्षक पति का मॉडल था वह मैकाले के आधारित था अब मैं काली अम्मा पुराना पुराना सिस्टम था उसके पहले की बात आजादी से पहले की भांति अब जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे हैं इसमें नई चुनौतियां रिया दोस्त के लिए हमें अपने विद्यार्थियों को तैयार करना पड़ेगा हम अपने विद्यार्थियों को तभी प्यार कर सकते हैं जब उन्होंने डिस्ट्रिक्ट अगर जोड़ा जाए उनको ने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइड किया जाए ताकि उनकी सोच को ऐसा बिल्डअप किया जाए ताकि वह लेने विचारधाराएं विचारधाराओं में प्रभावित होकर नए नए आइडियाज निकाल सकी और ज्यादा से ज्यादा रोजगार प्राप्त कर सके पुरानी शिक्षा पद्धति के द्वारा उनका माइंड और कुकर से की जगह रहता है जल्दी से जल्दी डिग्री प्राप्त करें डिग्री प्राप्त करने के बाद भी उनको जो भी नहीं मिल रही है उसका भी यही कारण है हमारी पुरानी चकता पत्ती और हमें उनको मोटिवेशन और शिफ्ट चली भी स्ट्रांग करना पड़ेगा उनको उनके लगाता मेरा मानना यह है कि जो शहर के पिक्चर गांव में भी अभी बहुत ज्यादा मूलभूत शिक्षा में बहुत सुधार के व्यक्ति उनको मूलभूत आवश्यकता है पूरी नहीं हो पा रही है इसके लिए सबसे पहले डिस्ट्रिक्ट कनेक्टिविटी करना बहुत जरूरी है गानों को तभी हमारा देश आगे बढ़ सकता है और इसमें हमारे भारतीय शिक्षा में काफी सुधार की आवश्यकता है और दूसरी यह चीज है उनको विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ एक तो मेरे एक तो पहली बार तुमको नई शिक्षा पद्धति लाना जूजू सीरियल को प्रैक्टिकल नॉलेज टो मेडिटेशन दिखानी पड़ेगी ताकि उनका ब्रेन पावर वर्ल्ड कप पोस्ट तेजाजी के साथ आगे बढ़ सके धन्यवाद

namaskar mere pyare doston question poocha gaya hai bharat ke shiksha ke bare me bataye toh yah prashna mere man me kaafi dino se uth raha tha ki main iske upar stop p ke upar kuch bolu ya main apni rai rakhun tu aaj mil gayi mauka mil gaya vaah kal Ketu main iske upar kuch apne jo main personally tips dena chahta ya personal apni rai rakhna chahta hoon toh uske upar me kuch aapko batana chahta hoon aaj jo hamari bhag ki shiksha paddhatee hai usme sudhaar ki date nikli avashyakta ho gayi hai iski sudhaar ki avashyakta isliye ho gayi hai aaj hum jis daur se gujar rahe hain hamari jo purani shiksha pad ki hai iske liye bilkul usko totli nirast kar diya kyonki hamara jo shikshak pati ka model tha vaah maikale ke aadharit tha ab main kali amma purana purana system tha uske pehle ki baat azadi se pehle ki bhanti ab jaise jaise hum aage badh rahe hain isme nayi chunautiyaan riya dost ke liye hamein apne vidyarthiyon ko taiyar karna padega hum apne vidyarthiyon ko tabhi pyar kar sakte hain jab unhone district agar joda jaaye unko ne infrastructure provide kiya jaaye taki unki soch ko aisa buildup kiya jaaye taki vaah lene vichardharaen vichardharaon me prabhavit hokar naye naye ideas nikaal saki aur zyada se zyada rojgar prapt kar sake purani shiksha paddhatee ke dwara unka mind aur cooker se ki jagah rehta hai jaldi se jaldi degree prapt kare degree prapt karne ke baad bhi unko jo bhi nahi mil rahi hai uska bhi yahi karan hai hamari purani chakata patti aur hamein unko motivation aur shift chali bhi strong karna padega unko unke lagaata mera manana yah hai ki jo shehar ke picture gaon me bhi abhi bahut zyada mulbhut shiksha me bahut sudhaar ke vyakti unko mulbhut avashyakta hai puri nahi ho paa rahi hai iske liye sabse pehle district connectivity karna bahut zaroori hai gaano ko tabhi hamara desh aage badh sakta hai aur isme hamare bharatiya shiksha me kaafi sudhaar ki avashyakta hai aur dusri yah cheez hai unko vidyarthiyon ko padhai ke saath ek toh mere ek toh pehli baar tumko nayi shiksha paddhatee lana juju serial ko practical knowledge toe meditation dikhaani padegi taki unka brain power world cup post tejaji ke saath aage badh sake dhanyavad

नमस्कार मेरे प्यारे दोस्तों क्वेश्चन पूछा गया है भारत के शिक्षा के बारे में बताएं तो यह प्

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Akash Nayak

Career Coach

2:33
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भारत में शिक्षा जो है वह मुक्त आलोक क्रिटिकली पढ़ाते हैं प्रैक्टिकल नॉलेज लोगों को बहुत कम दिया जाता है टेक्निकल सीधे नहीं सिखाई जाती मंत्री जो प्राइमरी एजुकेशन होती है उसमें और लोग शिक्षक नौकरी के लिए पढ़ते हैं मतलब जो भी एजुकेशन होती है या बच्चों को शिक्षा अधिकारी हमको बड़ा शिकायत है कि भाई आगे जाके नौकरी करनी है कुछ भी नहीं पड़ा है ना तो तकलीफ हो कुछ काबिल बने कुछ कुछ बना सके कोई कुछ मैन्युफैक्चर कर सकें इसके लिए उनको शिक्षा नहीं दी जाती में तो इतना ही वह सिखाया जाता है वह सब स्कूल से मैं कॉलेज में उसके बाद जब जो बच्चे होते हैं वह पढ़ लिख लेते हैं उसके बाद तो कंपनी में जाकर काम सीखता है तो जो स्किल्ड चीजें होती है उसके ऊपर जो काम होता है वह उतना नहीं करते क्रिटिकल वाले ज्यादातर चीजें चोरी के बारे में बहुत सिखाए जाते हैं कि आप बस रचनाएं चीजों को वरना यह पता चाहिए जब आप पढ़ते हो तो आपको यह भी नहीं सिखाया था कि इस चीज का यूज़ कहां करेंगे हम सिर्फ इस्तेमाल करेंगे जैसे मैं चक्र दिल्ली पढ़ रहे हो या अलजेब्रा तो उसका यूज़ करने हो सारी स्टैंपेड़े मध्यप्रदेश पढ़ाओ बच्चों को सिखाओ उनको टेक्निकल नॉलेज होना चाहिए उनको आजकल शौक नहीं मतलब जो बहुमुखी विकास होता है वह नहीं होता बच्चों को शिक्षा का तो ऐसा सिस्टम है कि लोग यहां पढ़ना चाहते हैं प्राइवेट स्कूल समाज जॉब करना चाहते हैं सरकारी ठीक है तो यह मतलब हर कोई पढ़ने के लिए इलाज के लिए सब प्राइवेट जगह पर जाना जाता है लेकिन अगर उसको पूछे तो वही नौकरी कौन सी करनी है तो सरकारी नौकरी के पीछे भागते यह सारी चीजें हैं तब मुझे इतना भारत में शिक्षा का स्तर दूसरे देशों से बहुत कम है मित्र प्रिडिकल नेता है उसको हम भारतीयों को बहुत मलिक सहमत नॉलेज के टाइम बताओ एकदम प्रैक्टिकल हो जो दिख रहा है तो फिर को बहुत कम होता है

bharat me shiksha jo hai vaah mukt alok critically padhate hain practical knowledge logo ko bahut kam diya jata hai technical sidhe nahi sikhai jaati mantri jo primary education hoti hai usme aur log shikshak naukri ke liye padhte hain matlab jo bhi education hoti hai ya baccho ko shiksha adhikari hamko bada shikayat hai ki bhai aage jake naukri karni hai kuch bhi nahi pada hai na toh takleef ho kuch kaabil bane kuch kuch bana sake koi kuch mainyufaikchar kar sake iske liye unko shiksha nahi di jaati me toh itna hi vaah sikhaya jata hai vaah sab school se main college me uske baad jab jo bacche hote hain vaah padh likh lete hain uske baad toh company me jaakar kaam sikhata hai toh jo Skilled cheezen hoti hai uske upar jo kaam hota hai vaah utana nahi karte critical waale jyadatar cheezen chori ke bare me bahut sikhaye jaate hain ki aap bus rachnaye chijon ko varna yah pata chahiye jab aap padhte ho toh aapko yah bhi nahi sikhaya tha ki is cheez ka use kaha karenge hum sirf istemal karenge jaise main chakra delhi padh rahe ho ya algebra toh uska use karne ho saari staimpede madhya pradesh padhao baccho ko sikhao unko technical knowledge hona chahiye unko aajkal shauk nahi matlab jo bahumukhi vikas hota hai vaah nahi hota baccho ko shiksha ka toh aisa system hai ki log yahan padhna chahte hain private school samaj job karna chahte hain sarkari theek hai toh yah matlab har koi padhne ke liye ilaj ke liye sab private jagah par jana jata hai lekin agar usko pooche toh wahi naukri kaun si karni hai toh sarkari naukri ke peeche bhagte yah saari cheezen hain tab mujhe itna bharat me shiksha ka sthar dusre deshon se bahut kam hai mitra pridikal neta hai usko hum bharatiyon ko bahut malik sahmat knowledge ke time batao ekdam practical ho jo dikh raha hai toh phir ko bahut kam hota hai

भारत में शिक्षा जो है वह मुक्त आलोक क्रिटिकली पढ़ाते हैं प्रैक्टिकल नॉलेज लोगों को बहुत कम

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Nikunj Sodagar

Environmental Engineer, Life Coach, Astro Vastu Consultant, Hypnotherapist

1:12
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भारत में शिक्षा का स्तर अच्छा है मगर शिक्षा जो आप लेते हो उसको दैनिक जीवन में इस तरह से अमल में ला सकते हो वह बात नहीं सिखाई जाती है जबकि पाश्चर शिक्षण जगत में वह लोग जिसको प्रैक्टिकल नॉलेज के उस पर ज्यादा निर्भर करते मतलब हर्ष को टच करके नहीं सिखाया जाता है उससे पूछा कि कल अमल में लाते दैनिक जीवन में अमल कर जाके उसको छात्रों को सिखाया जाता है शिक्षण करना चाहिए उसकी जो एप्लीकेशन है उसको कैसे अपने फायदे के लिए अमल करना है दैनिक जीवन में कैसे अमल करना है और सुधार करने की जरूरत है

bharat me shiksha ka sthar accha hai magar shiksha jo aap lete ho usko dainik jeevan me is tarah se amal me la sakte ho vaah baat nahi sikhai jaati hai jabki pasture shikshan jagat me vaah log jisko practical knowledge ke us par zyada nirbhar karte matlab harsh ko touch karke nahi sikhaya jata hai usse poocha ki kal amal me laate dainik jeevan me amal kar jake usko chhatro ko sikhaya jata hai shikshan karna chahiye uski jo application hai usko kaise apne fayde ke liye amal karna hai dainik jeevan me kaise amal karna hai aur sudhaar karne ki zarurat hai

भारत में शिक्षा का स्तर अच्छा है मगर शिक्षा जो आप लेते हो उसको दैनिक जीवन में इस तरह से अम

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Dr.Manoj kumar Pandey

M.D (A.M) ,Astrologer ,9044642070

2:02
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भारत में शिक्षा के बारे में बताएं भारत में शिक्षा प्रणाली में बहुत खराब चल रही है क्योंकि हमारी इच्छा पाली से सुना तनी ठीक उसको भेजो ने मुसलमानों ने भ्रष्ट कर दिया और कान्वेंट एजुकेशन कर दिया मम्मी को बस गुड मॉर्निंग गुड नाईट करते हैं 1 साल की डिग्री लेकर आता है उससे पूछो बगल वाले अंकल जी का क्या नाम तो बता हम को नहीं पता क्या बात बाजार जाकर सब्जी राहुल गांधी है कानून एजुकेटेड है कुछ नहीं पता मोदी गाली देते रहते हैं जब तक हम हमारी शिक्षा पद्धति बिल्कुल भी नहीं होगी आश्रम के गुरु की सेवा करते हुए गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए युद्ध नहीं करेंगे हम गुलाम बने रहने दिया करते रहेंगे महामारी आती रहेगी अब करो लॉर्ड मैकाले में अपनी शिक्षा प्रणाली बनाई अंग्रेजों ने थोड़ी देर बाद नहीं पाएंगे तभी तो शायद विद्यालय अंग्रेजी वाले की दवाइयां हर चीज है विदेश से अधिक कपड़े जींस पहनना विदेश की दवाई धन्यवाद

bharat me shiksha ke bare me bataye bharat me shiksha pranali me bahut kharab chal rahi hai kyonki hamari iccha paali se suna tani theek usko bhejo ne musalmanon ne bhrasht kar diya aur convent education kar diya mummy ko bus good morning good night karte hain 1 saal ki degree lekar aata hai usse pucho bagal waale uncle ji ka kya naam toh bata hum ko nahi pata kya baat bazaar jaakar sabzi rahul gandhi hai kanoon educated hai kuch nahi pata modi gaali dete rehte hain jab tak hum hamari shiksha paddhatee bilkul bhi nahi hogi ashram ke guru ki seva karte hue guru ki aagya ka palan karte hue yudh nahi karenge hum gulam bane rehne diya karte rahenge mahamari aati rahegi ab karo lord maikale me apni shiksha pranali banai angrejo ne thodi der baad nahi payenge tabhi toh shayad vidyalaya angrezi waale ki davaiyan har cheez hai videsh se adhik kapde jeans pahanna videsh ki dawai dhanyavad

भारत में शिक्षा के बारे में बताएं भारत में शिक्षा प्रणाली में बहुत खराब चल रही है क्योंकि

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

0:58
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भारत के में शिक्षा के बारे में बताएं भारत की शिक्षा आजकल केवल किताबी शिक्षा रह गई है किताबी शिक्षा होने के कारण बच्चे रोजगार के लायक नहीं है क्योंकि स्कूलों में कॉलेज में पढ़ाई जाती है वह पुस्तक ज्ञान हमारी प्रतियोगिता में कहीं काम नहीं आता है दोनों का तौर तरीका डिफरेंट है किताबों में चैप्टर प्राय जाते हैं हमेशा छोरी कल भेजते चक्की हमारे जो कंपटीशन एग्जाम आते हो आते हैं हमारे कटकल बेसन वह हमारे एक्सपीरियंस पानी नहीं सकते एक क्वेश्चन के कितने विकेट हो सकते हैं इसलिए हमारे देश में एकेडमिक एजुकेशन में बहुत बदलाव की जरूरत है

bharat ke me shiksha ke bare me bataye bharat ki shiksha aajkal keval kitabi shiksha reh gayi hai kitabi shiksha hone ke karan bacche rojgar ke layak nahi hai kyonki schoolon me college me padhai jaati hai vaah pustak gyaan hamari pratiyogita me kahin kaam nahi aata hai dono ka taur tarika different hai kitabon me chapter paraya jaate hain hamesha chhori kal bhejate chakki hamare jo competition exam aate ho aate hain hamare katkal besan vaah hamare experience paani nahi sakte ek question ke kitne wicket ho sakte hain isliye hamare desh me academic education me bahut badlav ki zarurat hai

भारत के में शिक्षा के बारे में बताएं भारत की शिक्षा आजकल केवल किताबी शिक्षा रह गई है किताब

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Umesh kumar

Lecturer & Brain Guru ,Finger Prints Consultant

1:03
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नमस्कार आपका कृष्ण ने भारत में शिक्षा के बारे में बताइए भारत में जो शिक्षा की बात करें तो हम यह अंग्रेजो के समय की जरूरत शिक्षा पद्धति थी पर ही मूल्य आधारित है हमारी शिक्षा नीति के द्वारा इसमें समय-समय पर काफी परिवर्तन किए गए हैं लेकिन अभी भी इससे शिक्षा में जो हमारी शिक्षा है उसमें मूलभूत परिवर्तन की आवश्यकता है जिसको भी बनाने की आवश्यकता है क्योंकि जो अंग्रेजों के समय में शिक्षा शुरू की गई थी वह उनके निजी स्वार्थ या हितार्थ शुरू की गई थी उसमें हमारा हित कम देखा गया था इसलिए उसमें परिवर्तन क्या हो सकता है क्योंकि वही चल जहांगीर वह एक बेरोजगारी बढ़ाने वाली शिक्षा है तो इसमें हमें परिवर्तन करके उसको प्रैक्टिकली बनाने की आवश्यकता है

namaskar aapka krishna ne bharat me shiksha ke bare me bataiye bharat me jo shiksha ki baat kare toh hum yah angrejo ke samay ki zarurat shiksha paddhatee thi par hi mulya aadharit hai hamari shiksha niti ke dwara isme samay samay par kaafi parivartan kiye gaye hain lekin abhi bhi isse shiksha me jo hamari shiksha hai usme mulbhut parivartan ki avashyakta hai jisko bhi banane ki avashyakta hai kyonki jo angrejo ke samay me shiksha shuru ki gayi thi vaah unke niji swarth ya hitarth shuru ki gayi thi usme hamara hit kam dekha gaya tha isliye usme parivartan kya ho sakta hai kyonki wahi chal jahangir vaah ek berojgari badhane wali shiksha hai toh isme hamein parivartan karke usko practically banane ki avashyakta hai

नमस्कार आपका कृष्ण ने भारत में शिक्षा के बारे में बताइए भारत में जो शिक्षा की बात करें तो

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Usha Batra

Beauty Therapist

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भारत में शिक्षा की कमी नहीं है लेकिन एक मेथड की कमी है यहां पर जो है अच्छे प्रॉपर ढंग से मेथड से शिक्षा नहीं दी जाती है प्रैक्टिकल वर्क ज्यादा कर मतलब बहुत ही कम कर आ जा बाहर के देशों में प्रमुख हम परेशान करें प्रैक्टिकल को ज्यादा महत्व दिया जाता है यहां पर चोरी टिकल पार्ट वक्ता फिकेशन कांसेप्ट क्लियर नहीं होना प्रैक्टिकल काम नहीं कराना यह चीजों के अंदर बहुत ज्यादा कमजोरी है जो कि गलत है जो मुझे शिक्षा जो है वह टेंपरेरी रह जाती है बहुत लंबे टाइम तक हम लोग उसको प्रॉपर याद नहीं रख पाते हैं यह प्रैक्टिकली हम हो जाते

bharat me shiksha ki kami nahi hai lekin ek method ki kami hai yahan par jo hai acche proper dhang se method se shiksha nahi di jaati hai practical work zyada kar matlab bahut hi kam kar aa ja bahar ke deshon me pramukh hum pareshan kare practical ko zyada mahatva diya jata hai yahan par chori tickle part vakta fikeshan concept clear nahi hona practical kaam nahi krana yah chijon ke andar bahut zyada kamzori hai jo ki galat hai jo mujhe shiksha jo hai vaah tempareri reh jaati hai bahut lambe time tak hum log usko proper yaad nahi rakh paate hain yah practically hum ho jaate

भारत में शिक्षा की कमी नहीं है लेकिन एक मेथड की कमी है यहां पर जो है अच्छे प्रॉपर ढंग से म

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Dr. Mahesh Mohan Jha

Asst. Professor,Astrologer,Author

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नमस्कार आपका प्रश्न है भारत में शिक्षा के बारे में बताएं भारत देश 1947 में तो आजाद हो गया किंतु हम शिक्षा के दृष्टिकोण से अभी भी आजाद नहीं है आज भी भारत का जो शिक्षा पद्धति है उस पर ब्रिटिश शासन का ही आधिपत्य है और उसी का अनुसरण करके अपने शिक्षा पद्धति को आगे बढ़ता रहे इसलिए भारत के शिक्षा पद्धति को बदलने की जरूरत है आज जो भी पश्चिमी देशों के लोग हैं वह हमारे भारतीय संस्कृति को अपना रहे हमारे भारत के लोग अपनी संस्कृति को छोड़कर पश्चिमी संस्कृति को अपना क्योंकि इतने दिन जो ब्रिटिश शासन किए उसका प्रभाव यहां के लोगों की मानसिकता पर अभी भी डेरा जमाए हुए अगर आज हम शिक्षा पद्धति में भारत की जो संस्कृति है और संस्कृति को जोड़ें वेद पुराण शास्त्र तंत्र ज्योतिष योग आयुर्वेद इसको अगर शिक्षा पद्धति मंजूर है तो विद्यार्थी का नैतिक विकास भी होगा नैतिक शिक्षा भी मिलेगी और हमारा भारत उत्तर उत्तर विकास करेगा और फिर से विश्व गुरु बनेगा किंतु आज हमारे शिक्षा पद्धति में सिर्फ अगरम समिति का अध्ययन करते हैं इतिहास का दिन करते हैं तो सिर्फ ब्रिटिश शासन मुगल शासन में ही हमारे विद्यार्थी लश्कर के राजा थे उससे प्राथमिक जो हमारी संस्कृति है जो मूल संस्कृति है उसका अध्ययन उसको मिलता ही नहीं है हमारा जो वेद था हमारा जो उपनिषद था हमारा जो तंत्र था हमारा जो योग्यता हमारा जो आयुर्वेद था उस पर शोध होना चाहिए उस पर किस तरफ होना चाहिए अगर सचमुच सरकारी व्यवस्था किया जाए और इस पर शोध किया जाए तो आज विज्ञान के रूप में एक नया कीर्तिमान भारत स्थापित करेगा इसलिए भारत की शिक्षा पद्धति को बदलना जरूरी है धन्यवाद

namaskar aapka prashna hai bharat me shiksha ke bare me bataye bharat desh 1947 me toh azad ho gaya kintu hum shiksha ke drishtikon se abhi bhi azad nahi hai aaj bhi bharat ka jo shiksha paddhatee hai us par british shasan ka hi aadhipatya hai aur usi ka anusaran karke apne shiksha paddhatee ko aage badhta rahe isliye bharat ke shiksha paddhatee ko badalne ki zarurat hai aaj jo bhi pashchimi deshon ke log hain vaah hamare bharatiya sanskriti ko apna rahe hamare bharat ke log apni sanskriti ko chhodkar pashchimi sanskriti ko apna kyonki itne din jo british shasan kiye uska prabhav yahan ke logo ki mansikta par abhi bhi dera jamaye hue agar aaj hum shiksha paddhatee me bharat ki jo sanskriti hai aur sanskriti ko joden ved puran shastra tantra jyotish yog ayurveda isko agar shiksha paddhatee manzoor hai toh vidyarthi ka naitik vikas bhi hoga naitik shiksha bhi milegi aur hamara bharat uttar uttar vikas karega aur phir se vishwa guru banega kintu aaj hamare shiksha paddhatee me sirf agaram samiti ka adhyayan karte hain itihas ka din karte hain toh sirf british shasan mughal shasan me hi hamare vidyarthi lashkar ke raja the usse prathmik jo hamari sanskriti hai jo mul sanskriti hai uska adhyayan usko milta hi nahi hai hamara jo ved tha hamara jo upanishad tha hamara jo tantra tha hamara jo yogyata hamara jo ayurveda tha us par shodh hona chahiye us par kis taraf hona chahiye agar sachmuch sarkari vyavastha kiya jaaye aur is par shodh kiya jaaye toh aaj vigyan ke roop me ek naya kirtiman bharat sthapit karega isliye bharat ki shiksha paddhatee ko badalna zaroori hai dhanyavad

नमस्कार आपका प्रश्न है भारत में शिक्षा के बारे में बताएं भारत देश 1947 में तो आजाद हो गय

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Harender Kumar Yadav

Career Counsellor.

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भारत में शिक्षा के बारे में भारत में केंद्र सरकार है और राज्य सरकारों ने यहां पर प्राइमरी एजुकेशन है रेल एजुकेशन सेकेंडरी हायर सेकेंडरी लेवल लेवल की होती है फिर तक मेरा मेडिकल फार्मेसी लाइसेंस स्तर पर भारत में प्राइमरी एजुकेशन जो 15 साल तक आईपीएल 2009 के तहत और उसमें उर्दू शिक्षा और जितने भी रीजनल भाषा है उसमें पढ़ाई आती है सेंट्रल गवर्नमेंट हायर एजुकेशन रेलवे स्टेडियम जोधपुर भारत की शिक्षा व्यवस्था मेडिकल कॉलेज

bharat me shiksha ke bare me bharat me kendra sarkar hai aur rajya sarkaro ne yahan par primary education hai rail education secondary hire secondary level level ki hoti hai phir tak mera medical pharmacy license sthar par bharat me primary education jo 15 saal tak IPL 2009 ke tahat aur usme urdu shiksha aur jitne bhi regional bhasha hai usme padhai aati hai central government hire education railway stadium jodhpur bharat ki shiksha vyavastha medical college

भारत में शिक्षा के बारे में भारत में केंद्र सरकार है और राज्य सरकारों ने यहां पर प्राइमरी

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Harish Menaria

Mind professor| Tourism Guide

2:26
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जी आपने बहुत ही अच्छा है क्रिश्चन किया है कि भारत में शिक्षा के बारे में बताइए तो आप और हम सब जानते हैं भारत की शिक्षा प्रणाली एक नंबर की घटिया प्रणाली है क्योंकि जहां पर आज हमारे देश को आर्थिक स्थिति के हिसाब से जो पढ़ाई होनी चाहिए वह पढ़ाई नहीं करवा रही आज भी हम अकबर बीरबल की कथाएं कहानियां है वह पढ़ा रहे जबकि उनका भविष्य में हमारे लेना देना ही नहीं है आप आज दिनांक देखते हैं कि साइन थीटा कोस थीटा यह पढ़ाई नहीं हमारी यह हमारी आंतरिक पड़े जो हमारी पड़े मेन पड़े होनी चाहिए जो शिक्षा हमारे बच्चों को मारे आने वाली पीढ़ियों को मिलनी चाहिए वह शिक्षा नहीं हमारा बिज़नेस के क्लास पर जोर देना चाहिए सरकार को सरकार ऐसा नहीं कर रही है अगर सरकार चाहे तो आज से ही हमारी शिक्षा प्रणाली में व्यवसाय को ऐड करें तो बच्चा कभी यह नहीं सोचेगा तो मैं पढ़ लिखकर में नौकरी करो वही सोचे तो खुद ही सोचिए अगर आप के आस पड़ोस में 10 बच्चों में से अगर आप उनको पूछोगे भाई तेरे को बड़ा होकर क्या बनना है तो वही बोलेगा मैं कितना भी पढ़ लिख लेगा तो बोलेगा मुझे नौकरी ही करनी है अर्थात को खुद नौकर बनना चाहता है वह कभी मालिक नहीं बनना चाहता क्योंकि उसके शुरू से उस कमेंट में ऐसे ही सॉफ्टवेयर लॉन्च किया गया पढ़ लिखकर तुझे नौकरी करनी है और ₹50000 कमाने से ज्यादा वह कुछ नहीं कर सकता इसका कारण यह है जो जतिन को शिक्षा दे रहा जिससे हम शिक्षक के टीचर करते हैं उसकी सैलरी 50000 है वह अपने बच्चे को सजा रुपए कमाने की कृपा करने की सलाह का बीज नहीं दे सकता बात बहुत ही सरल है विचार करने योग्य है आप इस बात पर विचार करना क्योंकि यह स्थिति बहुत गंभीर है और मैं आपको एक बार जो प्रणाम करता हूं आपने कितने अच्छा किचन क्या यह बात मेरे मन में काफी दिनों से चल रही है और हो सके तो एक दूसरे तक पहुंचाएं और मेरे छोटे मुंह से बात अगर किसी सरकार के किसी व्यक्ति के पास पहुंच जाए और शिक्षा प्रणाली में कुछ बदलाव आ जाए तो भारत वापस सोने की चिड़िया जरूर बनेगा

ji aapne bahut hi accha hai christian kiya hai ki bharat me shiksha ke bare me bataiye toh aap aur hum sab jante hain bharat ki shiksha pranali ek number ki ghatiya pranali hai kyonki jaha par aaj hamare desh ko aarthik sthiti ke hisab se jo padhai honi chahiye vaah padhai nahi karva rahi aaj bhi hum akbar birbal ki kathaen kahaniya hai vaah padha rahe jabki unka bhavishya me hamare lena dena hi nahi hai aap aaj dinank dekhte hain ki sign theta kos theta yah padhai nahi hamari yah hamari aantarik pade jo hamari pade main pade honi chahiye jo shiksha hamare baccho ko maare aane wali peedhiyon ko milani chahiye vaah shiksha nahi hamara business ke class par jor dena chahiye sarkar ko sarkar aisa nahi kar rahi hai agar sarkar chahen toh aaj se hi hamari shiksha pranali me vyavasaya ko aid kare toh baccha kabhi yah nahi sochega toh main padh likhkar me naukri karo wahi soche toh khud hi sochiye agar aap ke aas pados me 10 baccho me se agar aap unko puchoge bhai tere ko bada hokar kya banna hai toh wahi bolega main kitna bhi padh likh lega toh bolega mujhe naukri hi karni hai arthat ko khud naukar banna chahta hai vaah kabhi malik nahi banna chahta kyonki uske shuru se us comment me aise hi software launch kiya gaya padh likhkar tujhe naukri karni hai aur Rs kamane se zyada vaah kuch nahi kar sakta iska karan yah hai jo jatin ko shiksha de raha jisse hum shikshak ke teacher karte hain uski salary 50000 hai vaah apne bacche ko saza rupaye kamane ki kripa karne ki salah ka beej nahi de sakta baat bahut hi saral hai vichar karne yogya hai aap is baat par vichar karna kyonki yah sthiti bahut gambhir hai aur main aapko ek baar jo pranam karta hoon aapne kitne accha kitchen kya yah baat mere man me kaafi dino se chal rahi hai aur ho sake toh ek dusre tak paunchaye aur mere chote mooh se baat agar kisi sarkar ke kisi vyakti ke paas pohch jaaye aur shiksha pranali me kuch badlav aa jaaye toh bharat wapas sone ki chidiya zaroor banega

जी आपने बहुत ही अच्छा है क्रिश्चन किया है कि भारत में शिक्षा के बारे में बताइए तो आप और हम

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आपका क्वेश्चन है भारत में शिक्षा के बारे में बताइए भारत की जो शिक्षा है प्राचीन काल में वह गुरुकुल व्यवस्था पर थी आज वह गुरुकुल व्यवस्था पर ना होकर अलग-अलग तरीके से कराई जाती है और की जाती है आज जो पहले केवल जात करने की रचने की विद्यार्थी आज से हम प्रैक्टिकल के माध्यम से यूज करते हैं जैसे आप लोग का कोई सा भी सब्जेक्ट है उसे हम समझने की कोशिश करते हैं केवल रखना ही पर्याप्त नहीं है साइंस है हर सब्जेक्ट में आपने आज विज्ञान है हम उसे समझते हैं उसका प्रयोग करते हैं प्रयोग करने के बाद हर किसी भाषा का हर किसी और साहित्य का अपना इतिहास से अपना अभिज्ञान है हर किसी को समझना है आपकी शिक्षा समझना और प्रयोग की शिक्षा है और रचने की शिक्षा आज के समय में नहीं है तो आप अगर कुछ और जानना चाहते हैं तो फिर से प्रश्न करिए फिलहाल मैं आपको यही बता सकता हूं यह प्राचीन गुरुकुल परंपरा जो है आज बहुत कम है भारत में लेकिन आज की शिक्षा व्यवस्था कंप्यूटर की है डिजिटल की है और आगे बढ़ने की है फिर से एक बार विश्व गुरु बनने की शिक्षा भारत में दी जा रही है

aapka question hai bharat me shiksha ke bare me bataiye bharat ki jo shiksha hai prachin kaal me vaah gurukul vyavastha par thi aaj vaah gurukul vyavastha par na hokar alag alag tarike se karai jaati hai aur ki jaati hai aaj jo pehle keval jaat karne ki rachne ki vidyarthi aaj se hum practical ke madhyam se use karte hain jaise aap log ka koi sa bhi subject hai use hum samjhne ki koshish karte hain keval rakhna hi paryapt nahi hai science hai har subject me aapne aaj vigyan hai hum use samajhte hain uska prayog karte hain prayog karne ke baad har kisi bhasha ka har kisi aur sahitya ka apna itihas se apna abhigyan hai har kisi ko samajhna hai aapki shiksha samajhna aur prayog ki shiksha hai aur rachne ki shiksha aaj ke samay me nahi hai toh aap agar kuch aur janana chahte hain toh phir se prashna kariye filhal main aapko yahi bata sakta hoon yah prachin gurukul parampara jo hai aaj bahut kam hai bharat me lekin aaj ki shiksha vyavastha computer ki hai digital ki hai aur aage badhne ki hai phir se ek baar vishwa guru banne ki shiksha bharat me di ja rahi hai

आपका क्वेश्चन है भारत में शिक्षा के बारे में बताइए भारत की जो शिक्षा है प्राचीन काल में वह

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Kajal Soni

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4:13
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है भारत में शिक्षा के बारे में बताएं तो भारत में शिक्षा बहुत ही अच्छी है और देशों के मुकाबले इतनी चिंता नहीं थी आप भारत में शिक्षा बढ़ती जा रही है और बढ़ती जा रही है और अच्छी शिक्षा मिलती है यहां पर भारत में और देशों में इतनी अच्छी शिक्षा मिलती लेकिन अब भी भारत के बहुत से लोग ऐसे थे पर अब मैं भारत में शिक्षा बहुत ऊंचे स्तर में भी जारी सरकारी स्कूलों में इस कारण कोई भी बच्चा ऐसी चीज ना रह जाए इसलिए 14 वर्ष की आयु तक में दी जा रही है सरकारी स्कूल में और आप अपने फोन से यूट्यूब पर पड़ सकता है कहीं पर भी पढ़ सकते हैं यूट्यूब या कोई ऐप डाउनलोड करके पढ़ सकते हैं अगर आपको पढ़ सकते हैं वह जवाब दे देवी उस पर भी आप जवाब दे सकते आप भी इस से ज्ञान ले सकते हैं और टॉपर एप्पल पढ़ सकते हैं क्रमांक बहुत सारे बनारस है जिससे आप अपनी पढ़ाई कर सकते हैं इसलिए भारत भारत पढ़ाई के मामले में बहुत ही उच्च स्तर तक पहुंचता जा रहा धीरे-धीरे हमें अपने भारत को शिक्षित बनाने के लिए अपने आसपास कोई एप्स स्थित है या कोई उसे पुराना विचार का हिस्सा है तो उसे समझाना चाहिए की शिक्षा कितनी महत्वपूर्ण है हर व्यक्ति के लिए उसे समझाना चाहिए हमें और तभी हम अपने देश भारत को और ऊंचे स्थान तक पहुंचा सकते शिक्षा में हर किसी को शिक्षित कर सकते हैं शिक्षा के कारण कारण हमारा देश सुरक्षित रहेगा 7 लोगों के अंदर शिक्षा होगी भारतीय का महत्व जानेंगे साफ-सफाई का स्वतंत्रता का हर चीज का और प्रदूषण प्रदूषण निकलना चाहिए सबका उन्हें ज्ञान होगा सब पता चलेगा कि यह क्या चीज होती है और उन्हें छोटी से छोटी बात पता चल जाएगी और कोई भी हमसे फिर कोई भी देश जो भी बात करेगा वह लोग सब को पता चल जाएगी इसलिए सबको हमें शिक्षा का महत्व बताना चाहिए कि शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण है और व्यक्ति के लिए और अगर आप के आस पास कोई शिक्षित व्यक्ति हो तो उसे जरूर बताएं कि शिक्षा हमारे लिए कितनी जरूरी है अगर शिक्षण योगी तो कोई भी व्यक्ति इसीलिए तो अंग्रेज हमारे देश भारत पर शासन कर गए क्योंकि भारत के लोग ऐसी स्थिति पर बहुत सारे लोग शिक्षित होते जा रहे हैं धीरे-धीरे तो अब कोई भी अंग्रेजी तिरंगी हमारे देश पर कब्जा नहीं कर सकता इसलिए हमें अपने देश को स्वतंत्र स्वतंत्र और सही रखने के लिए हमें अपने देश के नागरिक को शिक्षित करना होगा तो हर किसी को शिक्षा का बताइए जैसे कि उसे भी शिक्षा का महत्व बताइए और भारत की शिक्षा कैसी है भारत की शिक्षा यही कहते कि हर किसी को शिक्षा का महत्व पता और चाहिए तो बाहर हर जगह हर किसी को शिक्षा का महत्व बताया जाता है और हर किसी को शिक्षा दी जाती है स्कूलों में सरकारी स्कूलों में सबको फ्री में भी शिक्षा दी जाती है 14 वर्ष तक के बच्चों को और अगर उससे अधिक में शिक्षा लेनी है तो फोन के माध्यम से या मलहम नेटवर्क हो नेट डलवा कर उमरेड से या गूगल से कहीं से भी पढ़ाई कर सकते हैं यह सब सुविधा सरकार ने भारत सरकार ने दिए वह सारे से देशों में शायद अभी सुविधा नहीं है पता नहीं लेकिन भारत सबसे अच्छा इसीलिए है यहां पर सब एक दूसरे को समझाते हैं कि शिक्षा हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है हर कोई आता है कि हम शिक्षित हों हर कोई चाहता है कि हमारे बच्चे शिक्षित हो अगर मेरे जवाब अच्छा लगा तो लाइक और कमेंट करके बताना थैंक यू बाय बाय

aapka prashna hai bharat me shiksha ke bare me bataye toh bharat me shiksha bahut hi achi hai aur deshon ke muqable itni chinta nahi thi aap bharat me shiksha badhti ja rahi hai aur badhti ja rahi hai aur achi shiksha milti hai yahan par bharat me aur deshon me itni achi shiksha milti lekin ab bhi bharat ke bahut se log aise the par ab main bharat me shiksha bahut unche sthar me bhi jaari sarkari schoolon me is karan koi bhi baccha aisi cheez na reh jaaye isliye 14 varsh ki aayu tak me di ja rahi hai sarkari school me aur aap apne phone se youtube par pad sakta hai kahin par bhi padh sakte hain youtube ya koi app download karke padh sakte hain agar aapko padh sakte hain vaah jawab de devi us par bhi aap jawab de sakte aap bhi is se gyaan le sakte hain aur topper apple padh sakte hain kramank bahut saare banaras hai jisse aap apni padhai kar sakte hain isliye bharat bharat padhai ke mamle me bahut hi ucch sthar tak pahuchta ja raha dhire dhire hamein apne bharat ko shikshit banane ke liye apne aaspass koi apps sthit hai ya koi use purana vichar ka hissa hai toh use samajhana chahiye ki shiksha kitni mahatvapurna hai har vyakti ke liye use samajhana chahiye hamein aur tabhi hum apne desh bharat ko aur unche sthan tak pohcha sakte shiksha me har kisi ko shikshit kar sakte hain shiksha ke karan karan hamara desh surakshit rahega 7 logo ke andar shiksha hogi bharatiya ka mahatva jaanege saaf safaai ka swatantrata ka har cheez ka aur pradushan pradushan nikalna chahiye sabka unhe gyaan hoga sab pata chalega ki yah kya cheez hoti hai aur unhe choti se choti baat pata chal jayegi aur koi bhi humse phir koi bhi desh jo bhi baat karega vaah log sab ko pata chal jayegi isliye sabko hamein shiksha ka mahatva batana chahiye ki shiksha bahut mahatvapurna hai aur vyakti ke liye aur agar aap ke aas paas koi shikshit vyakti ho toh use zaroor bataye ki shiksha hamare liye kitni zaroori hai agar shikshan yogi toh koi bhi vyakti isliye toh angrej hamare desh bharat par shasan kar gaye kyonki bharat ke log aisi sthiti par bahut saare log shikshit hote ja rahe hain dhire dhire toh ab koi bhi angrezi tirangi hamare desh par kabza nahi kar sakta isliye hamein apne desh ko swatantra swatantra aur sahi rakhne ke liye hamein apne desh ke nagarik ko shikshit karna hoga toh har kisi ko shiksha ka bataiye jaise ki use bhi shiksha ka mahatva bataiye aur bharat ki shiksha kaisi hai bharat ki shiksha yahi kehte ki har kisi ko shiksha ka mahatva pata aur chahiye toh bahar har jagah har kisi ko shiksha ka mahatva bataya jata hai aur har kisi ko shiksha di jaati hai schoolon me sarkari schoolon me sabko free me bhi shiksha di jaati hai 14 varsh tak ke baccho ko aur agar usse adhik me shiksha leni hai toh phone ke madhyam se ya malhum network ho net dalwa kar umared se ya google se kahin se bhi padhai kar sakte hain yah sab suvidha sarkar ne bharat sarkar ne diye vaah saare se deshon me shayad abhi suvidha nahi hai pata nahi lekin bharat sabse accha isliye hai yahan par sab ek dusre ko smajhate hain ki shiksha hamare liye bahut mahatvapurna hai har koi aata hai ki hum shikshit ho har koi chahta hai ki hamare bacche shikshit ho agar mere jawab accha laga toh like aur comment karke batana thank you bye bye

आपका प्रश्न है भारत में शिक्षा के बारे में बताएं तो भारत में शिक्षा बहुत ही अच्छी है और दे

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Angad Yadav

I.T.B.P Force .Teacher. Social Worker

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भारत की शिक्षा जो है कौशल आत्मक शिक्षा नाव का 1 डिग्री धारी शिक्षा है यह शिक्षा दो अंग्रेजों द्वारा बनाई गई थी वहीं चली आ रही थी उसमें जाऊंगी कानून बनाया था उन्हें यह नहीं किया था कि जो है कि हमें भारतीय लोगों को पढ़ाना है सिर्फ गुलामी करने के लिए ताकि गुलामी करने में आसानी हो पढ़ाई के गुलाम होने लगा दीजिए सोना पासिंग होता है सो नंबर का कोई पेपर है ठीक है इसलिए उसको 33 मिल जाता है तो पास हो जाता है तो उसने कितना पर्सेंट लांच किया 63% मनोज को 33 वर्ष विज्ञान में सोने ठीक है सो में 33 के अगले कक्षा 6 में जाएगा 33 में कितने पर्सेंट आप जोड़ लीजिए पिलाते हो किसका आखिरी 10 लीटर का कितने पर्सेंट जाएगा इसलिए यह बहुत गलत है तभी तो आज हमारे देश में बहुत मजेदार है हाईस्कूल पास करने के बाद ही क्यों भेज रहे यही हम जो है कि 60 75 प्रश्न कक्षा 5 में लगा दिया तो बच्चा जो है कि अगली बार से याद करता है किसको पता है कि सोमेटिक्स नंबर लाना है अगली क्लास में बढ़िया ना है तो क्यों मैसेज करना कि तभी तो आज जो है कि एमबीए करके जो है कि बच्चे जो है कि भेज बाद घूम रहे यही काम है

bharat ki shiksha jo hai kaushal aatmkatha shiksha nav ka 1 degree dhari shiksha hai yah shiksha do angrejo dwara banai gayi thi wahi chali aa rahi thi usme jaungi kanoon banaya tha unhe yah nahi kiya tha ki jo hai ki hamein bharatiya logo ko padhana hai sirf gulaami karne ke liye taki gulaami karne me aasani ho padhai ke gulam hone laga dijiye sona passing hota hai so number ka koi paper hai theek hai isliye usko 33 mil jata hai toh paas ho jata hai toh usne kitna percent launch kiya 63 manoj ko 33 varsh vigyan me sone theek hai so me 33 ke agle kaksha 6 me jaega 33 me kitne percent aap jod lijiye peelate ho kiska aakhiri 10 litre ka kitne percent jaega isliye yah bahut galat hai tabhi toh aaj hamare desh me bahut majedar hai highschool paas karne ke baad hi kyon bhej rahe yahi hum jo hai ki 60 75 prashna kaksha 5 me laga diya toh baccha jo hai ki agli baar se yaad karta hai kisko pata hai ki sometiks number lana hai agli class me badhiya na hai toh kyon massage karna ki tabhi toh aaj jo hai ki mba karke jo hai ki bacche jo hai ki bhej baad ghum rahe yahi kaam hai

भारत की शिक्षा जो है कौशल आत्मक शिक्षा नाव का 1 डिग्री धारी शिक्षा है यह शिक्षा दो अंग्रेज

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Rakesh Kumar Chandra

BE ( Electrical )/ MBA ( Marketing) Electrical Engineer

4:02

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भारत में शिक्षा के बारे में बताएं देखेगा भारत जो है विकासशील देश है और शिक्षा के क्षेत्र में भारत निरंतर प्रयास कर रहा है अब भारत में शिक्षा जहां सरकारी विद्यालयों के माध्यम से सरकारी विश्वविद्यालयों के माध्यम से दी जा रही थी उसके साथ ही सरकार ने रिजर्वेशन पास करके अब क्षेत्रीय यानी कि प्राइवेट विश्वविद्यालय की स्थापना बड़ी तेजी से हुई है यूजीसी के द्वारा बड़ी तेजी से गाइडलाइन जारी की गई है और अब बहुत सारे प्राइवेट विश्वविद्यालय यूनिवर्सिटी सब शिक्षा के क्षेत्र में आ चुके हैं चाय छेद इंजीनियरिंग का हो टेक्नोलॉजी कहां हो विज्ञान का हो या फिर मानविकी विषयों का हो या फिर प्रबंधन या वकालत का क्षेत्र हो हर क्षेत्र में आज पूरे भारत में विश्वविद्यालयों की मार लगी हुई है इंजीनियरिंग और मेडिकल क्षेत्रों में और एमबीए के कितने जाला इतने जायदा कॉलेजेस खुल चुके हैं कि आज इन चित्रों में विद्यालय तो खड़े हुए हैं लेकिन विद्यार्थी नहीं मिल पा रहे हैं क्वालिटी में इंप्रूवमेंट हुआ है लेकिन साथ ही साथ बहुत याद में बहुत ज्यादा संख्या में विश्वविद्यालय प्ले के कारण उन पर नियंत्रण प्रभाव कारी नहीं हो पा रहा है जगह-जगह जो विश्वविद्यालयों में जो फीस में चर्चाएं आया करती हैं सरकारी और प्राइवेट विद्यालयों में कॉलेजों में महाविद्यालयों में विश्वविद्यालयों में फीस में भारी अंतर है अगर किसी प्राइवेट यूनिवर्सिटी से कहिए में किया जाता है तो उसकी 30 40 से ₹50000 2 साल के लिए ली जाती है वहीं सरकारी में उसकी फीस 2 से ₹4000 होती है तो इस तरीके की व्यवस्थाएं हैं जिस तरीके से व्यवसायीकरण हुआ है शिक्षा का और शिक्षा केवल डिग्री खरीदने का काम आ रही है आज शिक्षा जो करोड़पति है दंपति हैं कुबेर पति ने कहा जाता है वह डिग्रियां पैसों से खरीद रहे हैं शिक्षा का स्तर बिल्कुल खराब हो चुका है एग्जाम्स में कोई कढ़ाई नहीं होती प्यार की नकल कराई जाती हैं तो ऐसे देश का और ऐसी यूनिवर्सिटीज के खुलने से कोई फायदा नहीं आज बच्चों को फेल नहीं किया जाता उन्हें प्रमोट कर दिया जाता है तो इस तरीके की एजुकेशन को बढ़ावा देने से इस तरीके के प्रबंधों को रिझाने से देश का विकास नहीं हो सकता अच्छी प्रतिमाएं आगे नहीं आ पाती क्योंकि अच्छी प्रतिभाएं दब जाती हैं उन कारणों से और लोग डिग्रियां ऐसे ही ले लेते हैं तो कोई मिला करके भारत में शिक्षा का भविष्य बहुत अच्छा नहीं है कुछ हद तक सुधारने की कोशिश की गई थी लेकिन उसमें सुधारने के बजाय स्तर नकारात्मक होता चला गया है तो उसमें बहुत ज्यादा इंप्रूवमेंट की जरूरत है देखिएगा दिल्ली सरकार ने वहां के सरकारी स्कूलों की दशा में काफी अच्छा सुधार किया है काफी अच्छा बजट खर्च किया है लेकिन ऐसा उत्तर प्रदेश में नहीं है तक देश के प्राइमरी प्राथमिक विश्वविद्यालयों की स्थिति इतनी ज्यादा खराब है कि वहां की दशा देखी जा सकती है तो वास्तव में भारत में शिक्षा के विषय में बहुत ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता है बल्कि शिक्षा अब राम भरोसे रह गई है धन्यवाद

bharat me shiksha ke bare me bataye dekhega bharat jo hai vikasshil desh hai aur shiksha ke kshetra me bharat nirantar prayas kar raha hai ab bharat me shiksha jaha sarkari vidhayalayo ke madhyam se sarkari vishvavidyalayon ke madhyam se di ja rahi thi uske saath hi sarkar ne reservation paas karke ab kshetriya yani ki private vishwavidyalaya ki sthapna badi teji se hui hai ugc ke dwara badi teji se guideline jaari ki gayi hai aur ab bahut saare private vishwavidyalaya university sab shiksha ke kshetra me aa chuke hain chai ched Engineering ka ho technology kaha ho vigyan ka ho ya phir manviki vishyon ka ho ya phir prabandhan ya vakalat ka kshetra ho har kshetra me aaj poore bharat me vishvavidyalayon ki maar lagi hui hai Engineering aur medical kshetro me aur mba ke kitne jala itne zayada colleges khul chuke hain ki aaj in chitron me vidyalaya toh khade hue hain lekin vidyarthi nahi mil paa rahe hain quality me improvement hua hai lekin saath hi saath bahut yaad me bahut zyada sankhya me vishwavidyalaya play ke karan un par niyantran prabhav kaari nahi ho paa raha hai jagah jagah jo vishvavidyalayon me jo fees me charchaen aaya karti hain sarkari aur private vidhayalayo me collegeon me mahavidyalayon me vishvavidyalayon me fees me bhari antar hai agar kisi private university se kahiye me kiya jata hai toh uski 30 40 se Rs 2 saal ke liye li jaati hai wahi sarkari me uski fees 2 se Rs hoti hai toh is tarike ki vyavasthaen hain jis tarike se vyavasayikaran hua hai shiksha ka aur shiksha keval degree kharidne ka kaam aa rahi hai aaj shiksha jo crorepati hai dampati hain kuber pati ne kaha jata hai vaah digriyan paison se kharid rahe hain shiksha ka sthar bilkul kharab ho chuka hai exams me koi kadhai nahi hoti pyar ki nakal karai jaati hain toh aise desh ka aur aisi universities ke khulne se koi fayda nahi aaj baccho ko fail nahi kiya jata unhe promote kar diya jata hai toh is tarike ki education ko badhawa dene se is tarike ke prabandhon ko rijhaane se desh ka vikas nahi ho sakta achi pratimaen aage nahi aa pati kyonki achi pratibhayen dab jaati hain un karanon se aur log digriyan aise hi le lete hain toh koi mila karke bharat me shiksha ka bhavishya bahut accha nahi hai kuch had tak sudhaarne ki koshish ki gayi thi lekin usme sudhaarne ke bajay sthar nakaratmak hota chala gaya hai toh usme bahut zyada improvement ki zarurat hai dekhiega delhi sarkar ne wahan ke sarkari schoolon ki dasha me kaafi accha sudhaar kiya hai kaafi accha budget kharch kiya hai lekin aisa uttar pradesh me nahi hai tak desh ke primary prathmik vishvavidyalayon ki sthiti itni zyada kharab hai ki wahan ki dasha dekhi ja sakti hai toh vaastav me bharat me shiksha ke vishay me bahut zyada kuch nahi kaha ja sakta hai balki shiksha ab ram bharose reh gayi hai dhanyavad

भारत में शिक्षा के बारे में बताएं देखेगा भारत जो है विकासशील देश है और शिक्षा के क्षेत्र म

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Suhani Singh

activity teacher

3:53
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत में शिक्षा के बारे में बताएं मुझे के भारत में शिक्षा के बारे में बताना एक बहुत ही टिपिकल सब्जेक्ट है क्योंकि आज जो भारत की शिक्षा पद्धति है एजुकेशन सिस्टम है ऐसा नहीं है कि वो 23 को एक योग्य नागरिक दे सके आज के दौर में शिक्षा सिर्फ एक फॉर्मेलिटी और शायद यही वजह है कि स्कूलों के होते हुए भी इतने कोचिंग सेंटर सफलतापूर्वक चल रहे शिक्षा पद्धति के बारे में में सबसे महत्वपूर्ण बात बताना चाहूंगी शिक्षा क्या है शिक्षा का मतलब सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं है शिक्षा का मतलब आपका सर्वांगीण विकास लेकिन भारत में जो एजुकेशन सिस्टम है वह किताबों पर बेस्ट है या एक्टिविटी पर बेस्ड है और एक्टिविटी भी इस तरह की नहीं सिखाई जाती है कि व्यक्ति एक अच्छा नागरिक बन सकें मेरा मानना है मेरे अपने स्वयं के विचार है कि किताबी ज्ञान आप कभी भी किसी की उम्र में ले सकते हैं लेकिन अगर आपको संस्कार नहीं दिए गए आपको संस्कार नहीं मिला तो फिर आपका होना ना होना प्यार है और शायद यही का भारत में अपराधों की स्थिति बद से जा रही है चाहे वह या कुछ और तुझे शिक्षा पद्धति है उसमें जो भी सब्जेक्ट होते हैं वह सारे सब्जेक्ट आगे चलके आपके किसी काम के नहीं होते तो मेरा सुझाव है या मेरे हिसाब से आप जानना चाहेंगे मेरा मेरे पॉइंट ऑफ यू से मेरा सजेशन जानना चाहेंगे तो सरकार को शिक्षा पद्धति में मूलभूत परिवर्तन करना चाहिए शिक्षा अध्यक्ष ऐसी हो कि बच्चों का मेंटल फिजिकल आजकल चरण तीनों तरह का डेवलपमेंट भारतीय संस्कृति सबसे पुरानी और सबसे मजबूत है लेकिन आज वह कहीं खो सी गई है चाहे उसका कारण मुगलों का शासन रहा हो अंग्रेजों का शासन रहा हूं गुलामी नहीं हूं लेकिन आप पीछे देखिए आश्रम थे जो गुरु के द्वारा शिक्षा दे दी जाती थी उसमें बच्चों का छात्रों का सर्वांगीण विकास होता था मूल्यों का भी विकास होता था और शिक्षा का भी होता था लेकिन आज ऐसा नहीं है और इसी की वजह से आज बचपन से ही बच्चे बचपना खो देते हैं और तनाव के दिन लगी जीते हैं उन्हें सिर्फ इसलिए तैयार किया जाता है कि वह एक अच्छी नौकरी पा सके अच्छी नौकरी भी क्या मतलब अर्निंग कर सके तो जहां पर भी शिक्षा होगी वह कभी पूरी तरह से सही नहीं होगी यह मेरा अपना विचार

bharat me shiksha ke bare me bataye mujhe ke bharat me shiksha ke bare me batana ek bahut hi tipikal subject hai kyonki aaj jo bharat ki shiksha paddhatee hai education system hai aisa nahi hai ki vo 23 ko ek yogya nagarik de sake aaj ke daur me shiksha sirf ek formality aur shayad yahi wajah hai ki schoolon ke hote hue bhi itne coaching center safaltaapurvak chal rahe shiksha paddhatee ke bare me me sabse mahatvapurna baat batana chahungi shiksha kya hai shiksha ka matlab sirf kitabi gyaan nahi hai shiksha ka matlab aapka Sarvangiṇa vikas lekin bharat me jo education system hai vaah kitabon par best hai ya activity par based hai aur activity bhi is tarah ki nahi sikhai jaati hai ki vyakti ek accha nagarik ban sake mera manana hai mere apne swayam ke vichar hai ki kitabi gyaan aap kabhi bhi kisi ki umar me le sakte hain lekin agar aapko sanskar nahi diye gaye aapko sanskar nahi mila toh phir aapka hona na hona pyar hai aur shayad yahi ka bharat me apradho ki sthiti bad se ja rahi hai chahen vaah ya kuch aur tujhe shiksha paddhatee hai usme jo bhi subject hote hain vaah saare subject aage chal ke aapke kisi kaam ke nahi hote toh mera sujhaav hai ya mere hisab se aap janana chahenge mera mere point of you se mera suggestion janana chahenge toh sarkar ko shiksha paddhatee me mulbhut parivartan karna chahiye shiksha adhyaksh aisi ho ki baccho ka mental physical aajkal charan tatvo tarah ka development bharatiya sanskriti sabse purani aur sabse majboot hai lekin aaj vaah kahin kho si gayi hai chahen uska karan mugalon ka shasan raha ho angrejo ka shasan raha hoon gulaami nahi hoon lekin aap peeche dekhiye ashram the jo guru ke dwara shiksha de di jaati thi usme baccho ka chhatro ka Sarvangiṇa vikas hota tha mulyon ka bhi vikas hota tha aur shiksha ka bhi hota tha lekin aaj aisa nahi hai aur isi ki wajah se aaj bachpan se hi bacche bachapana kho dete hain aur tanaav ke din lagi jeete hain unhe sirf isliye taiyar kiya jata hai ki vaah ek achi naukri paa sake achi naukri bhi kya matlab earning kar sake toh jaha par bhi shiksha hogi vaah kabhi puri tarah se sahi nahi hogi yah mera apna vichar

भारत में शिक्षा के बारे में बताएं मुझे के भारत में शिक्षा के बारे में बताना एक बहुत ही टिप

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pradeepraj(9026899182) व्हाट्सएप no

Teacher,Counsellor,youtuber(EMPOWERING SOCIETY)Youtube Channel

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प्राचीन काल में पढ़ने की अध्ययन करने की गुरुकुल व्यवस्था की मध्यकाल में व्यवस्था चलती रही अंग्रेजों के समय में मैं काली मिनट आया और शिक्षा का एक नया पैटर्न अपनाया गया और भी कई आयोग आते रहे उसके बाद आजादी के बाद जो महत्वपूर्ण आयोग आया वह कोठारी आयोग आया उसने शिक्षा को त्रिस्तरीय रखने की अनुशंसा की वर्तमान में जो है यही अंतिम सा काम करती है लेकिन ncf-2005 के बाद शिक्षा में एक बड़ा बदलाव आया है 2005 और 9 में उसमें यह कहा गया कि शिक्षा एक ऐसी होनी चाहिए जिसको अंतर विषय बनाया जा सके यानी कि शिक्षा आपकी दैनिक जीवन से और एक दूसरे की विषय से जुड़ी होनी चाहिए और यह शिक्षा की जो सर्वांगीण परिभाषा है उसके निकट है और आज के जमाने में जरूरी भी है

prachin kaal me padhne ki adhyayan karne ki gurukul vyavastha ki madhyakaal me vyavastha chalti rahi angrejo ke samay me main kali minute aaya aur shiksha ka ek naya pattern apnaya gaya aur bhi kai aayog aate rahe uske baad azadi ke baad jo mahatvapurna aayog aaya vaah kothari aayog aaya usne shiksha ko tristariye rakhne ki anushansha ki vartaman me jo hai yahi antim sa kaam karti hai lekin ncf 2005 ke baad shiksha me ek bada badlav aaya hai 2005 aur 9 me usme yah kaha gaya ki shiksha ek aisi honi chahiye jisko antar vishay banaya ja sake yani ki shiksha aapki dainik jeevan se aur ek dusre ki vishay se judi honi chahiye aur yah shiksha ki jo Sarvangiṇa paribhasha hai uske nikat hai aur aaj ke jamane me zaroori bhi hai

प्राचीन काल में पढ़ने की अध्ययन करने की गुरुकुल व्यवस्था की मध्यकाल में व्यवस्था चलती रही

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Bc Dhavan

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भारतीय शिक्षा का स्तर काफी गिरा गिरा हुआ है क्योंकि भारत में शिक्षा का स्तर गिरने का एक मुख्य कारण है जिसमें राजनीति की करण राजनीति की करण की वजह से भारत में शिक्षा की जितने भी शुरू होता है और सही समय पर सही अवस्था में नहीं पहुंच पाते हैं ऐसी स्थिति में भारतीय शिक्षा दुनिया की शिक्षा से काफी कमजोर है

bharatiya shiksha ka sthar kaafi gira gira hua hai kyonki bharat me shiksha ka sthar girne ka ek mukhya karan hai jisme raajneeti ki karan raajneeti ki karan ki wajah se bharat me shiksha ki jitne bhi shuru hota hai aur sahi samay par sahi avastha me nahi pohch paate hain aisi sthiti me bharatiya shiksha duniya ki shiksha se kaafi kamjor hai

भारतीय शिक्षा का स्तर काफी गिरा गिरा हुआ है क्योंकि भारत में शिक्षा का स्तर गिरने का एक मु

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