बुरी नज़र से बचने के लिए लोग क्यों निम्बू और मिर्च का प्रयोग करते हैं?...


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Umesh Upaadyay

Life Coach | Motivational Speaker

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ज़िद है कि हमें ना कभी भी आधी अधूरी जानकारी के साथ आगे नहीं बढ़ना चाहिए बहुत खतरनाक होते सबसे ज्यादा खतरनाक होता है हम तो ऐसा कर देंगे हमें पता भी नहीं होता फिर भी हम उस उस सब्जी पर बोलने चले जाते हैं अरे यार किसी को पता ही नहीं है क्या नींबू और मिर्च की कहानी क्या है मेरे को भी तो पता लगा है वह भी एक तरीके से पता लगाएं और मुझे लगता है कि यह जो शोर से जहां से मुझे पता लगाए मैंने रिसर्च किया पढ़ा जाना तो मुझे लगाइए काफी है तो सही बोल रहा है और तब मैंने उसको समझा और उसको मानने लगा हूं वैसा हालांकि इससे मुझे कुछ नुकसान नहीं है अब मैं बता दूं में नींबू मिर्च की कहानी क्या है आप दिल्ली सुबह या शाम को दोपहर में कहीं भी देखेंगे किसी भी सिग्नल पर आपको दिखेगा कि छोटे बच्चे भी नींबू और मिर्च लेके आना लटका कर घूमते रहते हैं उसको खरीदने वाला कौन है उसको खरीदने वाला ट्रक ड्राइवर ऑटो ड्राइवर यह सारे लोग खरीद लो की दुकान के लिए खरीदते क्यों खरीदें यह सोच कर कि मेरे दुकान को मेरे ट्रक को मेरे होठों को नजर ना लग जाए मिस की कहानी बता दो बैकग्राउंड क्या है जब यातायात के साधन नहीं थे उस समय लोग बैल गाड़ी वगैरह पर ट्रैवल करते थे एक जगह से दूसरे जगह जाने में उनको दिन और महीने लग जाते थे तो बहुत जरूरी सामग्री अपनी गाड़ी पर लाते थे और लेकर जाते थे चाहे वह लालटेन हो चाहे वह खाने का और सोने का हो बर्तन हो पानी हो जो भी कुछ लिखे जाते थे साथ में कुछ प्रिकॉशनरी चीजें भी लेकर जाते थे वह क्या कि कोई लाठी हो गया कोई लकड़ी हो गया कोई द केरोसिन हो गया अगर वह है तो खोल हो गया लकड़ी हो गया आग जलाने के लिए साथ में नींबू मिर्च यह भी लेकर जाते थे इसलिए कि अगर रास्ते में कोई कहीं वो आराम कर रहे हैं तो सांप या बिच्छू ने या किसी इंसेक्ट बाईट कर लिया उनको तो यह खा लेंगे तो वह बाइट का असर थोड़ा कम हो जाएगा एक्चुअरीज अन्यथा ट्रैवलर्स के लिए उस टाइम पर और आज देखे कहां से बात कहां पहुंच गई है

zid hai ki hamein na kabhi bhi aadhi adhuri jaankari ke saath aage nahi badhana chahiye bahut khataranaak hote sabse zyada khataranaak hota hai hum toh aisa kar denge hamein pata bhi nahi hota phir bhi hum us us sabzi par bolne chale jaate hai are yaar kisi ko pata hi nahi hai kya nimbu aur mirch ki kahani kya hai mere ko bhi toh pata laga hai vaah bhi ek tarike se pata lagaye aur mujhe lagta hai ki yah jo shor se jaha se mujhe pata lagaye maine research kiya padha jana toh mujhe lagaaiye kaafi hai toh sahi bol raha hai aur tab maine usko samjha aur usko manne laga hoon waisa halaki isse mujhe kuch nuksan nahi hai ab main bata doon mein nimbu mirch ki kahani kya hai aap delhi subah ya shaam ko dopahar mein kahin bhi dekhenge kisi bhi signal par aapko dikhega ki chote bacche bhi nimbu aur mirch leke aana Latka kar ghumte rehte hai usko kharidne vala kaun hai usko kharidne vala truck driver auto driver yah saare log kharid lo ki dukaan ke liye kharidte kyon khariden yah soch kar ki mere dukaan ko mere truck ko mere hothon ko nazar na lag jaaye miss ki kahani bata do background kya hai jab yatayat ke sadhan nahi the us samay log bail gaadi vagera par travel karte the ek jagah se dusre jagah jaane mein unko din aur mahine lag jaate the toh bahut zaroori samagri apni gaadi par laate the aur lekar jaate the chahen vaah lantern ho chahen vaah khane ka aur sone ka ho bartan ho paani ho jo bhi kuch likhe jaate the saath mein kuch precautionary cheezen bhi lekar jaate the vaah kya ki koi lathi ho gaya koi lakdi ho gaya koi the kerosene ho gaya agar vaah hai toh khol ho gaya lakdi ho gaya aag jalane ke liye saath mein nimbu mirch yah bhi lekar jaate the isliye ki agar raste mein koi kahin vo aaram kar rahe hai toh saap ya bichhoo ne ya kisi insekt bite kar liya unko toh yah kha lenge toh vaah byte ka asar thoda kam ho jaega ekchuarij anyatha travelers ke liye us time par aur aaj dekhe kahaan se baat kahaan pohch gayi hai

ज़िद है कि हमें ना कभी भी आधी अधूरी जानकारी के साथ आगे नहीं बढ़ना चाहिए बहुत खतरनाक होते स

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Dr. Rajesh Raval

Director, Rainbow Academy

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बुरी नजर से बचने के लिए लोग नींबू और मिर्च क्यों भागते हैं तो यह अवधारणा है यह घर या दुकान के आगे नींबू मिर्च बांधने से बुरी नजर नहीं लगती हो ऐसी अवधारणा है देखिए एक नींबू और साथ में यह बांधने का प्रचलन है वैसे भी उत्तर भारत दक्षिण भारत और सब हमने देखा है लोग यह मानते हैं इसमें इनकी सोचा है कि इससे बुरी नजर लगती नहीं है बिजनेस पर या घर पर लेकिन तब से यह है कि ऐसी कोई चीज होती नहीं है इसका एक पुरानी कहानी थी जिसके आधार पर लोगों ने नींबू मिर्च बांधना शुरू किया लक्ष्मी जी लक्ष्मी स्वीट पसंद है और लक्ष्मी की बहन जुड़वा बहने जो अलक्ष्मी कहता उसको लक्ष्मी को जो खट्टी चीजें पसंद है तो खट्टी चीज के साथ अगर मिर्च लगा दी जाए तो खटिक और चना के दार चीज होती है वह चीज अगर घर या दुकान के आगे लगाई जाए तो लक्ष्मी जो है वह लक्ष्मी आकर वह खाकर वापस लौट जाती है घर के अंदर नहीं आती है क्योंकि वह गरीबी लाती है तो प्रोस्पेरिटी एंड पॉवर्टी दोनों बहने हैं अगर प्रोस्पेरिटी चाहिए तो लक्ष्मी को अंदर आना चाहिए और अलक्ष्मी गाने पॉवर्टी उसको बाहर से ही भगा देना चाहिए तो बाहर से ही चली जाती है वह नींबू मिर्च देखें ऐसा सोचते हैं लोग कि उसे ग्रहण कर लिया खा लिया और रोज नए बांध में पढ़ते हैं अक्सर फायदा करती है लोगों ने ऐसा देखा है कहा है तभी तो हुआ है इसीलिए नींबू मिर्च लगाते हैं

buri nazar se bachne ke liye log nimbu aur mirch kyon bhagte hain toh yeh avdharna hai yeh ghar ya dukaan ke aage nimbu mirch bandhne se buri nazar nahi lagti ho aisi avdharna hai dekhie ek nimbu aur saath mein yeh bandhne ka prachalan hai waise bhi uttar bharat dakshin bharat aur sab humne dekha hai log yeh maante hain ismein inki socha hai ki isse buri nazar lagti nahi hai business par ya ghar par lekin tab se yeh hai ki aisi koi cheez hoti nahi hai iska ek purani kahani thi jiske aadhaar par logo ne nimbu mirch bandhana shuru kiya laxmi ji laxmi sweet pasand hai aur laxmi ki behen judwa behne jo alakshmi kahata usko laxmi ko jo khatti cheezen pasand hai toh khatti cheez ke saath agar mirch laga di jaye toh khatik aur chana ke daar cheez hoti hai wah cheez agar ghar ya dukaan ke aage lagayi jaye toh laxmi jo hai wah laxmi aakar wah khakar wapas lot jati hai ghar ke andar nahi aati hai kyonki wah garibi lati hai toh prosperity end poverty dono behne hain agar prosperity chahiye toh laxmi ko andar aana chahiye aur alakshmi gaane poverty usko bahar se hi bhaga dena chahiye toh bahar se hi chali jati hai wah nimbu mirch dekhen aisa sochte hain log ki use grahan kar liya kha liya aur roj naye bandh mein padhte hain aksar fayda karti hai logo ne aisa dekha hai kaha hai tabhi toh hua hai isliye nimbu mirch lagate hain

बुरी नजर से बचने के लिए लोग नींबू और मिर्च क्यों भागते हैं तो यह अवधारणा है यह घर या दुकान

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Snehasish Gupta

Journalist / Traveller

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Mohini

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