सर्दियों में ध्यान क्यों नहीं लगाया जा सकता है?...


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नमस्कार प्रश्न है कि सर्दियों में ध्यान क्यों नहीं लगाया जा सकता है हां यह प्रश्न थोड़ा अजीब है क्योंकि यह ध्यान की यात्रा जब शुरू होती है तो उसका मौसम से तो कोई लेना देना नहीं होता सर्दियों में ध्यान ना लगने का बस एक प्रमुख कारण यही हो सकता है कि यदि आप सुबह 4:00 बजे उठकर ध्यान करना चाहिए या 5:00 बजे उठकर ध्यान करना चाहे तो उस वक्त क्योंकि सर्दी ज्यादा होती है व्यक्ति आसानी से रजाई को कंबल को नहीं छोड़ पाता है तो ध्यान करने में बाधा आ सकती है अगर सुबह नहीं उठ सकते हैं तो दिन के वक्त किसी भी वक्त जब आपको सहूलियत हो तो ध्यान कर ले तो 24 घंटे में जो भी समय आपके लिए जिस भी मौसम में उपयुक्त हो हापुस वक्त ध्यान करें गर्मियां अगर है तो गर्मियों में जो वक्त आपको सूट करें आप उस समय ध्यान कर ले क्योंकि देहांत तभी लगेगा जब आप सहज होंगे तो जब आपके अंदर से हट सजदा है जब आप कंफर्टेबल महसूस कर रहे हैं और पर्याप्त समय भी है आपके पास तमाम ध्यान कीजिए मौसम का ध्यान से कोई लेना-देना नहीं क्योंकि यह तो हमारे अपने अंदर भी तक की यात्रा का नाम ध्यान है इसका बाहरी संसार की जो आबोहवा है मौसम है उसका इस पर कोई भी असर नहीं होता और ना ही ऐसी कोई रुकावट मैंने अपनी ध्यान की यात्रा में कभी महसूस करिए शुरुआती चरणों में जरूर है जब व्यक्ति शुरू शुरू में से जोड़ता है तो क्योंकि वह से परिचित नहीं होता है तो कोई भी कारण बना सकता है कोई भी कारण उसके लिए बन सकते हैं सदियां ज्यादा लग सकती गर्मी ज्यादा लग सकती है लेकिन जब वे मेडिटेशन का एक लंबा समय पूरा कर चुका होता है तब समय का और ऋतु का कोई भी असर उस पर नहीं होता है धन्यवाद

namaskar prashna hai ki sardiyo me dhyan kyon nahi lagaya ja sakta hai haan yah prashna thoda ajib hai kyonki yah dhyan ki yatra jab shuru hoti hai toh uska mausam se toh koi lena dena nahi hota sardiyo me dhyan na lagne ka bus ek pramukh karan yahi ho sakta hai ki yadi aap subah 4 00 baje uthakar dhyan karna chahiye ya 5 00 baje uthakar dhyan karna chahen toh us waqt kyonki sardi zyada hoti hai vyakti aasani se rajaai ko kambal ko nahi chhod pata hai toh dhyan karne me badha aa sakti hai agar subah nahi uth sakte hain toh din ke waqt kisi bhi waqt jab aapko sahuliyat ho toh dhyan kar le toh 24 ghante me jo bhi samay aapke liye jis bhi mausam me upyukt ho hapus waqt dhyan kare garmiyaan agar hai toh garmiyo me jo waqt aapko suit kare aap us samay dhyan kar le kyonki dehant tabhi lagega jab aap sehaz honge toh jab aapke andar se hut sajda hai jab aap Comfortable mehsus kar rahe hain aur paryapt samay bhi hai aapke paas tamaam dhyan kijiye mausam ka dhyan se koi lena dena nahi kyonki yah toh hamare apne andar bhi tak ki yatra ka naam dhyan hai iska bahri sansar ki jo aabohawa hai mausam hai uska is par koi bhi asar nahi hota aur na hi aisi koi rukavat maine apni dhyan ki yatra me kabhi mehsus kariye shuruati charno me zaroor hai jab vyakti shuru shuru me se Jodta hai toh kyonki vaah se parichit nahi hota hai toh koi bhi karan bana sakta hai koi bhi karan uske liye ban sakte hain sadiyan zyada lag sakti garmi zyada lag sakti hai lekin jab ve meditation ka ek lamba samay pura kar chuka hota hai tab samay ka aur ritu ka koi bhi asar us par nahi hota hai dhanyavad

नमस्कार प्रश्न है कि सर्दियों में ध्यान क्यों नहीं लगाया जा सकता है हां यह प्रश्न थोड़ा अज

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