आपके बचपन के सबसे पसंदीदा स्मृति को बताएं?...


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मधुपाल सिंह नागपुरे

लाइब्रेरियन( ग्रंथपाल) मार्गदर्शक । मित्र सलाहकार। सुलभ ज्ञान। सत्य दर्शक ।

9:38

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आपने हमसे पूछा है आप के बचपन के सबसे पसंदीदा स्मृति को बताए तो देखिए हर व्यक्ति के जीवन में बचपन का समय आता है और चला जाता हमने भी अपने बचपन को जिया है तो बचपन के दिन जो होते हैं बड़े खूबसूरत होते बड़े प्यारे होते हैं बड़े मधुर होते हैं आपने हमारे बचपन की स्मृतियों के बारे में पूछा है तो हमें बहुत कुछ याद है शेयर करने के लिए बचपन में हम बड़े शरारती थे बड़े नटखट से बड़े मतवाले थे बचपन में हम जमकर खेला खुदा करते थे हमारे गांव में एक बड़ा सा तालाब है तालाब में हमेशा सुंदर औरतों के पानी भरा रहता है और तालाब में किसी को पैर छूने की भी अनुमति नहीं है उस तालाब के किनारे लो मंदिर भी है और थोड़ी सी साइड में एक बड़ा सा बरगद का पेड़ है जिसकी जो अंजड़ जो है तालाब के पानी तक चलता रहता है तो उन जड़ों के सहारे हम खिला करते थे और पानी में पानी को स्पर्श किया करते थे हाथों से ही एक ही याद है बचपन की है ना और बचपन में हम आम की जो गर्मियों की छुट्टियों में आम के झाड़ पर चढ़कर आमचूर आया करते थे आप थोड़ा करते थे हमारे खेत के हमलों में भी बहुत सारे आम से सुंदर-सुंदर केवीए कच्चे आम मीठे आम खट्टे आम खाया करते थे चने के खेत में हम चने भूनकर खाया कर सकते से खाते थे गेहूं की खेत में गेहूं खाया करते थे ना मैं तो अपने मित्र के यहां से उनके यहां दही बहुत जमाते थे तुम्हें दही चुरा कर ला लिया करता था यह बचपन की मेरी शरारत थी है ना तो बहुत सारी यादें हैं संतरे चुराए हमने संतरे खाए हम बचपन में साइकिल जो होती है साइकिल से जो टायर निकल जाता है वह टायर को गोल-गोल एक लकड़ी के सहारे से घूम आया करते थे हम लुकाछिपी खेला करते थे बचपन में हम मधुमक्खी तलाश करते थे उनका रस निकाल कर के खा जाए करते थे शहनाई भी काम किया अपने बचपन में बचपन में हम कंचे खेला करते थे नैना कई तरह के खेल होते थे कंचों के खेल में है ना हम बचपन में हमला भी करके खेलो चाचा जो लकड़ी को सरकार करके बेशर्म की लकड़ी को सरकार करके खेला जाता था वह खेला करते थे हम कबड्डी खेलते थे कुश्ती खेलते थे हम पानी में दिन भर रहा तेरे ते ते ते ते रहते थे ना नदी में तालाब में है ना तो इस तरह की बहुत सारी यादें हैं मृत्य है बचपन की हमारी है बचपन में हम गांव जाने आप पसंद करते थे मामा के गांव नानी के गांव है ना और इस तरीके से बचपन में हम बहुत मौज किया करते थे बचपन में कीचड़ में खेलते थे घुटनों के बल चलते थे बारिश के पानी में भीगते थे जानबूझकर के भी दिखते थे जमकर बारिश हो रही होती थी और हम बहुत में बिंदास निकल जाया करते थे हेना बिजली अभी कड़क रही है तो बारिश में हम निकल जाते थे इतने लीडर हुआ करते थे हम बचपन में बचपन में हम थोड़ी जिद्दी भी थे जो चीज करनी तो कर ले कुछ ठीक है और बाद में मानवीय जाते थे हमारी मां बचपन में हमें बहुत प्रेम करती थी हमारे लिए गरम-गरम रोटियां और चाय बनाया करते थे हमारे जो आप दादाजी हैं वे खुद के लिए चाय अपने लिए बनाते थे क्योंकि उन्हें कड़क चाय चाय चाहिए होती थी दूधवाली प्योर शुद्ध देसी गाय की इसके बनते तक हूं वही चूल्हे के पास बैठे हुए होते थे लकड़ी का झूला होता था है ना बढ़िया सी आज उसमें से सीखते रहते थे और वहां चाय बनती रहती थी और दादा जी उसमें से हम लोगों को भी चाय दे दिया करते थे पीने के लिए यह बचपन की यादें गरमा गरम दूध हम बचपन में ऊपरी हुई दूध गाय के पिया करते थे यह बचपन की यादें हैं हमारी है और भी बहुत सारी यादें हैं खेतों की सैर जंगलों की शेर है ना बड़ों की सैर नदियों में नाना चरणों में जाना है ना खूबसूरत चीजों को देखना बचपन में हम शर्माए अभी करते थे लड़कियों को देखकर औरतों को देखकर महिलाओं को देखकर हम सुख जाया करते थे कोई हमें डांट देता था तो हम मर जाते थे ना पिताजी से हम बहुत डरते थे है ना और बचपन में हम ड्रामा वगैरे देखा करते थे गांव में जो ड्रामा करके होता था पौराणिक कथाओं पर आधारित उसको हम देखा करते थे बचपन में हम नाटक और संगीत सुना करते थे आकाशवाणी पर हम चित्रहार छाया गीत और दूरदर्शन पर जो धारावाहिक आते थे रामायण महाभारत उसको देखने के लिए हम से 7 किलोमीटर का सफर तय करके दूसरे गांव में जाते थे और वहां टीवी पर देखते थे नैना हमारी तैयारी पहले से ही हो जाया करते थे हमने पूरा महाभारत देखा और पूरा रामायण भी सुना और देखा है अपनी आंखों से पहली कड़ी से पहले प्रथम बारिश हुई थी और इसी तरीके के दिन जो फिल्म आया करती थी टीवी पर उसके लिए हम पर सभी लोग पहले से ही तैयार हो जाए करते थे हमारा एक सुमित्रो था उसके घर में टीवी आई थी तो उठाओ जो हमारा मित्र था वह 25 25 पैसे लेता था फिल्म दिखाने के लिए अपने घर में टीवी पर रोहित वार को आती थी ऐसा मज़ेदार किया था बाद में उसके पिताजी ने डांट दिया था और उसने फिर बंद कर दिया था तो ऐसे ही से नटखट हुआ करते क्लास में मस्तियां हम तो लड़कियों से भी लड़ पड़ते थे क्लास में लड़कियां हमसे उलझ जाती थी मतलब बचपन था लड़का और लड़की हम भेद नहीं समझ पाते थे ना तब कुछ बिंदास था सब कुछ अच्छा था मस्ती भरा था आनंद भरा था खाने-पीने के शौकीन थे खट्टा मीठा तीखा सब कुछ खा जाते थे है ना सब कुछ हजम हो जाता था जब तक फैला कर देते जमकर मस्ती होती थी है ना किसी ने हमको मारा तो हम भी तो मारने के लिए निकल बोलते थे कि हंसी मजाक की क्या नहीं करते थे सब कुछ करते थे ना तो बचपन की ढेर सारी यादें हैं बचपन में जो कठिनाई के दिन है वह भी हमें याद है है ना तो सारी चीजें संघर्ष के दिन याद है बचपन में हम हाफ पैंट में मैंने क्या दसवीं क्लास की परीक्षा दिया था वह भी मुझे याद है वह मेरी गरीबी के बेहद कठिनाई के दिन उस दिन को मैं कभी नहीं भूल सकता मुझे आज भी याद है और बचपन में मुझे दसवीं क्लास की परीक्षा की थी जो कि करनी चाहिए उसके लिए मेरी मां ने चांदी का जो कहना होता है हाथ में मोटा सा दोगे ने दो साइड के उसको बेच दिया था मेरी फीस भरने के लिए तब जाकर मैंने दसवीं क्लास की परीक्षा के फॉर्म भरा था है ना और मैं परीक्षा दे पाया था वह संघर्ष के दिन आज भी मुझे याद है मेरी मां का होता कि मुझे आज भी याद आ जाता है आज भी मुझे रुला देता है और मैं उन्हें आज भी एक देवी के रूप में नमन करता हूं मेरे पिताजी जो संघर्ष करते थे जो जमा कर लाते थे और हम मक्खियों से उनकी कमाई को खर्च करते थे उनसे पैसे का तकादा करते थे तो वह भी याद है मैं ना हमें बचपन में ही संघर्ष का हिसाब हो गया था जीवन का एहसास हो गया था पैसों की वैल्यू हमें पता हो गई थी जो कि आजकल के बच्चों में देखने को नहीं मिलती है तो बचपन में ही हमने हमारे संघर्ष ने गरीबी नहीं है संघर्ष के दिनों ने हमको काफी कुछ समझा दिया था तो यह एक ही बचपन की स्मृतियां हमारे जेहन में याद है बचपन में ही आपने कुछ बड़ा करने का कुछ अच्छा व्यक्ति इंसान बनने का सोचा था सपना देखा था वह भी सपने भी याद है हमें बचपन में हम वीडियो लॉकर या टीवी देखा करते थे या वीसीआर देखा करते थे उस पर फिल्में देखा करते थे गांव में गणेश उत्सव और दुर्गा उत्सव के समय में वीडियो लाकर लगाया जाता था पूरा गांव आकर उसमें देखता था फिल्म होगे रे धार्मिक फिल्मों के है ना बहुत सारी फिल्म देखा हमने बचपन में सो लेना और भी गंगा जमुना सरस्वती और इस तरह की अनेकों फिल्म हमने बचपन में देखा उस समय जो रिलीज हुआ करते थे कुछ कुछ होता है जो बाद में बनी है नदिया के पार हो इस तरह के उस जमाने के लिए सुनील संगीत भरे फिल्म हमें आज भी याद है वह दिन याद आते हैं हर तरीके से बचपन के ढेर सारी स्मृतियां हैं सारी समस्याओं को हम सजने लगे लिखने लगे किताब बन जाएगी धन्यवाद आपको हमने अपने जीवन के दर्पण से थोड़ा सा दर्शन कराया है

aapne humse poocha hai aap ke bachpan ke sabse pasandida smriti ko bataye toh dekhiye har vyakti ke jeevan me bachpan ka samay aata hai aur chala jata humne bhi apne bachpan ko jiya hai toh bachpan ke din jo hote hain bade khoobsurat hote bade pyare hote hain bade madhur hote hain aapne hamare bachpan ki smritiyon ke bare me poocha hai toh hamein bahut kuch yaad hai share karne ke liye bachpan me hum bade shararti the bade natkhat se bade matwale the bachpan me hum jamakar khela khuda karte the hamare gaon me ek bada sa taalab hai taalab me hamesha sundar auraton ke paani bhara rehta hai aur taalab me kisi ko pair chune ki bhi anumati nahi hai us taalab ke kinare lo mandir bhi hai aur thodi si side me ek bada sa bargad ka ped hai jiski jo anjad jo hai taalab ke paani tak chalta rehta hai toh un jadon ke sahare hum khila karte the aur paani me paani ko sparsh kiya karte the hathon se hi ek hi yaad hai bachpan ki hai na aur bachpan me hum aam ki jo garmiyo ki chhuttiyon me aam ke jhad 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