दो-तीन साल के बच्चों को आध्यात्मिक ज्ञान कैसे दिया जाए?...


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Acharya shree guru ji vyas /call-8898408005

Shreemad Bhagwat Katha, Ramkatha, Bhajan Sandhya Program , Mata Ki Chowki, Jagran , all Types Devosnal & Festival Program Contact Us- 8898408005

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Bk Arun Kaushik

Youth Counselor Motivational Speaker

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mohit

8307747204 Founder Abhyasa Yogshala

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अगर हमें दो-तीन साल के बच्चे को आध्यात्मिक ज्ञान देना हो तो सबसे अच्छा है उनको आप जो हमारे भगवान ईश्वर गुरु उनकी कहानी है वह उनको कहानी सुनाइए और जो हमारे संस्कृति से जुड़े खेल हैं तो उन खेलों को आप हमको बताइए थोड़ा बहुत जैसा भी हो करने लायक हो नहीं तो आप उनको सबसे अच्छा साधन है आप उनको जो कहानियां है आध्यात्मिक कहानियां है उनका ज्ञान दीजिए उनको अलग-अलग चीजें जैसे सूर्य चंद्रमा तारे इनके बारे में बताना शुरू करें वह समझे ना समझे लेकिन उस चीज का उनके ऊपर जरूर असर होगा और उनका मन एक अच्छे विचार की ओर जागृत रहेगा जैसा हम उनका आधार बनाएंगे वहीं चलकर उनका आगे भविष्य रहेगा धन्यवाद

agar hamein do teen saal ke bacche ko aadhyatmik gyaan dena ho toh sabse accha hai unko aap jo hamare bhagwan ishwar guru unki kahani hai vaah unko kahani sunaiye aur jo hamare sanskriti se jude khel hain toh un khelo ko aap hamko bataiye thoda bahut jaisa bhi ho karne layak ho nahi toh aap unko sabse accha sadhan hai aap unko jo kahaniya hai aadhyatmik kahaniya hai unka gyaan dijiye unko alag alag cheezen jaise surya chandrama taare inke bare me batana shuru kare vaah samjhe na samjhe lekin us cheez ka unke upar zaroor asar hoga aur unka man ek acche vichar ki aur jagrit rahega jaisa hum unka aadhar banayenge wahi chalkar unka aage bhavishya rahega dhanyavad

अगर हमें दो-तीन साल के बच्चे को आध्यात्मिक ज्ञान देना हो तो सबसे अच्छा है उनको आप जो हमारे

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fighter

Counselor & Coach

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Santosh Singh indrwar

Business Consultant & Life Couch

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

3 साल के बच्चों को आध्यात्मिक ज्ञान सिखा कर दिया समझा कर नहीं दिया जा सकता आचरण के द्वारा दिया जा सकता है कि आप करते जाइए और उन्हें वैसा ही करने के लिए प्रेरित करिए वह आपको देख देखकर आपके मार्ग पर चलते जाएंगे पीछे-पीछे और अपने आध्यात्मिक ज्ञान दे सकते हैं

3 saal ke baccho ko aadhyatmik gyaan sikha kar diya samjha kar nahi diya ja sakta aacharan ke dwara diya ja sakta hai ki aap karte jaiye aur unhe waisa hi karne ke liye prerit kariye vaah aapko dekh dekhkar aapke marg par chalte jaenge peeche peeche aur apne aadhyatmik gyaan de sakte hain

3 साल के बच्चों को आध्यात्मिक ज्ञान सिखा कर दिया समझा कर नहीं दिया जा सकता आचरण के द्वारा

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Dr.Paramjit Singh

Health and Fitness Expert/ Lecturer In Physical Education/

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आपका प्रश्न है दो-तीन साल के बच्चों को आध्यात्मिक ज्ञान कैसे दिया जाए तो एक बच्चे की अंदर इतनी उर्जा होती है जितनी कि 10 व्यक्तियों के अंदर अगर उस व्यक्ति को अगर उस बच्चे को आध्यात्मिक ज्ञान दे दिया जाए तो इस ब्रह्मांड में घट रही घटनाओं का बिल्कुल सिंपल वे में अवलोकन किया जा सकता है कि आत्मा परमात्मा का उस बच्चे को परमात्मा का डायरेक्ट साक्षात्कार हो जाता है और घटने वाली घटनाएं बच्चे को भविष्य देखने लगता है क्योंकि दो-तीन साल के बच्चा एक मासूम होता है भोला होता है अब आध्यात्मिक ज्ञान या तो आप आध्यात्मिक तरीके के व्यक्तियों आचार विचार आपका हो आपने गर्भावस्था के दौरान ही आध्यात्मिक बातें अपने पत्नी को बताई हूं जिससे कि उसे अंदर बीज पनपा हो और वह आध्यात्मिक की जो करने लगे फिर उसे आप किसी गुरुकुल में भर्ती कर दे 3 साल का बच्चा आपका गुरुकुल में डाल दे एक-दो साल बाद वह आध्यात्मिक ज्ञान की ओर बढ़ जाएगा जो पढ़ाई होगी जैसे संस्कार होंगे जैसा माहौल होगा वैसे आपके बच्चे डॉक्टर करेगा और आगे पाछे अगर आप घर पर आध्यात्मिक ज्ञान उसे देना चाहते हैं तो सबसे सिंपल देवे मैं आपको बताना चाहता हूं कि केवल सिर्फ और सिर्फ आपको आपको यह कराना है ओमकारा निरंतर आपको उसको जाकर थोड़ी थोड़ी देर में रुक कर उसको जाकर आते रहना है और गहरी गहरी सांसे ले की गहरी गहरी लंबी सांसे छोड़ दें जिससे कि उसका आत्मज्ञान जसु जो है वह प्रभाव में आएगा और ओम की पराकाष्ठा का आनंद लेते हुए उस बच्चे के अंदर ओम में संसार नजर आएगा जय मां शीतला

aapka prashna hai do teen saal ke baccho ko aadhyatmik gyaan kaise diya jaaye toh ek bacche ki andar itni urja hoti hai jitni ki 10 vyaktiyon ke andar agar us vyakti ko agar us bacche ko aadhyatmik gyaan de diya jaaye toh is brahmaand me ghat rahi ghatnaon ka bilkul simple ve me avalokan kiya ja sakta hai ki aatma paramatma ka us bacche ko paramatma ka direct sakshatkar ho jata hai aur ghatane wali ghatnaye bacche ko bhavishya dekhne lagta hai kyonki do teen saal ke baccha ek masoom hota hai bhola hota hai ab aadhyatmik gyaan ya toh aap aadhyatmik tarike ke vyaktiyon aachar vichar aapka ho aapne garbhavastha ke dauran hi aadhyatmik batein apne patni ko batai hoon jisse ki use andar beej panpa ho aur vaah aadhyatmik ki jo karne lage phir use aap kisi gurukul me bharti kar de 3 saal ka baccha aapka gurukul me daal de ek do saal baad vaah aadhyatmik gyaan ki aur badh jaega jo padhai hogi jaise sanskar honge jaisa maahaul hoga waise aapke bacche doctor karega aur aage pache agar aap ghar par aadhyatmik gyaan use dena chahte hain toh sabse simple deve main aapko batana chahta hoon ki keval sirf aur sirf aapko aapko yah krana hai omkara nirantar aapko usko jaakar thodi thodi der me ruk kar usko jaakar aate rehna hai aur gehri gehri sanse le ki gehri gehri lambi sanse chhod de jisse ki uska atmagyan jasu jo hai vaah prabhav me aayega aur om ki parakashtha ka anand lete hue us bacche ke andar om me sansar nazar aayega jai maa shitalaa

आपका प्रश्न है दो-तीन साल के बच्चों को आध्यात्मिक ज्ञान कैसे दिया जाए तो एक बच्चे की अंदर

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BK Kalyani

Teacher On Rajyoga Spiritual Knowledge

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Rakesh Meghani

Social Worker and Journalist

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2 से 3 साल के बच्चों को आध्यात्मिक ज्ञान देना आपकी सोच अच्छी है अब उनके अंदर आध्यात्मिक ज्ञान का इंटरेस्ट पैदा कर सकते हैं आध्यात्मिक ज्ञान के लिए यह उम्र अभी काम है आप अपने स्तर पर उन्हें इनसे जोड़ने के लिए प्रयास करते रहे आप उनके सामने आध्यात्म की बातें करें और उनको इंटरेस्ट होगा तो आगे चलकर आ गया तो उसे जुड़ेंगे और आपकी सोच अच्छी है आपकी बच्ची आध्यात्मिक की ओर जाएंगे

2 se 3 saal ke baccho ko aadhyatmik gyaan dena aapki soch achi hai ab unke andar aadhyatmik gyaan ka interest paida kar sakte hain aadhyatmik gyaan ke liye yah umar abhi kaam hai aap apne sthar par unhe inse jodne ke liye prayas karte rahe aap unke saamne aadhyatm ki batein kare aur unko interest hoga toh aage chalkar aa gaya toh use judenge aur aapki soch achi hai aapki bachi aadhyatmik ki aur jaenge

2 से 3 साल के बच्चों को आध्यात्मिक ज्ञान देना आपकी सोच अच्छी है अब उनके अंदर आध्यात्मिक ज्

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Apurba Mishra

Social Worker

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार आपका प्रश्न है दो-तीन साल के बच्चों को आध्यात्मिक ज्ञान कैसे दिया जाए तो मैं आपको एक श्लोक सुनाता हूं संस्कार मयू में मिलता इसका उल्लेख और यह बच्चन महर्षि मार्कंडेय जी का है प्राप्त हाथा पंचमेवा रेसिपी दी आरंभ अम्तू कार्य अर्थात जब 5 वर्ष को प्राप्त हो जाए यानी 5 वर्ष हो जाए बच्चे बच्चों को तो उसका विद्यारंभम विद्यारंभ करना चाहिए विद्यारंभ संस्कार को ही अक्षर अक्षर अक्षर अक्षर आरंभ संस्कार पार्टी पूजन संस्कार विद्यारंभ संस्कार कहा जाता है इसलिए आपको दो-तीन वर्ष के बच्चों के लिए ज्यादा चिंतित हो नहीं होना चाहिए ऐसी अवस्था में बच्चे अपनी माता प्रथम गुरु अपने पिता द्वितीय गुरु के कर्म का अवलोकन कर ही शिक्षा प्राप्त करते हैं कुछ खोज के अनुसार यह प्रतीत होता है कि बच्चे जन्म से ही सीखे लगते हैं मां के गर्भ से ही जैसे ऋषि गुड लक एक थे सेंसेज जिससे तक का खून अशोक का फूल भी बोलते हैं वह वेद पाठ में पारंगत था और उसका सच्ची निष्ठा को देखते हुए बहुत प्रेरित हुए थे और लग इसलिए उसने अपनी पुत्री का विवाह उसके साथ कर दिया और जब उनको बच्चा है पेट में उसके पुत्र को या नहीं माता के घर में जब थे तो वो रिचा सुनकर ही उसे समस्त श्लोक याद हो गए थे एक दिन उसके पिता गुजरी चाय पढ़ रहे थे जिसमें उच्च वर्ण कुछ गलत भी किया उसे सुनकर एक से ही उसने जवाब दिया पिताश्री आप रिचार्ज गलत पर रहे हैं सर यह सुनकर कहो ऋषि जो थे वह गुस्सा गए क्या अभी से तो बकरे के बकरे बात करते हो तेरा मेरा बात करते हो इसलिए तुम्हारा 8 हुआंग तेरा मेरा हो जाएंगे और वह जन्म के साथ 8 वर्ग तेरा मेरा के साथ ही उत्पन्न हुई जिसको हम लोग अष्टावक्र के नाम से जानते हैं इसके बाद यह कुल लेख और भी मिलता है अब अभिमन्यु के बारे में जो अपनी माता के गर्भ से ही चक्रव्यू तोड़कर अंदर घुसने की शिक्षा प्राप्त कर लिए थे जब उन के पिता अर्जुन ने अपनी पत्नी सुभद्रा को गर्भावस्था में इसके बारे में सुना था यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ कि यह फिनलैंड का एक विश्वविद्यालय है फिनलैंड के हेलसिंकी में एक विश्वविद्यालय है और उस विश्वविद्यालय के एक ही न्यूरोसाइंटिस्ट है इन योर पार्टनर के नाम से जाने जाते हैं इन्होंने भी अपनी खोज में पाया कि बच्चे अपने मां के घर से ही लिखना शुरु कर देते हैं जो आज के जमाने के नए गाने थे और इनके काफी चर्चित इनके खोज था काफी अखबारों में छपा था न्यूज़ चैनल में आया इसको आप पर गूगल में भी देख सकते हैं हमारे पुराने बुजुर्ग अज्ञानी मुनि ऋषि सभी कहते हैं गर्भवती महिला को सत्कर्म वेद का प्रवचन सुनना गीता का अध्ययन अथवा श्रवण करना चाहिए इससे शिशु पर असर पड़ता है यह नहीं बच्चे मां के घर से ही सीखना शुरू कर देते हैं परंतु बच्चे आने के स्वरूप होते हैं जो चेहरा आपके होते हैं उसे ही आए ना दिखाता है अगर आप के चेहरे में दाग है तो उसे भी आए ना उसी तरह दिखाता है जैसे आपके चेहरा है वैसे ही से हुआ करते हैं जो उनके माता-पिता करते हैं उसे ही सीखता है इसे अलग से सिखाने की कोई आवश्यकता नहीं है लेकिन हां आप उसे कहानियों के माध्यम से वेद पुराण गीता ज्ञान आदि सिखा सकते हैं और 2 से 3 साल के बच्चे हैं इसलिए ज्यादा चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है आपकी अगर परिवेश सही है आपके परिवेश में भक्ति में है आध्यात्मिक ज्ञान के साथ जिसका शुरू होता हो तो अच्छे ही होंगे धन्यवाद

namaskar aapka prashna hai do teen saal ke baccho ko aadhyatmik gyaan kaise diya jaaye toh main aapko ek shlok sunata hoon sanskar mayu me milta iska ullekh aur yah bachchan maharshi markandey ji ka hai prapt hatha panchameva recipe di aarambh amtu karya arthat jab 5 varsh ko prapt ho jaaye yani 5 varsh ho jaaye bacche baccho ko toh uska vidyarambham vidyarambh karna chahiye vidyarambh sanskar ko hi akshar akshar akshar akshar aarambh sanskar party pujan sanskar vidyarambh sanskar kaha jata hai isliye aapko do teen varsh ke baccho ke liye zyada chintit ho nahi hona chahiye aisi avastha me bacche apni mata pratham guru apne pita dwitiya guru ke karm ka avalokan kar hi shiksha prapt karte hain kuch khoj ke anusaar yah pratit hota hai ki bacche janam se hi sikhe lagte hain maa ke garbh se hi jaise rishi good luck ek the sensej jisse tak ka khoon ashok ka fool bhi bolte hain vaah ved path me paarangat tha aur uska sachi nishtha ko dekhte hue bahut prerit hue the aur lag isliye usne apni putri ka vivah uske saath kar diya aur jab unko baccha hai pet me uske putra ko ya nahi mata ke ghar me jab the toh vo richa sunkar hi use samast shlok yaad ho gaye the ek din uske pita gujari chai padh rahe the jisme ucch varn kuch galat bhi kiya use sunkar ek se hi usne jawab diya pitashri aap recharge galat par rahe hain sir yah sunkar kaho rishi jo the vaah gussa gaye kya abhi se toh bakre ke bakre baat karte ho tera mera baat karte ho isliye tumhara 8 huang tera mera ho jaenge aur vaah janam ke saath 8 varg tera mera ke saath hi utpann hui jisko hum log ashtavakra ke naam se jante hain iske baad yah kul lekh aur bhi milta hai ab abhimanyu ke bare me jo apni mata ke garbh se hi chakravyu todkar andar ghusne ki shiksha prapt kar liye the jab un ke pita arjun ne apni patni subhadra ko garbhavastha me iske bare me suna tha university of health ki yah finland ka ek vishwavidyalaya hai finland ke helsinki me ek vishwavidyalaya hai aur us vishwavidyalaya ke ek hi nyurosaintist hai in your partner ke naam se jaane jaate hain inhone bhi apni khoj me paya ki bacche apne maa ke ghar se hi likhna shuru kar dete hain jo aaj ke jamane ke naye gaane the aur inke kaafi charchit inke khoj tha kaafi akhbaron me chapa tha news channel me aaya isko aap par google me bhi dekh sakte hain hamare purane bujurg agyani muni rishi sabhi kehte hain garbhwati mahila ko satkarm ved ka pravachan sunana geeta ka adhyayan athva shravan karna chahiye isse shishu par asar padta hai yah nahi bacche maa ke ghar se hi sikhna shuru kar dete hain parantu bacche aane ke swaroop hote hain jo chehra aapke hote hain use hi aaye na dikhaata hai agar aap ke chehre me daag hai toh use bhi aaye na usi tarah dikhaata hai jaise aapke chehra hai waise hi se hua karte hain jo unke mata pita karte hain use hi sikhata hai ise alag se sikhane ki koi avashyakta nahi hai lekin haan aap use kahaniyan ke madhyam se ved puran geeta gyaan aadi sikha sakte hain aur 2 se 3 saal ke bacche hain isliye zyada chintit hone ki avashyakta nahi hai aapki agar parivesh sahi hai aapke parivesh me bhakti me hai aadhyatmik gyaan ke saath jiska shuru hota ho toh acche hi honge dhanyavad

नमस्कार आपका प्रश्न है दो-तीन साल के बच्चों को आध्यात्मिक ज्ञान कैसे दिया जाए तो मैं आपको

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Siyaram Dubey

YouTuber/Spiritual Person/Thinker/Social-media Activist

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Gyandeep Kkr

Social Activist

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Dinesh Mishra

Theosophists | Accountant

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2 या 3 साल के बच्चे को आध्यात्मिक ज्ञान कैसे दिया जाए एक यह 2 या 3 साल के बच्चे को आप परमात्मा का नाम है वह याद करा सकते हैं और वह उच्चारण से उसको बोल सकता है

2 ya 3 saal ke bacche ko aadhyatmik gyaan kaise diya jaaye ek yah 2 ya 3 saal ke bacche ko aap paramatma ka naam hai vaah yaad kara sakte hain aur vaah ucharan se usko bol sakta hai

2 या 3 साल के बच्चे को आध्यात्मिक ज्ञान कैसे दिया जाए एक यह 2 या 3 साल के बच्चे को आप परमा

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Somit Yoga Varanasi

Yoga Trainer and Astrologer

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देखिए बहुत ही अच्छा लगा कि आपका आध्यात्मिकता का ज्ञान बच्चों को देना चाह रहे हैं तो सबसे पहले इतने अच्छे विचार कि आप को सलाम आप आना दुखी साल के बच्चों को जो है आपका अध्याय का वीडियो दिखाइए आध्यात्मिक का गाना सुनवाइए आध्यात्मिक का फोटो दिखाइए क्योंकि यह जो देखते हैं जो बच्चे जो दो-तीन साल के होते होते 5 साल तक के तू यह मोस्टली जो चीज देखते हैं जो चीज उनके पास होता है जो चीज साउंड चलता है उसको बहुत जल्दी यह लोग कैप्टन करते हैं वर्षा घर का माहौल बनाइए अध्यात्मिक माहौल रहे घर का निश्चित तौर पर बच्चा काफी अच्छी जानकारियां हासिल करेंगे महादेव

dekhiye bahut hi accha laga ki aapka aadhyatmikta ka gyaan baccho ko dena chah rahe hain toh sabse pehle itne acche vichar ki aap ko salaam aap aana dukhi saal ke baccho ko jo hai aapka adhyay ka video dikhaiye aadhyatmik ka gaana sunvaiye aadhyatmik ka photo dikhaiye kyonki yah jo dekhte hain jo bacche jo do teen saal ke hote hote 5 saal tak ke tu yah Mostly jo cheez dekhte hain jo cheez unke paas hota hai jo cheez sound chalta hai usko bahut jaldi yah log captain karte hain varsha ghar ka maahaul banaiye adhyatmik maahaul rahe ghar ka nishchit taur par baccha kaafi achi jankariyan hasil karenge mahadev

देखिए बहुत ही अच्छा लगा कि आपका आध्यात्मिकता का ज्ञान बच्चों को देना चाह रहे हैं तो सबसे प

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

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234 के बच्चों को अच्छा ज्ञान कैसे जिया जाए आपको यह बात पता होना चाहिए कि दो-तीन साल के बच्चे के माता-पिता ज्ञान जान के साथ बच्चों से समर्पित होते हैं बच्चों को अपने जीवन का एक हिस्सा मानते हैं तो वह आता पिक्चर आदर्शवादी और चरित्रवान होते हैं संस्कृति और संस्थानों के पालनहार होते हैं उनका परिवार में बड़ों के प्रति देवी-देवताओं के प्रति शक्तियों के प्रति आदर होता है अब वो ढंग का एक ट्रैफिक पालनहार होते हैं जब ऐसे माता-पिता के आचरण बच्चे देखते हैं और संस्कार कोचिंग तो वह स्वयं संस्थान में ही हो जाते हैं और उनको आप कथा सुनाएं बच्चे को कहानी के रूप में सुनाएं बड़े प्यार से अपने बच्चे का ध्यान एकाग्र चित्त करें और बच्चे को उस ज्ञान की तरफ पूरी विधि विधान के साथ नियम के साथ तेज है अधूरा ज्ञान भूलकर भी ना दें अन्यथा बच्चे का अलौकिक ज्ञान जो है उसके लिए घातक होगा

234 ke baccho ko accha gyaan kaise jiya jaaye aapko yah baat pata hona chahiye ki do teen saal ke bacche ke mata pita gyaan jaan ke saath baccho se samarpit hote hain baccho ko apne jeevan ka ek hissa maante hain toh vaah aata picture aadarshvaadi aur charitravan hote hain sanskriti aur sansthano ke palanahar hote hain unka parivar me badon ke prati devi devatao ke prati shaktiyon ke prati aadar hota hai ab vo dhang ka ek traffic palanahar hote hain jab aise mata pita ke aacharan bacche dekhte hain aur sanskar coaching toh vaah swayam sansthan me hi ho jaate hain aur unko aap katha sunaen bacche ko kahani ke roop me sunaen bade pyar se apne bacche ka dhyan ekagra chitt kare aur bacche ko us gyaan ki taraf puri vidhi vidhan ke saath niyam ke saath tez hai adhura gyaan bhulkar bhi na de anyatha bacche ka alaukik gyaan jo hai uske liye ghatak hoga

234 के बच्चों को अच्छा ज्ञान कैसे जिया जाए आपको यह बात पता होना चाहिए कि दो-तीन साल के ब

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Jitendra Singh

Social Worker

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शास्त्रों के अनुसार जब कोई बालक पैदा होता है तो वह अवैध होता है उसके अंदर उद्दंडता होती है उसको कुछ भी कहा जाता है 5 साल तक के बच्चे को पप्पी भी उसके अंदर का जो अज्ञान है उसको बाहर निकलने दीजिए इसीलिए आपने देखा होगा 5 साल से कम बच्चा जो होता है वह अपनी जीत ज्यादा पूरी करता है जो तुम कहते हो उसका उल्टा करता है क्योंकि उसको उस समय जो है उसका ज्ञान जो अज्ञान उसके अंदर दबा हुआ है उसको को निकालता है बच्चे को ज्ञान देने की सही उम्र बताएं गई है जिस दिन बच्चे का पहला दांत टूट जाए उस दिन से उसको ज्ञान देना शुरू कीजिए यह अवस्था 5 साल के पहले 5 साल की होती है इसलिए उससे पहले अगर आप उस को पढ़ाने लिखाने में या ज्ञान देने में लगाएंगे तो उसके अंदर का अज्ञान दबा रहा जाएगा इसीलिए उस बच्चे को खेलने दीजिए खुद ने दीजिए और जितना भी पूछ लो चंचलता करता है करने दीजिए जितना चंचल होगा उतना ही वह मंचल होगा इसीलिए उस बच्चे को पहला दांत टूटने का संकेत है कि अभी एक ज्ञान लेने लायक हो गया अब उसको ध्यान देना शुरू कीजिए अध्यात्मिक ज्ञान संस्कारों से ऊर्जावान वह बनना शुरू होता है पहले का टूटने के साथ और ज्ञान जब उसका अकल जाड चुकी है जाकर के 40 40 साल में तब तक वह ज्ञान को धारण करता है लास्ट जाट जिस दिन टूट जाती है वहीं से ज्ञान उसका लुप्त हो जाता फिर वह अपने ज्ञान का इस्तेमाल करता है फिर अपने अनुभव को लोगों को बताता है इसीलिए आपसे अनुरोध है कि दो ढाई साल के बच्चे को अध्यात्मिक या स्कूल की शिक्षा में ज्यादा मत लगाइए उसको खेलने कूदने के लिए उसके बचपन का आनंद लेने दीजिए तो आगे चलकर के जिस दिन पहला था टूट जाए उसको शिक्षा ग्रहण कर आइए अध्यात्मिक बहुत धन्यवाद जय हिंद जय भारत

shastron ke anusaar jab koi balak paida hota hai toh vaah awaidh hota hai uske andar uddandata hoti hai usko kuch bhi kaha jata hai 5 saal tak ke bacche ko Puppy bhi uske andar ka jo agyan hai usko bahar nikalne dijiye isliye aapne dekha hoga 5 saal se kam baccha jo hota hai vaah apni jeet zyada puri karta hai jo tum kehte ho uska ulta karta hai kyonki usko us samay jo hai uska gyaan jo agyan uske andar daba hua hai usko ko nikalata hai bacche ko gyaan dene ki sahi umar bataye gayi hai jis din bacche ka pehla dant toot jaaye us din se usko gyaan dena shuru kijiye yah avastha 5 saal ke pehle 5 saal ki hoti hai isliye usse pehle agar aap us ko padhane likhane me ya gyaan dene me lagayenge toh uske andar ka agyan daba raha jaega isliye us bacche ko khelne dijiye khud ne dijiye aur jitna bhi puch lo chanchalata karta hai karne dijiye jitna chanchal hoga utana hi vaah manchal hoga isliye us bacche ko pehla dant tutne ka sanket hai ki abhi ek gyaan lene layak ho gaya ab usko dhyan dena shuru kijiye adhyatmik gyaan sanskaron se urjavan vaah banna shuru hota hai pehle ka tutne ke saath aur gyaan jab uska akal jad chuki hai jaakar ke 40 40 saal me tab tak vaah gyaan ko dharan karta hai last jaat jis din toot jaati hai wahi se gyaan uska lupt ho jata phir vaah apne gyaan ka istemal karta hai phir apne anubhav ko logo ko batata hai isliye aapse anurodh hai ki do dhai saal ke bacche ko adhyatmik ya school ki shiksha me zyada mat lagaaiye usko khelne koodne ke liye uske bachpan ka anand lene dijiye toh aage chalkar ke jis din pehla tha toot jaaye usko shiksha grahan kar aaiye adhyatmik bahut dhanyavad jai hind jai bharat

शास्त्रों के अनुसार जब कोई बालक पैदा होता है तो वह अवैध होता है उसके अंदर उद्दंडता होती ह

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अनमोल मणी

योग शिक्षक

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Preeti Bindal

Writer Auther And Counselor Spritually

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Harish Chand

Social Worker

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दो-तीन साल के बच्चे को आध्यात्मिक ज्ञान कैसे दिया जाए आपका सवाल है तो मित्र एक बात बताओ दो-तीन साल का बच्चा जब आप घर में पूजा करते हो पाठ करते हो तो आपको सुनता है दो-तीन साल के बच्चे पर हम कोई बॉर्डर नहीं बना सकते हैं उसको समझा नहीं सकते हैं वह अपनी मर्जी से ही करता है अगर आप उस टाइम पर आपके घर का वातावरण जैसा होगा उसी तरह से बच्चे का निर्माण हुआ तो आप अपने अंदर देखें आप अपने घर के अंदर वैदिक रीति-रिवाज से पूजा-पाठ लिया गबन सब करें जिससे वह बच्चा देखेगा आगे चलकर उस चीज को फॉलो करेगा जय हिंद

do teen saal ke bacche ko aadhyatmik gyaan kaise diya jaaye aapka sawaal hai toh mitra ek baat batao do teen saal ka baccha jab aap ghar mein puja karte ho path karte ho toh aapko sunta hai do teen saal ke bacche par hum koi border nahi bana sakte hain usko samjha nahi sakte hain vaah apni marji se hi karta hai agar aap us time par aapke ghar ka vatavaran jaisa hoga usi tarah se bacche ka nirmaan hua toh aap apne andar dekhen aap apne ghar ke andar vaidik riti rivaaj se puja path liya gaban sab kare jisse vaah baccha dekhega aage chalkar us cheez ko follow karega jai hind

दो-तीन साल के बच्चे को आध्यात्मिक ज्ञान कैसे दिया जाए आपका सवाल है तो मित्र एक बात बताओ दो

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आपका बस स्टैंड दो-तीन साल के बच्चे को आध्यात्मिक ज्ञान ज्ञान कैसे दिया जाए देखिए उसको अवश्य पता है कि यह प्राकृतिक है तो इसके साथ जो भी प्यार करता है मत बहुत भरोसा प्यार करता है उसकी बनाई भी हासिल हुआ क्या करें यह अच्छा होता है और कोई किताबों में ही होता है जो प्रकृति से प्यार करेगा तो अपने आप दूसरों से प्यार करेगा ही है क्या और कोई हस्ताक्षर नहीं है किताबों में क्या किताब पढ़ लो पढ़ लो पढ़ लो पढ़ लो हे झूठे जान सच्चा ज्ञान खुद की तरफ से पैदा होता है

aapka bus stand do teen saal ke bacche ko aadhyatmik gyaan gyaan kaise diya jaaye dekhiye usko avashya pata hai ki yah prakirtik hai toh iske saath jo bhi pyar karta hai mat bahut bharosa pyar karta hai uski banai bhi hasil hua kya kare yah accha hota hai aur koi kitabon mein hi hota hai jo prakriti se pyar karega toh apne aap dusro se pyar karega hi hai kya aur koi hastakshar nahi hai kitabon mein kya kitab padh lo padh lo padh lo padh lo hai jhuthe jaan saccha gyaan khud ki taraf se paida hota hai

आपका बस स्टैंड दो-तीन साल के बच्चे को आध्यात्मिक ज्ञान ज्ञान कैसे दिया जाए देखिए उसको अवश्

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Narendra Bhardwaj

Spirituality Reformer

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महोदय आपने पूछा दो-तीन साल के बच्चों को आध्यात्मिक ज्ञान कैसे दिया था शुरुआत में उन्हें अध्यात्मिक ज्ञान के लिए बस छोटी छोटी चीजें मां बाप को देखकर बच्चों में संस्कार आते हैं छोटे-छोटे बच्चे बड़ी जल्दी ऑब्जर्व करते हैं बड़े जल्दी कैसे करते हैं किसी भी चीज को अगर उनके घर में पूजा पाठ होता है संध्या वंदन होता है तो बच्चे भी देखते हैं और उसको वह डुप्लीकेट करते नकल करते कभी बच्चों में हैबिट होती है नकल करने यह जो आपके घर में जो संस्कार हैं 19 संस्कारों को बच्चे में उतारा जा सकता है और आप चाहते हैं कि बच्चे का आध्यात्मिक विकास हो तो उसके लिए आपको बच्चे के साथ अतिरिक्त आध्यात्मिक व्यवहार करना पड़ेगा जैसे रामधन बोलना जब करना कीर्तन करना यह सब देखेगा तो वह भी उसको अपना है क्योंकि वह भी यह तो समझता नहीं किस का क्या फल है लेकिन आप जो करते हैं वह करने लगता है इससे धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसकी हाइट बन जाएगी हैबिट बन जाएगी तो जब वह समझने लगे तब उसे समझाने इनके पीछे क्या साइंटिफिक रीजन है क्यों यह सब करते हैं तो इस तरह से बच्चे को आध्यात्मिक ज्ञान दिया जा सकता है और जैसे ही बच्चा आपका घर से बाहर जाने की स्थिति में आ जाए मां बाप के बिना अकेले रहने की स्थिति में आ जाए तब किसी सद्गुरु इसी गुरुकुल इसी आश्रम में आप बच्चे को छोड़ सकते हैं या प्रतिदिन वहां छोड़कर शाम को सुबह छोड़ दिया शाम को ले आए इस तरह से भी अगर आप चाहें तो बच्चे को संस्कार देते हुए आध्यात्मिक विकास की ओर ले जाया जा सकता है जिसमें भी आपको सुनता हूं इति शुभम धन्यवाद

mahoday aapne poocha do teen saal ke baccho ko aadhyatmik gyaan kaise diya tha shuruat me unhe adhyatmik gyaan ke liye bus choti choti cheezen maa baap ko dekhkar baccho me sanskar aate hain chote chote bacche badi jaldi abjarv karte hain bade jaldi kaise karte hain kisi bhi cheez ko agar unke ghar me puja path hota hai sandhya vandan hota hai toh bacche bhi dekhte hain aur usko vaah duplicate karte nakal karte kabhi baccho me habit hoti hai nakal karne yah jo aapke ghar me jo sanskar hain 19 sanskaron ko bacche me utara ja sakta hai aur aap chahte hain ki bacche ka aadhyatmik vikas ho toh uske liye aapko bacche ke saath atirikt aadhyatmik vyavhar karna padega jaise ramadhan bolna jab karna kirtan karna yah sab dekhega toh vaah bhi usko apna hai kyonki vaah bhi yah toh samajhata nahi kis ka kya fal hai lekin aap jo karte hain vaah karne lagta hai isse dhire dhire dhire dhire uski height ban jayegi habit ban jayegi toh jab vaah samjhne lage tab use samjhane inke peeche kya scientific reason hai kyon yah sab karte hain toh is tarah se bacche ko aadhyatmik gyaan diya ja sakta hai aur jaise hi baccha aapka ghar se bahar jaane ki sthiti me aa jaaye maa baap ke bina akele rehne ki sthiti me aa jaaye tab kisi sadguru isi gurukul isi ashram me aap bacche ko chhod sakte hain ya pratidin wahan chhodkar shaam ko subah chhod diya shaam ko le aaye is tarah se bhi agar aap chahain toh bacche ko sanskar dete hue aadhyatmik vikas ki aur le jaya ja sakta hai jisme bhi aapko sunta hoon iti subham dhanyavad

महोदय आपने पूछा दो-तीन साल के बच्चों को आध्यात्मिक ज्ञान कैसे दिया था शुरुआत में उन्हें अध

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Sumit Gondhiya

Educator, Content Creator, Counselor

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कुछ मत सिखाओ कुछ मत बताओ से जीने दो और आप सीखो उससे हमें उसको सिखाने का कोई अधिकार नहीं है हम सीख सकते हैं छोटे बच्चों से बहुत कुछ सीख सकते हमारी जो कुछ भी बकवास है वह सीखने की उसको कोई जरूरत नहीं है हमारी जो कुछ भी बकवास है वह जीवन को तबाह करने पर तुली हुई है और जो जन्मा हुआ बच्चा है उस पर पूर्ण जीवन है पूर्ण शिक्षकों का सेक्स

kuch mat sikhao kuch mat batao se jeene do aur aap sikho usse hamein usko sikhane ka koi adhikaar nahi hai hum seekh sakte hain chote baccho se bahut kuch seekh sakte hamari jo kuch bhi bakwas hai vaah sikhne ki usko koi zarurat nahi hai hamari jo kuch bhi bakwas hai vaah jeevan ko tabah karne par tuli hui hai aur jo janma hua baccha hai us par purn jeevan hai purn shikshakon ka sex

कुछ मत सिखाओ कुछ मत बताओ से जीने दो और आप सीखो उससे हमें उसको सिखाने का कोई अधिकार नहीं

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Purushottam Choudhary

ब्राह्मण Next IAS institute गार्ड

2:14
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Swami Harihar

Anhadyogi,Humanitarian,Meditation guru,Founder International Anhadyog Foundation,& Ganga Andolan(Mission Harihar)SWAMI HARIHAR CHAITNAYA PARAMHANS MISSION TRUST

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प्रिय मित्र आपने बहुत अच्छा प्रश्न किया है कि छोटे बटुक को किस प्रकार से आध्यात्मिक ज्ञान दिया जाए यदि आप छोटे बच्चों को आध्यात्मिक ज्ञान देते हैं तो निश्चित है कि वह जीवन में बहुत उन्नति करेंगे अध्यात्मिक ज्ञान का तात्पर्य विज्ञान की है उसको आपको जानना होगा क्योंकि विज्ञान का ही एक पाठ है या यह कहें कि विज्ञान अध्यात्म का ही एक पाठ है यदि आप बचपन से ही बच्चों को अध्यात्मिक शिक्षा देते तो निश्चित है तो अपने खुद पर अपनी हिंसा पर काबू पा लेंगे क्योंकि आज के समय में सबसे ज्यादा बच्चों में ईर्ष्या क्रोध हिंसा देती तारे तनाव बड़ों की अपेक्षा बच्चों में अधिक है यदि आप दोस्त 3 साल की उम्र से ही बच्चों को आध्यात्मिक की और रुचि डालने आ जाते हैं तो यह निश्चित है कि यह बहुत अच्छा रहेगा अब रही बात कि कैसे बच्चों को अज्ञात की ओर लेकर जाया जाए पहली बात तो मैं आपको बता दो बच्चों का मन बहुत चंचल होता है और किस अवस्था में आप बच जो भी से खाना चाहेंगे बच्चे उसी और चले जाएंगे यह निर्भर करता है उनके मां बाप के ऊपर जैसे मां बाप का आचरण करते हैं बच्चे वैसा ही आचरण करते आपका नकल करेंगे एक बंदर की तरह है कि आपको अपने घर की भूमिका ही उसी हिसाब से बनानी होगी आप लगातार अध्यापकों की चर्चा कीजिए मियां बीवी पति पत्नी आपस में अध्यापन की चर्चा कीजिए बच्चे आपको क्या करेंगे देखेंगे अपने घर में गाली-गलौज मत कीजिए हो सके तो अपने बच्चों को कार्टून दिखाइए बहुत अच्छा लगा अब आप कहेंगे कार्टून दिखाइए कार्टून धार्मिक बनी हुई कार्टून जापान की बनी हुई रामायण खुश होकर देखते हैं हनुमान के ऊपर बहुत सारी ऐसी कार्टूंस बनी हुई और श्री कृष्ण जी पर बहुत सारी ऐसी कार्टून बच्चों को वह दिखाना आरंभ कर दी है बच्चों का रुझान धीरे-धीरे धर्म की ओर और ऐसी चीजों के और लगना शुरू करेगा उनके लिए उनके साथ गेम खेलिए आपसे बातें करें उनके साथ थोड़ा सा हो सके तो लालची रखिए अभी बच्चों को चॉकलेट वगैरह भी है पर फिर भी कुछ हल्का सा उनको लिख दीजिए कि जो यह तुझे उनके साथ के लिए कौन बनेगा करोड़पति जैसी चीजें के लिए जिसमें धार्मिक प्रश्न कीजिए उनके सामने भजन गाइए उनके सामने ढोलक बजाए उनके सामने हारमोनियम बजाइए उनके सामने घंटी बजाई ऐसी छुट्टियां आप का नारा भगत जी आप देखेंगे बच्चे आपको कॉपी करेंगे हमारे बच्चे जो होते हैं ना छोटे बच्चे यहां आए ना होते हैं यह नकल करते ही नकल करेंगे जो उनके मां-बाप करेंगे अपने पिता की ओर ज्यादा आकर्षित होती हैं और अपनी ओर आकर्षित होते हैं उस पर भी चर्चा करूंगा पंतु अगर आप छोटे बच्चों को इसी तरह से कॉपी करना शुरू कर देते हैं तो धीरे-धीरे यह बच्चे बड़े होकर परिपक्व और अच्छे अध्यात्म और विज्ञान के अच्छे ज्ञाता माने जाएंगे तो जो कि आज के समाज की स्थिति आप देख रहे हैं हमारे समाज में बच्चों में जो है बच्चे बहुत अदृश्य हो रहे हैं बहुत क्रोधी हो रहे हैं छोटी बातों पर टेंशन लेने लग जाते हैं कभी उनको पढ़ाई का बोझ लगने लगता है तो अगर मेडिटेशन करेंगे तो बुद्धि का सही उपयोग कर पाएंगे और प्रॉपर क्यों है टेंशन से मुक्त रहेंगे

priya mitra aapne bahut accha prashna kiya hai ki chote batuk ko kis prakar se aadhyatmik gyaan diya jaaye yadi aap chote baccho ko aadhyatmik gyaan dete hain toh nishchit hai ki vaah jeevan me bahut unnati karenge adhyatmik gyaan ka tatparya vigyan ki hai usko aapko janana hoga kyonki vigyan ka hi ek path hai ya yah kahein ki vigyan adhyaatm ka hi ek path hai yadi aap bachpan se hi baccho ko adhyatmik shiksha dete toh nishchit hai toh apne khud par apni hinsa par kabu paa lenge kyonki aaj ke samay me sabse zyada baccho me irshya krodh hinsa deti taare tanaav badon ki apeksha baccho me adhik hai yadi aap dost 3 saal ki umar se hi baccho ko aadhyatmik ki aur ruchi dalne aa jaate hain toh yah nishchit hai ki yah bahut accha rahega ab rahi baat ki kaise baccho ko agyaat ki aur lekar jaya jaaye pehli baat toh main aapko bata do baccho ka man bahut chanchal hota hai aur kis avastha me aap bach jo bhi se khana chahenge bacche usi aur chale jaenge yah nirbhar karta hai unke maa baap ke upar jaise maa baap ka aacharan karte hain bacche waisa hi aacharan karte aapka nakal karenge ek bandar ki tarah hai ki aapko apne ghar ki bhumika hi usi hisab se banani hogi aap lagatar adhyapakon ki charcha kijiye miyan biwi pati patni aapas me adhyapan ki charcha kijiye bacche aapko kya karenge dekhenge apne ghar me gaali galoj mat kijiye ho sake toh apne baccho ko cartoon dikhaiye bahut accha laga ab aap kahenge cartoon dikhaiye cartoon dharmik bani hui cartoon japan ki bani hui ramayana khush hokar dekhte hain hanuman ke upar bahut saari aisi kartuns bani hui aur shri krishna ji par bahut saari aisi cartoon baccho ko vaah dikhana aarambh kar di hai baccho ka rujhan dhire dhire dharm ki aur aur aisi chijon ke aur lagna shuru karega unke liye unke saath game kheliye aapse batein kare unke saath thoda sa ho sake toh lalchi rakhiye abhi baccho ko chocolate vagera bhi hai par phir bhi kuch halka sa unko likh dijiye ki jo yah tujhe unke saath ke liye kaun banega crorepati jaisi cheezen ke liye jisme dharmik prashna kijiye unke saamne bhajan gaiye unke saamne dholak bajaye unke saamne Harmonium bajaiye unke saamne ghanti bajai aisi chhutiyan aap ka naara bhagat ji aap dekhenge bacche aapko copy karenge hamare bacche jo hote hain na chote bacche yahan aaye na hote hain yah nakal karte hi nakal karenge jo unke maa baap karenge apne pita ki aur zyada aakarshit hoti hain aur apni aur aakarshit hote hain us par bhi charcha karunga pantu agar aap chote baccho ko isi tarah se copy karna shuru kar dete hain toh dhire dhire yah bacche bade hokar paripakva aur acche adhyaatm aur vigyan ke acche gyaata maane jaenge toh jo ki aaj ke samaj ki sthiti aap dekh rahe hain hamare samaj me baccho me jo hai bacche bahut adrishya ho rahe hain bahut krodhi ho rahe hain choti baaton par tension lene lag jaate hain kabhi unko padhai ka bojh lagne lagta hai toh agar meditation karenge toh buddhi ka sahi upyog kar payenge aur proper kyon hai tension se mukt rahenge

प्रिय मित्र आपने बहुत अच्छा प्रश्न किया है कि छोटे बटुक को किस प्रकार से आध्यात्मिक ज्ञान

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