कला और संस्कृति में क्या फर्क होता है ?...


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Devanand Sonwani

Career Counsellor and Personal Adviser

5:06

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क्वेश्चन की कला और संस्कृति में क्या फर्क होता है मतलब क्या अंतर होता है तो बता देना चाहता हूं कि कला और संस्कृति दोनों अलग-अलग चीजें हैं विभिन्न देशों की अपनी अपनी अलग कलाकृतियां होती है और अलग अलग संस्कृति होती है यहां तक कि आप देखें इतिहास को तो अलग-अलग युग में मनुष्य की अलग-अलग संस्कृतियों और अलग-अलग कला सामने आई है जैसे आप देखें तो छत्तीसगढ़ में भोरमदेव को देखें तो वहां पर विभिन्न क्लब कलाकृतियों के जरिए जो प्राचीन संस्कृति है उसके बारे में हम जान सकते हैं वहां पर विभिन्न कलाकृति है इसके अलावा बहुत सारे पुराने मंदिर और मंदिर के अलावा जितने भी प्राचीन मंदिर हैं या आप गुफाएं हैं या दार्शनिक स्थल हैं जहां पास पुराने वस्तु अभी भी उपस्थित है नगराची निकाल के कला को जिससे आप देख सकते हैं उनके कलर से हम उनके साथी को समझ सकते हैं जैसे मिस्र में पिरामिड पिरामिड जो है उनके कलाकृति हैं लेकिन उससे हम उसकी संस्कृति को समझ सकता कि करना बहुत सारे चित्र बने हुए हैं जो कि उनकी संस्कृति को समझाते हैं जैसे कि जो ताजमहल बना हुआ है हमारे इंडिया में विश्व का सात अजूबा में से एक अजूबा ताजमहल उस काल में उस समय में जो लोग बनाए थे यह उनकी कलाकृतियां हैं कि उनमें निर्माण कार्य कितना अच्छा था इतने अच्छे कलाकार सकते हैं कितना अच्छा चीजें बना सकते हैं यह उनकी कला होगी और अगर हम संस्कृति को देखें तो इसके विपरीत संस्कृत और संस्कृति अलग अलग होती है हर जगह कि जैसे पनामा सिटी में पहनावा आप भारत में ही जाए तो देखेंगे अलग अलग राज्य के लोग अलग-अलग तरह के कपड़े पहनते हैं जैसे नॉर्मल यहां महिलाएं साड़ी पहनती है तो साड़ियां महिलाएं अलग-अलग साड़ियां पंजाबी महिलाएं ज्यादातर सलवार सूट पहनना पसंद करती है तो वही मुसलमान महिलाएं भी सलवार सूट पहनना पसंद करते हैं लेकिन दोनों कब पहनने का तरीका जो उनकी चुनरी रखने का तरीका और कुछ अलग अलग होता है इसके अलावा छत्तीसगढ़ में आकर के छत्तीसगढ़ में महिलाएं साड़ी पहनती है और इंडिया में जाकर देखें महिला साड़ी पहनती है लेकिन साड़ी पहनने का तरीका अलग होता है सीधा उल्टा होता है छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ी बोली जाती है बिहार में झारखंड में अपील उत्तर प्रदेश में भोजपुरी भाषा बोली जाती है तमिल कन्नड़ तेलुगु यह सब भाषा बोली जाती है इधर कोलकाता बंगाली जैसे भाषाओं का प्रचलन है महाराष्ट्र में देखें तो मराठी भाषा बोली जाती के अलग अलग राज्य के अलग-अलग संख्या से अलग अलग देश के लिए अलग अलग संस्कृति है उनके संस्कृति को इनके पहनावे के आधार पर उनके बोलचाल के आधार पर और इनके बीच में जो सामाजिक नियम है वैसे शादी विवाह को लेकर यह इसके अलावा खानपान को लेकर यह सब संस्कृत के अंतर्गत आती है जैसे कि कुछ लोग खाना पसंद कर कुमार वेज खाना पसंद करते हैं कुछ लोग के साथ काम है अब अक्षय करके मूवी देखते हो तो मुंह में ऐसा डाला जाता है कि हमारे संस्कारों में नहीं है ऐसा कुछ बात नहीं है रघुकुल रीत सदा चली आई प्राण जाए पर वचन ना जाए जो रामायण का श्लोक में कहा गया है कि रघुकुल रीत है लेकिन किसी व्यक्ति को दिया गया वचन वचन नहीं जाना चाहिए भले जान चली जाए लेकिन अगर किसी को वादा क्यों वचन दी हो तो उसको पूरा करना ही चाहिए कन्या में उल्लू की संस्कृति के अंतर्गत आता है तो मेरे ख्याल से आप समझ गए होंगे कि कला और संस्कृति दोनों विभिन्न विभिन्न है आप देखें अलग-अलग प्रकार के नृत्य कला नृत्य करने की जो कला होती है वह अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग देशों में अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग होती है बहुत सारी नसें होती है भरतनाट्यम होता है कुछ कुछ होता है एक कला और संस्कृति में मेरे ख्याल से आप डिफरेंस समझ गए होंगे और अगर इसके बारे में ज्यादा जानकारी चाहिए तब मैं को कमेंट में रिप्लाई कर सकते हैं और दोबारा क्वेश्चन पूछ सकते हैं कुछ अच्छा ठीक है फिर अगर पूरा डिटेल से बोलेंगे तो यहां तो राइटिंग का ऑप्शन नहीं है लेकिन अगर आप मेरे कमेंट में मैसेज करें अपना नंबर दो मैं आपको लिखकर बता सकता हूं या तो कॉल में बात कर जिससे आपका कोई भी समस्या जिसका समाधान किया जा सकता है

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क्वेश्चन की कला और संस्कृति में क्या फर्क होता है मतलब क्या अंतर होता है तो बता देना चाहता

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