कैसे अपने ध्यान को भंग होने से बचाएं?...


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Dr.Rajesh Shrivas

Research Scholar

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अपने ध्यान को भंग होने से बचाने के लिए हमें अपने मन को एकाग्र और एकाग्र चित्र करना पड़ेगा हमारा ध्यान उस चीज पर केंद्रित होना चाहिए हौसला पैंट के अंदर होना चाहिए जिसको हम प्राप्त करना चाहते हैं अगर हमारा ध्यान एकाग्र चित्र होगा हम एक ही लक्ष्य प्राप्ति के लिए पूर्ण तमंचे लगे होंगे और हम जिस कार्य को कर रहे हैं उसे बड़े तल्लीनता से कर रहे होंगे तो हमारा ध्यान कभी बंद नहीं होगा ध्यान भंग होने का कारण यह है कि हम जिस कार्य में लगे हैं उससे ज्यादा कहीं पूरी तरह से लगे ना होकर हमारा ध्यान इधर उधर की चीजों को भी मैं भी सम्मिलित होता है जैसे कि बगल में कुछ आवाजें आ रही हैं अगर हम पूर्ण रूप से उस कार्य में लगे हैं जिसमें हम तल्लीनता से लगे हैं तो बाहर कुछ भी हो रहा हो हमारा ध्यान वहां नहीं जाएगा मन है तो रामू रामू देती हमारा मन दूर तक जाता है जब तक मन को एकाग्र नहीं किया जाएगा तब तक हम प्यार होने होने से नहीं बन सकते एकाग्रता ही ध्यान भंग होने से बचने का एक माध्यम है धन्यवाद

apne dhyan ko bhang hone se bachane ke liye hamein apne man ko ekagra aur ekagra chitra karna padega hamara dhyan us cheez par kendrit hona chahiye hausla pant ke andar hona chahiye jisko hum prapt karna chahte hain agar hamara dhyan ekagra chitra hoga hum ek hi lakshya prapti ke liye purn tamanche lage honge aur hum jis karya ko kar rahe hain use bade tallinata se kar rahe honge toh hamara dhyan kabhi band nahi hoga dhyan bhang hone ka karan yah hai ki hum jis karya me lage hain usse zyada kahin puri tarah se lage na hokar hamara dhyan idhar udhar ki chijon ko bhi main bhi sammilit hota hai jaise ki bagal me kuch avajen aa rahi hain agar hum purn roop se us karya me lage hain jisme hum tallinata se lage hain toh bahar kuch bhi ho raha ho hamara dhyan wahan nahi jaega man hai toh ramu ramu deti hamara man dur tak jata hai jab tak man ko ekagra nahi kiya jaega tab tak hum pyar hone hone se nahi ban sakte ekagrata hi dhyan bhang hone se bachne ka ek madhyam hai dhanyavad

अपने ध्यान को भंग होने से बचाने के लिए हमें अपने मन को एकाग्र और एकाग्र चित्र करना पड़ेगा

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