हम क्यों जान बूझ कर आत्म विनाशकारी आदतें पाल लेते हैं जब की हमें पता है की यह हमारे लिए हानिकारक हैं?...


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vivek sharma

BANK PO| Astrologer | Mutual Fund Advisor। Career Counselor

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हम क्यों जानबूझकर आत्मविश्वास विनाशकारी आते हैं पाल लेते हैं जबकि में पता है कि यह हमारे लिए हानिकारक है आपका आज के संदर्भ में बिल्कुल ही सत्य बात बोल रहे हैं हर व्यक्ति को पता है कि बीड़ी पीने से नुकसान के अलावा कुछ नहीं मिलेगा गुटखा खाने से नुकसान के अलावा कुछ नहीं मिलेगा मद्रा पीने से नुकसान के अलावा कुछ नहीं मिलेगा किसी की बुराई करने से नुकसान के अलावा कुछ नहीं मिलेगा किसी का बुरा करने से नुकसान खिलाओगे फिर भी हम करते हैं इसके पीछे क्या है हमारे अंदर ईश्वर की कमी है जो कांसेप्ट दुनिया के अंदर वोट कमजोर है इसीलिए हम अपनी विनाशकारी हाल चाल लेते हैं क्योंकि हमें हमें क्लीिटी नहीं है दिमाग के अंदर यह चीजें हमारे साथी ने हमारा हमारा ही नहीं हमारे परिवार का हमारे बच्चों का पत्नी का माता पिता का और अगर हमारे परिवार का विनाश करें हमारे समाज का विनाश कर रहे एक व्यक्ति जो ऊपर जाता है उसके 50 लोग संदर्भ लेते हैं जबर गया है और हमें भी जाना है उससे प्रेरणा लेते हैं और एक व्यक्ति अगर गलत काम करता है तो हजारों लोग देखते हैं यह भी तो कर रहा है मेरे को करना चाहिए तो जानबूझकर आदमी नात कारी आते हैं व्यक्ति पाल लेते हैं जो कि सर बता गलत है धन्यवाद

hum kyon janbujhkar aatmvishvaas vinashkari aate hain pal lete hain jabki me pata hai ki yah hamare liye haanikarak hai aapka aaj ke sandarbh me bilkul hi satya baat bol rahe hain har vyakti ko pata hai ki bidi peene se nuksan ke alava kuch nahi milega gutkha khane se nuksan ke alava kuch nahi milega madra peene se nuksan ke alava kuch nahi milega kisi ki burayi karne se nuksan ke alava kuch nahi milega kisi ka bura karne se nuksan khilaoge phir bhi hum karte hain iske peeche kya hai hamare andar ishwar ki kami hai jo concept duniya ke andar vote kamjor hai isliye hum apni vinashkari haal chaal lete hain kyonki hamein hamein kliiti nahi hai dimag ke andar yah cheezen hamare sathi ne hamara hamara hi nahi hamare parivar ka hamare baccho ka patni ka mata pita ka aur agar hamare parivar ka vinash kare hamare samaj ka vinash kar rahe ek vyakti jo upar jata hai uske 50 log sandarbh lete hain jabar gaya hai aur hamein bhi jana hai usse prerna lete hain aur ek vyakti agar galat kaam karta hai toh hazaro log dekhte hain yah bhi toh kar raha hai mere ko karna chahiye toh janbujhkar aadmi nat kaari aate hain vyakti pal lete hain jo ki sir bata galat hai dhanyavad

हम क्यों जानबूझकर आत्मविश्वास विनाशकारी आते हैं पाल लेते हैं जबकि में पता है कि यह हमारे ल

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