मैं कैसे अवसाद और चिंता से उभर कर दोबारा प्रोत्साहित हो सकता हूँ?...


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Dr.Ravi Atroliya

रिटायर्डडीएसपी

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चिंता चिता समान होती है और चिंता या तनाव से ही अवसाद उत्पन्न होते हैं और यह अवसाद जब बढ़ते हैं तो यह आत्महत्या तक ले जाते हैं अर्थात यह मान के चलिए कि चिंता से चिंतित होने से कुछ नहीं होने वाला चिंतित होते रहे चिंता में मरते रहे तो अवसाद में डूबते जाएंगे ऊपर भी थी बहुत नुकसानदायक होगी तो बेहतर क्या है कि चिंता किस बात की है उसे आप एक कागज पर नोट करें क्या हुआ बात जो आपको खाए जा रही है सता रही है फिर उस चिंता को यह उस समस्या को जिसके से चिंता पैदा हुई है कैसे उसका समाधान खोजा जाए क्या क्या समाधान हो सकते हैं क्या आप खुद समाधान के रास्ते पर पढ़ सकते हैं और क्या दूसरों की मदद से उसका समाधान पा सकते हैं तो निश्चित ही आपको सही मार्गदर्शन मिल जाएगा सही राह मिल जाएगी और चिंता चिंता के पुत्र अवसाद से आपको मुक्ति मिल जाएगी

chinta chita saman hoti hai aur chinta ya tanaav se hi avsad utpann hote hain aur yah avsad jab badhte hain toh yah atmahatya tak le jaate hain arthat yah maan ke chaliye ki chinta se chintit hone se kuch nahi hone vala chintit hote rahe chinta me marte rahe toh avsad me dubte jaenge upar bhi thi bahut nukasanadayak hogi toh behtar kya hai ki chinta kis baat ki hai use aap ek kagaz par note kare kya hua baat jo aapko khaye ja rahi hai sata rahi hai phir us chinta ko yah us samasya ko jiske se chinta paida hui hai kaise uska samadhan khoja jaaye kya kya samadhan ho sakte hain kya aap khud samadhan ke raste par padh sakte hain aur kya dusro ki madad se uska samadhan paa sakte hain toh nishchit hi aapko sahi margdarshan mil jaega sahi raah mil jayegi aur chinta chinta ke putra avsad se aapko mukti mil jayegi

चिंता चिता समान होती है और चिंता या तनाव से ही अवसाद उत्पन्न होते हैं और यह अवसाद जब बढ़ते

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