योग का अर्थ क्या होता है विस्तार रूप उत्तर देने की?...


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Priyanka Bhatele

Yoga Trainer

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Bhupender Dev

Yoga Therapist & Yoga Expert

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

चीना शिकार आपका प्रश्न है योग का अर्थ क्या होता है विस्तार रूप उत्तर दीजिए अगम अगम योग के शाब्दिक अर्थ के बारे में बात करें तो योग संस्कृत के यूज़ धातु से निकला हुआ है जिसका अर्थ होता है मिलाना या जोड़ना अपने आप को किसी वस्तु के साथ या अन्य किसी चीज के साथ अपने आप को जोड़ना जो होता है वह योग होता है लेकिन इतना छोटा सा उत्तर योग का नहीं हो सकता यो यो का अर्थ कितना छोड़ा ऐसा नहीं हो सकता तो योग के परिपूर्ण अर्थ को समझाने के लिए महर्षि पाणिनि है इसके तीन रूप स्वरूपों की बात की उन्होंने कहा पहले उन्होंने कहा कि योगा समाधि की जो योग है उसका जो अर्थ स्वरूप है वह समाधि योग का जो परम लक्ष्य है वह है समाधि तो समाधि की प्राप्ति करने योग्य है इस अर्थ में लिया है दुश्मन ने बताया है कि यूजिक योग्य योग्य योग्य का अर्थ होता है अपने आपको उस परमपिता परमेश्वर के साथ जोड़ने का जो विधान है उस परमपिता के साथ जुड़ जाना वह जो है योग है यूजी रहोगे अर्थात सहयोग करना इसको अगर थोड़ा सागर समझे हम तो इसका आज जो अर्थ उत्सव पर ले सकते हैं कि इस दुख रूपी संसार से ब्लॉक करके ईश्वर के साथ सहयोग करने की सुविधा है योग हैं कि स्त्री बात उन्होंने बताएं योगा से मैंने अर्थात मन का संयम करना कहने का मतलब यह है है कि उस परमात्मा तक पहुंचने के लिए एक हमारा शरीर है शरीर के बीच में हमारा मन है मन के आगे परमात्मा है तो बीच वाली जो कड़ी है मन है दुश्मन में संयम करके मन को नियंत्रित कर करके उस परमेश्वर को प्राप्त करना उस परमात्मा को प्राप्त करने की सुविधा है वह योग्यता विस्तार पूर्वक समझाता हूं अगर हम इन तीनों को छिपाने के इन तीनों औरतों को अगर समझने की कोशिश करें तो तीनों का एक ही जो रूप ₹100 मिलता है वह मिलता है जो वह परम शक्ति है जो वह सुप्रीम पावर है उसमें अपने आप को मिला देना उसमें अपने आपको विलीन कर देना वह योग है अब उसको अपने आपको उस परम शक्ति मशीन सुप्रीम पावर में विलीन कैसे किया जा सकता है इसके लिए जो विधा इस सृष्टि पर आई है वह भी दा है योग विधा यह वह योगिता है जो उस सुप्रीम पावर को प्राप्त करने का एकमात्र गए एक रास्ता है तो उस रास्ते पर चलकर के अर्थात योग्य सी विधा के रास्ते पर चलकर के हम सुप्रीम पावर को प्राप्त कर सकते हैं अर्थात सुप्रीम पावर ही बन जा सकते हैं जब मैं सुप्रीम पावन में विलीन हो जाते हैं तुम सुप्रीम सुप्रीम पावर ही हो जाते हैं तो अपने इसी को इसी को जो है मोक्ष का नाम दिया जाता है इसी को के बल्ले इसी को समाधि से कौन है को अनेकों ऐसे नामों से जाना जाता है तो योग का जो अर्थ है वह बिजली है ही सुप्रीम पावर मैं अपने आप को प्लेन करना उस सुप्रीम पावर में अपने आप को जोड़ देना उस सुप्रीम पावर ही बन जाना तो जो अनेक शब्द आते हैं आत्मा से प्रमाण मां का मिलन तो परमात्मा या सुप्रीम पावर है तो अपने आप को सो परमात्मा ईश्वर भी उसी को नाम दिया गया है परमात्मा भी उसी को नाम दिया गया है उसी को अनेकों नाम से अनेको धर्मों में अनेकों नाम से उसको जाना जाता है तो अपने आप को सुप्रीम पावर में ले जाना ही योग्य है तो इसके लिए अनेकों मार लिया में दिखाएं दोबारा अवतार पूर्वक चर्चा करें उम्मीद है कि आपको मेरा यह उत्तर पसंद आया होगा धन्यवाद

china shikaar aapka prashna hai yog ka arth kya hota hai vistaar roop uttar dijiye agam agam yog ke shabdik arth ke bare me baat kare toh yog sanskrit ke use dhatu se nikala hua hai jiska arth hota hai milana ya jodna apne aap ko kisi vastu ke saath ya anya kisi cheez ke saath apne aap ko jodna jo hota hai vaah yog hota hai lekin itna chota sa uttar yog ka nahi ho sakta yo yo ka arth kitna choda aisa nahi ho sakta toh yog ke paripurna arth ko samjhane ke liye maharshi panini hai iske teen roop swaroopon ki baat ki unhone kaha pehle unhone kaha ki yoga samadhi ki jo yog hai uska jo arth swaroop hai vaah samadhi yog ka jo param lakshya hai vaah hai samadhi toh samadhi ki prapti karne yogya hai is arth me liya hai dushman ne bataya hai ki yujik yogya yogya yogya ka arth hota hai apne aapko us parampita parmeshwar ke saath jodne ka jo vidhan hai us parampita ke saath jud jana vaah jo hai yog hai yuji rahoge arthat sahyog karna isko agar thoda sagar samjhe hum toh iska aaj jo arth utsav par le sakte hain ki is dukh rupee sansar se block karke ishwar ke saath sahyog karne ki suvidha hai yog hain ki stree baat unhone bataye yoga se maine arthat man ka sanyam karna kehne ka matlab yah hai hai ki us paramatma tak pahuchne ke liye ek hamara sharir hai sharir ke beech me hamara man hai man ke aage paramatma hai toh beech wali jo kadi hai man hai dushman me sanyam karke man ko niyantrit kar karke us parmeshwar ko prapt karna us paramatma ko prapt karne ki suvidha hai vaah yogyata vistaar purvak samajhaata hoon agar hum in tatvo ko chipane ke in tatvo auraton ko agar samjhne ki koshish kare toh tatvo ka ek hi jo roop Rs milta hai vaah milta hai jo vaah param shakti hai jo vaah supreme power hai usme apne aap ko mila dena usme apne aapko vileen kar dena vaah yog hai ab usko apne aapko us param shakti machine supreme power me vileen kaise kiya ja sakta hai iske liye jo vidhaa is shrishti par I hai vaah bhi the hai yog vidhaa yah vaah yogita hai jo us supreme power ko prapt karne ka ekmatra gaye ek rasta hai toh us raste par chalkar ke arthat yogya si vidhaa ke raste par chalkar ke hum supreme power ko prapt kar sakte hain arthat supreme power hi ban ja sakte hain jab main supreme paavan me vileen ho jaate hain tum supreme supreme power hi ho jaate hain toh apne isi ko isi ko jo hai moksha ka naam diya jata hai isi ko ke balle isi ko samadhi se kaun hai ko anekon aise namon se jana jata hai toh yog ka jo arth hai vaah bijli hai hi supreme power main apne aap ko plane karna us supreme power me apne aap ko jod dena us supreme power hi ban jana toh jo anek shabd aate hain aatma se pramaan maa ka milan toh paramatma ya supreme power hai toh apne aap ko so paramatma ishwar bhi usi ko naam diya gaya hai paramatma bhi usi ko naam diya gaya hai usi ko anekon naam se aneko dharmon me anekon naam se usko jana jata hai toh apne aap ko supreme power me le jana hi yogya hai toh iske liye anekon maar liya me dikhaen dobara avatar purvak charcha kare ummid hai ki aapko mera yah uttar pasand aaya hoga dhanyavad

चीना शिकार आपका प्रश्न है योग का अर्थ क्या होता है विस्तार रूप उत्तर दीजिए अगम अगम योग के

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योग क्या है योग शब्द का अर्थ समाधि स्थल चित्त की वृत्तियों का निरोध है ही योग है योगश्चित्त वृत्ति निरोध हमारा चित्र चित्र सतगुरु रजोगुण और तमोगुण के उपादान कारण वाला है इसलिए उसका स्वभाव गुणात्मक है अकाशिया दिलवाला है चित्त की वृत्तियों दीक्षित विक्षिप्त अवस्था में योग का प्रारंभ होता है में जितनी भी बच्चा था जितने विचार उत्पन्न होते हैं उन सभी को मां की पतंजलि में पांच भागों में विभक्त कर दिया है जैसे प्रमाणिक विकास समिति रोक देना है योग समाधि है पांचू प्रकार की वृत्तियों का निरोध करने से कॉलेज में कर्ण के बंधन होते और न्यूज़ पर अमित अभिमुख हो जाते हैं संप्रज्ञात समाधि की प्राप्ति होती है आत्मा परमात्मा का मिलन होता है यूपी की समाधि किस अवस्था में योगी भगवान का यंत्र बनाकर ईश्वरीय ज्ञान शक्ति सामर्थ्य ईश्वरी प्रेम हो जाता है दिल करता है और जीविका समूह भूत्वा समाचार योग उच्यते

yog kya hai yog shabd ka arth samadhi sthal chitt ki vrittiyon ka nirodh hai hi yog hai yogashchitt vriti nirodh hamara chitra chitra satguru rajogun aur tamogun ke upadan karan vala hai isliye uska swabhav gunatmak hai akashiya dilwala hai chitt ki vrittiyon dixit vikshipt avastha me yog ka prarambh hota hai me jitni bhi baccha tha jitne vichar utpann hote hain un sabhi ko maa ki patanjali me paanch bhaagon me vibhakt kar diya hai jaise pramanik vikas samiti rok dena hai yog samadhi hai panchu prakar ki vrittiyon ka nirodh karne se college me karn ke bandhan hote aur news par amit abhimukh ho jaate hain sampragyat samadhi ki prapti hoti hai aatma paramatma ka milan hota hai up ki samadhi kis avastha me yogi bhagwan ka yantra banakar ishwariya gyaan shakti samarthya ISHWARI prem ho jata hai dil karta hai aur jeevika samuh bhutwa samachar yog uchyate

योग क्या है योग शब्द का अर्थ समाधि स्थल चित्त की वृत्तियों का निरोध है ही योग है योगश्चित्

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पृथ्वी योग का अर्थ क्या होता है विस्तार रूप उत्तर देने की कृपा करें योग करना अपनी सांसो से जुड़ना अपने सांस्कृतिक सजग रहना पतंजलि ने अपनी योग सूत्र में योग के बारे में कहा योगश्चित्त वृत्ति निरोधा अर्थात अपने चित्त वृत्तियों का निरोध योग है अब आपसे प्रश्न का चित्र क्या है चित्र मन है मन है मन पर दिन पर दिन का इंतजार करते हैं विचार आने लगते हैं अच्छे विचार बुरे विचार उन्हें अच्छे बुरे विचारों के समतुल्य बैठाना भी योग सिखाता है इसलिए यू बहुत लाभदायक है इसके लिए पतंजलि ऋषि ने योग की अष्ट 8 मार्ग बताए हैं यम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान समाधि यम नियम का पालन करते हुए आठवें मार्ग तक पहुंच सकते हैं हालांकि इसमें भारत में स्वामी रामदेव ने योग के 2 अंगों को समान सर्व सर्व सामान्य बना दिया जहां आसन प्राणायाम आपके मन में प्रश्न हूं उठ रहा होगा आसन शिक्षित की वृद्धि का विरोध होगा आसन करते हैं सर्वांगासन सर्वांगासन में आप जमीन के बल लेट गए सांस भरते हुए शरीर को अपने अपने अपने कमर को दोनों हाथ से पकड़ कर अपने पैर को धीरे धीरे 90 डिग्री उठाना है जब आप 90 डिग्री से नीचे फूलों नीचे आएगा तो रक्त में नए-नए पोषण जैसी कथा कैल्शियम फास्फोरस आयरन सब आज आपके मस्तिष्क पर और विटामिन आपके शरीर पर मस्तिष्क पर शरीर पर निबंध जैसे तक फ्री हो जाएंगे विचारों को थोड़ी किधर तक कम हो गई तिरंगे जो श्रृंग और गर्त का निर्माण करते हुए उत्पन्न होती है उनका भाव थोड़ा सा कम होगा बीसीजी योग जो है यह शब्द मतलब बना होता है आसन प्राणायाम तू तीसरा चौथा चरण है इसके माध्यम से आप अगले चड्डी अभियान तब आप जानेंगे कि यू क्या है उसका अनुभव करके ही आप बता सकते हैं कि अगर मैं क्या कितना वाचाल तूतक तरह आपको वक्त भी देता रहा आपको कुछ भी नहीं है जब आप अनुभव करेंगे तब उसका लाभ होगा आप सुबह उठ के आ संकट आसन के सर्वप्रथम आसन करिए आसन करने के लिए सर्वप्रथम आप सेतुबंध आसन मकरासन भुजंगासन मयूरा पश्चिमोत्तानासन शीर्षासन सर्वांगासन आसन करिए तब खींच के वक्त और आयाम के लिए प्राणायाम करने के बाद लगाइए सासु प्रेत का साया साया बाय नाक पे गया डायना से आया गया ध्यान जवाब तब योग प्रचलित होगा अपने रूप में हम चाहे जितना बोल दे भाषण दे दे वक्त देश का कोई लाभ न जब तक जीवन मिलते इस जीवन में कभी लाभदायक है योग का

prithvi yog ka arth kya hota hai vistaar roop uttar dene ki kripa kare yog karna apni saanso se judna apne sanskritik sajag rehna patanjali ne apni yog sutra me yog ke bare me kaha yogashchitt vriti nirodha arthat apne chitt vrittiyon ka nirodh yog hai ab aapse prashna ka chitra kya hai chitra man hai man hai man par din par din ka intejar karte hain vichar aane lagte hain acche vichar bure vichar unhe acche bure vicharon ke samatulya baithana bhi yog sikhata hai isliye you bahut labhdayak hai iske liye patanjali rishi ne yog ki asht 8 marg bataye hain yum aasan pranayaam pratyahar dharana dhyan samadhi yum niyam ka palan karte hue aathven marg tak pohch sakte hain halaki isme bharat me swami ramdev ne yog ke 2 angon ko saman surv surv samanya bana diya jaha aasan pranayaam aapke man me prashna hoon uth raha hoga aasan shikshit ki vriddhi ka virodh hoga aasan karte hain sarvangasan sarvangasan me aap jameen ke bal late gaye saans bharte hue sharir ko apne apne apne kamar ko dono hath se pakad kar apne pair ko dhire dhire 90 degree uthana hai jab aap 90 degree se niche fulo niche aayega toh rakt me naye naye poshan jaisi katha calcium phosphorus iron sab aaj aapke mastishk par aur vitamin aapke sharir par mastishk par sharir par nibandh jaise tak free ho jaenge vicharon ko thodi kidhar tak kam ho gayi tirange jo shrring aur gart ka nirmaan karte hue utpann hoti hai unka bhav thoda sa kam hoga bcg yog jo hai yah shabd matlab bana hota hai aasan pranayaam tu teesra chautha charan hai iske madhyam se aap agle chaddee abhiyan tab aap jaanege ki you kya hai uska anubhav karke hi aap bata sakte hain ki agar main kya kitna vachal tutak tarah aapko waqt bhi deta raha aapko kuch bhi nahi hai jab aap anubhav karenge tab uska labh hoga aap subah uth ke aa sankat aasan ke sarvapratham aasan kariye aasan karne ke liye sarvapratham aap setubandh aasan makarasan bhujangasan mayura pashchimottanasan Shirshasan sarvangasan aasan kariye tab khinch ke waqt aur aayam ke liye pranayaam karne ke baad lagaaiye sasu pret ka saya saya bye nak pe gaya dayana se aaya gaya dhyan jawab tab yog prachalit hoga apne roop me hum chahen jitna bol de bhashan de de waqt desh ka koi labh na jab tak jeevan milte is jeevan me kabhi labhdayak hai yog ka

पृथ्वी योग का अर्थ क्या होता है विस्तार रूप उत्तर देने की कृपा करें योग करना अपनी सांसो से

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