मृत्यु कैसी होती है इससे महसूस करना कैसे लगता होगा? आप कोई अनुमान लगा सकते हैं?...


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Santosh Singh indrwar

Business Consultant & Life Couch

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मृत्यु तो हर किसी की एक समान ही होती है पर उसको महसूस करने के नजरिए अलग-अलग होते हैं कोई जीवन और जीना चाहता है उसको मृत्यु डरावनी और अच्छी नहीं लगती और कोई अपने कर्तव्य को पूर्ण कर चुका है जो अपने जीवन से संतुष्ट हो चुका है वह बहुत जीवन नहीं जीना चाहता उसको मिट्टी अच्छी लगती है अपनी-अपनी सोच है अपने-अपने नजरिए हैं वैसे मृत्यु अच्छी या बुरी नहीं होती मृत शरीर को त्याग कर दूसरे शरीर को धारण करने का एक प्रारंभ होती है

mrityu toh har kisi ki ek saman hi hoti hai par usko mehsus karne ke nazariye alag alag hote hain koi jeevan aur jeena chahta hai usko mrityu daravni aur achi nahi lagti aur koi apne kartavya ko purn kar chuka hai jo apne jeevan se santusht ho chuka hai vaah bahut jeevan nahi jeena chahta usko mitti achi lagti hai apni apni soch hai apne apne nazariye hain waise mrityu achi ya buri nahi hoti mrit sharir ko tyag kar dusre sharir ko dharan karne ka ek prarambh hoti hai

मृत्यु तो हर किसी की एक समान ही होती है पर उसको महसूस करने के नजरिए अलग-अलग होते हैं कोई ज

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Dr. J.Singh

Financial Expert || Ayurvedic Doctor

1:04
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इस बारे में अभी तक कोई अनिश्चित कोई बताए सकता है बिल्कुल भी करके बच्ची कैसी होती है इसे कैसे महसूस करके कैसा लगता होगा लेकिन हमने जो अपने बुजुर्गों से सुना है या कुछ लोगों से सुना है सुना है कि जब इंसान की मृत्यु निकट आती है तो उसको दे दे उस तरह की उस अदृश्य कीजिए दिखाई दे लगती जैसे कोई कुछ लोग उनको लेने आ रहे हो कुछ अदृश्य लोगों के साथ रहा है उनको लेने के लिए आ रहे हो ऐसा ऐसा महसूस हो जो हमने सुना है अपने बुजुर्गों से या कुछ विद्वानों से सुना है या कुछ लोचा है मिठाई हम आपको बता सकते हैं और सुमन को महसूस होता है कि उनका आखिरी वक्त है वह आ चुका है बस इससे ज्यादा मैं भी आपसे कुछ ज्यादा सजा नहीं कर सकता कुछ बता सकता धन्यवाद

is bare me abhi tak koi anischit koi bataye sakta hai bilkul bhi karke bachi kaisi hoti hai ise kaise mehsus karke kaisa lagta hoga lekin humne jo apne bujurgon se suna hai ya kuch logo se suna hai suna hai ki jab insaan ki mrityu nikat aati hai toh usko de de us tarah ki us adrishya kijiye dikhai de lagti jaise koi kuch log unko lene aa rahe ho kuch adrishya logo ke saath raha hai unko lene ke liye aa rahe ho aisa aisa mehsus ho jo humne suna hai apne bujurgon se ya kuch vidvaano se suna hai ya kuch locha hai mithai hum aapko bata sakte hain aur suman ko mehsus hota hai ki unka aakhiri waqt hai vaah aa chuka hai bus isse zyada main bhi aapse kuch zyada saza nahi kar sakta kuch bata sakta dhanyavad

इस बारे में अभी तक कोई अनिश्चित कोई बताए सकता है बिल्कुल भी करके बच्ची कैसी होती है इसे कै

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

3:13
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मृत्यु कैसे होती है इसको कैसे महसूस किया जा सकता है और आप कोई अनुमान लगा सकते हैं और मृत्यु इंसान को शरीर छोटी है तो मरने वाले को एहसास करा देती है क्या उसका अंतिम समय आ गया है और उसके कर्मों का लेखा जोखा इंसान को आंखों के सामने लगाया जाता है कितना प्लस है कितना - है उसका शेष धर्मराज के जो अकाउंटेंट हैं वह निकालते उसको बताते हैं कि आपके खाते में इतना जमा हुआ है और आपके खाते में इतना जो है ना में हुआ है और इतना शेष बचा है आपकी लाइफ बिटिया की सेक्स और इस तरह से इंसान की जिंदगी में बच्चों से पूछा दिया जो शादी की स्थिति में उत्पन्न होती है परिणाम यह होता है कि यह क्षण मैंने अपने जीवन में महसूस किए हैं अकस्मात रत्नाकर जीत के करीब 8 साल पहले जब रात्रि काल इस शरीर को छोड़कर हम ब्रह्मांड में विचरण करने वाली आत्मा चली गई थी और विभिन्न प्रकार की तेज गति से विभिन्न तारा लोक में संसार लोक से तू कितनी गति से जब ब्रह्मांड में गए हो वितरण किया और वहां देखा कि अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग बड़े-बड़े गड्ढों में लोग पढ़े हुए बेचैनी तड़पने परेशान हैं वहां जाकर हमें लगा आखिर का नाम या क्यों आ गए ऐसा हमने क्या किया कि मैं आ जाए और तत्पश्चात करीब में समय नहीं बता सकता हूं कि किस समय आत्मा निकल कर अभिमान में चली गई अब कब लौट के आई लेकिन जब आंख खुली तो बिस्तर पर पड़े हुए थे और अचंभित थे क्योंकि अपनी सिस्टर को कि माताजी को अपने पिताजी को ना देखा तो मन बहुत दुखी हुआ बेचैन हुआ जब किस कारागार में आ गए हैं यहां से निकलने का कोई रास्ता नहीं यहां तो तकलीफ में भूख नहीं है ऐसा सोचकर जब हमने डिस्टर्ब थे तो मन सशंकित हो गया और लगा क्या हमारी आत्मा शरीर छोड़कर निकल चुकी थी लेकिन शायद गलती से किसी और को इस संसार को क्या बोला था लेकिन कहीं ऐसी अहसास हुआ तो सभी अपने जीवन में पिकनिक ऐसा जलवा के इंसान की जीवन में सब कुछ होता है

mrityu kaise hoti hai isko kaise mehsus kiya ja sakta hai aur aap koi anumaan laga sakte hain aur mrityu insaan ko sharir choti hai toh marne waale ko ehsaas kara deti hai kya uska antim samay aa gaya hai aur uske karmon ka lekha jokha insaan ko aakhon ke saamne lagaya jata hai kitna plus hai kitna hai uska shesh Dharamraj ke jo accountant hain vaah nikalate usko batatey hain ki aapke khate me itna jama hua hai aur aapke khate me itna jo hai na me hua hai aur itna shesh bacha hai aapki life bitiya ki sex aur is tarah se insaan ki zindagi me baccho se poocha diya jo shaadi ki sthiti me utpann hoti hai parinam yah hota hai ki yah kshan maine apne jeevan me mehsus kiye hain akasmat ratnakar jeet ke kareeb 8 saal pehle jab ratri kaal is sharir ko chhodkar hum brahmaand me vichran karne wali aatma chali gayi thi aur vibhinn prakar ki tez gati se vibhinn tara lok me sansar lok se tu kitni gati se jab brahmaand me gaye ho vitaran kiya aur wahan dekha ki alag alag kshetra me alag alag bade bade gaddho me log padhe hue bechaini tadpane pareshan hain wahan jaakar hamein laga aakhir ka naam ya kyon aa gaye aisa humne kya kiya ki main aa jaaye aur tatpashchat kareeb me samay nahi bata sakta hoon ki kis samay aatma nikal kar abhimaan me chali gayi ab kab lot ke I lekin jab aankh khuli toh bistar par pade hue the aur achambhit the kyonki apni sister ko ki mataji ko apne pitaji ko na dekha toh man bahut dukhi hua bechain hua jab kis karagar me aa gaye hain yahan se nikalne ka koi rasta nahi yahan toh takleef me bhukh nahi hai aisa sochkar jab humne disturb the toh man ho gaya aur laga kya hamari aatma sharir chhodkar nikal chuki thi lekin shayad galti se kisi aur ko is sansar ko kya bola tha lekin kahin aisi ehsaas hua toh sabhi apne jeevan me picnic aisa jalwa ke insaan ki jeevan me sab kuch hota hai

मृत्यु कैसे होती है इसको कैसे महसूस किया जा सकता है और आप कोई अनुमान लगा सकते हैं और मृत्य

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Gopal Srivastava

Acupressure Acupuncture Sujok Therapist

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Anshu Saxena

Business Manager

2:02
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मृत्यु कैसे होती है इसको महसूस करना कैसा लगता होगा इसको महसूस करना कैसा लगता होगा यूएसडी बता सकते हैं जो मरने वाले होते हैं परंतु वह मर जाते हैं बोल नहीं पाते वाकई इस ₹10 का अनुमान और मैंने अभी तक अपनी इस उम्र में जिन लोगों को भी इस तरह से मरते देखा भैया मैं उनके नजदीक रहा मेरा एक्सपीरियंस यह कहता है विराम भव्य कहता है अंत समय में जिस परिवेश में रहता है यार रहता हुआ आ रहा है जिन अपनों के बीच में इतना टाइम उसने निकाला अंत समय ऐसा लगता है उन सब रिश्तो को भूल जाता है नई दुनिया में जाने की तैयारी में लग जाता है उसके कई रिएक्शंस मैंने ऐसे देखें जब उसे हम कुछ कहते हैं तो फीलिंग उसमें नहीं आती है और वह उस बात से चिढ़ सा जाता है और कुछ समय के उपरांत कुचल देता है फिर हमें याद आता है कि हमने उससे यह कहा था तभी उसने तो वो छोड़ दिया है इस तरह की बातें करते हैं बातों से जो हनुमान लगता है उससे यह बात जाहिर हो जाती है कि शायद जब मौत निकट हो तो अपने आप यहां का मोह भंग हो जाता है

mrityu kaise hoti hai isko mehsus karna kaisa lagta hoga isko mehsus karna kaisa lagta hoga USD bata sakte hain jo marne waale hote hain parantu vaah mar jaate hain bol nahi paate vaakai is Rs ka anumaan aur maine abhi tak apni is umar me jin logo ko bhi is tarah se marte dekha bhaiya main unke nazdeek raha mera experience yah kahata hai viraam bhavya kahata hai ant samay me jis parivesh me rehta hai yaar rehta hua aa raha hai jin apnon ke beech me itna time usne nikaala ant samay aisa lagta hai un sab rishto ko bhool jata hai nayi duniya me jaane ki taiyari me lag jata hai uske kai Reactions maine aise dekhen jab use hum kuch kehte hain toh feeling usme nahi aati hai aur vaah us baat se chidh sa jata hai aur kuch samay ke uprant kuchal deta hai phir hamein yaad aata hai ki humne usse yah kaha tha tabhi usne toh vo chhod diya hai is tarah ki batein karte hain baaton se jo hanuman lagta hai usse yah baat jaahir ho jaati hai ki shayad jab maut nikat ho toh apne aap yahan ka moh bhang ho jata hai

मृत्यु कैसे होती है इसको महसूस करना कैसा लगता होगा इसको महसूस करना कैसा लगता होगा यूएसड

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Bk Arun Kaushik

Youth Counselor Motivational Speaker

5:33
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार रियल अनुमान तो मृत्यु का मरने के बाद ही लगाया जा सकता है क्योंकि मृत्यु के बाद कोई मिले नहीं हो पाता किंतु मानव भविष्य के अनुमान लगाने में सभाओं से ही उत्सुक होता है परंतु वास्तव में मृत्यु शब्द को अगर हम समझेंगे इस प्रकार जाना जा सकता है जैसे कार और ड्राइवर का संबंध होता है जैसे ड्रेस पहनने वाली और ड्रेस पहनने वाले का संबंध होता है मोबाइल और मोबाइल पर बात करने वाले का संबंध होता है मकान और मकान में रहने वाला होता है माइक और माइक पर बोलने वाला होता है अर्थात जड़ और चेतना इसी शरीर और आत्मा कहा जाता है भाषा के शब्द अलग अलग हो सकते हैं मृत्यु शब्द को शरीर के साथ जोड़ा जाता है क्योंकि आत्मा शरीर से निकल जाती है तो वह मृत घोषित कर दिया जाता है पैसे कहां से ड्राइवर गाड़ी से बाहर आ जाए तो खान बेकार हो जाती है चलाने वाले के बिना ऐसे ही शरीर भी आत्मा शक्ति ज्योति शरीर का संबंध छोड़ जाती है तो उसे टाइट कह दिया जाता है आत्मा के बारे में कहा जाता है कि वह कभी मरती नहीं जलती नहीं ना ही कभी उसका विनाश होता है ना गलती है इसलिए हमें इस शरीर का आत्मा से समझ उठने का नाम ही मृत्यु है परंतु हमारे मन में मृत्यु का बचपन से ही डर बैठा दिया जाता है उसमें भी सबकी अपनी अपनी स्थिति होती है कुछ लोग विशेषकर सेना के जवान योद्धा और कितने ही नकारात्मक प्रकार के लोग जानते हुए भी मृत्यु से डरते नहीं तब क्यों को मालूम होता है उनके कार्य का अंत मृत्यु हुआ उनके लिए तो खेल बन जाता है एक उदाहरण के साथ आप मृत्यू को महसूस कर सकते हैं आपकी अपनी अवस्था या दृष्टिकोण के अनुसार हो सकती है मान लीजिए आप ट्रेन में मुंबई की टिकट बुक कराई है और आप घर से सफर के लिए निकले हैं यात्रा के दौरान आपका परिवार और अन्य लोग भी आपके साथ सफर में रास्ते में जिसकी जहां की सीट रिजर्वेशन होती है मगर उतर जाता है कि वहां की ही रिजर्वेशन करा कर निकलता था जहां उनका स्टेशन आएगा वहीं उतर जाएगा क्योंकि उनकी सीटें थी आपको कैसा लगेगा यात्रा पूरी होने पर कैसी फीलिंग आती है यात्रा बहुत अच्छी बीती होगी तो आपको बहुत अच्छा लगेगा एक संतुष्टि होगी कि चलो अपना स्टेशन आ गया यात्रा बहुत अच्छी रही परंतु यदि यात्रा अच्छी ना रही हो व्यक्ति को तब भी खुशी होनी चाहिए कि यात्रा ठीक नहीं रही फिर भी अंतिम सेशन तो आईडिया यात्रा पूरी हो रही है इस प्रकार ही हमें मृत्यु का भी अनुभव ऐसी ही में सोचता होनी चाहिए परंतु हम इस यात्रा में इतने मस्त हो जाते हैं अपनी स्टेशन पर उतरना ही नहीं चाहते यात्रा को तो नियम है उसको अपने अंतिम स्टेशन पर उतरना ही पड़ेगा हम सब मानते हैं जन्म लेता इंसान उसकी यात्रा शुरू हो जाती है उस यात्रा उसको अंतिम स्टेशन का मालूम नहीं होता क्योंकि मैं इसी आशा में जीता रहता है कि मेरा स्टेशन तो अभी आ नहीं रहा अरे मैं दिन भर तो नहीं जाऊंगा यह मैं उसको अंतिम क्षण तक आता रहता है दिमाग होता है या एक्सीडेंट होता है ऐसी कोई घटना होती है जो उस उत्पन्न होती है मिलिंग वह मृत्यु का 50% फीलिंग होता है जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए जो जाकर शुरू हुई है तो समाप्त होगी इस छोटी सी यात्रा हो सकती है बीवी यात्रा हो सकती है इस प्रकार आत्मा की नहीं होती आत्मा तो अजर अमर अविनाशी है केवल शरीर बदलता है पांच तत्वों का पुतला पांच तत्वों में मिल जाता है जिसको मृत्यु समझते हैं इस बात को समझेंगे तो मृत्यु जीवन यात्रा के अंतिम पड़ाव लगेगी दुख नहीं होगा कभी आंखें बंद करके इस यात्रा के बारे में चिंतन कीजिए तो आपको एक अलग से मैं सोचता है कि वही हमारी मृत्यु की सबसे नजदीकी अनुभव हो सकता है कभी श्मशान घाट में जाकर कुछ समय जलते हुए शरीर को देखें तो उस समय की फीलिंग वास्तव में मृत्यु के होने से पहले की फीलिंग हमें मृत्यु जैसी लगभग अनुपात सकती है और मैं आशा करता हूं कि आप अपने जीवन की यात्रा को और अच्छे ढंग से जीने का इंजॉय करने का प्लान बनाएंगे क्योंकि मृत्यु तो हर इंसान की आवश्यकता है अपनी इस जीवन की यात्रा को खुशनुमा आनंदमई बनाने की ओर योर फीलिंग हमें मृत्यु कैसे दूर सेक्सी शुभकामनाओं के साथ सबके जीवन की यात्रा सुखद हो सुखमय हो धन्यवाद

namaskar real anumaan toh mrityu ka marne ke baad hi lagaya ja sakta hai kyonki mrityu ke baad koi mile nahi ho pata kintu manav bhavishya ke anumaan lagane me sabhaon se hi utsuk hota hai parantu vaastav me mrityu shabd ko agar hum samjhenge is prakar jana ja sakta hai jaise car aur driver ka sambandh hota hai jaise dress pahanne wali aur dress pahanne waale ka sambandh hota hai mobile aur mobile par baat karne waale ka sambandh hota hai makan aur makan me rehne vala hota hai mike aur mike par bolne vala hota hai arthat jad aur chetna isi sharir aur aatma kaha jata hai bhasha ke shabd alag alag ho sakte hain mrityu shabd ko sharir ke saath joda jata hai kyonki aatma sharir se nikal jaati hai toh vaah mrit ghoshit kar diya jata hai paise kaha se driver gaadi se bahar aa jaaye toh khan bekar ho jaati hai chalane waale ke bina aise hi sharir bhi aatma shakti jyoti sharir ka sambandh chhod jaati hai toh use tight keh diya jata hai aatma ke bare me kaha jata hai ki vaah kabhi marti nahi jalti nahi na hi kabhi uska vinash hota hai na galti hai isliye hamein is sharir ka aatma se samajh uthane ka naam hi mrityu hai parantu hamare man me mrityu ka bachpan se hi dar baitha diya jata hai usme bhi sabki apni apni sthiti hoti hai kuch log visheshkar sena ke jawaan yodha aur kitne hi nakaratmak prakar ke log jante hue bhi mrityu se darte nahi tab kyon ko maloom hota hai unke karya ka ant mrityu hua unke liye toh khel ban jata hai ek udaharan ke saath aap mrityoo ko mehsus kar sakte hain aapki apni avastha ya drishtikon ke anusaar ho sakti hai maan lijiye aap train me mumbai ki ticket book karai hai aur aap ghar se safar ke liye nikle hain yatra ke dauran aapka parivar aur anya log bhi aapke saath safar me raste me jiski jaha ki seat reservation hoti hai magar utar jata hai ki wahan ki hi reservation kara kar nikalta tha jaha unka station aayega wahi utar jaega kyonki unki seaten thi aapko kaisa lagega yatra puri hone par kaisi feeling aati hai yatra bahut achi biti hogi toh aapko bahut accha lagega ek santushti hogi ki chalo apna station aa gaya yatra bahut achi rahi parantu yadi yatra achi na rahi ho vyakti ko tab bhi khushi honi chahiye ki yatra theek nahi rahi phir bhi antim session toh idea yatra puri ho rahi hai is prakar hi hamein mrityu ka bhi anubhav aisi hi me sochta honi chahiye parantu hum is yatra me itne mast ho jaate hain apni station par utarna hi nahi chahte yatra ko toh niyam hai usko apne antim station par utarna hi padega hum sab maante hain janam leta insaan uski yatra shuru ho jaati hai us yatra usko antim station ka maloom nahi hota kyonki main isi asha me jita rehta hai ki mera station toh abhi aa nahi raha are main din bhar toh nahi jaunga yah main usko antim kshan tak aata rehta hai dimag hota hai ya accident hota hai aisi koi ghatna hoti hai jo us utpann hoti hai milling vaah mrityu ka 50 feeling hota hai jabki aisa nahi hona chahiye jo jaakar shuru hui hai toh samapt hogi is choti si yatra ho sakti hai biwi yatra ho sakti hai is prakar aatma ki nahi hoti aatma toh ajar amar avinashi hai keval sharir badalta hai paanch tatvon ka putalaa paanch tatvon me mil jata hai jisko mrityu samajhte hain is baat ko samjhenge toh mrityu jeevan yatra ke antim padav lagegi dukh nahi hoga kabhi aankhen band karke is yatra ke bare me chintan kijiye toh aapko ek alag se main sochta hai ki wahi hamari mrityu ki sabse najdiki anubhav ho sakta hai kabhi shmashan ghat me jaakar kuch samay jalte hue sharir ko dekhen toh us samay ki feeling vaastav me mrityu ke hone se pehle ki feeling hamein mrityu jaisi lagbhag anupat sakti hai aur main asha karta hoon ki aap apne jeevan ki yatra ko aur acche dhang se jeene ka enjoy karne ka plan banayenge kyonki mrityu toh har insaan ki avashyakta hai apni is jeevan ki yatra ko khushnuma anandamai banane ki aur your feeling hamein mrityu kaise dur sexy shubhkamnaon ke saath sabke jeevan ki yatra sukhad ho sukhmay ho dhanyavad

नमस्कार रियल अनुमान तो मृत्यु का मरने के बाद ही लगाया जा सकता है क्योंकि मृत्यु के बाद कोई

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Dr.Sachin Pathak

Dietician And Reiki GrandMaster

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ऐसा कई लोगों से सुना है कि जब मृत्यु कपल नजदीक आता है तो आपके कानों में एक अजीब सी आवाज गूंजने लगती है और जब आप मृत्यु के बहुत करीब होते हैं तब आपको सिर्फ और सिर्फ एक प्रकाश बहुत ही तेज प्रकाश दिखाई देता है और कोई ना कोई आपके सामने खड़ा होता है जो इंतजार कर रहा होता है आपके आने का और यह महसूस करना बहुत मुश्किल है यह हमने तो मैसेज नहीं किया है लेकिन जिन्होंने महसूस किया है यह उनके वाक्य है कि उन्होंने कुछ इस तरह का महसूस किया था बहुत दर्दनाक होती है क्योंकि जब शरीर से प्राण शक्ति बाहर आती है तो वह इतनी आसानी से बाहर नहीं निकलती है लेकिन फिर भी कई लोग ऐसे होते हैं जो बड़े आराम से आसानी से अपनी शैली का देह त्याग देते हैं अपने प्राण शक्ति को शुरू से बाहर निकाल देते हैं ऐसे बहुत ही कम लोग होते हैं लेकिन यदि हम आम व्यक्ति में गिने जाते हैं तो हम प्राण त्यागने से पहले हमें बहुत पीड़ा होती है इनकी यह प्राणशक्ति हमारे सभी को त्यागना नहीं चाहती लेकिन जब समय आ जाता है अंतिम समय आता है तब इसे इस शरीर को त्याग नहीं पड़ता है ठीक उसी प्रकार जब आपका प्रिय व्यक्ति जब आप से कहीं दूर जाता है तो आपको बहुत दुख होता है ठीक उसी प्रकार आप की प्राणशक्ति और शरीर में बहुत गहरा और अटूट संबंध होता है जो कई सालों से एक ही जगह पर एक ही वातावरण में रहते हैं उनके साथ बहुत बुरी तरह से भावना इतनी बुरी तरह से जुड़ी होती है कि वह इस शरीर को त्यागना नहीं चाहती लेकिन जब मैं आता है तो शरीर से प्राण शक्ति को क्या करना अनिवार्य हो जाता है आशा करता हूं आपको मेरा जवाब पसंद आया उनका में देखी ग्रैंड मास्टर सचिन पाठक थैंक यू वेरी मच

aisa kai logo se suna hai ki jab mrityu couple nazdeek aata hai toh aapke kanon me ek ajib si awaaz gunjane lagti hai aur jab aap mrityu ke bahut kareeb hote hain tab aapko sirf aur sirf ek prakash bahut hi tez prakash dikhai deta hai aur koi na koi aapke saamne khada hota hai jo intejar kar raha hota hai aapke aane ka aur yah mehsus karna bahut mushkil hai yah humne toh massage nahi kiya hai lekin jinhone mehsus kiya hai yah unke vakya hai ki unhone kuch is tarah ka mehsus kiya tha bahut dardanak hoti hai kyonki jab sharir se praan shakti bahar aati hai toh vaah itni aasani se bahar nahi nikalti hai lekin phir bhi kai log aise hote hain jo bade aaram se aasani se apni shaili ka deh tyag dete hain apne praan shakti ko shuru se bahar nikaal dete hain aise bahut hi kam log hote hain lekin yadi hum aam vyakti me gine jaate hain toh hum praan tyaagane se pehle hamein bahut peeda hoti hai inki yah pranshakti hamare sabhi ko tyagna nahi chahti lekin jab samay aa jata hai antim samay aata hai tab ise is sharir ko tyag nahi padta hai theek usi prakar jab aapka priya vyakti jab aap se kahin dur jata hai toh aapko bahut dukh hota hai theek usi prakar aap ki pranshakti aur sharir me bahut gehra aur atut sambandh hota hai jo kai salon se ek hi jagah par ek hi vatavaran me rehte hain unke saath bahut buri tarah se bhavna itni buri tarah se judi hoti hai ki vaah is sharir ko tyagna nahi chahti lekin jab main aata hai toh sharir se praan shakti ko kya karna anivarya ho jata hai asha karta hoon aapko mera jawab pasand aaya unka me dekhi grand master sachin pathak thank you very match

ऐसा कई लोगों से सुना है कि जब मृत्यु कपल नजदीक आता है तो आपके कानों में एक अजीब सी आवाज गू

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Phool Kanwar

Business Owner

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सोनालिका गेम मृत्यु कैसी होती है इसे महसूस करना कैसे लगता होगा आपको यह अनुमान लगा सकते हैं लेकर मृत्यु कैसी होती है तो हम भी आप नहीं बता सकते और रही बात महसूस कैसा होगा यह भी नहीं पता और नया अनुमान लगा सकते क्योंकि मैं डियर जिंदा हूं मैंने आज तक अपनी लाइफ में किसी को मरते हुए नहीं देखा तो मैं आपको नहीं बता सकता यह कैसी होती आप कैसा महसूस होता है सो सॉरी थैंक यू

sonalika game mrityu kaisi hoti hai ise mehsus karna kaise lagta hoga aapko yah anumaan laga sakte hain lekar mrityu kaisi hoti hai toh hum bhi aap nahi bata sakte aur rahi baat mehsus kaisa hoga yah bhi nahi pata aur naya anumaan laga sakte kyonki main dear zinda hoon maine aaj tak apni life me kisi ko marte hue nahi dekha toh main aapko nahi bata sakta yah kaisi hoti aap kaisa mehsus hota hai so sorry thank you

सोनालिका गेम मृत्यु कैसी होती है इसे महसूस करना कैसे लगता होगा आपको यह अनुमान लगा सकते हैं

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

1:15
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आपका प्रश्न मृत्यु कैसी होती है इसे महसूस करना कैसे लगता होगा आप कोई अनुमान लगा सकते हैं कि अनुमान लगा सकते जब पैदा हुए जन्म लिया तब को पता था कैसे जन्म लिया बस सेम टू सेम वैसे ही जवाब की मृत्यु हो गई आपको भी पता नहीं चलेगा कि आप की मृत्यु हुई है ऑटोमेटिक मृत्यु नदीकाठी अनकंसर्न स्मार्ट हो ही जाता है पता ही नहीं चलता कि मृत्यु कब हुई है उसमें पेन होता होगा उनको तो पता भी नहीं चलेगा हो सकता है जन्म कहां में कुछ पता नहीं है तुम रितिका भी हमें कुछ पता नहीं चलेगा मैसेज करो कोई फर्क नहीं पड़ता जन्म के समय कुछ महसूस नहीं हुआ वह समय कैसे मैसेज भेजो मैं कभी आपको याद नहीं होगा खूबसूरत भी अच्छी है कोई बात नहीं अच्छा होता तो मृत्यु अच्छी नहीं होती आपका दिन शुभ हो धन्यवाद

aapka prashna mrityu kaisi hoti hai ise mehsus karna kaise lagta hoga aap koi anumaan laga sakte hain ki anumaan laga sakte jab paida hue janam liya tab ko pata tha kaise janam liya bus same to same waise hi jawab ki mrityu ho gayi aapko bhi pata nahi chalega ki aap ki mrityu hui hai Automatic mrityu nadikathi anakansarn smart ho hi jata hai pata hi nahi chalta ki mrityu kab hui hai usme pen hota hoga unko toh pata bhi nahi chalega ho sakta hai janam kahaan mein kuch pata nahi hai tum ritika bhi hamein kuch pata nahi chalega massage karo koi fark nahi padta janam ke samay kuch mehsus nahi hua vaah samay kaise massage bhejo main kabhi aapko yaad nahi hoga khoobsurat bhi achi hai koi baat nahi accha hota toh mrityu achi nahi hoti aapka din shubha ho dhanyavad

आपका प्रश्न मृत्यु कैसी होती है इसे महसूस करना कैसे लगता होगा आप कोई अनुमान लगा सकते हैं क

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मृत्यु हम सभी के जीवन का एक अटल सत्य है और इसको महसूस करना इस क्या इसके बारे में सोचने से भी हमें डर लगता है वह का एहसास होता है और जो लोग मृत्यु को महसूस करते हैं उनके लिए बहुत ही दर्दनाक है यह दर्दनाक सिर्फ शारीरिक कष्ट की वजह से नहीं है दर्द ना इसलिए भी है क्योंकि मृत्यु का विचार भी हमें इस भय से घेर लेता है कि हमें अपने परिवार को अपनों को अपनी चीजों को जो हमारी प्रोजेक्शंस है मेरा घर मेरा परिवार मेरे दुकान मेरे पैसे मेरा बेटा मेरी बीवी मेरे माता-पिता मेरी संतान इन सब को छोड़ कर जाना होगा ऐसी जगह जिसके बारे में हमें कोई ज्ञान नहीं है हमने बहुत सारे विचार सुने हैं मृत्यु लोग के बारे में ऐसा होता है ऐसा होता है कोई कुछ कहता है कोई कुछ कहता हर धर्म की हर सभी लोगों की अपनी अपनी अलग व्याख्या है इसके लिए मगर हम एक सच में नहीं जानते कि मृत्यु के बाद क्या होता है तो उस क्योंकि वही शून्य है वही क्वेश्चन मार्क है इसलिए हम डरते हैं तुम मेरे अपने बड़ों से जो सुना है और जो मुझे समझ में आया है तो मृत्यु का एहसास ही हमें डर से गिरने वाला है थैंक यू

mrityu hum sabhi ke jeevan ka ek atal satya hai aur isko mehsus karna is kya iske bare mein sochne se bhi hamein dar lagta hai vaah ka ehsaas hota hai aur jo log mrityu ko mehsus karte hain unke liye bahut hi dardanak hai yah dardanak sirf sharirik kasht ki wajah se nahi hai dard na isliye bhi hai kyonki mrityu ka vichar bhi hamein is bhay se gher leta hai ki hamein apne parivar ko apnon ko apni chijon ko jo hamari projections hai mera ghar mera parivar mere dukaan mere paise mera beta meri biwi mere mata pita meri santan in sab ko chod kar jana hoga aisi jagah jiske bare mein hamein koi gyaan nahi hai humne bahut saare vichar sune hain mrityu log ke bare mein aisa hota hai aisa hota hai koi kuch kahata hai koi kuch kahata har dharm ki har sabhi logo ki apni apni alag vyakhya hai iske liye magar hum ek sach mein nahi jante ki mrityu ke baad kya hota hai toh us kyonki wahi shunya hai wahi question mark hai isliye hum darte hain tum mere apne badon se jo suna hai aur jo mujhe samajh mein aaya hai toh mrityu ka ehsaas hi hamein dar se girne vala hai thank you

मृत्यु हम सभी के जीवन का एक अटल सत्य है और इसको महसूस करना इस क्या इसके बारे में सोचने से

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Bhavin J. Shah

Life Coach

1:06
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मैं मरा नहीं हूं इसलिए मैं क्या कह सकता हूं कि मृत्यु कैसी होगी लेकिन मैं एक चीज जरूर कह सकता हूं कि आपने पूरा जीवन जैसा काम किया होगा वैसा आप का मृत्यु होगा अगर अपने भलाई के काम की है तुम्हें तो सुनाई कि आपकी आपकी स्थिति अच्छी होगी और अपने बुरे काम की होगे तुम होते समय पर आप की स्थिति पूरी होगी अगर हमको हमारा भविष्य सुधारना है ऐसा महसूस करते हुए जाना है जैसे कई लोगों को हम देखते हैं कि बैठे बैठे है सोते-सोते या मोमेंट्स में एक्सपायर हो जाते हैं ऐसी अगर मुझसे चाहिए विदाउट रोग की विदाउट एनी अपसेट आने पर रसिया बनिया पिंकी तो हमको यह जीवन हमें अभी से लेकर मृत्यु आए तब तक अच्छे भाव में रहना है अच्छे काम करने थैंक यू

main mara nahi hoon isliye main kya keh sakta hoon ki mrityu kaisi hogi lekin main ek cheez zaroor keh sakta hoon ki aapne pura jeevan jaisa kaam kiya hoga waisa aap ka mrityu hoga agar apne bhalai ke kaam ki hai tumhe toh sunayi ki aapki aapki sthiti achi hogi aur apne bure kaam ki hoge tum hote samay par aap ki sthiti puri hogi agar hamko hamara bhavishya sudharna hai aisa mehsus karte hue jana hai jaise kai logo ko hum dekhte hain ki baithe baithe hai sote sote ya moments mein expire ho jaate hain aisi agar mujhse chahiye without rog ki without any upset aane par rasiya baniya pinki toh hamko yah jeevan hamein abhi se lekar mrityu aaye tab tak acche bhav mein rehna hai acche kaam karne thank you

मैं मरा नहीं हूं इसलिए मैं क्या कह सकता हूं कि मृत्यु कैसी होगी लेकिन मैं एक चीज जरूर कह

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महेश सेठ

रेकी ग्रैंडमास्टर,लाइफ कोच

1:56
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हां जी इस संसार में जो प्रारंभ होती है उसका अंत अली होता है कोई सी भी वस्तु में पीड़ित उगता है बीज पड़ता है उसे पेड़ निकलता है फिर उसे फल निकलते हैं फिर कुछ समय बाद उसकी मृत्यु हो जाती हैं एक बच्चा पैदा होता है बड़ा होता है फिर उसकी मृत्यु हो जाती है आप एक मकान बनाते हो कुछ समझ में रहते हो कुछ सालों बाद वह मकान खत्म हो जाता है सुबह आप उठते हो शाम को सो जाते हो उस दिन की मृत्यु हो जाती है फिर एक सांस आती है वह अंदर जाकर खत्म हो जाती है मृत्यु हो जाती है उसकी बाहर निकल जाती है उस सांस की मृत्यु हो जाती है आपको भूख लगती है आप खाना खा लेते हो वह की मृत्यु हो जाती है इस तरह से आप मृत्यू को समझें हर पल में कुछ ना कुछ मर रहा है और कुछ ना कुछ उत्पन्न ना हो रहा है हर पल में केवल आप अपनी मृत्यु के बारे में क्यों सोचना चाहते हैं आप देखे ना हर समय हल सेकंड कुछ ना कुछ खत्म हो रहा है और नया बन रहा है यह जीवन यही है खत्म होना और बन्ना आना और जाना तुम भी ठीक हो आनंद से लें हर पल में आनंद से रहे मिट्टी के शक्ति को समझें और इंजॉय करें लाइफ को धन्यवाद

haan ji is sansar mein jo prarambh hoti hai uska ant ali hota hai koi si bhi vastu mein peedit ugata hai beej padta hai use pedh nikalta hai phir use fal nikalte hain phir kuch samay baad uski mrityu ho jati hain ek baccha paida hota hai bada hota hai phir uski mrityu ho jati hai aap ek makan banate ho kuch samajh mein rehte ho kuch salon baad wah makan khatam ho jata hai subah aap uthte ho shaam ko so jaate ho us din ki mrityu ho jati hai phir ek saans aati hai wah andar jaakar khatam ho jati hai mrityu ho jati hai uski bahar nikal jati hai us saans ki mrityu ho jati hai aapko bhukh lagti hai aap khana kha lete ho wah ki mrityu ho jati hai is tarah se aap mrityoo ko samajhe har pal mein kuch na kuch mar raha hai aur kuch na kuch utpann na ho raha hai har pal mein keval aap apni mrityu ke bare mein kyon sochna chahte hain aap dekhe na har samay hal second kuch na kuch khatam ho raha hai aur naya ban raha hai yeh jeevan yahi hai khatam hona aur banna aana aur jana tum bhi theek ho anand se le har pal mein anand se rahe mitti ke shakti ko samajhe aur enjoy karein life ko dhanyavad

हां जी इस संसार में जो प्रारंभ होती है उसका अंत अली होता है कोई सी भी वस्तु में पीड़ित उ

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Yogi Prashant Nath

Business Consultant / M D

2:32
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नमस्कार मेरा नाम है योगी प्रशांत और मैं आप सभी का बहुत-बहुत स्वागत करता आपके अपने वो काले पर आज का प्रश्न है मृत्यु कैसी होती है और इसे इसे महसूस करना कैसा लगता होगा आप कोई अनुमान लगा सकते हैं तो मेरे दोस्त पहले तो मैं आपको यह कहना चाहूंगा कि मृत्यु मृत्यु एक ऐसा सा प्राकृतिक नियम है जिससे कोई भी अशोक नहीं है मतलब कोई ना कोई भी नहीं बचा है कि और हर किसी के साथ यह जो प्राकृतिक है यह हार की फिक्र लागू होती है अब आपने पूछा है कि इसे महसूस करना आंख ऐसा लगता है आप कोई अनुमान लगा सकते तो मैं बताऊं मेरे अनुसार तो दो तरह के इसके एक्सपीरियंस होते हैं एक ऐसा एक्सपीरियंस होगा जिससे कि आपको कुछ नहीं पता चलेगा कि जैसे किसी का बटन बना बंद करते हैं और पेनिक्विक देनी हो जाता है लेकिन आपने उस पर एक और चीज देखो कभी कबार आपके सॉकेट में स्पार्क होता है तो सुबह बल्ब का क्या रेट होता है रिएक्शन होता है वह ब्लिंक करता करता है तो ऐसे ही अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हो क्या आप की मृत्यु हुई है या किसी तो जैसा मैंने कहा कि मृत्यु का सिस्टम मृत्यु तो सभी एक जैसे होते लेकिन मेरी राह पर जाने का मृत्यु के स्थल पर पहुंचने का जरिया होता है वह वह उसका अनुभव करा था वह उसकी अनुभूति होती वह उसका एहसास होता है उसे महसूस किया जाता ना की मिट्टी को मिट्टी को कोई महसूस नहीं कर सकता और क्योंकि जब दर्द हो जाने के बाद कहते हैं कुछ तनी स्पर्श ना किसी चीज की चिंता नहीं रहती तो मृत्यु का कोई कोई मैसेज नहीं कर सकता लेकिन हां उसके जरिया मिर्ची तक पहुंचने का जरिया होता है जिससे बीमारी के तरु या किसी को किसी एक्सीडेंटल के थ्रू हो पीड़ा जो होती है पीड़ा का स्तर होता है पीड़ा को महसूस किया जाता है ना कि मृत्यु को तो आई हो मेरी यह सवाल जवाब से आप संतुष्ट हो गए और धन्यवाद वह कल आईएस पोस्ट को सुनने के लिए

namaskar mera naam hai yogi prashant aur main aap sabhi ka bahut bahut swaagat karta aapke apne vo kaale par aaj ka prashna hai mrityu kaisi hoti hai aur ise ise mehsus karna kaisa lagta hoga aap koi anumaan laga sakte hain toh mere dost pehle toh main aapko yah kehna chahunga ki mrityu mrityu ek aisa sa prakirtik niyam hai jisse koi bhi ashok nahi hai matlab koi na koi bhi nahi bacha hai ki aur har kisi ke saath yah jo prakirtik hai yah haar ki fikra laagu hoti hai ab aapne poocha hai ki ise mehsus karna aankh aisa lagta hai aap koi anumaan laga sakte toh main bataun mere anusaar toh do tarah ke iske experience hote hain ek aisa experience hoga jisse ki aapko kuch nahi pata chalega ki jaise kisi ka button bana band karte hain aur penikwik deni ho jata hai lekin aapne us par ek aur cheez dekho kabhi kabar aapke socket mein spark hota hai toh subah bulb ka kya rate hota hai reaction hota hai vaah blink karta karta hai toh aise hi agar aap kisi bimari se grasit ho kya aap ki mrityu hui hai ya kisi toh jaisa maine kaha ki mrityu ka system mrityu toh sabhi ek jaise hote lekin meri raah par jaane ka mrityu ke sthal par pahuchne ka zariya hota hai vaah vaah uska anubhav kara tha vaah uski anubhuti hoti vaah uska ehsaas hota hai use mehsus kiya jata na ki mitti ko mitti ko koi mehsus nahi kar sakta aur kyonki jab dard ho jaane ke baad kehte hain kuch tani sparsh na kisi cheez ki chinta nahi rehti toh mrityu ka koi koi massage nahi kar sakta lekin haan uske zariya mirchi tak pahuchne ka zariya hota hai jisse bimari ke taru ya kisi ko kisi accidental ke through ho peeda jo hoti hai peeda ka sthar hota hai peeda ko mehsus kiya jata hai na ki mrityu ko toh I ho meri yah sawaal jawab se aap santusht ho gaye aur dhanyavad vaah kal ias post ko sunne ke liye

नमस्कार मेरा नाम है योगी प्रशांत और मैं आप सभी का बहुत-बहुत स्वागत करता आपके अपने वो काले

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Kavita Panyam

Certified Award Winning Counseling Psychologist

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साइंटिफिकली सांसो का बंद हो जाना उसका मृत्यु कहते हैं जिसमें सिर्फ शरीर नष्ट होता है हमारा हमारे जो सोच होती है हम जैसे होते हैं वह आत्मा में बिग सो जाती है और वह आत्मा कैसी रहती है जो बुरी आत्माएं होती है जो नेगेटिव लोग होते हैं वह वैसे ही होते हैं वहां पर जाकर उनका पीर फिकेशन होता है 1 चेंबर होता है जहां पर सारी आत्माएं रेस्ट करती हैं उन्हें दिखाया जाता है कि नहीं जिंदगी कैसी होती है और उसके बाद वह चॉइस लेते हैं जिनकी कजिन का जो करना है पूरा नहीं हुआ होता है वह फिर से ब्रेट ली जन्म लेते हैं और जिनका करना काफी हद तक कम हो चुका होता है वह अभी भी आ सकते हैं दोबारा जन्म ले सकते हैं थोड़े टाइम के बाद जन्म ले सकते हैं उनके 24 होती है और डिफेंडिंग ऑन कितनी करना है वहां पर उनको रेस मिलता है साथ में सोते हैं जहां पर पेंटिंग ऑन अपने कितने अच्छे कर्म किए हैं वहां पर सारी आत्माएं रहती हैं जो पहला रेल में है वहां पर उन्होंने काफी गंदे काम किए हुए थे वह रहते हैं वैसे सनफ्लेम रहते हैं और जो सबसे हाईएस्ट रेन होता है वहां पर हमारा है या फूल रहता है जो कि हमें गाइड करता रहता है हम जैसे यहां पर जीवन में है तो हमारा एक ही असूल भी होता है जो ऊपर होता है जो हमें मेरी टेस्ट हम से कनेक्ट करता है और वही हमें रास्ता दिखाता है जब हम किसी परेशानी में होते हम जानते हमें क्या करना चाहिए तेरा तो सांसो का बंद हो जाना उसे मृत्यु कहते हैं लेकिन बाकी सब वैसे ही रहता सोच वैसे ही रहती है इसलिए आत्मा को आत्माओं को शुद्ध करके उसी के बाद उनको ऊपर भेजा जाता है लेकिन कुछ आत्माएं होती है जो पर नहीं जाना चाहती जिन्हें हम स्टेट बैंक कहते हैं और हमारे लोग भूत किसे कहते हैं वेस्ट इन बैंक्स होते हैं जो जाना नहीं चाहते हो पर और जो बीच के दुनिया में अटक जाते हैं जिनकी आत्मा की शुद्धि नहीं हुई होती है तो इसलिए काफी बड़ा टॉपिक है जो और 2 मिनट में नहीं कहा जा सकता

scientifically saanso ka band ho jana uska mrityu kehte hain jisme sirf sharir nasht hota hai hamara hamare jo soch hoti hai hum jaise hote hain vaah aatma mein big so jaati hai aur vaah aatma kaisi rehti hai jo buri aatmaen hoti hai jo Negative log hote hain vaah waise hi hote hain wahan par jaakar unka pir fikeshan hota hai 1 chamber hota hai jaha par saree aatmaen rest karti hain unhe dikhaya jata hai ki nahi zindagi kaisi hoti hai aur uske baad vaah choice lete hain jinki cousin ka jo karna hai pura nahi hua hota hai vaah phir se brett li janam lete hain aur jinka karna kaafi had tak kam ho chuka hota hai vaah abhi bhi aa sakte hain dobara janam le sakte hain thode time ke baad janam le sakte hain unke 24 hoti hai aur defending on kitni karna hai wahan par unko race milta hai saath mein sote hain jaha par painting on apne kitne acche karm kiye hain wahan par saree aatmaen rehti hain jo pehla rail mein hai wahan par unhone kaafi gande kaam kiye hue the vaah rehte hain waise sunflame rehte hain aur jo sabse highest rain hota hai wahan par hamara hai ya fool rehta hai jo ki hamein guide karta rehta hai hum jaise yahan par jeevan mein hai toh hamara ek hi asul bhi hota hai jo upar hota hai jo hamein meri test hum se connect karta hai aur wahi hamein rasta dikhaata hai jab hum kisi pareshani mein hote hum jante hamein kya karna chahiye tera toh saanso ka band ho jana use mrityu kehte hain lekin baki sab waise hi rehta soch waise hi rehti hai isliye aatma ko atmaon ko shudh karke usi ke baad unko upar bheja jata hai lekin kuch aatmaen hoti hai jo par nahi jana chahti jinhen hum state bank kehte hain aur hamare log bhoot kise kehte hain west in banks hote hain jo jana nahi chahte ho par aur jo beech ke duniya mein atak jaate hain jinki aatma ki shudhi nahi hui hoti hai toh isliye kaafi bada topic hai jo aur 2 minute mein nahi kaha ja sakta

साइंटिफिकली सांसो का बंद हो जाना उसका मृत्यु कहते हैं जिसमें सिर्फ शरीर नष्ट होता है हमारा

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Pankaj Kr(youtube -AJ PANKAJ MATHS GURU)

Motivational Speaker/YouTube-AJ PANKAJ MATHS GURU

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हर इंसान की मृत्यु होती है जिस चीज का निर्माण हुआ है उसका विनाश हो गए जिसका जन्म हुआ है उसका मरण हो गए इसकी होगी इसलिए मृत्यु के बारे में आप चिंता नहीं करें आपका जो लक्ष्य आपका जो कर्तव्य उस कार्य को करें मृत्यु से डरना नहीं चाहिए आपको कैसा करना चाहिए

har insaan ki mrityu hoti hai jis cheez ka nirmaan hua hai uska vinash ho gaye jiska janam hua hai uska maran ho gaye iski hogi isliye mrityu ke bare mein aap chinta nahi kare aapka jo lakshya aapka jo kartavya us karya ko kare mrityu se darna nahi chahiye aapko kaisa karna chahiye

हर इंसान की मृत्यु होती है जिस चीज का निर्माण हुआ है उसका विनाश हो गए जिसका जन्म हुआ है उस

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J.P. Y👌g i

Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

प्रश्न मृत्यु कैसे होती है इसे महसूस करना कैसे लगता होगा आपको यह अनुमान लगा सकते हैं यह बहुत ही वास्तविकता प्रशन है इस सृष्टि में कोई ऐसा प्राणी नहीं है जो इसकी चपेट में एक ना एक दिन ना आए और यही एक ग्रह का सबसे बड़ा कारण बनता है इस समय प्राणी जगत में लेकिन इन सब चीजों से भी ऊपर जो दायित्व और कर्तव्य बनते हैं वह सर्वश्रेष्ठ और स्वरूप रखा जाता है और इस पर जीवन को 94 होने की आदत संयुक्त प्रदर्शन में की जाती है सबमिट पूर्व भाजपा में कई ऐसे होते हैं मृत्यु के आभास करने के दो तरीके हैं एक तो अकस्मात घटना होती है जिसमें शाम को ही नहीं पता होता है कि यह सीधा साल से परे हो जाएंगे अनुष्का बोध नहीं हो पाता है कुछ लोग ऐसे होते हैं जो मृत्यु के बिल्कुल सुनीता से जीवन पुनः प्राप्त करते हैं और और भी ऐसी बीमारियां हैं कई तरह की घटनाएं दुर्घटनाओं के अंदर ऐसी दर्दनाक दशा को देखकर के उत्पीड़न का एक अनुमान लगाया जा सकता है इसके बाद जीवन एक समाप्त हो जाता है तो दर्शन में आया है कि अगर एहसास करते हैं तो कैसा लगता होगा तो इस पत्र के आधार पर एक अपनी अपनी सोच हो सकती है क्योंकि कोई ना कोई अनुभूति के स्तर पर सुविधाओं की फीलिंग कर लेते हैं कि शायद ऐसी ही उत्पीड़न और पीड़ा की वेदना होती तो यह मानसिकता है वह संवेदना ऊपर आधारित है अगर अति सूक्ष्म संवेदनशील अगर संवेदना है तो पूर्वानुमान का भास्कर सकता है क्योंकि छोटी सी एक परी मापन को अगर निर्विकार में उसको सहयोग करा जाए तो अनुमान देता है यह लगता है कि इसकी जॉब उत्पीड़न का झूले वाले को कितना चरम सीमा तक होगा दरअसल इसमें दर्द एक बहुत दुखदाई होता है और इसमें जो प्रयासरत होता है वह भी बहुत संघर्ष में होता है अगर सर यह है कि कुछ लोगों को पता चल जाता है कि अंतिम आसान बन रहा है कईयों को नहीं पता चल पाता है लेकिन जिनको पता चलता है और यह पूर्वाभास भी होता है कुछ प्रक्रियाओं के प्रति मानसिकता भी इस ओर शास्त्री के अनुभूति को देने लगती है कि वास्तव में इसका प्राण का समय हो रहा था पुराना शरीर से विच्छेद होगा तो मुर्दाबाद यारी है तो कि कैसा लगता होगा आपको उधर से जो इन घटनाओं में अगर कोई रखा में रहा है तो वह इस ग्रुप में सूचित को ला सकता है उधर चला अध्यात्म में तो सही इसको जानने की परख करने के लिए एक ध्यान मुद्रा में शवासन अपने और वृत्ति के अंत करण की प्रसुप्त जहां शांति अतीत अवस्था में प्राण को सच्ची तक सामाजिक किया जाता है तो वहां अनुभूति का स्तर बढ़ा रहता और दूसरी बात मैं तो दशा में 1008 नारियां ऐसा शास्त्रों में उल्लेख हुआ है और परिचय मिलता है कि इन यात्रियों के द्वारा जो प्राण का विसर्जन होता है वही जन्म का भी कारण बढ़ता है उनकी गतियां अलग-अलग होती है लेकिन सिर्फ मना पत्र में जो जीवात्मा की गति प्रभावती होम मुक्त की दशा में चलती है यानी मोक्ष को दिलाते हैं मोक्ष का मतलब होता है कि किसी भी पीड़ा दुख मेमो इत्यादि कोई भी ऐसी फिर चांस के अंतिम समय में विघ्न रूप नहीं आ पाती हैं और वह अपनी गति को पहले करता है और उसमें स्वास्थ्य शिक्षा बनी रहती है आम जन संधारण में मिलते हुए एक व्यवहार और एक प्रकार का उसके साथ दुष्कर्म की स्थिति आती है कि ना चाहते हुए या चाहते हुए ऐसी दशा हो रही है अधिकांश कोई भी प्राणी या अंतिम तक नहीं चाहता कि उसका प्राण विसर्जन हो लेकिन होता है क्या है की शुभकामनाएं रहती हैं और हमें आवश्यकता है यह अनुभूति रहती है कि मुझे जिंदा आदमी है जीना तो उसमें बहुत ज्यादा व्यथित प्रक्रिया में जीवात्मा उत्पीड़ित होती है और इस दृश्य की बात है तो जो मनु मूर्छा दशा थी अर्थात मूर्छित हो जाता है तो उसमें उसको कुछ नहीं सब चीज जो मानसिक के चित्तवृत्ति है वह भी लुप्त हो जाती आप चेतन में प्राण संचय प्रणाली से अलग जीवात्मा की सट्टा प्रेरित में रहती है तो यह दशा लोक परलोक वाला दशा आती है जिसमें की याद उसी स्थिति के बारे में सोच नहीं सकता है इस जीवात्मा का क्या हाल हो रहा है लेकिन आध्यात्मिक सीने में यह चीज सफल हो जाती है कि शरीर से भिन्न आत्मा अलग रहता है उसका एक ₹100 और 15 पदों में है वह सब ज्ञान के माध्यम से निवेदन होता है तो उसका प्रस्ताव स्पष्ट होता है तो एक वाक्य मुझे भी आया है प्रतीत होता है कि इंसान में जो आत्मा के अलग सकता होती है और शरीर से भिन्न रहती है और ऐसा मेरे जीवन में भी कुछ घटनाएं घटी हैं जिसमें मुझे अमृततुल्य एहसास हुआ है और इतनी भयंकर रामजी की बल्कि उस दर्द को असहनीय दर्द से निवृत के लिए श्वेता ही मृत्यु की कामना करने के लिए मानव प्रेरित हो जाता है कि बेशक दुख दर्द से हम निजात पाया और चाहे कैसी भी स्थिति आ जाए तो ऐसी स्थिति में भी मृत्यु की महान होता है लेकिन उसमें किसी प्रकार का मन नहीं होता लेकिन अपनी पेड़ों को काटने के लिए समझौते में आ जाता है तो जब सचिन तन और मन भी ग्रुप से और कभी दुर्घटना के कारण ऐसी गंभीर स्थिति आ जाती है वह जीवात्मा बहुत ही ज्यादा व्यतीत होता है और दूसरी जो चीज टाइम आंशिक रूप से जागृत दशा में से कर्म दायित्व होते हैं या अम्मा से संबंधित जन होते उनके प्रति एकदम रुझान आता है यह वास्तविक सत्य है क्यों क्या सीधा साधा हमारे साथ भी हुई थी जिसमें हम डूब रहे थे और उसके अंदर ही हो रहा था कि अब अंतिम समय आ चुका है और कोई वश नहीं चल रहा था इसी वस्ता में और सुबह ही आत्मा में अनुभूति होगी कि बस अब सतत रूप से यही है कि अब खत्म है जीवन तो इतना बड़ा प्रतिभास हुआ और यह क्या कला थी सरकी जो कि हां अपने शरीर से बाहर हो के ऊपर स्थित हो गया और एक ही चरण में अपने घर परिवार का सीन जिला का चुना गया और शरीर किस दिशा में प्रभाव के बह रहा था तो शरीर की प्रति भी महारत है कि शरीर की दुर्गति हो जाएगी उसका कुछ ना कुछ समाधान हो इत्यादि बहुत सारी फिल्में थी तो उस घटनाक्रम के बाद मुझे वापस उसी चीज ना आए और फिर में शरीर में तो उसमें हालात से यही प्रतीत हो रहा था कि आकाश माता गर्भपात हो जाता तो शायद यह प्रीत दशा में ही हमारा विचरण होता है यह सारी चीजें है कि आत्मा दुख शरीर से भिन्न एक ज्ञान है जो प्राप्त होता

prashna mrityu kaise hoti hai ise mehsus karna kaise lagta hoga aapko yah anumaan laga sakte hai yah bahut hi vastavikta prashn hai is shrishti mein koi aisa prani nahi hai jo iski chapet mein ek na ek din na aaye aur yahi ek grah ka sabse bada karan baata hai is samay prani jagat mein lekin in sab chijon se bhi upar jo dayitva aur kartavya bante hai vaah sarvashreshtha aur swaroop rakha jata hai aur is par jeevan ko 94 hone ki aadat sanyukt pradarshan mein ki jaati hai submit purv bhajpa mein kai aise hote hai mrityu ke aabhas karne ke do tarike hai ek toh akasmat ghatna hoti hai jisme shaam ko hi nahi pata hota hai ki yah seedha saal se pare ho jaenge anushka bodh nahi ho pata hai kuch log aise hote hai jo mrityu ke bilkul sunita se jeevan punh prapt karte hai aur aur bhi aisi bimariyan hai kai tarah ki ghatnaye durghatnaon ke andar aisi dardanak dasha ko dekhkar ke utpidan ka ek anumaan lagaya ja sakta hai iske baad jeevan ek samapt ho jata hai toh darshan mein aaya hai ki agar ehsaas karte hai toh kaisa lagta hoga toh is patra ke aadhar par ek apni apni soch ho sakti hai kyonki koi na koi anubhuti ke sthar par suvidhaon ki feeling kar lete hai ki shayad aisi hi utpidan aur peeda ki vedana hoti toh yah mansikta hai vaah samvedana upar aadharit hai agar ati sukshm samvedansheel agar samvedana hai toh purvaanuman ka bhaskar sakta hai kyonki choti si ek pari maapan ko agar nirvikar mein usko sahyog kara jaaye toh anumaan deta hai yah lagta hai ki iski job utpidan ka jhule waale ko kitna charam seema tak hoga darasal isme dard ek bahut dukhdai hota hai aur isme jo prayasarat hota hai vaah bhi bahut sangharsh mein hota hai agar sir yah hai ki kuch logo ko pata chal jata hai ki antim aasaan ban raha hai kaiyon ko nahi pata chal pata hai lekin jinako pata chalta hai aur yah purvabhas bhi hota hai kuch prakriyaon ke prati mansikta bhi is aur shastri ke anubhuti ko dene lagti hai ki vaastav mein iska praan ka samay ho raha tha purana sharir se vichched hoga toh murdabad yaari hai toh ki kaisa lagta hoga aapko udhar se jo in ghatnaon mein agar koi rakha mein raha hai toh vaah is group mein suchit ko la sakta hai udhar chala adhyaatm mein toh sahi isko jaanne ki parakh karne ke liye ek dhyan mudra mein shavasan apne aur vriti ke ant karan ki prasupt jaha shanti ateet avastha mein praan ko sachi tak samajik kiya jata hai toh wahan anubhuti ka sthar badha rehta aur dusri baat main toh dasha mein 1008 nariyan aisa shastron mein ullekh hua hai aur parichay milta hai ki in yatriyon ke dwara jo praan ka visarjan hota hai wahi janam ka bhi karan badhta hai unki gatiyan alag alag hoti hai lekin sirf mana patra mein jo jivaatma ki gati prabhavati home mukt ki dasha mein chalti hai yani moksha ko dilate hai moksha ka matlab hota hai ki kisi bhi peeda dukh memo ityadi koi bhi aisi phir chance ke antim samay mein vighn roop nahi aa pati hai aur vaah apni gati ko pehle karta hai aur usme swasthya shiksha bani rehti hai aam jan sandharan mein milte hue ek vyavhar aur ek prakar ka uske saath dushkarm ki sthiti aati hai ki na chahte hue ya chahte hue aisi dasha ho rahi hai adhikaansh koi bhi prani ya antim tak nahi chahta ki uska praan visarjan ho lekin hota hai kya hai ki subhkamnaayain rehti hai aur hamein avashyakta hai yah anubhuti rehti hai ki mujhe zinda aadmi hai jeena toh usme bahut zyada vyathit prakriya mein jivaatma utpidit hoti hai aur is drishya ki baat hai toh jo manu murcha dasha thi arthat murchit ho jata hai toh usme usko kuch nahi sab cheez jo mansik ke chittavritti hai vaah bhi lupt ho jaati aap chetan mein praan sanchaya pranali se alag jivaatma ki satta prerit mein rehti hai toh yah dasha lok parlok vala dasha aati hai jisme ki yaad usi sthiti ke bare mein soch nahi sakta hai is jivaatma ka kya haal ho raha hai lekin aadhyatmik seene mein yah cheez safal ho jaati hai ki sharir se bhinn aatma alag rehta hai uska ek Rs aur 15 padon mein hai vaah sab gyaan ke madhyam se nivedan hota hai toh uska prastaav spasht hota hai 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प्रश्न मृत्यु कैसे होती है इसे महसूस करना कैसे लगता होगा आपको यह अनुमान लगा सकते हैं यह बह

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दोस्त आपका क्वेश्चन अमृत कैसी होती है इससे महसूस करना कैसा लगता है या जान लीजिए तो सबको मानी है और जिसको आई हूं बता नहीं पाया कैसी लगती है महसूस नहीं कर पाया महसूस किया उसने कि दूसरे से बता नहीं सकता है और यह जान लें कि अगर प्राण निकलता है ना शरीर से तो बहुत दर्द होता है क्योंकि प्राण ही तो निकलते पांच प्रकार के प्राण होते हैं पांच के उपकरण होते इस 500010 कहां होते हैं पांच प्राण हो गए हैं प्राण अपान समान उदा व्यापार पांच प्रकार के कार्य करते हैं और इसी की पांच प्राण हैं नाग कल देवदत्त धनंजय एस्केप प्लान है तो पात्रा का चूर्ण मिलाकर 10 प्राणी अपने अपने कार्य करते हैं तो सोचने प्राण शरीर को एक साथ छोड़कर जाएंगे और धनंजय प्राण नहीं जाता है क्योंकि धनंजय प्राण लास्ट तक शरीर को डीकंपोज करने के लिए रहता है उसके बाद हो जाता है तो कितना कष्ट होता होगा बहुत दर्द होता तो आशा करते हैं आपके समझ में आ गया होगा और आप अपने अनुभव अवश्य मुझसे शेयर करें धन्यवाद दोस्त

dost aapka question amrit kaisi hoti hai isse mehsus karna kaisa lagta hai ya jaan lijiye toh sabko maani hai aur jisko I hoon bata nahi paya kaisi lagti hai mehsus nahi kar paya mehsus kiya usne ki dusre se bata nahi sakta hai aur yah jaan le ki agar praan nikalta hai na sharir se toh bahut dard hota hai kyonki praan hi toh nikalte paanch prakar ke praan hote hain paanch ke upkaran hote is 500010 kaha hote hain paanch praan ho gaye hain praan apan saman uda vyapar paanch prakar ke karya karte hain aur isi ki paanch praan hain nag kal devdatta dhananjay escape plan hai toh patra ka churn milakar 10 prani apne apne karya karte hain toh sochne praan sharir ko ek saath chhodkar jaenge aur dhananjay praan nahi jata hai kyonki dhananjay praan last tak sharir ko dikampoj karne ke liye rehta hai uske baad ho jata hai toh kitna kasht hota hoga bahut dard hota toh asha karte hain aapke samajh me aa gaya hoga aur aap apne anubhav avashya mujhse share kare dhanyavad dost

दोस्त आपका क्वेश्चन अमृत कैसी होती है इससे महसूस करना कैसा लगता है या जान लीजिए तो सबको मा

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Dr. Swatantra Jain

Psychotherapist, Family & Career Counsellor and Parenting & Life Coach

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प्रश्न मृत्यु कैसे होती है चंद्रमा कैसे लगता होगा अब कोई अनुमान लगा सकते हो मुझे कभी एक को सोचने की जरूरत नहीं पड़ी मृत्यु कैसी हो ना क्योंकि मृत्यु के बारे में जीवन है तुम लड़कियों को है एक दिन जाना है जाएंगे सबको जाना चाहेंगे क्योंकि मृत्यु अटल है जीवन है पैदा हो गया उसके लिए मृत्यु और कुछ चीज अटल हो या ना हो लेकिन टिकट के बारे में क्यों परेशान होना कोई भी चले जाएंगे उसने अनुमान लगाकर और बहुत काम है ना इसके सिवा काम करते रहो अपनी जिंदगी को अच्छी तरह जियो सूचना ना पड़ जाए अब आराम से हम जा सके आप आराम से जीवन के बारे में जीवन को सुनाओ

prashna mrityu kaise hoti hai chandrama kaise lagta hoga ab koi anumaan laga sakte ho mujhe kabhi ek ko sochne ki zarurat nahi padi mrityu kaisi ho na kyonki mrityu ke bare me jeevan hai tum ladkiyon ko hai ek din jana hai jaenge sabko jana chahenge kyonki mrityu atal hai jeevan hai paida ho gaya uske liye mrityu aur kuch cheez atal ho ya na ho lekin ticket ke bare me kyon pareshan hona koi bhi chale jaenge usne anumaan lagakar aur bahut kaam hai na iske siva kaam karte raho apni zindagi ko achi tarah jio soochna na pad jaaye ab aaram se hum ja sake aap aaram se jeevan ke bare me jeevan ko sunao

प्रश्न मृत्यु कैसे होती है चंद्रमा कैसे लगता होगा अब कोई अनुमान लगा सकते हो मुझे कभी एक को

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जब हमारा शरीर वस्त्र बदलता है तो यह वस्त्र क्या अनुमान लगाता होगा इसी तरह जब आत्मा इस शरीर को बदलती है तो क्या अनुमान लगाए हमारे दिमाग में होता जो हमारी आत्मा नया वस्त्र धारण कर लेती है

jab hamara sharir vastra badalta hai toh yah vastra kya anumaan lagaata hoga isi tarah jab aatma is sharir ko badalti hai toh kya anumaan lagaye hamare dimag mein hota jo hamari aatma naya vastra dharan kar leti hai

जब हमारा शरीर वस्त्र बदलता है तो यह वस्त्र क्या अनुमान लगाता होगा इसी तरह जब आत्मा इस शरीर

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Narendra Bhardwaj

Spirituality Reformer

6:42
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मृत्यु कैसे होती है महानुभाव आपने बहुत ही बड़ा सवाल किया क्योंकि यह अनुभव मरने के बाद कोई बता नहीं सकता यह तो योगी बता सकता है या पहुंचे हुए संत बता सकते हैं शास्त्र सम्मत मृत्यु के ऊपर बहुत सारी बातें आई है मृत्यु शरीर की होती है आत्मा अमर आत्मा से परमात्मा का यदि इस मानव शरीर के माध्यम से मिलन हो गया अब तो मृत्यु जैसी कोई चीज है नहीं क्योंकि मृत्यु का मतलब है आत्मा का कपड़े बदलना लेकिन यदि हमने इस मानव शरीर का हिस्सा धन का सदुपयोग नहीं किया और चूक गए तो मृत्यु हमारी कष्ट दाई है क्योंकि आत्मा हमारी रोम रोम में व्याप्त है इस प्रकार से परमात्मा समस्त ब्रह्मांड में व्याप्त है उसी प्रकार आत्मा हमारे रोम रोम में व्याप्त शास्त्रों का वाक्य है ब्रह्मांड संडे शरीर को पिंड कहा जाता है जो कुछ भी इस ब्रह्मांड में है वह इस शरीर में अज्ञानता बस हम शरीर को ही आत्मा मान बैठे हैं और शरीर की मृत्यु होने को मृत्यु मान बैठे हैं जबकि आत्मा की भी कभी मृत्यु होती नहीं क्योंकि अध्याय 2 में भगवान श्री कृष्ण भगवत गीता में कहते हैं नया नाम छिंदंति शस्त्राणि नैनम दहति पावक आत्मा आत्मा परमात्मा का अंश है शरीर प्रकृति का मृत्यु शरीर की होती है शरीर जिन गुणों से बना है वह गुण वापस प्रकृति में चले जाते हैं आत्मा परमात्मा में विलीन हो जाती है तब जब हमने इस शरीर के माध्यम से भगवान को परमात्मा को प्राप्त करने का प्रयास किया और जो भी धर्म के माध्यम से हमें रास्ता दिखाया गया था उसका अनुसरण किया तो परमात्मा की प्राप्ति ही जीवन का उद्देश होता है फिर मृत्यु जैसी चीज नहीं रह जाती मृत्यु तब होती है जब हम अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं कि आए थे जिस काम के लिए वह काम हम नहीं कर मृत्यु जैसी चीज की बात करना ठीक है लेकिन यदि हमने अपने जीवन में आध्यात्मिक विकास करते करते करते करते साक्षात्कार की स्थिति बना ली है भगवान से मृत्यु जैसी कोई चीज नहीं है इसलिए जहां तक मैंने पढ़ा संतों से सुना शास्त्रों में पढ़ने में मिली मृत्यु आत्मा की कभी नहीं होती और मृत्यु के ऊपर से तो भगवान श्री कृष्ण बहुत कुछ गीता जी में कहा तो मृत्यु किस की मिट्टी शरीर की शरीर नाशवान है जिस दिन से जन्म हुआ उस दिन से हम मृत्यु की तरफ जा रहे निरंतर जा रहे हैं लेकिन हम जन्म लेने के बाद जो करते हैं उन कर्मों का लेखा जोखा चित्र पर आ जाता है और यदि हमारे कर्म अच्छे हैं तो इसी जन्म में मोक्ष संभव है साक्षात्कार हो गया तो भगवान से मोक्ष संभव है और नहीं है तो पुनः फिर जन्म के चक्र में मृत्यु जन्म मृत्यु जन्म मृत्यु निरंतर जब तक हम क्योंकि हर अंश की ओर यात्रा करना कि प्राकृतिक धर्म हर अंशी अंशी और यात्रा कर रहा है उत्तरोत्तर एक जन्म में नहीं कर पाए फिर पुनर्जन्म कर्मों के कारण मिलेगा फिर वहां से थोड़ी उत्तरोत्तर वृद्धि करते-करते कई जन्म लग जाते हैं भगवान के पास पहुंचते-पहुंचते तब जाकर मोक्ष मिलता है लेकिन अगर इसके लिए किसी अच्छे संत सदगुरुदेव का मिलना हो जाए तो वह हमें बहुत जल्दी भवसागर से पार करा देते हैं अनुष्का अंशी की तरफ जाना यह प्रकृति का सिद्धांत जैसे अग्नि अगर आप पृथ्वी पर चलाएं अग्नि की जो लगते हैं ऊपर को ढूंढती हैं क्यों क्योंकि उसका जो अंशी है वह ऊपर है सूर्य अग्नि का जो तत्व सूट ऊपर इसलिए उसकी यात्रा ऊपर की तरफ पानी को कहीं भी डाले वह नीचे की ओर जाता है क्यों क्योंकि पानी का जो अंशी है पाताल नीचे की तरफ जाता है ऐसे ही आप पृथ्वी पर मिट्टी है उसको आकाश में उठाएं लेकिन नीचे की तरफ क्यों क्योंकि पृथ्वी उसका अंशी है तो अनुष्का अलसी की यात्रा करना स्वाभाविक है उसी प्रकार से हम भी परमात्मा का अंश है आत्मा है आत्मा की यात्रा परमात्मा की तरफ निरंतर चल रही है अब उसमें कितने जन्म लग जाए कितनी मृत्यु को देखना पड़े कितने जनों को देखना पड़ेगी यह हमारी अपनी क्रिया कर्म सत्संग धर्म इन सब बातों पर बड़ा मैप इन सब बातों को बड़ा निर्भर करता है इसलिए मृत्यु जैसी कोई चीज नहीं है यदि आपने इस शरीर का हिस्सा धन का सदुपयोग कर लिया कोई सतगुरूस किसी संत ने कृपा कर दी तो मैं तो जैसी चीज को छोटी नहीं बस्ती तो शरीर की होती है यह नाशवान है यह तो जिस दिन जन्म होता उसी दिन से ना सोने की यात्रा पर चल पड़ता है अतः मृत्यु जो है सनातन धर्म सिर्फ शरीर की मानी गई है आत्मा अमर है धन्यवाद

mrityu kaise hoti hai mahanubhav aapne bahut hi bada sawaal kiya kyonki yah anubhav marne ke baad koi bata nahi sakta yah toh yogi bata sakta hai ya pahuche hue sant bata sakte hain shastra sammat mrityu ke upar bahut saari batein I hai mrityu sharir ki hoti hai aatma amar aatma se paramatma ka yadi is manav sharir ke madhyam se milan ho gaya ab toh mrityu jaisi koi cheez hai nahi kyonki mrityu ka matlab hai aatma ka kapde badalna lekin yadi humne is manav sharir ka hissa dhan ka sadupyog nahi kiya aur chuk gaye toh mrityu hamari kasht dai hai kyonki aatma hamari roam roam me vyapt hai is prakar se paramatma samast brahmaand me vyapt hai usi prakar aatma hamare roam roam me vyapt shastron ka vakya hai brahmaand sunday sharir ko pind kaha jata hai jo kuch bhi is brahmaand me hai vaah is sharir me agyanata bus hum sharir ko hi aatma maan baithe hain aur sharir ki mrityu hone ko mrityu maan baithe hain jabki aatma ki bhi kabhi mrityu hoti nahi kyonki adhyay 2 me bhagwan shri krishna bhagwat geeta me kehte hain naya naam chindanti shastrani nainam dahati pawak aatma aatma paramatma ka ansh hai sharir prakriti ka mrityu sharir ki hoti hai sharir jin gunon se bana hai vaah gun wapas prakriti me chale jaate hain aatma paramatma me vileen ho jaati hai tab jab humne is sharir ke madhyam se bhagwan ko paramatma ko prapt karne ka prayas kiya aur jo bhi dharm ke madhyam se hamein rasta dikhaya gaya tha uska anusaran kiya toh paramatma ki prapti hi jeevan ka uddesh hota hai phir mrityu jaisi cheez nahi reh jaati mrityu tab hoti hai jab hum apne lakshya se bhatak jaate hain ki aaye the jis kaam ke liye vaah kaam hum nahi kar mrityu jaisi cheez ki baat karna theek hai lekin yadi humne apne jeevan me aadhyatmik vikas karte karte karte karte sakshatkar ki sthiti bana li hai bhagwan se mrityu jaisi koi cheez nahi hai isliye jaha tak maine padha santo se suna shastron me padhne me mili mrityu aatma ki kabhi nahi hoti aur mrityu ke upar se toh bhagwan shri krishna bahut kuch geeta ji me kaha toh mrityu kis ki mitti sharir ki sharir nashvan hai jis din se janam hua us din se hum mrityu ki taraf ja rahe nirantar ja rahe hain lekin hum janam lene ke baad jo karte hain un karmon ka lekha jokha chitra par aa jata hai aur yadi hamare karm acche hain toh isi janam me moksha sambhav hai sakshatkar ho gaya toh bhagwan se moksha sambhav hai aur nahi hai toh punh phir janam ke chakra me mrityu janam mrityu janam mrityu nirantar jab tak hum kyonki har ansh ki aur yatra karna ki prakirtik dharm har anshi anshi aur yatra kar raha hai uttarottar ek janam me nahi kar paye phir punarjanm karmon ke karan milega phir wahan se thodi uttarottar vriddhi karte karte kai janam lag jaate hain bhagwan ke paas pahunchate pahunchate tab jaakar moksha milta hai lekin agar iske liye kisi acche sant sadagurudev ka milna ho jaaye toh vaah hamein bahut jaldi bhavsagar se par kara dete hain anushka anshi ki taraf jana yah prakriti ka siddhant jaise agni agar aap prithvi par chalaye agni ki jo lagte hain upar ko dhundhti hain kyon kyonki uska jo anshi hai vaah upar hai surya agni ka jo tatva suit upar isliye uski yatra upar ki taraf paani ko kahin bhi dale vaah niche ki aur jata hai kyon kyonki paani ka jo anshi hai paatal niche ki taraf jata hai aise hi aap prithvi par mitti hai usko akash me uthaye lekin niche ki taraf kyon kyonki prithvi uska anshi hai toh anushka aalsi ki yatra karna swabhavik hai usi prakar se hum bhi paramatma ka ansh hai aatma hai aatma ki yatra paramatma ki taraf nirantar chal rahi hai ab usme kitne janam lag jaaye kitni mrityu ko dekhna pade kitne jano ko dekhna padegi yah hamari apni kriya karm satsang dharm in sab baaton par bada map in sab baaton ko bada nirbhar karta hai isliye mrityu jaisi koi cheez nahi hai yadi aapne is sharir ka hissa dhan ka sadupyog kar liya koi satagurus kisi sant ne kripa kar di toh main toh jaisi cheez ko choti nahi basti toh sharir ki hoti hai yah nashvan hai yah toh jis din janam hota usi din se na sone ki yatra par chal padta hai atah mrityu jo hai sanatan dharm sirf sharir ki maani gayi hai aatma amar hai dhanyavad

मृत्यु कैसे होती है महानुभाव आपने बहुत ही बड़ा सवाल किया क्योंकि यह अनुभव मरने के बाद कोई

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मित्र आपने पूछा मृत्यु कैसे होती है इसे महसूस करना कैसे लगता होगा आपको हनुमान आ सकते हैं तो देखें मित्र सही अनुमान तो मृत्यु होने के पश्चात इंसान बताई नहीं सकता लेकिन एक आंकड़ा जरूर लगाया जा सकता है वहां कराया से है कि मृत्यु एक ऐसी सबसे पहले तथ्यों की ऐसी सच्चाई है जो हर किसी को आती है और इंसान पुराने से नया नए से पुराना होता है दूसरी बात जब इंसान पैदा होता है तो उसे शरीफ से बहुत सारा मुंह होता है बहुत सारा प्रेम होता है और वह प्रेम के साथ अपने जीवन को जीता चला जाता है जीते चला जाता है अपनी लाइफ को अच्छी तरीका है लेकिन जैसे इंसान अपनी बाल्यावस्था से रास्ता जवानी बुढ़ापे की तरह धीरे-धीरे जाता है तो उसके हर पाठ हर अंग दुर्बल होते जाते हैं दुर्बल होते जाते हैं और अंत में जब अपनी व्यवस्था पूरी कर लेता है जितना प्रकृति ने या विधाता ने आती है एक लड़की 11 साल या उससे ज्यादा तो वहां तक पहुंच जाता है या इससे कम ज्यादा आज के हिसाब से तो पहुंचने के बाद उसके हर पाठ काम करना कम कर देते हैं जैसे आंखों का दिखाई न देना हृदय की गति भाग चालू हो जाना पैरों पर सूजन आ जाना चाल में कमी आ जाना चलना पाना खाना ना खा पाना शरीर में दर्द रहना तो यह सारे जो लक्षण हैं इन लक्षणों से इंसान महसूस करता है कि इससे तो अच्छा मृत्यु आ जाए तो मैं इन सारी चीजों से मुक्त हो जाओ इसीलिए वह मृत्यु रानी है ना कि कोई खराब तो उसमें मृत्यु हो जाती है तो वह नया जीवन प्राप्त करता है और उस चीज को अगर आप अपने दिमाग को यहां से वहां तक ले जाएंगे आप इसको चीज महसूस करेंगे तुम्हें क्यों कैसी होती है क्योंकि एक न एक दिन यह उसका सभी को आनी है जब आप खुद सोच लेंगे अपने ऊपर लेंगे चीज को तो आप इसका ज्ञान खुद ही महसूस करेंगे धन्यवाद

mitra aapne poocha mrityu kaise hoti hai ise mehsus karna kaise lagta hoga aapko hanuman aa sakte hain toh dekhen mitra sahi anumaan toh mrityu hone ke pashchat insaan batai nahi sakta lekin ek akanda zaroor lagaya ja sakta hai wahan karaya se hai ki mrityu ek aisi sabse pehle tathyon ki aisi sacchai hai jo har kisi ko aati hai aur insaan purane se naya naye se purana hota hai dusri baat jab insaan paida hota hai toh use sharif se bahut saara mooh hota hai bahut saara prem hota hai aur vaah prem ke saath apne jeevan ko jita chala jata hai jeete chala jata hai apni life ko achi tarika hai lekin jaise insaan apni baalyaavastha se rasta jawaani budhape ki tarah dhire dhire jata hai toh uske har path har ang durbal hote jaate hain durbal hote jaate hain aur ant me jab apni vyavastha puri kar leta hai jitna prakriti ne ya vidhata ne aati hai ek ladki 11 saal ya usse zyada toh wahan tak pohch jata hai ya isse kam zyada aaj ke hisab se toh pahuchne ke baad uske har path kaam karna kam kar dete hain jaise aakhon ka dikhai na dena hriday ki gati bhag chaalu ho jana pairon par sujan aa jana chaal me kami aa jana chalna paana khana na kha paana sharir me dard rehna toh yah saare jo lakshan hain in lakshano se insaan mehsus karta hai ki isse toh accha mrityu aa jaaye toh main in saari chijon se mukt ho jao isliye vaah mrityu rani hai na ki koi kharab toh usme mrityu ho jaati hai toh vaah naya jeevan prapt karta hai aur us cheez ko agar aap apne dimag ko yahan se wahan tak le jaenge aap isko cheez mehsus karenge tumhe kyon kaisi hoti hai kyonki ek na ek din yah uska sabhi ko aani hai jab aap khud soch lenge apne upar lenge cheez ko toh aap iska gyaan khud hi mehsus karenge dhanyavad

मित्र आपने पूछा मृत्यु कैसे होती है इसे महसूस करना कैसे लगता होगा आपको हनुमान आ सकते हैं त

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इसका अनुमान नहीं लगाया जा सका की मृत्यु के बाद कोई आदमी सोच नहीं सकता और उसके बारे में भी हम क्या सोचते हैं तो मृत्यु को महसूस क्यों करना चाहते हैं हां कई बार लगता है कैसे हम मरने जा रहे हैं वह ताकि महसूस करा मरते-मरते बचे तब लगता है कि जैसे एक बात चली है थे तब मिर्ची में स्वाद मिलता है और मृत्यु को चेक सकता तब मृत्यु का वास होता है

iska anumaan nahi lagaya ja saka ki mrityu ke baad koi aadmi soch nahi sakta aur uske bare me bhi hum kya sochte hain toh mrityu ko mehsus kyon karna chahte hain haan kai baar lagta hai kaise hum marne ja rahe hain vaah taki mehsus kara marte marte bache tab lagta hai ki jaise ek baat chali hai the tab mirchi me swaad milta hai aur mrityu ko check sakta tab mrityu ka was hota hai

इसका अनुमान नहीं लगाया जा सका की मृत्यु के बाद कोई आदमी सोच नहीं सकता और उसके बारे में भी

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आपका सवाल है मृत्यु कैसी होती है इसे महसूस करना कैसे लगता है आप कोई अनुमान लगा सकते बेशक यह हकीकत है मैं बता रहा हूं मौत कैसे इस तरीके से एक कांटेदार झाड़ी पर एक रेशम का कपड़ा डाल देना और फिर उस कपडे को खींच लेना और उसमें उसके तारों से उसके जाए तो इस तरीके से मौत मौत का मजा कैसा जैसे कि एक पिंजड़े में एक पंछी को कैद कर देना अब चारों तरफ से आग लगा देना बुक पिंजड़ा अंदर पंछी अंदर के अंदर और अजीत संकेत महसूस करो कैसा लगता हुआ आपके बीच में खड़ा हो जाए और लव कुश की मौत का मंजर बकरी की खाल खींचना हो इंसान जिंदा हो हाथ में चोट लग जाए तो इतना दर्द होता है अगर कोई बस वैसा ही होता है जब मौत का मजा जिसे बोलते हैं का एहसास करना महसूस करना इस तरीके से मौत होती है

aapka sawaal hai mrityu kaisi hoti hai ise mehsus karna kaise lagta hai aap koi anumaan laga sakte beshak yah haqiqat hai main bata raha hoon maut kaise is tarike se ek kaantedaar jhari par ek resham ka kapda daal dena aur phir us kapde ko khinch lena aur usme uske taaron se uske jaaye toh is tarike se maut maut ka maza kaisa jaise ki ek pinjade me ek panchhi ko kaid kar dena ab charo taraf se aag laga dena book pinjada andar panchhi andar ke andar aur ajit sanket mehsus karo kaisa lagta hua aapke beech me khada ho jaaye aur love kush ki maut ka manjar bakri ki khaal khinchana ho insaan zinda ho hath me chot lag jaaye toh itna dard hota hai agar koi bus waisa hi hota hai jab maut ka maza jise bolte hain ka ehsaas karna mehsus karna is tarike se maut hoti hai

आपका सवाल है मृत्यु कैसी होती है इसे महसूस करना कैसे लगता है आप कोई अनुमान लगा सकते बेशक य

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Purushottam Choudhary

ब्राह्मण Next IAS institute गार्ड

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मृत्यु थी उस तरह की होती है या उत्तर का अनुभूति प्राप्त करते हैं जिस तरह फटे हुए कपड़े को चेंज करने कपड़े का धारण करते हैं नृत्य होता ही नहीं है किसी का कोई नहीं मरता है सिर्फ शरीर चेंज हो जाता है क्योंकि आत्मा तो अजर अमर है आत्मा कभी मरती नहीं है इसलिए इस बात को आप ब्लॉक से निकाल दें कि हम मरते हैं मरते नहीं हैं सिर्फ शरीर चेंज कर यहां से निकलते कहीं और चले जाते हैं यही है धार्मिक के अनुसार धर्म के अनुसार सोचेंगे आप तो यही होगा वैसे मृत्यु के बाद ही मोक्ष मिलता है अगर मृत्यु होता है तू के बाद ही मोक्ष मिलता है और हमारे सारे कर्मों का हिसाब किताब होने के बाद पुनः साहब रिपोर्ट भेजते हैं कि हमारे ऊपर इतना क्यों है या हमारा इतना बैलेंस है उसी अनुसार दोबारा हमारा पोस्टिंग जी धन्यवाद

mrityu thi us tarah ki hoti hai ya uttar ka anubhuti prapt karte hain jis tarah phate hue kapde ko change karne kapde ka dharan karte hain nritya hota hi nahi hai kisi ka koi nahi marta hai sirf sharir change ho jata hai kyonki aatma toh ajar amar hai aatma kabhi marti nahi hai isliye is baat ko aap block se nikaal de ki hum marte hain marte nahi hain sirf sharir change kar yahan se nikalte kahin aur chale jaate hain yahi hai dharmik ke anusaar dharm ke anusaar sochenge aap toh yahi hoga waise mrityu ke baad hi moksha milta hai agar mrityu hota hai tu ke baad hi moksha milta hai aur hamare saare karmon ka hisab kitab hone ke baad punh saheb report bhejate hain ki hamare upar itna kyon hai ya hamara itna balance hai usi anusaar dobara hamara posting ji dhanyavad

मृत्यु थी उस तरह की होती है या उत्तर का अनुभूति प्राप्त करते हैं जिस तरह फटे हुए कपड़े को

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मौत कपल को महसूस करना देखिए आम बात नहीं है कोई सी कल्पना तक नहीं कर सकता लेकिन कई लोग ऐसे हैं जो मौत के मुंह से वापस आ चुके हैं और इन सब को अनुभव को शेयर करते हैं तुम्हारी ऐसी कोई एक दो आदमी से मतलब उन्होंने अपना व्यक्त किए हैं देखिए कई लोगों को इतना सुकून लगता है कि आप सोच नहीं सकते क्योंकि वह लोग होते हैं यह जो अच्छे कर्म किए रहते हैं अच्छे कर्म करने के करने के बाद करने के पश्चात यदि किसी को मौत आती है या फिर मौत का जो महसूस होता है वह बहुत ही सुंदर होता है बहुत अच्छा होता है लेकिन कई लोग ऐसे होते हैं जिनको मौत बहुत डर रहता है बहुत ही खराब लगता है मौका महसूस करना चाहते हैं जिनका करना अच्छा नहीं है यही तो बात है आज तक मैंने सिखा दो तीन लोगों से मिलकर उन्होंने यही बातें शेयर की यही बातें आपके ऊपर डिपेंड करता है महसूस करना है आप अच्छे कर्म कीजिए अच्छा महसूस होगा अब गलत काम करेंगे तो वह तो आप समझ रहा है क्या

maut couple ko mehsus karna dekhiye aam baat nahi hai koi si kalpana tak nahi kar sakta lekin kai log aise hain jo maut ke mooh se wapas aa chuke hain aur in sab ko anubhav ko share karte hain tumhari aisi koi ek do aadmi se matlab unhone apna vyakt kiye hain dekhiye kai logo ko itna sukoon lagta hai ki aap soch nahi sakte kyonki vaah log hote hain yah jo acche karm kiye rehte hain acche karm karne ke karne ke baad karne ke pashchat yadi kisi ko maut aati hai ya phir maut ka jo mehsus hota hai vaah bahut hi sundar hota hai bahut accha hota hai lekin kai log aise hote hain jinako maut bahut dar rehta hai bahut hi kharab lagta hai mauka mehsus karna chahte hain jinka karna accha nahi hai yahi toh baat hai aaj tak maine sikha do teen logo se milkar unhone yahi batein share ki yahi batein aapke upar depend karta hai mehsus karna hai aap acche karm kijiye accha mehsus hoga ab galat kaam karenge toh vaah toh aap samajh raha hai kya

मौत कपल को महसूस करना देखिए आम बात नहीं है कोई सी कल्पना तक नहीं कर सकता लेकिन कई लोग ऐसे

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Ramphal

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मृत्यु कैसे होती है यह तो आज तक हमारी वैज्ञानिक भी पद्धति में नहीं लगा सके लेकिन हम धर्म के आधार पर चले तो कुछ मिनट पहले व्यक्ति को महसूस से अनुभव होता है कि उसने अपने जीवन में क्या किया है क्या अनर्थ क्या है क्या धर्म किया है इत्यादि बातों पर ध्यान देकर कुछ समय पहले उसको महसूस किया दो या तीन पहली महसूस हो सकता है कि वह इस दुनिया से विदा लेने वाला है अर्थात उसके आगे संपूर्ण अपने कर्म का चक्र को मिलता है तब व्यक्ति को महसूस हो जाओ सकता है कि उसके अकाल मृत्यु नजदीक है तभी मृत्यु होती है तथा आपने हमें अपने जीवन में हमेशा अच्छे कर्म करना चाहिए ताकि हमें स्वर्ग प्राप्ति होती है लेकिन

mrityu kaise hoti hai yah toh aaj tak hamari vaigyanik bhi paddhatee me nahi laga sake lekin hum dharm ke aadhar par chale toh kuch minute pehle vyakti ko mehsus se anubhav hota hai ki usne apne jeevan me kya kiya hai kya anarth kya hai kya dharm kiya hai ityadi baaton par dhyan dekar kuch samay pehle usko mehsus kiya do ya teen pehli mehsus ho sakta hai ki vaah is duniya se vida lene vala hai arthat uske aage sampurna apne karm ka chakra ko milta hai tab vyakti ko mehsus ho jao sakta hai ki uske akaal mrityu nazdeek hai tabhi mrityu hoti hai tatha aapne hamein apne jeevan me hamesha acche karm karna chahiye taki hamein swarg prapti hoti hai lekin

मृत्यु कैसे होती है यह तो आज तक हमारी वैज्ञानिक भी पद्धति में नहीं लगा सके लेकिन हम धर्म क

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बच्चे तो मरने वाले कोई पता होगा लेकिन जो आंखों से देखा जाता जब कोई मृत्यु होती है तो मैंने देखा था अपनी आंखों से मेरे बड़े दादा जी थे उनकी रहती थी मेरे सामने तो मैंने देखा कि उनकी जो आवाज थी वह चली गई थी वह एक गूंगे की तरह लिख रहे थे मगर उनकी आवाज नहीं आ रही थी और पैर को पटक रहे थे बहुत तेज तेज मतलब मेरे अनुसार यह है कि उनके अंदर से किचन जैसे हमारे जमालो हमारे का कोई चोट लगी है और उससे से पट्टी लगा देते हो जा मुझसे चिपक जाए और हम उसे खींचते हैं ना उस तरह से मुझे लगा कि उनके अंदर जो पैरों से उनके प्राण जो थे ना जो एक हमारे अंदर जो इस तरीके से प्राणी होते हमारे पूरे शरीर में एक जान है उस तरीके से वह खींच रहा होगा जैसे हमारे गांव में पट्टी चिपक जाए और कोई खींचे तो कितना दर्द होता है हमारे उसी तरह मेरे अनुसार की प्राण भी सेम उसी तरह से कहते हैं जिस तरह से हमारी की पट्टी की की जाती है यह अनुमान लगाकर मैंने सोचा है

bacche toh marne waale koi pata hoga lekin jo aakhon se dekha jata jab koi mrityu hoti hai toh maine dekha tha apni aakhon se mere bade dada ji the unki rehti thi mere saamne toh maine dekha ki unki jo awaaz thi vaah chali gayi thi vaah ek gunge ki tarah likh rahe the magar unki awaaz nahi aa rahi thi aur pair ko patak rahe the bahut tez tez matlab mere anusaar yah hai ki unke andar se kitchen jaise hamare jamalo hamare ka koi chot lagi hai aur usse se patti laga dete ho ja mujhse chipak jaaye aur hum use khichte hain na us tarah se mujhe laga ki unke andar jo pairon se unke praan jo the na jo ek hamare andar jo is tarike se prani hote hamare poore sharir me ek jaan hai us tarike se vaah khinch raha hoga jaise hamare gaon me patti chipak jaaye aur koi khinche toh kitna dard hota hai hamare usi tarah mere anusaar ki praan bhi same usi tarah se kehte hain jis tarah se hamari ki patti ki ki jaati hai yah anumaan lagakar maine socha hai

बच्चे तो मरने वाले कोई पता होगा लेकिन जो आंखों से देखा जाता जब कोई मृत्यु होती है तो मैंने

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हां जी आप का सवाल है मृत्यु कैसी होती है इससे महसूस कैसे करना कैसा लगता है बिल्कुल सलमान लगा सकते कि हम कैसे गुजर चुके हैं मेरे साथ एक्सीडेंट हो गया था और मुझे ऐसा लग रहा था ना कि हम अब जी नहीं पाएंगे मेरे पास आएगी मतलब बहुत ज्यादा चक्कर आ रहा था और जब अंधेरा साथ ही रो रहा था ना किसी की आवाज सुनाई दे रही थी ना कुछ समझ में आ रहा था वह क्या बोल रहा था कुछ समझ में नहीं आ रहा था बस इतना ही था कि बस चक्कर ऐसा फील हो रहा था चक्कर आ रहा है मुझे ऐसा लग रहा था कि मर जाएंगे कर बच गए तुम मुझे लगता है कि मौत सर ऐसे ही आती होगी सभी मित्र सादर ऐसी होती होगी जब हम की डेथ होने वाली होती होगी तो सबको ऐसे ही फील होता होगा की तरफ अंधेरा हो गया और उन्हें कुछ ना सुनाई दे रहा है और दिखाई बहुत धुंधला देता है सुंदर दिखाई दे रहा है और बस एक ही मन करता है कि बस वह मतलब लेट जाएं लेटने का मन करता है और कुछ रेस्ट करो सुधर जाओ बस मतलब कोई भी आना आपको हिला रहा है कोठारा को उठने का मन नहीं करेगा उसे एक बस लेट जाओ और बस जो आपका बॉडी जो भी चाह रहे हो हो जाने दो मैं कभी आने के लिए बॉडी रेस्ट करना चाहिए बॉडी सोना चाहिए तुझको सोने दो बस यही वह इच्छा करता है टाइम

haan ji aap ka sawaal hai mrityu kaisi hoti hai isse mehsus kaise karna kaisa lagta hai bilkul salman laga sakte ki hum kaise gujar chuke hain mere saath accident ho gaya tha aur mujhe aisa lag raha tha na ki hum ab ji nahi payenge mere paas aayegi matlab bahut zyada chakkar aa raha tha aur jab andhera saath hi ro raha tha na kisi ki awaaz sunayi de rahi thi na kuch samajh me aa raha tha vaah kya bol raha tha kuch samajh me nahi aa raha tha bus itna hi tha ki bus chakkar aisa feel ho raha tha chakkar aa raha hai mujhe aisa lag raha tha ki mar jaenge kar bach gaye tum mujhe lagta hai ki maut sir aise hi aati hogi sabhi mitra sadar aisi hoti hogi jab hum ki death hone wali hoti hogi toh sabko aise hi feel hota hoga ki taraf andhera ho gaya aur unhe kuch na sunayi de raha hai aur dikhai bahut dhundla deta hai sundar dikhai de raha hai aur bus ek hi man karta hai ki bus vaah matlab late jayen letane ka man karta hai aur kuch rest karo sudhar jao bus matlab koi bhi aana aapko hila raha hai kothara ko uthane ka man nahi karega use ek bus late jao aur bus jo aapka body jo bhi chah rahe ho ho jaane do main kabhi aane ke liye body rest karna chahiye body sona chahiye tujhko sone do bus yahi vaah iccha karta hai time

हां जी आप का सवाल है मृत्यु कैसी होती है इससे महसूस कैसे करना कैसा लगता है बिल्कुल सलमान ल

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