अब तक आपके जीवन का सबसे डरावना समय कौन सा रहा है और क्यों?...


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ganesh pazi

Motivator

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

म्यूजिक ओपन रास्ते में भटकते हुए शाम हो जाने के बाद जयपुर राजस्थान इंडिया तो थोड़ा भाई का एहसास हुआ यह किशोरावस्था की बात

music open raste mein bhatakte hue shaam ho jaane ke baad jaipur rajasthan india toh thoda bhai ka ehsaas hua yah kishoraavastha ki baat

म्यूजिक ओपन रास्ते में भटकते हुए शाम हो जाने के बाद जयपुर राजस्थान इंडिया तो थोड़ा भाई

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Divya

Digital media journalist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आमिर जिंदगी का सबसे डरावना समेथा साल 2014 में जब मैं श्रीनगर गई थी सितंबर के महीने में अपने दोस्तों के साथ वहां पर उससे बहुत ही भयंकर बाढ़ आई थी और हम लोग जो छोटे में रह रहे थे अचानक हमको यह बोला गया कि हम उसको टेल से अपनी कल नहीं पाएंगे क्योंकि होटल के बेसमेंट ग्राउंड फ्लोर यहां तक की सोच लो तक पानी भरना शुरू हो गया था तो हम सब को बहुत डर लग रहा था कि हम क्या करेंगे और ऐसे लग रहा था कि शायद पता नहीं यहां से जिंदा बचकर बाहर निकल पाएंगे या नहीं हम लोग इसी तरह ऐसी हालत में हमने ऐसे तीन राते वहां गुजारी और तीसरे दिन तक तो हालत ऐसी हो गई थी कि कुछ खाने को भी नहीं था तो बहुत ही मुश्किल था बिल्कुल भी कनेक्टिविटी इंटरनेट किया फोन की कुछ भी नहीं थी अपने परिवार वालों से टच में नहीं थे ऐसे लग रहा था कि हम दुनिया के किसी और कोने में अलग कहीं कैद हो गए हैं रात रात हमको लोगों की आवाजें आती थी जो कि बचाओ या कुछ और ऐसे बोल रहे होते थे तो बहुत एक जिसको बोलते इंटरनली डर बैठ गया था मम्मी फाइनली 3 दिनों के बाद एक आर्मी हेलीकॉप्टर आया जिसमें हमारा नंबर आया हमको रेस्क्यू करने के लिए और वहां भी मतलब जब उन्होंने नीचे वह शिरडी साईं की जो रस्सी वाली सीरीज सर में ऊपर उस हेलीकॉप्टर में आना था उस सीढ़ी पर चढ़ने के लिए भी लोगों के बीच में लड़ाई होना शुरू हो गई तो बहुत मुश्किल से अपना चांस निकालकर हम वहां से एअरलिफ्ट हुए और वापस घर पहुंचे तो मुझे लगता है कि मेरी जिंदगी का सबसे डरावना समय जब मुझे लगता है कि मैं फेस टू फेस टू फेस टू फेस आई थी वह यह था

aamir zindagi ka sabse daravna sametha saal 2014 mein jab main srinagar gayi thi september ke mahine mein apne doston ke saath wahan par usse bahut hi bhayankar baadh I thi aur hum log jo chote mein reh rahe the achanak hamko yah bola gaya ki hum usko tell se apni kal nahi payenge kyonki hotel ke Basement ground floor yahan tak ki soch lo tak paani bharna shuru ho gaya tha toh hum sab ko bahut dar lag raha tha ki hum kya karenge aur aise lag raha tha ki shayad pata nahi yahan se zinda bachakar bahar nikal payenge ya nahi hum log isi tarah aisi halat mein humne aise teen rate wahan gujari aur teesre din tak toh halat aisi ho gayi thi ki kuch khane ko bhi nahi tha toh bahut hi mushkil tha bilkul bhi connectivity internet kiya phone ki kuch bhi nahi thi apne parivar walon se touch mein nahi the aise lag raha tha ki hum duniya ke kisi aur kone mein alag kahin kaid ho gaye hain raat raat hamko logo ki avajen aati thi jo ki bachao ya kuch aur aise bol rahe hote the toh bahut ek jisko bolte intaranali dar baith gaya tha mummy finally 3 dino ke baad ek army helicopter aaya jisme hamara number aaya hamko rescue karne ke liye aur wahan bhi matlab jab unhone niche vaah shirdi sai ki jo rassi wali series sir mein upar us helicopter mein aana tha us sidhi par chadhne ke liye bhi logo ke beech mein ladai hona shuru ho gayi toh bahut mushkil se apna chance nikalakar hum wahan se earalift hue aur wapas ghar pahuche toh mujhe lagta hai ki meri zindagi ka sabse daravna samay jab mujhe lagta hai ki main face to face to face to face I thi vaah yah tha

आमिर जिंदगी का सबसे डरावना समेथा साल 2014 में जब मैं श्रीनगर गई थी सितंबर के महीने में अपन

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Kavita

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सबकी जिंदगी में जो होता है ऐसा समय आता है जब हमें हकीकत के कुछ ऐसे पहलू के साथ अपना कंसंट्रेशन करना पड़ता है जो कि हमारे लिए बहुत ज्यादा मुश्किल हो जाता है तो ऐसा ही जो पेज है सबकी जिंदगी में आया होता है और मेरी जिंदगी में भी आ चुका है और इंशाल्लाह करे आगे यह दो-तीन साल पहले की बात है जब मेरे दादाजी जो है कैंसर से पीड़ित थे और बड़ी-बड़ी जो है उनकी हालत हो चुकी थी शरीर की देखने में जो उनको अगर क्या मैं बताऊं अब ऐसे दर्द भरे आसार को शेयर करना भी थोड़ा जो है मुश्किल हो जाता है तो उनको रोज देखना मरते हुए देखना दर्द में कराते हुए देखना यह जो चीजें हैं जब पर्सन मुझे मुझे अंदर से बहुत मिस किया और यह मेरी रियल लाइफ के खिलाफ जो है कितनी ज्यादा पर जाहिल है कि आप कोशिश करते हो अपनी जिंदगी में सब कुछ संजो कर रखने की कोशिश करते हो क्या पैसे बना पाऊं कोशिशें लगातार होती रहती है लेकिन हम जिंदगी में जिंदगी का असली जो मजा है हम इन चीजों में भूल जाते हैं आखिर में जब हमारे पास कुछ कुछ घंटे रहते हैं कुछ वक़्त रहता है तब हम सोचते हैं कि हमने पूरी जिंदगी जिंदगी जो को का कोशिश करने की कोशिश की वह हमें मिला नहीं और हमने ज़िंदगी को जो है जी नहीं पाए तो हर मेरे ग्रैंडफादर जी आप ऐसे नहीं थे मेरे ग्रैंडफादर जी बड़े बड़े दिल खोल इंसान तब से बहुत ज्यादा प्यार करती थी और मेरे ग्रैंडफादर है इसलिए मैं यह अच्छी बातें नहीं कर रही हूं कि वह बोली में थे वह आर्मी में थे और उन्हें देश की सेवा की हमारी सेवा की अच्छी लाइफ उन्होंने जी

sabki zindagi mein jo hota hai aisa samay aata hai jab hamein haqiqat ke kuch aise pahaloo ke saath apna kansantreshan karna padta hai jo ki hamare liye bahut zyada mushkil ho jata hai toh aisa hi jo page hai sabki zindagi mein aaya hota hai aur meri zindagi mein bhi aa chuka hai aur inshallah kare aage yah do teen saal pehle ki baat hai jab mere dadaji jo hai cancer se peedit the aur badi badi jo hai unki halat ho chuki thi sharir ki dekhne mein jo unko agar kya main bataun ab aise dard bhare aasaar ko share karna bhi thoda jo hai mushkil ho jata hai toh unko roj dekhna marte hue dekhna dard mein karate hue dekhna yah jo cheezen hain jab person mujhe mujhe andar se bahut miss kiya aur yah meri real life ke khilaf jo hai kitni zyada par jaahil hai ki aap koshish karte ho apni zindagi mein sab kuch sanjo kar rakhne ki koshish karte ho kya paise bana paun koshishein lagatar hoti rehti hai lekin hum zindagi mein zindagi ka asli jo maza hai hum in chijon mein bhool jaate hain aakhir mein jab hamare paas kuch kuch ghante rehte hain kuch waqt rehta hai tab hum sochte hain ki humne puri zindagi zindagi jo ko ka koshish karne ki koshish ki vaah hamein mila nahi aur humne zindagi ko jo hai ji nahi paye toh har mere grand father ji aap aise nahi the mere grand father ji bade bade dil khol insaan tab se bahut zyada pyar karti thi aur mere grand father hai isliye main yah achi batein nahi kar rahi hoon ki vaah boli mein the vaah army mein the aur unhe desh ki seva ki hamari seva ki achi life unhone ji

सबकी जिंदगी में जो होता है ऐसा समय आता है जब हमें हकीकत के कुछ ऐसे पहलू के साथ अपना कंसंट्

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Neha

Journalist , Writer

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Snehasish Gupta

Journalist / Traveller

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हां जी आज तक का मेरा जोश में डराना सहारा समय रहा है वह कि मैं बचपन में क्लास हमें बचपन में मतलब मैं क्लास सिक्स सेवेन में था तो मेरे ऊपर वह घर पर नहीं तो मैं घर में अकेला था और उसे मेरा घर में अकेले थे तो करंट चल जाती है बिजली जाने का वजह से पूरा अंधेरा हुआ था घर में इन्वर्टर भी नहीं था तो मैं पूरा एक घंटा अंधेरा में था वह मेरे लिए सबसे डरावना सबसे डरावना समय था क्योंकि मुझे अंधेरा से बहुत डर लगता है

haan ji aaj tak ka mera josh mein darana sahara samay raha hai vaah ki main bachpan mein class hamein bachpan mein matlab main class six seven mein tha toh mere upar vaah ghar par nahi toh main ghar mein akela tha aur use mera ghar mein akele the toh current chal jaati hai bijli jaane ka wajah se pura andhera hua tha ghar mein inverter bhi nahi tha toh main pura ek ghanta andhera mein tha vaah mere liye sabse daravna sabse daravna samay tha kyonki mujhe andhera se bahut dar lagta hai

हां जी आज तक का मेरा जोश में डराना सहारा समय रहा है वह कि मैं बचपन में क्लास हमें बचपन में

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Mohini

Voice Artist

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