पूर्व मनुष्य गुफा के दीवारों पर पेंट और चित्रकारी क्यों करते थे?...


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Deepak Sahani

स्वच्छंद कलाकार Freelance Artist

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Raghuveer Singh

Career Counselor

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जी नमस्कार अपनी बड़ा ही अच्छा प्रश्न किया है बड़ी खुशी की बात है हम में भी जो है यह चीजें एक नए रूप में आ सुनने को मिल रहा है एक जिज्ञासा भी पैदा हो रही है इसको जानने की और जहां तक हमें लगता है कि इस चीज के पीछे यह कारण जाता है कि लोग लोगों को रहने के लिए कोई स्थान नहीं था तो गुफाएं ही जो है रहने के लिए उनके लिए एक मात्र स्थान था के साथ-साथ क्या है कि अब हर एक मनुष्य शायद उनकी भी समय उनके सोचने समझने की शक्ति कैसी रही होगी हमें नहीं पता लेकिन उनके पास कुछ चीजें ऐसी तो नहीं थी लेकिन उस समय रखते हैं पत्थरों के ऐसे दोस्त हैं और जार ग्रुप में थे तो उन्होंने किया है कि उनके मन में उन्हें मौजूद उनके मन मस्तिष्क में जो चीज हैं उनके साथ घटित हो रही थी यहां चल रही थी ना वह जिस चीज को देख पा रहे थे वह उस चीज को करने का प्रयास करते थे वह तो वह माध्यम तेरे पीछे समय बदलता गया जब वह धीरे-धीरे उनका रहन-सहन सारी चीजें हैं डेवलप्ड हो गई होती गई उसमें ड्राइंग के माध्यम है याहू करने का माध्यम अंगूठी चेंज होता गया कहीं गए थे आपको कलर की थी वह देखने को मिलते हैं वह जैसी कि भीमबेटका में भी छुए आप को लड़ाया सितार के दृश्य देखने ढोल बजाते हुए देखने को मिलते हैं उसमें पीरु रंग लगाए गए हैं और कहीं यह मात्र का जो है लाइन देखने को मिलती है पत्थरों में यह कारण है अपने भावों को मुझे में अभिव्यक्ति का माध्यम से उनका लाइनों के ना आया कोई भी चित्र दुआ करना वहां पर चीजों को दर्शाते थे रेखाओं के माध्यम से पत्रों में फिर भी जितना स्टेज पर मुझे और अच्छा और अच्छा उत्तर मिल पाएगा तो मैं आपको देने का प्रयास करूंगा धन्यवाद

ji namaskar apni bada hi accha prashna kiya hai badi khushi ki baat hai hum me bhi jo hai yah cheezen ek naye roop me aa sunne ko mil raha hai ek jigyasa bhi paida ho rahi hai isko jaanne ki aur jaha tak hamein lagta hai ki is cheez ke peeche yah karan jata hai ki log logo ko rehne ke liye koi sthan nahi tha toh gufayen hi jo hai rehne ke liye unke liye ek matra sthan tha ke saath saath kya hai ki ab har ek manushya shayad unki bhi samay unke sochne samjhne ki shakti kaisi rahi hogi hamein nahi pata lekin unke paas kuch cheezen aisi toh nahi thi lekin us samay rakhte hain pattharon ke aise dost hain aur jar group me the toh unhone kiya hai ki unke man me unhe maujud unke man mastishk me jo cheez hain unke saath ghatit ho rahi thi yahan chal rahi thi na vaah jis cheez ko dekh paa rahe the vaah us cheez ko karne ka prayas karte the vaah toh vaah madhyam tere peeche samay badalta gaya jab vaah dhire dhire unka rahan sahan saari cheezen hain developed ho gayi hoti gayi usme drying ke madhyam hai yahoo karne ka madhyam anguthi change hota gaya kahin gaye the aapko color ki thi vaah dekhne ko milte hain vaah jaisi ki bhimbetaka me bhi chuye aap ko ladaya sitar ke drishya dekhne dhol bajaate hue dekhne ko milte hain usme piru rang lagaye gaye hain aur kahin yah matra ka jo hai line dekhne ko milti hai pattharon me yah karan hai apne bhavon ko mujhe me abhivyakti ka madhyam se unka lineon ke na aaya koi bhi chitra dua karna wahan par chijon ko darshate the rekhaon ke madhyam se patron me phir bhi jitna stage par mujhe aur accha aur accha uttar mil payega toh main aapko dene ka prayas karunga dhanyavad

जी नमस्कार अपनी बड़ा ही अच्छा प्रश्न किया है बड़ी खुशी की बात है हम में भी जो है यह चीजें

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Kavita

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

विकी पूर्व मनुष्य की है गुफा यह दीवारों पर पेंट किया चित्रकारी करते थे क्योंकि उस वक्त उनके पास भाषा का कोई जो है ज्ञान नहीं था एक भाषा है हमारे पास हम अपने एक्सप्रेशन वगैरह से समझा पा रहे हैं इन सब के बारे में आज सोच लीजिए आज से 100000 साल पहले जो जो मां आदिमानव होती थी वह जो है उनके पास कम्युनिकेट करने का क्या जरिया है आज तो हमारे पास भाषा है हम समझा सकते हैं लोगों को अगर हमारा भाषा है भी नहीं तुम देख के समझा सकते हैं या उनको हाथ के दर्शन को समझा सकते हैं उनको समझाना है यह चीज से भी नहीं पता था धीरे-धीरे पत्ताया कोई जानवर का चित्र बना दिया तो इससे लोगों को समझ आया कि खाने का समय है या उसको भूख लगा है ऐसा कुछ है एग्जांपल में आपको दे रही है ऐसे उनको कोई अस्त्र बनाना हो चाहे शिकार करने के लिए पुस्तकों का जो है वह बना लेते थे दीवारों पर तोता की इमेज है बिल्कुल दिमाग पर क्लियर आ जाए ऐसी इसी वजह से है वह चित्रकारी करते थे

vicky purv manushya ki hai gufa yah deewaaron par paint kiya chitrakari karte the kyonki us waqt unke paas bhasha ka koi jo hai gyaan nahi tha ek bhasha hai hamare paas hum apne expression vagera se samjha paa rahe hai in sab ke bare mein aaj soch lijiye aaj se 100000 saal pehle jo jo maa adimanav hoti thi vaah jo hai unke paas kamyuniket karne ka kya zariya hai aaj toh hamare paas bhasha hai hum samjha sakte hai logo ko agar hamara bhasha hai bhi nahi tum dekh ke samjha sakte hai ya unko hath ke darshan ko samjha sakte hai unko samajhana hai yah cheez se bhi nahi pata tha dhire dhire pattaya koi janwar ka chitra bana diya toh isse logo ko samajh aaya ki khane ka samay hai ya usko bhukh laga hai aisa kuch hai example mein aapko de rahi hai aise unko koi astra banana ho chahen shikaar karne ke liye pustakon ka jo hai vaah bana lete the deewaaron par tota ki image hai bilkul dimag par clear aa jaaye aisi isi wajah se hai vaah chitrakari karte the

विकी पूर्व मनुष्य की है गुफा यह दीवारों पर पेंट किया चित्रकारी करते थे क्योंकि उस वक्त उनक

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Dilsh Sheikh

Journalist

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Snehasish Gupta

Journalist / Traveller

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