फोबिया की बीमारी  को दिमाग से कैसे निकाले?...


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आचार्य सुशील मिश्र

आध्यात्मिक गुरु

9:57
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बहुत ही महत्वपूर्ण जिज्ञासा है फोबिया की बीमारी को दिमाग से कैसे निकाले वो क्या कहते हैं एक मनोविकार एक ऐसी मानसिक बीमारी जिसमें मनुष्य किसी विशेष व्यक्ति वस्तु दशा परिस्थिति में डरता है किसी को जल्द से डर लगता है किसी को चाय से डर लगता है किसी को किसी विशेष तरह की स्थिति पर दिल से डर लगता है किसी को अंधेरे से डर लगता है सबसे पहले हमें कि जानना होगा कि आदमी डरता क्यों है यह डर लगता क्यों है प्रकृति लेना डर के रूप में एक महत्वपूर्ण टूल्स दिया है मनुष्य को शस्त्र दिया है कहीं ना कहीं मनुष्य के लोहार को अनुशासित करने में भी प्रकृति का टूल्स है राज्य दंड के रूप में पाप पुण्य की अवधारणा के रूप में स्वर्ग नरक की अवधारणा के रूप में अच्छे-बुरे कर्मों के फल के रूप में शास्त्रों में विद्यार्थियों ने कथा कहानियों की 100 में डर को प्रोजेक्ट किया गया सम्मानित यह डर लगता है जब हम सत्य से अनभिज्ञ होते हैं जब हमें यह लगता है कि इस व्यक्ति वस्तु स्थान से हमें अहित हो जाएगा और वह कहीं गहरे बैठ जाता है हमारे अवचेतन मन में तो जब भी उपस्थित की होती है डर लगता है एक बच्चा यदि बचपन में अंधेरे से डर रहा है और उस समय उसके उस डर का निराकरण नहीं किया गया तो डरता रहेगा किसी अजनबी के आने से घर में कि कोई अहित हुआ हो और उस डर को विधिवत तरीके से निकाला ना गया हो तो बच्चा जब बड़ा हो जाएगा तो हर अजनबी से डरेगा कुछ लोग जोर की आवाज से डरने लगते हैं कुछ लोग पटाखे के शोर से डरने लगते हैं जब भी मनुष्य को ऐसा लगता है कि वह प्रश्न प्रश्न परिस्थिति सृजित हो रही है या वह विषय वस्तु उसके आसपास है जिससे वह कभी डरा था जिसने डराया था तो वह सहज हो जाता है एक चोरी की घटना हुई चोर पकड़े नहीं गए दूसरे मोहल्ले में चोरी हुई चोर पकड़े नहीं गए अब हमारे मोहल्ले में चोरी हो हुई है या कुछ अनवांटेड लोग देखे गए हैं कुछ टर्न जब देखे गए हैं तो पूरे मोहल्ले में दलीय फोबिया नहीं है यह डर है स्थिति जन्म लिखित अभी तक रहेगा जब तक कि चोर पकड़े नहीं जाते तू जिस भी जीवन में जिस भी मनुष्य के जीवन में एक ऐसा डरा गया है जिसका रूट कॉस पकड़ में नहीं आ रहा है और जब तक पकड़ में नहीं आएगा तब तक वो डरेगा उपाय हैं उस डर को समूल निकालना तो कैसे निकालना है भाई को निर्भयता से ही दूर किया जा सकता है 2 उपाय भय को दूर करने के लिए शास्त्र सम्मत उपाय हैं भगवान ने गीता में कहा है तस्मात् शास्त्र प्रमाण का कार्यकाल व्यक्ति शास्त्र प्रमाण है कि तुझे क्या करना है क्या नहीं करना है शास्त्र में बताया गया है डरना है किस से डरना है यह बताया कि बुरे कर्मों से लड़ना है और किस से नहीं डरना है यह भी बताया गया वस्तु स्थिति को जानने में हमें ध्यान देना होगा जिस परिस्थिति वस्तु व्यक्ति विशेष से डर लगता है उसको जान लो थोड़ा सा लंबा कार्य है उस व्यक्ति की उस वस्तु की उस परिस्थिति की प्रतीक्षा करो पहले तो किसी को डर लगता है तो अंधेरे से लगता हो तो पहले मेरे का प्रतीक्षा करो अंधेरे की और अंधेरे की परिस्थिति में उस व्यक्ति को डालो और बताओ तो देखो तुम्हें कुछ नहीं होता तो किधर तो पहले से है ना उसमें लड़की में थोड़ा समय लगेगा और वीर कहते हैं पुराण कहते हैं भागवत कहती है भगवत गीता कहती है कि देखो तो छोड़ दो परिस्थितियों को अपने आप को जान लो 100 को चालू वेदर संसार से लगता है ना संसारी किसी वस्तु व्यक्ति दशा से लगता है ना तो तुम संसार को छोड़ो तुम सुनो तुम कौन जीता परीक्षित ने किया गांव अर्जुन ने किया यही नचिकेता ने किया यही दोस्त ने किया यही ध्रुव ने यही पिला दे दिया यही हमारी ऋषि सनातन परंपरा रही है इसीलिए लोग भागवत सुनते हैं इसीलिए लोग गुरु पुराण सुनते हैं इसीलिए लोग गीता सुनते हैं जो सबसे मार्ग है और मैं आपको भी यही परामर्श दूंगा कि आप स्वयं को जानो दर तब तक लगेगा जब तक आपने स्वयं की असीम सत्ता को नहीं जाना जब पिंडे तत ब्रह्मांडे जो कुछ भी तुम बाहर देख रहे हो सब तुम्हारे भीतर है वह भी तुम्हारे प्रकाश का भाव ही अंधेरा है सर से डर रहे हो तुम्हारे गीता जो कुंडलिनी बैठी हुई है ना नीचे करके उसको जान लोगे तो तुम्हारी तुम्हें तो किसी क्या करेगा सर पर भेजो तुम्हारे भीतर से ज्योतिपुंज है उससे पहले समझो अपने आज्ञा चक्र को जानो अपने दिव्य चेतन प्रकाश को जानो और इसको जानते ही तुम्हारा हर तरह का डर कहां वंश हो जाएगा पता ही नहीं चलेगा परीक्षित जैसा राजा भी डर रहा है एक ऋषि का श्राप पूरे कुल को भस्म कर देगा मैंने क्या कर डाला ऐसा क्या करूं जिससे मैं अपने पितरों को अपना कलंकित मुख्य नहीं दिखाओ और जैसे ही सुखदेव जैसे गुरु की शरण में आया भागवत श्रवण किया कसारा डर सारा संचय दूर हो गया वह कहता है मेरा सारा संसार दूर हो दूर हो गया उठता है कि मेरा अब मैं पूर्णता निर्भय हो गया हूं अभय प्राप्त कर गया हूं अर्जुन डर रहा है कितनी मारकाट होगी कितने मरेंगे बॉर्डर कर इस सोच को रुकवा सोच सोचकर उस परिणाम को वह भयभीत हो जाता है उसके अंग अंग शिथिल हो जाते हैं इधर के लक्षण और उसके कांपने लगे हैं सूख गए हैं और बाद में ज्ञान लेने के बाद कहता है नसों में स्मृति लखदातर प्रसाद आत्म चित्र स्थित असली कसम देकर इसे वचन का सबसे सरल मार्ग है कि हम अपने भीतर के डर को स्वयं को जानकर दूर करते हैं बाहर जो डर है वह एक वस्तु से डरना बंद करोगे दूसरी वस्तु का नाश किस मोहल्ले में बदमाश हैं और तुम बदमाशों से डरते हो तो एक बदमाश मरेगा दूसरा बदमाश पता हो जाएगा एक बदमाश को थोड़ी पर किया जाएगा दूसरा बदमाश आ जाएगा तुम्हें अपनी सत्ता पता चल गई कि तुम्हारे एक फोन कॉल पर पुलिस वाले आकर खड़े हो जाते हैं तुमने कैसे स्नेह से अपना संबंध जोड़ लिया तो अब तो वह बदमाश जरा आता था वह भी आकर तुम्हें सलामी टूटेगा जिस दिन तुमने अपने चेतन ब्रह्म से जो तुम्हारे भीतर बैठा है बासुदेव रूप से उसके अपना नाता जोड़ना शुरु किया जो संत महात्मा करते हैं जो कंधों में जंगलों में बैठकर जो मनीषियों करते हैं वाली कह रहा हूं कि तुम पहले बार आकर ले लो और जाकर कंदरा में बैठ जाओ घर पर रहकर भगवत गीता सबसे चलो मर गया और मेरे अध्यात्मिक जीवन में न जाने कितने ऐसे लोग आए और प्रेत से डर रहा है कोई मरे हुए पितरों से डर रहा है कोई किसी की जिसमें सपने में कालसर्प के लक्षण दिखते हैं सब आते हैं सब रिश्ते हैं वह उससे डरता है कोई पानी से डरता है कौन सही से लड़ता है कोई अब अनवांटेड कुछ खोजना जाए उसके लिए डर रहा है और हर तरह के फोबिया हर तरह के डर को दूर करने का एक ही उपाय है स्वयं को जानो जानवी आओ सत्संग में आओ सत्कर्म करने की प्रवृत्ति रखो शातिर जीवन जीना शुरु करो अपने चारों और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बनाए रखो सब डर सब फोबिया दूर हो जाएगा आपका मंगल हो

bahut hi mahatvapurna jigyasa hai phobia ki bimari ko dimag se kaise nikale vo kya kehte hain ek manovikar ek aisi mansik bimari jisme manushya kisi vishesh vyakti vastu dasha paristhiti me darta hai kisi ko jald se dar lagta hai kisi ko chai se dar lagta hai kisi ko kisi vishesh tarah ki sthiti par dil se dar lagta hai kisi ko andhere se dar lagta hai sabse pehle hamein ki janana hoga ki aadmi darta kyon hai yah dar lagta kyon hai prakriti lena dar ke roop me ek mahatvapurna tools diya hai manushya ko shastra diya hai kahin na kahin manushya ke lohar ko anushasit karne me bhi prakriti ka tools hai rajya dand ke roop me paap punya ki avdharna ke roop me swarg narak ki avdharna ke roop me acche bure karmon ke fal ke roop me shastron me vidyarthiyon ne katha kahaniyan ki 100 me dar ko project kiya gaya sammanit yah dar lagta hai jab hum satya se anbhigya hote hain jab hamein yah lagta hai ki is vyakti vastu sthan se hamein ahit ho jaega aur vaah kahin gehre baith jata hai hamare 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