समाजशास्त्र की परिभाषा क्या होती है?...


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समाजशास्त्र की अलग-अलग समाज शास्त्रियों ने अलग-अलग परिभाषाएं दी है कुछ नहीं महा का है कि समाजशास्त्र अंतर अंतर क्रियाओं का विज्ञान है कुछ लोगों का मानना है कि समाजशास्त्र सामूहिक प्रतिनिधियों कलेक्टिव रिप्रेजेंटेशन का अध्ययन है लेकिन सबसे लोकप्रिय परिभाषा जो है समाजशास्त्र की वह मैकाइवर एवं पेज की है यह उनकी परिभाषा है एक लाइन की परिभाषा है समाज सामाजिक संबंधों का जाल है हम समाज में रहते तो हमारे अनेक प्रकार के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष संबंध बन जाते हैं तो चेक संबंध में आप एक प्रकार से देखिए तो किंशिप आती है रिश्तेदारी आती है हम किसी के चाचा लगते हैं मामा लगते कोई हमारा चाचा लगता है मामा लगता है इस प्रकार के लोग आते हैं कुछ लोगों से हमारे संबंध होते हैं जैसे मान लीजिए हमारे दर्जी से संबंध होते हैं दुकानदारों से संबंध होते हैं दूध वालों से संबंधों से यह कुछ जब संबंध होते कुछ संबंध अप्रत्यक्ष होते हैं जिनसे हम कभी मिले भी नहीं है लेकिन मानसिक रूप से हम अपना जुड़ाव से महसूस करते हैं जैसे कुछ लोग अमिताभ बच्चन से कुछ लोग जो है महेंद्र सिंह धोनी से विराट कोहली से या सचिन तेंदुलकर से कुछ लोग महान फुटबॉलर मेसी से या रोनाल्डो से अपने जुड़ाव महसूस कर तो यह कुछ अप्रत्यक्ष संबंध है यह सब समाजशास्त्र में संबंधी महत्वपूर्ण है और संबंधों को ही समाज शास्त्र की उचित परिभाषा इसलिए मानी गई है इस समाज अमूर्त है इसको हम देख नहीं सकते केवल महसूस कर सकते हैं तो समाज सामाजिक संबंधों का जाल है

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समाजशास्त्र की अलग-अलग समाज शास्त्रियों ने अलग-अलग परिभाषाएं दी है कुछ नहीं महा का है कि

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